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ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ा! शांति वार्ता अटकने के बीच ईरान के ‘पूरी तरह आक्रामक’ रुख की रिपोर्ट

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते को लेकर चल रही बातचीत के अटकने के बीच ईरान ने अपना सैन्य रुख और ज्यादा आक्रामक करने के संकेत दिए हैं। एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने Reuters को बताया कि बातचीत रुकने के बाद ईरान ‘पूरी तरह आक्रामक’ सैन्य स्थिति अपना सकता है। सबसे ज्यादा चिंता रणनीतिक हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ सकता है। अमेरिका-ईरान वार्ता में इस जलमार्ग को दोबारा सामान्य रूप से खोलने का मुद्दा भी प्रमुख बना हुआ है। तनाव के बीच अमेरिका की ओर से भी सख्त रुख सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मौजूदा समझौते को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं दिखाई है। वहीं, ईरान ने संकेत दिया है कि अगर कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो वह सैन्य कार्रवाई को और तेज कर सकता है। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। मंगलवार को ब्रेंट क्रूड करीब 91.22 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि WTI भी 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता नजर आया। हॉर्मुज में संभावित आपूर्ति बाधित होने की आशंका तेल की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह बनी हुई है। तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से नुकसान पहुंचने की भी रिपोर्ट सामने आई है। घटना में चालक दल का एक सदस्य घायल हुआ, जिससे क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जल्द पटरी पर नहीं लौटती है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी, वैश्विक महंगाई और शेयर बाजारों में बढ़ी अस्थिरता देखने को मिल सकती है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर है। कूटनीतिक समाधान निकलता है या तनाव सैन्य टकराव की ओर बढ़ता है, आने वाले दिनों में यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। स्रोत: Reuters Jai Rashtra News

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भारत की हॉकी टीम पर बढ़ा दबाव! England से 2-4 की हार के बाद Pakistan के खिलाफ मुकाबला बेहद अहम

एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप 2026 में भारतीय हॉकी टीम को इंग्लैंड के खिलाफ 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। सोमवार को अम्स्टेलवीन में खेले गए पूल डी के मुकाबले में भारत ने पहले हाफ में 2-1 की बढ़त बना ली थी, लेकिन दूसरे हाफ में इंग्लैंड ने शानदार वापसी करते हुए लगातार तीन गोल दाग दिए। भारत के लिए कप्तान हरमनप्रीत सिंह और दिलप्रीत सिंह ने गोल किए। एक समय भारतीय टीम मजबूत स्थिति में नजर आ रही थी, लेकिन दूसरे हाफ में रक्षात्मक गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ा और इंग्लैंड ने मुकाबला अपने नाम कर लिया। इंग्लैंड के खिलाफ हार के बाद भारत की नजरें अब पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले बेहद अहम मुकाबले पर टिक गई हैं। यह मैच 19 अगस्त को खेला जाएगा और पूल डी में दोनों टीमों के लिए इसका परिणाम काफी महत्वपूर्ण होगा। भारत ने अपने अभियान की शुरुआत वेल्स के खिलाफ 3-1 की जीत के साथ की थी। इंग्लैंड से हार के बाद भारत के खाते में दो मैचों से तीन अंक हैं, जबकि इंग्लैंड दोनों मैच जीतकर अगले दौर में अपनी जगह पक्की कर चुका है। पाकिस्तान के खिलाफ भारत को कम से कम ड्रॉ की जरूरत है ताकि अगले दौर में पहुंचने की स्थिति मजबूत बनी रहे। वहीं, पाकिस्तान के लिए जीत बेहद जरूरी है, क्योंकि उसके पास दो मैचों से सिर्फ एक अंक है। ऐसे में भारत-पाकिस्तान मुकाबला दोनों टीमों के विश्व कप अभियान के लिए निर्णायक बन गया है। भारतीय टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने खिलाड़ियों से दबाव के बीच संयम बनाए रखने और रक्षात्मक अनुशासन पर ध्यान देने की अपील की है। इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार के बाद अब टीम के लिए पाकिस्तान के खिलाफ गलतियों से बचना बेहद जरूरी होगा। भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला यह मुकाबला सिर्फ पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों टीमों के लिए टूर्नामेंट में आगे बढ़ने की उम्मीदों से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में हॉकी प्रशंसकों की नजरें इस हाई-वोल्टेज मुकाबले पर टिकी हैं। स्रोत: Hockey India, NDTV, Times of India Jai Rashtra News

