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गुजरात में अनोखा गरबा! 15 हजार से ज्यादा महिलाओं ने पहने करीब 900 किलो सोने के गहने

राजकोट, 20 अक्टूबर 2026: गुजरात के राजकोट में आयोजित अहीर गरबा महोत्सव ने नवरात्रि के दौरान खूब सुर्खियां बटोरीं। आयोजकों के मुताबिक, अहीर समुदाय की 15 हजार से अधिक महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में रास-गरबा किया। इस दौरान महिलाओं द्वारा पहने गए सोने के आभूषणों का कुल वजन करीब 900 किलोग्राम बताया गया, जिनकी अनुमानित कीमत 1,300 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। राजकोट में हुआ भव्य आयोजन यह कार्यक्रम राजकोट के न्यू रिंग रोड इलाके में अहीर सेना की ओर से आयोजित नौ दिवसीय अहीर गरबा महोत्सव का हिस्सा था। नवरात्रि के सातवें दिन बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक रास में हिस्सा लिया। आयोजन में अहीर समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक आस्था की झलक देखने को मिली। 900 किलो सोने के आभूषण बने आकर्षण आयोजकों के अनुसार, महिलाओं ने हार, कंगन और अन्य पारंपरिक सोने के आभूषण पहने थे। इन सभी गहनों का संयुक्त वजन लगभग 900 किलोग्राम बताया गया है। इनकी अनुमानित कीमत 1,300 करोड़ रुपये से अधिक होने का दावा किया गया। हालांकि, वजन और कीमत से जुड़े ये आंकड़े आयोजकों के दावों पर आधारित हैं। इनके स्वतंत्र ऑडिट या आधिकारिक सत्यापन की जानकारी सामने नहीं आई है। भगवान द्वारकाधीश की महाआरती भी हुई महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण भगवान श्री द्वारकाधीश की महाआरती रही। आयोजकों के मुताबिक, इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल रास-गरबा आयोजित करना नहीं, बल्कि अहीर समुदाय की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक रीति-रिवाजों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। सोशल मीडिया पर छाए वीडियो और तस्वीरें बड़ी संख्या में महिलाओं के पारंपरिक परिधानों और सोने के आभूषणों के साथ गरबा करने के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने। आयोजन की भव्यता और महिलाओं की सामूहिक भागीदारी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। संस्कृति, आस्था और सामूहिक एकजुटता का प्रदर्शन अहीर समुदाय में पारंपरिक आभूषणों और रास-गरबा की विशेष सांस्कृतिक पहचान रही है। राजकोट में आयोजित यह महोत्सव समुदाय की परंपराओं, धार्मिक आस्था और सामूहिक एकजुटता को प्रदर्शित करने वाला आयोजन रहा। स्रोत: आज तक, लोकतेज और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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उत्तराखंड: शीतकाल के लिए बंद हुए भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट, अब 6 महीने गोपेश्वर में होंगे दर्शन

चमोली, 20 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड के पंचकेदारों में शामिल चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बंद कर दिए गए हैं। अब अगले करीब छह महीने तक श्रद्धालु भगवान रुद्रनाथ के दर्शन गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में कर सकेंगे। कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंच गई है। 17 अक्टूबर को बंद हुए मंदिर के कपाट रुद्रनाथ धाम के कपाट 17 अक्टूबर की शाम विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, श्रृंगार और रुद्री पाठ के बाद बंद किए गए। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, शीतकाल शुरू होने से पहले मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए गए और भगवान को विधिवत विदाई दी गई। 19 अक्टूबर को गोपेश्वर पहुंची उत्सव डोली कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली ने शीतकालीन प्रवास के लिए यात्रा शुरू की। इस दौरान डोली देवलधार स्थित ज्वाला मंदिर में रुकी। इसके बाद 19 अक्टूबर को वह गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर पहुंची, जहां विशेष पूजा-अर्चना के बाद भगवान रुद्रनाथ को उनके शीतकालीन गद्दीस्थल पर विराजमान किया गया। अब छह महीने गोपीनाथ मंदिर में होंगे दर्शन शीतकाल के दौरान रुद्रनाथ धाम के ऊंचाई वाले क्षेत्र में भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। इस अवधि में श्रद्धालु गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में भगवान रुद्रनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। यह व्यवस्था अगले यात्रा सीजन तक जारी रहेगी। रुद्रनाथ धाम क्यों है खास? रुद्रनाथ धाम समुद्र तल से लगभग 11,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पंचकेदारों में शामिल इस मंदिर में भगवान शिव के मुख स्वरूप की पूजा की जाती है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन पहाड़ी रास्तों पर लंबी पैदल यात्रा करनी पड़ती है। इसी वजह से रुद्रनाथ यात्रा को पंचकेदारों के प्रमुख और चुनौतीपूर्ण धार्मिक पड़ावों में गिना जाता है। शीतकाल में गोपेश्वर में होगी पूजा-अर्चना धार्मिक परंपरा के अनुसार, अगले लगभग छह महीने भगवान रुद्रनाथ की नियमित पूजा-अर्चना गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में होगी। अगले यात्रा सीजन में मौसम और परंपराओं के अनुसार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट दोबारा खोले जाएंगे। इससे श्रद्धालु शीतकाल के दौरान भी भगवान के दर्शन और पूजा कर सकेंगे। स्रोत: अमर उजाला, दैनिक जागरण और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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Mumbai Fire: दादर की Kohinoor Square बिल्डिंग के होटल में लगी आग, दमकल ने पाया काबू

