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यूक्रेन–रूस संघर्ष के बीच भारत की कूटनीतिक भूमिका पर वैश्विक फोकस, शांति प्रयासों में बढ़ी अहमियत

नई दिल्ली: यूक्रेन–रूस युद्ध को लेकर जारी अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक भूमिका एक बार फिर वैश्विक चर्चा का विषय बनी हुई है। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की संतुलित विदेश नीति, दोनों देशों के साथ संवाद बनाए रखने की क्षमता और शांति स्थापित करने के प्रयासों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए हुए हैं और कूटनीतिक समाधान की दिशा में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। भारत ने शुरुआत से ही स्पष्ट किया है कि किसी भी विवाद का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत लगातार युद्ध समाप्त करने, मानवीय सहायता बढ़ाने और शांतिपूर्ण समाधान खोजने की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। विदेश मंत्रालय ने भी दोहराया है कि भारत का रुख शांति, अंतरराष्ट्रीय कानून और सभी देशों की संप्रभुता के सम्मान पर आधारित है। दोनों पक्षों से संवाद बनाए रखा भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक विशेषता यह रही है कि उसने रूस और यूक्रेन—दोनों के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर समय-समय पर दोनों देशों के नेताओं से बातचीत करते रहे हैं। भारत ने कई अवसरों पर यह भी कहा है कि वह किसी भी रचनात्मक शांति पहल का समर्थन करेगा, यदि दोनों पक्ष इसके लिए तैयार हों। मानवीय सहायता जारी युद्ध के दौरान भारत ने यूक्रेन को दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों और अन्य मानवीय सहायता की कई खेप भेजी हैं। इसके साथ ही युद्ध की शुरुआत में ऑपरेशन गंगा के माध्यम से हजारों भारतीय छात्रों को सुरक्षित वापस लाया गया था। सरकार का कहना है कि संकट की स्थिति में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहयोग उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका हाल के महीनों में G20, BRICS और अन्य बहुपक्षीय बैठकों में भारत ने वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को प्रमुखता से उठाया है। कई देशों ने माना है कि भारत की निष्पक्ष और संतुलित नीति अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। विश्लेषकों का कहना है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक नेतृत्व की भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आर्थिक और ऊर्जा हित भी महत्वपूर्ण भारत रूस से ऊर्जा आयात जारी रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी भी मजबूत कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों और वैश्विक कूटनीतिक संतुलन के बीच संतुलित नीति अपनाई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना भी हुई है। विशेषज्ञों की राय विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विश्वसनीयता इस बात से बढ़ी है कि उसने किसी भी पक्ष का खुला समर्थन करने के बजाय संवाद, शांति और कूटनीतिक समाधान पर लगातार जोर दिया। यदि भविष्य में शांति वार्ता आगे बढ़ती है, तो भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि फिलहाल किसी औपचारिक मध्यस्थता की घोषणा नहीं की गई है। निष्कर्ष यूक्रेन–रूस संघर्ष के बीच भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक संतुलन वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। संवाद, मानवीय सहायता और शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित भारत का रुख उसे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित कर रहा है। Source: Ministry of External Affairs (MEA) | Government of India जय राष्ट्र न्यूज़

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का दमदार प्रदर्शन जारी, बॉक्सिंग, एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग में पदकों की उम्मीद बरकरार

