Lord Rama

राम की अंतिम लीला: क्यों लिया भगवान श्रीराम ने सरयू में जल समाधि?

भगवान श्रीराम (Lord Rama) का जीवन भारतीय संस्कृति और धर्मग्रंथों में आदर्श पुरुष के रूप में वर्णित है। रामायण की गाथा केवल उनके जीवन के वीरता और धर्मपालन के किस्सों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन के अंतिम चरणों में जल समाधि लेने की घटना भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस पौराणिक कथा के पीछे गहरे धार्मिक और आध्यात्मिक रहस्य छिपे हैं। आइए जानते हैं भगवान राम द्वारा जल समाधि लेने के पीछे की कथा और उसका महत्व। भगवान राम (Lord Rama) का राजतिलक और कालदूत का संदेश लंका विजय और अयोध्या वापसी के बाद भगवान राम का राजतिलक हुआ और अयोध्या में ‘रामराज्य’ की स्थापना हुई। यह कालखंड धर्म, न्याय और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लेकिन समय का चक्र निरंतर चलता रहता है। जब भगवान राम का धरती पर मानव रूप में कार्यकाल पूरा होने का समय आया, तो स्वयं ब्रह्मा के आदेश पर कालदूत उनके पास आया। कालदूत ने भगवान राम को सूचित किया कि अब उनका पृथ्वी पर कार्य समाप्त हो गया है और उन्हें अपने वास्तविक स्वरूप – विष्णु लोक में लौटना होगा। राम ने काल से एकांत में मिलने की बात कही थी। लेकिन उसी समय उनका प्रिय भाई लक्ष्मण कुछ विशेष परिस्थिति में उस गोपनीय सभा में प्रवेश कर गया। भगवान राम ने पहले ही शपथ ली थी कि यदि कोई इस वार्ता के दौरान आएगा, तो उसे त्यागना पड़ेगा। शपथ के पालन हेतु भगवान राम को अत्यंत दुख के साथ लक्ष्मण का त्याग करना पड़ा। लक्ष्मण का त्याग और भगवान राम का निर्णय एक विशेष घटना के दौरान लक्ष्मण जी (Lord Rama) उस कक्ष में प्रवेश कर गए जहाँ भगवान राम और कालदेव (यमराज) के बीच गुप्त वार्ता चल रही थी। इस अनजाने में हुए व्यवधान से उनकी बातचीत में विघ्न उत्पन्न हो गया। भगवान राम ने पहले ही प्रतिज्ञा की थी कि वार्ता में किसी के हस्तक्षेप पर उसे त्यागना होगा। अपनी इसी प्रतिज्ञा का पालन करते हुए, भगवान राम ने भारी हृदय से लक्ष्मण का त्याग कर दिया।लक्ष्मण जी (Laxman Ji) ने अपने बड़े भाई की मर्यादा, प्रतिज्ञा और अयोध्या की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए इस निर्णय को सहर्ष स्वीकार किया। इसके बाद उन्होंने भगवान राम से विदा ली और सरयू नदी के तट पर जाकर जल समाधि लेकर अपने सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया। इसे भी पढ़ें:-  शिवधाम की ओर आध्यात्मिक सफर फिर से शुरू, जानिए तारीखें और पंजीकरण प्रक्रिया भगवान राम ने भी ली जल समाधि लक्ष्मण जी (Laxman Ji) के जल समाधि लेने के बाद भगवान राम गहरे शोक में डूब गए। साथ ही उन्हें यह भी भली-भांति ज्ञात हो गया था कि पृथ्वी पर उनके अवतार का उद्देश्य अब पूर्ण हो चुका है। इस बीच ब्रह्मा जी और अन्य देवताओं ने भी उन्हें अपने दिव्य धाम, बैकुंठ, लौटने का आग्रह किया।अंततः भगवान राम (Lord Rama) ने सरयू नदी के तट पर पहुंचकर उसमें प्रवेश किया और जल समाधि के माध्यम से अपनी पृथ्वी पर लीला का समापन किया। इस प्रकार वे अपने मूल धाम, बैकुंठ, में लौट गए। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Lord Rama #LordRam #JalSamadhi #Ramayana #Ayodhya #HinduMythology #RamFinalLeela #ShriRam #SaryuRiver #RamSamadhi #RamStory

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