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जय राष्ट्र न्यूज

लद्दाख का वायरल VIDEO: सुरक्षा बलों से बहस करने वाली Gen-Z महिला ने भारतीय सेना से मांगी माफी

लद्दाख: लद्दाख के मिनामर्ग चेकपोस्ट पर सुरक्षा बलों के साथ बहस करते हुए वायरल हुई 25 वर्षीय महिला पर्यटक ने अब भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और लद्दाख पुलिस से माफी मांगी है। महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वह सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताते हुए खुद को “Gen Z” बताते हुए सुरक्षाकर्मियों से बहस करती दिखाई दी थी। छह घंटे इंतजार के बाद हुआ था विवाद महिला के मुताबिक, घटना 26 जुलाई को मिनामर्ग चेकपोस्ट के पास हुई थी। उस समय सुरक्षा कारणों से सड़क को अस्थायी रूप से बंद किया गया था और वह तथा उसके साथ यात्रा कर रहे लोग कई घंटों तक इंतजार करते रहे। महिला ने NDTV से बातचीत में बताया कि करीब छह घंटे तक इंतजार और स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के कारण वह अपना आपा खो बैठी। उसने माना कि गुस्से में उसके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा गलत थी। “We are Gen Z” वाला VIDEO हुआ वायरल घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद महिला की टिप्पणी “We are Gen Z” काफी चर्चा में रही। वीडियो में वह सुरक्षा कर्मियों के साथ तीखी बहस करती नजर आई। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर उसे लेकर काफी आलोचना हुई। सेना के पूर्व अधिकारियों और कई यूजर्स ने संवेदनशील सीमा क्षेत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठाए। महिला ने सेना से मांगी माफी विवाद बढ़ने के बाद महिला ने अब सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उसने कहा कि उसका उद्देश्य भारतीय सेना या पुलिस का अपमान करना नहीं था और वह सेना का सम्मान करती है। उसने भारतीय सेना के साथ-साथ J&K Police और Ladakh Police से भी माफी मांगी और कहा कि उसकी टिप्पणी उस समय की निराशा और गुस्से का परिणाम थी। महिला ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए यह भी कहा कि उसे अपने व्यवहार पर पछतावा है और वह इस घटना के कारण मिले ध्यान के लिए ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहती थी। संवेदनशील इलाके में सुरक्षा व्यवस्था का मामला यह विवाद ऐसे इलाके में हुआ जहां सुरक्षा व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है। लद्दाख का यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से संवेदनशील है और सैन्य गतिविधियों के कारण कई बार आम नागरिकों की आवाजाही अस्थायी रूप से प्रतिबंधित की जाती है। महिला ने अपने पक्ष में कहा कि अगर उन्हें सड़क बंद होने और इंतजार की वजह के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल जाती, तो शायद स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े नियमों का पालन करना भी यात्रियों की जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस वीडियो के वायरल होने के बाद यह मामला केवल एक स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर Gen Z, नागरिक जिम्मेदारी और सेना के प्रति सम्मान को लेकर बहस शुरू हो गई। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी पहले महिला के व्यवहार पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ऐसी मानसिकता से जोड़ा था जिसमें लोग अपने प्रभाव या पहचान के आधार पर नियमों से ऊपर होने का भाव रखते हैं। माफी के बाद विवाद में नया मोड़ अब महिला की माफी के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। वायरल वीडियो में दिखाई गई घटना को लेकर आलोचना के बाद उसने स्पष्ट किया कि उसके शब्द गलत थे और उसने सेना तथा पुलिस का अपमान करने का इरादा नहीं रखा था। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा निर्देशों का पालन और यात्रियों को स्पष्ट जानकारी देना दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। स्रोत: NDTV, Indian Express, Times of India, PTI Jai Rashtra News

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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर फिर सियासत तेज! घायल छात्र के साथ राहुल गांधी दिल्ली पुलिस स्टेशन पहुंचे