ग्लासगो: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। भारतीय दल ने वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स, पैरा स्पोर्ट्स और बॉक्सिंग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए पदक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत की है। कई भारतीय खिलाड़ी आज भी विभिन्न स्पर्धाओं में पदक जीतने की दौड़ में हैं, जिससे देश को और सफलता मिलने की उम्मीद है। भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में मीराबाई चानू का लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक शामिल है। इसके अलावा एथलेटिक्स और पैरा स्पोर्ट्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने कई पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। वेटलिफ्टिंग भारत के लिए इस बार भी सबसे सफल खेलों में शामिल रहा है। बॉक्सिंग में कई पदक लगभग तय भारतीय मुक्केबाज़ों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई वर्गों में सेमीफाइनल में जगह बनाई है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाले मुक्केबाज़ कम से कम कांस्य पदक सुनिश्चित कर लेते हैं। ऐसे में भारत के लिए बॉक्सिंग से कई पदकों की उम्मीद बनी हुई है। एथलेटिक्स में भी मजबूत चुनौती भारतीय एथलीट ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। लंबी दूरी की दौड़, हाई जंप और पैरा एथलेटिक्स में भारत पहले ही पदक जीत चुका है, जबकि कई खिलाड़ी आज फाइनल मुकाबलों में उतरेंगे। टीम प्रबंधन को उम्मीद है कि एथलेटिक्स से भी भारत के खाते में नए पदक जुड़ेंगे। पदक तालिका में भारत की स्थिति मजबूत अब तक भारत के खाते में कई स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक आ चुके हैं। भारतीय दल लगातार शीर्ष देशों के बीच अपनी स्थिति बेहतर करने का प्रयास कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी मजबूत टीमों के बीच भारत का प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। आगे भी रहेंगी पदक की उम्मीदें आने वाले मुकाबलों में भारत के खिलाड़ी— में चुनौती पेश करेंगे। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर संतोष जताते हुए विश्वास व्यक्त किया है कि खेलों के अंतिम चरण में भारत की पदक संख्या और बढ़ेगी। निष्कर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने एक बार फिर साबित किया है कि देश का खेल स्तर लगातार ऊंचा हो रहा है। वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स और बॉक्सिंग में शानदार प्रदर्शन ने भारत की पदक उम्मीदों को मजबूत किया है। खेलों के शेष मुकाबलों में भी भारतीय खिलाड़ियों से उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। Source: Indian Olympic Association (IOA) | Commonwealth Sport | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (EDF) के माध्यम से 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड (Electronics Development Fund – EDF) के माध्यम से देश के 128 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित उद्यमों में ₹1,335.77 करोड़ से अधिक का निवेश किया गया है। सरकार का कहना है कि यह पहल भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत तकनीकी निर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संचालित EDF एक Fund of Funds मॉडल पर कार्य करता है। यह सीधे स्टार्टअप्स में निवेश नहीं करता, बल्कि पेशेवर वेंचर कैपिटल और एंजेल फंड्स (Daughter Funds) के माध्यम से उभरती तकनीकी कंपनियों को पूंजी उपलब्ध कराता है। अब तक EDF ने आठ Daughter Funds में ₹257.77 करोड़ का निवेश किया है, जिन्होंने आगे 128 स्टार्टअप्स में ₹1,335.77 करोड़ का निवेश किया। उन्नत तकनीकी क्षेत्रों को मिला बढ़ावा सरकार के अनुसार EDF से समर्थित स्टार्टअप्स कई अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं, जिनमें— शामिल हैं। इन क्षेत्रों में घरेलू नवाचार को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है। रोजगार और नवाचार को बढ़ावा सरकार ने बताया कि EDF से समर्थित स्टार्टअप्स ने अब तक 23,600 से अधिक रोजगार सृजित किए हैं। इसके अलावा इन कंपनियों द्वारा 368 बौद्धिक संपदाएँ (Intellectual Properties – IPs) विकसित या अधिग्रहित की गई हैं। इससे भारत में घरेलू अनुसंधान, उत्पाद विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूती मिली है। कर्नाटक सबसे बड़ा लाभार्थी ताज़ा जानकारी के अनुसार EDF से समर्थित 128 कंपनियों में से 90 स्टार्टअप कर्नाटक में स्थित हैं। इससे स्पष्ट होता है कि बेंगलुरु और आसपास का क्षेत्र देश के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स और डीप-टेक इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है। सरकार का उद्देश्य अन्य राज्यों में भी इसी तरह का स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करना है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ को मिलेगी मजबूती विशेषज्ञों का मानना है कि EDF के माध्यम से हो रहा निवेश Make in India, Digital India और Atmanirbhar Bharat अभियानों को नई गति देगा। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में बढ़ते निवेश से आयात पर निर्भरता कम होगी, घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और वैश्विक कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा। सरकार का लक्ष्य सरकार ने कहा कि आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और उभरती तकनीकों में निवेश को और बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत को केवल उपभोक्ता बाजार नहीं बल्कि वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स नवाचार और निर्माण केंद्र बनाना है। इसके लिए निजी निवेश, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। निष्कर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड के माध्यम से 128 स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से देश में नवाचार, रोजगार और उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण को नई गति मिलेगी तथा भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा. Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट फंड के तहत 128 टेक स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक निवेश की जानकारी दी

