Election Commission

बिहार में वोटर लिस्ट से कट सकते हैं 35 लाख से ज्यादा नाम,  वेरिफिकेशन प्रक्रिया में अब तक 88% मतदाताओं ने भरा गणना पत्र

बिहार में चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा कराया जा रहा मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण और सत्यापन कार्य (SIR) अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। आयोग की यह महत्त्वाकांक्षी पहल 24 जून 2025 को राज्यभर में गणना फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो 25 जुलाई तक चलेगा। मतलब अब इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मात्र 10 दिन और रह गए हैं। एसआईआर (SIR) के तहत अब तक 7 करोड़ 90 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाताओं में से 6 करोड़ 60 लाख 67 हजार 208 लोगों ने अपने गणना फॉर्म सफलतापूर्वक भरकर जमा करा दिए हैं। यह आंकड़ा कुल मतदाताओं का लगभग 88 फीसदी है, जो आयोग के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है। हालांकि, इस प्रक्रिया में जो सबसे चौकाने वाली सामने आई है, वह यह है कि अब तक के सर्वेक्षण और फॉर्म सत्यापन के आधार पर करीब 35 लाख 69 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट (Voter List) से हटाए जा सकते हैं। यह आंकड़ा उन मतदाताओं का है, जो सत्यापन के दौरान या तो मृत पाए गए या एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत मिले या फिर स्थायी रूप से किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो गए। मतदाता सूची से हट सकता है बिहार के 4.52% लोगों का नाम चुनाव आयोग (Election Commission) की वेबसाइट पर अब तक कुल 5 करोड़ 74 लाख से अधिक प्रपत्र अपलोड किए जा चुके हैं। दस्तावेजों के आधार पर बताया गया है कि सत्यापन के दौरान 1.59% मतदाता मृत पाए गए और 2.2% ने स्थायी रूप से अपने निवास स्थान बदल चुक हैं। इसके अलावा 0.73% मतदाता ऐसे भी मिले हैं जो एक से ज्यादा स्थानों पर पंजीकृत पाए गए। कुल मिलाकर आयोग को इन तीनों श्रेणियों में 4.52% मतदाता ऐसे मिले हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।   वहीं, अब भी करीब 11.82% मतदाता ऐसे हैं जिन्होंने अपने फॉर्म आयोग के पास जमा नहीं किए हैं। आयोग इन बचे हुए मतदाताओं तक पहुंचने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। तीसरे दौर में राज्यभर में एक लाख बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को फिर से मैदान में उतारा गया है ताकि घर-घर जाकर बचे हुए मतदाताओं से फॉर्म भरवाया जा सके। इस कार्य में चुनाव आयोग को विभन्न राजनीतिक दलों द्वारा तैनात 1.5 लाख बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) का भी सहयोग मिल रहा है।  मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण और सत्यापन कार्य (SIR) के लिए बिहार के सभी 261 विधानसभा क्षेत्र के 5,683 वार्डों में विशेष शिविर लगाया गया है। इन शिविरों का उद्देश्य सभी विधानसभा में  मतदाता फॉर्म का सत्यापन करना है। साथ ही जो मतदाता अस्थायी रूप से राज्य से बाहर गए हैं, उनके लिए भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि वे भी ऑनलाइन या अन्य माध्यमों से समय रहते अपना फॉर्म जमा कर सकें। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? आयोग 1 अगस्त को जारी करेगा ड्राफ्ट वोटर लिस्ट चुनाव आयोग (Election Commission) के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के बाद 1 अगस्त 2025 को मतदाता सूची का ड्राफ्ट संस्करण प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद मतदाताओं को आपत्ति और सुधार के लिए कुछ दिन के लिए समय दिया जाएगा, ताकि अंतिम सूची में किसी भी प्रकार की त्रुटि न रह जाए। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद फाइनल मतदाता सूची जारी कर विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी जाएगी।   बिहार में चल रही इस मतदाता सत्यापन प्रक्रिया को भाजपा समेत एनडीए गठबंधन के दल जहां लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसका विरोध कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान वैध मतदाताओं का नाम भी सूची से हटाया जा रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news  #ElectionCommission #Biharelection2025 #Voterlist #SIR #Biharassemblyelection

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Chirag Paswan's Bold Move in Bihar 2025 Polls