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर शुक्रवार, 21 अगस्त 2026, को राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी घायल छात्र साहिल लोचब को साथ लेकर दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे और मामले में FIR दर्ज करने की मांग की। घायल छात्र को साथ लेकर थाने पहुंचे राहुल गांधी राहुल गांधी शुक्रवार को DCP कार्यालय पहुंचे। उनके साथ साहिल लोचब भी मौजूद थे, जिन्हें 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट जैसी चोटें लगी थीं। रिपोर्टों के मुताबिक राहुल गांधी ने पुलिस अधिकारियों से मामले की शिकायत दर्ज करने और कथित बल प्रयोग की जांच कराने की मांग की। FIR दर्ज नहीं होने पर धरने पर बैठे राहुल राहुल गांधी ने पुलिस स्टेशन के बाहर धरना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब तक शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की जाती, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे। इस दौरान घायल छात्र और उसका परिवार भी उनके साथ मौजूद रहा। राहुल गांधी पहले भी इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और गृह मंत्री से जवाब मांग चुके हैं। पैलेट गन के इस्तेमाल पर आमने-सामने दावे इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर है। कांग्रेस का आरोप है कि छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया और कुछ प्रदर्शनकारियों को पैलेट जैसी चोटें आईं। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर चुकी है और कह चुकी है कि उसके पास ऐसी हथियार प्रणाली मौजूद नहीं है। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक और सीमित बल इस्तेमाल करने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट की जांच भी जारी मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की परिस्थितियों और कथित अत्यधिक बल प्रयोग की जांच के लिए हाई-पावर विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। इससे यह मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब न्यायिक निगरानी में भी जांच का विषय बन गया है। जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन को लेकर पुलिस अलर्ट इसी बीच दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि 21 अगस्त को जंतर-मंतर पर किसी नए विरोध प्रदर्शन या जुलूस की अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस ने लोगों से बिना अनुमति किसी सार्वजनिक सभा में शामिल न होने की अपील की है। इससे राजधानी में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा और राजनीतिक तनाव दोनों बढ़ गए हैं। राहुल गांधी के कदम से बढ़ी राजनीतिक हलचल घायल छात्र को लेकर सीधे पुलिस स्टेशन पहुंचना राहुल गांधी की ओर से मामले को दोबारा राजनीतिक केंद्र में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस इसे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती और जवाबदेही का मुद्दा बना रही है, जबकि पुलिस अपने ऊपर लगे पैलेट गन के आरोपों से इनकार कर रही है। अब सबकी नजर FIR, पुलिस जांच और सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट पर है। इन्हीं के जरिए यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान वास्तव में किस तरह के बल का इस्तेमाल हुआ था। स्रोत: Delhi Police, PTI, India Today, Outlook India, Times of India Jai Rashtra News

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22 भारतीयों वाले दो जहाज हाईजैक! यमन और सोमालिया के पास समुद्री डकैती से मचा हड़कंप

नई दिल्ली: अरब सागर और हिंद महासागर से जुड़ी समुद्री सुरक्षा को लेकर शुक्रवार को बड़ी चिंता सामने आई। यमन और सोमालिया के तट के पास दो अलग-अलग घटनाओं में दो कमर्शियल जहाजों को समुद्री डाकुओं ने हाईजैक कर लिया। दोनों जहाजों पर कुल 22 भारतीय नागरिक सवार थे। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल दोनों जहाजों के भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं। Gulf of Aden में 16 भारतीयों वाला टैंकर हाईजैक पहली घटना 20 अगस्त को Gulf of Aden में हुई। Eritrea-flagged oil products tanker MT Sibu 1 को यमन के तट से करीब 30 nautical miles दूर हथियारबंद समुद्री डाकुओं ने अपने कब्जे में ले लिया। जहाज पर कुल 20 क्रू सदस्य थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक शामिल हैं। बाकी क्रू में एक-एक Syrian, Sudanese और Iraqi नागरिक थे, जबकि एक सदस्य की राष्ट्रीयता की पुष्टि नहीं हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार करीब छह हथियारबंद समुद्री डाकू जहाज पर चढ़े और उन्होंने उसका नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। Somalia के Puntland तट पर दूसरा जहाज कब्जे में दूसरी घटना 17 अगस्त को Somalia के Puntland तट के पास हुई। Cameroon-flagged cargo vessel M/V LUTUF को समुद्री डाकुओं ने हाईजैक किया। इस जहाज पर कुल 10 क्रू सदस्य थे, जिनमें 6 भारतीय नागरिक शामिल हैं। रिपोर्टों के मुताबिक हथियारबंद हमलावर दो छोटी नावों से जहाज तक पहुंचे और उस पर कब्जा कर लिया। इस तरह दोनों घटनाओं को मिलाकर 22 भारतीय नागरिक समुद्री डकैती की घटनाओं से प्रभावित जहाजों पर मौजूद थे। भारतीय क्रू की सुरक्षा पर क्या अपडेट? भारतीय अधिकारियों की शुक्रवार को उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों जहाजों पर मौजूद भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। हालांकि, जहाजों की मौजूदा स्थिति और आगे की घटनाक्रम पर भारतीय अधिकारी लगातार नजर बनाए हुए हैं। MT Sibu 1 मामले में संबंधित Recruitment and Placement Service Licence एजेंसी को घटना की रिपोर्ट और आगे के अपडेट e-Navik online marine casualty reporting system के जरिए जमा करने को कहा गया है। समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता लगातार दो अलग-अलग घटनाओं ने Horn of Africa और Gulf of Aden में commercial shipping की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यहां से Red Sea तथा Suez Canal की ओर जाने वाले प्रमुख समुद्री मार्ग जुड़े हैं। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में piracy के साथ-साथ क्षेत्रीय संघर्ष और जहाजों पर हमलों का खतरा भी बना हुआ है। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला? भारत दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापारिक देशों में शामिल है और बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक international merchant vessels पर काम करते हैं। ऐसे में किसी भी समुद्री सुरक्षा संकट का सीधा असर भारतीय seafarers की सुरक्षा पर पड़ सकता है। भारतीय नौसेना पहले भी Gulf of Aden और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में commercial shipping की सुरक्षा तथा संकट में फंसे भारतीयों की मदद के लिए अभियान चला चुकी है। दो घटनाओं ने बढ़ाई चिंता एक ही सप्ताह में Somalia और Yemen के पास दो जहाजों का हाईजैक होना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में piracy का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। खासकर भारतीय क्रू सदस्यों की मौजूदगी ने इस घटनाक्रम को भारत के लिए और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। फिलहाल राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार सभी 22 भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं। आगे भारतीय अधिकारियों और संबंधित अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी। स्रोत: PTI, Hindustan Times, Business Standard, The Statesman Jai Rashtra News

