Vineet Pandey

Raj Thackeray news

राज ठाकरे की धमकी, ‘हिंदी को मराठी से बेहतर दिखाने की कोशिश कर रहे लोग ध्यान रखें चुनाव और गठबंधन होते रहते हैं, लेकिन…’

महाराष्ट्र में तीसरी भाषा पर छिड़ा विवाद (Maharashtra Three Language Policy) अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी को लागू करने का आदेश वापस ले लिया है, लेकिन विपक्ष अभी भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटा है। मनसे (MNS) प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने एक बार फिर राज्य सरकार पर प्रहार करते हुए कहा, ‘मराठी भाषा (Marathi Language) के मुद्दे को राजनीति का नाम न दें। राज्य में राजनीतिक गठबंधन और चुनाव होते आए हैं और होते रहेंगे, लेकिन अगर एक बार मराठी भाषा (Marathi Language) खत्म हो गई तो समझ लीजिए सब कुछ खत्म हो जाएगा। इस मुद्दे को सभी राजनीतिक पार्टियों को एक चुनौती के रूप में देखना चाहिए।”  मनसे (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे (Raj Thackeray) मुंबई में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने इसी दौरान कहा कि, “मराठी भाषा को खत्म करने या इससे समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति का मैं खुलकर विरोध करूंगा। भले ही वह व्यक्ति किसी भी पार्टी का ही क्यों न हो, मैं उसके खिलाफ खड़ा होऊंगा और पूरी ताकत से लड़ंगा।” राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने मराठी भाषा पर अपनी बात रखते हुए यह भी कहा, ”हिंदी भाषा देश में व्यापक रूप से बोली जाती है, लेकिन इसे अन्य राज्यों पर जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्रीय भाषा नहीं है। इस भाषा को प्राचीन मराठी भाषा से ऊपर रखने का कोई भी प्रयास कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  मराठी भाषा का इतिहास 3,000 साल पुराना  राजा ठाकरे ने कहा कि हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे हैं, हम सिर्फ मराठी भाषा की रक्षा कर रहे हैं। हिन्दी भाषा का इतिहास 150 से लेकर 200 साल पुराना है, लेकिन इसे उस भाषा से बेहतर दिखाने की कोशिश की जा रही है, जिसका इतिहास 3000 साल पुराना है। कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ को पूरा करने के लिए साजिश रच रहे हैं और हिन्दी भाषा को सर्वश्रेण दिखा रहे हैं। यह अस्वीकार्य है और महराष्ट्र की जनता यह नहीं होने देगी। सरकार अगर फिर से हिन्दी थोपने का प्रयास करेगी तो उसे इससे भी ज्यादा कड़ा जवाब मिलेगा।  हिंदी भाषा का विरोध बढ़ता देख सरकारी आदेश रद्द बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में पहली कक्षा से पांचवी कक्षा तक तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी (Maharashtra Three Language Policy) को शामिल किया था। सरकार के इस फैसले का राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की पार्टी ने जमकर विरोध किया। मनसे कार्यकर्ताओं ने कई जगह पर हिन्दी भाषी लोगों के साथ मारपीट भी की। हिन्दी के खिलाफ विरोध बढ़ता देख देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुती सरकार ने ‘त्रि-भाषा’ नीति पर रोक लगाने के साथ एक समिति का गठन कर दिया, जो हिन्दी भाषा को लागू करना है या नहीं, इस बात का फैसला करेगी। राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने इस समिति को लेकर भी राज्य सरकार को धमकी दी है। उन्होंने कहा, ‘मैं फडणवीस सरकार को साफ शब्दों में कहना चाहता हूं, उनकी समिति की रिपोर्ट पक्ष में आए या विपक्ष में, लेकिन हिन्दी को दोबारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बात सरकार को हमेशा अपने दिमाग में रखनी चाहिए।”  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  राज ठाकरे के कार्यकर्ताओं ने मराठी न बोलने पर बुजुर्ग दुकानदार को पीटा  महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर जारी विवाद में राज ठाकरे के कार्यकर्ता अब सरेआम गुंडागर्दी करते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मनसे कार्यकर्ता मराठी न बोलने पर एक बुजुर्ग दुकानदार को पीटते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस दुकानदार को पीटा गया, वह मुंबई के मीरा रोड पर स्थित जोधपुर स्वीट्स का मालिक है। दुकानदार की सरेआम पिटाई के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत पैदा हो गया है। पुलिस ने मामले की गंभीर को देखते मनसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Raj Thackeray #RajThackeray #MarathiPride #MNS #MaharashtraPolitics #HindiVsMarathi #PoliticalWarning #LatestNews

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Old Delhi Station Renaming Proposal by CM Rekha Gupta

पुरानी दिल्ली स्टेशन का नाम बदलने के लिए सीएम रेखा गुप्ता ने रेलमंत्री को लिखा पत्र, जानिए कौन थे महाराज अग्रसेन?

