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दिल्ली के सीमापुरी में इमारत ढही, 4 की मौत; कई घायल, मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी

नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके में एक बहुमंजिला इमारत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। घटना में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। मृतकों में एक गर्भवती महिला और बच्चे भी शामिल हैं। हादसे के बाद Delhi Fire Service, Police और rescue teams ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया। दोपहर करीब 3:30 बजे ढही इमारत यह हादसा बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे न्यू सीमापुरी की संकरी गलियों में हुआ। Delhi Fire Service को collapse की सूचना मिलने के बाद कई fire tenders और rescue teams मौके पर भेजी गईं। 11 लोग मलबे में फंसे थे प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक collapse के बाद करीब 11 लोग मलबे में फंस गए थे। स्थानीय लोग भी firefighters के साथ debris हटाने और लोगों को निकालने में मदद करते नजर आए। गर्भवती महिला की भी मौत मृतकों में 21 वर्षीय Gulafsa भी शामिल थीं, जो करीब चार महीने की गर्भवती थीं। परिवार के अनुसार मलबे में दबे रहने के दौरान उन्होंने फोन कर पानी मांगा और सांस लेने में परेशानी की बात कही थी। बाद में उन्हें बाहर निकाला गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। बच्चों की भी गई जान इस हादसे में बच्चों की मौत की भी पुष्टि हुई है। अलग-अलग शुरुआती reports में मृतकों की संख्या तीन बताई गई थी, लेकिन बाद में death toll बढ़कर चार हो गई। 8 लोग घायल पुलिस के मुताबिक कम से कम 8 लोगों को घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें एक तीन साल का बच्चा भी शामिल था। घायलों का इलाज आसपास के hospitals में किया जा रहा है। इमारत की मंजिलों को लेकर अलग-अलग जानकारी शुरुआती reports में इसे पांच मंजिला building बताया गया, जबकि MCD के बयान में structure को ground-plus-three-floor बताया गया है। MCD के मुताबिक इमारत करीब 20-25 साल पुरानी थी और लगभग 25 square yards DUSIB land पर बनी थी। भूकंप के बाद cracks आने का दावा कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि हाल में आए tremors के बाद building में cracks दिखाई दिए थे। हालांकि collapse का वास्तविक कारण अभी official investigation से तय होना बाकी है। पास की इमारत भी demolition के लिए चिन्हित थी ताजा reports में यह भी सामने आया कि इलाके की एक nearby building पहले से demolition के लिए marked थी। इससे पूरे इलाके में पुराने और कमजोर structures की safety को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। संकरी गलियों ने rescue operation किया मुश्किल हादसे वाली जगह densely populated area में है। संकरी गलियों की वजह से heavy rescue equipment और ambulances को घटनास्थल तक पहुंचने में मुश्किल हुई, जिससे operation चुनौतीपूर्ण बना रहा। जांच के बाद पता चलेगा collapse का कारण Authorities अब यह जांच कर रही हैं कि building में structural weakness, unauthorized construction या अन्य किसी कारण से collapse हुआ। Structural safety और civic approvals की भी जांच की जा सकती है। इलाके में traffic advisory हादसे के बाद आसपास की सड़कों पर traffic restrictions भी लगाई गईं। लोगों को rescue operation पूरा होने तक affected area से बचने की सलाह दी गई। Source – The Indian Express, Hindustan Times, NDTV, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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“संविधान बचाने की लड़ाई में आप लोग जरूर आएं—10 अक्टूबर”: नेहा बोरा की अपील