मुंबई, 19 अक्टूबर 2026: मुंबई के दादर वेस्ट स्थित Kohinoor Square बिल्डिंग में सोमवार सुबह एक होटल की रसोई में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। यह इमारत शिवसेना भवन के सामने स्थित है। मुंबई फायर ब्रिगेड को सुबह 9:18 बजे आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद सुबह 9:25 बजे इसे लेवल-1 फायर घोषित किया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। होटल की पहली मंजिल की रसोई में लगी आग फायर ब्रिगेड के अनुसार, आग Kohinoor Square की पहली मंजिल पर स्थित एक होटल की रसोई तक सीमित थी। घटना के सामने आए वीडियो में इमारत के अंदर धुआं दिखाई दिया। इस दौरान होटल के कर्मचारियों को बाहर निकलते हुए भी देखा गया। 50 मंजिला इमारत में मचा हड़कंप Kohinoor Square एक ग्राउंड प्लस 50 मंजिला इमारत है। आग की सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड के साथ मुंबई पुलिस, BEST, PWD, नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग, एंबुलेंस और संबंधित वार्ड के कर्मचारियों को मौके पर तैनात किया गया। ऊंची इमारत में आग लगने की खबर से आसपास के क्षेत्र में चिंता बढ़ गई। आपातकालीन टीमों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने के लिए कार्रवाई की। दमकल विभाग ने आग पर पाया काबू ताजा जानकारी के मुताबिक, दमकल विभाग ने आग पर काबू पा लिया है। शुरुआती रिपोर्टों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। समय पर आपातकालीन कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली। आग लगने की वजह का पता लगाया जा रहा फिलहाल आग लगने के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी आग के स्रोत और उससे हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वजह स्पष्ट हो सकेगी। समय पर कार्रवाई से टला बड़ा हादसा Kohinoor Square जैसी ऊंची इमारत में आग लगने के कारण शुरुआती धुएं के वीडियो ने लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार आग होटल की रसोई तक सीमित रही और दमकल विभाग ने उस पर काबू पा लिया। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है। Source: PTI, Mid-Day, NDTV Marathi, Free Press Journal जय राष्ट्र न्यूज़

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बाबा केदार के भक्तों के लिए बड़ी खबर: भैया दूज पर बंद होंगे केदारनाथ धाम के कपाट, आधिकारिक तारीख का इंतजार

