Not Found Suitable

राहुल गांधी ने क्यों ट्वीट किया ‘Not Found Suitable’ और BJP पर क्या लगाया आरोप? 

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने केंद्र सरकार पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाया है कि सरकार पिछड़े वर्गों (SC-ST-OBC) के योग्य उम्मीदवारों को शिक्षा के अवसरों से जानबूझकर दूर कर रही है। उन्होंने नॉट फाउंड सूटेबल (Not Found Suitable) को एक नए प्रकार का मनुवाद करार देते हुए इसे सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों पर हमला बताया है। राहुल गांधी ने यह बयान दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में आरक्षित वर्गों के खाली पदों के मुद्दे पर दिया। उन्होंने दावा किया कि DU में 60% से ज्यादा प्रोफेसर और 30% से अधिक एसोसिएट प्रोफेसर के आरक्षित पद नॉट फाउंड सूटेबल (Not Found Suitable) के बहाने खाली रखे गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि योग्य उम्मीदवारों को ‘उपयुक्त नहीं’ बताकर उन्हें शैक्षणिक और नेतृत्व की मुख्यधारा से दूर रखने की साजिश रची जा रही है। ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ बन गया मनुवाद  राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने ट्वीट करते हुए लिखा कि नॉट फाउंड सूटेबल (Not Found Suitable) अब नया मनुवाद है। SC-ST-OBC के योग्य युवाओं को अयोग्य बताकर शिक्षा और नेतृत्व से दूर रखा जा रहा है। यह सामाजिक न्याय का अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शिक्षा को समानता का सबसे बड़ा हथियार बताया था और मौजूदा सरकार उसी हथियार को कुंद करने में लगी है। उन्होंने न सिर्फ दिल्ली यूनिवर्सिटी बल्कि IITs, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भी यही पैटर्न दोहराए जाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार यह केवल नौकरी या शिक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह सम्मान, प्रतिनिधित्व और बराबरी की लड़ाई है। राहुल गांधी का DU दौरा और छात्रों से संवाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस पहुंचे और DUSU (दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन) के छात्रों से बातचीत की। यह मीटिंग DUSU अध्यक्ष के कार्यालय में आयोजित की गई थी, जिसमें उन्होंने आरक्षण, प्रतिनिधित्व और शैक्षणिक न्याय के मुद्दों पर चर्चा की। राहुल ने कहा कि उन्होंने छात्रों से फीडबैक लिया है और अब वे मिलकर BJP-RSS के आरक्षण विरोधी एजेंडे का मुकाबला संविधान की ताकत से करेंगे। इसे भी पढ़ें:- एमपी-हरियाणा में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति, ऑब्जर्वरों की टीम तैनात यूनिवर्सिटी प्रशासन और ABVP का विरोध राहुल गांधी के इस दौरे पर दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आपत्ति जताई है। विश्वविद्यालय के अनुसार राहुल का दौरा संस्थानिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन था। DU ने अपने बयान में कहा कि वह इस घटना की निंदा करता है और आशा करता है कि भविष्य में ऐसा न हो। राहुल गांधी जितनी देर तक  विश्वविद्यालय परिसर में थें तबतक वहां की सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी, जिससे एक प्रमुख छात्र संगठन का कामकाज भी प्रभावित हुआ। इसके विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने डीयू में छात्र सम्मान मार्च निकाला और DUSU कार्यालय के बाहर राहुल गांधी का पुतला दहन किया। राजनीतिक विवाद या सामाजिक विमर्श? राहुल गांधी की यह पहल एक तरफ जहां राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है, वहीं यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक विमर्श को भी जन्म देती है – क्या योग्य उम्मीदवारों को सिर्फ जातिगत पूर्वग्रह के कारण अवसरों से वंचित किया जा रहा है? क्या Not Found Suitable जैसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके आरक्षित वर्गों के खिलाफ संस्थागत भेदभाव हो रहा है? इन सवालों का जवाब देना न सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि समाज के हर जागरूक नागरिक का भी कर्तव्य है। क्योंकि यह सिर्फ शिक्षा की नहीं, समान अवसर, भागीदारी और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई है। राहुल गांधी ने Not Found Suitable को नया मनुवाद बताते हुए सामाजिक न्याय की लड़ाई को फिर से मुख्यधारा में लाने की कोशिश की है। चाहे उनके बयानों को राजनीति कहें या सच की आवाज, यह तय है कि आरक्षण, प्रतिनिधित्व और समानता का मुद्दा फिर से राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुका है। और यह बहस तब तक जरूरी है, जब तक हर योग्य नागरिक को उसका हक न मिल जाए। Latest News in Hindi Today Hindi news Not Found Suitable #RahulGandhi #NotFoundSuitable #BJP #IndianPolitics #Congress