Chirag Paswan: राजनीतिक विरासत के युवा चेहरे की मजबूत दस्तक, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में LJP की भूमिका

जनता के बीच चिराग पासवान (Chirag Paswan) का नाम हमेशा से ही युवा ऊर्जा और राजनीतिक बदलाव का पर्याय रहा है। राम विलास पासवान के बेटे और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री, चिराग ने अपनी अगुआई में लोक जनशक्ति पार्टी (Lok Janshakti Party) को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों में उनकी सक्रियता और रणनीति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। युवा चेहरे की मजबूती चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि वह बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट (Bihar First and Bihari First) सोच को 2025 विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) में अगली पंक्ति की लड़ाई में बदलना चाहते हैं । उन्होंने आरा में नव संकल्प महासभा (Nav Sankalp Mahasabha) आयोजन किया, जिसमें उन्होंने घोषणा की कि वे खुद चुनाव लड़ेंगे, हालांकि अभी यह तय नहीं कि वे किस सीट से मैदान में उतरेंगे। उन्होंने यह भी कहा, “मैं बिहार से चुनाव नहीं लड़ूंगा, बल्कि बिहार के लिए लड़ूंगा।”   243 सीटों की चुनौती छपरा में आयोजित विशाल रैली में चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी सभी 243 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है। उनका मानना है कि इस कदम से एनडीए गठबंधन (NDA alliance) को मजबूती मिलेगी, लेकिन इससे बीजेपी–जेडीयू गठबंधन (BJP-JDU Alliance) को सीट शेयरिंग में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है  LJP(RV) की रणनीति और गठबंधन समन्वय चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने खुद को नए बिहार के एजेंट के रूप में प्रस्तुत करते हुए, दलित–पिछड़ा वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने की योजना बनाई है। उन्होंने नालंदा में बहुजन भीम संकल्प समागम (Bahujan Bhim Sankalp Samagam) की शुरुआत की जिसका मकसद जनता के बीच मजबूत पैठ बनाना है। BJP उन्हेंNDA में सीटों के लिए दबाव बनाते हुए देख रही है – 30 से 40 सीटों की उनकी मांग चर्चा में है। जेडीयू भी सतर्क है और गठबंधन पर फिर से बातचीत की संभावना संकेत दे रहा है। नीतीश–चिराग का गठबंधन राजनीतिक समीकरण के मुताबिक, चिराग ने संकेत दिए हैं कि यदि NDA सहयोगी बने रहें, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ही मुख्यमंत्री का चेहरे होंगे।  हालांकि उनका इरादा सिर्फ मुख्यमंत्री बनने का नहीं है बल्कि दलित, युवा और पिछड़े वर्गों की आवाज़ बनकर उनकी परेशानियों को दूर करना है। युवा और दलित वोट बैंक आकर्षित चिराग पासवान (Chirag Paswan) की अपील में यह स्पष्ट झलकता है कि वे युवा और दलित मतदाताओं को सबसे पहले प्राथमिकता देंगे। बिहार में दलित लगभग 19% आबादी बनाते हैं, और इस समूह पर उनकी पकड़ मजबूत होती दिख रही है । दलित वर्ग को जोड़ने के लिए उनके बहुजन–भीम समूह अभियान पीछे नहीं रहे। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ  नई रणनीतिक योजना उनकी रणनीति में शामिल हैं: चिराग पासवान बिहार की राजनीति में अब तक केंद्र में रहे युवा नेता के रूप में सामने आए हैं – उन्होंने दिल्ली वाली राजनीति से ध्यान हटाकर बिहार की जमीन पर आकर मजबूत स्वरुप अपनाया है। उनका बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट (Bihar First and Bihari First) विजन बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। 2025 के विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) तक चिराग का राजनीतिक जोर बढ़ा हुआ दिखता है। अगर वे गठबंधन और सीट वितरण की कवायद में संतुलन बनाए रखते हुए, अपनी रणनीति को धरातल पर ला पाए, तो बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में उनका हस्ताक्षर आनेवाला है। चिराग पासवान (Chirag Paswan) केवल चुनाव लड़ने की तैयारी नहीं कर रहे, वे बिहार में राजनीतिक नवप्रवर्तन लाना चाहते हैं। उनका युवा नेतृत्व, ‘दलित–युवा’ आधारित नीतियां और गठबंधन की चालबाजी 2025 के चुनावी समीकरण को नए स्वरूप देने वाली है। Latest News in Hindi Today Hindi news Chirag Paswan #ChiragPaswan #BiharElection2025 #LJP #YouthLeader #BiharPolitic