रुद्रप्रयाग, 19 अक्टूबर 2026: बाबा केदार के दर्शन की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए जरूरी खबर है। केदारनाथ धाम के कपाट हर साल सर्दियों की शुरुआत से पहले बंद किए जाते हैं। परंपरा के अनुसार, कपाट बंद करने की तिथि भैया दूज के आसपास निर्धारित की जाती है। हालांकि, 2026 के लिए कपाट बंद होने की आधिकारिक तारीख की पुष्टि मंदिर समिति की औपचारिक घोषणा के बाद ही होगी। कब बंद हो सकते हैं केदारनाथ धाम के कपाट? उपलब्ध तीर्थयात्रा कैलेंडर के अनुसार, भैया दूज 11 नवंबर 2026 के आसपास पड़ रही है। इसी आधार पर कुछ यात्रा पोर्टल केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने की संभावित तारीख 11 नवंबर बता रहे हैं। हालांकि, मंदिर समिति की आधिकारिक घोषणा के बिना इस तारीख को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए। सर्दियों में क्यों बंद किया जाता है मंदिर? केदारनाथ धाम हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित है, जहां सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से हर साल शीतकाल शुरू होने से पहले मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं। कपाट बंद होने के बाद भगवान केदारनाथ की उत्सव डोली को उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर ले जाया जाता है। यहां सर्दियों के दौरान भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है और श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं। 22 अप्रैल को खुले थे केदारनाथ धाम के कपाट 2026 में केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। इसके बाद से भक्त बड़ी संख्या में बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। अब यात्रा सीजन के समापन से पहले कपाट बंद होने की तारीख और समारोह के समय को लेकर श्रद्धालुओं की नजर आधिकारिक सूचना पर है। यात्रा पर जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान अगर आप अक्टूबर के आखिरी दिनों या नवंबर की शुरुआत में केदारनाथ यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा से पहले मंदिर समिति और उत्तराखंड पर्यटन विभाग की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें। आधिकारिक घोषणा पर श्रद्धालुओं की नजर कपाट बंद होने की तारीख को लेकर फिलहाल संभावित तिथि की चर्चा है। श्रद्धालुओं को अंतिम जानकारी के लिए श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) की घोषणा का इंतजार करना चाहिए। आधिकारिक तारीख सामने आने के बाद कपाट बंद होने के समारोह और शीतकालीन पूजा से जुड़ी जानकारी भी स्पष्ट हो जाएगी। Source: Shri Badarinath-Kedarnath Temple Committee, Uttarakhand Tourism जय राष्ट्र न्यूज़

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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: नेपाल भागने की कोशिश कर रहे 3 संदिग्ध कोटा से पकड़े गए, एक नाबालिग भी शामिल

कोटा/मुंबई, 19 अक्टूबर 2026: बॉलीवुड अभिनेता Tiger Shroff की कार पर फायरिंग के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से तीन संदिग्धों को पकड़ा है। कोटा पुलिस के मुताबिक, तीनों दिल्ली पहुंचने के बाद नेपाल भागने की योजना बना रहे थे। पकड़े गए लोगों में एक 17 वर्षीय नाबालिग भी शामिल है। ट्रेन से पकड़े गए तीनों संदिग्ध मुंबई पुलिस से मिली सूचना के बाद कोटा पुलिस ने Pune-Jaipur Express की तलाशी ली और ट्रेन के जनरल कोच से तीनों संदिग्धों को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, सूचना मिलने के करीब 15 से 20 मिनट के भीतर कार्रवाई की गई। दो पर फायरिंग करने का आरोप, तीसरा बाइक-टैक्सी राइडर कोटा पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए लोगों में से दो पर कथित तौर पर Tiger Shroff की कार पर फायरिंग करने का आरोप है, जबकि तीसरा बाइक-टैक्सी राइडर बताया जा रहा है। तीनों की भूमिका और घटना में उनकी भागीदारी को लेकर आगे की जांच की जा रही है। कौन हैं पकड़े गए संदिग्ध? पुलिस ने दो वयस्क संदिग्धों की पहचान हरियाणा के सोनीपत निवासी Rehan उर्फ Sukka और मूल रूप से बिहार के बेगूसराय के रहने वाले Hritik Kurmi उर्फ Roshan के रूप में बताई है। Hritik के मुंबई में रहने की जानकारी भी सामने आई है। तीसरा संदिग्ध 17 वर्षीय नाबालिग है, जिसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। दिल्ली से नेपाल भागने की थी योजना कोटा की पुलिस अधीक्षक Tejaswani Gautam के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में पता चला कि तीनों दिल्ली पहुंचने के बाद नेपाल भागने की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि फिलहाल उनके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है। Lawrence Bishnoi नेटवर्क से संबंध की जांच पुलिस के अनुसार, Rehan पहले Anil Pandit के संपर्क में था। Anil Pandit को कथित तौर पर Lawrence Bishnoi नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस मामले में गैंग से संबंध, फायरिंग के पीछे की वजह और अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है। किसी भी कथित गैंग कनेक्शन को फिलहाल स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। मुंबई पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कोटा पुलिस ने तीनों संदिग्धों को हिरासत में लेने के बाद मुंबई पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुंबई क्राइम ब्रांच उनसे हथियारों की व्यवस्था, हमले की योजना, संभावित सहयोगियों और घटना के पीछे की साजिश से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ करेगी। फिलहाल, मामले में जांच जारी है और पुलिस की आगे की कार्रवाई से फायरिंग की पूरी घटना तथा संदिग्धों की कथित भूमिका को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है। Source: The Indian Express, India Today, Hindustan Times, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP ने Ashutosh Ranka और Saurav Das की रिहाई में जानबूझकर देरी का लगाया आरोप, दिल्ली पुलिस ने किया इनकार