आगे और पढ़ें
Vasundhara Raje's Rift Shakes BJP

Vasundhara Raje BJP rift: वसुंधरा राजे की नाराजगी से बीजेपी में मचा हड़कंप, अशोक गहलोत ने तंज कसते हुए कही यह बात

राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की नाराजगी ने (Vasundhara Raje BJP rift) बीजेपी खेमे में हलचल मचा दी है। राजे के बयान का असर यह हुआ कि आनन-फानन मेंसीएम भजनलाल शर्मा को जलदाय विभाग के अधिकारियों को तलब करना पड़ा। दरअसल, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने झालावाड़ से राजस्थान में पानी के संकट का मुद्दा उठाया था। जिसके बाद से सूबे सियासत गरमा गई थी।  विपक्ष ने सवाल उठाया कि अगर वसुंधरा राजे हकीकत में पानी के संकट पर गंभीर हैं तो पूरे राजस्थान को लेकर बात करनी चाहिए। इसके बाद बीजेपी बैकफुट पर आ गई। सीएम भजनलाल ने संबंधित विभाग से जुड़े अधिकारियों की क्लास ले ली। और सख्त चेतावनी देते हुए सूबे में पानी का विशेष इंतजाम करने की हिदायत दे दी।  पानी की किल्लत के चलते राजे ने अफसरों को लगाई फटकार (Vasundhara Raje BJP rift)  बता दें कि बीते दिनों पूर्व सीएम वसुंधरा राजे झालावाड़ के अपने निर्वाचन क्षेत्र में अचानक जा पहुंची और तपती गर्मी के बीच ग्रामीण इलाके में लोगों की समस्याएं सुनने लगी। स्थानीय लोगों ने पानी संकट की बात रखी, तो राजे ने अफसरों को फटकार (Vasundhara Raje BJP rift) लगाते हुए कहा कि “अफसर सो रहे हैं। जनता रो रही है, वे ऐसा नहीं होने देंगी।” गौर करने वाली बात यह कि राजस्थान में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष की कार्यकारिणी का फैसला होना है। और ऐसे समय में राजे ने भजनलाल सरकार की ब्यूरोक्रेसी की क्लास उस समय लगाकर सीएम को सकते में डाल दिया है। कहने की जरूरत नहीं, राजे की इस नाराजगी को भजनलाल सरकार पर बिना नाम लिए हमला माना जा रहा है। माना जा रहा है कि वसुंधरा राजे पानी का मुद्दा उठाकर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करके खुद की भी नाराजगी जाहिर कर दी। राजे की नाराजगी के बाद सकते में आई बीजेपी ने सफाई दी। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि “राजे अपनी क्षेत्र की चिंता कर रही हैं। उन्हें अधिकारियो को ऐसे समझना पड़ा।  इसे भी पढ़ें:- काशी मेरी और मैं काशी का हूं, पीएम मोदी ने वाराणसी को दी 3880 करोड़ रुपये से अधिक की सौगात राजे के इस बयान (Vasundhara Raje BJP rift) ने विपक्ष को बीजेपी को आड़े हाथों लेने का मौका दे दिया है कहने की जरूरत नहीं, राजे के इस बयान (Vasundhara Raje BJP rift) ने विपक्ष को बीजेपी में गुटबाजी और सरकार से नाराजगी पर वार करने का मौका दे दिया। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने राजे के बयान को जायज ठहराते हुए कहा कि “वसुंधरा राजे ने ठीक मुद्दा उठाया लेकिन वो दो बार सीएम रह चुकी हैं और सरकार को पानी को लेकर काम से संतुष्ट नहीं है तो पूरे राज्य के हित में इस मुद्दे को उठाना चाहिए और सरकार की पानी की योजना की खामियों को गिनाना चाहिए।” इत्तेफ़ाक की बात यह कि वसुंधरा राजे बयान के अगले दिन ही उनके करीबी सिविल लाइन विधायक गोपाल शर्मा ने अतिक्रमण हटाने के सरकारी अभियान का विरोध करते हुए अपनी ही सरकार पर हिन्दू विरोधी काम करने का आरोप मढ़ दिया। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि एक बार फिर राजथान बीजेपी की गुटबाजी खुलकर जाहिर होने लगी है।  Latest News in Hindi Today Hindi News Vasundhara Raje BJP rift #VasundharaRaje #BJP #AshokGehlot #RajasthanPolitics #PoliticalRift #BJPNews #RajeVsBJP #GehlotRemark #BJPConflict #IndianPolitics

