Solar Eclipse 2025: नवरात्रि से एक दिन पहले लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण
साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) 29 मार्च को लगने जा रहा है। यह सूर्य ग्रहण नवरात्रि से ठीक एक दिन पहले पड़ रहा है, जिसके कारण इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व और भी बढ़ गया है। सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोकता है। यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका, मैक्सिको, कनाडा और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, लेकिन इसका सूतक काल मान्य होगा। सूर्य ग्रहण का समय और सूतक काल साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) 29 मार्च को लगेगा। यह ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 2 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 14 मिनट पर समाप्त होगा। इस ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 53 मिनट रहेगी। यह चैत्र अमावस्या को लगने वाला खंडग्रास सूर्य ग्रहण होगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल केवल उन्हीं क्षेत्रों में मान्य होगा जहां ग्रहण दिखाई देगा। हालांकि, भारत में ग्रहण का धार्मिक प्रभाव अवश्य पड़ेगा। सूर्य ग्रहण का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) का विशेष महत्व है। सूर्य ग्रहण को अशुभ माना जाता है, और इस दौरान कई तरह के नियमों का पालन किया जाता है। ग्रहण के समय सूतक काल लग जाता है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, और लोग घर में ही रहकर भगवान का नाम जपते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके दान-पुण्य किया जाता है। सूर्य ग्रहण का सूतक काल साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण चैत्र अमावस्या को लगेगा, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। इस कारण इस ग्रहण का सूतक काल (Sutak Period) मान्य नहीं होगा। धर्म ग्रंथों के अनुसार, सूतक काल (Sutak Period) को अशुभ माना जाता है, और इस दौरान किसी भी शुभ कार्य को करने की मनाही होती है। सूर्य ग्रहण का सूतक काल आमतौर पर 12 घंटे पहले शुरू होता है, जबकि चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू होता है। हालांकि, चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। ऐसे में ग्रहण से जुड़े धार्मिक नियमों का पालन करना अनिवार्य नहीं होगा, और लोग अपनी दैनिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रख सकेंगे। पहला सूर्य ग्रहण कहाँ दिखाई देगा? 29 मार्च को लगने वाला सूर्य ग्रहण दक्षिण अमेरिका, आंशिक उत्तरी अमेरिका, उत्तरी एशिया, उत्तर-पश्चिम अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी ध्रुव, आर्कटिक महासागर और अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा। इसे भी पढ़ें:- कब और कहां लेंगे भगवान विष्णु कल्कि का अवतार? सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें? सूर्य ग्रहण के दौरान क्या न करें? सूर्य ग्रहण का वैज्ञानिक महत्व सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) एक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। इस दौरान चंद्रमा सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोकता है, जिसके कारण सूर्य ग्रहण लगता है। सूर्य ग्रहण को वैज्ञानिक दृष्टि से अध्ययन करने के लिए खगोलविद विशेष उपकरणों का उपयोग करते हैं। सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य के वातावरण और उसकी गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Solar Eclipse Sutak Period #SolarEclipse2025 #SuryaGrahana2025 #EclipseNearNavratri #FirstEclipse2025 #AstronomyEvent #SolarPhenomenon #NavratriEclipse #EclipseTiming #CelestialEvent #SunEclipsE