दिल्ली की भाजपा सरकार (BJP Government) अब 160 साल पुराने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (Old Delhi Railway Station) का नाम बदलने जा रही है। इस स्टेशन का नाम अब ‘महाराजा अग्रसेन रेलवे स्टेशन’ (Maharaja Agrasen Railway Station) रखने का विचार किया जा रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) को एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने पुरानी दिल्ली स्टेशन का नाम बदलने के लिए निवेदन किया है। भाजपा का कहना है कि सीएम रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने यह फैसला सामाजिक न्याय और अहिंसा के प्रतीक माने जाने वाले हमारे महान राजा महाराजा अग्रसेन के सम्मान में लिया है।  स्टेशन के नाम में बदलाव (Maharaja Agrasen Railway Station) होने से यहां आने वाले लाखों लोग महाराजा अग्रसेन के बारे में बेहतर तरीके से जान सकेंगे, यह उनके लिए उचित श्रद्धांजलि होगी। भाजपा नेताओं का कहना है कि स्टेशन के नाम को बदलने के लिए लंबे समय से विचार किया जा रहा था। सीएम चाहती हैं कि इस मामले में रेल मंत्री खुद हस्तक्षेप करें, इसलिए उन्हें पत्र लिखा है।  महाराजा अग्रसेन के सामाजिक-आर्थिक विकास का दिल्ली पर गहरा प्रभाव  सीएम रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) को लिखे पत्र में नाम बदलने की वजह का भी जिक्र किया है। सीएम लिखती हैं कि, ‘महाराजा अग्रसेन के सम्मान में और उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (Old Delhi Railway Station) का नाम बदल कर उनके नाम पर रखना चाहते हैं। महाराजा अग्रसेन हमारे देश के एक सम्मानित और ऐतिहासिक व्यक्तित्व थे। उनकी विरासत का देश के सामाजिक-आर्थिक विकास पर और खास कर दिल्ली में बेहद गहरा प्रभाव पड़ा है।’ सीएम रेखा गुप्ता ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि ‘महाराजा अग्रसेन को सामाजिक न्याय, सामुदायिक कल्याण और आर्थिक दूरदर्शिता के प्रतीक के तौर पर जाना जाता है। उनके वंशज और अनगिनत अनुयायी आज भी दिल्ली को आर्थिक और सांस्कृतिक तरक्की दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अगर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर उनके नाम पर रखा गया तो यह उनके योगदान के लिए उन्हें एक उचित श्रद्धांजलि होगी। मैं आपके मंत्रालय द्वारा स्टेशन का नाम बदलने के प्रस्ताव पर जल्द से जल्द विचार करने का निवदेन करती हूं।’ उत्तर भारत का पहला रेलवे स्टेशन है पुरानी दिल्ली  बता दें कि चांदनी चौक इलाके में मौजूद पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (Old Delhi Railway Station) दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत का पहला रेलवे स्टेशन है। इस स्टेशन का निर्माण साल 1864 में किया गया था और 1 जनवरी 1867 को यहां पर पहली ट्रेन पहुंची थी। इस स्टेशन के मौजूदा भवन का निर्माण 1893 में शुरू किया गया था और यह 1903 में बन कर तैयार हुई। इस स्टेशन के बनने के बाद ही दिल्ली-कलकत्ता रेलवे लाइन की शुरुआत हुई थी। आज के समय में यहां पर 18 प्लेटफॉर्म्स बने हुए हैं और रोजाना यहां से होकर देश के विभिन्न हिस्सों में सैकड़ों ट्रेनें चलती हैं।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भगवान राम के वंशज थे महाराजा अग्रसेन महाराजा अग्रसेन अग्रोहा रजवाड़े के राजा थे, जो हरियाणा में पड़ता है और आज के समय में हिसार जिले के तौर पर जाना जाता है। महाराजा अग्रसेन सूर्यवंशी क्षत्रिय वंश के थे और इन्हें शासन में समानता, न्याय और अहिंसा को प्राथमिकता देने वाले महान भारतीय राजा के तौर पर याद किया जाता है। कहा जाता है कि इनका वंश भगवान राम से जुड़ा है और वे राम पुत्र कुश की 34वीं पीढ़ी के वंशज थे। इन्हें अग्रवाल समुदाय का पितामह भी कहा जाता है। इन्होंने अपने राज्य में बसने वाले नए परिवार को मदद देने के लिए ‘एक ईंट, एक रुपया’ प्रथा शुरू की थी।   Latest News in Hindi Today Hindi news Rekha Gupta #OldDelhiStation #RekhaGupta #MaharajaAgrasen #IndianRailways #StationRenaming

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Elon Musk warns Trump of launching a new ‘American Party’

एलॉन मस्‍क की राष्ट्रपति ट्रंप को खुली धमकी- ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पास हुआ तो बनाऊंगा नई ‘अमेरिकन पार्टी’

