AAP to Contest Bihar Election 2025 Alone

Bihar Assembly Election 2025: आम आदमी पार्टी अकेले लड़ेगी चुनाव, अरविंद केजरीवाल ने किया बड़ा ऐलान

बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) होने वाला है। और चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज़ हो चुकी हैं। सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां बना चुकी हैं और चुनाव में विजय होने के लिए अपनी-अपनी स्ट्रेटजी पर काम भी कर रही है। इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने साफ ऐलान किया कि उनकी पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Election 2025) में सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी यानी किसी भी दूसरी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा। AAP लड़ेगी बिना किसी गठबंधन के चुनाव अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि आम आदमी पार्टी (AAP) अब किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा है कि INDIA गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनाव तक सीमित था। बिहार विधानसभा चुनाव अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) में हम किसी दल से गठबंधन नहीं करेंगे और अपने दम पर मैदान में उतरेंगे। अब इससे ये साफ हो गया है कि आम आदमी पार्टी बिहार की राजनीति में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाने की तैयारी में है। दिल्ली और पंजाब में सत्ता में रह चुकी AAP अब दूसरे राज्यों में भी अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही है। भाजपा नेता अजय आलोक ने कसा तंज AAP के इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। BJP नेता अजय आलोक (Ajay Alok) ने अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर तंज कस्ते हुए कहा है कि कपटीवाल जी बिहार में 243 सीटों पर लड़ने की बात कर रहे हैं, जबकि दिल्ली में ही जनता ने उन्हें नकार दिया। दिल्ली और पंजाब की जनता केजरीवाल की सच्चाई जान चुकी है। अब बिहार में भी उन्हें अपनी औकात का अंदाजा हो जाएगा। अजय आलोक ने AAP की पंजाब सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि तीन साल में पंजाब पर डेढ़ लाख करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका है और केजरीवाल सरकार वहां की संपत्ति को ATM की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि आइए बिहार में चुनाव (Bihar Election) लड़िए, आपको आपकी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा खुद ही हो जाएगा। बिहार चुनाव: सियासी जमीन तैयार बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) को लेकर राज्य की राजनीति बेहद गर्म है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD), जनता दल (JDU), भाजपा (BJP) और कांग्रेस (Congress) के साथ-साथ अब आम आदमी पार्टी और जन सुराज जैसे नए दल भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। चुनाव आयोग ने हाल ही में जन सुराज पार्टी को स्कूल बैग (School Bag) चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। यह प्रतीक शिक्षा और प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है, जो पार्टी की विचारधारा के अनुरूप है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor), जिन्हें देश के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में गिना जाता है, अब स्वयं सक्रिय राजनीति में उतर चुके हैं और बिहार की सियासत में नई ऊर्जा लाने का दावा कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें:- कांवड़ यात्रा में दुकानों के लाइसेंस मुद्दे पर बोले ओवैसी, कहा- “क्‍या पैंट उतरवा देंगे” आम आदमी पार्टी (AAP) की चुनौती और रणनीति दिल्ली और पंजाब में अपने प्रदर्शन के दम पर AAP अब बिहार में भी बदलाव की राजनीति का संदेश देना चाहती है। पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी नीति को बिहार में भी दोहराने की तैयारी में है। हालांकि राज्य की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां दिल्ली या पंजाब से अलग हैं, जहां जातीय समीकरण और क्षेत्रीय मुद्दे निर्णायक भूमिका निभाते हैं। AAP के लिए सबसे बड़ी चुनौती जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा करना और विश्वसनीय स्थानीय नेतृत्व तैयार करना होगी। फिलहाल बिहार में AAP की कोई मजबूत उपस्थिति नहीं रही है, लेकिन पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि दिल्ली मॉडल और केजरीवाल की लोकप्रियता के दम पर वो जनता को आकर्षित कर सकते हैं। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) का बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में अकेले उतरने का फैसला राज्य की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है। जहां एक ओर यह फैसला विपक्षी एकता को झटका दे सकता है, वहीं दूसरी ओर AAP के लिए यह एक बड़ा जोखिम भी है। पार्टी को बिहार जैसे राज्य में अपना आधार बनाने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी, क्योंकि यहां की राजनीति पुराने और गहरे जमीनी समीकरणों पर आधारित है। आने वाले महीनों में AAP की रणनीति, उम्मीदवार चयन और प्रचार अभियान यह तय करेंगे कि क्या पार्टी बिहार की राजनीति में कोई निर्णायक भूमिका निभा सकती है या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि केजरीवाल के इस ऐलान ने बिहार चुनाव (Bihar Election) की बहस को और गर्म कर दिया है। Latest News in Hindi Today Hindi news AAP #biharelection2025 #aap #arvindkejriwal #biharpolitics #aapbihar

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Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark

Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark: मौलाना कहे जाने पर भड़के तेजस्वी यादव ने बीजेपी को लेकर कही यह बात 