Category: राजनीति / टेक्नोलॉजी / बिज़नेस यह खबर आज सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से प्रमुखता से सामने आई और देश में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार ने बताया कि Electronics Development Fund (EDF) के माध्यम से अब तक 128 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स में ₹1,335 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा चुका है। इसका उद्देश्य भारत को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन, डीप टेक, AI और हार्डवेयर इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाना है। सरकार के अनुसार यह निवेश केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टार्टअप्स को अनुसंधान, नवाचार, प्रोटोटाइप विकास और वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने में भी मदद करेगा। इससे देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को गति मिलेगी। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि भारत में चिप डिज़ाइन, एम्बेडेड सिस्टम, मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा तकनीक और AI आधारित उत्पादों पर तेजी से काम हो रहा है। EDF के जरिए इन क्षेत्रों में कार्यरत स्टार्टअप्स को पूंजी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियानों को मजबूत करेगी। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण लगातार बढ़ रहा है और सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन का प्रमुख केंद्र बनाना है। उद्योग जगत ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि शुरुआती चरण के टेक स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में EDF जैसी योजनाएं नवाचार को प्रोत्साहित करेंगी और भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगी। सरकार ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में उभरती प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित निवेश को और बढ़ाया जाएगा ताकि भारत हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इनोवेशन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सके। Source: Ministry of Electronics & Information Technology (MeitY) | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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लोकसभा ने एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पारित किया, सार्वजनिक परीक्षाओं में धोखाधड़ी रोकने के लिए सख्त प्रावधान लागू

नई दिल्ली: लोकसभा ने आज लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 (Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026) को पारित कर दिया। यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी और तकनीक के दुरुपयोग पर पहले से अधिक कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विधेयक को ध्वनिमत (Voice Vote) से पारित किया गया। चर्चा के दौरान सरकार ने कहा कि हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए पेपर लीक मामलों ने लाखों छात्रों का विश्वास प्रभावित किया है। ऐसे में केवल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा प्रणाली को कानूनी और तकनीकी रूप से अधिक मजबूत बनाना भी आवश्यक है। विपक्ष ने भी परीक्षा सुधार की आवश्यकता स्वीकार की, हालांकि उसने प्रशासनिक जवाबदेही और संस्थागत सुधारों पर अधिक ध्यान देने की मांग की। विधेयक की प्रमुख विशेषताएँ संशोधन विधेयक में परीक्षा से जुड़े अपराधों पर पहले की तुलना में अधिक कठोर प्रावधान किए गए हैं। सरकार का पक्ष सरकार ने कहा कि यह संशोधन छात्रों के हितों की रक्षा करेगा और सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करेगा। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में कहा कि नया कानून केवल दंडात्मक नहीं बल्कि निवारक (Preventive) दृष्टिकोण भी अपनाता है, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। विपक्ष की आपत्तियाँ विपक्षी सांसदों ने बहस के दौरान कहा कि कानून सख्त होना जरूरी है, लेकिन केवल कानून बना देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक जवाबदेही, डिजिटल सुरक्षा और पारदर्शी परीक्षा प्रक्रिया को समान महत्व देने की आवश्यकता बताई। कुछ सांसदों ने इसे “राजनीतिक नुकसान की भरपाई का प्रयास” बताते हुए व्यापक शिक्षा सुधारों की मांग भी उठाई। छात्रों पर प्रभाव देशभर में करोड़ों छात्र विभिन्न सरकारी भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में भाग लेते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस कानून का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया तो पेपर लीक और संगठित परीक्षा धोखाधड़ी पर अंकुश लगेगा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्रों का विश्वास मजबूत होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी सुरक्षा, साइबर मॉनिटरिंग और स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था को समान रूप से मजबूत करना आवश्यक होगा। आगे की प्रक्रिया लोकसभा से पारित होने के बाद विधेयक को संसद की शेष विधायी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद अधिसूचना जारी होने पर संशोधित प्रावधान लागू किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे सार्वजनिक परीक्षाओं में निष्पक्षता सुनिश्चित करने और संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण में मदद मिलेगी। निष्कर्ष लोकसभा द्वारा एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक पारित किया जाना भारत की परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती इस कानून का प्रभावी और निष्पक्ष क्रियान्वयन होगी, ताकि लाखों छात्रों को एक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली मिल सके। Source: Parliament of India | Press Information Bureau (PIB) | Ministry of Personnel, Public Grievances & Pensions जय राष्ट्र न्यूज़