अरबपति एलॉन मस्क (Elon Musk) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के ‘वन बिग, ब्यूटीफुल बिल’ की एक बार फिर से जमकर आलोचना की है। इस आलोचना के दौरान एलॉन मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप को खुली धमकी भी दे डाली। उन्‍होंने कहा कि इस बिल को अगर सीनेट मंजूरी देती है, तो वह बिल पास होने के अगले ही दिन ‘अमेरिकन पार्टी’ नाम से नई राजनीतिक पार्टी बनाएंगे। एलॉन मस्क ने इस बिल को ट्रंप का पागलपन बताते हुए कहा कि यह देश के करोड़ों  टैक्‍सपेयर्स पर एक बोझ की तरह होगा।   बता दें कि ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ ट्रंप का ड्रीम बिल है। इसमें टैक्स कटौती, अवैध प्रवासियों को देश से निकालने और सेना का बजट बढ़ाने जैसी अहम योजनाओं पर खर्च को कई गुना बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। डोनाल्ड ट्रंप इस खास बिल के जरिए साल 2017 में लागू किए गए टैक्स कटौती योजना को और आगे ले जाना चाहते हैं। साथ ही देश से प्रवासियों को निकालने के साथ सेना को और मजबूत बनाना चाहते हैं। इस बिल में 4.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने का प्रावधान रखा गया है। इस भारी भरकम बिल के कारण ही आलोचक इसका विरोध कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि अगर यह बिल पास होता है तो अमेरिका के राष्ट्रीय कर्ज में करीब 3.3 ट्रिलियन डॉलर की बढ़ोत्तरी होगी साथ ही गरीबों के हेल्थकेयर में 1 ट्रिलियन डॉलर की कटौती की जाएगी।  एलॉन मस्क ने सांसदों को भी दे दी खुली धमकी  एलॉन मस्क (Elon Musk) ने इस बिल का शुरू से ही तीखा विरोध कर रहे हैं। इस बिल की वजह से ही वो ट्रंप के दोस्त से उनके दुश्मन बन चुके हैं। ट्रंप प्रशासन का साथ छोड़ने के बाद से ही वो इस बिल का खुला विरोध करते आ रहे हैं। इस बार भी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘देश का हर वो सांसद जो देश के पैसे का बर्बादी नहीं चाहता और खर्च कम करना चाहता है। अगर वो कर्ज बढ़ाने वाले इस ऐतिहासिक बिल के पक्ष में वोट देता है, उसे शर्म आनी चाहिए।’ इस के साथ मस्क ने यह भी धमकी दी कि, ‘अगर किसी सांसद ने इस बिल के पक्ष में वोट किया, तो उसे मैं अगले साल उनके प्राइमरी चुनाव में हराकर दम लूंगा, इसके लिए चाहे मुझे कुछ भी करना पड़े।’ लोगो को नया विकल्प देने के लिए बनाउंगा नई पार्टी- मस्क  एलॉन मस्क ने अपने एक दूसरे पोस्ट में राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर ये ‘वन बिग ब्यूटीफुल बिल’ पास हुआ, तो वे अगले ही दिन ‘अमेरिकन पार्टी’ के नाम से नई पार्टी बनाएंगे। अब वक्त है कि अमेरिकी लोगों को रिपब्लिकन्स और डेमोक्रेट्स के अलावा एक तीसरी राजनीतिक पार्टी का भी विकल्प दिया जाए। इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।   इसे भी पढ़ें:- अमेरिका ने कनाडा से तोड़े व्यापारिक रिश्ते, डिजिटल सर्विस टैक्स बना विवाद की जड़ सीनेट में वोटिंग शुरू, 7 घंटे में मात्र 14 वोट  बता दें कि, अमेरिकी सीनेट में इस बिल पर सोमवार को वोटिंग की गई। अमेरिका में किसी भी बिल के संशोधन पर अलग-अलग वोटिंग होती है। इस बिल पर पहले 7 घंटे के दौरान मात्र 14 वोट ही पड़े। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी इस बिल को शुक्रवार तक सीनेट में पास कराना चाहती है, लेकिन यहां पर रिपब्लिकन पार्टी अल्पमत में है। जिसकी वजह से इस बिल के सीनेट में लटकने की संभावना ज्यादा है। अगर यहां से यह बिल पास हो जाता है तो इसे हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में रखा जाएगा, जहां रिपब्लिकन बहुमत में हैं। हालांकि डेमोक्रेट्स के साथ कुछ रिपब्लिकन भी इस बिल का खुल कर विरोध कर रहे हैं। ऐसे लोगों का दावा है कि अगर यह बिल आया तो लाखों नौकरियां खत्म हो जाएंगी। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप इस बिल को अपनी नीतियों की बड़ी जीत के तौर पर पेश कर रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Elon Musk #ElonMusk #DonaldTrump #AmericanParty #USPolitics #OneBigBeautifulBill #MuskVsTrump #USElection2025

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Defense Attaché's 'Operation Sindoor'

डिफेंस अताशे के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बयान ने मचाया हंगामा, कांग्रेस के आरोप पर भारतीय दूतावास ने दी सफाई

इंडोनेशिया में एक सेमिनार को संबोधित करते हए भारतीय डिफेंस अताशे (Indian Defence Attaché) कैप्टन शिव कुमार (नौसेना) द्वारा ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) पर दिए गए एक बयान से विवाद खड़ा हो गया है। नौसेना कैप्टन शिव कुमार ने सेमिनार में दावा किया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के प्रथम चरण में 7 मई को भारतीय वायुसेना को “कुछ लड़ाकू विमानों का नुकसान हुआ था”। क्योंकि हमारे राजनीतिक नेतृत्व ने पाकिस्तान के किसी भी सैन्य प्रतिष्ठान पर हमला न करने को कहा था। सेना को सिर्फ आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त करने का आदेश मिला था। जिसका वो पालन कर रही थी।   कैप्टन शिव कुमार ने इंडोनेशिया में यह बयान 10 जून को दिया था, जिसका वीडियो अब वायरल हुआ। इस वीडियो में कैप्टन शिव कुमार यह कहते दिख रहे हैं कि, “भारत को प्रारंभिक चरण में सिर्फ इसलिए नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि हमारे राजनीतिक नेतृत्व ने पाकिस्तान की किसी भी सैन्य संरचना या एयर डिफेंस को निशाना न बनाने का निर्देश दिया था। लेकिन शुरूआती नुकसान के बाद हमारी सेना इस रणनीति पर फिर से विचार किया और उसमें बदलाव करते हुए दुश्मन की एयर डिफेंस को निशाना बनाना शुरू किया। ब्रह्मोस मिसाइलों से सफल हमला कर दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया गया। हमारी सेना ने दुश्मन को पंगु बना दिया था।”  कांग्रेस ने लगाया राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का आरोप  कैप्टन का यह बयान वायरल होने के बाद अब विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस (Congress) ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार पर हमला बोल दिया है। कांग्रेस (Congress) प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इसे मोदी सरकार की विफलता करार देते हुए कहा कि, ”प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) इस मुद्दे पर जानकारी देने के लिए ऑल-पार्टी मीटिंग क्यों नहीं बुला रहे हैं। हमारे डिफेंस अताशे का यह बयान सीधे तौर पर सरकार की जवाबदेही तय करती है।” पवन खेड़ा ने पीएम मोदी (PM Modi) और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत पूरी केंद्र सरकार पर देश की सुरक्षा से समझौता करने का गंभीर आरोप लगाते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के प्रथम चरण में नुकसान की बात स्वीकार की थी। बता दें कि, पिछले महीने सीडीएस ने सिंगापुर में ब्लूमबर्ग न्यूज को एक इंटरव्यू देते हुए बताया था कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती चरण में विमान खोने के बाद अपनी रणनीति बदली और पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। हालांकि इस दौरान सीडीएस ने पाकिस्तान के उस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें वो छह भारतीय फाइटर जेट को मार गिराने की बात कह रहा है।  इसे भी पढ़ें:- ‘लालू परिवार की जमीन पर होगा सरकार का कब्जा, बनेगा भूमिहीन गरीबों का घर’, JDU नेता के बयान से सियासी हलचल तेज भारतीय दूतावास ने आरोप लगता देख जारी की सफाई डिफेंस अताशे (Indian Defence Attaché) के बयान पर विवाद बढ़ता देख भारतीय दूतावास (जकार्ता) ने भी सफाई दी है। दूतावास ने अपने X पोस्ट में कहा, ”हमारे डिफेंस अताशे के बयान को बिना किसी संदर्भ पेश किया गया और मीडिया में भी गलत तरीके से दिखाया जा रहा है। कैप्टन कुमार ने सिर्फ यह बताने की कोशिश की है कि हमारी सेना राजनैतिक नेतृत्व के अधीन काम करती है, जो भारतीय लोकतांत्र की शानदार परंपरा को दिखाती है।” दूतावास के बयान में यह भी कहा गया कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद सिर्फ आतंकी अड्डों को ध्वस्त करना था। भारत की कार्रवाई न तो उकसावे वाली थी और न ही किसी देश को नुकसान पहुंचाने वाली।  आपको बता दे कि डिफेंस अताशे किसी भी देश का एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी होता है, जो उस देश के दूतावास में तैनात होता है। यह अपने देश के रक्षा प्रतिष्ठान का प्रतिनिधित्व करने के साथ डिफेंस से जुड़े सभी कार्यों को देखता है। इसके माध्यम से ही रक्षा उत्पादों की खरीद-बिक्री की जाती है।   Latest News in Hindi Today Hindi news Congress सीडीएस #OperationSindoor #DefenseAttaché #Congress #IndianEmbassy #DiplomaticRow #IndiaNews