इन दिनों वक्फ कानून को लेकर बिहार की राजनीति खासी गरमाई हुई है। जिसे लेकर नेताओं में बयानबाजी जारी है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और बीजेपी पर निशाना साधते हुए स्पष्ट कहा है कि “वे धर्म नहीं, कर्म की राजनीति में विश्वास रखते हैं। साथ ही उन्होंने बीजेपी के प्रवक्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों का भी मंच से जवाब देते हुए कहा कि “लगातार दिल्ली में बीजेपी के चिरकुट सब… संघी वाले, दो दिन से हमको गाली दे रहे (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) हैं। कभी नमाजवादी कह रहे हैं कभी ‘मौलाना’ कह रहे हैं।” दरअसल, तेजस्वी यादव मंगलवार को पटना के बापू सभागार में आयोजित अब्दुल कय्यूम अंसारी की 120वीं जयंती के मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि “हम मुद्दों की बात करते हैं, वे मुर्दों की बात करते हैं। नफरत फैलाने की कोशिश हो रही है।” हम धर्म के नाम पर नहीं, कर्म के नाम पर (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) बनाएंगे पहचान- तेजस्वी यादव  बीजेपी की आड़े हाथों लेते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि “हम धर्म के नाम पर नहीं, कर्म के नाम पर पहचान बनाएंगे। मंदिर भी सजाएंगे और मस्जिद भी, हमारा और जनता का रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं, जज्बात का (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) है। जब हमारी तकलीफ एक है तो हम अलग कैसे हो सकते हैं? अगर जनता का साथ मिला तो नागपुर से चल रही सरकार और नागपुरिया कानून को सत्ता से बेदखल करने का काम करेंगे।” जानकारी के मुताबिक इस पूरे विवाद की शुरुआत बीते रविवार को तब हुई जब तेजस्वी यादव ने पटना के गांधी मैदान में आयोजित वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ रैली को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की ओर से लागू वक्फ कानून पर तीखा बयान देते हुए कहा कि “बिहार में मौजूदा सरकार सत्ता से बाहर होने की राह पर है। अगर राज्य में विपक्षी दलों की सरकार बनती है तो वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे।”  तेजस्वी यादव इस देश को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहते (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) हैं- गौरव भाटिया (बीजेपी प्रवक्ता)  इसी बात को लेकर बीजेपी तेजस्वी यादव पर हमलावर है। तेजस्वी यादव के बयान के बाद बीजेपी के प्रवक्ता गौरव भाटिया ने बीते मंगलवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तेजस्वी यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि “तेजस्वी यादव इस देश को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहते (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) हैं। ये शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। मौलाना तेजस्वी यादव संविधान को जानते नहीं हैं। आरजेडी बिहार में अगले 50 साल सत्ता में आने वाली नहीं है। हमारे लिए अंबेडकर जी पूजनीय हैं। तेजस्वी यादव और लालू यादव सांप्रदायिक राजनीति करते हैं। हिंदू और मुस्लिम राजनीति कर रहे हैं।” इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  मुझे मौलाना बोल रहे हैं, इसका मतलब तो विद्वान होता (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) है- तेजस्वी यादव  इसके बाद पलटवार करते हुए आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि “भाजपा के लोग दो दिन से मुझे गाली दे रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए हमारे प्रवक्ता ही काफी हैं। मुझे मौलाना बोल रहे हैं, इसका मतलब तो विद्वान होता (Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark) है।” यही नहीं, जेडीयू दफ्तर में पीएम मोदी की तस्वीर लगाये जाने पर तेजस्वी ने कहा कि “जेडीयू बीजेपी का प्रकोष्ठ बन गया है। जेडीयू को बीजेपी ने हाईजैक कर लिया है। जदयू को तोड़ने की कोशिश तो शुरू से ही हो रही थी, अब यह दिखने लगा है। चाचा जब हमारे पास आए थे उसी समय बीजेपी ने जेडीयू को तोड़ना शुरू कर दिया था।  झारखंड-महाराष्ट्र में जब ऑपरेशन लोटस चल रहा था, उस समय बिहार में भी चल रहा था।” Latest News in Hindi Today Hindi news Tejashwi Yadav Slams BJP Over ‘Maulana’ Remark #TejashwiYadav #BJP #MaulanaRemark #BiharPolitics #PoliticalNews

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Lalu Yadav land

‘लालू परिवार की जमीन पर होगा सरकार का कब्जा, बनेगा भूमिहीन गरीबों का घर’, JDU नेता के बयान से सियासी हलचल तेज

बिहार में इस साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। चुनाव में उतर रही राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे को घेरने के साथ अपनी सियासी जमीन तैयार करने में जुटी है। इस बीच जदयू (JDU) ने घोषणा की है कि अगर राज्य में सरकार बनती है तो राजद (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद (Lalu Prasad) की पटना के फुलवारीशरीफ में मौजूद जमीन को जब्त किया जाएगा। इस जमीन पर सरकारी खर्च पर घर बनाए जाएंगे और वो घर राज्य के भूमिहीन गरीब लोगों को दिया जाएगा।  यह घोषणा जदयू (JDU) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने फुलवारीशरीफ में आयोजित पार्टी के एक कार्यक्रम में कही। नीरज कुमार ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि लालू परिवार जब भी सत्ता में आई, जनता को सिर्फ लूटने का कार्य किया। इस परिवार ने राज्य के गरीब लोगों को लूटकर पटना और इसके आसपास के इलाकों में करीब 40 एकड़ जमीन बनाई है। इनमें से 6 एकड़ जमीन तो सिर्फ फुलवारशरीफ में ही मौजूद है। नीरज कुमार ने कहा कि लालू प्रसाद (Lalu Prasad) और उनका परिवार जनता को लूटकर पटना का सबसे बड़े शहरी जमींदार बन चुका है। लालू परिवार ने अपने पूरे शासनकाल में भ्रष्टाचार का केवल धन का ही अर्जन किया। इनकी सरकार के एजेंडे में जन कल्याण कभी नहीं रहा। बता दें कि नीरज कुमार राज्य कैबिनेट में सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री भी रह चुके हैं। अभी वो विधान परिषद के सदस्य हैं।  कानून बनाकर ली जाएगी लालू परिवार की जमीन- नीरज  लालू प्रसाद (Lalu Prasad) की जमीन को सरकार के अधीन कर उस पर गरीबों के लिए घर बनावाने की घोषणा जदयू की तरफ से किसी नेता ने पहली बार की है। नीरज के इस घोषणा ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। नीरज ने अपनी घोषणा में यह भी कहा कि लालू की जमीन का गरीबों को देने के लिए राज्य सरकार द्वारा बकायदा कानून लाया जाएगा। राजद (RJD) ने अपने 15 साल के शासन में गरीबों को खूब लूटा है। केंद्र सरकार में मंत्री रहते भी लालू यादव ने नौकरी के बदले लोगों की जमीन हड़पी। अब समय आ गया है कि गरीब जनता को उनका हक वापस दिया जाए और यह काम हमारी सरकार करेगी।  राजद प्रवक्ता ने भी किया नीरज पर तीखा पलटवार   जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार के इस बयान पर राजद (RJD) ने तीखा पलटवार किया है। राजद के मुख्य प्रवक्ता चितरंजन गगन ने कहा कि इस साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में जीत कर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद नई सरकार बनाने जा रही है। जिसके बाद एनडीए शासनकाल के दौरान इनके सभी नेताओं का भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति की जांच होगी। जिन्होंने भी जनता और राज्य को लूटा है उन्हें माफ नहीं किया जाएगा। चितरंजन गगन ने यह भी कहा कि नीरज कुमार जागते हुए सपना देख रहे हैं कि फिर से उनकी सरकार (Bihar Assembly Elections) बनने जा रही है। लेकिन सच यह है कि बिहार की जनता ने नीतीश सरकार को इस बार जड़ से उखाड़ फेकने का मन बना लिया है। इस सरकार में भ्रष्टाचार और अपराध जिस स्तर तक पहुंचा है, वह अपने आप में एक शर्मनाक रिकॉर्ड है। यह सरकार आम जनता का शोषण कर रही है और यह हमारी जनता भी अब समझ चुकी है। इनके सपने सिर्फ सपने ही रह जाएंगे।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? वोटर लिस्ट को लेकर बिहार का सियासी घमासान तेज  चुनाव आयोग बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूचियों के विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान चला रहा है। इसको लेकर भी यहां खूब हंगामा मचा हुआ है। विपक्ष  दल इसे भाजपा का षडयंत्र बता इसके खिलाफ राजनीतिक लड़ाई के साथ कानून लड़ाई लड़ने की बात कह रही हैं। महागठबंधन में शामिल पार्टियों का कहना है कि चुनाव आयोग के इस अभियान का मकसद विपक्ष के वोट को काटना है। इसके खिलाफ जल्द ही राजनीतिक अभियान शुरू किया जाएगा।  Latest News in Hindi Today Hindi news Lalu Prasad #LaluYadav #JDULeader #BiharPolitics #LandDispute #PoorHousingScheme #LaluFamily #PoliticalControversy