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NEET PG 2026 आवेदन सुधार (Correction Window) बंद, चयनित इमेज सुधार का अगला चरण 31 जुलाई से

नई दिल्ली: राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBEMS) ने NEET PG 2026 के लिए आवेदन सुधार (Correction Window) प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार समाप्त कर दी है। जिन अभ्यर्थियों ने आवेदन पत्र में आवश्यक संशोधन करने थे, उनके लिए यह अंतिम अवसर था। अब सामान्य आवेदन विवरण में किसी प्रकार का बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। NBEMS के अनुसार जिन उम्मीदवारों ने सफलतापूर्वक आवेदन किया है, उनके फॉर्म का सत्यापन किया जाएगा। यदि किसी आवेदन में त्रुटि या आवश्यक दस्तावेजों में कमी पाई जाती है, तो निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अपने आवेदन की स्थिति नियमित रूप से आधिकारिक पोर्टल पर जांचते रहें। 31 जुलाई से खुलेगी Selective Edit Window NBEMS ने स्पष्ट किया है कि 31 जुलाई से 10 अगस्त 2026 तक केवल फोटो, हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान (Thumb Impression) जैसी इमेज संबंधी त्रुटियों को सुधारने के लिए अलग Selective Edit Window उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवधि में व्यक्तिगत जानकारी या अन्य आवेदन विवरण में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। इन विवरणों में बदलाव की अनुमति नहीं थी सुधार प्रक्रिया के दौरान भी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियों में संशोधन की अनुमति नहीं दी गई थी, जिनमें शामिल हैं— NBEMS ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इन जानकारियों को अंतिम माना जाएगा। आगे की प्रक्रिया NBEMS द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार— उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और NBEMS की सूचनाओं पर भरोसा करें तथा किसी भी अपुष्ट जानकारी से बचें। छात्रों के लिए सलाह विशेषज्ञों का कहना है कि जिन अभ्यर्थियों की इमेज में कोई त्रुटि है, वे Selective Edit Window खुलते ही आवश्यक संशोधन कर दें। निर्धारित समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार का अतिरिक्त अवसर उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। साथ ही उम्मीदवारों को परीक्षा से संबंधित सभी आगामी अपडेट समय-समय पर आधिकारिक पोर्टल से प्राप्त करते रहना चाहिए। निष्कर्ष NEET PG 2026 की सामान्य आवेदन सुधार प्रक्रिया अब समाप्त हो चुकी है। अब अभ्यर्थियों का ध्यान Selective Edit Window, City Intimation Slip और आगामी प्रवेश परीक्षा की तैयारी पर रहेगा। NBEMS ने सभी उम्मीदवारों से आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने और समय पर आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी करने की अपील की है। Source: National Board of Examinations in Medical Sciences (NBEMS) | National Medical Commission (NMC) जय राष्ट्र न्यूज़

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RBI की पॉलिमर (प्लास्टिक) करेंसी नोट योजना चर्चा में, डिजिटल भुगतान और नई मुद्रा तकनीक पर फोकस