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BJP विधायक जय देवी कौशल का गंभीर आरोप—“मुझे मंदिर में पूजा करने से रोका गया”

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के काकोरी स्थित शीतला माता मंदिर में जीर्णोद्धार और भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान विवाद खड़ा हो गया है। मलिहाबाद से BJP विधायक जय देवी कौशल ने आरोप लगाया है कि उन्हें मंदिर में पूजा-अर्चना और आरती में शामिल होने से रोका गया। विधायक ने इसे जातिगत भेदभाव का मामला बताते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से शिकायत करने की बात कही है। विधायक ने लगाए जातिगत भेदभाव के आरोप जय देवी कौशल के मुताबिक, वह मंदिर के जीर्णोद्धार कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं। उनका आरोप है कि वहां पूजा की व्यवस्था होने के बावजूद उन्हें अनुष्ठान में बैठने नहीं दिया गया और वह खड़ी रहीं। विधायक ने दावा किया कि उन्हें अगरबत्ती जलाने और नारियल चढ़ाने तक की अनुमति नहीं दी गई। विधायक का कहना है कि उनके साथ ऐसा व्यवहार उनकी पासी समाज की पृष्ठभूमि के कारण किया गया। उन्होंने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि वह मामले को BJP के शीर्ष नेतृत्व के सामने रखेंगी। मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए बजट दिलाने का दावा रिपोर्टों के अनुसार, जय देवी कौशल के प्रयासों से काकोरी के शीतला मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए करीब ₹78 लाख की राशि स्वीकृत हुई थी। उनके पति और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने भी घटना पर नाराजगी जताई है। उनके मुताबिक, एक अन्य मंदिर के निर्माण के लिए भी करीब ₹70 लाख की राशि स्वीकृत हुई थी। इसी वजह से विधायक और उनके समर्थकों ने सवाल उठाया है कि जिस विकास कार्य के लिए सरकारी बजट स्वीकृत कराने में विधायक की भूमिका रही, उसी कार्यक्रम में उन्हें पूजा में शामिल होने से क्यों रोका गया। मंदिर के पुजारी ने आरोपों को बताया गलत विवाद के बीच मंदिर के पुजारी शैलेंद्र बाजपेई ने विधायक के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मंदिर में किसी के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता और सभी वर्गों के लोग यहां पूजा-अर्चना करते हैं। पुजारी के अनुसार, भूमिपूजन और धार्मिक अनुष्ठान निर्धारित पूजा पद्धति और परंपरा के अनुसार कराया गया था। इसलिए विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों को मंदिर की सामान्य व्यवस्था से जोड़ना सही नहीं है। मामला राजनीतिक चर्चा में आया विधायक के आरोप और मंदिर पक्ष की सफाई के बाद मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ जय देवी कौशल इसे जातिगत भेदभाव बता रही हैं, वहीं मंदिर प्रबंधन आरोपों से इनकार कर रहा है। फिलहाल दोनों पक्षों के दावों के बीच स्वतंत्र जांच या आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है, इसलिए जातिगत भेदभाव के आरोपों को अभी आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। BJP नेतृत्व तक पहुंचेगा मामला जय देवी कौशल ने कहा है कि वह इस पूरे मामले की शिकायत BJP के वरिष्ठ नेतृत्व और आलाकमान से करेंगी। अब नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और क्या मामले की कोई औपचारिक जांच कराई जाती है। यह घटना उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों पर समान प्रवेश, सामाजिक भेदभाव और राजनीतिक प्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर नई बहस को जन्म दे सकती है। स्रोत: आजतक, लाइव हिन्दुस्तान, अमर उजाला, UP Tak, दैनिक जागरण Jai Rashtra News