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Rashtriya Janata Dal: इन 5 नेताओं ने बनाई पार्टी की पहचान

बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal {RJD}) लंबे समय से एक मजबूत और प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित है। इस पार्टी की नींव सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों और वंचित समुदायों की आवाज़ उठाने के उद्देश्य से रखी गई थी। पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Former Chief Minister Lalu Prasad Yadav)ने जिस राजनीतिक विचारधारा और रणनीति से इस दल को खड़ा किया, वह आज भी राज्य की सियासत में अहम भूमिका निभा रही है। RJD सुप्रीमों और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव  लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) का नाम बिहार की राजनीति में एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक साहसिक नेतृत्व का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने 1990 के दशक में बिहार की राजनीति को पूरी तरह बदलकर रख दिया। पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को सत्ता की मुख्यधारा में लाकर उन्होंने एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार किया। भले ही लालू प्रसाद यादव कानूनी मामलों के चलते सक्रिय राजनीति से कुछ दूर हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ और विचारधारा आज भी RJD की रीढ़ बनी हुई है। तेजस्वी यादव: युवा नेतृत्व की नई पहचान लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Former Deputy Chief Minister Tejaswi Yadav)ने अब पार्टी की कमान संभाल रखी है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election) में तेजस्वी ने आरजेडी (RJD) को सबसे बड़ी पार्टी बनाकर यह साबित कर दिया कि वे राज्य की जनता, खासकर युवाओं और वंचित वर्गों के बीच लोकप्रिय हैं। आगामी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) के लिए भी पार्टी ने तेजस्वी को अपना चेहरा घोषित कर दिया है। उनका फोकस रोजगार (Employment), शिक्षा (Education) और स्वास्थ्य (Health) जैसे मुद्दों पर है, जो युवाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। पांच प्रमुख नेता जो बना रहे हैं RJD की रणनीति मजबूत RJD की मजबूती सिर्फ लालू या तेजस्वी तक सीमित नहीं है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैं जो नीति निर्माण, संगठन संचालन और चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनमें से पांच प्रमुख नेता निम्नलिखित हैं: स्व. रघुवंश प्रसाद सिंह – भले ही वे अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी की नीतिगत संरचना में जो योगदान दिया, उसके लिए उन्होंने हमेशा याद किया जाएगा। उनके विचार आज भी पार्टी की रणनीति में झलकते हैं। अब्दुल बारी सिद्दीकी – RJD के वरिष्ठ मुस्लिम चेहरे के रूप में सिद्दीकी न केवल पार्टी के अंदरूनी निर्णयों में शामिल रहते हैं, बल्कि राज्य में मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote Bank) को भी पार्टी के पक्ष में संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिवानंद तिवारी – लंबे समय तक लालू यादव के करीबी रहे शिवानंद तिवारी ने पार्टी को वैचारिक मजबूती दी है। वे मीडिया और सार्वजनिक बहसों में पार्टी का मुखर पक्ष रखते हैं। जगदानंद सिंह – वर्तमान में RJD के प्रदेश अध्यक्ष, जगदानंद सिंह संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने का कार्य कर रहे हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव पार्टी के लिए एक बड़ी ताकत है। मनोज झा – राज्यसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में मनोज झा ने RJD की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर प्रखर और विचारशील पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी वक्तृत्व शैली और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर पकड़ उन्हें पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाती है। सामाजिक समीकरणों में RJD की पकड़ बिहार में जातीय और सामाजिक समीकरण राजनीति को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। RJD का परंपरागत समर्थन यादव, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के बीच रहा है। पार्टी ने समय के साथ महादलित और अति पिछड़ा वर्गों को भी अपने पाले में लाने की कोशिश की है। इसके अलावा महिलाओं और युवाओं को लेकर भी पार्टी नई रणनीतियाँ बना रही है, जिसमें डिजिटल माध्यम, युवाओं के लिए रोजगार योजनाएँ और शिक्षा पर ज़ोर शामिल हैं। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? 2025 विधानसभा चुनाव: तैयारी ज़ोरों पर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) को लेकर RJD ने पहले से ही अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी ने हाल ही में अपना कैंपेन सॉन्ग भी लॉन्च किया है, जिसमें तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को मुख्य चेहरा बताया गया है। यह सॉन्ग रोजगार, बदलाव और न्याय के मुद्दों को प्रमुखता देता है। पार्टी की जमीनी पकड़, मजबूत संगठन और नेतृत्व के अनुभव ने उसे एक बार फिर से सत्ता के करीब ला दिया है। गठबंधन की संभावनाओं को लेकर भी बातचीत चल रही है, जिसमें कांग्रेस और वाम दलों के साथ तालमेल की कोशिशें हो रही हैं। RJD न सिर्फ बिहार की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक और राजनीतिक चेतना को प्रभावित करने वाली विचारधारा भी है। लालू यादव से लेकर तेजस्वी यादव तक, और अब्दुल बारी सिद्दीकी से लेकर मनोज झा तक, पार्टी एक संतुलित मिश्रण है अनुभव और युवा ऊर्जा का। 2025 के चुनाव में RJD का प्रदर्शन यह तय करेगा कि बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की यह धारा कितनी प्रभावी बनी रहती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Tejaswi Yadav #RJD #RashtriyaJanataDal #BiharPolitics #IndianPolitics #RJDLoyalists