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026: Cockroach Janta Party (CJP) ने अपने नेताओं Ashutosh Ranka और Saurav Das की रिहाई में जानबूझकर प्रक्रियात्मक देरी किए जाने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि कई जमानतदारों के दस्तावेज और श्योरिटी बॉन्ड जमा करने के बावजूद दोनों की रिहाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। वहीं, दिल्ली पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। CJP ने क्या आरोप लगाए? CJP की कानूनी टीम के मुताबिक, रिहाई की प्रक्रिया के दौरान बार-बार नई प्रक्रियात्मक आपत्तियां उठाई गईं। पार्टी ने आरोप लगाया कि कई श्योरिटी को बिना स्पष्ट कारण स्वीकार नहीं किया गया और जरूरी दस्तावेजों को आगे बढ़ाने में भी देरी हुई। पार्टी का कहना है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद दोनों नेताओं की रिहाई में बाधाएं बनी रहीं। दिल्ली पुलिस ने क्या सफाई दी? दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर देरी किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक, जमा किए गए श्योरिटी बॉन्ड में कुछ समस्याएं थीं और संबंधित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक था। इस तरह, रिहाई में देरी को लेकर CJP और पुलिस के दावों में विरोधाभास बना हुआ है। मजिस्ट्रेट को कथित धमकियों का मामला मामले में उस समय एक और घटनाक्रम सामने आया, जब स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिलने की शिकायत की। इस शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। हालांकि, धमकियों के पीछे कौन लोग हैं और उनका इस मामले से क्या संबंध है, यह जांच का विषय है। जमानत और रिहाई की सुनवाई भी टली रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को दोनों नेताओं की जमानत या रिहाई से संबंधित सुनवाई टल गई। इसके बाद संबंधित मजिस्ट्रेट के मामले से अलग होने की खबर सामने आई। बताया गया कि उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इन घटनाक्रमों के कारण रिहाई की प्रक्रिया और लंबी हो गई। जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है मामला Ashutosh Ranka और Saurav Das को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने पहले दिए गए शांति बनाए रखने संबंधी बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया। दूसरी ओर, CJP इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बता रही है। 19 अक्टूबर को रिहाई पर नजर 19 अक्टूबर को दोनों नेताओं की हिरासत की अवधि समाप्त होने के करीब होने के बीच उनकी रिहाई को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग कर सकती है, जबकि CJP दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई पर जोर दे रही है। फिलहाल, रिहाई में देरी को लेकर पार्टी और पुलिस के अलग-अलग दावे सामने हैं। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के निर्णय से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। Source: The Indian Express, Hindustan Times, India Today, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग, Lawrence Bishnoi Gang ने जिम्मेदारी लेने का किया दावा; पुलिस जांच जारी

