Uddhav Thackeray news

महाराष्ट्र में टूटेगा कांग्रेस-उद्धव ठाकरे का गठबंधन या रहेंगे साथ! बिहार चुनाव में क्या पड़ेगा असर?

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) इस साल के अंत तक होनी है। जिसको लेकर राजनीतिक पार्टियां जोड़-तोड़ और गठजोड़ में जुटी हैं। इन सबके बीच एक घटना ने इंडिया गठबंधन (India Alliance) यानी (महाविकास आघाड़ी) में हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) फिर से एक साथ आ गए हैं। दोनों ठाकरे बंधु बीते शनिवार को वर्ली में एक साथ मंच साझा किया, लेकिन इस भरत मिलाप से कांग्रेस (Congress) ने दूरी बनाए रखी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या इंडिया गठबंधन (India Alliance) यानी (महाविकास आघाड़ी) में फूट पड़ गया है? क्या कांग्रेस (Congress) महाराष्ट्र में अब भी शिवसेना यूबीटी साथ रहेगी?  एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम ने ठाकरे बंधुओं के मिलन के बाद कटाक्ष करते हुए महाविकास आघाड़ी (एमवीए) को नए नाम से संबोधित किया। निरुपम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि, ”यह एमवीए गठबंधन नहीं, बल्कि टीवीए यानी ठाकरे विकास आघाड़ी गठबंधन है।” संजय निरुपम ने कहा कि, महाराष्ट्र में कांग्रेस (Congress) को गठबंधन से घटाकर एक नया राजनीतिक गठबंधन बना है। पहले इस गठबंधन को एमवीए कहा जाता था यानी महा विकास अघाड़ी, लेकिन अब इसका नया नाम टीवीए रख देना चाहिए, क्योंकि यह ‘ठाकरे विकास अघाड़ी’ बन चुका है।  बिहारियों पर अत्याचार करने वालों के साथ कांग्रेस- केसी त्यागी  बिहार चुनावों (Bihar Assembly Elections) से ठीक पहले महाराष्ट्र में हुए इस गठबंधन को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कांग्रेस उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के साथ अभी भी गठबंधन में रहेगी या फर इनसे दूरी बना लेगी। इस नए गठबंधन पर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेसी नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने निशाना साधा था। चव्हाण ने मीडिया से बातचीत में कहा था राज उद्धव अगर मराठी भाषा को लेकर सरकारी आदेश वापस लेने का श्रेय अकेले लेना चाहते हैं, तो हमें कोई परेशानी नहीं। लेकिन अगर वे राजनीतिक रूप से हमारे साथ आना चाहते हैं, तो इस पर सोचना पड़ेगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक हर्षवर्धन सपकाल ने भी कहा कि ठाकरे परिवार अगर साथ मिलकर सरकारी आदेश वापस लेने का जश्न मनाना चाहता हैं तो हमे कोई परेशानी नहीं, लेकिन भाइयों के बीच संभावित राजनीतिक गठबंधन पर अलग मत है। वहीं दूसरी तरफ जेडीयू नेता केसी त्यागी ने भी इंडिया गठबंधन पर हमला होगा। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता का सबसे ज्यादा उत्पीड़न मुंबई में होता है। वहां पर कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी गठबंधन में हैं, लेकिन बिहारियों के शोषण का विरोध नहीं कर रही है। जो बताता है कि कांग्रेस किस तरह से बिहारियों पर अत्याचार पर मौन सहमति दे रही है।   इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ उद्धव और राज के साथ दिखने पर बिहार में कांग्रेस को हो सकता है नुकसान  राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार में जल्द ही चुनाव होने हैं, ऐसे में उद्धव और राज ठाकरे के बिहार विरोधी स्वभाव को देखते हुए कांग्रेस अब उद्धव ठाकरे के साथ रहने से परहेज कर सकती है। अगर कांग्रेस अभी भी उद्धव ठाकरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की कोशिश करती है तो उसे हिंदी भाषी बिहार के आगामी चुनाव (Bihar Assembly Elections) में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। बता दें कि राज ठाकरे (Raj Thackeray) की राजनीति ही उत्तर भारतीयों का विरोध करने पर टिकी है। इनकी पार्टी के कार्यकर्ता आए दिन उत्तर भारतीयों को पीटने को लेकर चर्चा में रहते हैं। उद्धव ठाकरे की शिवसेना भी इस मामले में मनसे के पाले में ही खड़ी नजर आती है। महाराष्ट्र में इसी साल के अंत तक स्थानीय निकाय चुनाव होने की संभावना है, ऐसे में यहां पर उत्तर भारतीयों का खिलाफ जहर उगलने की राजनीति अपने चरम पर पहुंच चुकी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Uddhav Thackeray #congress #shivsenaupta #uddhavthackeray #maharashtrapolitics #biharelections2025 #politicalnews #alliancebreak #indianpolitics

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Defense Attaché's 'Operation Sindoor'

डिफेंस अताशे के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर बयान ने मचाया हंगामा, कांग्रेस के आरोप पर भारतीय दूतावास ने दी सफाई

