पुरी रसोई का रहस्य: अग्नि पर रखे सात बर्तनों में सबसे ऊपर की हांडी पहले पकती है।

Seven pot cooking mystery

हर साल की तरह इस वर्ष भी भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा 26 जून 2025 से आरंभ होगी। पंचांग के अनुसार यह यात्रा आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आरंभ होती है, जो इस बार दोपहर 1 बजकर 27 मिनट से प्रारंभ होगी। इस अवसर पर लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन हेतु पुरी पहुंचते हैं और वहां पर महाप्रसाद का पवित्र भोग ग्रहण करते हैं। इस भोग से जुड़ा एक ऐसा रहस्य है जिसे आज तक विज्ञान भी नहीं समझ पाया है। जगन्नाथ रथ यात्रा 2025 के दौरान उभरता है यह चमत्कारी दृश्य, विज्ञान भी हैरान, परंपरा में छुपा है अद्भुत रहस्य। श्रद्धा और विज्ञान की अद्वितीय संगति बनाती है इस परंपरा को अनोखा।

भव्य रसोई में प्रतिदिन लगभग 500 से अधिक महाराज और 300 के करीब सहयोगी मिलकर भगवान के लिए छप्पन भोग करते हैं तैयार 

पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर की रसोई को विश्व की सबसे बड़ी रसोई माना जाता है। इस भव्य रसोई में प्रतिदिन लगभग 500 से अधिक महाराज और 300 के करीब सहयोगी मिलकर भगवान के लिए छप्पन भोग तैयार करते हैं। मंदिर की यह रसोई न सिर्फ विशाल है, बल्कि इसके काम करने का तरीका भी पूरी दुनिया के लिए रहस्य बना हुआ है। रथ यात्रा के दौरान प्रतिदिन मंदिर में 2,000 से लेकर 2 लाख तक श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए आते हैं। इन सभी को ‘महाप्रसाद’ स्वरूप एक विशेष प्रकार की खिचड़ी दी जाती है। लेकिन इस खिचड़ी को पकाने की विधि इतनी अनोखी है कि उसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान रह जाते हैं।

रहस्यमयी तरीके से बनता है यह महाप्रसाद

भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद किसी धातु के नहीं, बल्कि खास तौर पर मिट्टी के बर्तनों में पकाया जाता है। इसे पकाने के लिए सात मिट्टी की हांडियों (बर्तनों) को एक के ऊपर एक रखकर चूल्हे पर चढ़ाया जाता है। इस प्रक्रिया का सबसे चौंकाने वाला और रहस्यमय पहलू यह है कि नीचे आग जलने के बावजूद सबसे नीचे की हांडी सबसे आखिर में पकती है, जबकि सबसे ऊपर रखी हुई हांडी का चावल सबसे पहले तैयार हो जाता है। साधारण तर्क से देखा जाए तो आग के सबसे पास रखी हांडी पहले पकनी चाहिए, लेकिन यहां ठीक उल्टा होता है। ऊपर से नीचे की ओर क्रम में हांडियां धीरे-धीरे पकती हैं, और नीचे की हांडी सबसे आखिर में पककर तैयार होती है। इसी विशेष तरीके से तैयार किया गया यह भोग भगवान जगन्नाथ को चढ़ाया जाता है, जिसे श्रद्धालु “महाप्रसाद” के रूप में ग्रहण करते हैं। यह तरीका आज भी विज्ञान के लिए एक रहस्य बना हुआ है।

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दुनिया की सबसे बड़ी रसोई

जगन्नाथ मंदिर परिसर में स्थित ‘अन्न रसोई’ को दुनिया की सबसे बड़ी रसोई माना जाता है। इस रसोई में हर दिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार किया जाता है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां आने वाले किसी भी भक्त को अब तक प्रसाद के बिना लौटना नहीं पड़ा। भीड़ चाहे जितनी हो, सभी को भरपेट भोजन मिलता है। यहां भोजन बनाने का पारंपरिक तरीका और उसकी सटीक व्यवस्था किसी चमत्कार से कम नहीं लगती। इसे चमत्कार ही कहेंगे कि श्रद्धालु चाहे लाखों की तादात में आए करोड़ों की, प्रासद कभी कम नहीं होता। ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी श्रद्धालु को बिना प्रसाद के ही लौटना पड़ा हो। इसे चमत्कार ही कहेंगे। सही मायनों में यह श्रद्धा और शक्ति का ही कमाल है। आज का विज्ञान और बुद्धिजीवी भले ही इसपर आसानी से यकीन न करें लेकिन यह सच है कि जगन्नाथ मंदिर परिसर में स्थित ‘अन्न रसोई’ से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटा है। 

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