नई दिल्ली: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की पॉलिमर (प्लास्टिक) बैंकनोट योजना एक बार फिर चर्चा में है। केंद्र सरकार ने RBI के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल की अनुमति दी है। इस पहल का उद्देश्य नई मुद्रा तकनीक की उपयोगिता, टिकाऊपन और सुरक्षा का परीक्षण करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागज़ के नोटों को पूरी तरह हटाने की कोई योजना नहीं है। सरकार के अनुसार शुरुआती चरण में ₹10 और ₹20 के 100-100 करोड़ (कुल 200 करोड़) पॉलिमर नोट परीक्षण के लिए जारी किए जाएंगे। इन नोटों का उपयोग अलग-अलग जलवायु और परिस्थितियों में उनकी गुणवत्ता, टिकाऊपन और सुरक्षा विशेषताओं का आकलन करने के लिए किया जाएगा। पॉलिमर नोट क्यों? RBI का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागज़ी नोटों की तुलना में कई मामलों में बेहतर साबित हो सकते हैं— दुनिया के कई देशों जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन में पॉलिमर नोट पहले से सफलतापूर्वक प्रचलन में हैं। डिजिटल भुगतान पर क्या असर पड़ेगा? हाल के वर्षों में भारत में UPI और अन्य डिजिटल भुगतान प्रणालियों का तेजी से विस्तार हुआ है। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि पॉलिमर नोटों का परीक्षण डिजिटल भुगतान का विकल्प नहीं, बल्कि नकद मुद्रा को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक तकनीकी कदम है। फील्ड ट्रायल के बाद ही इसके व्यापक प्रभाव का मूल्यांकन किया जाएगा। कागज़ी नोट जारी रहेंगे वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में स्पष्ट किया कि वर्तमान में कागज़ी नोटों को बंद करने या पूरी तरह पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है, तभी आगे नियमित जारी करने पर विचार किया जाएगा। आगे क्या होगा? फील्ड ट्रायल के दौरान RBI अलग-अलग क्षेत्रों में नोटों के उपयोग, टिकाऊपन, सुरक्षा और जनता की प्रतिक्रिया का अध्ययन करेगा। यदि परिणाम संतोषजनक रहे, तो भविष्य में अन्य मूल्यवर्गों में भी पॉलिमर नोट जारी करने पर विचार किया जा सकता है। निष्कर्ष RBI की पॉलिमर करेंसी योजना भारत की मुद्रा प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इसका उद्देश्य नकद लेन-देन को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक बनाना है। हालांकि डिजिटल भुगतान का विस्तार जारी रहेगा, लेकिन पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल भारतीय मुद्रा प्रणाली में नई तकनीक के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। Source: Reserve Bank of India (RBI) | Ministry of Finance | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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जापान में 7.1 तीव्रता के भूकंप के बाद राहत अभियान जारी, मृतकों की संख्या बढ़ी

टोक्यो: जापान के दक्षिण-पश्चिमी कुमामोटो प्रांत में आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। ताज़ा आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस आपदा में कम से कम 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। कई इमारतों, सड़कों और औद्योगिक परिसरों को भारी नुकसान पहुंचा है तथा हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। भूकंप के बाद सबसे अधिक नुकसान कशिमा स्थित एयॉन शॉपिंग मॉल में हुआ, जहां झटकों के बाद गैस विस्फोट होने से इमारत का एक हिस्सा ढह गया। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं। जापान सेल्फ डिफेंस फोर्स, दमकल विभाग और आपदा राहत एजेंसियों के हजारों जवान राहत कार्य में जुटे हुए हैं। बिजली, पानी और परिवहन प्रभावित भूकंप के कारण हजारों घरों की बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित हुई है। कई रेलवे सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी गई हैं, जबकि कुछ घरेलू उड़ानों को भी रद्द किया गया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। लगातार आ रहे हैं आफ्टरशॉक्स जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने चेतावनी दी है कि मुख्य भूकंप के बाद लगातार आफ्टरशॉक्स आ रहे हैं और आने वाले दिनों में भी तेज झटके महसूस किए जा सकते हैं। अधिकारियों ने भूस्खलन, कमजोर इमारतों के ढहने और अन्य संभावित जोखिमों को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उद्योगों पर भी पड़ा असर कुमामोटो क्षेत्र जापान का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र है। भूकंप के बाद टोयोटा, सोनी, टीएसएमसी, होंडा और अन्य बड़ी कंपनियों ने अपने कई संयंत्रों में उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है ताकि संरचनात्मक सुरक्षा का आकलन किया जा सके। इससे आपूर्ति श्रृंखला पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सरकार की प्रतिक्रिया जापान की प्रधानमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने आपदा प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी राहत शिविर, भोजन, चिकित्सा सहायता और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था बढ़ा दी है। प्रशासन ने कहा है कि जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक बचाव अभियान पूरी क्षमता के साथ जारी रहेगा। निष्कर्ष जापान में आए इस विनाशकारी भूकंप ने एक बार फिर देश की आपदा प्रबंधन क्षमता की कठिन परीक्षा ली है। राहत एवं बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, जबकि सरकार प्रभावित नागरिकों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने में जुटी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आफ्टरशॉक्स के खतरे को देखते हुए आने वाले कुछ दिन अत्यंत महत्वपूर्ण रहेंगे। Source: Japan Meteorological Agency (JMA) | Japan Fire and Disaster Management Agency | Government of Japan जय राष्ट्र न्यूज़

