साल 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में संभल पर छिड़ी सियासत के बीच सीएम बुधवार को योगी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को पॉडकास्ट इंटरव्यू दिया। इस पॉडकास्ट इंटरव्यू में उनसे कई तरह के सवाल-जवाब किये गए। इसी बीच उनसे उनके तीसरे कार्यकाल को लेकर भी एक सवाल पूछा गया। जिसके जवाब ने सभी चौंका दिया है। दरअसल, उनसे पूछा गया कि क्या आप तीसरा टर्म (Yogi Adityanath third term) भी ट्राई करेंगे, क्या आपकी नजर हैट्रिक पर है? इस पेंचीदे सवाल के जवाब पर सीएम योगी ने बड़ी सफाई से अपनी बात रखते हुए कहा कि “वह खुद इसकी कोशिश नहीं करेंगे।” बता दें कि तीसरी बार सीएम बनने के सवाल पर मैं कहना चाहता हूं कि मैं कोशिश नहीं करूंगा। यह मेरी पार्टी पर निर्भर है। मेरी पार्टी कोशिश करेगी और फैसला लेगी। ये बात जगजाहिर है कि सीएम योगी अपनी बात बिना किसी लाग-लपेट के रखते हैं। भले ही इसका जवाब उन्होंने जो भी दिया, लेकिन वो भाजपा की रणनीति का ही एक हिस्सा है। कहने की जरूरत नहीं कि सीएम योगी के जवाब से साफ पता चलता है कि कैसे भाजपा अखिलेश यादव की सपा और राहुल गांधी की कांग्रेस से अलग सोचती है। और यही उसे अन्य दलों से अलहदा बनाती है।
पार्टी लाइन पर छोड़ा सीएम का फैसला (Yogi Adityanath third term)
निश्चित ही सबके मन में यह सवाल होगा कि सीएम योगी के जवाब का भाजपा की रणनीति से क्या मतलब? तो इसका मतलब साफ़ है कि भाजपा आखिरी तक अपने पत्ते नहीं खोलती। अंदरूनी कलह से बचने के लिए शायद पार्टी ऐसा करती हो। कारण चाहे कुछ भी, लेकन इसका बड़ा फायदा यह कि पार्टी गुटबाजी से बच जाती है। इसके साथ ही वह यह संदेश देना चाहती है कि बूथ स्तर का कार्यकर्ता भी उसके लिए उतना ही महत्व रखता है, जितना की कोई कद्दावर नेता। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा में कोई भी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री बन सकता है। वजह यही जो सीएम योगी ने जो जवाब दिया, उसके मायने बड़े गहरे हैं। इस बात से इंकार नहीं कि वर्तमान में सीएम योगी की लोकप्रियता सातवें आसमान पर है। ऐसे में वो चाहते तो अपने तीसरे टर्म (Yogi Adityanath third term) के लिए खुद को सीएम फेस घोषित कर सकते थे, लेकिन उन्होंने यह फैसला पार्टी लाइन पर छोड़ दिया। खैर, यह तो वक़्त ही बताएगा कि साल 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत होती है या हार। और यदि भाजपा हैट्रिक मारती है, तो सीएम योगी मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे या नहीं? बेशक उनके जवाब से न सिर्फ उत्तर प्रदेश में सियासी सुगबुगाहट तेज हो गई है बल्कि सियासी पंडितों के बीच भी चर्चा का विषय बना गई है।
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हम अदालत का ही कहना मान रहे हैं, वरना अभी तक वहां बहुत कुछ हो गया होता
बता दें कि संभल से लेकर वाराणसी तक नए मंदिर खोजने के सवाल पर योगी ने कहा कि “हम जितने मंदिर खोज पाएंगे, खोजेंगे। मथुरा मामले के कोर्ट में होने के सवाल पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “हम अदालत का ही कहना मान रहे हैं, वरना अभी तक वहां बहुत कुछ हो गया होता (Yogi Adityanath third term)।” उन्होंने यह भी कहा कि “प्रशासन ने अब तक संभल में कुल 54 धार्मिक स्थलों को चिन्हित किया है। इसके अलावा कुछ और के लिए भी प्रयास किया जा रहा है। जितना मिलेगा हम सब खोदकर निकालेंगे।”
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