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AAP to Contest Bihar Election 2025 Alone

Bihar Assembly Election 2025: आम आदमी पार्टी अकेले लड़ेगी चुनाव, अरविंद केजरीवाल ने किया बड़ा ऐलान

बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) होने वाला है। और चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज़ हो चुकी हैं। सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां बना चुकी हैं और चुनाव में विजय होने के लिए अपनी-अपनी स्ट्रेटजी पर काम भी कर रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने साफ ऐलान किया कि उनकी पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Election 2025) में सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी यानी किसी भी दूसरी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा। AAP लड़ेगी बिना किसी गठबंधन के चुनाव अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि आम आदमी पार्टी (AAP) अब किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा है कि INDIA गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनाव तक सीमित था। बिहार विधानसभा चुनाव अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) में हम किसी दल से गठबंधन नहीं करेंगे और अपने दम पर मैदान में उतरेंगे। अब इससे ये साफ हो गया है कि आम आदमी पार्टी बिहार की राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की तैयारी में है। दिल्ली और पंजाब में सत्ता में रह चुकी AAP अब दूसरे राज्यों में भी अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही है। भाजपा नेता अजय आलोक ने कसा तंज AAP के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। BJP नेता अजय आलोक (Ajay Alok) ने अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर तंज कस्ते हुए कहा है कि कपटीवाल जी बिहार में 243 सीटों पर लड़ने की बात कर रहे हैं, जबकि दिल्ली में ही जनता ने उन्हें नकार दिया। दिल्ली और पंजाब की जनता केजरीवाल की सच्चाई जान चुकी है। अब बिहार में भी उन्हें अपनी औकात का अंदाजा हो जाएगा। अजय आलोक ने AAP की पंजाब सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि तीन साल में पंजाब पर डेढ़ लाख करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका है और केजरीवाल सरकार वहां की संपत्ति को ATM की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि आइए बिहार में चुनाव (Bihar Election) लड़िए, आपको आपकी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा खुद ही हो जाएगा। बिहार चुनाव: सियासी जमीन तैयार बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) को लेकर राज्य की राजनीति बेहद गर्म है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जनता दल (JDU), भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) के साथ-साथ अब आम आदमी पार्टी और जन सुराज जैसे नए दल भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। चुनाव आयोग ने हाल ही में जन सुराज पार्टी को स्कूल बैग (School Bag) चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। यह प्रतीक शिक्षा और प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है, जो पार्टी की विचारधारा के अनुरूप है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor), जिन्हें देश के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में गिना जाता है, अब स्वयं सक्रिय राजनीति में उतर चुके हैं और बिहार की सियासत में नई ऊर्जा लाने का दावा कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें:- कांवड़ यात्रा में दुकानों के लाइसेंस मुद्दे पर बोले ओवैसी, कहा- “क्‍या पैंट उतरवा देंगे” आम आदमी पार्टी (AAP) की चुनौती और रणनीति दिल्ली और पंजाब में अपने प्रदर्शन के दम पर AAP अब बिहार में भी बदलाव की राजनीति का संदेश देना चाहती है। पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी नीति को बिहार में भी दोहराने की तैयारी में है। हालांकि राज्य की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां दिल्ली या पंजाब से अलग हैं, जहां जातीय समीकरण और क्षेत्रीय मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। AAP के लिए सबसे बड़ी चुनौती जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा करना और विश्वसनीय स्थानीय नेतृत्व तैयार करना होगी। फिलहाल बिहार में AAP की कोई मजबूत उपस्थिति नहीं रही है, लेकिन पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि दिल्ली मॉडल और केजरीवाल की लोकप्रियता के दम पर वो जनता को आकर्षित कर सकते हैं। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) का बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में अकेले उतरने का फैसला राज्य की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है। जहां एक ओर यह फैसला विपक्षी एकता को झटका दे सकता है, वहीं दूसरी ओर AAP के लिए यह एक बड़ा जोखिम भी है। पार्टी को बिहार जैसे राज्य में अपना आधार बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, क्योंकि यहां की राजनीति पुराने और गहरे जमीनी समीकरणों पर आधारित है। आने वाले महीनों में AAP की रणनीति, उम्मीदवार चयन और प्रचार अभियान यह तय करेंगे कि क्या पार्टी बिहार की राजनीति में कोई निर्णायक भूमिका निभा सकती है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि केजरीवाल के इस ऐलान ने बिहार चुनाव (Bihar Election) की बहस को और गर्म कर दिया है। Latest News in Hindi Today Hindi news AAP #biharelection2025 #aap #arvindkejriwal #biharpolitics #aapbihar