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प्रेस क्लब में ‘मोदी चालीसा’ का अनावरण; VIDEO वायरल होते ही मचा बवाल, आयोजकों से अलग हुआ प्रेस क्लब

नई दिल्ली: दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा में आयोजित एक कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी के कटआउट के सामने आरती और ‘मोदी चालीसा’ का पाठ करते लोग दिखाई दे रहे हैं। कार्यक्रम में ‘जय जय मोदी’ और ‘हर हर मोदी’ जैसे नारे भी लगाए गए। वीडियो में क्या दिखा? सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में नरेंद्र मोदी की तस्वीर/कटआउट को भगवान राम के स्वरूप में दिखाया गया है। मंच पर इसी तस्वीर के सामने आरती की गई और ‘भगवान श्री नरेंद्र मोदी चालीसा’ का पाठ किया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने धार्मिक अंदाज में नारे भी लगाए। वीडियो वायरल होने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं और प्रेस क्लब परिसर में हुए इस आयोजन को लेकर सवाल उठने लगे। बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड से जुड़े पदाधिकारी रहे मौजूद रिपोर्टों के मुताबिक कार्यक्रम में बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजन सिंह प्रमुख रूप से मौजूद थे। राजन सिंह इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर पटना में मंदिर बनाने की घोषणा को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। आयोजन में ‘मोदी चालीसा’ को प्रस्तुत करने के साथ उसका पाठ भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को भगवान श्रीराम के स्वरूप में प्रदर्शित करने वाली तस्वीर भी दिखाई गई। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने किया किनारा विवाद बढ़ने के बाद प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम उसकी ओर से आयोजित नहीं किया गया था। क्लब के अनुसार, एक संगठन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए हॉल किराये पर लिया था, लेकिन वहां आयोजित गतिविधि ने बुकिंग की शर्तों का उल्लंघन किया। जानकारी मिलते ही क्लब अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर कार्यक्रम को रुकवा दिया। इस स्पष्टीकरण के बाद यह साफ हो गया कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा आयोजन प्रेस क्लब ऑफ इंडिया का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था। VIDEO वायरल होने के बाद राजनीतिक बहस ‘मोदी चालीसा’ के वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर राजनीतिक और वैचारिक बहस शुरू हो गई है। आलोचक इसे राजनीतिक व्यक्तिपूजा का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि समर्थकों की ओर से इसे प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और समर्थन से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, प्रेस क्लब की ओर से कार्यक्रम से दूरी बनाए जाने के बाद विवाद का केंद्र अब आयोजकों द्वारा क्लब की बुकिंग की शर्तों के कथित उल्लंघन और कार्यक्रम की प्रकृति पर है। सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड कर रहा है मामला? प्रधानमंत्री की तस्वीर के सामने आरती, धार्मिक शैली में ‘मोदी चालीसा’ का पाठ और ‘जय जय मोदी’ जैसे नारों वाले वीडियो ने कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर काफी ध्यान आकर्षित किया। इसी वजह से यह मामला आज की Trending Political News में शामिल हो गया है। फिलहाल प्रेस क्लब ने साफ कर दिया है कि उसने इस आयोजन का समर्थन या आयोजन नहीं किया था और नियमों के उल्लंघन के बाद कार्यक्रम को रोक दिया गया। स्रोत: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, लाइव हिन्दुस्तान, द लल्लनटॉप, अमर उजाला Jai Rashtra News

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कन्नौज में स्कूल को लेकर छात्रों का प्रदर्शन! प्रधानाध्यापक पर दुर्व्यवहार, मारपीट और जातीय भेदभाव के आरोप

