Assam CM Himanta Biswa Sarma

Assam CM Orders Shoot-at-Sight: एक्शन में असम के CM सरमा, इस वजह से दिया गोली मारने के आदेश, रातोंरात 38 गिरफ्तार

असम धुबरी में गोमांस कांड में बड़े एक्शन के बाद रातोंरात 38 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। दरअसल, धुबरी कस्बे में रविवार को एक मंदिर के पास मांस के टुकड़े मिलने के बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इलाके में सोमवार को निषेधाज्ञा लागू की गई थी, जिसे मंगलवार को हटा लिया गया। असम के मुख्यमंत्री बिस्वा सरमा (CM Himanta Biswa Sarma) ने स्थिति की समीक्षा के लिए शुक्रवार को धुबरी का दौरा किया। उन्होंने कहा, मेरे गुवाहाटी पहुंचते ही देखते ही गोली मारने का आदेश आज जारी कर दिया (Assam CM Orders Shoot-at-Sight) जाएगा तथा रात में बाहर निकलने वाले या पत्थरबाजी की घटना में संलिप्त व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाएगा। मुख्यमंत्री सरमा ने शुक्रवार को कहा कि बांग्लादेश की सीमा से लगे धुबरी जिले में रात में देखते ही गोली मारने के आदेश लागू होंगे, क्योंकि एक सांप्रदायिक समूह अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहा है, जिसे सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी।  पिछले एक सप्ताह से धुबरी में कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण (Assam CM Orders Shoot-at-Sight) बनी हुई है मुख्यमंत्री (CM Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि जिले में त्वरित कार्रवाई बल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को तैनात किया (Assam CM Orders Shoot-at-Sight) जाएगा। धुबरी में सभी अपराधियों को गिरफ्तार किया जाएगा। सरमा ने आगे कहा कि जिन लोगों ने कानून अपने हाथ में लिये हैं, उनके साथ सख्ती से निपटा जाएगा। बता दें कि पिछले एक सप्ताह से धुबरी में कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। दरअसल, बकरीद के अगले दिन सात जून को धुबरी जिला मुख्यालय में हनुमान मंदिर के सामने एक गाय का सिर मिला था। फिर क्या था, इसके बाद हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोगों ने शांति और सद्भाव की अपील की थी। तनाव बढ़ता देख इस पूरे मामले पर सरमा ने बताया कि हालांकि अगले दिन फिर से मंदिर के सामने गाय का सिर रखा गया और रात में पत्थरबाजी की गई। जानकारी के मुताबिक बकरीद से एक दिन पहले नबीन बांग्ला नामक संगठन ने भड़काऊ पोस्टर चिपकाए थे, जिनमें धुबरी को बांग्लादेश में शामिल करने की मंशा जाहिर की गई थी।  इसे भी पढ़ें: माई बहन मान योजना बिहार की करोड़ों महिलाओं के लिए अमृत: डॉ मनोज पांडेय जिले में रात में देखते ही गोली मारने के आदेश लागू (Assam CM Orders Shoot-at-Sight) रहेगा इस हरकत पर मुख्यमंत्री (CM Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि धुबरी में अशांति फैलाने के लिए एक सांप्रदायिक समूह सक्रिय हो गया है। इसके बारे में पता चलने के बाद मैं धुबरी आया हूं तथा जिले में रात में देखते ही गोली मारने के आदेश लागू (Assam CM Orders Shoot-at-Sight) रहेगा। धुबरी में सभी अपराधियों को गिरफ्तार किया जाएगा और जिन लोगों ने कानून को अपने हाथ में लिया है, उनके साथ सख्ती से निपटा जाएगा। सीएम सरमा ने कहा, पहले बकरीद पर लोगों का एक वर्ग बीफ खाता था, लेकिन इस बार पश्चिम बंगाल से हजारों मवेशी लाए गए हैं और धुबरी में एक नया बीफ माफिया उभरा है। जिसने त्योहार से ठीक पहले हजारों जानवरों की खरीद की है। यह बात मेरी जानकारी में आई है। मैंने इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। मैंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे उन लोगों को गिरफ्तार करें, जिन्होंने यह मवेशी व्यापार शुरू किया है। अगले साल वह स्वयं ईद के दिन धुबरी जाएंगे और अगले दिन भी वहीं रहेंगे। यही नहीं सरमा ने कहा कि हम समुदाय के एक वर्ग को इस तरह की गड़बड़ी करने की अनुमति नहीं दे सकते। हमारी सरकार इसे बर्दाश्त नहीं करेगी। और धुबरी को हमारे हाथों से जाने नहीं देगी। यदि आवश्यकता पड़ी, तो वह पूरी रात हनुमान मंदिर की रखवाली करेंगे। Latest News in Hindi Today Hindi CM Himanta Biswa Sarma #assam #cmhimantabiswasarma #shootatsight #assamnews #lawandorder #latestnews #india #breakingnews