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मध्य प्रदेश में बड़ा सड़क हादसा, 8 मजदूरों की मौत और 32 लोग घायल

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में मंगलवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 32 लोग घायल हो गए। यह दुर्घटना भिंड-ग्वालियर नेशनल हाईवे-719 पर छीमका गांव के पास हुई, जहां मजदूरों से भरी पिकअप की सामने से आ रहे डंपर से जोरदार टक्कर हो गई। जानकारी के मुताबिक, हादसा सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे हुआ। पिकअप में सवार मजदूर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के रहने वाले थे और ग्वालियर में धान की रोपाई का काम पूरा करने के बाद अपने गांव लौट रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हाईवे पर गायों का झुंड आ जाने के बाद उन्हें बचाने की कोशिश में पिकअप अनियंत्रित हो गई और सामने से आ रहे डंपर से भिड़ गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को गोहद अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है। हादसे के बाद मृतकों की पहचान और उनके परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया जारी है। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था और आवारा पशुओं की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से हादसे की विस्तृत जांच की जा रही है। स्रोत: NDTV, Deccan Chronicle Jai Rashtra News

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शेयर बाजार में गिरावट! कच्चा तेल $91 के पार पहुंचा, Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 250-300 अंक तक गिरा, जबकि निफ्टी 24,250 के स्तर से नीचे चला गया। बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रहा। ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम की अवधि खत्म होने और तनाव बढ़ने से वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। महंगा कच्चा तेल भारत के लिए खास तौर पर चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और महंगाई का जोखिम भी बढ़ सकता है। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 77,418.97 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 50 ने 24,223.85 के आसपास शुरुआत की। बाद में निफ्टी 24,177 के करीब आ गया और बाजार में गिरावट और गहरी हुई। आईटी शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर प्रमुख गिरने वाले क्षेत्रों में रहा। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कमजोर रुपया और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल आपूर्ति की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। अगर तेल की कीमतों में तेजी आगे भी जारी रहती है, तो भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख संकेत बने हुए हैं। स्रोत: Reuters, NDTV, IIFL Jai Rashtra News

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रुपया फिर फिसला! डॉलर के मुकाबले ₹95.67 तक पहुंचा, महंगे कच्चे तेल और ईरान तनाव का दबाव

भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में नजर आया है। मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर ₹95.67 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। रुपये में इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और इससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनता है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव देखने को मिल रहा है। रुपये की गिरावट को सीमित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बाजार में हस्तक्षेप किए जाने की भी खबर है। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर बनी हुई है। रुपये में लगातार कमजोरी का असर भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है। खासतौर पर कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। इससे आने वाले समय में महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि, कमजोर रुपये से निर्यात करने वाली कुछ कंपनियों को फायदा मिल सकता है, क्योंकि उन्हें विदेशी मुद्रा में होने वाली कमाई को रुपये में बदलने पर अधिक रकम प्राप्त होती है। फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर निर्भर करेगी। अगर तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो रुपये पर आगे भी दबाव देखने को मिल सकता है। स्रोत: Reuters Jai Rashtra News

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16 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने तोड़ा अनशन, सदर अस्पताल में खत्म हुई भूख हड़ताल