कन्नौज, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के कंपोजिट विद्यालय गुगरापुर में छात्रों और अभिभावकों ने प्रभारी प्रधानाध्यापक के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्रों ने स्कूल का बहिष्कार करते हुए प्रधानाध्यापक की गाड़ी का घेराव किया और कई गंभीर आरोप लगाए। छात्रों ने लगाए गंभीर आरोप प्रदर्शन कर रहे छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, भेदभाव और मारपीट करते हैं। कुछ छात्रों ने जाति और समुदाय के आधार पर भेदभाव किए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, ये फिलहाल छात्रों और अभिभावकों द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि या जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। प्रदर्शन के दौरान बच्चों ने प्रधानाध्यापक को हटाने की मांग करते हुए नारेबाजी की। अभिभावक भी बच्चों के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल हुए। स्कूल का बहिष्कार और गाड़ी का घेराव रिपोर्टों के अनुसार, छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और प्रधानाध्यापक की गाड़ी को घेर लिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से शिकायतों पर कार्रवाई करने की मांग की। स्कूल में करीब 200 छात्र पढ़ते हैं। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें पढ़ाई के बजाय दूसरे कामों में लगाया जाता है। एक रिपोर्ट में कंप्यूटर शिक्षा को लेकर भी छात्रों की शिकायत का उल्लेख है। गणित शिक्षक की कमी का मुद्दा भी उठा प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने स्कूल में गणित शिक्षक की कमी का मुद्दा भी उठाया। छात्रों के अनुसार, विज्ञान विषय के शिक्षक द्वारा गणित पढ़ाया जा रहा है और वे गणित के लिए अलग शिक्षक की मांग कर रहे हैं। यह मुद्दा केवल प्रधानाध्यापक के खिलाफ लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छात्रों ने स्कूल की पढ़ाई और व्यवस्था से जुड़ी शिकायतें भी प्रशासन के सामने रखीं। शिक्षकों और अभिभावकों ने भी उठाई आवाज रिपोर्टों में दावा किया गया है कि स्कूल के कुछ शिक्षक भी प्रधानाध्यापक के खिलाफ शिकायतों को लेकर आपत्ति जता चुके हैं। अभिभावकों ने बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। प्रधानाध्यापक पर स्कूल परिसर में लगे पेड़ों को कटवाने के आरोप भी प्रदर्शन के दौरान सामने आए हैं। इन आरोपों की भी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। प्रशासन की कार्रवाई पर नजर मामला सामने आने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों की किस तरह जांच करता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं, जबकि जांच पूरी होने तक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। कन्नौज की यह घटना उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता, छात्र सुरक्षा और स्कूल प्रशासन की जवाबदेही को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर रही है। स्रोत: Careers360, Times Now Navbharat, Navbharat Times, IANS Jai Rashtra News

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PM CARES Fund के पैसे से स्कूल बनाने की मांग! ₹8,452 करोड़ के फंड पर उठे सवाल