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chunaav

4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025: बिहार चुनाव में इन 4.96 करोड़ वोटरों को नहीं देना होगा कोई भी दस्तावेज

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने वोटर सूची की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने हेतु एक नया कदम उठाया है। इस कदम के तहत आयोग ने स्पष्ट किया है कि “2003 की मतदाता सूची में जिन लोगों के नाम हैं। उन्हें अपनी जन्मतिथि या जन्मस्थान प्रमाणित करने के लिए किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगी। बता दें कि इस सूची में राज्य के कुल लगभग 60% यानी 4.96 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल हैं। इस पूरे मामले पर चुनाव आयोग ने कहा कि बिहार की 2003 की वोटर लिस्ट दोबारा अपलोड होगी। इसमें जिनके नाम हैं, उन्हें जन्म प्रमाण नहीं देना होगा। बाकी 3 करोड़ को दस्तावेज देने होंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। बता दें कि अक्टूबर-नवंबर 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटों पर 7.89 करोड़ से अधिक मतदाता हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देशों के मुताबिक, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि पुनरीक्षण के दौरान सभी पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल हों और कोई अपात्र व्यक्ति न रहे।  3 करोड़ मतदाताओं को 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक दस्तावेज के साथ जन्म तिथि या स्थान प्रमाणित करना (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगा चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, बिहार में 2003 की मतदाता सूची में शामिल 4.96 करोड़ मतदाताओं को जन्म तिथि या स्थान साबित करने के लिए दस्तावेज देने की जरूरत नहीं। लेकिन शर्त यह है कि वे पुनरीक्षण के बाद की मतदाता सूची का हिस्सा संलग्न करें। बाकी बचे 3 करोड़ मतदाताओं को 11 सूचीबद्ध दस्तावेजों में से एक दस्तावेज के साथ जन्म तिथि या स्थान प्रमाणित करना (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) होगा। ऐसे में जिनके माता-पिता 2003 की सूची में हैं, उन्हें केवल अपनी जन्म तिथि/स्थान का दस्तावेज देना होगा, माता-पिता का नहीं। बाकी मतदाताओं की पहचान सत्यापित होने के बाद ही उनके नाम सूची में शामिल होंगे। चुनाव आयोग के मुताबिक, यह दस्तावेज़ी प्रक्रिया राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में लागू होगी। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए और दस्तावेजों के बिना किसी को भी सूची में शामिल न किया जाए। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक मतदाता की पात्रता सत्यापित की जाएगी। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न हो और कोई अयोग्य नाम सूची में न (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) रहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि “इसका मकसद सभी पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और अपात्र लोगों को हटाना है।” मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि “यह निर्णय विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत लिया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न हो और कोई अयोग्य नाम सूची में न (4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025) रहे। आयोग ने 2003 की मतदाता सूची को पुनः वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पुराने रिकॉर्ड का उपयोग किया जा सके।” जानकारी के लिए बता दें कि चुनाव आयोग जल्द ही 2003 की बिहार मतदाता सूची को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करेगा। जिससे 4.96 करोड़ मतदाता अपने नाम की पुष्टि कर सकें। इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने पुनरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे मतदाताओं को हटाने की साजिश करार दे दिया। विपक्षी दलों के आरोपों का जवाब देते हुए आयोग ने कहा कि “यह अनुच्छेद 326 का पालन करता है, जो पात्र नागरिकों को वोटिंग का अधिकार देता है। आयोग ने राजनीतिक दलों से बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त करने को कहा, ताकि मतदाता सूची में खामियां न रहें। अब तक 1,54,977 बीएलए नियुक्त हो चुके हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news 4.96 Cr Bihar Voters Can Vote Without Any Document in 2025 #BiharElection2025 #VotersWithoutID #ElectionCommission #BiharNews #VotingRights

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Nitish Kumar vs Tejashwi Yadav

Bihar Assembly Election 2025: बदलते समीकरणों में 2025 के चुनाव में बिहार की जनता किसका देगी साथ?