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना 16 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने रांची के सदर अस्पताल में सोमवार रात भूख हड़ताल खत्म की। सरकार के फैसले के बाद खत्म हुआ अनशन देवेंद्र नाथ महतो का अनशन उस समय समाप्त हुआ जब झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा और TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 17 अगस्त को घोषणा की कि TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं और उनसे जुड़े परिणामों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द किया जाएगा। साथ ही 2014 से TDPL के जरिए हुई परीक्षाओं की जांच का फैसला भी लिया गया। सदर अस्पताल में जूस पिलाकर अनशन खत्म अनशन खत्म कराने के दौरान झारखंड सरकार के मंत्री दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी सदर अस्पताल पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, देवेंद्र नाथ महतो ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान उनके साथ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी भूख हड़ताल समाप्त की। महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया। 16 दिनों तक जारी रहा संघर्ष देवेंद्र नाथ महतो ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की मांग को लेकर 16 दिनों तक भूख हड़ताल की। लंबे समय तक भोजन नहीं लेने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी समस्याओं को लेकर चिंता जताई थी। अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद महतो लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर जोर देते रहे। JSSC-CGL रद्द होने से छात्रों में खुशी सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों में खुशी देखी गई। JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने को छात्र नेताओं ने अपनी बड़ी जीत बताया है। हालांकि, आंदोलन पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं, इस पर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। CBI जांच की मांग अभी बाकी छात्र आंदोलन से जुड़े संगठनों की एक प्रमुख मांग CBI जांच की भी रही है। सरकार द्वारा परीक्षाएं रद्द किए जाने के बावजूद छात्र संगठनों के एक धड़े ने कहा है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रह सकता है। इसलिए परीक्षा रद्द होने के बाद भी झारखंड में भर्ती व्यवस्था और जांच को लेकर राजनीतिक एवं छात्र आंदोलन जारी रहने की संभावना है। अब आगे क्या होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रद्द की गई परीक्षाओं को दोबारा कब कराया जाएगा और नई परीक्षा व्यवस्था कैसी होगी। साथ ही, सरकार को उन अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था करनी होगी, जो पहले की चयन प्रक्रिया में सफल हुए थे। निष्कर्ष 16 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने रांची के सदर अस्पताल में अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह फैसला झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद आया। हालांकि, CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र आंदोलन का अगला रुख महत्वपूर्ण रहेगा। Source: Hindustan Times, Indian Express, Navbharat Times, Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

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नागालैंड के नन्हे रॉकस्टार ‘याटो’ ने जीता देशवासियों का दिल, राष्ट्रगान की आवाज ने मचाई धूम

नई दिल्ली: नागालैंड के महज 5 साल के याटो वांगनाओ इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनका ‘जन गण मन’ गाने का वीडियो वायरल हुआ, जिसे सुनकर देशभर के लोग उनकी मासूमियत, आत्मविश्वास और देशभक्ति की जमकर तारीफ कर रहे हैं। याटो के राष्ट्रगान ने मचाई धूम याटो का राष्ट्रगान गाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। छोटी सी उम्र में जिस आत्मविश्वास और भावनात्मक अंदाज में उन्होंने ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया, उसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। खास तौर पर राष्ट्रगान के अंतिम हिस्से ‘जय हे’ को जिस अंदाज में याटो ने गाया, उसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई। कई लोगों ने वीडियो को बार-बार देखने और सुनने की बात कही। आनंद महिंद्रा भी हुए प्रभावित याटो की प्रतिभा से प्रभावित होकर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने याटो की प्रस्तुति की तारीफ करते हुए नागालैंड की खूबसूरती और सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखा। महिंद्रा ने याटो के वीडियो को नागालैंड के लिए एक तरह का अनौपचारिक टूरिज्म प्रमोशन बताते हुए कहा कि इस छोटे बच्चे ने जिस तरह लोगों का ध्यान नागालैंड की ओर खींचा, वह बेहद खास है। छोटी उम्र, बड़ा आत्मविश्वास याटो की सबसे खास बात उनकी उम्र के मुकाबले उनका आत्मविश्वास है। महज पांच साल की उम्र में राष्ट्रगान को इस तरह पूरे जोश और भाव के साथ प्रस्तुत करना सोशल मीडिया यूजर्स को काफी पसंद आया। उनके वीडियो ने एक बार फिर दिखाया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में छिपी प्रतिभाएं किस तरह सोशल मीडिया के जरिए पूरे भारत तक पहुंच सकती हैं। नागालैंड की संस्कृति भी चर्चा में याटो की वायरल प्रस्तुति के साथ नागालैंड भी चर्चा में आ गया है। पूर्वोत्तर भारत की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। आनंद महिंद्रा की पोस्ट के बाद कई यूजर्स ने नागालैंड को अपनी Travel Bucket List में शामिल करने की बात कही। सोशल मीडिया पर मिल रहा प्यार याटो के वीडियो पर देशभर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोग उनकी आवाज, मासूमियत और देशभक्ति की भावना की तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने याटो को भविष्य का बड़ा कलाकार बताते हुए उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की अपील भी की है। निष्कर्ष नागालैंड के 5 वर्षीय याटो वांगनाओ ने अपनी प्यारी आवाज और जोशीले अंदाज में राष्ट्रगान गाकर देशवासियों का दिल जीत लिया है। उनका वायरल वीडियो न सिर्फ उनकी प्रतिभा को सामने ला रहा है, बल्कि नागालैंड की खूबसूरती और पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी देशभर में चर्चा में ला रहा है। Source: Times of India, Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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झारखंड में बड़ा फैसला! TDPL से जुड़ी परीक्षाएं, परिणाम और नियुक्तियां रद्द

