AAP to Contest Bihar Election 2025 Alone

Bihar Assembly Election 2025: आम आदमी पार्टी अकेले लड़ेगी चुनाव, अरविंद केजरीवाल ने किया बड़ा ऐलान

बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) होने वाला है। और चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज़ हो चुकी हैं। सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां बना चुकी हैं और चुनाव में विजय होने के लिए अपनी-अपनी स्ट्रेटजी पर काम भी कर रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने साफ ऐलान किया कि उनकी पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Election 2025) में सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी यानी किसी भी दूसरी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा। AAP लड़ेगी बिना किसी गठबंधन के चुनाव अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि आम आदमी पार्टी (AAP) अब किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा है कि INDIA गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनाव तक सीमित था। बिहार विधानसभा चुनाव अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) में हम किसी दल से गठबंधन नहीं करेंगे और अपने दम पर मैदान में उतरेंगे। अब इससे ये साफ हो गया है कि आम आदमी पार्टी बिहार की राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की तैयारी में है। दिल्ली और पंजाब में सत्ता में रह चुकी AAP अब दूसरे राज्यों में भी अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही है। भाजपा नेता अजय आलोक ने कसा तंज AAP के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। BJP नेता अजय आलोक (Ajay Alok) ने अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर तंज कस्ते हुए कहा है कि कपटीवाल जी बिहार में 243 सीटों पर लड़ने की बात कर रहे हैं, जबकि दिल्ली में ही जनता ने उन्हें नकार दिया। दिल्ली और पंजाब की जनता केजरीवाल की सच्चाई जान चुकी है। अब बिहार में भी उन्हें अपनी औकात का अंदाजा हो जाएगा। अजय आलोक ने AAP की पंजाब सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि तीन साल में पंजाब पर डेढ़ लाख करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका है और केजरीवाल सरकार वहां की संपत्ति को ATM की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि आइए बिहार में चुनाव (Bihar Election) लड़िए, आपको आपकी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा खुद ही हो जाएगा। बिहार चुनाव: सियासी जमीन तैयार बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) को लेकर राज्य की राजनीति बेहद गर्म है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जनता दल (JDU), भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) के साथ-साथ अब आम आदमी पार्टी और जन सुराज जैसे नए दल भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। चुनाव आयोग ने हाल ही में जन सुराज पार्टी को स्कूल बैग (School Bag) चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। यह प्रतीक शिक्षा और प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है, जो पार्टी की विचारधारा के अनुरूप है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor), जिन्हें देश के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में गिना जाता है, अब स्वयं सक्रिय राजनीति में उतर चुके हैं और बिहार की सियासत में नई ऊर्जा लाने का दावा कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें:- कांवड़ यात्रा में दुकानों के लाइसेंस मुद्दे पर बोले ओवैसी, कहा- “क्‍या पैंट उतरवा देंगे” आम आदमी पार्टी (AAP) की चुनौती और रणनीति दिल्ली और पंजाब में अपने प्रदर्शन के दम पर AAP अब बिहार में भी बदलाव की राजनीति का संदेश देना चाहती है। पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी नीति को बिहार में भी दोहराने की तैयारी में है। हालांकि राज्य की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां दिल्ली या पंजाब से अलग हैं, जहां जातीय समीकरण और क्षेत्रीय मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। AAP के लिए सबसे बड़ी चुनौती जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा करना और विश्वसनीय स्थानीय नेतृत्व तैयार करना होगी। फिलहाल बिहार में AAP की कोई मजबूत उपस्थिति नहीं रही है, लेकिन पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि दिल्ली मॉडल और केजरीवाल की लोकप्रियता के दम पर वो जनता को आकर्षित कर सकते हैं। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) का बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में अकेले उतरने का फैसला राज्य की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है। जहां एक ओर यह फैसला विपक्षी एकता को झटका दे सकता है, वहीं दूसरी ओर AAP के लिए यह एक बड़ा जोखिम भी है। पार्टी को बिहार जैसे राज्य में अपना आधार बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, क्योंकि यहां की राजनीति पुराने और गहरे जमीनी समीकरणों पर आधारित है। आने वाले महीनों में AAP की रणनीति, उम्मीदवार चयन और प्रचार अभियान यह तय करेंगे कि क्या पार्टी बिहार की राजनीति में कोई निर्णायक भूमिका निभा सकती है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि केजरीवाल के इस ऐलान ने बिहार चुनाव (Bihar Election) की बहस को और गर्म कर दिया है। Latest News in Hindi Today Hindi news AAP #biharelection2025 #aap #arvindkejriwal #biharpolitics #aapbihar

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Arvind Kejriwal- AAP

गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट?

