अयोध्या, उत्तर प्रदेश, 6 नवंबर 2026: देश में तीन करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों की मौजूदगी को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार से सवाल पूछा है कि यदि देश में तीन करोड़ अवैध घुसपैठिए मौजूद हैं, तो पिछले 12 वर्षों में उन्हें बाहर क्यों नहीं निकाला गया। बुधवार, 4 नवंबर को अयोध्या पहुंचे संजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से देश में अवैध घुसपैठ तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जवाब मांगा। उन्होंने चुनाव आयोग से भी कथित तौर पर तीन करोड़ घुसपैठियों की पहचान सार्वजनिक करने की मांग की।
अमित शाह के तीन करोड़ घुसपैठियों वाले बयान पर विवाद
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2 नवंबर को हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर बड़ा दावा किया था।
उन्होंने कहा था कि SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लगभग 13 करोड़ नामों में तीन करोड़ ऐसे लोगों के नाम शामिल थे, जिनकी पहचान बांग्लादेशी घुसपैठियों के रूप में की जा रही है।
अमित शाह ने दावा किया कि हटाए गए नामों में बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की भी थी, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, जो दूसरे स्थानों पर चले गए थे या जिनकी प्रविष्टियां दोहराई गई थीं।
गृह मंत्री ने कांग्रेस पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण का विरोध करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल भारतीय नागरिकों को ही देश के चुनावों में मतदान करने का अधिकार है।
हालांकि तीन करोड़ लोगों को बांग्लादेशी घुसपैठिया बताने वाले दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
संजय सिंह ने पूछा- 12 साल में कितनों को बाहर निकाला?
अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान संजय सिंह ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पिछले 12 वर्षों से केंद्र की सत्ता में हैं।
यदि देश में वास्तव में इतनी बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठिए मौजूद हैं, तो सरकार को यह बताना चाहिए कि इस दौरान कितने लोगों की पहचान की गई और कितनों को देश से बाहर भेजा गया।
संजय सिंह ने सवाल उठाया कि सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ रोकने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। ऐसे में सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए।
चुनाव आयोग से तीन करोड़ नाम सार्वजनिक करने की मांग
आम आदमी पार्टी के सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए हैं।
उन्होंने मांग की कि जिन तीन करोड़ लोगों को घुसपैठिया बताया जा रहा है, उनकी पहचान और इससे संबंधित प्रमाण सार्वजनिक किए जाएं।
संजय सिंह ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।
उन्होंने चुनाव आयोग से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की भी मांग की।
SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के आरोप
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है।
इसके अंतर्गत मृत मतदाताओं, स्थायी रूप से स्थानांतरित लोगों, दोहराई गई प्रविष्टियों और अन्य अपात्र नामों की पहचान की जाती है।
हालांकि विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए हैं।
संजय सिंह ने दावा किया कि देशभर में लगभग 13.37 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल विपक्षी दलों के समर्थक मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू करने की मांग
संजय सिंह ने चुनाव आयोग से उन मतदाताओं को आवश्यक अवसर देने की मांग की है, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए या अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत अथवा दोहराई गई प्रविष्टियों की श्रेणी में रखे गए।
उन्होंने कहा कि ऐसे पात्र मतदाताओं को गणना फॉर्म और आवश्यक आवेदन जमा करने की सुविधा मिलनी चाहिए।
इसके लिए उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की।
उनका कहना है कि किसी भी पात्र भारतीय नागरिक को अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के कानूनी अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने भी तीन करोड़ घुसपैठियों के दावे पर उठाए सवाल
आम आदमी पार्टी के अलावा कांग्रेस नेताओं ने भी भाजपा के तीन करोड़ घुसपैठियों वाले दावे पर सवाल उठाए हैं।
पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भाजपा नेतृत्व से पूछा कि जिन तीन करोड़ लोगों को घुसपैठिया बताया जा रहा है, उनकी पहचान किस आधार पर की गई है।
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या केंद्र और राज्य सरकारों के पास इन लोगों की पहचान से संबंधित प्रमाण मौजूद हैं।
कांग्रेस का कहना है कि यदि अवैध घुसपैठियों की पहचान हो चुकी है, तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
दूसरी ओर, भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची से अपात्र नाम हटाना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
क्या तीन करोड़ लोग वास्तव में बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं?
इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल तीन करोड़ लोगों की पहचान और उनसे संबंधित प्रमाणों का है।
चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के दौरान कुछ मतदाताओं को अनुपस्थित या पता नहीं चल पाने वाली श्रेणियों में रखा गया था।
लेकिन केवल किसी व्यक्ति के अनुपस्थित होने या उसका नाम मतदाता सूची से हटने के आधार पर उसे विदेशी नागरिक या अवैध घुसपैठिया नहीं माना जा सकता।
ऐसी पहचान के लिए नागरिकता और अन्य संबंधित कानूनी दस्तावेजों की जांच आवश्यक होती है।
अब तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तीन करोड़ लोगों के बांग्लादेशी घुसपैठिए होने की आधिकारिक रूप से सत्यापित सूची सामने नहीं आई है।
केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के जवाब का इंतजार
तीन करोड़ घुसपैठियों के दावे को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
एक तरफ भाजपा मतदाता सूची के पुनरीक्षण को चुनावी व्यवस्था की शुद्धता के लिए आवश्यक बता रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों पर सवाल उठा रहा है।
संजय सिंह ने केंद्र सरकार से पिछले 12 वर्षों में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ हुई कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
फिलहाल इस राजनीतिक विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि तीन करोड़ घुसपैठियों के दावे के समर्थन में कौन-से प्रमाण मौजूद हैं और मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की नागरिकता की पुष्टि किस आधार पर की गई है।
स्रोत: अमर उजाला, द इंडियन एक्सप्रेस, स्क्रॉल, नवभारत लाइव, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI), लल्लूराम।
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