नई दिल्ली: AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले बड़े प्रदर्शन में लोगों से शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल किसी एक व्यक्ति या पद के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर है। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन CJP और कई student organisations ने 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर संयुक्त प्रदर्शन का आह्वान किया है। Organisers ने Delhi Police को प्रदर्शन की औपचारिक सूचना भी दे दी है और nationwide mobilisation की अपील की है। नेहा बोरा ने लोगों से की अपील Press conference में Neha Bora ने छात्र संगठनों, विपक्षी दलों और नागरिक समूहों से एकजुट होकर प्रदर्शन में शामिल होने को कहा। उन्होंने इसे संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा से जुड़ी लंबी लड़ाई बताया। CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar का इस्तीफा शामिल है। Organisers ने उनके खिलाफ criminal action की मांग भी उठाई है, हालांकि ये राजनीतिक और आंदोलनकारी मांगें हैं और किसी अदालत ने उनके खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं किया है। SIR पर रोक की मांग Student groups और CJP ने Special Intensive Revision यानी SIR को रोकने की भी मांग की है। उनका आरोप है कि voter-list revision से eligible voters के नाम प्रभावित हो सकते हैं। Election Commission इन आरोपों से इनकार करता रहा है और revision को voter rolls की accuracy सुधारने की प्रक्रिया बताता है। January 2025 Voter List बहाल करने की मांग Organisers ने January 2025 की voter list को restore करने की भी मांग रखी है। उनका कहना है कि इससे voter deletion को लेकर उठे विवादों का समाधान हो सकता है। Election Commission Appointment Law पर भी सवाल प्रदर्शन से जुड़े समूह 2023 के Election Commission appointments law को भी बदलने की मांग कर रहे हैं। वे Chief Election Commissioner और Election Commissioners की नियुक्ति के लिए ज्यादा independent selection mechanism चाहते हैं। “लंबी लड़ाई” की तैयारी CJP co-convener Saurav Das ने supporters से कहा कि वे लंबे आंदोलन के लिए तैयार रहें। उन्होंने संकेत दिया कि Gyanesh Kumar के इस्तीफे के बाद भी आंदोलन खत्म नहीं होगा, क्योंकि focus wider electoral reforms पर है। कई छात्र संगठन साथ AISA के अलावा AISF, SFI और अन्य student groups ने भी 10 अक्टूबर के protest में भाग लेने की घोषणा की है। इससे प्रदर्शन के बड़े student mobilisation में बदलने की संभावना जताई जा रही है। Delhi Police के नियम भी लागू Delhi Police ने साफ किया है कि Jantar Mantar पर protest के लिए prior permission जरूरी है और gathering size पर भी limits लागू हैं। Police के अनुसार आमतौर पर 10 दिन पहले अनुमति लेनी होती है और एक समय में 1,000 से ज्यादा लोगों की gathering की अनुमति नहीं होती। हाल के प्रदर्शनों में कई लोग हिरासत में इससे पहले Jantar Mantar और Election Commission के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में कई student leaders, activists और opposition leaders को हिरासत में लिया जा चुका है। Neha Bora भी पिछले दिनों police detention का सामना कर चुकी हैं। 10 अक्टूबर पर टिकी नजर अब सबसे ज्यादा नजर 10 अक्टूबर के Jantar Mantar protest पर रहेगी। Organisers इसे nationwide mobilisation का अगला बड़ा चरण बता रहे हैं, जबकि Delhi Police law and order और permission rules के पालन पर जोर दे रही है। Source – The Quint, The New Indian Express, The Indian Express, Times of India, Jansatta जय राष्ट्र न्यूज़

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दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन, गोवा में आया कार्डियक अरेस्ट

गोवा, 8 अक्टूबर 2026: हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह गोवा स्थित अपने residence पर अचेत पाए गए थे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें revive करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। अस्पताल ने cardiac arrest को मौत का कारण बताया है। सुबह घर पर अचेत मिले नाना पाटेकर नाना पाटेकर को गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर unconscious पाया गया। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां medical team ने emergency treatment शुरू किया। करीब 45 मिनट तक चली CPR Hospital officials के मुताबिक डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के लिए लगभग 45 मिनट से एक घंटे तक cardiac massage और CPR दिया। इसके बावजूद उनकी heartbeat वापस नहीं आ सकी और उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। सुबह करीब 5:30 बजे घोषित किया गया निधन Manipal Hospital से जुड़े डॉक्टर के मुताबिक नाना पाटेकर को अस्पताल लाए जाने तक उनकी हालत बेहद गंभीर थी। उन्हें सुबह करीब 5:30 बजे मृत घोषित किया गया। परिवार ने की निधन की पुष्टि नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने भी उनके निधन की पुष्टि की। उनके निधन की खबर सामने आते ही film industry, fans और public figures की ओर से श्रद्धांजलियों का सिलसिला शुरू हो गया। पांच दशक से ज्यादा लंबा फिल्मी सफर नाना पाटेकर ने करीब पांच दशकों तक हिंदी और मराठी cinema में काम किया। उन्होंने theatre से अपना career शुरू किया और बाद में parallel cinema तथा mainstream Bollywood दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई। ‘Krantiveer’ से मिली जबरदस्त पहचान नाना पाटेकर को खास तौर पर उनकी intense acting और powerful dialogue delivery के लिए जाना जाता था। ‘Krantiveer’, ‘Parinda’, ‘Prahaar’, ‘Agni Sakshi’, ‘Khamoshi’, ‘Welcome’ और कई अन्य फिल्मों में उनके performances को दर्शकों ने खूब पसंद किया। National Awards से भी हुए सम्मानित अपने लंबे career में नाना पाटेकर को कई बड़े honours मिले। वे तीन National Film Awards जीत चुके थे और serious तथा comic दोनों तरह के roles में अपनी versatility के लिए पहचाने जाते थे। Hindi और Marathi cinema दोनों में प्रभाव नाना पाटेकर सिर्फ Bollywood तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने Marathi cinema और theatre में भी महत्वपूर्ण काम किया और Indian acting landscape में अपनी अलग शैली स्थापित की। Akshay Kumar समेत कई सितारों ने दी श्रद्धांजलि उनके निधन के बाद film industry के कई बड़े नामों ने उन्हें याद किया। Akshay Kumar सहित कई कलाकारों ने उनकी acting, authenticity और screen presence की प्रशंसा करते हुए श्रद्धांजलि दी। Full State Honours के साथ अंतिम संस्कार Reports के मुताबिक नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। उनके योगदान को देखते हुए state honours देने का फैसला किया गया है। भारतीय सिनेमा ने खोया दमदार अभिनेता नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ उनकी फिल्मों से नहीं, बल्कि उनके विशिष्ट अंदाज, सख्त screen persona और यादगार dialogues से भी थी। उनका निधन Indian cinema के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। Source – Reuters, The Indian Express, Hindustan Times, Manipal Hospital जय राष्ट्र न्यूज़