आगे और पढ़ें
Himanta Biswa Sarma arms policy

Assam arms policy: इस वजह से असम सरकार आम जनता के हाथ में देने जा रही है हथियार

असम की सरकार अपने राज्य के बासिंदों को हथियार रखने की अनुमति देने जा (Assam arms policy) रही है। दरअसल, सरकार ने जनता के हाथ में हथियार देने की स्कीम को मंजूरी दे दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक असम कैबिनेट बांग्लादेश के पास दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले मूल निवासियों और स्थानीय नागरिकों को हथियार देगी। इस पर सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) का कहना है कि “इससे लोगों को साहस मिलेगा।” यही नहीं उन्होंने आगे कहा कि “इस स्कीम के तहत धुबरी, मोरीगांव, बारपेटा, नागांव और दक्षिण सलमारा-मनकचर, रूपाही, ढिंग और जानिया जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इन इलाकों में हमारे लोग माइनॉरिटी में हैं। इन जिलों में असम के लोगों को असुरक्षा का सामना करना पड़ता है, खासकर बांग्लादेश में हाल के घटनाक्रमों से, उन पर या तो सीमा पार से या अपने ही गांवों से हमलों का खतरा है। इस दौरान उन्होंने दावा करते हुए कहा कि ऐसे क्षेत्रों में असम के लोग 1979-85 में हुए असम आंदोलन के बाद से सुरक्षा के लिए लाइसेंस वाले हथियार की मांग कर रहे हैं।” बंगाली-मुस्लिम मूल के संदिग्ध अवैध विदेशियों के असम में अतिक्रमण की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि “पिछली सरकारों ने यदि उन्हें हथियारों के लाइसेंस दिए होते, तो कई लोगों को अपनी जमीनें बेचकर जगह नहीं छोड़नी पड़ती। हम बहुत सारी जमीनों पर कब्जा होने से बचा सकते थे।” सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग लंबे समय से हथियार की मांग कर (Assam arms policy) रहे हैं मांग- हिमंत बिस्वा सरमा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि “इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग लंबे समय से हथियार की मांग कर (Assam arms policy) रहे हैं, उनकी इस मांग को रिव्यू करने के बाद राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया है।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “यह योजना पूरे राज्य में लागू होगी। इसलिए, अगर लोग इसके लिए आवेदन करते हैं तो हम गुवाहाटी शहर के हतीगांव इलाके में रहने वाले अपने लोगों को हथियार देने पर विचार कर सकते हैं।” सीएम सरमा ने स्पष्ट करते हुए कहा कि “बांग्लादेश में हालिया घटनाक्रम और संदिग्ध विदेशियों के खिलाफ राज्य सरकार के हालिया अभियान के चलते, ऐसे क्षेत्रों में स्वदेशी लोगों को लगता है कि उन पर या तो सीमा पार से या अपने ही गांवों से हमला हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि “सरकार इस स्कीम के लिए एलिजिबल लोगों को लाइसेंस देने में नरमी अपनाएगी। जो लोग असम के मूल निवासी हैं और राज्य के कमजोर और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले स्वदेशी समुदाय हैं, उन्हें इस स्कीम से साहस मिलेगा।”  इसे भी पढ़ें:- राहुल गांधी ने क्यों ट्वीट किया ‘Not Found Suitable’ और BJP पर क्या लगाया आरोप?  भारतीय आर्म्स एक्ट हथियार (Assam arms policy) को दो प्रकारों में बांटता है खैर, बात करें 1959 के भारतीय आर्म्स एक्ट की तो आर्म्स एक्ट हथियार (Assam arms policy) को दो प्रकारों में बांटता है। निषिद्ध बोर (प्रोहिबिटेड बोर) और गैर-निषिद्ध बोर (नॉन-प्रोहिबिटेड बोर ) पीबी हथियारों को आमतौर पर सेना, राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों जैसी सरकारी एजेंसियां इस्तेमाल करती हैं। एनपीबी व्यक्ति के लिए होता है। नॉन-प्रोहिबिटेड बोर उन लोगों को दिया जाता जिन्हें अपनी जानमाल का खतरा होता है। प्रोहिबिटेड बोर आर्म्स के लिए लाइसेंस गृह मंत्रालय जारी करता है तो वहीं नॉन-प्रोहिबिटेड बोर आर्म्स के लिए लाइसेंस डीएम और राज्य सरकार जारी करती हैं। यही नहीं, इन हथियारों को रखने के लिए कुछ शर्तें भी हैं। शर्त यह कि इसके लिए व्यक्ति की उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए। हिंसा से जुड़े किसी भी अपराध का दोषी न ठहराया गया हो। इसके अलावा शांति बनाए रखने हेतु बॉन्ड भरने का आदेश न दिया गया हो और शारीरिक और मानसिक रूप से फिट हो। इन बेसिक शर्तों के आधार पर ही लइसेंस आवंटित किया जाता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news #AssamArmsPolicy #AssamNews #SelfDefenseIndia #WeaponsLicense #HimantaBiswaSarma #IndiaNews #CitizensWithGuns #ArmsPolicyChange

आगे और पढ़ें
Translate »