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Lalu Yadav land

‘लालू परिवार की जमीन पर होगा सरकार का कब्जा, बनेगा भूमिहीन गरीबों का घर’, JDU नेता के बयान से सियासी हलचल तेज

बिहार में इस साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। चुनाव में उतर रही राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे को घेरने के साथ अपनी सियासी जमीन तैयार करने में जुटी है। इस बीच जदयू (JDU) ने घोषणा की है कि अगर राज्य में सरकार बनती है तो राजद (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad) की पटना के फुलवारीशरीफ में मौजूद जमीन को जब्त किया जाएगा। इस जमीन पर सरकारी खर्च पर घर बनाए जाएंगे और वो घर राज्य के भूमिहीन गरीब लोगों को दिया जाएगा।  यह घोषणा जदयू (JDU) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने फुलवारीशरीफ में आयोजित पार्टी के एक कार्यक्रम में कही। नीरज कुमार ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि लालू परिवार जब भी सत्ता में आई, जनता को सिर्फ लूटने का कार्य किया। इस परिवार ने राज्य के गरीब लोगों को लूटकर पटना और इसके आसपास के इलाकों में करीब 40 एकड़ जमीन बनाई है। इनमें से 6 एकड़ जमीन तो सिर्फ फुलवारशरीफ में ही मौजूद है। नीरज कुमार ने कहा कि लालू प्रसाद (Lalu Prasad) और उनका परिवार जनता को लूटकर पटना का सबसे बड़े शहरी जमींदार बन चुका है। लालू परिवार ने अपने पूरे शासनकाल में भ्रष्टाचार का केवल धन का ही अर्जन किया। इनकी सरकार के एजेंडे में जन कल्याण कभी नहीं रहा। बता दें कि नीरज कुमार राज्य कैबिनेट में सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री भी रह चुके हैं। अभी वो विधान परिषद के सदस्य हैं।  कानून बनाकर ली जाएगी लालू परिवार की जमीन- नीरज  लालू प्रसाद (Lalu Prasad) की जमीन को सरकार के अधीन कर उस पर गरीबों के लिए घर बनावाने की घोषणा जदयू की तरफ से किसी नेता ने पहली बार की है। नीरज के इस घोषणा ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। नीरज ने अपनी घोषणा में यह भी कहा कि लालू की जमीन का गरीबों को देने के लिए राज्य सरकार द्वारा बकायदा कानून लाया जाएगा। राजद (RJD) ने अपने 15 साल के शासन में गरीबों को खूब लूटा है। केंद्र सरकार में मंत्री रहते भी लालू यादव ने नौकरी के बदले लोगों की जमीन हड़पी। अब समय आ गया है कि गरीब जनता को उनका हक वापस दिया जाए और यह काम हमारी सरकार करेगी।  राजद प्रवक्ता ने भी किया नीरज पर तीखा पलटवार   जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार के इस बयान पर राजद (RJD) ने तीखा पलटवार किया है। राजद के मुख्य प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि इस साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में जीत कर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद नई सरकार बनाने जा रही है। जिसके बाद एनडीए शासनकाल के दौरान इनके सभी नेताओं का भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति की जांच होगी। जिन्होंने भी जनता और राज्य को लूटा है उन्हें माफ नहीं किया जाएगा। चितरंजन गगन ने यह भी कहा कि नीरज कुमार जागते हुए सपना देख रहे हैं कि फिर से उनकी सरकार (Bihar Assembly Elections) बनने जा रही है। लेकिन सच यह है कि बिहार की जनता ने नीतीश सरकार को इस बार जड़ से उखाड़ फेकने का मन बना लिया है। इस सरकार में भ्रष्टाचार और अपराध जिस स्तर तक पहुंचा है, वह अपने आप में एक शर्मनाक रिकॉर्ड है। यह सरकार आम जनता का शोषण कर रही है और यह हमारी जनता भी अब समझ चुकी है। इनके सपने सिर्फ सपने ही रह जाएंगे।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? वोटर लिस्ट को लेकर बिहार का सियासी घमासान तेज  चुनाव आयोग बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों के विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान चला रहा है। इसको लेकर भी यहां खूब हंगामा मचा हुआ है। विपक्ष  दल इसे भाजपा का षडयंत्र बता इसके खिलाफ राजनीतिक लड़ाई के साथ कानून लड़ाई लड़ने की बात कह रही हैं। महागठबंधन में शामिल पार्टियों का कहना है कि चुनाव आयोग के इस अभियान का मकसद विपक्ष के वोट को काटना है। इसके खिलाफ जल्द ही राजनीतिक अभियान शुरू किया जाएगा।  Latest News in Hindi Today Hindi news Lalu Prasad #LaluYadav #JDULeader #BiharPolitics #LandDispute #PoorHousingScheme #LaluFamily #PoliticalControversy