मुंबई, 19 अक्टूबर 2026: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर मुंबई के जुहू इलाके में हुई फायरिंग के मामले में नया मोड़ सामने आया है। घटना के बाद सोशल मीडिया पर अनिल पंडित नाम के व्यक्ति की ओर से एक पोस्ट सामने आई, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग की तरफ से हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। हालांकि, पुलिस इस पोस्ट की प्रामाणिकता और कथित गैंग कनेक्शन की जांच कर रही है। टाइगर श्रॉफ सुरक्षित, ड्राइवर समेत दो लोग घायल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने टाइगर श्रॉफ की कार पर कई राउंड गोलियां चलाईं। अभिनेता को गोली नहीं लगी और वह सुरक्षित रहे। वहीं, उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी। बिश्नोई गैंग के नाम से पोस्ट वायरल फायरिंग के बाद अनिल पंडित नाम के व्यक्ति की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आई। इसमें कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग की ओर से हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, बाद में मूल पोस्ट हटा दी गई और उसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर प्रसारित होते रहे। हालांकि, पोस्ट में किए गए दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस इसकी सत्यता का पता लगाने में जुटी है। सलमान खान का भी कथित संदेश में जिक्र मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गैंग से जुड़ा बताया जा रहा संदेश अभिनेता सलमान खान का भी उल्लेख करता है और उनके साथ काम करने वाले लोगों को धमकी दिए जाने का दावा करता है। इस पहलू के सामने आने के बाद जांच में हमले के संभावित मकसद और संबंधित लोगों के पेशेवर संपर्कों समेत अन्य बिंदुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जिम्मेदारी लेने का दावा अभी जांच के दायरे में पुलिस के लिए सोशल मीडिया पोस्ट की प्रामाणिकता और हमलावरों की वास्तविक पहचान स्थापित करना महत्वपूर्ण है। जांचकर्ता पोस्ट, CCTV फुटेज, आरोपियों से पूछताछ और संभावित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े सुरागों की पड़ताल कर रहे हैं। किसी संगठन के नाम पर जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आना अपने आप में उस संगठन की संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा। बॉलीवुड की सुरक्षा को लेकर चिंता इस घटना के बाद फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। सलमान खान को पहले भी धमकियां मिलने की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में पुलिस टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग को संभावित संगठित अपराध के एंगल से भी देख रही है। हालांकि, इस मामले में किसी गैंग की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। Source – Economic Times, Hindustan, Times of India, Loksatta जय राष्ट्र न्यूज़

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कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में 19 लोगों की मौत, 7 गिरफ्तार; SIT करेगी जांच

कोलकाता, 18 अक्टूबर 2026: उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है, जबकि कम से कम 25 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद कोलकाता पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। कैसे हुआ हादसा? रिपोर्टों के मुताबिक, शनिवार शाम करीब 7:30 बजे चोरबागान इलाके में भगदड़ मची। उस समय पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। बारिश, संकरी गलियों और प्रवेश तथा निकास मार्गों पर भीड़ के दबाव ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया। प्रारंभिक जांच में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी संभावित खामियों की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, हादसे के सटीक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। पंडाल खाली करने की घोषणा से बढ़ी घबराहट? पुलिस एक कथित घोषणा की भी जांच कर रही है, जिसमें लोगों से पंडाल खाली करने के लिए कहा गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घोषणा में पंडाल की हालत खराब होने और उसके गिरने की आशंका जताए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि घोषणा किसने की, उसके पीछे क्या कारण था और क्या इससे भीड़ में घबराहट बढ़ी। फिलहाल, इसे भगदड़ का अंतिम कारण मानना जल्दबाजी होगी। सात लोगों की गिरफ्तारी पुलिस ने मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इनमें दुर्गा पूजा आयोजन समिति से जुड़े पदाधिकारी, पंडाल निर्माण से संबंधित लोग और निजी सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। इससे पहले पुलिस ने पूछताछ के लिए 14 लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें से सात की गिरफ्तारी की गई। गिरफ्तार लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के आधार पर होगा। SIT करेगी सुरक्षा व्यवस्था की जांच विशेष जांच दल हादसे से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करेगा। इसमें भीड़ नियंत्रण की योजना, प्रवेश और निकास मार्गों की व्यवस्था, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, आपातकालीन प्रबंधन और आयोजकों की जिम्मेदारी शामिल हैं। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया है। जांच के दौरान उपलब्ध वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा सकती है। गैर-इरादतन हत्या से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत गैर-इरादतन हत्या से जुड़े मामले में केस दर्ज किया है। जांच में यह निर्धारित किया जाएगा कि हादसे में कथित लापरवाही, सुरक्षा संबंधी खामियों या किसी घोषणा की क्या भूमिका रही। अन्य दुर्गा पूजा पंडालों में भी सुरक्षा समीक्षा हादसे के बाद चोरबागान पंडाल को बंद कर दिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, कोलकाता के कुछ अन्य अधिक भीड़ वाले दुर्गा पूजा पंडालों में भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए अस्थायी रूप से प्रवेश रोका गया। जांच के नतीजों पर टिकी नजर इस दर्दनाक हादसे ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन निकासी और सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब SIT की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भगदड़ किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए किसकी जिम्मेदारी बनती है। स्रोत: The Indian Express, Times of India, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP founder Abhijeet Dipke गिरफ्तार, ‘Lehra Do Tiranga’ rally से पहले preventive action; Neha Bora detention के बाद रिहा