इंडोनेशिया में एक सेमिनार को संबोधित करते हए भारतीय डिफेंस अताशे (Indian Defence Attaché) कैप्टन शिव कुमार (नौसेना) द्वारा ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) पर दिए गए एक बयान से विवाद खड़ा हो गया है। नौसेना कैप्टन शिव कुमार ने सेमिनार में दावा किया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के प्रथम चरण में 7 मई को भारतीय वायुसेना को “कुछ लड़ाकू विमानों का नुकसान हुआ था”। क्योंकि हमारे राजनीतिक नेतृत्व ने पाकिस्तान के किसी भी सैन्य प्रतिष्ठान पर हमला न करने को कहा था। सेना को सिर्फ आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त करने का आदेश मिला था। जिसका वो पालन कर रही थी।   कैप्टन शिव कुमार ने इंडोनेशिया में यह बयान 10 जून को दिया था, जिसका वीडियो अब वायरल हुआ। इस वीडियो में कैप्टन शिव कुमार यह कहते दिख रहे हैं कि, “भारत को प्रारंभिक चरण में सिर्फ इसलिए नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि हमारे राजनीतिक नेतृत्व ने पाकिस्तान की किसी भी सैन्य संरचना या एयर डिफेंस को निशाना न बनाने का निर्देश दिया था। लेकिन शुरूआती नुकसान के बाद हमारी सेना इस रणनीति पर फिर से विचार किया और उसमें बदलाव करते हुए दुश्मन की एयर डिफेंस को निशाना बनाना शुरू किया। ब्रह्मोस मिसाइलों से सफल हमला कर दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया गया। हमारी सेना ने दुश्मन को पंगु बना दिया था।”  कांग्रेस ने लगाया राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करने का आरोप  कैप्टन का यह बयान वायरल होने के बाद अब विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस (Congress) ने इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार पर हमला बोल दिया है। कांग्रेस (Congress) प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इसे मोदी सरकार की विफलता करार देते हुए कहा कि, ”प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) इस मुद्दे पर जानकारी देने के लिए ऑल-पार्टी मीटिंग क्यों नहीं बुला रहे हैं। हमारे डिफेंस अताशे का यह बयान सीधे तौर पर सरकार की जवाबदेही तय करती है।” पवन खेड़ा ने पीएम मोदी (PM Modi) और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत पूरी केंद्र सरकार पर देश की सुरक्षा से समझौता करने का गंभीर आरोप लगाते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान के उस बयान का भी हवाला दिया, जिसमें जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के प्रथम चरण में नुकसान की बात स्वीकार की थी। बता दें कि, पिछले महीने सीडीएस ने सिंगापुर में ब्लूमबर्ग न्यूज को एक इंटरव्यू देते हुए बताया था कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती चरण में विमान खोने के बाद अपनी रणनीति बदली और पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। हालांकि इस दौरान सीडीएस ने पाकिस्तान के उस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें वो छह भारतीय फाइटर जेट को मार गिराने की बात कह रहा है।  इसे भी पढ़ें:- ‘लालू परिवार की जमीन पर होगा सरकार का कब्जा, बनेगा भूमिहीन गरीबों का घर’, JDU नेता के बयान से सियासी हलचल तेज भारतीय दूतावास ने आरोप लगता देख जारी की सफाई डिफेंस अताशे (Indian Defence Attaché) के बयान पर विवाद बढ़ता देख भारतीय दूतावास (जकार्ता) ने भी सफाई दी है। दूतावास ने अपने X पोस्ट में कहा, ”हमारे डिफेंस अताशे के बयान को बिना किसी संदर्भ पेश किया गया और मीडिया में भी गलत तरीके से दिखाया जा रहा है। कैप्टन कुमार ने सिर्फ यह बताने की कोशिश की है कि हमारी सेना राजनैतिक नेतृत्व के अधीन काम करती है, जो भारतीय लोकतांत्र की शानदार परंपरा को दिखाती है।” दूतावास के बयान में यह भी कहा गया कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद सिर्फ आतंकी अड्डों को ध्वस्त करना था। भारत की कार्रवाई न तो उकसावे वाली थी और न ही किसी देश को नुकसान पहुंचाने वाली।  आपको बता दे कि डिफेंस अताशे किसी भी देश का एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी होता है, जो उस देश के दूतावास में तैनात होता है। यह अपने देश के रक्षा प्रतिष्ठान का प्रतिनिधित्व करने के साथ डिफेंस से जुड़े सभी कार्यों को देखता है। इसके माध्यम से ही रक्षा उत्पादों की खरीद-बिक्री की जाती है।   Latest News in Hindi Today Hindi news Congress सीडीएस #OperationSindoor #DefenseAttaché #Congress #IndianEmbassy #DiplomaticRow #IndiaNews

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RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise: इस बार आरजेडी 130 से 135 सीटों पर लड़ सकती है चुनाव, कांग्रेस को करना पड़ सकता है समझौता