आगे और पढ़ें
Mahakaleshwar Temple

महाकाल का शृंगार: क्यों हर दिन बदलता है भगवान शिव का स्वरूप?

उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भगवान शिव के रूप महाकाल (Mahakaal) का प्रतिदिन विशेष शृंगार किया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा होता है। आइए जानते हैं कि प्रतिदिन महाकाल का शृंगार अलग-अलग क्यों किया जाता है और इसके पीछे की क्या कहानी है। महाकाल का शृंगार: एक दिव्य परंपरा महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) में भगवान शिव के रूप महाकाल का शृंगार प्रतिदिन अलग-अलग तरीके से किया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र होता है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व भी छिपा होता है। महाकाल का शृंगार उनके विभिन्न रूपों और भावों को दर्शाता है, जो भक्तों को उनके दिव्य स्वरूप के करीब ले जाता है। शृंगार के पीछे का धार्मिक महत्व महाकाल का शृंगार (Mahakal Shringar) केवल सजावट नहीं है, बल्कि यह एक धार्मिक अनुष्ठान है। यह शृंगार भगवान शिव के विभिन्न रूपों और उनकी लीलाओं को दर्शाता है। प्रतिदिन अलग-अलग शृंगार करने के पीछे का उद्देश्य भक्तों को भगवान शिव (Lord Shiva) के विभिन्न रूपों के दर्शन कराना और उनकी कृपा प्राप्त करना है। महाकाल का अनूठा शृंगार 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक उज्जैन में विराजित बाबा महाकाल का हर दिन विभिन्न रूपों में शृंगार होता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि यह भगवान शिव (Lord Shiva) के विभिन्न रूपों को दर्शाता है। हर दिन अलग-अलग रूप में महाकाल के दर्शन करने से भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। महाकाल के शृंगार के विभिन्न रूप इसे भी पढ़ें:- प्रेमानंद जी महाराज: गुरु दक्षिणा का सही अर्थ और महत्व महाकाल के शृंगार का महत्व उज्जैन स्थित महाकाल (Mahakaleshwar Temple) के मंदिर में हर दिन आरती के बाद बाबा को एक अलग रूप में सजाया जाता है। यह शृंगार न केवल भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि यह भगवान शिव के विभिन्न रूपों को दर्शाता है। हर दिन अलग-अलग रूप में महाकाल के दर्शन करने से भक्तों को एक अनोखा आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है। महाकाल के शृंगार (Mahakal Shringar) का यह अनूठा तरीका भक्तों को भगवान शिव की विभिन्न लीलाओं और रूपों के बारे में जानने का अवसर प्रदान करता है। यह शृंगार न केवल भक्तों की आस्था को मजबूत करता है, बल्कि उन्हें भगवान शिव (Lord Shiva) के प्रति समर्पण और भक्ति का संदेश भी देता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Mahakaleshwar Temple #UddhavThackeray #BJP #ModiGovt #MaharashtraPolitics #ShivSena #LokSabhaElections #IndianPolitics #PoliticalAttack #MaharashtraNews #ModiVsOpposition

