बीते दिनों हिंदी भाषा को लेकर छिड़े विवाद और लंबी चली बहस के बाद आखिरकार महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार को अपना फैसला वापस लेना ही पड़ा। भाषा विवाद पर भले राज्य सरकार ने बीएमसी इलेक्शन और मराठी वोटो के छिटकने एक डर से पूर्व के अपने दोनों आदेश रद्द कर दिए हों, लेकिन ठाकरे बंधु इस मुद्दे को हाथ से जाने देना नहीं (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) चाहते। हालाँकि राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि एक नई समिति बनाई जाएगी जो हिंदी भाषा को प्राथमिक स्कूलों में कक्षा पहली से पांचवी तक तीसरी भाषा के रूप में पढ़ाया जाना है या नहीं इसपर निर्णय लेगी। मजे की बात यह कि सूबे की भाजपा सरकार भले ही मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रही है, लेकिन ठाकरे बंधु 5 जुलाई को एक मंच पर साथ दिखेंगे। दरअसल, राज्य सरकार के इस फैसले को दोनों ठाकरे बंधू अपनी लड़ाई की जीत बता रहे हैं। दोनों का कहना है कि “महाराष्ट्र का मराठी मानुष साथ आया ये देख सरकार डर गई। ये मराठी मानुष की जीत है। इसका विजय दिवस जुलूस मनाया जाएगा।”
ठाकरे गुट और मनसे के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकें हो (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) रही हैं

मीडिया रिपोर्ट की माने तो 5 जुलाई को दोनों ठाकरे भाई एक साथ एक मंच पर कई वर्षों के बाद आएंगे। पहले इस विजय दिवस के लिए शिवाजी पार्क और गिरगांव चौपाटी पर विचार चल रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं की आपसी सहमति से वर्ली डोम संभागृह को फाइनल किया गया है। ध्यान देने वाली बात यह कि 5 जुलाई को होने वाले विजय दिवस को लेकर ठाकरे गुट और मनसे के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बैठकें हो (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) रही हैं। शिवसेना की ओर से संजय राऊत, अनिल परब और मनसे की ओर से बाला नांदगावकर और अभिजीत पानसे के बीच हाल ही में करीब 40 मिनट तक की अहम बैठक हुई है। एक तरह से कारगर रणनीति पर मंथन हो रहा है। पार्टी से जुड़े करीबी सूत्रों की माने तो इस बैठक में विजय दिवस की संपूर्ण रूपरेखा, आयोजन स्थल, भीड़ प्रबंधन और भाषणों की रणनीति पर चर्चा हुई। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हैं कि यह सिर्फ मराठी भाषा, मराठी अस्मिता और सरकार के निर्णय वापसी का उत्सव होगा। इसमें कोई राजनीतिक झंडा या एजेंडा नहीं होगा। वरली डोम को आयोजन स्थल के रूप में चुना गया है। दोनों दलों में इसे लेकर सहमति बन चुकी है। आयोजकों का कहना है कि यह पूरी तरह से मराठी भाषा और संस्कृति की विजय के रूप में मनाया जाएगा।
इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट?
यही उद्धव ठाकरे थे, जिन्होंने राज ठाकरे को अपमानित किया, तंग किया और पार्टी से बाहर जाने के लिए (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) मजबूर किया
इस पूरे मामले पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए (Narayan Rane Targets Uddhav Before Vijay Diwas) कहा कि “उद्धव ठाकरे आज राज ठाकरे को भाईचारे के नाते वापस आने की अपील कर रहे हैं। लेकिन मुझे याद है, यही उद्धव ठाकरे थे, जिन्होंने राज ठाकरे को अपमानित किया, तंग किया और पार्टी से बाहर जाने के लिए मजबूर किया। क्या उन्हें यह सब याद नहीं है? अब वे क्यों इतनी मिन्नतें कर रहे हैं? उद्धव को आड़े हाथों लेते हुए नारायण राणे ने कहा कि “राज ठाकरे, नारायण राणे, गणेश नाईक और एकनाथ शिंदे जैसे नेताओं ने शिवसेना को खड़ा करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया, लेकिन इन्हीं लोगों को उद्धव ने बाहर का रास्ता दिखाया। जिस शिवसेना को माननीय बालासाहेब ठाकरे ने सत्ता तक पहुंचाया, उसी सत्ता को उद्धव ठाकरे ने गंवा दिया। शिवसेना की इस गिरावट के लिए पूरी तरह से उद्धव ठाकरे जिम्मेदार हैं।” उन्होंने आगे कहा, मराठी जनता और हिंदू समाज ने इन्हें घर बिठा दिया है। जो चीज एक बार हाथ से निकल जाती है, वो फिर से वापस नहीं आती जो बूंद से गई, वो हौद से नहीं आती! उद्धव ठाकरे में न तो वह हिम्मत है और न ही वह क्षमता कि वो फिर से सब कुछ हासिल कर सकें।
Latest News in Hindi Today Hindi news Narayan Rane
#NarayanRane #UddhavThackeray #VijayDiwas #RajThackeray #MaharashtraPolitics #ShivSena