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PM मोदी ने executive public office में 25 साल पूरे किए, BJP ने देशभर में कार्यक्रम शुरू किए

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 7 अक्टूबर 2026 को executive public office में लगातार 25 साल पूरे कर लिए। 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाला था और इसके बाद मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री के रूप में लगातार सत्ता के शीर्ष कार्यकारी पदों पर बने रहे। इस अवसर पर BJP ने देशभर में विशेष कार्यक्रम, exhibitions और outreach campaigns शुरू किए। 7 अक्टूबर 2001 से शुरू हुआ सफर नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। यहीं से उनके executive public office का सफर शुरू हुआ, जो बाद में गुजरात की राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचा। गुजरात के तीन बार मुख्यमंत्री रहे मोदी ने गुजरात में लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीते और कई वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। उनका Gujarat tenure infrastructure, industrial investment, governance reforms और political centralisation को लेकर लगातार चर्चा में रहा। 2014 में बने प्रधानमंत्री 2014 के लोकसभा चुनाव में BJP ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्पष्ट बहुमत हासिल किया। इसके बाद मोदी ने 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और राष्ट्रीय राजनीति में उनका नया दौर शुरू हुआ। 2019 और 2024 में भी सत्ता बरकरार 2019 में BJP ने और बड़े बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की। 2024 में BJP अपने दम पर बहुमत से पीछे रही, लेकिन NDA गठबंधन ने सरकार बनाई और नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। Cabinet ने पास किया विशेष resolution 25 साल पूरे होने के अवसर पर Union Cabinet ने नरेंद्र मोदी के राजनीतिक और प्रशासनिक सफर पर एक विशेष resolution पास किया। Resolution में उनके governance model, policy initiatives और public service tenure का उल्लेख किया गया। BJP ने देशभर में शुरू किए कार्यक्रम BJP ने इस milestone को लेकर देशभर में कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। इनमें exhibitions, public meetings, service activities, digital campaigns और मोदी सरकार की योजनाओं से जुड़ी outreach शामिल है। ‘25 Years of Public Service’ campaign BJP ने इस अवसर को “25 Years of Public Service” के तौर पर project किया है। पार्टी मोदी के Gujarat model से लेकर केंद्र सरकार की योजनाओं तक के सफर को लोगों के सामने रखने की कोशिश कर रही है। विकास और welfare schemes पर जोर BJP के कार्यक्रमों में infrastructure, digital governance, DBT, UPI, housing, sanitation और welfare schemes को प्रमुख उपलब्धियों के रूप में पेश किया जा रहा है। सरकार इन योजनाओं को governance continuity और policy execution से जोड़ रही है। विपक्ष ने भी उठाए सवाल विपक्षी दलों ने इस milestone पर अलग रुख अपनाया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल Modi सरकार की economic policies, unemployment, institutional independence और federal relations को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। BJP के लिए बड़ा political milestone नरेंद्र मोदी का 25 साल का लगातार executive tenure BJP के लिए बड़ा राजनीतिक milestone माना जा रहा है। भारत की contemporary politics में इतने लंबे समय तक मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री जैसे कार्यकारी पदों पर बने रहना बेहद असाधारण माना जाता है। 2029 से पहले political positioning पर नजर यह milestone ऐसे समय आया है जब 2029 Lok Sabha election की राजनीतिक positioning भी धीरे-धीरे तेज हो रही है। BJP मोदी के लंबे governance record को continuity और stability के narrative से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष accountability और performance को लेकर चुनौती देने की तैयारी में है। source – India Today / The Indian Express / Hindustan Times / BJP जय राष्ट्र न्यूज़

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“मोदी-शाह, अपनी पुलिस को झंडे और डंडे का फर्क समझाओ!” EC मार्च के दौरान कांग्रेस का तीखा हमला