आगे और पढ़ें

Yogi Adityanath third term: सीएम योगी ने अपने तीसरे टर्म को लेकर कही यह बड़ी बात, मचा सियासी हड़कंप 

साल 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में संभल पर छिड़ी सियासत के बीच सीएम बुधवार को योगी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को पॉडकास्ट इंटरव्यू दिया। इस पॉडकास्ट इंटरव्यू में उनसे कई तरह के सवाल-जवाब किये गए। इसी बीच उनसे उनके तीसरे कार्यकाल को लेकर भी एक सवाल पूछा गया। जिसके जवाब ने सभी चौंका दिया है। दरअसल, उनसे पूछा गया कि क्या आप तीसरा टर्म (Yogi Adityanath third term) भी ट्राई करेंगे, क्या आपकी नजर हैट्रिक पर है? इस पेंचीदे सवाल के जवाब पर सीएम योगी ने बड़ी सफाई से अपनी बात रखते हुए कहा कि “वह खुद इसकी कोशिश नहीं करेंगे।” बता दें कि तीसरी बार सीएम बनने के सवाल पर मैं कहना चाहता हूं कि मैं कोशिश नहीं करूंगा। यह मेरी पार्टी पर निर्भर है। मेरी पार्टी कोशिश करेगी और फैसला लेगी। ये बात जगजाहिर है कि सीएम योगी अपनी बात बिना किसी लाग-लपेट के रखते हैं। भले ही इसका जवाब उन्होंने जो भी दिया, लेकिन वो भाजपा की रणनीति का ही एक हिस्सा है। कहने की जरूरत नहीं कि सीएम योगी के जवाब से साफ पता चलता है कि कैसे भाजपा अखिलेश यादव की सपा और राहुल गांधी की कांग्रेस से अलग सोचती है। और यही उसे अन्य दलों से अलहदा बनाती है।  पार्टी लाइन पर छोड़ा सीएम का फैसला (Yogi Adityanath third term) निश्चित ही सबके मन में यह सवाल होगा कि सीएम योगी के जवाब का भाजपा की रणनीति से क्या मतलब? तो इसका मतलब साफ़ है कि भाजपा आखिरी तक अपने पत्ते नहीं खोलती। अंदरूनी कलह से बचने के लिए शायद पार्टी ऐसा करती हो। कारण चाहे कुछ भी, लेकन इसका बड़ा फायदा यह कि पार्टी गुटबाजी से बच जाती है।  इसके साथ ही वह यह संदेश देना चाहती है कि बूथ स्तर का कार्यकर्ता भी उसके लिए उतना ही महत्व रखता है, जितना की कोई कद्दावर नेता। पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि भाजपा में कोई भी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री बन सकता है। वजह यही जो सीएम योगी ने जो जवाब दिया, उसके मायने बड़े गहरे हैं। इस बात से इंकार नहीं कि वर्तमान में सीएम योगी की लोकप्रियता सातवें आसमान पर है। ऐसे में वो चाहते तो अपने तीसरे टर्म (Yogi Adityanath third term) के लिए खुद को सीएम फेस घोषित कर सकते थे, लेकिन उन्होंने यह फैसला पार्टी लाइन पर छोड़ दिया। खैर, यह तो वक़्त ही बताएगा कि साल 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत होती है या हार। और यदि भाजपा हैट्रिक मारती है, तो सीएम योगी मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे या नहीं? बेशक उनके जवाब से न सिर्फ उत्तर प्रदेश में सियासी सुगबुगाहट तेज हो गई है बल्कि सियासी पंडितों के बीच भी चर्चा का विषय बना गई है। इसे भी पढ़ें:- क्या है अटल कैंटीन योजना? हम अदालत का ही कहना मान रहे हैं, वरना अभी तक वहां बहुत कुछ हो गया होता बता दें कि संभल से लेकर वाराणसी तक नए मंदिर खोजने के सवाल पर योगी ने कहा कि “हम जितने मंदिर खोज पाएंगे, खोजेंगे। मथुरा मामले के कोर्ट में होने के सवाल पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “हम अदालत का ही कहना मान रहे हैं, वरना अभी तक वहां बहुत कुछ हो गया होता (Yogi Adityanath third term)।” उन्होंने यह भी कहा कि “प्रशासन ने अब तक संभल में कुल 54 धार्मिक स्थलों को चिन्हित किया है। इसके अलावा कुछ और के लिए भी प्रयास किया जा रहा है। जितना मिलेगा हम सब खोदकर निकालेंगे।” Latest News in Hindi Today Hindi News  Yogi Adityanath third term #YogiAdityanath #UPPolitics #ThirdTerm #CMYogi #BJP #IndianPolitics #YogiGovt #Election2024 #UttarPradesh #ModiYogi