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। समय नजदीक आता देख दोनों गठबंधन चुनाव की तैयारियों में में जुट गए हैं। जेडीयू की अगुवाई वाली एनडीए सरकार अपने कार्यों के प्रमोशन में व्यस्त है तो वहीं तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन में बैठकों का लम्बा सिलसिला जारी है। इस बीच खबर यह है कि 4 बैठकों के बाद सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तकरीबन फाइनल हो गया (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) है। खबर के मुताबिक तेजस्वी यादव ने सहनी और पशुपति पारस के लिए कांग्रेस और वामदलों के बीच लगभग सहमति बना ली है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक जो फॉर्मूले सेट हुआ है उसके मुताबिक 2020 की तुलना में कांग्रेस और आरजेडी इस बार कम सीटों पर चुनाव लड़ेंगी तो वहीं सीपीआई माले को पिछली बार की तुलना में इस बार अधिक सीटें मिलेंगी।  पिछले चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) लड़ी थी चुनाव  गौरतलब हो कि 12 जून को तेजस्वी यादव के घर इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर चौथी बैठक हुई (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) थी। जिसमें तेजस्वी ने सभी पार्टियों से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के नाम और सीटों का ब्योरा मांगा था। इस दौरान कांग्रेस ने अपनी सीटों की लिस्ट आरजेडी को दे दी है। कांग्रेस ने 2020 में जीती हुई 19 सीटों के अलावा 39 उन सीटों के नाम भी दिए हैं जिस पर वह पिछले साल दूसरे नंबर पर रही। इसके अलावा वामदलों की कुछ सीटों पर भी कांग्रेस ने चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की है। बता दें कि पिछले चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इस बार उसकी रणनीति इतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ने की है। पिछली बार की हार की सफाई देते हुए कांग्रेस ने कहा कि वह इसलिए चुनाव हारे थे क्योंकि उन्हें अपनी परंपरागत सीटें सहयोगी दलों को देनी पड़ी थी। ऐसे में उम्मीद यह कि संभवतः इस बार वामदल कांग्रेस के लिए वे सीटें छोड़ दें। कांग्रेस को 55-60 सीटें दे सकते (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) हैं तेजस्वी यादव कांग्रेस के अलावा मुकेश सहनी 60 सीटों की मांग कर रहे हैं तो वहीं सीपीआई माले ने 40 सीटों की डिमांड रखी है। बड़ी बात यह कि सीपीआई और सीपीएम अभी लिस्ट नहीं सौंपी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पशुपति पारस, सीपीआई माले और सहनी को किसके हिस्से की सीटें दी जाएँगी? पार्टी के करीबी सूत्रों के मुताबिक तेजस्वी कांग्रेस को इस बार मनपसंद सीटें दे सकते हैं। सहनी और माले को अधिक सीटें दी जा सके इसलिए तेजस्वी 70 सींटे तो नहीं लेकिन कांग्रेस को 55-60 सीटें दे सकते (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) हैं। रही बात आरजेडी की तो आरजेडी 130 से 135 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। बता दें कि पिछली बार आरजेडी 144 सीटों पर चुनाव लड़ी थी।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा सीटों का बंटवारा जीत के आधार पर करने का फैसला किया (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) है तेजस्वी यादव ने  इसके अलावा महत्वपूर्ण बात यह कि तेजस्वी यादव ने इस बार सीटों का बंटवारा जीत के आधार पर करने का फैसला किया (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) है। सभी दल जीत की संभावना के आधार पर साथ बैठेंगे और फिर सीटों का बंटवारा करेंगे। तेजस्वी यादव की नई रणनीति के मुताबिक अधिक मार्जिन से हार वाली सीटों पर उम्मीदवार बदला जा सकता है। फ़िलहाल अभी सींटों के बंटवारे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। उम्मीद है जल्द ही पार्टी सीटों के बंटवारे की घोषणा करेगी और सहयोगी दलों को सम्मानजनक सीटें देगी।  Latest News in Hindi Today Hindi RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise #RJD #Congress #BiharElections2025 #SeatSharing #TejashwiYadav #Mahagathbandhan #PoliticsNews

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Congress demands explanation

Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump: मोदी सरकार पर हमलावर कांग्रेस, कहा- पीएम बताएं कि ट्रंप से क्या हुई बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से प्रधानमंत्री मोदी की बातचीत को लेकर कांग्रेस ने पीएम मोदी और सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने बुधवार को मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन देशों की यात्रा से लौटने के बाद तुरंत सर्वदलीय बैठक की बुलानी चाहिए। ताकि नेताओं को बताया जा सके कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से टेलीफोन पर बातचीत में क्या (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) कहा? पीटीआई से बात करते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री को संसद में ट्रंप के उन दावों का खंडन करना चाहिए, जिसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम के लिए व्यापार को एक साधन के रूप में इस्तेमाल करने का दावा किया है। ध्यान देने वाली बात यह कि रमेश की यह टिप्पणी मोदी द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप से बात करने के बाद आई है, जिसमें पीएम ने स्पष्ट किया कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान पर हमले इस्लामाबाद के अनुरोध पर रोके थे, न कि अमेरिका की मध्यस्थता या व्यापार समझौते की पेशकश के कारण। राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मुनीर का विशेष आमने-सामने लंच के लिए आमंत्रित किया जाना बहुत बड़ा (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) झटका है  खैर, विदेश सचिव विक्रम मिस्री के के मुताबिक, मंगलवार को ट्रंप के साथ 35 मिनट की फोन कॉल में पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति को पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों के खिलाफ भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बारे में जानकारी दी और यह साफ किया कि भारत ने कभी किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया है और भविष्य में भी इसे स्वीकार नहीं करेगा। इस बीच ट्रंप के जनरल मुनीर के साथ लंच करने की खबरों पर जयराम रमेश ने कहा, यह भारतीय कूटनीति के लिए तिहरा झटका है। आज फील्ड मार्शल मुनीर, जिनके भड़काऊ, भड़काऊ और अस्वीकार्य बयानों ने पहलगाम आतंकी हमले की पृष्ठभूमि बनाई, राष्ट्रपति ट्रंप के साथ लंच करने वाले (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) हैं। ऐसा सैन्यकर्मी जो सरकार का मुखिया नहीं है, उसे राष्ट्रपति ट्रंप के साथ विशेष आमने-सामने लंच के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। यह बहुत बड़ा झटका है।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा प्रधानमंत्री देश को विश्वास में लें और वे सारी बातें कहें जो उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप से कहनी (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) चाहिए सरकार को घेरते हुए जयराम रमेश ने आगे कहा कि तीसरा झटका राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 14 बार ऑपरेशन सिंदूर को रोकने और भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराने का श्रेय लेना था। मोदी-ट्रंप की टेलीफोन पर बातचीत पर रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ट्रंप से कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में व्यापार पर चर्चा नहीं हुई और मध्यस्थता की कोई गुंजाइश नहीं है। रमेश ने आगे कहा, वह सर्वदलीय बैठक में यह बात क्यों नहीं (Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump) कहते? इसलिए हम संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहे हैं ताकि प्रधानमंत्री देश को विश्वास में लें और वे सारी बातें कहें जो उन्हें राष्ट्रपति ट्रंप से कहनी चाहिए। खैर, कांग्रेस पार्टी ने उन रिपोर्ट्स को भी बड़ा झटका बताया, जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ट्रंप के साथ दोपहर का भोजन करेंगे। पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री को टेलीफोन पर बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति को इस पर भारत की नाराजगी के बारे में बताना चाहिए था। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान की बराबरी करते हुए व्यापार को एक साधन के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने यह बात 14 बार कही और प्रधानमंत्री ने 10 मई के बाद से कुछ नहीं कहा। इसलिए यह तिहरा झटका है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Congress Demands Modi Reveal Talk with Trump #Modi #Trump #Congress #IndiaUSRelations #PoliticalNews #BreakingNews #PMModi