नई दिल्ली: Election Commission के खिलाफ INDIA bloc के मार्च के दौरान तिरंगे को लेकर पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इसी घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोलते हुए कहा—“मोदी-शाह, अपनी पुलिस को झंडे और डंडे का फर्क समझाओ!” पार्टी ने साथ ही कहा कि विपक्ष को “बल या छल” से नहीं रोका जा सकता। Election Commission की ओर जा रहा था मार्च INDIA bloc के सांसद संसद परिसर से Election Commission headquarters की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारी SIR, voter list revision और Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे थे। पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका Opposition MPs को Nirvachan Sadan पहुंचने से पहले barricades लगाकर रोक दिया गया। इसके बाद कई नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। तिरंगे को लेकर हुई नोकझोंक प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी barricade के पास तिरंगा लेकर नजर आए। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने डंडे से चोट लगने की आशंका जताते हुए उसे हटाने की बात कही। विपक्षी नेताओं ने जवाब दिया कि यह “डंडा नहीं, झंडा” है। कांग्रेस ने मोदी-शाह पर साधा निशाना इसके बाद कांग्रेस के official social media account से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को अपनी पुलिस को “झंडे और डंडे का फर्क” समझाना चाहिए। “बल या छल से नहीं रोक पाएंगे” Congress ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि विपक्ष को “बल या छल” से नहीं रोका जा सकता। यह बयान Election Commission के खिलाफ चल रहे विरोध और पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में दिया गया। राहुल गांधी ने भी पुलिस से की बहस वायरल वीडियो में राहुल गांधी पुलिस अधिकारी से पूछते दिखे कि अगर उन्हें वहां बैठने की अनुमति नहीं है तो आखिर वे विरोध कहां करें। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस संविधान के प्रति जवाबदेह है और प्रदर्शन का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। प्रियंका गांधी भी हुईं मुखर प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौके पर पुलिस से बहस करती नजर आईं। Reports में यह लाइन उनके विरोध और कांग्रेस के social media messaging दोनों से जोड़कर सामने आई है। Akashvani Bhavan में हुआ धरना मार्च रोके जाने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी Akashvani Bhavan परिसर में चले गए। वहीं विपक्षी नेताओं ने कई घंटे तक धरना जारी रखा और Election Commission से मिलने की मांग दोहराई। कई विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए लंबे विरोध के बाद Delhi Police ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद देर शाम प्रदर्शन खत्म कराया गया। SIR विवाद बना मुख्य मुद्दा विपक्ष का आरोप है कि Special Intensive Revision के जरिए eligible voters के नाम electoral rolls से हटाए जा सकते हैं। Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और प्रक्रिया को voter lists की accuracy सुधारने से जोड़ता है। राजनीतिक बयानबाजी और तेज “झंडे और डंडे” वाली टिप्पणी के बाद कांग्रेस और BJP के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध पर रोक लगाने का मामला बता रहा है, जबकि BJP ने Congress पर constitutional institutions को बदनाम करने का आरोप लगाया है। source – Times Now Navbharat / Aaj Tak / Prabhat Khabar / The Daily Jagran जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रेमानंद महाराज के आश्रम को लेकर संत के गंभीर दावे, builder lobby से लेकर ₹5 करोड़ खर्च करने तक के आरोप