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Kanhaiya Kumar Reveals CM Face

Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar: कन्हैया कुमार ने बता दिया कौन होगा महागठबंधन से बिहार का मुख्यमंत्री?

इस साल अक्टूबर-नवंबर में बिहार में विधानसभा के चुनाव होने की संभावना है। हालांकि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा, इसको लेकर कांग्रेस ने तस्वीर पूरी तरह साफ कर दी है। दरअसल, 27 जून को न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि “महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के लिए तेजस्वी यादव के प्रमुख चेहरा होने को लेकर कोई असमंजस और विवाद (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) नहीं है।” उन्होंने कहा कि “विधानसभा चुनाव में विपक्षी गठबंधन के जीतने पर सबसे बड़े घटक दल के रूप में राष्ट्रीय जनता दल का नेता ही स्वाभाविक रूप से मुख्यमंत्री होगा। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव में मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन एक साजिश के तहत इनसे ध्यान भटकाने के लिए बार-बार चेहरे की बात की जा रही है।  बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाकर, इस पद पर अपना चेहरा लाने की कोशिश (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) में है कन्हैया कुमार ने कहा कि “मेरे खयाल से पिछली बार भी बदलाव का माहौल था। थोड़े अंतर से महागठबंधन की सरकार नहीं बन पाई। पिछले पांच वर्षों से बिहार की जो स्थिति है, उससे लगता है कि इस बार बदलाव की हवा पहले से कहीं  ज्यादा मजबूत है।” इस दौरान कन्हैया कुमार ने दावा किया (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) कि “बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाकर, इस पद पर अपना चेहरा लाने की कोशिश में है।” उन्होंने कहा कि “ऐसा नहीं है कि वे नीतीश जी के अस्वस्थ होने पर यह कोशिश कर रहे हैं। वह पहले भी प्रयास कर चुके हैं। भाजपा पिछले कई दशकों से बिहार में वही करना चाहती है जो दूसरी जगह करने में सफल रही है। मतलब पहले क्षेत्रीय दल का साथ पकड़ो और फिर धीरे-धीरे उसे निगल जाओ। बिहार में ऐसा न कर पाने की वजह से बीजेपी नीतीश का साथ लेने को मजबूर हुई।” सीएम कौन होगा इस पर हमारे यहां कोई कोई संकट या संदेह नहीं (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) है  सीएम के सवाल पर कन्हैया ने कहा कि “सीएम कौन बनेगा, इस जनता तय करती है, जिनके पास संख्या बल होगा, वह सीएम बनेगा। आरजेडी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो जाहिर है कि वह ज्यादा सीटें जीतेगी। संख्या बल उसके पास होगा। सीएम कौन होगा इस पर हमारे यहां कोई कोई संकट या संदेह नहीं है। इसे लेकर एनडीए में (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) है। वे तय नहीं कर पा रहे हैं कि कौन कितने सीटों पर चुनाव लड़ेगा। इस चुनाव में नीतीश चेहरा होंगे या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है। लेकिन लोकतंत्र में चेहरा महत्वपूर्ण नहीं होता, मुद्दे महत्वपूर्ण होते हैं।” बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए कन्हैया कुमार ने कहा कि “सत्ता पक्ष के लोग जानबूझकर सीएम फेस के नाम पर जनता का ध्यान भटकाना चाहते हैं। इसलिए महत्वपूर्ण मुद्दों को छोड़कर इंडिया गठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे के मामले को उठाकर ध्यान भटकाने की साजिश रच रहे हैं। जैसे ही भाजपा को मौका मिलेगा, वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाकर अपने नेता को बिहार में स्थापित करेगी। बिहार की जनता इस बार बदलाव चाहती है। वह एनडीए सरकार के छल को समझ चुकी है। संविधान विरोधी लोगों को जनता पसंद नहीं करती है।” इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? बिहार में इंडिया गठबंधन के घटक दलों के गठजोड़ को महागठबंधन के नाम से जाना (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) जाता है बता दें कि बिहार में इंडिया (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस) गठबंधन के घटक दलों के गठजोड़ को महागठबंधन के नाम से जाना (Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar) जाता है। इस गठबंधन में वाम दलों के साथ ही राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हैं। उसका मुकाबला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से है। एनडीए में बीजेपी, नीतीश कुमार की जेडीयू, चिराग पासवान की एलजेपी (आर), जीतन राम मांझी की हम, और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम शामिल है। गौरतलब हो कि पिछले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन के सबसे बड़े घटक राजद ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 52 प्रतिशत की सफलता दर से 75 सीटें हासिल की थी तो वहीं कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और उसमे से सिर्फ 19 सीटें जीती थीं। इसके आलावा भाकपा (माले) लिबरेशन ने 19 सीट पर चुनाव लड़ा और 12 पर जीत हासिल की थी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक कांग्रेस इस बार भी पिछली बार इतनी सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन राजद इस बार उसे उतनी सीटें देने के लिए तैयार नहीं है। फिर भी कांग्रेस इस बार ज्यादा मजबूती से चुनाव लड़ने की तैयारी में है। Latest News in Hindi Today Hindi news Kanhaiya Kumar Reveals Mahagathbandhan’s CM Face in Bihar #kanhaiyakumar #biharpolitics #mahagathbandhan #biharcmface #2025elections #cmcandidate