हाल ही में हुए उपचुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। पहली जीत गुजरात की विसावदर (Visavadar Gujarat) और दूसरी जीत पंजाब की लुधियाना पश्चिम (Punjab Ludhiana West) में मिली है। इस जीत के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi Former Chief Minister Arvind Kejriwal) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने इस विजय को जनता के विश्वास और पार्टी के कार्यों की स्वीकृति का प्रतीक बताया। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह जीत साल 2027 के आम चुनावों का संकेत है और उस वर्ष तूफान आने वाला है। दो राज्यों में मिली बड़ी सफलता पांच राज्यों की पांच विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने दो पर जीत हासिल की। इन सीटों में गुजरात की विसावदर और पंजाब की लुधियाना पश्चिम (Visavadar Gujarat and Punjab Ludhiana West) शामिल हैं। इन दोनों ही जगहों पर पार्टी ने पिछली बार की तुलना में दोगुने अंतर से जीत दर्ज की है। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जहां पंजाब में उनकी सरकार पहले से है, वहीं गुजरात में भाजपा की मजबूत पकड़ के बावजूद जनता ने आम आदमी पार्टी को चुना। उन्होंने कहा कि “गुजरात में बीजेपी की शासन प्रणाली, पुलिस, प्रशासन और एजेंसियों पर मजबूत पकड़ है। इसके बावजूद, विसावदर की जनता ने हमें डबल मार्जिन से जिताया। यह इस बात का प्रमाण है कि लोग बीजेपी के 30 वर्षों के शासन से परेशान हो चुके हैं और अब बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।” View this post on Instagram A post shared by Aam Aadmi Party | AAP (@aamaadmiparty) लुधियाना पश्चिम की जीत और जनता का मूड लुधियाना पश्चिम सीट (Ludhiana West Seat) पर आप के उम्मीदवार संजीव अरोड़ा (Sanjeev Arora), जो राज्यसभा सांसद भी हैं और अब चुनाव भी जीत चुके हैं। यह सीट पहले कांग्रेस (Congress) के कब्जे में थी, लेकिन अब वहां की जनता ने आम आदमी पार्टी के पक्ष में मतदान कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे पार्टी के कामकाज से संतुष्ट हैं। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कहा पंजाब में हमने जब 2022 में विधानसभा चुनाव जीता था, तब कहा गया था कि यह आम आदमी पार्टी की आंधी है। अब उपचुनाव में उसी सीट पर हम दुगने अंतर से जीते हैं, तो यह दर्शाता है कि जनता का भरोसा हम पर और मजबूत हुआ है। यह एक सेमीफाइनल जैसा है, 2027 में तो तूफान ही आएगा। राज्यसभा जाने की अटकलों पर जवाब प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) से पूछा गया कि क्या वे राज्यसभा जाने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मैं राज्यसभा नहीं जा रहा हूं। यह निर्णय पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति करेगी कि राज्यसभा कौन जाएगा।” इस उत्तर से उन्होंने यह संकेत भी दिया कि उनका लक्ष्य अभी ज़मीन पर रहकर पार्टी को आगे बढ़ाना है। इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! क्या है जनता का संदेश? अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने जोर देकर कहा कि उपचुनाव के नतीजे केवल जीत का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि जनता की ओर से एक स्पष्ट संदेश भी हैं कि जनता वही पार्टी चुनेगी जो उनके लिए काम करती है। दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकारों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली जैसे मुद्दों पर जो काम किया है, उसका असर अब दूसरे राज्यों में भी दिखने लगा है। गुजरात जैसे राज्य जहां बीजेपी (BJP) की मजबूत पकड़ रही है, वहां भी अब बदलाव की हवा बहती दिख रही है। विसावदर सीट पर मिली जीत इस बात का संकेत है कि लोग अब पारंपरिक राजनीति से ऊपर उठकर परिणामों पर ध्यान दे रहे हैं। गुजरात और पंजाब (Gujrat and Punjab) में मिली इस जीत ने आम आदमी पार्टी को नई ऊर्जा और दिशा दी है। यह जीत न सिर्फ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए उत्साहवर्धक है, बल्कि यह पूरे देश की राजनीति में एक नया संकेत भी दे रही है कि जनता अब विकल्प चाहती है और वह विकल्प उन्हें काम करने वाली पार्टियों में दिख रहा है। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के शब्दों में साल 2027 में तूफान आने वाला बयान सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि आने वाले सालों में भारतीय राजनीति की दिशा और दशा को दर्शाने वाला संकेत भी हो सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Arvind Kejriwal #Visavadar #Ludhiana #Election2025 #AAP #Arvindkejriwal

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Rahul Gandhi on Gujarat elections: राहुल गांधी ने बताया इसलिए गुजरात में सत्ता से बाहर है कांग्रेस