मथुरा/वृंदावन: प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के श्री हित राधा केली कुंज आश्रम को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने आश्रम से जुड़े कुछ लोगों पर builder और property lobby के प्रभाव, कथित आर्थिक हितों और आश्रम की व्यवस्थाओं को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की प्रेमानंद महाराज से शुरुआती मुलाकात को लेकर भी ₹5 करोड़ खर्च किए जाने का दावा किया है। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से ठोस प्रमाण सामने नहीं आए हैं। दिनेश फलाहारी महाराज ने लगाए गंभीर आरोप दिनेश फलाहारी महाराज ने एक पत्र और मीडिया से बातचीत के जरिए आश्रम से जुड़े कुछ लोगों पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि धार्मिक गतिविधियों के पीछे कुछ property dealers और प्रभावशाली लोगों का नेटवर्क काम कर रहा है और प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता का इस्तेमाल कथित व्यावसायिक हितों के लिए किया जा रहा है। ‘Builder lobby के प्रभाव’ का दावा फलाहारी महाराज ने आरोप लगाया कि केली कुंज आश्रम के आसपास builder lobby का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने यहां तक दावा किया कि कुछ लोग संत के नाम और प्रभाव का इस्तेमाल वृंदावन में जमीन और property से जुड़े हितों को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विराट कोहली को लेकर ₹5 करोड़ का दावा सबसे अधिक चर्चा उस दावे की हो रही है जिसमें फलाहारी महाराज ने कहा कि विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की प्रेमानंद महाराज से पहली मुलाकात कराने के लिए कथित तौर पर करीब ₹5 करोड़ खर्च किए गए थे। कुछ रिपोर्टों में इसे सीधे विराट कोहली को रकम दिए जाने के दावे के रूप में पेश किया गया है, जबकि उपलब्ध विवरण में दावा एक property syndicate द्वारा मुलाकात आयोजित कराने पर रकम खर्च किए जाने का है। इस दावे का कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है। ‘लोकप्रियता का इस्तेमाल’ करने का आरोप फलाहारी महाराज का दावा है कि celebrities के आश्रम आने से प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता और visibility काफी बढ़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग इसी लोकप्रियता का आर्थिक और property-related गतिविधियों में कथित तौर पर फायदा उठा रहे हैं। आश्रम के अंदर गुटबाजी का भी दावा फलाहारी महाराज ने आश्रम के भीतर दो अलग-अलग समूह सक्रिय होने का भी दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ वास्तविक साधक हैं, जबकि दूसरी तरफ ऐसे लोग सक्रिय हैं जिनका मुख्य उद्देश्य जमीन और दूसरे आर्थिक हितों से जुड़ा है। यह भी फिलहाल केवल उनका आरोप है। प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता दिनेश फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज की सुरक्षा पर भी चिंता जताई है। उन्होंने उनके लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की मांग करते हुए दावा किया कि मौजूदा विवाद के कारण संत की सुरक्षा को खतरा हो सकता है। गोवर्धन आने की भी की अपील फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज से केली कुंज से निकलकर गोवर्धन गिरिराज क्षेत्र में आने की अपील भी की है। उनका कहना है कि इससे महाराज कथित property network और विवादों से दूर रह सकेंगे। शिष्य की मौत के बाद बढ़ा विवाद यह पूरा विवाद उस समय और गहरा हुआ जब प्रेमानंद महाराज से जुड़े साधक दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला सामने आया। इसके बाद आश्रम की व्यवस्था, शिष्यों की गतिविधियों और internal functioning को लेकर कई तरह के सवाल और दावे सोशल मीडिया तथा स्थानीय स्तर पर सामने आने लगे। आश्रम ट्रस्ट ने क्या कहा? श्री राधा केली कुंज ट्रस्ट ने साधक की मौत के मामले में कहा है कि वह पुलिस प्रशासन की निष्पक्ष और तथ्यात्मक जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं और आम लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले अधूरी जानकारी, अफवाह या अनुमान के आधार पर प्रेमानंद महाराज या आश्रम की छवि खराब न की जाए। लापता शिष्य का मामला भी आया था सामने इसी विवाद के बीच हाथरस का एक किशोर, जिसने आश्रम से दीक्षा ली थी, कई महीनों तक लापता रहा। बाद में पुलिस ने उसे बरसाना के एक दूसरे आश्रम से सुरक्षित खोज निकाला। इस मामले में भी परिवार ने शुरुआत में केली कुंज आश्रम को लेकर सवाल उठाए थे, लेकिन किशोर बाद में दूसरे आश्रम में मिला। पुराने वीडियो भी गलत संदर्भ में हो रहे वायरल विवाद बढ़ने के बाद प्रेमानंद महाराज का रोते हुए एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर हालिया घटनाओं से जोड़कर वायरल किया गया। Fact-check में यह वीडियो पुराना पाया गया और मार्च 2026 का बताया गया। इसलिए इसे मौजूदा विवाद से जोड़ना भ्रामक है। फिलहाल दावों की पुष्टि नहीं फलाहारी महाराज के आरोप गंभीर जरूर हैं, लेकिन उनके समर्थन में अभी सार्वजनिक रूप से प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। Builder lobby, ₹5 करोड़ खर्च करने और आश्रम के अंदर कथित आर्थिक network से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन्हें स्थापित तथ्य के बजाय आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। source – NDTV / Navbharat Times / ABP News / Aaj Tak / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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अमित शाह का बड़ा ऐलान: 2029 तक नशामुक्त भारत का लक्ष्य, न्याय व्यवस्था में 3 साल की समयसीमा पर जोर