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Trump Warns of Bombing Iran Again if Needed

‘जरूरत पड़ने पर बिना सवाल ईरान पर फिर से बरसाएंगे बम’, सीनेट में समर्थन मिलने के बाद बोले ट्रंप

इजरायल और ईरान युद्ध (Israel–Iran War) के दौरान अमेरिका ने भी ईरान पर बम गिराए थे। अमेरिका ने यह बम ईरान के तीन प्रमुख न्यूक्लियर साइट पर गिराए थे और दावा किया था कि इस हमले में ईरान के परमाणु ठिकाने पूरी तरह से नष्ट हो गए, वहीं ईरान का दावा है कि उसके परमाणु ठिकानों को सिर्फ मामूली नुकसान हुआ है। हालांकि अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) इस हमले को लेकर अपने ही देश में अपने विरोधियों के निशाने पर हैं। अमेरिका के कांग्रेस का ऊपरी सदन में अमेरिकी हमले को लेकर बहस भी हुई और डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को ईरान पर आगे हमला करने से रोकने का प्रयास भी हुआ। लेकिन विपक्षी पार्टी डेमोक्रेटिक पार्टी का यह प्रयास विफल हो गया। डेमोक्रेटिक पार्टी सीनेट में अमेरिकी राष्ट्रपति के युद्ध शक्तियों को फिर से स्थापित करने का प्रयास लेकर आई थी। डेमोक्रेटिक पार्टी का दावा था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बिना कांग्रेस से अनुमति लिए ईरान पर हमला (Israel–Iran War) किया था, लेकिन डेमोक्रेटिक सांसदों के इस प्रस्ताव को रिपब्लिकन पार्टी ने विफल कर दिया। इस प्रस्ताव को वर्जीनिया के डेमोक्रेिटक सीनेटर टिम कैन ने रखा था। इसमें टिम कैन ने लिखित में प्रस्ताव दिया था कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति ट्रंप ने नियम का उल्लंघन किया है। अगर आगे इस तरह की सैन्य कार्रवाई शुरू की जाए तो पहले ट्रंप को कांग्रेस से अनुमति लेनी होगी।  ईरान पर फिर हमला कर सकते हैं- ट्रंप सीनेट में प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान जब उनसे पूछे गया कि क्या वह आवश्यक समझे जाने पर फिर से ईरान के न्यूक्लियर साइट पर बमबारी करने पर विचार कर सकते हैं, तो इस पर ट्रंप ने कहा, ‘हां, जरूर बिना किसी सवाल के। अगर जरूरत पड़ी तो वह बगैर सोचे ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं।’ वहीं, सीनेट में इस प्रस्ताव को रखने को विपक्ष की ट्रंप को घेरने की एक लंबी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।  सीनेट में ट्रंप को मिला पूरा समर्थन  बता दें कि सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53-47 का बहुमत हैं। जब इस प्रस्ताव को रखा गया तो वे राष्ट्रपति के समर्थन में खड़े हो गए। इन सीनेटर का कहना था कि ईरान न सिर्फ इजरायल के लिए एक बड़ा खतरा है, बल्कि अमेरिका समेत पूरी दुनिया के लिए खतरा है। इसलिए ईरान तक कठोर कार्रवाई जरूरी था। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान पर हमला करने का जो निर्णाय लिया वह ठीक था, इस कार्रवाई के कारण ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम कई साल पीछे चला गया है। इस दौरान रिपब्लिकन सीनेटर एकमत होकर कांग्रेस की मंजूरी लिए बिना ईरान के तीन न्यूक्लियर साइट पर अमेरिकी बमबारी करने के फैसले का समर्थन किया।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? ट्रंप अगर डील करना चाहते हैं तो सम्मान करें- ईरान  डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ जहां अपने ही देश में घेरे जा रहे हैं, वहीं बड़बोलेपन की वजह से ईरान भी उन पर पलटवार कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर ट्रंप ईरान के साथ वास्तव में कोई समझौता करना चाहते हैं तो उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के प्रति सम्मानजनक भाषा का उपयोग करा होगा। दरअसल, ट्रंप ने कहा था कि अयातुल्ला खामेनेई को अपमानजनक मौत मिलने वाली थी, लेकिन हमने बचा लिया। इसी के जवाब में ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि ‘ईरानी लोगों का आत्मसम्मान और दृढ़ता खून में है। हमारी राष्ट्रीय भावना बेहद सीधी और स्पष्ट है। हम अपनी स्वतंत्रता को समझते और पहचानते हैं। हम किसी को अपने भाग्य का निर्धारण करने की इजाजत नहीं देते। इसके लिए हम अपनी आखिरी सांस तक लड़ते हैं। अगर ट्रंप को ईरान के साथ कोई समझौता करना है, तो उन्हें सम्मानपूर्वक बात करनी होगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump #trump #iran #bombing #senate #usnews #worldnews #middleeast

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Pakistan approached Court of Arbitration on Indus Water Treaty

सिंधु जल समझौते पर कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन पहुंचा पाकिस्तान तो भारत ने दे दिया करारा झटका

सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को भारत द्वारा स्थगित करने के बाद से ही पाकिस्तान कभी युद्ध की धमकी दे रहा है तो कभी बातचीत की भीख मांग रहा है। लेकिन इससे भी दाल नहीं गली तो वह सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को लेकर नया ड्रामा शुरू कर दिया था, लेकिन यहां भी भारत को तगड़ा झटका दिया। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा और रतले जलविद्युत परियोजनाओं (Hydroelectric Projects) को लेकर पाकिस्तान ने कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (Court of Arbitration) में भारत की शिकायत की थी। जिसे भारत ने गैरकानूनी और अवैध बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया। भारत ने कहा है कि इस कोर्ट की न तो कानूनी मान्यता है और न ही यह मुद्दा इसके अधिकार क्षेत्र में आता है।  बता दें कि, साल 1960 में भारत और पाकिस्तान ने वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल समझौता (Indus Water Treaty) किया था। इस संधि के तहत सिंधु नदी बेसिन की 6 नदियों में से 3 पूर्वी नदियों (ब्यास, रावी और सतलुज) का पानी भारत को और 3 पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम और चिनाब) का पानी पाकिस्तान को मिला था। किशनगंगा नदी झेलम की एक उपनदी है और इस पर भारत का अधिकार है, लेकिन पाकिस्तान लंबे समय से भारत के किशनगंगा (330 मेगावाट) और रतले (850 मेगावाट) परियोजना पर रोक लगाने की मांग कर रहा है। पाकिस्तान का दावा है कि भारत की यह परियोजनाएं सिंधु जल समझौते का उल्लंघन कर रही है। इसकी वजह से झेलम में आने वाला पानी प्रभावित हो रहा है। वहीं भारत का कहना है कि यह दोनों प्रोजेक्ट ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ (पानी नहीं रोका जाता) तकनीक पर आधारित है, जो समझौते के किसी भी नियम को नहीं तोड़ता।  पाकिस्तान के कोर्ट ड्रामे पर भारत का करारा जवाब भारत के इस प्रोजेक्ट पर रोक लगाने के लिए ही पाकिस्तान कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (Court of Arbitration) पहुंचा था। पाकिस्तान ने कोर्ट से इन प्रोजेक्ट पर ‘सप्लीमेंटल अवॉर्ड’ (पूरक फैसला) की मांगा की थी, लेकिन भारत ने इस कोर्ट को ही अवैध बता दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय (Indian Foreign Ministry) ने बयान जारी कर कहा, ‘यह कोर्ट गैरकानूनी रूप से बनाया गया है और इसके किसी भी फैसले का न तो कानूनी आधार है और न ही बाध्यता। इस अवैध कोर्ट के फैसले हमेशा से शून्य और अमान्य रहे हैं।’ इस दौरान विदेश मंत्रालय Indian Foreign Ministry ने यह भी बताया कि विश्व बैंक द्वारा नियुक्त तटस्थ विशेषज्ञ मिशेल लिनो को भारत ने पत्र लिखकर मौजूदा विवाद समाधान प्रक्रिया को स्थगित करने की मांग की है। भारत अब न तो पाकिस्तान को इन नदियों से जुड़ा कोई लिखित दस्तावेज या जानकारी देगा और न ही संयुक्त बैठक करेगा।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भारत ने क्या दिया है पाकिस्तान को संदेश? भारत ने पाकिस्तान को यह साफ कर दिया है कि सिंधु जल समझौता पूरी तरह से स्थगित कर दिया गया है। भारत अब पूर्वी नदियों के साथ पश्चिमी नदियों के पानी को भी पूरा इस्तेमाल करने का हक रखता है। खासकर तब, जब पाकिस्तान लगातार भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की कोशिश कर रहा है। भारत अब न सिर्फ पाकिस्तान की हर चाल को नाकाम कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा दिया कि वह अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पश्चिमी नदियों के पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करके पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में पानी की कमी को पूरा कर सकता है। भारत ने इसके लिए प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। इन राज्यों में पश्चिमी नदियों का पानी पहुंचाने के लिए भारत नए नहर बनाने पर विचार कर रहा है। पाकिस्तान को मिर्ची लगी हुई है और वहां के नेता युद्ध की धमकी दे रहे हैं। जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा है कि, ‘पाकिस्तान की ये सारी कोशिशें महज गीदड़भभकी हैं। भारत पहले की तरह अपने रुख पर अडिग है।’ Latest News in Hindi Today Hindi news Hydroelectric Projects Indian Foreign Ministry #induswatertreaty #pakistannews #indiaresponse #courtofarbitration #sindhuwaterdispute

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PM Modi and President Trump

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ‘भारत के साथ ट्रेड डील लगभग फाइनल, चीन को लेकर भी कर दी बड़ी घोषणा

अमेरिका और भारत के बीच हो रहे ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) को लेकर अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बड़ा संकेत दिया है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने व्हाइट हाउस में हो रहे बिग ब्यूटीफुल बिल इवेंट में बोलते हुए कहा कि वो जल्द ही भारत के साथ एक बहुत बड़ी डील (Indo-US Trade Deal) करने जा रहे हैं। यह डील अमेरिका और भारत दोनों के लिए फायदेमंद रहने वाला है। इसी इवेंट में ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड डील हो चुकी है। बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने इसी साल 2 अप्रैल को कई देशों पर भारी भरकम टैक्स लगाने की घोषणा की थी। इसी दौरान भारत से आने वाले कई सामानों पर भी 26 फीसदी तक एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की घोषणा की गई थी। हालांकि, दबाव बढ़ने पर ट्रंप प्रशासन ने नए ट्रैरिफ पर 90 दिनों की रोक लगाते हुए कहा था कि यह टैक्स 9 जुलाई से दोबारा लागू होगा। इसके बाद से ही ट्रंप प्रशासन के अधिकारी कई देशों के साथ बातचीत कर इस ट्रेड डील करने में जुटा है। पिछले कई दिनों से अमेरिकी अधिकारी भारत से भी ट्रेड डील (Indo-US Trade Deal) करने में जुटे हैं। भारत चाहता है कि उसे अमेरिका द्वारा थोपे गए इस एक्स्ट्रा टैक्स से पूरी तरह छूट मिले। वहीं, अमेरिका चाहता है कि उसके कृषि उत्पादों के लिए  भारत अपने बाजार को पूरी तरह खोले और कुछ खास प्रोडक्ट्स पर टैक्स छूट दे। ट्रंप ने ट्रेड डील के बारे में क्या कहा? बिग ब्यूटीफुल बिल इवेंट में डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इसी मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि, “हर कोई हमारे साथ सौदा करना चाहता है और ट्रेड डील का हिस्सा बनना चाहता है। आप लोग याद कीजिए कुछ महीने पहले मीडिया कहती थी कि, क्या वाकई कोई देश है जिसकी हमारे साथ ट्रेड डील करने में कोई दिलचस्पी हो? छोड़ो, हमने कल ही खास ट्रेड डील पर चीन के साथ हस्ताक्षर किए हैं। हमने पिछले कुछ दिनों में कई बेहतरीन सौदे किए हैं। हमारे पास एक और बड़ा सौदा करने वाले हैं, शायद भारत (Indo-US Trade Deal) के साथ। यह बहुत बड़ा होने वाला है। जहां हम एक तरफ भारत के दरवाजे अपने लिए खोलने जा रहे हैं, वहीं चीन के दरवाजे अपने लिए खोल चुके हैं।”  ट्रंप ने इस दौरान यह भी कहा कि इस तरह का खास सौदा हर देश के साथ नहीं किया जाएगा। इस तरह का सौदा कुछ खास देशों के लिए ही है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम हर किसी के साथ इस तरह का सौदा नहीं करेंगे। कुछ देशों को हम सिर्फ पत्र भेजकर उनका धन्यवाद करेंगे। ऐसे देशों को अमेरिका में अपना प्रोडेक्ट बेचने के लिए 25, 35, 45 फीसदी टैरिफ का भुगतान करना ही होगा। यह तरीका सभी के लिए आसान होगा।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भारत और चीन से डील के बारे विस्तार से नहीं बताया  ट्रंप ने अपने भाषण के दौरान न तो यह बताया कि अमेरिका ने चीन के साथ किस तरह की डील की है और न ही यह बताया कि भारत के साथ किस तरह की डील करने जा रहे हैं। हालांकि इसी माह के शुरुआत में CNN ने चीन के साथ ट्रेड डील को लेकर एक रिपोर्ट लिखी थी, जिसमें बताया था कि दोनों देश एक नया व्यापार समझौता करने के बेहद करीब हैं। यह डील अमेरिका के लिए ज्यादा फायदेमंद होने वाला है। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि भारत और अमेरिका भी ट्रेड डील पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन भारत और पाकिस्तान में सीजफायर कराने का जबरन श्रेय लेने के कारण भारत इस डील को धीमा कर दिया है। हालांकि ट्रंप के बयान से ऐसा लग रहा है कि दोनों देश इस डील के करीब पहुंच गए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Indo-US Trade Deal #donaldtrump #indiatradedeal #usindiarelations #chinaannouncement #trumplatestnews