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: CJP founder Abhijeet Dipke को Delhi Police ने ‘Lehra Do Tiranga’ rally से पहले preventive action के तहत हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया। Police का कहना है कि यह कदम law-and-order situation और संभावित breach of peace को देखते हुए उठाया गया। वहीं student activist Neha Bora को भी कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। Rally से पहले बढ़ी police कार्रवाई Connaught Place और Central Delhi में CJP की rally को लेकर पहले से heavy security deployment किया गया था। Police ने organisers को बिना permission gathering या march न करने की चेतावनी दी थी। इसी backdrop में Dipke के खिलाफ preventive action लिया गया। Abhijeet Dipke की गिरफ्तारी क्यों हुई? Police sources के मुताबिक Dipke को breach of peace रोकने के मकसद से पकड़ा गया। CJP ने इसे political suppression बताया है और कहा कि उनका programme peaceful था। Neha Bora को भी लिया गया detention में AISA president Neha Bora को भी police ने rally से जुड़े security arrangements के दौरान detention में लिया था। हालांकि कुछ समय बाद उन्हें release कर दिया गया। Connaught Place बना security zone Central Park, Rajiv Chowk, Parliament Street और आसपास के इलाकों में barricading, checking और police deployment बढ़ाई गई। ‘Lehra Do Tiranga’ programme के चलते Central Delhi में traffic restrictions भी लागू रहे। CJP की मुख्य मांगें क्या हैं? CJP Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के इस्तीफे, voter-list revision पर जवाबदेही और हाल के police action के खिलाफ protest कर रही है। Group ने Jantar Mantar और Connaught Place पर लगातार demonstrations की कोशिश की है। राजनीतिक विवाद और तेज Dipke की गिरफ्तारी के बाद opposition leaders ने police action पर सवाल उठाए हैं, जबकि Delhi Police का कहना है कि उसका focus public order और safety बनाए रखना है। source – Reuters, Delhi Police जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP की ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले दिल्ली में कड़ी सुरक्षा, 28 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026: कॉकroach जनता पार्टी (CJP) की ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कनॉट प्लेस और आसपास के नई दिल्ली जिले में 28,000 से अधिक पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की गई। प्रशासन ने सेंट्रल पार्क को बंद रखा, जबकि संवेदनशील इलाकों में निषेधाज्ञा लागू रही। 28 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिल्ली पुलिस के करीब 6,000 जवानों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की लगभग 220 कंपनियां तैनात की गईं। एक कंपनी में औसतन करीब 100 जवान होते हैं। इस तैनाती के चलते कुल सुरक्षाकर्मियों की संख्या 28,000 से अधिक बताई गई। सेंट्रल पार्क बंद, धारा 163 के तहत प्रतिबंध कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क को प्रशासनिक कारणों से बंद रखा गया। इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू रहे। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य बिना अनुमति बड़ी सभाओं और जुलूसों को रोकना तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। पुलिस ने रैली की अनुमति नहीं दी दिल्ली पुलिस ने CJP के संस्थापक अभिजीत दीप्ते को नोटिस जारी कर कनॉट प्लेस में रैली या प्रदर्शन आयोजित नहीं करने की हिदायत दी थी। पुलिस ने संभावित यातायात बाधा, भगदड़ के खतरे और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही प्रभावित होने जैसी चिंताओं का हवाला दिया। कनॉट प्लेस में CCTV निगरानी और बैरिकेडिंग सुरक्षा व्यवस्था के तहत सेंट्रल पार्क, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन और आसपास के संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त CCTV निगरानी और बैरिकेडिंग की गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए हिरासत में लिए गए लोगों को ले जाने हेतु बसों की भी व्यवस्था की गई। CJP संस्थापक अभिजीत दीप्ते गिरफ्तार रैली से पहले दिल्ली पुलिस ने CJP संस्थापक अभिजीत दीप्ते को गिरफ्तार कर लिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह कार्रवाई शांति भंग होने की आशंका को रोकने के उद्देश्य से की गई। छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा को भी हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। क्यों बुलाई गई थी ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आरोपों और पार्टी के गिरफ्तार नेताओं के समर्थन में रैली का आह्वान किया था। पार्टी ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया में राजनीतिक पक्षपात किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। रैली को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बीच दिल्ली पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने, यातायात सुचारु रखने और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही सुनिश्चित करने की रही। स्रोत – Reuters, The New Indian Express, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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