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Tej Pratap Yadav Claims Life Threat

Tej Pratap Claims Threat to Life, Seeks Nitish Govt Help: लालू के लाल के नए बोल, बताया खुद की जान को खतरा, तेज प्रताप यादव ने नीतीश सरकार से लगाई गुहार

लालू प्रसाद यादव ने आज राष्ट्रिय जनता दल (आरजेडी) राष्ट्रीय अध्यक्ष का नॉमिनेशन दाखिल किया। नॉमिनेशन के बाद बड़े बेटे तेज प्रताप यादव का पहला रिएक्शन सामने आया। उन्होंने अपने पिताजी के दोबारा अध्यक्ष होने पर खुशी जाहिर की और लगे हाथ तेजस्वी यादव को भी आशीर्वाद दे डाला। इस बीच अपनी जान को खतरा बताते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा, बिहार सरकार से कहना चाहते हैं कि मेरी सुरक्षा बढ़ाई (Tej Pratap Claims Threat to Life, Seeks Nitish Govt Help) जाए, हमें जान का खतरा है। हम अपने स्टैंड से पीछे नहीं हटेंगे। जो भी 4-5 लोगों ने मेरे जीवन को खराब करने का काम किया है, मैं उनको नहीं छोडूंगा। पार्टी से निकालने वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि मेरे साथ अन्याय हुआ।  4-5 लोगों ने आपस में मिलकर मुझे पार्टी से बाहर करवाने की साजिश रची (Tej Pratap Claims Threat to Life, Seeks Nitish Govt Help) है पार्टी से निकालने वाले सवाल पर तेज प्रताप यादव ने कहा कि “जिस तरीके से मेरे खिलाफ साजिश की गई, वह किसी से छपा नहीं है। 4-5 लोगों ने आपस में मिलकर मुझे पार्टी से बाहर करवाने की साजिश रची और यह सबकुछ सबने अपनी आंखों से देखा (Tej Pratap Claims Threat to Life, Seeks Nitish Govt Help) है। बिहार की जनता जानती है कि मेरा स्वभाव कैसा है। मैं हमेशा सबके साथ सहजता से मिलता हूं, लेकिन कुछ लोग जो पार्टी में ऊंचे पदों पर बैठे हैं, उन्होंने ये सोचा कि तेज प्रताप को दबा लेंगे। पर उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि तेज प्रताप दबने वालों में से नहीं है। जो भी कुछ हुआ, जिसकी वजह से यह स्थिति बनी, वो भी किसी से छिपा नहीं है।  मैं किसी से डरने वाला (Tej Pratap Claims Threat to Life, Seeks Nitish Govt Help) नहीं हूं, मेरे लिए अदालत का रास्ता हमेशा खुला है पिता लालू यादव के आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहने पर खुशी जताते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा, मैंने हमेशा अपने माता-पिता का आदर और सम्मान किया है और आगे भी करता रहूंगा। मेरे ऊपर उनका आशीर्वाद और सहयोग हमेशा बना रहेगा। मेरे छोटे तेजस्वी यादव को मेरा पूरा आशीर्वाद है। मैं कामना करता हूं कि वे आगे बढ़ें और बिहार के मुख्यमंत्री बनें। वो यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि मैं किसी से डरने वाला (Tej Pratap Claims Threat to Life, Seeks Nitish Govt Help) नहीं हूं। मेरे लिए अदालत का रास्ता हमेशा खुला है और अगर ज़रूरत पड़ी तो मैं वहां भी जाऊंगा। मैं आज मीडिया के माध्यम से पूरे बिहार की जनता को बताना चाहता हूं कि मेरे साथ अन्याय हुआ है और मैं उन लोगों को खुली चुनौती देता हूं, जिन्होंने मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचा।  यदि मुझ पर और दबाव डाला गया तो मैं कानूनी रास्ता (Tej Pratap Claims Threat to Life, Seeks Nitish Govt Help) अपनाऊंगा निजी जीवन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि मेरे निजी जीवन पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए गए, जो कोई भी इंसान बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि मुझ पर और दबाव डाला गया तो मैं कानूनी रास्ता (Tej Pratap Claims Threat to Life, Seeks Nitish Govt Help) अपनाऊंगा। मैं बिहार सरकार से अपील करता हूं कि मेरी सुरक्षा बढ़ाई जाए। मुझे अपनी जान को खतरा महसूस हो रहा है। मैं साफ कर देना चाहता हूं कि मैं अपने स्टैंड से पीछे नहीं हटूंगा। जिन 4-5 लोगों ने मेरे निजी जीवन में दखल देकर उसे खराब करने की कोशिश की है, उन्हें मैं किसी कीमत पर नहीं छोड़ूंगा।  इसे भी पढ़ें:- विधानसभा चुनाव से पहले बिहार को पीएम मोदी ने दिया तोहफा असली नेता वही होता है जो जनता के दुख-दर्द को समझे और हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा (Tej Pratap Claims Threat to Life, Seeks Nitish Govt Help) रहे पार्टी बनाने की बात पर तेज प्रताप यादव ने कहा कि पार्टी बनाने की बात कहकर अफवाह उड़ाई जा रही है। हमारा उद्देश्य पार्टी बनाना नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर उनकी आवाज बनना है. क्या चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ही जरूरी है? असली नेता वही होता है जो जनता के दुख-दर्द को समझे और हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा (Tej Pratap Claims Threat to Life, Seeks Nitish Govt Help) रहे। मैं हर चुनौती का सामना खुलकर करूंगा। मुझे कोई रोक नहीं सकता। दुख की घड़ी में जो लोग मेरे साथ खड़े हैं, वही मेरे लिए भगवान हैं। और सबसे अहम बात, मेरा निजी जीवन है, उसमें दखल देने का किसी को अधिकार नहीं है। तेजस्वी जी को मेरी शुभकामनाएं हैं, वे आगे बढ़ें, राज्य का नेतृत्व करें, मेरा आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहेगा।  Latest News in Hindi Today Hindi Tej Pratap Claims Threat to Life, Seeks Nitish Govt Help #tejpratapyadav #nitishkumar #rjdnews #biharpolitics #laluyadav #lifethreatclaim #breakingnews