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voter list update

बिहार चुनाव से पहले आयोग कर रहा वोटर लिस्ट की एसआईआर, मतदाताओं को दिखाने होंगे ये खास दस्तावेज

बिहार में इस साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को लेकर एक तरफ जहां राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारी में जुटी हैं, तो वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग भी अपनी तैयारी को पुख्ता कर रहा है। चुनाव आयोग (Election Commission) इस समय वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कर रहा है। इस दौरान चुनाव आयोग के कर्मचारी घर-घर जाकर मतदाताओं का सर्वे कर रहे हैं। इसके आधार पर ही वोटर लिस्ट में नए मतदाताओं को जोड़ने और फर्जी मतदाताओं को हटाने का कार्य किया जाएगा। एसआईआर (SIR) अभियान को लेकर बिहार के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के ऑफिस (Election Commission) द्वारा एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई है। जिसमें बताया गया है कि ग्राउंड पर लिस्ट तैयार होने के बाद उसकी जांच बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) करेंगे। इस दौरान मतदाताओं के वैध दस्तावेजों की जांच होगा, फिर लिस्ट की सत्यापन कर उसे वोटर लिस्ट में अपडेट किया जाएगा। इसके बाद लिस्ट में सुधार के लिए मतदाताओं को भी कुछ समय दिया जाएगा और फिर फाइनल लिस्ट जारी कर मतदान के चुनाव तारीखों (Bihar Assembly Elections) का ऐलान कर दिया जाएगा। चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा बिहार में मतदाता सूची का एसआईआर करीब 22 साल बाद किया जा रहा है। इससे पहले यह काम साल 2003 में किया गया था। ऐसे में मतदाताओं के मन में भी यह सवाल है कि चुनाव आयोग के कर्मचारी जब उनके घ्घर आएंगे तो उन्हें क्या-क्या दस्तावेज दिखाना होगा? 27 जुलाई तक होगा सत्यापन चुनाव आयोग के अनुसार एसआईआर (SIR) का कार्य शुरू हो गया है और यह अगले कुछ सप्ताह में पूरा हो जाएगा। इसके बाद बीएलओ 27 जुलाई तक मतदाताओं द्वारा दिए गए दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। एसआईआर के दौरान आयोग के कर्मचारी जब घर पहुंचेंगे तो हर वोटर को एक फॉर्म देंगे, जिसे उन्हें भरना होगा। मतदाता इस फॉर्म को भरकर अपने सभी डॉक्यूमेंट के साथ वापस बीएलओ को देंगे। अगर मतदाता चाहे तो इस फॉर्म को भरने के बाद उसे निर्वाचन विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन भी अपलोड कर सकता है। आइये जानते हैं कि मतदाताओं को क्या-क्या दस्तावेज देना होगा।  1 जुलाई 1987 से पहले जन्म लेने वाले मतदाता जिन मतदाताओं का जन्म भारत में 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है, उन्हें अपनी जन्म तिथि और  स्थान की सत्यापन के लिए कोई भी एक वैध दस्तावेज देना होगा।  1987 से 2004 के बीच जन्में मतदाता जिन मतदाताओं का जन्म 1 जुलाई 1987 के बाद और 2 दिसंबर 2004 से पहले भारत में हुआ है, उन्हें अपने पहचान पत्र के साथ अपने माता-पिता में से भी किसी एक का पहचान पत्र देना होगा।  2 दिसंबर 2004 के बाद जन्मे मतदाता वहीं, जिन मतदाताओं (Election Commission) का जन्म 2 दिसंबर 2004 के बाद भारत में हुआ है उन्हें अपने साथ अपने माता-पिता (दोनों) का वैध दस्तावेज देना होगा। अगर माता-पिता में से कोई या फिर दोनों विदेशी नागरिक है, तो उसे अपने जन्म प्रमाण पत्र के साथ  विदेशी नागरिक के वैध पासपोर्ट और वीजा की सेल्फ अटेस्टेड प्रति भी जमा करनी होगी।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? चुनाव आयोग को देने होंगे ये दस्तावेज 1. आम मतदाता कोई भी वैध पहचान पत्र दे सकता है। वहीं केंद्र/राज्य सरकार के कर्मचारी अपने वेतन या पेंशन भुगतान आदेश की प्रति भी लगा सकते हैं।  2. सरकार द्वारा जारी 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई भी पहचान पत्र/प्रमाण पत्र, स्थानीय निकाय, बैंक, पोस्ट ऑफिस, एलआईसी या पीएसयू द्वारा जारी कोई भी दस्तावेज मान्य होगा।  3. जन्म प्रमाण पत्र  4. विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट जरूरी  5. मान्यता प्राप्त किसी भी विश्वविद्यालय या बोर्ड द्वारा जारी शैक्षणिक प्रमाण पत्र या मैट्रिक का सर्टिफिकेट भी मान्य  6. केंद्र सरकार और राज्य सरकार की किसी संस्था द्वारा जारी मूल निवास प्रमाण पत्र मान्य है।  7. ओबीसी, एससी और एसटी का जाति प्रमाण पत्र 8. वन अधिकार प्रमाण पत्र 9. राज्य सरकार या किसी स्थानीय निकाय का फैमिली रजिस्टर में शामिल नाम का पत्र  10. सरकार द्वारा जारी किसी जमीन का या फिर घर का प्रमाण पत्र Latest News in Hindi Today Hindi news Election Commission #bihar2025 #voterlistupdate #elections2025 #voterverification #biharnews