बिहार, ऐतिहासिक दृष्टि से भारत की राजनीति का अहम केंद्र रहा है। यहां की राजनीति में जातीय समीकरण, सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय अस्मिता और विकास के मुद्दे हमेशा प्रभावी भूमिका निभाते रहे हैं। जैसे-जैसे 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) नज़दीक आ रहे हैं, बिहार की राजनीति में हलचल तेज़ हो गई है। सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी रणनीतियों से चुनाव जीतने का मौका तलाश रहें हैं। राजनीतिक परिदृश्य मौजूदा समय में बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सत्ता में है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) प्रमुख हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) एक बार फिर से NDA का चेहरा हैं, जो अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, विपक्ष में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व में एकजुटता लाने की कोशिश हो रही है, जिसमें कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल भी शामिल हो सकते हैं। 2025 बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के प्रमुख मुद्दे 2025 के विधानसभा चुनाव में कई मुद्दे चर्चा में रहेंगे: विकास और बेरोजगारी- बिहार में शिक्षा और युवाओं की बेरोजगारी (Unemployment) लंबे समय से बड़ी चुनौती रही है। RJD जहां सरकार की बेरोजगारी नीति पर सवाल उठा रही है, वहीं सरकार यह दावा कर रही है कि नए उद्योगों और योजनाओं के ज़रिए अवसर पैदा किए जा रहे हैं। जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय- जातीय जनगणना (Caste Census) एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसे RJD और अन्य विपक्षी दल जोरशोर से उठा रहे हैं। यह सवाल न केवल वोट बैंक की राजनीति से जुड़ा है, बल्कि इससे सरकारी योजनाओं के पुनर्गठन की मांग भी जुड़ी हुई है। कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा- हाल के वर्षों में बढ़ते अपराध और महिला उत्पीड़न के मामले भी चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनने वाले हैं। माई समीकरण और नया जनाधार- RJD अपने पारंपरिक M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण को मजबूत करने में जुटी है, वहीं BJP ने महिला वोटर्स, अति पिछड़े वर्गों और दलितों पर ज़ोर देना शुरू कर दिया है। नए गठजोड़ और समीकरण- राजनीति में कोई स्थायी मित्र या दुश्मन नहीं होता। इसी सिद्धांत पर बिहार की राजनीति (Bihar Politics) आगे बढ़ती रही है। जहां एक ओर JDU और BJP के बीच मतभेद की खबरें आती रही हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी देखा गया है कि RJD और कांग्रेस के बीच तालमेल में कई बार दरार आती है। बिहार विधानसभा 2025 के चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) में यह देखना रोचक होगा कि क्या तेजस्वी यादव के नेतृत्व में RJD एक प्रभावशाली विपक्ष खड़ा कर पाएगी या फिर नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) अपने शासन के अनुभव और विकास योजनाओं के दम पर एक बार फिर सरकार बनाने में सफल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका बिहार में NDA की चुनावी रणनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की लोकप्रियता एक बड़ा फैक्टर रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव (Loksabha Election 2025) में भी भाजपा ने बिहार में अच्छा प्रदर्शन किया था, जिसे वह विधानसभा में दोहराना चाहेगी। पीएम मोदी (PM Modi) द्वारा बिहार को दी जा रही विकास परियोजनाएं, जैसे कि रेलवे, सड़कों और प्रधानमंत्री आवास योजना, लोगों के बीच में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इसे भी पढ़ें:- विधानसभा चुनाव से पहले बिहार को पीएम मोदी ने दिया तोहफा युवा और महिला मतदाता 2025 का चुनाव युवाओं और महिलाओं के रुझान पर बहुत हद तक निर्भर करेगा। युवा मतदाता शिक्षा, रोज़गार और टेक्नोलॉजी से जुड़ी नीतियों की ओर देख रहे हैं, जबकि महिला मतदाता सुरक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं में भागीदारी के आधार पर वोट कर सकती हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Election 2025) महज सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की सामाजिक और आर्थिक दिशा तय करने का महत्वपूर्ण मौका होगा। राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि अब मतदाता केवल जाति और परंपरा के आधार पर वोट नहीं करते, बल्कि विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। आगामी चुनाव में किसके सिर जीत का सेहरा बंधेगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति (Bihar Politics) एक बार फिर देशभर के लिए चर्चा का केंद्र बनने वाली है। Latest News in Hindi Today Hindi  Chief Minister Nitish Kumar #BiharElection2025 #NitishKumar #TejashwiYadav #BiharPolitics #BJPvsRJD #BiharVoters #INDIABloc #NDABihar