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AIMIM's Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections

AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections: RJD-कांग्रेस को बिहार चुनाव से पहले AIMIM की धमकी, महागठबंधन में शामिल करें वरना…! 

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस (Congress) के महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। एआईएमआईएम (AIMIM) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने इसकी जानकारी (AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections)देते हुए कहा कि, ‘उनकी पार्टी बिहार चुनाव में वोटों का बिखराव रोकना चाहती है। इसीलिए उनकी पार्टी ने  आरजेडी (RJD) के दूसरी पंक्ति के नेताओं के माध्यम से नेता तेजस्वी यादव को गठबंधन का प्रस्ताव भेजा है। अब फैसला तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी को करना है।’ अख्तरुल ईमान ने मीडिया से इस बातचीत में चेतावनी देते हुए कहा, अगर महागठबंधन उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता, तो उनकी पार्टी थर्ड फ्रंट बनाने के लिए जल्द ही अन्य छोटे दलों से बातचीत करेगी। इस दौरान अख्तरुल ईमान ने आरजेडी (RJD) पर ‘पीठ में खंजर घोंपने’ का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि साल 2020 के विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम (AIMIM) राज्य की सीमांचल क्षेत्र में मौजूद अमौर, जोकीहाट, कोचाधामन, बैसी और बहादुरगंज सीट को जीता था। लेकिन चुनाव के दो साल बाद आरजेडी ने उनके 5 में से 4 विधायकों को तोड़ कर अपने पार्टी में मिला लिया। इस धोखबाजी को पार्टी भूली नहीं है।  2020 विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने किया था शानदार प्रदर्शन बता दें कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने (AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections) शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 सीटें जीत ली थी। एआईएमआईएम को यह सफलता सीमांचल के मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में मिली थी। इसके बाद से ही एआईएमआईएम को बिहार की सियासत में एक उभरती ताकत के तौर पर देखा गया। एआईएमआईएम ने सीधे तौर पर आरजेडी के परंपरागत मुस्लिम-यादव वोट बैंक में सेंध लगाई थी। इसलिए आरजेडी को सबसे ज्यादा परेशानी हुई और उसने एआईएमआईएम विधायकों को तोड़ने की मुहीम शुरू कर दी। आरजेडी ने दो साल बाद ही जून 2022 में एआईएमआईएम के 5 में से 4 विधायकों को तोड़कर अपने पार्टी में शामिल कर लिया।  इसे भी पढ़ें:- PMCH में दलित लड़की की मौत पर राहुल गांधी ने बिहार की डबल इंजन सरकार पर साधा निशाना, कही यह बात एआईएमआईएम के उभरने से आरजेडी और कांग्रेस को दीर्घकालिक तौर पर नुकसान होगा इस बार विधानसभा चुनाव में अगर एआईएमआईएम और आरजेडी अलग-अलग लड़ती हैं, तो इसका सीधा फायदा भाजपा को (AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections) होगा। इसलिए एआईएमआईएम ने चुनाव से पहले ही महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव भेज दिया। हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव पर आरजेडी और कांग्रेस (Congress) की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। बताया जा रहा है कि विपक्षी महागठबंधन के अंदर सीट बंटवारे को लेकर पहले सही तनाव है, ऐसे में अगर एआईएमआईएम को भी गठबंधन में शामिल कर लिया गया, तो सीट बंटवारे का मुद्दा और भी जटिल हो जाएगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एआईएमआईएम को महागठबंधन में शामिल किया जाता है तो इससे फौरी तौर पर मुस्लिम वोटों को एकजुट करने में फायदा मिल सकता है, लेकिन एआईएमआईएम के उभरने से आरजेडी और कांग्रेस को दीर्घकालिक तौर पर नुकसान होगा। दरअसल, आरजेडी और कांग्रेस (Congress) के कोर वोट बैंक मुस्लिम मतदाता है और एआईएमआईएम का वोट बैंक भी यही है। ऐसे में एआईएमआईएम राज्य में जितनी मजबूत होगी, उतनी ही आरजेडी और कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाएगी। ऐसे में महागठबंधन बिहार के अंदर अभी एआईएमआईएम से दूरी बनाकर ही रखना चाहता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections BiharElections2025 #AIMIM #RJD #Congress #Mahagathbandhan #Owaisi #PoliticalNews #IndiaPolitics

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action on Shashi Tharoor

Why Congress Can’t Act Against Shashi Tharoor: इस एक वजह से चाह कर भी शशि थरूर पर कार्रवाई नहीं कर पा रही है कांग्रेस