आगे और पढ़ें
BJP MLA Suspended

BJP MLA Suspended: कर्नाटक विधानसभा से BJP के 18 विधायक क्यों किये गए निलंबित?

कर्नाटक विधानसभा (Karnataka Assembly) से BJP के 18 विधायकों (BJP MLA Suspended) को निलंबित कर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष, यूटी खादर ने शुक्रवार को हनी ट्रैप (Honey Trap) मामलों के संबंध में हंगामा करने और सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाने के कारण इन विधायकों को छह महीने के लिए निलंबित करने का फैसला लिया है। हनी ट्रैप (Honey Trap) मामले की जांच हाई कोर्ट के जज से कराने की मांग विपक्षी नेताओं ने कर्नाटक सरकार से कहा था कि राज्य के एक मंत्री और अन्य राजनेताओं से जुड़े कथित ‘हनी ट्रैप’ मामले की जांच हाई कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश से कराई जाए। शुक्रवार को बीजेपी विधायकों (BJP MLA) ने विधानसभा में कागज फाड़कर और वेल के पास आकर हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। मंत्री एचके पाटिल द्वारा विधेयक पेश कर्नाटक के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल (HK Patil) ने इस मामले में कार्यवाही को बाधित करने के लिए 18 बीजेपी विधायकों को छह महीने के लिए निलंबित करने वाला एक विधेयक विधानसभा में पेश किया। यह विधेयक पारित कर दिया गया और निलंबन की प्रक्रिया शुरू की गई। कर्नाटक का ‘हनी ट्रैप’ मामला कर्नाटक में हाल ही में एक हाई-प्रोफाइल हनी ट्रैप मामले (Honey Trap Case) ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी। यह मामला तब सामने आया जब कर्नाटक के सहकारिता मंत्री के.एन. राजन्ना ने विधानसभा में खुलासा किया कि वह खुद हनी ट्रैप (Honey Trap) का शिकार होने से बच गए, लेकिन राज्य के 48 अन्य नेताओं, विधायकों, और यहां तक कि केंद्रीय नेताओं के भी इस जाल में फंसने की संभावना जताई। इस खुलासे ने सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी बीजेपी को एक गंभीर विवाद में घसीट लिया है। सदन में बीजेपी विधायक द्वारा मामले का उठाना 20 मार्च 2025 को कर्नाटक विधानसभा (Karnataka Assembly) में बजट सत्र (Budget Session) के दौरान बीजेपी विधायक बसनगौड़ा पाटिल यत्नाल ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में हनी ट्रैप की घटनाएं बढ़ रही हैं और सहकारिता मंत्री राजन्ना को भी निशाना बनाया। इसके जवाब में मंत्री राजन्ना ने स्वीकार किया कि उनके खिलाफ हनी ट्रैप की कोशिश की गई थी, और यह समस्या केवल उनके तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “कर्नाटक अब पेन ड्राइव और सीडी का कारखाना बन चुका है। मेरे पास जानकारी है कि 48 लोग, जिनमें विधायक, केंद्रीय नेता, और जज भी शामिल हैं, इस जाल में फंस चुके हैं।” इसे भी पढ़ें: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर भड़की स्वाति मालीवाल, सुप्रीम कोर्ट से की दखल देने की मांग मंत्री जारकीहोली द्वारा हनी ट्रैप में फंसाने की कोशिश का स्वीकार करना इसके बाद राज्य के लोक निर्माण विभाग के मंत्री सतीश जारकीहोली ने भी इस मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। उन्होंने कहा, “यह सच है कि एक मंत्री को हनी ट्रैप (Honey Trap) में फंसाने की कोशिश की गई थी। यह दो बार हुआ, लेकिन दोनों बार यह प्रयास असफल रहे। कर्नाटक में हनी ट्रैप कोई नई बात नहीं है, यह पिछले 20 सालों से चल रहा है। कुछ लोग इसे राजनीति में निवेश के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।” जारकीहोली ने यह भी सुझाव दिया कि संबंधित मंत्री को पुलिस में शिकायत दर्ज करनी चाहिए ताकि इस मामले के पीछे के लोग पकड़े जा सकें। कर्नाटक का यह हनी ट्रैप मामला (Honey Trap Case) राजनीति में नया मोड़ ले चुका है और राज्य की सियासी सरगर्मियों को और तेज कर दिया है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, और यह मामला कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। Latest News in Hindi Today Hindi news BJP MLAs Suspended #BJPMLA #HoneyTrapCase #KarnatakaAssembly