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Tejaswi Yadav

तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर हमला: बिहार में आयोगों की नियुक्तियों को बताया परिवारवाद

बिहार में महिला आयोग (Bihar Women’s Commission) समेत विभिन्न आयोगों में हुई नियुक्तियों को लेकर नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) पर हमला बोला है। तेजस्वी ने इन नियुक्तियों को पारदर्शिता और योग्यता के विरुद्ध बताते हुए सरकार पर परिवारवाद और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का गंभीर आरोप लगाया। तेजस्वी यादव ने उठाई ‘जमाई आयोग’ बनाने की मांग तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ने तंज कसते हुए कहा कि बिहार सरकार को एक जमाई आयोग का गठन करना चाहिए क्योंकि यहां आयोगों की नियुक्तियां पारिवारिक रिश्तों के आधार पर की जा रही हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) के दामाद, जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) के दामाद और अशोक चौधरी (Ashok Chaudhari) के दामाद को आयोगों में नियुक्त किया गया है। यह स्पष्ट रूप से परिवारवाद को दर्शाता है और इससे योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो रहा है। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की पत्नी की नियुक्ति पर सवाल तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ने विशेष रूप से बिहार महिला आयोग (Bihar Women’s Commission) में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार (Deepak Kumar) की पत्नी की नियुक्ति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें शिक्षाविद् के रूप में नियुक्त किया गया है, लेकिन क्या बिहार में कोई और योग्य शिक्षाविद नहीं था? तेजस्वी ने आरोप लगाया कि दीपक कुमार की पत्नी ने आवेदन में अपने पति का नाम छुपाकर पिता का नाम लिखा है, जो संदेह पैदा करता है। “मुख्यमंत्री अचेत हैं या शामिल?” तेजस्वी ने सवाल किया कि क्या नीतीश कुमार (Nitish Kumar) इन नियुक्तियों से अनजान हैं या वे स्वयं इस प्रक्रिया में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है और मुख्यमंत्री को इसका जवाब देना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि सचिवालय में दलित और अल्पसंख्यक विरोधी मानसिकता के लोग काबिज हो चुके हैं और बीजेपी के वफादार कार्यकर्ताओं को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार “बिहार में हो रहा है मलाई का बंटवारा” तेजस्वी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के परिवारवाद विरोधी भाषणों को भी खोखला करार दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में गुपचुप तरीके से सरकार की मलाई बांटी जा रही है और मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री दोनों मिलकर स्पेशल अरेंजमेंट कमीशन (Special Arrangement Commision) चला रहे हैं, जहां केवल खास लोगों के बेटा, दामाद और पत्नी को ही मौका मिलता है। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला अगर यूं ही चलता रहा तो बिहार का प्रशासन और सचिवालय दोनों ही बर्बाद हो जाएंगे। तेजस्वी ने सरकार से अपील की कि वह पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखे ताकि योग्य युवाओं को भी अवसर मिल सके। तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) के इस बयान ने एक बार फिर बिहार की राजनीति को गर्म कर दिया है। उन्होंने ना केवल नीतीश सरकार (Nitish Kumar) के निर्णयों पर सवाल उठाए, बल्कि परिवारवाद के खिलाफ व्यापक बहस को भी हवा दी है। आने वाले चुनावी माहौल में यह मुद्दा किस दिशा में जाता है, यह देखना दिलचस्प होगा। Latest News in Hindi Today Hindi Tejaswi Yadav #tejashwiyadav #nitishkumar #biharpolitics #familyism #nepotism #biharnews #indiapolitics #breakingnews #latestupdate #politicalnews

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Tejashwi Yadav calls NDA rule in Bihar a 20-year failure

