ठाणे स्कूल में पीरियड्स जांच के नाम पर छात्राओं का अपमान 

Thane School Girls Humiliated Over Periods Check

ठाणे के शाहपुर इलाके में एक स्कूल में जो कुछ हुआ, उसने समाज की सोच और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल प्रशासन ने केवल एक खून के धब्बे के आधार पर दस से अधिक छात्राओं के कपड़े उतरवाकर यह जांचने की कोशिश की कि कौन सी लड़की पीरियड्स (Menstrual Cycle) में है। इस घटना के बाद छात्रों के माता-पिता में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके चलते पुलिस ने स्कूल की प्रिंसिपल, एक आया, चार शिक्षकों और दो ट्रस्टियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।

बाथरूम में खून के धब्बे से शुरू हुआ मामला

मामला मंगलवार का है जब स्कूल के बाथरूम में खून के धब्बे दिखाई दिए। इसके बाद यह बात टीचरों तक पहुंची। हैरानी की बात यह रही कि छात्राओं के पीरियड्स (Menstrual Cycle) की जानकारी पूछ कर ली जा सकती थी, लेकिन जिस तरह से स्कूल की प्रिंसिपल (School Principal) समेत अन्य स्टाफ की मानसिक सोच अमानवीय और असंवेदनशील है। स्कूल की प्रिंसिपल समेत अन्य स्टाफ ने क्लास 5 से 10 तक की सभी लड़कियों को एक बड़े हॉल में बुलाया, जहां एक बड़ी स्क्रीन पर बाथरूम में मिले खून के धब्बे दिखाए गए। इसके बाद लड़कियों से पूछा गया कि कौन-कौन पीरियड्स (Menstrual Cycle) में है। जिन्होंने हाथ उठाया, उनके नाम लिख लिए गए। लेकिन जिन लड़कियों ने हाथ नहीं उठाया, उन्हें एक-एक कर बाथरूम में ले जाया गया और आया द्वारा उनकी जबरन जांच कराई गई।

इस दौरान कई छात्राओं को न केवल मानसिक तनाव (Mental Stress) से गुजरना पड़ा, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी गहरी चोट पहुंची। एक छात्रा की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी से प्रिंसिपल ने जबरदस्ती पूछताछ की कि वह पीरियड्स में नहीं होते हुए पैड क्यों पहन रही है। जब छात्रा ने जवाब देने की कोशिश की, तो प्रिंसिपल ने उसे झूठा ठहराया और जबरन उसका अंगूठा लेकर एक कथित बयान पर निशान भी लिया।

माता-पिता का गुस्सा फूटा

घटना के बाद जब छात्राएं घर पहुंचीं तो कई लड़कियां रोते हुए अपने माता-पिता से मिलीं और पूरा वाकया बताया। बुधवार को गुस्साए अभिभावकों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। पुलिस की ओर से बताया गया है कि सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। इसके साथ ही पुलिस छात्राओं की गवाही ली जा रही है और आगे की जांच जारी है।

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स्कूल की लापरवाही 

यह घटना केवल एक स्कूल की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि किशोरियों के यौन स्वास्थ्य और निजता को लेकर कितनी असंवेदनशीलता अब भी मौजूद है। मासिक धर्म (Menstrual Cycle) कोई अपराध नहीं है और इसे लेकर शर्म या अपमान की भावना पैदा करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक शैक्षणिक संस्थान जो बच्चों के भविष्य की नींव रखता है, वह बच्चों की गरिमा को इस हद तक कुचल सकता है। बच्चों की मानसिक स्थिति, आत्मसम्मान और विश्वास को झकझोरने वाला यह मामला कहीं न कहीं स्कूल प्रशासन की विफलता और सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करता है। अब ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या शिक्षा मंत्रालय को ऐसे मामलों पर तुरंत हस्तक्षेप कर एक गाइडलाइन जारी नहीं करनी चाहिए?  

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