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में रहते हैं। ताजा उदहारण है, गुजरात के अहमदाबाद का। जहां जाने अनजाने में ही सही दिल की बात जुबां पर आ ही गई। दरअसल, राहुल गांधी दो दिन के गुजरात दौरे पर हैं। शनिवार को उन्होंने अहमदाबाद के जेड हॉल में प्रदेश के करीब 2 हजार कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गुजरात में कांग्रेस की लीडरशीप में दो तरह के लोग हैं। उनमें बंटवारा है। एक हैं जो जनता के साथ खड़े हैं, जिनके दिल में कांग्रेस की विचारधारा है। दूसरे वे हैं, जो जनता से कटे हुए हैं, दूर बैठते हैं और उनमें से आधे बीजेपी से मिले हुए हैं।” राहुल ने आगे कहा कि “मेरी जिम्मेदारी है कि जो ये दो ग्रुप हैं इनको छांटना है। कांग्रेस में नेताओं की कमी नहीं है। बब्बर शेर हैं लेकिन पीछे से चेन लगी हुई है तो वे चेन से बंधे हैं। यहां रेस के घोड़ों को बारात में बांध दिया जाता है। यदि 30-40 लोगों को निकालना पड़े तो ये भी करेंगे। बीजेपी के लिए अंदर से काम कर रहे हो, जाओ बाहर जाकर करो।” खैर, उन्होंने गुजरात में कांग्रेस की स्थिति पर खुलकर अपनी बात रखी। अपनी बात कहते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि बीते 30 वर्षों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है और इसका कारण पार्टी की अपनी कमजोरियां हैं।  उन्होंने कहा कि “हर बार गुजरात में चुनावों की चर्चा होती है। साल 2007, 2012, 2017, 2022 और 2027 लेकिन सवाल सिर्फ चुनाव जीतने का नहीं है। गुजरात की जनता हमें तभी सत्ता में लाएगी जब हम अपनी जिम्मेदारी सही से निभाएंगे।  अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को आत्मविश्लेषण करने (Rahul Gandhi on Gujarat elections) की दी नसीहत  असल में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को आत्मविश्लेषण करने (Rahul Gandhi on Gujarat elections) की नसीहत देते हुए कहा कि “गुजरात आगे बढ़ना चाहता है। लेकिन वह फंसा हुआ महसूस करता है। और मैं साफ कहूं तो गुजरात कांग्रेस भी उसे रास्ता नहीं दिखा पा रही है। मैं यह बिना किसी शर्म और डर के कह रहा हूं कि हमारी पार्टी के नेता, प्रदेश अध्यक्ष और खुद मैं भी गुजरात की जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं।” यही नहीं राहुल गांधी ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी का भी जिक्र करते हुए कहा कि “कांग्रेस को आजादी दिलाने में गुजरात की अहम भूमिका थी।” इस दौरान उन्होंने कहा कि “जब कांग्रेस को ब्रिटिश हुकूमत का सामना करना पड़ा तब हमें नेतृत्व की तलाश थी। वह नेतृत्व हमें दक्षिण अफ्रीका से नहीं बल्कि गुजरात से मिला। गांधीजी ने हमें संघर्ष करने सोचने और आगे बढ़ने की राह दिखाई।” राहुल ने यह भी कहा कि “अगर कांग्रेस को भविष्य में सत्ता में आना है तो उसे गुजरात से ही सीखना होगा।” इसे भी पढ़ें:-  देश से भी ज्यादा राज्य की विकास दर, प्रति व्यक्ति आय में महाराष्ट्र चौथा नंबर पर, अजित पवार ने बताएं विकास के आंकड़े पार्टी के नेता केवल चुनावी रणनीति पर ध्यान न दें बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान करें (Rahul Gandhi on Gujarat elections) इस दौरान राहुल गाँधी पार्टी नेताओं से कहा (Rahul Gandhi on Gujarat elections) कि “वे केवल चुनावी रणनीति पर ध्यान न दें बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिस दिन कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी निभाएगी जनता खुद उसे समर्थन देगी। वैसे उनका यह बयान कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए ही था। खैर, वो कहते हैं न राजनीति कितनी भी कटु और चुनौतीपूर्ण हो लेकिन कई बार नेताओं की जुबान पर सच्चाई आ जाती है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि गुजरात में कांग्रेस के कार्यकर्त्ता उनके इस बयान के प्रति कितनी तल्लीनता दिखाते हैं और संगठन किस दिशा में जाता है। बता दें कि गुजरात में बीते चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद ही निराशाजनक रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul Gandhi on Gujarat elections #RahulGandhi #Congress #GujaratElections #BJP #AAP #ElectionResults #PoliticalAnalysis #IndianPolitics

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