𝟐𝟎 बरस से ढो रहा है बिहार 𝐍𝐃𝐀 की नाकाम निकम्मी सरकार: तेजस्वी यादव

बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। चुनाव आयोग जल्द ही चुनाव के तारीखों की घोषणा कर सकता है। चुनावी सरगर्मी बढ़ने के साथ-साथ राज्य में सियासी पारा भी बढ़ने लगा है। सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। खास तौर पर विपक्षी दलों ने NDA सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस कड़ी में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) और उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) लगातार मौजूदा सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) पिछले कुछ वर्षों में बिहार की राजनीति में एक मजबूत विपक्षी चेहरा बनकर उभरे हैं, लगातार जनसभाओं, मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से NDA पर हमला बोलते आ रहे हैं। वे विशेष रूप से युवाओं, बेरोजगारी, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों को उठाकर जनता का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। व्यंग्यात्मक कार्टून से सियासी हमला तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक व्यंग्यात्मक कार्टून साझा किया। इस कार्टून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की प्रतीकात्मक छवियों को एक आम आदमी द्वारा ढोते हुए दिखाया गया है। इस प्रतीकात्मक चित्र के ज़रिए तेजस्वी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि बिहार की जनता पिछले 20 वर्षों से NDA की ‘निकम्मी और नाकारा’ सरकार का बोझ उठाने को मजबूर है। उन्होंने इस पोस्ट के साथ लिखा, “20 बरस से ढो रहा है बिहार, एनडीए की नाकाम निकम्मी सरकार। इसके साथ ही उन्होंने भ्रष्टाचार, महंगाई, ढहते पुल, पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा की बदहाली, बाढ़ और सूखा जैसे मुद्दों की ओर इशारा करते हुए यह तंज कसा कि इन समस्याओं के बावजूद सरकार ने कोई ठोस समाधान नहीं निकाला। 𝟐𝟎 बरस से ढो रहा है बिहार𝐍𝐃𝐀 की नाकाम निकम्मी सरकार!#TejashwiYadav #Bihar #RJD #india pic.twitter.com/Z8mQOFuaaR — Tejashwi Yadav (@yadavtejashwi) June 4, 2025 चुनावी रणनीति में सोशल मीडिया की भूमिका तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के इस डिजिटल प्रहार को एक सटीक चुनावी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। आज की राजनीति में सोशल मीडिया एक बेहद प्रभावशाली मंच बन चुका है और तेजस्वी इसका भरपूर उपयोग कर रहे हैं। वे युवाओं और डिजिटल माध्यम (Bihar Politics) से जुड़े मतदाताओं को सीधे अपनी बात पहुंचा रहे हैं। खासकर पहली बार वोट देने वाले युवाओं को जागरूक करने के लिए वे लगातार सोशल मीडिया (Social Media) पर सक्रिय हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं, बल्कि एनडीए सरकार के खिलाफ एक बड़ा मनोवैज्ञानिक हमला है। ऐसे कार्टून और टिप्पणियों के जरिए तेजस्वी अपने विरोध को रचनात्मक और सरल भाषा में जनता के सामने ला रहे हैं, जो आम लोगों को आसानी से समझ में आता है। इसे भी पढ़ें:- बीजेपी नेता के बेटे के वायरल हुए 130 से अधिक अश्लील वीडियो, मचा हड़कंप, अखिलेश यादव ने कही यह बात  चुनावी समीकरण और आगे की राह राजनीति के जानकारों की मानें तो आगामी चुनाव में तेजस्वी यादव की रणनीति न केवल मौजूदा सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की है, बल्कि वह खुद को एक विकल्प के रूप में मजबूती से पेश कर रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए की ओर से इस प्रकार के लगातार हमलों का क्या जवाब दिया जाएगा। गौरतलब है कि बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में जातीय समीकरण, विकास के मुद्दे और युवा वर्ग की भागीदारी हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में राजद की ओर से उठाए जा रहे सवालों और डिजिटल रणनीति का कितना असर होता है, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा। अब ऐसे में यह कहा जा सकता है कि बिहार का राजनीतिक (Bihar Politics) तापमान चुनाव की घोषणा से पहले ही काफी बढ़ चुका है और जैसे-जैसे तारीख नज़दीक आएगी, यह लड़ाई और अधिक तीखी होती जाएगी। Latest News in Hindi Today Hindi news Bihar Politics #TejashwiYadav #BiharPolitics #NDAFailure #NitishKumar #BJPinBihar #BiharElections2025 #OppositionVoice #PoliticalNews

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CM Nitish Kumar

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: सभी वर्गों को मिलेगा सम्मान

बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की सरकार ने सामाजिक समावेशिता और सभी वर्गों के न्यायोचित विकास को सुनिश्चित करने के लिए दो नए आयोगों का गठन किया है। यह कदम समाज के हर तबके की समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। समाज के हर वर्ग के लिए सुनवाई और समाधान बिहार सरकार (Bihar Government) ने उच्च जाति विकास आयोग (Upper Caste Development Commission) और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग (State Scheduled Tribe Commission) का गठन करके यह स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्य के हर नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इन दोनों आयोगों का कार्य केवल समस्याएं पहचानना नहीं होगा, बल्कि यह आयोग सरकार को नीतिगत सुझाव भी देंगे ताकि हर वर्ग को उसका अधिकार मिल सके। उच्च जाति विकास आयोग की भूमिका सरकार द्वारा गठित उच्च जाति विकास आयोग का नेतृत्व भाजपा नेता और पूर्व मंत्री महाचंद्र प्रसाद सिंह को सौंपा गया है। आयोग के उपाध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद होंगे और इसके अन्य सदस्य दयानंद राय, जय कृष्ण झा और राजकुमार सिंह हैं। इनका कार्यकाल तीन वर्षों का निर्धारित किया गया है। यह आयोग बिहार में उच्च जातियों की शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करेगा। इसके आधार पर आयोग राज्य सरकार को सुझाव देगा कि इस वर्ग के उत्थान के लिए किन योजनाओं और संसाधनों की आवश्यकता है। अक्सर यह धारणा बनी रहती है कि केवल पिछड़े वर्गों को ही सहायता की आवश्यकता है, लेकिन इस आयोग के गठन से यह संदेश गया है कि हर वर्ग की जरूरतें अलग हैं और उन्हें ध्यान में रखते हुए नीति बनानी चाहिए। अनुसूचित जनजाति आयोग: अधिकारों की रक्षा की ओर कदम बिहार सरकार (Bihar Government) ने अनुसूचित जनजातियों के हितों की रक्षा और उनके सतत विकास को ध्यान में रखते हुए राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना की है। इस आयोग के अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार बनाए गए हैं, जबकि उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सुरेंद्र उरांव को दी गई है। अन्य सदस्य प्रेमशिला गुप्ता, तल्लू बासकी और राजू कुमार हैं। इस आयोग का मुख्य उद्देश्य बिहार की आदिवासी आबादी की समस्याओं की गहराई से पड़ताल करना और उनके समाधान के लिए सरकार को व्यावहारिक और प्रभावी सुझाव देना है। यह आयोग भी तीन वर्षों तक कार्य करेगा और एक माध्यम बनेगा जिससे आदिवासी समुदाय की आवाज सीधे प्रशासन तक पहुंचे। समावेशी विकास की ओर निर्णायक कदम इन दोनों आयोगों का गठन बिहार सरकार की एक रणनीतिक सोच का परिणाम है, जिसमें समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का यह कदम स्पष्ट करता है कि सरकार अब केवल किसी एक वर्ग के विकास पर ध्यान नहीं देगी, बल्कि हर समाज, जाति और समुदाय को विकास के पथ पर साथ लेकर चलेगी। यह प्रयास इस बात का भी संकेत है कि समाज में समानता और न्याय की स्थापना बिना समग्र दृष्टिकोण के संभव नहीं है। यदि राज्य का हर नागरिक अपने आप को प्रशासनिक निर्णयों में सहभागी और प्रतिनिधित्व प्राप्त महसूस करेगा, तो सामाजिक ताना-बाना और मजबूत होगा। इसे भी पढ़ें:- एमपी-हरियाणा में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति, ऑब्जर्वरों की टीम तैनात ऐसे में कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े होते हैं। जैसे: 1. क्या इन दोनों आयोगों द्वारा दिए गए सुझावों को कानूनी रूप से लागू करने की कोई गारंटी या स्पष्ट नीति बनाई गई है? 2. क्या इन आयोगों के गठन के बाद अन्य वर्गों (जैसे पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय) के लिए भी समान रूप से ठोस और प्रभावी नीतिगत प्रयास किए जाएंगे? 3. आयोगों द्वारा प्राप्त रिपोर्टों और सिफारिशों को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और जनता भी निगरानी रख सके? इस नई पहल के साथ बिहार सरकार (Bihar Government) ने यह संकेत दिया है कि सामाजिक संतुलन और हर वर्ग को विकास में सहभागी बनाना उसकी प्राथमिकता है। यदि यह प्रयास ईमानदारी से लागू किए जाते हैं, तो यह राज्य के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में एक क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news #BiharGovernment #NitishKumar #CMNitishKumar #BiharPolitics