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चीन की धरती से पाकिस्तान को फटकार… SCO बैठक में राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए आतंकवाद पर जमकर लताड़ा

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान को चीन की धरती पर आड़े हाथों लिया है। रक्षा मंत्री ने चीन के किंगदाओ शहर में हो रहे SCO (शंघाई सहयोग संगठन) सम्मेलन में रक्षा मंत्रियों की बैठक में पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए आतंकवाद पर पाकिस्तान को जमकर लताड़ा। राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने पाकिस्तान का बिना नाम लिए कहा कि कुछ देश ऐसे हैं, जो सीमा पार आतंकवाद को खास रणनीति की तरह इस्तेमाल कर आतंकवादियों को पनाह देते हैं और दूसरे देशों में आतंक फैलाते हैं। ऐसे दोहरे मापदंडों को अपनाने वाले देशों के लिए दुनिया में कोई सुरक्षित जगह नहीं होनी चाहिए।    उन्होंने एससीओ (SCO) से कहा कि ऐसे आतंक परस्त देशों की आलोचना करने में किसी को संकोच नहीं करना चाहिए। क्योंकि आतंकवाद किसी एक देश के लिए नहीं बल्कि मानवता के लिए बड़ा खतरा है। इसलिए एससीओ (SCO) को एकजुट होकर आतंकवाद से मुकाबला करना चाहिए। इस दौरान राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने सदस्य देशों से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने और एकजुट रहने का आह्वान किया। बता दें कि मई 2020 में लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा पर सैन्य गतिरोध के बाद भारतीय रक्षा मंत्री की यह पहली चीन यात्रा है। इस सैन्य झड़प की वजह से दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव आ गया था। हालांकि हाल ही में दोनों देशों के बीच कई उच्च स्तरीय बैठक हुई हैं, जिसके बाद दोनों देशों के रिश्ते सामान्य होते नजर आ रहे हैं। दोनों देश कूटनीति से सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।   आतंकवादी और उनके ठिकानों को हम ढूंढ-ढूंढ कर खत्म करेंगे- सिंह  रक्षा मंत्री (Rajnath Singh) ने अपने संबोधन में भारत के ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टोरलेन्स आज उसके कार्यों में झलकती है। इस नीति में आतंकवाद के खिलाफ खुद की रक्षा करने का अधिकार भी शामिल है। हमने यह करके दिखा दिया है कि आतंकवादी और उनका ठिकाना अब कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। वो चाहे जहां छुपकर बैठे हों, हम उन पर प्रहार करने में एक पल भी संकोच नहीं करेंगे। आतंकवाद के ठिकाने चाहे जहां पर भी हों, अगर वो हम पर अटैक करते हैं तो हम उन्हें ढूंढ-ढूंढ कर खत्म कर देंगे। राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंक फैलाने के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा लिया जा रहा है। इसलिए  हमें सीमा पार से हथियार और ड्रग्स तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाले ड्रोन को रोकने की कोशिश करनी चाहिए। हम सभी के हित आपस में जुड़े हैं, हम एक ऐसी नई चुनौती का सामना कर रहे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और साइबर हमलों से लेकर हाइब्रिड युद्ध तक फैला हुए है। इस आतंकवाद को फैलने से रोकने के लिए हमें मिलकर सक्रिय कदम उठाने की जरूरत है।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? आतंक को रोकने के लिए एकजुट होना होगा- सिंह  रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि आतंकवाद के ये खतरे किसी राष्ट्रीय सीमा का सम्मान नहीं करते हैं। इनको रोकने के लिए आपसी विश्वास और सहयोग पर आधारित एकीकृत प्रतिक्रिया की जरूरत है। भारत आतंकवाद के सभी रूपों का सामना करने के लिए अपने संकल्प की पुष्टि करता है। दुनिया को कोई भी देश, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली और विशाल क्यों न हो, अकेले अपने दम पर इन्हें नहीं रोक सकता है। इसलिए सभी राष्ट्रों को अपने पारस्परिक लाभ के लिए एकजुट होकर काम करना चाहिए। हमारे यहां सदियों पुरानी एक कहावत ‘सर्वे जन सुखिनो भवन्तु’ है, जो हमारी इस भावना को दर्शाता है। इसका अर्थ है ”सभी के लिए शांति और समृद्धिय”।  Latest News in Hindi Today Hindi news Rajnath Singh #rajnathsingh #scomeeting2025 #operationsindoor #pakistanterror #indiadiplomacy #chinaindiarelations #terrorism

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