ऑपरेशन सिंदूर के बाद आतंकवाद पर पाकिस्तान को बेनकाब करने के लिए इन दिनों भारत के सात सर्वदलीय शिष्टमंडल विदेशी दौरे पर हैं। इनमें से एक शिष्टमंडल की अगुवाई कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर कर रहे हैं। अन्य शिष्टमंडलों में मनीष तिवारी, सलमान खुर्शीद शामिल हैं। लेकिन कांग्रेस को सबसे ज्यादा आपत्ति शशि थरूर के बयानों से। कांग्रेस पार्टी का मानना है कि जिस तरह से वो आये दिन पाकिस्तान को घेर रहे हैं, इसे देखकर ऐसा लगता है कि वो बीजेपी के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके इस कदम से पार्टी असहज दिख रही है। पार्टी से जुड़े करीबी सूत्रों की माने तो थरूर जिस तरह से बयान दे रहे हैं, उससे कांग्रेस खुश नहीं है। एक तरफ जहाँ सीजफायर होने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित दखल को लेकर कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर है और उससे लगातार सवाल कर रही है तो वहीं थरूर और खुर्शीद लगातार अमेरिकी या ट्रंप के दखल के दावों को सिरे से खारिज कर रहे (Why Congress Can’t Act Against Shashi Tharoor) हैं। कई मौकों पर दोनों नेताओं ने साफ तौर पर कहा है कि 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर पर जो सहमति बनी वह दोनों देशों के बीच हुई सीधी बातचीत का नतीजा है। दोनों जोर देते हुए कहा कि इस सीजफायर में किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।  थरूर पर करवाई या उनका विरोध करने का मतलब है बीजेपी को सीधा लाभ (Why Congress Can’t Act Against Shashi Tharoor) पहुँचाना इस बात के इंकार नहीं किया जा सकता कि थरूर के बयानों से कांग्रेस के आला नेताओं में नाराजगी है। नाराजगी ऐसी वैसी भी नहीं, चरम वाली। नाराजगी तो है, लेकिन चाहकर भी वो इसका विरोध नहीं कर पा रहे हैं। कांग्रेस पार्टी का अपना ऐसा अनुमान है कि थरूर पर करवाई या उनका विरोध करने का मतलब है बीजेपी को सीधा लाभ (Why Congress Can’t Act Against Shashi Tharoor) पहुँचाना। और बीजेपी इसे मुद्दा बना सकती है। ऐसे में कांग्रेस किसी भी कीमत पर बीजेपी को लाभ नहीं ही पहुंचाएगी। इसलिए पार्टी जवाब न देकर उदित राज द्वारा थरूर पर हमला करवा रही है। वो बात और है कि पवन खेड़ा जैसे नेता उदित राज के ट्वीट को लगातार री-पोस्ट कर रहे हैं। ऐसा इसलिए कि विवाद बढ़ने पर इसे उदित राज का निजी विचार बता पार्टी के शीर्ष नेता अपना पल्ला आसानी से झाड़ सकते हैं। पार्टी से जुड़े करीबी सूत्रों की माने तो कांग्रेस, थरूर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के मूड में नहीं है। दरअसल, इसके पीछे की बड़ी वजह है अगले साल केरल में होनेवाले विधानसभा चुनाव। बता दें कि थरूर तिरूवनंतपुरम से सांसद हैं। पिछले चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी।  इसे भी पढ़ें:- बीजेपी नेता के बेटे के वायरल हुए 130 से अधिक अश्लील वीडियो, मचा हड़कंप, अखिलेश यादव ने कही यह बात  केरल में लोगों की नाराजगी मोल नहीं लेना (Why Congress Can’t Act Against Shashi Tharoor) चाहती कांग्रेस हाल के वर्षों में थरूर ने केरल में अपना एक नया समर्थक वर्ग तैयार किया है, इसमें युवा, महिलाएं और सर्विस सेक्टर के लोग शामिल हैं। तिरूवनंतपुरम के बाहर भी थरूर का अच्छा प्रभाव है। बेशक कांग्रेस किसी भी तरह की कार्रवाई कर केरल में लोगों की नाराजगी मोल नहीं लेना (Why Congress Can’t Act Against Shashi Tharoor) चाहती। बता दें कि थरूर नायर जाति से आते हैं। ध्यान देने वाली बात यह कि परंपरागत रूप से यह वर्ग भाजपा का समर्थक है, लेकिन इसके बावजूद थरूर चुनाव जीतते आ रहे हैं। वह तिरूवनंतपुरम से चार बार के सांसद हैं। वजह यही जो अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस थरूर को पार्टी का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ना चाहती है। बेशक वह थरूर की राजनीतिक लोकप्रियता का फायदा उठाना चाहती है। ऐसे में उसे लगता है कि थरूर पर किसी भी तरह की कार्रवाई चुनाव में भाजपा को फायदा पहुंचा सकती है। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं, केरल में थरूर के नुकसान की भरपाई कर पाना कांग्रेस पार्टी के लिए बेहद मुश्किल हो सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Why Congress Can’t Act Against Shashi Tharoor #ShashiTharoor #Congress #CongressNews #IndianPolitics #TharoorControversy #PoliticalNews #CongressLeadership

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Team 50 Congress Madhya Pradesh

MP में कांग्रेस की ताकत बनेगी राहुल की Team 50, जानिए क्या है जीत का मास्टर प्लान

मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी (Congress Party) बीते कुछ वर्षों से लगातार चुनावी पराजयों का सामना कर रही है। विधानसभा और लोकसभा दोनों स्तरों पर पार्टी की कमजोर होती स्थिति ने शीर्ष नेतृत्व को पुनः संगठन को जमीनी स्तर से मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है। इसी दिशा में कांग्रेस ने अब गुजरात मॉडल (Gujrat Model) को अपनाते हुए संगठन सृजन अभियान (Sangathan Srijan Abhiyan) शुरू करने का निर्णय लिया है, जिसकी औपचारिक शुरुआत राहुल गांधी (Rahul Gandhi) 3 जून को भोपाल से करेंगे। राहुल गांधी का 10 वर्षों बाद पीसीसी कार्यालय दौरा संगठन सृजन अभियान (Sangathan Srijan Abhiyan) की खास बात यह है कि करीब एक दशक बाद राहुल गांधी प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (PCC) पहुंचेंगे, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व अब मध्य प्रदेश को लेकर गंभीर और सक्रिय रणनीति बना रहा है। राहुल गांधी के इस दौरे को पार्टी के कार्यकर्ताओं के मनोबल और उत्साह को बढ़ाने के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।  ‘टीम 50’ की भूमिका और जिम्मेदारी राहुल गांधी संगठन सृजन अभियान (Sangathan Srijan Abhiyan) के तहत अपनी ‘टीम 50’ को भी प्रदेश में सक्रिय करने जा रहे हैं। यह टीम देशभर से चुने गए 50 ऑब्जर्वरों की है, जिसमें असम, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के सांसद, विधायक और पूर्व मंत्री शामिल हैं। इन पर्यवेक्षकों को मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में भेजा जाएगा, जहां ये जिले की पार्टी इकाई का मूल्यांकन करेंगे। प्रत्येक ऑब्जर्वर को संबंधित जिले में जिला अध्यक्ष चुनने का अधिकार भी दिया जाएगा। उनका कार्य केवल नामांकन नहीं बल्कि ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की पहचान करना होगा जो स्थानीय स्तर पर सक्रिय हैं और जनसंपर्क बनाए रखते हैं। इसके साथ ही ये टीम निष्क्रिय नेताओं पर भी नजर रखेगी जो संगठन को नुकसान पहुंचा रहे हैं।  सीधे दिल्ली को रिपोर्टिंग संगठन सृजन अभियान (Sangathan Srijan Abhiyan) की एक और खासियत यह है कि ऑब्जर्वर अपनी रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस को नहीं, बल्कि सीधे दिल्ली के आलाकमान को सौंपेंगे। इसका उद्देश्य है पारदर्शिता बनाए रखते हुए स्थानीय गुटबाजी और सिफारिशी संस्कृति से बचना। इस टीम को मध्य प्रदेश कांग्रेस के चार वरिष्ठ नेताओं के जरिए को-ऑर्डिनेट किया जाएगा, जिन्हें को-ऑब्जर्वर की भूमिका दी जाएगी। ये नेता राहुल गांधी से चर्चा कर PCC में फीडबैक देंगे और ऑब्जर्वरों तथा कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने का कार्य करेंगे। इसे भी पढ़ें:-  इन देशों के साथ-साथ अब भारत भी एयर डिफेंस सिस्टम पर बढ़ा रहा है अपना फोकस  गुजरात मॉडल का विस्तार गौरतलब है कि कांग्रेस ने अहमदाबाद अधिवेशन के बाद गुजरात में संगठन सृजन अभियान (Sangathan Srijan Abhiyan) की शुरुआत की थी, जिसमें जिलेवार रिपोर्ट तैयार कर स्थानीय नेतृत्व को नया आकार दिया गया। गुजरात में इस मॉडल को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और अब इसी मॉडल को मध्य प्रदेश में लागू किया जा रहा है। मध्य प्रदेश दूसरा राज्य है जहां यह अभियान लागू हो रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस अब देशभर में संगठनात्मक ढांचे को फिर से खड़ा करने की दिशा में गंभीर है। कांग्रेस के लिए आगे की राह यह संगठन सृजन अभियान केवल एक सांगठनिक कवायद नहीं, बल्कि पार्टी के पुनर्जन्म की नींव रखने का प्रयास है। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो कांग्रेस को मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अपने कार्यकर्ता नेटवर्क को पुनः सक्रिय करने, स्थानीय स्तर पर जनता से जुड़ाव बढ़ाने और विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए ठोस आधार तैयार करने में मदद मिलेगी। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का यह अभियान कांग्रेस के लिए एक नई उम्मीद की तरह है। अब देखना होगा कि यह प्रयास व्यावहारिक परिणाम दे पाता है या नहीं। लेकिन एक बात तय है — कांग्रेस (Congress) ने पुनर्गठन की दिशा में ठोस और गंभीर कदम उठाया है। Latest News in Hindi Today Hindi news Sangathan Srijan Abhiyan #RahulGandhi #Team50 #Congress #MPElections #PoliticalStrategy #MadhyaPradesh #IndianPolitics

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Asaduddin Owaisi

असदुद्दीन ओवैसी ने क्यों कहा “मेरा हाल तो ऐसा हो गया है, जैसे गरीब की जोरू, सबकी भाभी बन गई है”

पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब करने के लिए भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)  के अंतर्गत भारतीय प्रतिनिधिमंडलों को दुनियाभर के देशों में भेजा जा रहा है। यह मिशन न केवल पाकिस्तान की नापाक इरादे को उजागर कर रहा है बल्कि भारत की सैन्य और कूटनीतिक ताकत को भी मजबूती दे रहा है। और अब इसी संदर्भ में एक राजनीतिक विवाद सुर्ख़ियों में है। दरअसल ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की द्वारा कही बात सुर्ख़ियों में है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने लिखा था पत्र  भोपाल के कांग्रेस नेता और विधायक आरिफ मसूद (Congress Leader Arif Masood) ने कुछ दिन पहले चिट्ठी लिखी थी, जिसमें यह लिखा गया था कि ओवैसी के विदेश दौरे पर जा रहे सांसदों को कहा कि वे केंद्र सरकार से साफ करें कि मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में दिए गए विवादित बयान पर यदि विदेशों में सवाल उठे तो उसका जवाब क्या दिया जाए। उनका तर्क था कि विदेशों में भारत की छवि पर असर न पड़े, इसलिए पहले से स्पष्टीकरण होना चाहिए। असदुद्दीन ओवैसी का तीखा पलटवार अब इसी विषय पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने अपनी प्रतिक्रिया दी है और ओवैसी ने अपने ही अंदाज़ में कहा कि  “दुनिया में कोई ऐसा माई का लाल पैदा  नहीं हुआ, जिसके सवाल का जवाब अल्लाह और उसके रसूल के सदके में ओवैसी न दे सके।” ओवैसी ने आरिफ मसूद को ‘छोटा भाई’ कहकर संबोधित किया और कहा कि वह पूरी बेबाकी से हर मंच पर जवाब देने को तैयार हैं।  असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा उन्हें प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया जाना इस बात का संकेत है कि सरकार भी उनकी बेबाकी की कद्र करती है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर भी तंज कसते हुए कहा कि “मेरा हाल तो ऐसा हो गया है, जैसे गरीब की जोरू, सबकी भाभी बन गई है।” उनका इशारा था कि हर दल उनके निर्णयों पर टिप्पणी कर रहा है, मानो वे किसी के अपने नहीं। इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी जासूस ज्योति के समर्थन में उतरी पाकिस्तानी इन्फ्लुएंसर हीरा बतूल, जानें क्या है रिश्ता  AIMIM और असदुद्दीन ओवैसी की राजनीति  असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) भारतीय राजनीति में एक प्रखर और मुखर नेता के रूप में जाने जाते हैं। AIMIM की स्थापना उनके दादा अब्दुल वहीद ओवैसी ने की थी, लेकिन इसे राष्ट्रीय पहचान असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में मिली। वे हमेशा से मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों को संसद और अन्य मंचों पर मजबूती से उठाते रहे हैं। उनकी पार्टी AIMIM ने हैदराबाद के बाहर भी उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश की है। हालांकि उन पर यह आरोप भी लगते रहे हैं कि उनकी राजनीति ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती है, लेकिन ओवैसी हमेशा यह कहते आए हैं कि वे सिर्फ संविधान और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करते हैं। ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) जैसे महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर जब राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो जाती है, तब असली फोकस छूटने लगता है। आरिफ मसूद की चिंता अपनी जगह वाजिब हो सकती है, लेकिन असदुद्दीन ओवैसी ने जिस तरह से आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया, वह दिखाता है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखने को तैयार हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारतीय राजनीति में  असदुद्दीन ओवैसी  (Asaduddin Owaisi) एक ऐसे नेता हैं, जो किसी भी कठिन परिस्थिति में अपने विचारों को स्पष्ट और निर्भीकता से रखने से नहीं चूकते। उनकी यही शैली उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाती है – चाहे वह संसद हो या फिर कोई अंतरराष्ट्रीय मंच। Latest News in Hindi Today Hindi news Asaduddin Owaisi  #AsaduddinOwaisi #Congress #ArifMasood #OperationSindoor

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Priyanka Gandhi absent

Priyanka Gandhi absent: वक्फ बिल पर बहस के दौरान प्रियंका गांधी की अनुपस्थिति पर भड़का मुस्लिम लीग

2 अप्रैल को लोकसभा में वक्‍फ बिल 288-232 वोटों से, तो वहीं 3 अप्रैल को राज्‍यसभा में 128-95 वोटों से पास हुआ था। मुस्लिम संगठनों का मानना है कि यह उनकी धार्मिक स्वायत्तता पर हमला है। वक्‍फ बिल को विपक्ष मुस्लिम विरोधी और असंवैधानिक करार दे रहा है। तो वहीं, सरकार का कहना है कि “वक्फ बोर्ड के प्रशासन में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने से संपत्ति प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी।” इस बीच ध्यान देने वाली बात यह कि कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी केरल के मुस्लिम बहुल इलाके वायनाड से लोकसभा की सांसद है। मुस्लिम बहुल इलाके से सांसद होने के बावजूद प्रियंका लोकसभा में वोटिंग के दौरान नदारद (Priyanka Gandhi absent) रही। वैसे भी मुस्लिम समाज में वक्‍फ बिल को लेकर बड़ी नाराजगी है। ऐसे में आधी रात को हुई वोटिंग के दौरान प्रियंका की गैर-मौजूदगी ने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। खुद को अल्पसंख्यकों का हितैषी बताने वाली प्रियंका के मंसूबों पर प्रश्नचिन्ह उठाया जा रहा है। बता दें कि वायनाड के लोगों ने प्रियंका गांधी को पिछले साल भारी बहुमत से जिताकर लोकसभा में भेजा था। बेशक उनकी जीत में मुस्लिम वोटों की अहम भूमिका रही। कहने की जरूरत नहीं, वक्फ संशोधन बिल जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उनकी अनुपस्थिति ने मुस्लिम समुदाय के मन असंतोष की भावना को जन्म दे दिया है। गौरतलब हो कि राहुल गांधी ने लोकसभा में बहस के दौरान हिस्सा नहीं लिया, लेकिन वह वोटिंग के लिए मौजूद जरूर थे।  वक्फ बिल पर बहस के दौरान प्रियंका गांधी की गैरमौजूदगी (Priyanka Gandhi absent) पर मुस्लिम लीग ने जताई नाराजगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने संसद में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान वायनाड के सांसद और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की अनुपस्थिति (Priyanka Gandhi absent) पर असंतोष व्यक्त किया है। जानकारी के मुताबिक समस्त केरल जेम-इय्याथुल उलमा के मुखपत्र सुप्रभातम ने बुधवार को लोकसभा में विधेयक पर बहस के दौरान सत्र में शामिल नहीं होने के लिए प्रियंका गांधी की घोर आलोचना की। 4 अप्रैल को प्रकाशित संपादकीय में उनकी अनुपस्थिति को एक काला निशान कहा गया और यह भी सवाल उठाया कि जब भाजपा इस विधेयक को आगे बढ़ा रही थी, तब प्रियंका गांधी कहां थीं? और विपक्षी नेता राहुल गांधी ने बिल पर क्यों नहीं बोला?  बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठनों ने बिल का कड़ा विरोध किया है।  इसे भी पढ़ें:- वक्फ बिल पास होते ही कांग्रेस को लगा बड़ा झटका, महाराष्ट्र के इस बड़े मुस्लिम नेता ने छोड़ी पार्टी यह कांग्रेस की अल्पसंख्यक-समर्थक छवि को कर सकता है प्रभावित (Priyanka Gandhi absent)  जानकारों की माने तो कांग्रेस की ओर से यह रणनीति संभवतः केरल के ईसाई संगठनों और मुस्लिम समुदाय के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक ईसाई संगठनों ने इस बिल का समर्थन किया था। कहने की जरूरत नहीं,  प्रियंका गांधी की अनुपस्थिति (Priyanka Gandhi absent) का असर न सिर्फ वायनाड तक सीमित रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी कांग्रेस की अल्पसंख्यक-समर्थक छवि को प्रभावित कर सकता है। इस विधेयक का उद्देश्य 1995 के अधिनियम में संशोधन करके भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन में सुधार करना है। Latest News in Hindi Today Hindi News Priyanka Gandhi absent #PriyankaGandhi #WakfBill #MuslimLeague #Congress #ParliamentDebate #IndiaPolitics #WakfControversy #PoliticalNews #PriyankaAbsent #LokSabha2025