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Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum

Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum: ताजा सर्वे में नितीश को लगा झटका, बीजेपी और तेजस्वी की बल्ले-बल्ले 

इस साल बिहार में चुनाव होना है। फ़िलहाल भारतीय चुनाव आयोग चुनावी तैयारियों की समीक्षा कर रहा है। अभी तक चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है। अक्टूबर-नवंबर होने वाले बिहार चुनाव में भाजपा-जदयू (एनडीए गठबंधन) का मुकाबला राजद-कांग्रेस के महागठबंधन से होगा। खैर, चुनाव होने में अभी तो महीनो बाकी है। इस बीच इंकइनसाइट द्वारा मई के शुरू में जारी एक नए ओपिनियन पोल ने नेताओं की नींद हराम कर दी है। सर्वे के मुताबिक सूबे की महिलाएं राज्य में सरकार बनाने के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन को अपनी पहली पसंद बता (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) रही हैं। दरअसल, सर्वे में शामिल 45 प्रतिशत महिलाओं ने कहा कि वे नीतीश को फिर से सूबे के मुखिया के तौर पर देखना चाहती हैं। यही नहीं, सर्वे के मुताबिक बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन, राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन से अधिक लोकप्रिय है। इस सर्वे में 60.4 प्रतिशत महिलाओं ने दावा किया है कि वो सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट देना पसंद करेंगी, जबकि 28.4 प्रतिशत ने महागठबंधन का समर्थन किया है।  18-29 आयु वर्ग के 42 प्रतिशत लोगों ने अगले सीएम के तौर पर तेजस्वी यादव को किया (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) पसंद   एक तरफ जहाँ नितीश कुमार बतौर महिलाओं की पहली पसंद बने हुए हैं तो वहीं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव युवाओं के बीच पहली पसंद बनकर उभरे हैं।  इंकइनसाइट के सर्वे में शामिल 18-29 आयु वर्ग के 42 प्रतिशत लोगों ने अगले सीएम के तौर पर नीतीश की जगह उन्हें पसंद किया (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) है। हालांकि, एनडीए अभी भी युवाओं के बीच पहली पसंद बनी हुई है। 18-29 आयु वर्ग के 44.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “वो एनडीए को वोट देंगे, वहीं 39.5 प्रतिशत ने कहा कि वे महागठबंधन को सत्ता में देखना पसंद करेंगे।” सिर्फ 0.76 प्रतिशत ने कहा कि “वो प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को वोट देंगे।” इस ओपिनियन पोल में शामिल 39 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “वो तेजस्वी यादव को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) हैं तो वहीं 34 प्रतिशत लोगों ने कहा कि “वो इस पद पर नीतीश कुमार को पसंद करेंगे।” बता दें कि ये दूसरा ओपिनियन पोल है जिसमें आरजेडी के तेजस्वी यादव को सीएम पद की पहली पसंद बताया गया है। गौरतलब हो कि “सी-वोटर के पहले के प्री-पोल सर्वे में तेजस्वी यादव को सीएम पद के लिए शीर्ष पसंद बताया गया था। उसमें प्रशांत किशोर दूसरे स्थान पर थे और उसके बाद नीतीश कुमार तीसरे स्थान पर थे।  इसे भी पढ़ें:-लालू की पार्टी आरजेडी के नेता शंभू गुप्ता 2 करोड़ रुपये की अफीम के साथ गिरफ्तार तेजस्वी यादव सीएम के रूप में शीर्ष बने हुए (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) हैं पसंद  गौर करने वाली बड़ी बात यह कि “सर्वे के मुताबिक, 30-39 वर्ष आयु वर्ग और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों के बीच तेजस्वी यादव सीएम के रूप में शीर्ष पसंद बने हुए (Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum) हैं। दूसरी ओर, 40-49 वर्ष और 50-59 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं के बीच नीतीश कुमार शीर्ष पसंद हैं। दिलचस्प बात ये है कि अधिकांश 45.8 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि “वो तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री के रूप में पसंद करेंगे।” कुल-मिलाकर इस सर्वे के मुताबिक महिलाओं के बीच, राज्य में एक और कार्यकाल के लिए सरकार बनाने हेतु एनडीए शीर्ष विकल्प बना हुआ है। इस सर्वे में 60.4 प्रतिशत ने दावा किया है कि वो सत्तारूढ़ गठबंधन को वोट देना पसंद करेंगी, तो वहीं 28.4 प्रतिशत ने महागठबंधन का समर्थन किया है। Latest News in Hindi Today Hindi news Nitish Hit in Survey, BJP & Tejashwi Gain Momentum #NitishKumar #BiharPolitics #BJPVictory #TejashwiYadav #ElectionSurvey #PoliticalTwist #BJPvsJDU #IndiaElections #BiharUpdates #VoterMood

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