आगे और पढ़ें

Rahul Gandhi on Gujarat elections: राहुल गांधी ने बताया इसलिए गुजरात में सत्ता से बाहर है कांग्रेस

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्ख़ियों में रहते हैं। ताजा उदहारण है, गुजरात के अहमदाबाद का। जहां जाने अनजाने में ही सही दिल की बात जुबां पर आ ही गई। दरअसल, राहुल गांधी दो दिन के गुजरात दौरे पर हैं। शनिवार को उन्होंने अहमदाबाद के जेड हॉल में प्रदेश के करीब 2 हजार कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इस दौरान अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गुजरात में कांग्रेस की लीडरशीप में दो तरह के लोग हैं। उनमें बंटवारा है। एक हैं जो जनता के साथ खड़े हैं, जिनके दिल में कांग्रेस की विचारधारा है। दूसरे वे हैं, जो जनता से कटे हुए हैं, दूर बैठते हैं और उनमें से आधे बीजेपी से मिले हुए हैं।” राहुल ने आगे कहा कि “मेरी जिम्मेदारी है कि जो ये दो ग्रुप हैं इनको छांटना है। कांग्रेस में नेताओं की कमी नहीं है। बब्बर शेर हैं लेकिन पीछे से चेन लगी हुई है तो वे चेन से बंधे हैं। यहां रेस के घोड़ों को बारात में बांध दिया जाता है। यदि 30-40 लोगों को निकालना पड़े तो ये भी करेंगे। बीजेपी के लिए अंदर से काम कर रहे हो, जाओ बाहर जाकर करो।” खैर, उन्होंने गुजरात में कांग्रेस की स्थिति पर खुलकर अपनी बात रखी। अपनी बात कहते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि बीते 30 वर्षों से कांग्रेस सत्ता से बाहर है और इसका कारण पार्टी की अपनी कमजोरियां हैं।  उन्होंने कहा कि “हर बार गुजरात में चुनावों की चर्चा होती है। साल 2007, 2012, 2017, 2022 और 2027 लेकिन सवाल सिर्फ चुनाव जीतने का नहीं है। गुजरात की जनता हमें तभी सत्ता में लाएगी जब हम अपनी जिम्मेदारी सही से निभाएंगे।  अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को आत्मविश्लेषण करने (Rahul Gandhi on Gujarat elections) की दी नसीहत  असल में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को अहमदाबाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को आत्मविश्लेषण करने (Rahul Gandhi on Gujarat elections) की नसीहत देते हुए कहा कि “गुजरात आगे बढ़ना चाहता है। लेकिन वह फंसा हुआ महसूस करता है। और मैं साफ कहूं तो गुजरात कांग्रेस भी उसे रास्ता नहीं दिखा पा रही है। मैं यह बिना किसी शर्म और डर के कह रहा हूं कि हमारी पार्टी के नेता, प्रदेश अध्यक्ष और खुद मैं भी गुजरात की जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं।” यही नहीं राहुल गांधी ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी का भी जिक्र करते हुए कहा कि “कांग्रेस को आजादी दिलाने में गुजरात की अहम भूमिका थी।” इस दौरान उन्होंने कहा कि “जब कांग्रेस को ब्रिटिश हुकूमत का सामना करना पड़ा तब हमें नेतृत्व की तलाश थी। वह नेतृत्व हमें दक्षिण अफ्रीका से नहीं बल्कि गुजरात से मिला। गांधीजी ने हमें संघर्ष करने सोचने और आगे बढ़ने की राह दिखाई।” राहुल ने यह भी कहा कि “अगर कांग्रेस को भविष्य में सत्ता में आना है तो उसे गुजरात से ही सीखना होगा।” इसे भी पढ़ें:-  देश से भी ज्यादा राज्य की विकास दर, प्रति व्यक्ति आय में महाराष्ट्र चौथा नंबर पर, अजित पवार ने बताएं विकास के आंकड़े पार्टी के नेता केवल चुनावी रणनीति पर ध्यान न दें बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान करें (Rahul Gandhi on Gujarat elections) इस दौरान राहुल गाँधी पार्टी नेताओं से कहा (Rahul Gandhi on Gujarat elections) कि “वे केवल चुनावी रणनीति पर ध्यान न दें बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिस दिन कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी निभाएगी जनता खुद उसे समर्थन देगी। वैसे उनका यह बयान कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए ही था। खैर, वो कहते हैं न राजनीति कितनी भी कटु और चुनौतीपूर्ण हो लेकिन कई बार नेताओं की जुबान पर सच्चाई आ जाती है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि गुजरात में कांग्रेस के कार्यकर्त्ता उनके इस बयान के प्रति कितनी तल्लीनता दिखाते हैं और संगठन किस दिशा में जाता है। बता दें कि गुजरात में बीते चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद ही निराशाजनक रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul Gandhi on Gujarat elections #RahulGandhi #Congress #GujaratElections #BJP #AAP #ElectionResults #PoliticalAnalysis #IndianPolitics

आगे और पढ़ें
Women empowerment scheme

Women’s Day Special: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से शुरू होगा  महिला समृद्धि योजना का रजिस्ट्रेशन

