भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की रथ यात्रा हर वर्ष श्रद्धालुओं को न केवल आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है, बल्कि इसकी कई रहस्यमयी घटनाएं भी लोगों को चमत्कृत करती हैं। जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 की शुरुआत इस वर्ष 26 जून को हो रही है और लाखों भक्त भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath), बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों को खींचने के लिए पुरी में उमड़ पड़े हैं। इस भव्य आयोजन के बीच एक रहस्य बार-बार चर्चा में आता है, जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर लहराने वाली पताका (ध्वज) हवा की उल्टी दिशा में लहराती है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर की पताका सदैव हवा की विपरीत दिशा में लहराती है। यह रहस्यमयी घटना विज्ञान के लिए भी अब तक एक अबूझ पहेली बनी हुई है, जिससे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं आज भी लोगों की आस्था को और प्रगाढ़ करती हैं। यह नजारा हर किसी को चौंका देता है और विज्ञान भी आज तक इसका ठोस कारण स्पष्ट नहीं कर पाया है।
हर दिन बदला जाता है मंदिर का ध्वज, हवा की विपरीत दिशा में लहराता है
पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर फहराने वाला ध्वज अपने आप में एक रहस्य है। हैरानी की बात यह है कि यह ध्वज सदैव हवा की विपरीत दिशा में लहराता है, जो सामान्य विज्ञान के नियमों के बिल्कुल विरुद्ध प्रतीत होता है। यह ध्वज हर दिन बदला जाता है और यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। स्थानीय मान्यता है कि यदि किसी दिन यह ध्वज नहीं बदला गया या नहीं फहराया गया, तो मंदिर के पट 18 वर्षों तक बंद हो जाएंगे। इसी कारण इस परंपरा का पालन अत्यंत श्रद्धा और नियमों के साथ किया जाता है। मंदिर के शिखर पर स्थित एक अन्य रहस्यमयी तत्व है, सुदर्शन चक्र। यह चक्र ऐसा प्रतीत होता है कि आप मंदिर की किसी भी दिशा में खड़े हों, यह हमेशा आपकी ओर ही मुड़ा हुआ नजर आता है। इसे ‘नीलचक्र’ भी कहा जाता है, और यह दर्शाता है कि भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की दृष्टि सदैव अपने भक्तों पर बनी रहती है।
हनुमान से जुड़ी है ध्वज और वायु के रहस्य की पौराणिक कथा
इन चमत्कारी रहस्यों के पीछे एक पुरानी पौराणिक कथा भी प्रचलित है, जिसका संबंध भगवान श्री हनुमान (Lord Hanuman) से जुड़ा हुआ है। कथा के अनुसार, एक समय भगवान विष्णु समुद्र की लहरों की आवाज़ के कारण विश्राम नहीं कर पा रहे थे। जैसे ही यह बात हनुमान जी को पता चली, उन्होंने समुद्र देव से विनती की कि वे अपनी तरंगों की ध्वनि को शांत करें, ताकि भगवान विष्णु विश्राम कर सकें। लेकिन समुद्र देव ने उत्तर दिया कि यह कार्य उनके बस की बात नहीं है, क्योंकि जहां तक वायु बहती है, वहां तक लहरों की गूंज भी जाती है। इसके बाद हनुमान जी (Lord Hanuman) पवन देव से मिलने गए और उनसे सहायता मांगी।
पवन देव ने स्पष्ट कहा कि हवा की दिशा बदलना उनके वश में नहीं है, लेकिन एक उपाय सुझाया – उन्होंने हनुमान जी से कहा कि यदि तुम मंदिर के चारों ओर इतनी तीव्र गति से परिक्रमा करो कि एक स्थायी वायुवृत (Air Barrier) बन जाए, तो सामान्य वायु मंदिर के गर्भगृह तक नहीं पहुंच पाएगी। हनुमान जी (Lord Hanuman) ने ऐसा ही किया और उनकी तेज गति से बनी वायु की परत ने समुद्र की आवाज़ को मंदिर के भीतर पहुंचने से रोक दिया।
इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय
उस दिन से मान्यता है कि मंदिर क्षेत्र में वायु के बहाव की दिशा सामान्य नहीं रही। यही कारण है कि मंदिर की पताका हर समय हवा की विपरीत दिशा में लहराती है, और सुदर्शन चक्र की दृष्टि हर दिशा में समान बनी रहती है।
1800 फीट की ऊंचाई पर फहराई जाती है ध्वज
श्री जगन्नाथ मंदिर की ऊंचाई लगभग 214 फीट है, और यहां हर दिन एक सेवायत (पुजारी) बिना किसी आधुनिक उपकरण का उपयोग किए, मंदिर की चोटी पर चढ़कर ध्वजा को बदलता है। यह कार्य अत्यंत कठिन और जोखिमभरा होता है, फिर भी यह परंपरा सदियों से बिना रुके चल रही है। ऐसा माना जाता है कि यदि किसी दिन ध्वजा न बदली जाए तो उस दिन मंदिर के पट बंद हो जाते हैं और कोई पूजा नहीं होती।
Latest News in Hindi Today Hindi news Lord Jagannath
#JagannathRathYatra2025 #PuriRathYatra #JagannathTemple #DivineMiracle #IndianFestivals