भोपाल: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नशे के खिलाफ केंद्र सरकार की मुहिम और नए आपराधिक कानूनों को लेकर बड़ा बयान दिया है। भोपाल में उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश को 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि नए criminal laws के पूरी तरह लागू होने के बाद FIR दर्ज होने से लेकर Supreme Court के फैसले तक न्याय प्रक्रिया को करीब तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त मध्य प्रदेश का लक्ष्य अमित शाह ने कहा कि मध्य प्रदेश में narcotics के खिलाफ अभियान को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने लक्ष्य रखा कि 31 दिसंबर 2029 तक राज्य में नशीले पदार्थों के कारोबार और उनकी उपलब्धता को खत्म करने की दिशा में कठोर कार्रवाई की जाए। केंद्र का लक्ष्य 2029 तक ‘नशामुक्त भारत’ मध्य प्रदेश के लक्ष्य के साथ केंद्र सरकार ने देशव्यापी स्तर पर भी 2029 तक नशामुक्त भारत के लिए एक roadmap तैयार किया है। इस roadmap में जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक का तीन वर्षीय action plan शामिल है, जिसमें enforcement, drug supply chains, demand reduction, rehabilitation और inter-agency coordination पर जोर दिया गया है। 200 से ज्यादा action points पर काम केंद्र सरकार के Vision Document 2026-29 में 200 से ज्यादा action points तय किए गए हैं। इनमें drug sources और trafficking routes की पहचान, synthetic drugs पर नियंत्रण, money trails की जांच, rehabilitation capacity बढ़ाना और राज्यों की anti-narcotics machinery मजबूत करना शामिल है। युवाओं को नशे से बचाने पर खास जोर अमित शाह ने कहा कि drug abuse का सबसे गंभीर असर युवा पीढ़ी पर पड़ता है। सरकार का कहना है कि enforcement के साथ-साथ awareness, treatment और rehabilitation भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। ‘तारीख पर तारीख’ वाली व्यवस्था बदलने का दावा न्याय व्यवस्था पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि देश की पुरानी criminal justice system को अक्सर ‘तारीख पर तारीख’ से जोड़ा जाता था। उनका दावा है कि नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण implementation के बाद criminal cases में अधिक स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया लागू होगी। FIR से Supreme Court तक तीन साल का लक्ष्य शाह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य FIR दर्ज होने से लेकर Supreme Court के अंतिम फैसले तक criminal justice process को तीन साल के भीतर पूरा करना है। उन्होंने इसे नए criminal laws के बड़े objectives में से एक बताया। BNS, BNSS और BSA पर भरोसा नई न्याय व्यवस्था भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत संचालित हो रही है। सरकार का कहना है कि इन कानूनों में investigation, forensic evidence, digital procedures और trial timelines को ज्यादा व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है। ‘मूल मंत्र न्याय है, दंड नहीं’ अमित शाह ने कहा कि नए कानूनों का उद्देश्य सिर्फ punishment देना नहीं, बल्कि समय पर न्याय सुनिश्चित करना है। उनके मुताबिक दंड का प्रावधान अपराध रोकने के लिए है, जबकि पूरी व्यवस्था का केंद्रीय उद्देश्य न्याय है। Anti-Narcotics Task Force को मजबूत करने की योजना राष्ट्रीय roadmap के तहत प्रत्येक राज्य में मार्च 2027 तक fully equipped Anti-Narcotics Task Force तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ drug samples की forensic testing reports 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है। केंद्र और राज्यों के coordination पर जोर नशे के खिलाफ अभियान में केंद्र सरकार राज्यों के साथ coordination बढ़ाने की तैयारी कर रही है। Home Ministry quarterly reviews के जरिए progress monitor करने और measurable targets के आधार पर accountability तय करने की योजना पर काम कर रहा है। बड़े reform agenda का हिस्सा अमित शाह के ये दोनों संदेश—नशामुक्त भारत और समयबद्ध न्याय—केंद्र सरकार के broader governance reform agenda का हिस्सा हैं। हालांकि तीन साल में FIR से Supreme Court तक न्याय का लक्ष्य व्यवहार में कितना सफल होगा, यह courts, police, prosecution, forensic infrastructure और pending cases की स्थिति पर निर्भर करेगा। source – PIB / Hindustan Times / The Times of India / The Indian Express / Live Hindustan जय राष्ट्र न्यूज़

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नीम करौली बाबा के धाम में उमड़ा जनसैलाब, कई किलोमीटर लंबा जाम; घंटों फंसे श्रद्धालु