नई दिल्ली: PM CARES Fund में मौजूद ₹8,452 करोड़ की राशि को ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने और नए आधुनिक स्कूल बनाने में इस्तेमाल करने की मांग उठी है। Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि फंड की राशि का इस्तेमाल बच्चों के लिए बेहतर स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में किया जाए। ग्रामीण स्कूलों की बदहाली का मुद्दा डिपके ने अपनी ‘School Thik Karo’ मुहिम के तहत ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि कई स्कूलों में बच्चों को बेहतर सड़क, बैठने के लिए पर्याप्त बेंच और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ ग्रामीण स्कूलों में फंड की कमी बताई जाती है और दूसरी तरफ PM CARES Fund में हजारों करोड़ रुपये मौजूद हैं। ₹8,500 करोड़ से 1,000 से ज्यादा स्कूलों का दावा डिपके के मुताबिक अगर एक आधुनिक और सुविधायुक्त मॉडल स्कूल बनाने में करीब ₹8 करोड़ खर्च हों, तो ₹8,500 करोड़ की राशि से 1,000 से ज्यादा हाईटेक मॉडल स्कूल बनाए जा सकते हैं। उन्होंने सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की। हालांकि, यह आंकड़ा डिपके का अनुमान है और इसे सरकार की स्वीकृत स्कूल-निर्माण योजना नहीं माना जाना चाहिए। PM CARES Fund में कितनी रकम है? नवीनतम ऑडिट आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2025 को PM CARES Fund का बैलेंस ₹8,452.06 करोड़ था। यह राशि 2023-24 के करीब ₹7,173 करोड़ के बैलेंस से काफी अधिक है। फंड की करीब 93% राशि यानी ₹7,846.65 करोड़ फिक्स्ड डिपॉजिट में थी। वित्त वर्ष 2024-25 में फंड से कुल भुगतान करीब ₹87.85 लाख दर्ज हुआ, जिससे फंड के इस्तेमाल को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हुई है। क्या PM CARES का पैसा स्कूलों पर खर्च किया जा सकता है? यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। PM CARES Fund का घोषित उद्देश्य मुख्य रूप से आपात स्थितियों, आपदाओं, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और प्रभावित लोगों को सहायता प्रदान करना है। इसके उद्देश्यों में इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य सहायता से जुड़े प्रावधान भी हैं, लेकिन सामान्य स्कूल निर्माण या नियमित शिक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को अलग से मुख्य उद्देश्य के रूप में नहीं बताया गया है। इसलिए PM CARES की राशि से सामान्य स्कूल निर्माण किया जा सकता है या नहीं, यह फंड के घोषित उद्देश्यों और Board of Trustees की स्वीकृति पर निर्भर करेगा। BJP ने मांग पर जताई आपत्ति इस मांग के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। BJP ने कहा कि PM CARES Fund का उद्देश्य आपातकालीन और आपदा राहत है और इसे सामान्य स्कूल निर्माण के लिए इस्तेमाल करने की मांग फंड के मूल उद्देश्य को नहीं समझती। यानी फिलहाल यह सरकार की घोषित योजना नहीं, बल्कि अभिजीत डिपके की मांग है। PM CARES Fund फिर चर्चा में ₹8,452 करोड़ के बड़े कॉर्पस, FY25 में बेहद कम भुगतान और अब ग्रामीण स्कूलों के लिए इस राशि के इस्तेमाल की मांग ने PM CARES Fund को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आगे यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार या PM CARES Fund का ट्रस्ट बोर्ड इस सुझाव पर कोई विचार करता है या स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मौजूदा सरकारी योजनाओं के जरिए ही फंड उपलब्ध कराया जाता है। स्रोत: PM CARES Fund Audit Report, PTI, Hindustan Times, New Indian Express, Times of India Jai Rashtra News

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UN में भारत का बड़ा बयान! Terror Listings में राजनीतिक दखल के खिलाफ उठाई आवाज

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आतंकवाद से जुड़े प्रतिबंधों और terror listings की प्रक्रिया को लेकर भारत ने बुधवार को बड़ा बयान दिया। भारत ने UNSC से अपील की कि आतंकवादियों की सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमों पर आधारित होनी चाहिए और किसी भी देश को परिषद की सदस्यता का इस्तेमाल आतंकवादियों को राजनीतिक संरक्षण देने के लिए नहीं करना चाहिए। आतंकियों को राजनीतिक संरक्षण देने पर भारत की आपत्ति भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि UNSC की सदस्यता का इस्तेमाल किसी आतंकवादी को “legitimise” करने या उसे राजनीतिक कारणों से संरक्षण देने के लिए नहीं होना चाहिए। भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों और आतंकवाद से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता तथा राजनीतिक प्रभाव को लेकर बहस चल रही है। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक व्यवस्था में objectivity और transparency को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। Terror Listing प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग भारत का कहना है कि आतंकवादी संगठनों और व्यक्तियों को UNSC sanctions lists में शामिल करने की प्रक्रिया स्पष्ट और तथ्य आधारित होनी चाहिए। इसी तरह किसी नाम को सूची से हटाने का फैसला भी राजनीतिक हितों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। UN Security Council के तहत आतंकवाद और counter-terrorism से संबंधित कई sanctions regimes पहले से लागू हैं। पाकिस्तान पर परोक्ष निशाना? भारत के बयान को पाकिस्तान के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई न करने का आरोप लगाता रहा है। हालांकि, ताजा बयान में भारत ने किसी एक देश का नाम लेकर आरोप लगाने के बजाय UN sanctions mechanism को मजबूत करने और राजनीतिक हस्तक्षेप रोकने पर जोर दिया। भारत पहले भी उठा चुका है मुद्दा आतंकवादी संगठनों की listing और delisting में राजनीतिक या धार्मिक आधार पर दोहरे मानदंडों के खिलाफ भारत पहले भी आवाज उठाता रहा है। भारत ने UN में यह रुख रखा है कि ऐसी प्रक्रिया objective होनी चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई में किसी तरह का double standard नहीं होना चाहिए। भारत ने UNSC 1267 sanctions regime के तहत आतंकवादियों की listing को लेकर भी सक्रिय भूमिका निभाई है। संसद की विदेश मामलों की समिति के अनुसार, भारत ने कई आतंकवादियों को सूचीबद्ध कराने के लिए प्रस्ताव आगे बढ़ाए हैं। UNSC में सुधार की मांग भी तेज भारत का यह बयान व्यापक UN Security Council reforms की उसकी मांग से भी जुड़ा है। नई दिल्ली लंबे समय से UNSC को ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की मांग करती रही है। भारत का तर्क है कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए परिषद की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना जरूरी है। आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख भारत ने दोहराया है कि आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक, वैचारिक या अन्य आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। नई दिल्ली का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई बिना भेदभाव और बिना राजनीतिक दबाव के होनी चाहिए। आज के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल प्रमुख हो गया है कि UNSC की sanctions प्रक्रिया को कितना पारदर्शी बनाया जा सकता है और क्या सदस्य देश राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर आतंकवाद के खिलाफ एक समान नीति अपना पाएंगे। स्रोत: United Nations, Moneycontrol, Times of India, Indian diplomatic statements Jai Rashtra News