रांची: झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने TSR Data Processing Private Limited (TDPL) से जुड़ी परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। इसमें JSSC-CGL परीक्षा भी शामिल है। 2014 से TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की होगी जांच सरकार ने TDPL के माध्यम से 2014 से आयोजित परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा और जांच का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। TDPL से जुड़ी परीक्षाओं में JPSC और JSSC की कई महत्वपूर्ण भर्तियां शामिल रही हैं। इनमें JSSC-CGL, फील्ड वर्कर, वनरक्षक और PGT शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं का भी उल्लेख किया गया है। JSSC-CGL भी हुई रद्द सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर JSSC Combined Graduate Level (JSSC-CGL) परीक्षा पर पड़ा है। परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है, जिन्होंने परीक्षा पास कर चयन प्रक्रिया पूरी की थी। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 2,000 उम्मीदवारों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर आगे की प्रक्रिया तय करना होगी। छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद फैसला यह फैसला झारखंड में चल रहे लंबे छात्र आंदोलन के बीच आया है। छात्र संगठन भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे थे। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, TDPL और JSSC-CGL को रद्द करने के निर्णय के बाद उन्होंने अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि, छात्रों की सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। आंदोलनकारी अब भी पूरे मामले में CBI जांच की मांग पर कायम हैं। लगभग 15 बड़ी परीक्षाएं सवालों के घेरे में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार TDPL की भूमिका JPSC और JSSC की करीब 15 बड़ी परीक्षाओं में रही है। इनमें JPSC की विभिन्न सिविल सेवा परीक्षाओं के अलावा Civil Judge, Assistant Public Prosecutor, JET और अन्य भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। JSSC की जिन परीक्षाओं का उल्लेख किया गया है, उनमें: शामिल हैं। सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार करेगी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए एक नई व्यवस्था की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही है। सरकार का उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है जिसमें पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों की गुंजाइश कम से कम हो और अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम किया जा सके। सरकार ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सुझाव लेने के लिए एक पोर्टल की व्यवस्था की घोषणा भी की है। आगे क्या होगा? TDPL से जुड़ी परीक्षाओं और परिणामों को रद्द किए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि प्रभावित परीक्षाओं का दोबारा आयोजन कब और किस एजेंसी के माध्यम से होगा। इसके अलावा जिन उम्मीदवारों का चयन हो चुका था या जो नियुक्त होकर सेवा में आ चुके हैं, उनके मामले में भी सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। इस फैसले से प्रभावित उम्मीदवारों के कानूनी विकल्पों पर भी नजर रहेगी। निष्कर्ष झारखंड सरकार का TDPL से जुड़ी परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला राज्य की भर्ती व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। JSSC-CGL के रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य सीधे प्रभावित हुआ है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार दोबारा परीक्षा और प्रभावित उम्मीदवारों के लिए क्या व्यवस्था करती है। Source: The New Indian Express, NDTV, DD India, Times of India, Prabhat Khabar जय राष्ट्र न्यूज़

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अभिजीत दीपके की डिग्री और स्कॉलरशिप पर सवाल, बोले—“मैं अपनी डिग्री दिखाने को तैयार”