नैनीताल: उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में नीम करौली बाबा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने से यातायात व्यवस्था चरमरा गई। लंबे वीकेंड के दौरान भवाली, भीमताल और कैंची धाम की ओर जाने वाले मार्गों पर कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं। हालात ऐसे रहे कि सामान्य तौर पर कुछ घंटों में पूरी होने वाली यात्राओं में कई यात्रियों को 10 से 12 घंटे तक लग गए। रोजाना 35 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे नैनीताल प्रशासन के मुताबिक कैंची धाम में सामान्य दिनों में करीब 25 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद रहती है। लेकिन long weekend के दौरान यह संख्या बढ़कर 35 हजार से ज्यादा प्रतिदिन पहुंच गई, जिससे मंदिर परिसर और आसपास की सड़कों पर भारी दबाव पड़ा। भवाली से कैंची तक रेंगते रहे वाहन भवाली से कैंची धाम जाने वाले रास्ते पर कारों, बसों और दोपहिया वाहनों की लंबी कतारें दिखाई दीं। कई श्रद्धालु जाम में लंबे समय तक फंसे रहने के बाद वाहन छोड़कर पैदल ही धाम की ओर बढ़ते नजर आए। Haldwani-Kainchi route पर सबसे ज्यादा दबाव सबसे ज्यादा दबाव हल्द्वानी से कैंची धाम, नैनीताल और अल्मोड़ा की ओर जाने वाले मार्गों पर देखा गया। कुछ यात्रियों ने दावा किया कि सामान्य दो से तीन घंटे का सफर पूरा करने में 10 से 12 घंटे तक लग गए। Ambulance और जरूरी वाहनों पर भी असर भारी traffic congestion का असर केवल श्रद्धालुओं पर ही नहीं पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार ambulances, स्थानीय निवासियों और जरूरी सामान ले जाने वाले वाहनों को भी जाम का सामना करना पड़ा, जिससे प्रशासन को emergency traffic restrictions लागू करनी पड़ीं। बाहरी दोपहिया वाहनों पर लगाई गई रोक भीड़ नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने कुछ traffic restrictions लागू किए। बाहरी क्षेत्रों से आने वाले दोपहिया वाहनों की entry पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया और traffic को अलग-अलग routes से divert किया गया। ‘Hanuman Ansh’ के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या हालिया भीड़ को फिल्म ‘Hanuman Ansh’ की लोकप्रियता से भी जोड़कर देखा जा रहा है। फिल्म नीम करौली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक प्रभाव से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म की सफलता के बाद कैंची धाम में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की खबरें सामने आई हैं। फिल्म के निर्देशक ने श्रद्धालुओं से की अपील फिल्म के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने भी बढ़ती भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं से यात्रा से पहले स्थिति जांचने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखने और अत्यधिक भीड़ होने पर वैकल्पिक धार्मिक स्थलों पर जाने की सलाह दी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए जाम के वीडियो कैंची धाम और आसपास के इलाकों में लगे लंबे traffic jam के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इनमें पहाड़ी सड़कों पर bumper-to-bumper वाहनों की कतारें और पैदल चलते श्रद्धालु दिखाई दिए। प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती कैंची धाम की बढ़ती लोकप्रियता के साथ स्थानीय प्रशासन के सामने traffic management, parking और crowd control बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। District administration अब बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त traffic measures और वैकल्पिक routes पर विचार कर रहा है। श्रद्धा के साथ व्यवस्था का भी सवाल कैंची धाम में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर धार्मिक पर्यटन स्थलों की carrying capacity और infrastructure पर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से traffic rules का पालन करने, निर्धारित parking का उपयोग करने और यात्रा से पहले traffic updates देखने की अपील की है। source – The Indian Express / India Today / Economic Times / Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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Jammu-Srinagar Vande Bharat ने पहली बार Chenab और Anji bridges पर 100 kmph की रफ्तार हासिल की

जम्मू: Jammu-Srinagar Vande Bharat Express ने बड़ा रेलवे milestone हासिल करते हुए पहली बार Chenab Railway Bridge और Anji Khad Bridge को 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पार किया। यह उपलब्धि Katra-Banihal rail section की maximum permissible speed को बढ़ाकर 100 kmph किए जाने के बाद सामने आई है। Katra-Banihal section की speed limit बढ़ी Indian Railways ने 111 किलोमीटर लंबे Shri Mata Vaishno Devi Katra-Banihal section पर maximum permissible speed बढ़ाकर 100 kmph कर दी है। इससे पहले इस route के अलग-अलग हिस्सों पर speed limit 75 से 85 kmph के आसपास थी। नई limit safety checks और operational clearance के बाद लागू की गई। पहली बार 100 kmph पर पार किया Chenab Bridge Vande Bharat Express ने पहली बार दुनिया के सबसे ऊंचे railway arch bridge, Chenab Bridge, को 100 kmph की रफ्तार से पार किया। यह bridge Chenab नदी के तल से लगभग 359 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसकी लंबाई करीब 1,315 मीटर है। Anji Bridge पर भी 100 kmph की रफ्तार इसी run के दौरान ट्रेन ने Anji Khad Bridge को भी 100 kmph की speed से पार किया। Anji Bridge भारत का पहला cable-stayed railway bridge है और यह USBRL project का महत्वपूर्ण हिस्सा है। Ashwini Vaishnaw ने शेयर किया वीडियो रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस milestone का वीडियो साझा किया। उन्होंने इसे Jammu-Kashmir rail network के लिए अहम उपलब्धि बताया। वीडियो में Vande Bharat को दोनों बड़े bridges पर high speed से गुजरते देखा जा सकता है। USBRL project के लिए अहम उपलब्धि Chenab और Anji bridges, Udhampur-Srinagar-Baramulla Rail Link यानी USBRL project का हिस्सा हैं। यह project जम्मू क्षेत्र और कश्मीर घाटी के बीच all-weather rail connectivity मजबूत करने के लिए बनाया गया है। कम हो सकता है travel time Speed limit बढ़ने से Katra-Banihal section पर यात्रा का समय कम होने की उम्मीद है। Railway officials का कहना है कि इससे train operations ज्यादा smooth और efficient हो सकते हैं और यात्रियों को faster connectivity मिलेगी। safety checks के बाद मिली मंजूरी 100 kmph की operational speed लागू करने से पहले route पर required safety assessments किए गए। इसके बाद Railway Board ने revised speed को मंजूरी दी और Vande Bharat के जरिए इसे successfully test किया गया। Kashmir rail connectivity में नया चरण यह milestone सिर्फ speed record नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर की rail connectivity में operational improvement का संकेत भी है। Chenab और Anji जैसे complex engineering structures पर 100 kmph operation शुरू होना Indian Railways के लिए महत्वपूर्ण technical achievement माना जा रहा है। source – Ministry of Railways / The Indian Express / India Today / Financial Express / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के बीच AISA की नेहा बोरा हिरासत में, CEC के खिलाफ प्रदर्शन में सैकड़ों डिटेन