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Samsung का बड़ा ऐलान! 27 अगस्त को Galaxy Event, Galaxy S26 FE से उठ सकता है पर्दा

नई दिल्ली: Samsung ने अपने अगले Galaxy Event की तारीख का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। कंपनी 27 अगस्त 2026 को एक ऑनलाइन लॉन्च इवेंट आयोजित करेगी, जिसमें Galaxy S26 सीरीज के “नए सदस्य” को पेश करने की घोषणा की गई है। Samsung ने अभी डिवाइस का नाम स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन मौजूदा रिपोर्ट्स और लीक्स के आधार पर Galaxy S26 FE के लॉन्च की सबसे ज्यादा उम्मीद है। 27 अगस्त को होगा बड़ा Galaxy Event Samsung का यह इवेंट 27 अगस्त को शाम 5:30 बजे IST से लाइव होगा। कंपनी इसे अपनी आधिकारिक वेबसाइट और YouTube चैनल पर स्ट्रीम करेगी। Samsung ने अपने निमंत्रण में कहा है कि नया डिवाइस Galaxy S26 के कैमरा और AI अनुभवों को ज्यादा यूजर्स तक पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है। Samsung की आधिकारिक Galaxy Event जानकारी Galaxy S26 FE पर क्यों है सबसे ज्यादा चर्चा? Samsung ने आधिकारिक तौर पर Galaxy S26 FE का नाम नहीं लिया है। हालांकि, पिछले कई महीनों से सामने आ रहे लीक्स और अब Galaxy S26 परिवार में नए मॉडल की घोषणा को देखते हुए S26 FE को इस इवेंट का सबसे संभावित डिवाइस माना जा रहा है। FE यानी Fan Edition सीरीज का मकसद आमतौर पर फ्लैगशिप Galaxy S सीरीज के प्रमुख फीचर्स को अपेक्षाकृत कम कीमत वाले फोन में उपलब्ध कराना होता है। 6.7-इंच डिस्प्ले और 120Hz स्क्रीन की उम्मीद लीक्स के मुताबिक Galaxy S26 FE में 6.7-इंच FHD+ AMOLED डिस्प्ले और 120Hz रिफ्रेश रेट मिल सकता है। फोन में एल्युमिनियम फ्रेम और IP68 रेटिंग भी मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, ये सभी स्पेसिफिकेशन अभी लीक्स और रिपोर्ट्स पर आधारित हैं। Samsung ने लॉन्च से पहले इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। Exynos 2500 और 4,900mAh बैटरी की चर्चा रिपोर्ट्स के अनुसार Galaxy S26 FE में Samsung का Exynos 2500 प्रोसेसर दिया जा सकता है। फोन में 4,900mAh बैटरी और 45W वायर्ड चार्जिंग सपोर्ट की भी उम्मीद है। सॉफ्टवेयर के मामले में फोन के Android 17 आधारित One UI 9 के साथ आने और लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट मिलने की संभावना है। कैमरा सेटअप भी हो सकता है दमदार लीक्स के मुताबिक Galaxy S26 FE में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिल सकता है। इसमें: शामिल होने की उम्मीद है। टेलीफोटो कैमरे में 3x ऑप्टिकल जूम और OIS मिलने की भी रिपोर्ट है। कीमत पर भी बढ़ी उत्सुकता Galaxy S26 FE की भारतीय कीमत अभी Samsung ने घोषित नहीं की है। कुछ रिपोर्ट्स में अमेरिकी बाजार के लिए करीब $799 की शुरुआती कीमत का अनुमान लगाया गया है, लेकिन इसे भारतीय कीमत मानना सही नहीं होगा। स्थानीय टैक्स, लॉन्च ऑफर और Samsung की भारत-विशिष्ट कीमत के कारण वास्तविक कीमत अलग हो सकती है। अगर कीमत उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो S26 FE को प्रीमियम स्मार्टफोन सेगमेंट में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। 27 अगस्त को साफ होगी पूरी तस्वीर फिलहाल Samsung ने सिर्फ इतना आधिकारिक रूप से बताया है कि Galaxy S26 परिवार में एक नया सदस्य 27 अगस्त को पेश किया जाएगा। Galaxy S26 FE का नाम और उसके स्पेसिफिकेशन अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आए हैं। अब भारतीय टेक यूजर्स की नजर 27 अगस्त, शाम 5:30 बजे होने वाले Galaxy Event पर है। अगर लीक्स सही साबित होते हैं, तो यह Samsung Galaxy S26 FE की आधिकारिक एंट्री हो सकती है। स्रोत: Samsung Newsroom, India Today, Samsung-focused reports Jai Rashtra News