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IIT बॉम्बे के छात्र की हॉस्टल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, पुलिस ने जांच शुरू की

मुंबई: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के एक छात्र की हॉस्टल परिसर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और संस्थान के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और मृत्यु के कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार छात्र अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाया गया। सूचना मिलने पर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से अधिकारियों ने इनकार किया है और कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. IIT बॉम्बे प्रशासन ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए छात्र के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट की है। संस्थान ने कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है और कैंपस में छात्रों के लिए उपलब्ध परामर्श एवं सहायता सेवाओं को और मजबूत करने के प्रयास जारी रहेंगे. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले में सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है। फिलहाल किसी भी कारण को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अधिकारियों ने लोगों से अपुष्ट जानकारी और अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की है। शिक्षा जगत में इस घटना के बाद छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, परामर्श सेवाओं और संस्थानों में सहायता तंत्र को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में समय पर मनोवैज्ञानिक सहायता और संवाद की व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है। पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। Source: Mumbai Police | IIT Bombay जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी ने लोकसभा में छात्र आंदोलनों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर साधा निशाना, संसद में तीखी बहस

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के दौरान आज लोकसभा में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और हालिया छात्र आंदोलनों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों, कथित पेपर लीक मामलों और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सरकार को घेरते हुए कहा कि देश के युवाओं की आवाज़ को गंभीरता से सुनना आवश्यक है। उनके वक्तव्य के बाद सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली तथा कई बार हंगामे की स्थिति भी बनी। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने हाल के छात्र आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़ा है और उनकी चिंताओं को केवल कानून-व्यवस्था के मुद्दे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों और संस्थागत जवाबदेही की आवश्यकता पर भी जोर दिया। एंटी-पेपर लीक विधेयक पर भी हुई चर्चा संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सरकार ने कहा कि नया कानून पेपर लीक, संगठित नकल और परीक्षा धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। सरकार का दावा है कि इससे सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत होगी और छात्रों का विश्वास बढ़ेगा। दूसरी ओर विपक्ष ने कहा कि केवल कानून पर्याप्त नहीं है, बल्कि परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही और प्रशासनिक सुधार भी उतने ही आवश्यक हैं। सदन में बढ़ा राजनीतिक तापमान राहुल गांधी के भाषण के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक हुई। कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताई गई और सदन में शोर-शराबे के कारण कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई। बाद में अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद चर्चा आगे बढ़ी और विधेयक पर प्रक्रिया जारी रही। छात्रों के मुद्दे बने बहस का केंद्र बहस के दौरान परीक्षा सुधार, पेपर लीक रोकने की व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और छात्र आंदोलनों का मुद्दा प्रमुख रूप से छाया रहा। कई सांसदों ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक, सुरक्षित परीक्षा प्रणाली और समयबद्ध जांच व्यवस्था विकसित करना जरूरी है। शिक्षा सुधारों पर बढ़ा फोकस विशेषज्ञों का मानना है कि संसद में हुई यह चर्चा आने वाले समय में शिक्षा और परीक्षा सुधारों को नई दिशा दे सकती है। यदि प्रस्तावित सुधार प्रभावी ढंग से लागू किए जाते हैं, तो प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों का भरोसा मजबूत होगा। साथ ही डिजिटल सुरक्षा, संस्थागत जवाबदेही और समयबद्ध न्यायिक प्रक्रिया जैसे कदम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। निष्कर्ष लोकसभा में आज हुई बहस ने स्पष्ट कर दिया कि परीक्षा सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दे अब राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की बात कर रही है, जबकि विपक्ष व्यापक शिक्षा सुधारों और छात्रों की चिंताओं पर अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में इन सुधारों के क्रियान्वयन पर देशभर के छात्रों और अभिभावकों की नजर बनी रहेगी। Source: Parliament of India | Lok Sabha | Press Information Bureau (PIB) जय राष्ट्र न्यूज़

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