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Before Bihar elections

बिहार चुनाव से पहले RJD में बड़ा बदलाव: मंगनी लाल मंडल होंगे नए प्रदेश अध्यक्ष

बिहार की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election) से पहले बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रदेश नेतृत्व में परिवर्तन की घोषणा होने जा रही है, जो पार्टी की रणनीति और सामाजिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। वरिष्ठ नेता मंगनी लाल मंडल (Mangani Lal Mandal) को RJD का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा रहा है। वे मौजूदा अध्यक्ष जगदानंद सिंह की (Jagdanand Singh) जगह लेंगे। इस बदलाव को पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) की स्वीकृति प्राप्त है। 19 जून को होगा औपचारिक ऐलान मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मंगनी लाल मंडल (Mangani Lal Mandal) ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह निर्णय 19 जून को होने वाली राज्य परिषद की बैठक में औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। उसी दिन चुनाव परिणाम आने के बाद वे आधिकारिक तौर पर नए प्रदेश अध्यक्ष बन जाएंगे। यह जानकारी पार्टी के भीतर चल रहे संगठनात्मक चुनावों के बीच सामने आई है। इस प्रक्रिया को राजद के राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. रामचंद्र पुरबे ने भी मंजूरी दे दी है। मंगनी लाल मंडल: अनुभव और सामाजिक समीकरण का संगम हालांकि बीच में वे नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की JDU में शामिल हो गए थे, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव (2024 Lok Sabha elections) में टिकट न मिलने से नाराज होकर उन्होंने JDU छोड़ दी और 6 जनवरी 2025 को RJD में दोबारा शामिल हो गए। RJD को कैसे होगा फायदा? बिहार में इस वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) होने हैं और ऐसे समय में मंगनी लाल मंडल को प्रदेश अध्यक्ष बनाना एक सोच-समझी रणनीति मानी जा रही है। सामाजिक समीकरण: मंगनी लाल मंडल (Mangani Lal Mandal) EBC समुदाय से आते हैं, जो बिहार में बड़ी संख्या में मौजूद है। RJD इस समुदाय को साधकर अपना सामाजिक आधार और मज़बूत करना चाहती है। राजनीतिक अनुभव: उनका लंबा अनुभव और प्रशासनिक पकड़, पार्टी को संगठनात्मक स्तर पर मजबूती देने में मदद करेगी। तेजस्वी यादव का समर्थन: तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) की युवा नेतृत्व क्षमता और मंडल के अनुभवी राजनीतिक कौशल का मेल पार्टी को आने वाले चुनाव में बेहतर स्थिति में ला सकता है। इसे भी पढ़ें: माई बहन मान योजना बिहार की करोड़ों महिलाओं के लिए अमृत: डॉ मनोज पांडेय जगदानंद सिंह की विदाई अब तक RJD के प्रदेश अध्यक्ष रहे जगदानंद सिंह (Jagdanand Singh) को पार्टी के वरिष्ठ और निष्ठावान नेताओं में गिना जाता है, लेकिन हाल के महीनों में पार्टी के भीतर कुछ असंतोष की खबरें सामने आई थीं। मंगनी लाल मंडल (Mangani Lal Mandal) की नियुक्ति इस असंतोष को शांत करने और नए उत्साह के साथ चुनाव में जाने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है। मंगनी लाल मंडल (Mangani Lal Mandal) को RJD की कमान सौंपना केवल एक नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि एक चुनावी रणनीति का हिस्सा है। उनका सामाजिक आधार, राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक समझ, RJD को आगामी विधानसभा चुनावों (Assembly Election) में एक मज़बूत विकल्प बना सकता है। अगर यह दांव सफल रहता है, तो RJD न सिर्फ सत्ता में वापसी का रास्ता तय कर सकती है, बल्कि बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में एक नया समीकरण भी बना सकती है। Latest News in Hindi Today Hindi #biharelection2025 #rjdnews #mangnilalmandal #biharpolitics #laluprasad #nitishkumar #biharupdate #breakingnews #politicalnews

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