नई दिल्ली: CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की विदेश में पढ़ाई और उसकी फंडिंग को लेकर उठे सवालों के बीच विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। दीपके ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि वह अपनी डिग्री, स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन से जुड़े दस्तावेज दिखाने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने BJP नेताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठाए। Boston University की पढ़ाई पर उठे सवाल विवाद तब शुरू हुआ जब गुजरात के एक RTI कार्यकर्ता ने दीपके की विदेश में पढ़ाई के खर्च को लेकर सवाल उठाए। उनके पिता के वित्तीय मामलों की जांच की मांग भी की गई और यह सवाल उठाया गया कि अमेरिका में उनकी पढ़ाई का खर्च कैसे पूरा हुआ। दीपके ने इन सवालों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन का इस्तेमाल हुआ था। उन्होंने कहा कि उनके पास इससे संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सार्वजनिक किया जा सकता है। “मैं अपनी डिग्री दिखाने को तैयार हूं” अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर उनकी शिक्षा और डिग्री को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं तो वह अपनी Boston University की डिग्री दिखाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन के दस्तावेज हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दीपके ने दावा किया है कि उन्हें Boston University से Dean’s Scholarship मिली थी और पढ़ाई के बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया गया था। PM मोदी की डिग्री पर भी उठाया सवाल दीपके ने अपने बचाव के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर भी सवाल खड़ा किया। उनका कहना है कि यदि उनसे उनकी शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं तो राजनीतिक नेताओं को भी अपनी डिग्रियों को सार्वजनिक करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है। विरोधियों को भी दिया जवाब 17 अगस्त को सामने आए एक वीडियो में दीपके ने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो उनकी Boston University की डिग्री को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी डिग्री दिखा देंगे और साथ ही अपने आलोचकों से भी अपनी शैक्षणिक योग्यता सार्वजनिक करने की मांग की। विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बना यह मामला केवल दीपके की शिक्षा तक सीमित नहीं रहा है। उनके CJP आंदोलन और सरकार के खिलाफ उनके बयानों के कारण यह विवाद राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी दीपके की ओर से प्रधानमंत्री की डिग्री पर सवाल उठाने वाली टिप्पणी की आलोचना की और इसे अहंकार से जोड़कर देखा। निष्कर्ष अभिजीत दीपके की Boston University की डिग्री और विदेश में पढ़ाई की फंडिंग को लेकर उठे सवालों के बीच उन्होंने साफ कहा है कि वह अपनी डिग्री, स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से जुड़े दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। वहीं प्रधानमंत्री की डिग्री को लेकर उनके सवालों ने इस विवाद को और राजनीतिक बना दिया है। फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों के बीच यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है। Source: PTI, India Today, ThePrint, ABP News, Navbharat Live जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई के आयकर भवन के बेसमेंट में लगी आग, VIDEO आया सामने; 28 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया

मुंबई: दक्षिण मुंबई के चर्चगेट इलाके में स्थित आयकर भवन (Aayakar Bhavan) के बेसमेंट में सोमवार दोपहर आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग से निकलने वाला घना धुआं पूरी इमारत में फैल गया, जिसके बाद दमकल विभाग ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। करीब 2 बजे लगी आग मुंबई फायर ब्रिगेड को सोमवार दोपहर करीब 2:01 बजे आयकर भवन में आग लगने की सूचना मिली। इसके बाद दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग मुख्य रूप से भवन के बेसमेंट तक सीमित बताई गई, जहां बिजली की वायरिंग, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन, रिकॉर्ड और अन्य सामान रखा था। पूरी इमारत में भर गया धुआं आग के कारण बेसमेंट से निकलने वाला धुआं केंद्रीय एयर-कंडीशनिंग सिस्टम के जरिए इमारत के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि दमकलकर्मियों को धुआं बाहर निकालने के लिए कुछ खिड़कियों के शीशे तोड़ने पड़े। 28 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू दमकल विभाग ने इमारत के अलग-अलग हिस्सों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 28 लोगों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें ऊपरी मंजिलों और टेरेस पर फंसे लोग भी शामिल थे। कुछ लोगों को सीढ़ियों और विशेष सीढ़ियों की मदद से बाहर निकाला गया। 20 फायर टेंडर मौके पर पहुंचे आग पर काबू पाने के लिए करीब 20 फायर टेंडर और कई अन्य दमकल वाहन तैनात किए गए। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी के घायल या हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने की वजह की जांच जारी फिलहाल आग लगने का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। शुरुआती जांच में इलेक्ट्रिकल वायरिंग और उपकरणों से जुड़ी संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही कारण की पुष्टि होगी। VIDEO सोशल मीडिया पर वायरल आयकर भवन में लगी आग और धुएं का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में इमारत के आसपास धुआं और मौके पर मौजूद दमकल की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। निष्कर्ष चर्चगेट स्थित मुंबई के आयकर भवन के बेसमेंट में लगी आग ने कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना दिया। दमकल विभाग की तेजी से कार्रवाई के कारण 28 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और फिलहाल किसी जनहानि की खबर नहीं है। आग के कारणों और संपत्ति को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। Source: Mumbai Fire Brigade, Mid-Day, Rediff, Free Press Journal जय राष्ट्र न्यूज़

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