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Rahul Gandhi court case

Rahul Gandhi Citizenship Case: क्या सच में ब्रिटिश नागरिक हैं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी? आज इलाहाबाद हाई कोर्ट करेगा सुनवाई

24 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नागरिकता (Rahul Gandhi Citizenship Case) के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने वाली है। दायर याचिका में राहुल गांधी के पास दोहरी नागरिकता होने का आरोप लगाया गया है। जिस पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख पेश करने की अपेक्षा की है। गौरतलब हो कि इस मामले में कोर्ट ने केंद्र को 19 दिसंबर को निर्देश दिया था कि वह अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा 24 मार्च तक पेश करें। दरअसल, मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने यह आदेश कर्नाटक के सामाजिक कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर की याचिका पर दिया था। बता दें कि आज क्रेंद इस मामले पर जवाब दाखिल करने वाला है। ऐसे में यदि राहुल गांधी दो पासपोर्ट मामले में दोषी पाए जाते, हैं तो उनके खिलाफ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 9 (2) के तहत कार्रवाई की जाएगी। फिर उनके खिलाफ नागरिकता छिपाने और गलत जानकारी देने का केस दर्ज किया जाएगा। गौर करने वाली बात यह कि नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने पर किसी व्यक्ति को 5 साल की सजा हो सकती है। 50,000 रुपये का जुर्माना या सजा दोनों लगाया जा सकता है। इसके साथ ही भारतीय नागरिकता भी खारिज की जा सकती है। वकील एस विग्नेश शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर (Rahul Gandhi Citizenship Case की थी याचिका  बता दें कि 1 जुलाई 2024 को कर्नाटक के बीजेपी के सदस्य और वकील एस विग्नेश शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर (Rahul Gandhi Citizenship Case) की थी। दायर इस याचिका में राहुल गांधी पर ब्रिटिश नागरिकता के आरोप लगाए गए थे। यही नहीं, याचिकाकर्ता ने ब्रिटिश सरकार के 2022 के गोपनीय मेल का भी हवाला भी दिया था। इसके अलावा विग्नेश ने भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 9 (2) के तहत राहुल गांधी की भारतीय नागरिकता रद्द करने की मांग की थी। शिशिर ने दलील देते हुए कहा था कि राहुल गांधी की संसद की सदस्यता रद्द की जानी चाहिए। उनकी इस दलील के पीछे की वजह यह ये कि भारतीय नागरिकता रखने वाला व्यक्ति ही लोकसभा चुनाव लड़ सकता है। इसे भी पढ़ें:- कठुआ में 5 आतंकियों को सुरक्षा बलों ने घेरा, एनकाउंटर जारी, गोली लगने से एक बच्ची घायल  कथित ब्रिटिश नागरिकता मामले (Rahul Gandhi Citizenship Case) में की गई थी सीबीआई जांच की मांग  प्राप्त जानकारी के मुताबिक याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता मामले (Rahul Gandhi Citizenship Case) की भी सीबीआई जांच की मांग की थी। दरअसल, याचिका इस दावे के आधार पर दायर की गई थी कि राहुल गांधी भारत के नागरिक हैं या ब्रिटेन के नागरिक हैं? यदि वो ब्रिटिश नागरिक हैं तो वह संविधान के अनुच्छेद 84 (ए) के तहत चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं। 2023 जुलाई में कोर्ट ने राहुल गांधी के सांसद के रूप में चुनाव को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को याचिकाकर्ता द्वारा वापस लेने के बाद खारिज कर दिया था। यही नहीं, बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर की थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि “वह इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच में दायर याचिकाओं पर स्पष्टता मिलने के बाद ही मामले की सुनवाई करेगी।” Latest News in Hindi Today Hindi news Rahul Gandhi Citizenship Case #RahulGandhi #RahulGandhiCitizenship #Congress #BritishCitizenship #IndianPolitics #AllahabadHighCourt #RahulCase #PoliticalNews #IndiaNews #BreakingNews

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