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शेयर बाजार में जोरदार वापसी! Sensex 592 अंक चढ़ा, Nifty ने 24,200 का स्तर फिर हासिल किया

नई दिल्ली: लगातार कई कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद भारतीय शेयर बाजार ने 20 अगस्त 2026 को जोरदार वापसी की। शुरुआती कारोबार में Sensex 592.55 अंक चढ़कर 77,504.80 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 करीब 147 अंक बढ़कर 24,200 के ऊपर पहुंच गया। बाद में तेजी और मजबूत हुई और Sensex करीब 700 अंक तथा Nifty 24,265 के आसपास तक पहुंच गया। सात दिन की गिरावट पर लगा ब्रेक बाजार में यह तेजी खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Nifty इससे पहले लगातार सात कारोबारी सत्रों में गिरावट दर्ज कर चुका था। 19 अगस्त को Nifty 24,078.30 और Sensex 76,909.68 पर बंद हुए थे। आज की तेजी ने निवेशकों को राहत दी और बाजार में फिर से खरीदारी का माहौल देखने को मिला। IT और बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी आज की तेजी में IT और वित्तीय शेयर प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। शुरुआती कारोबार में IT इंडेक्स करीब 1.4% चढ़ा, जबकि वित्तीय शेयरों में भी मजबूती रही। व्यापक बाजार में भी Midcap और Smallcap इंडेक्स हरे निशान में रहे। इससे संकेत मिला कि निवेशक हालिया गिरावट के बाद चुनिंदा शेयरों में दोबारा खरीदारी कर रहे हैं। US Bond Yields में गिरावट से बाजार को सहारा आज की तेजी का एक बड़ा कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी रहा। अमेरिका के Treasury Department ने लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की buyback operations का आकार बढ़ाने की घोषणा की, जिससे वैश्विक बॉन्ड बाजार में sentiment बेहतर हुआ। US 10-year और 30-year Treasury yields में गिरावट ने emerging markets समेत जोखिम वाली परिसंपत्तियों के प्रति निवेशकों का रुझान बेहतर किया। Global Markets से भी मिले सकारात्मक संकेत भारतीय बाजार को एशियाई और अमेरिकी बाजारों से भी सकारात्मक संकेत मिले। वैश्विक बाजारों में sentiment सुधरने के बाद घरेलू निवेशकों ने भी खरीदारी बढ़ाई। Reuters के अनुसार आज Sensex करीब 0.66% और Nifty करीब 0.50% ऊपर खुला। Crude Oil और Iran तनाव पर नजर हालांकि बाजार की पूरी तस्वीर अभी भी जोखिम से मुक्त नहीं है। Iran-US तनाव और ऊंचे crude oil prices भारतीय बाजार के लिए बड़ी चिंता बने हुए हैं। पिछले दिनों Brent crude करीब $92 प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जिससे inflation और भारत के import bill को लेकर चिंता बढ़ी थी। इसलिए आज की तेजी को फिलहाल strong rebound के रूप में देखा जा रहा है, न कि लंबी अवधि की तेजी की पक्की शुरुआत के रूप में। निवेशकों के लिए राहत, लेकिन सावधानी जरूरी आज की तेजी ने बाजार में भरोसा जरूर लौटाया है, लेकिन लगातार ऊंचे तेल दाम, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और Middle East geopolitical tensions अभी भी बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं। अगर Nifty 24,200 के ऊपर मजबूती बनाए रखता है, तो बाजार में recovery का momentum आगे बढ़ सकता है। वहीं इस स्तर से नीचे फिसलने पर हालिया volatility दोबारा बढ़ सकती है। स्रोत: Reuters, Business Standard, Amar Ujala Jai Rashtra News

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