भारतीय वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वास्तु का विशेष महत्व होता है। जिस प्रकार घर में मुख्य द्वार, पूजा स्थान या शयनकक्ष के लिए दिशाओं का ध्यान रखना जरूरी होता है, उसी तरह रसोईघर (किचन) की दिशा भी जीवन पर प्रभाव डालती है। अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि पश्चिम दिशा में रसोई बनाना शुभ होता है या अशुभ? आइए इस लेख में जानते हैं इस विषय पर विस्तृत जानकारी, पौराणिक मान्यताओं और वास्तु विशेषज्ञों की सलाह।
क्या कहता है वास्तु शास्त्र?
वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर यानी किचन अग्नि तत्व से जुड़ा होता है, इसलिए इसे आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व दिशा) में बनाना सबसे उत्तम माना गया है। अग्नि देवता का संबंध दक्षिण-पूर्व से है और यह दिशा ऊर्जा, उत्साह और स्वास्थ्य का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन आधुनिक समय में ज़मीन की स्थिति या घर के नक्शे के अनुसार सभी के लिए यह दिशा उपलब्ध हो पाना संभव नहीं होता। पश्चिम दिशा में रसोई का निर्माण शुभ है या अशुभ, यह जानना हर गृहिणी के लिए जरूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि रसोई पश्चिम दिशा में बनी हो तो क्या यह अशुभ है?
पश्चिम दिशा में रसोई: शुभ या अशुभ?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोईघर के लिए सबसे उपयुक्त स्थान आग्नेय कोण यानी दक्षिण-पूर्व दिशा मानी जाती है, क्योंकि यह दिशा शुक्र ग्रह की होती है, जो सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का कारक है। यदि किसी कारणवश रसोई इस दिशा में नहीं बनाई जा सकती, तो पूर्व दिशा भी एक विकल्प हो सकती है। लेकिन यदि रसोई पश्चिम दिशा में है, तो इसे वास्तु की दृष्टि से अनुकूल नहीं माना जाता।
पश्चिम दिशा में किचन होने से घर में लगातार बीमारियों, तनाव, गृह कलह और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है। चूंकि रसोई अग्नि तत्व से जुड़ी होती है और पश्चिम दिशा इससे मेल नहीं खाती, इसलिए यह स्थिति घर की ऊर्जा को असंतुलित कर सकती है और अशुभ प्रभाव ला सकती है।
पश्चिम दिशा में किचन है तो ये उपाय अपनाएं
- किचन के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में सिंदूरी रंग के गणेश जी की तस्वीर लगाएं।
- खाना बनाते समय हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह रखें, इससे सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
- रसोई में सिंक या वॉशबेसिन उत्तर-पश्चिम दिशा में रखें।
- यदि रसोई का दरवाजा मुख्य द्वार के ठीक सामने हो, तो उसके सामने एक पर्दा टांग दें ताकि नकारात्मक ऊर्जा सीधे प्रवेश न कर सके।
वास्तु दोष होने पर क्या करें उपाय?
यदि आपके घर में किचन पश्चिम दिशा में है और आप दिशा बदलना संभव नहीं समझते, तो वास्तु विशेषज्ञ कुछ सरल उपायों से नकारात्मकता को कम करने की सलाह देते हैं:
- चूल्हे की दिशा का ध्यान रखें:
चूल्हा इस प्रकार लगाएं कि खाना बनाते समय मुंह पूर्व दिशा की ओर हो। यदि यह संभव न हो, तो उत्तर दिशा की ओर भी किया जा सकता है।
- दीवारों का रंग:
पश्चिम दिशा में किचन हो तो दीवारों का रंग हल्का पीला, क्रीम या संतरी (ऑरेंज) रखें। ये रंग ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करते हैं।
- शुद्धि के लिए हवन या धूप:
नियमित रूप से किचन में गौ धूप, कपूर या हवन सामग्री जलाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
- धातु का प्रयोग:
किचन के उत्तर-पूर्व कोने में तांबे का बर्तन रखें। यह ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है।
- भगवान का चित्र लगाएं:
किचन की पूर्वी दीवार पर भगवान अन्नपूर्णा माता या श्री गणेश जी की तस्वीर लगाएं।
- साफ-सफाई और हवा का प्रवाह:
रसोई में नियमित सफाई और पर्याप्त वेंटीलेशन जरूरी है। किचन में एक छोटा सा पौधा भी सकारात्मक ऊर्जा देता है।
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पश्चिम दिशा में रसोई: क्या कहा गया है शास्त्रों में?
वास्तु शास्त्र में किसी भी दिशा को पूर्णत: निषेध नहीं किया गया है। हर दिशा में जीवन और प्रकृति के तत्वों का सामंजस्य होता है। यदि उस दिशा में रसोई बनती है, तो उसमें कुछ सावधानियों और उपचारों से वास्तु दोष को नियंत्रित किया जा सकता है।
पश्चिम दिशा को यम की दिशा भी माना जाता है, परंतु यदि उसका सही उपयोग किया जाए, तो यह दिशा भी समृद्धि का स्रोत बन सकती है।
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