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान All India Students’ Association यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। उनके साथ पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी, AAP नेता सौरभ भारद्वाज, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और कई छात्र व राजनीतिक कार्यकर्ता भी हिरासत में लिए गए। प्रदर्शनकारी SIR और मतदाता सूची से जुड़े कथित अनियमितताओं को लेकर CEC के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश के दौरान हिरासत प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें कई स्थानों पर रोक दिया। नेहा बोरा और AISA के अन्य कार्यकर्ता भी प्रदर्शन स्थल की ओर बढ़ रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। करीब 500 से 700 लोगों को हिरासत में लेने की रिपोर्ट अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग बताई गई है। The Indian Express ने करीब 500 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी, जबकि अन्य रिपोर्टों में यह संख्या लगभग 700 बताई गई। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को बसों के जरिए विभिन्न पुलिस स्टेशनों पर ले जाया गया। नेहा बोरा ने प्रदर्शन जारी रखने की अपील की हिरासत में लिए जाने के बाद भी नेहा बोरा ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन जारी रखने की अपील की। उन्होंने समर्थकों से जंतर-मंतर लौटने और कथित मतदाता अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रखने को कहा। आतिशी और सौरभ भारद्वाज भी डिटेन पुलिस कार्रवाई में केवल छात्र संगठन के सदस्य ही नहीं बल्कि कई राजनीतिक नेता भी हिरासत में लिए गए। पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी, AAP दिल्ली प्रमुख सौरभ भारद्वाज और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी उन प्रमुख लोगों में शामिल थे जिन्हें पुलिस ने डिटेन किया। SIR विवाद बना प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा प्रदर्शनकारी Special Intensive Revision यानी SIR और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे थे। उनकी प्रमुख मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही शामिल थी। ये प्रदर्शनकारियों के आरोप और मांगें हैं; चुनाव आयोग का इन आरोपों पर अलग आधिकारिक रुख है। दिल्ली पुलिस ने पहले नहीं दी थी अनुमति दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए पहले अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद विभिन्न छात्र संगठनों और राजनीतिक समूहों से जुड़े लोग जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचे। पुलिस ने दस या उससे अधिक लोगों के समूहों को रोकते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। AISA और अन्य छात्र संगठन रहे सक्रिय AISA के अलावा SFI, NSUI और दूसरे छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल हुए। छात्र संगठनों ने इसे मतदाता अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा मुद्दा बताया, जबकि पुलिस ने कानून-व्यवस्था और बिना अनुमति जुटने को कार्रवाई का आधार बताया। हिरासत के खिलाफ वाम दलों ने जताई नाराजगी वाम दलों ने छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों की हिरासत की आलोचना की। CPM ने बयान जारी कर हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को लेकर आपत्ति जताई और SIR तथा CEC के खिलाफ उठाई जा रही मांगों का समर्थन किया। 3 अक्टूबर को भी जंतर-मंतर पर हलचल 2 अक्टूबर की पुलिस कार्रवाई के बाद 3 अक्टूबर को भी प्रदर्शनकारी और कार्यकर्ता जंतर-मंतर लौटते दिखाई दिए। इसके चलते दिल्ली पुलिस फिर सतर्क रही और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई। SIR विवाद पर जारी है राजनीतिक टकराव SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों का विरोध जारी है। वहीं इन आरोपों की तथ्यात्मक और कानूनी स्थिति संबंधित संस्थाओं और अदालतों में उपलब्ध रिकॉर्ड तथा आगे की प्रक्रिया से तय होगी। source – The Indian Express / The Times of India / PTI / The Week जय राष्ट्र न्यूज़

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