जब भी कोई राजनीतिक दल चुनाव लड़ता है, तो वह जनता के बीच जाकर कई तरह के वादे करता है। इनमें आर्थिक सहायता से लेकर नई योजनाओं की घोषणा तक शामिल होती है। ये वादे चुनावी घोषणा पत्र के माध्यम से किए जाते हैं, जिसमें सरकार बनने के बाद उन्हें लागू करने का आश्वासन दिया जाता है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दिल्ली में अपनी सरकार बनने के बाद महिलाओं को हर महीने ₹2500 की आर्थिक सहायता देने का वादा किया था। अब इस योजना से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। यह योजना महिला समृद्धि योजना (Mahila Samriddhi Yojana) के नाम से जानी जा रही है, और इसके कार्यान्वयन को लेकर नई घोषणाएं की गई हैं। आइए, इस योजना के बारे में विस्तार से जानते हैं। 8 मार्च को क्या होगा? दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Delhi CM Rekha Gupta) ने हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि महिला दिवस (8 मार्च) को महिलाओं के बैंक खातों में ₹2500 की राशि भेजी जाएगी। लेकिन अब इस संबंध में नई जानकारी सामने आई है कि महिला दिवस पर पैसे नहीं भेजे जाएंगे। इसके बजाय, 8 मार्च को इस योजना की आधिकारिक शुरुआत की जाएगी और उसी दिन से पंजीकरण (Ragistration) प्रक्रिया भी शुरू होगी। इससे पहले यह स्पष्ट नहीं था कि महिलाओं को इस योजना का लाभ कैसे मिलेगा और आवेदन की प्रक्रिया क्या होगी। अब दिल्ली सरकार ने यह साफ कर दिया है कि 8 मार्च को विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी और उसी दिन से महिलाएं इस योजना के लिए आवेदन कर सकेंगी। महिला समृद्धि योजना ( Mahila Samriddhi Yojana) के तहत पैसे कब मिलेंगे? अब जब यह स्पष्ट हो चुका है कि 8 मार्च (8 March) को केवल योजना की घोषणा और पंजीकरण शुरू होगा, तो सवाल उठता है कि महिलाओं के खातों में पैसे कब आएंगे? चूंकि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 8 मार्च से शुरू होगी, इसलिए यह संभावना है कि पंजीकरण पूरा होने के बाद जल्द ही लाभार्थियों के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाएंगे। हालांकि, अभी तक इस बारे में कोई निश्चित तारीख नहीं बताई गई है कि महिलाओं को पैसे कब तक मिलेंगे। संभावना है कि रजिस्ट्रेशन पूरा होने और जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही भुगतान शुरू किया जाएगा। सरकार की ओर से इस संबंध में जल्द ही अधिक जानकारी दी जा सकती है। किन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ? महिला समृद्धि योजना  (Mahila Samriddhi Yojana) का उद्देश्य दिल्ली की गरीब और मध्यम वर्गीय महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना का लाभ केवल उन्हीं महिलाओं को मिलेगा जो योग्यता मानदंडों को पूरा करती हैं। पात्र महिलाओं की श्रेणी: आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज़: किन महिलाओं को योजना का लाभ नहीं मिलेगा? इसका मतलब यह है कि योजना का उद्देश्य वास्तव में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं की मदद करना है, और इसे उन महिलाओं के लिए नहीं लागू किया जाएगा जो पहले से किसी अन्य सरकारी सहायता का लाभ ले रही हैं। महिला समृद्धि योजना  (Mahila Samriddhi Yojana) का उद्देश्य क्या है? दिल्ली सरकार द्वारा शुरू की जा रही महिला समृद्धि योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। यह योजना उन महिलाओं के लिए फायदेमंद होगी जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिन्हें वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। योजना के संभावित लाभ: इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार के मंत्री धनंजय मुंडे ने दिया इस्तीफा कैसे करें आवेदन? दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 8 मार्च से शुरू होगी। हालांकि, अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि आवेदन ऑनलाइन होगा या ऑफलाइन। संभावना है कि महिलाएं दिल्ली सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकेंगी, या फिर स्थानीय सरकारी कार्यालयों में जाकर पंजीकरण करा सकेंगी। इस बारे में सभी जरूरी जानकारी महिला दिवस पर दिल्ली सरकार द्वारा जारी की जाएगी। महिला समृद्धि योजना दिल्ली सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्ग की महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। हालांकि, पहले यह कहा गया था कि 8 मार्च को महिलाओं के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाएंगे, लेकिन अब स्पष्ट हो चुका है कि इस दिन केवल योजना की आधिकारिक शुरुआत और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होगी। जो महिलाएं इस योजना का लाभ उठाना चाहती हैं, उन्हें 8 मार्च से आवेदन प्रक्रिया शुरू करनी होगी, जिसके बाद सरकार द्वारा उनका योग्यता परीक्षण किया जाएगा और फिर पात्र महिलाओं को ₹2500 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। महत्वपूर्ण बिंदु: अब सभी की नजरें 8 मार्च पर टिकी हैं, जब दिल्ली सरकार इस योजना के बारे में पूरी जानकारी साझा करेगी। महिलाओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है, जिससे उन्हें आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता मिलेगी। Latest News in Hindi Today Hindi news Mahila Samriddhi Yojana #WomensDay #March8 #Delhigovernment #MahilaSamriddhiYojana #BJP

आगे और पढ़ें
Translate »