Cybercrime in India: क्यों नहीं थम रहे देश में साइबर अपराध के मामले, आखिर क्या है इसकी सबसे बड़ी वजह?
देश में साइबर अपराध इस कदर अपना पैर पसार (Cybercrime in India) चुका है कि इसपर नकेल कसना सरकार के बाद की बात नहीं रह गई है। देश में साइबर अपराध के मामले न थमने का मुख्य कारण है साइबर अपराधी द्वारा लगातार नए तरीकों का इस्तेमाल करना। कारण यही जो उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, लोगों की साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी और साइबर अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त कानूनी ढांचे की अनुपलब्धता भी एक बड़ी वजह है। गौर करने वाली बात यह कि साइबर हमलों में ऑनलाइन धोखाधड़ी और सेक्टार्शन जैसी चीजें ही शामिल नहीं हैं बल्कि इनमें डाटा चोरी, रैनसमवेयर, अवैध सट्टेबाजी एप, ऑनलाइन हेट क्राइम, साइबर बुलिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर साइबर अटैक इत्यादि भी शामिल हैं। इससे भी बड़ी ध्यान देने वाली बात यह कि अपराधी इनका इस्तेमाल कर देश की अर्थव्यवस्था व आंतरिक सुरक्षा को खोखला बनाने का काम कर रहे हैं। साइबर अपराधों के खिलाफ देश में अलग से कानून नहीं है और आइटी एक्ट में संशोधन के तहत 2022 में लाये गये प्रावधानों के जरिये इन्हें रोकने की कोशिश हो रही है। इसीके चलते साइबर अपराधों के विरुद्ध केंद्र ने साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल का गठन किया है। लाख कोशिशों के बावजूद साइबर अपराधों पर लगाम नहीं (Cybercrime in India) लगाई जा सकी है हालाँकि सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद साइबर अपराधों पर लगाम नहीं (Cybercrime in India) लगाई जा सकी है। इसके पीछे की कई वजहें हो सकती हैं। मसलन, साइबर अपराधी अपराध करने के नित्य नए तरीके खोजते रहते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है। खास बात यह कि हर बार नए शिकारी को नए तरीके से साइबर ठगी का शिकार बनाते हैं। साइबर ठगी का शिकार होने वाले लोग अमूमन साइबर सुरक्षा के प्रति अनजान होते हैं। जिससे वे आसानी से साइबर अपराधों का शिकार बन जाते हैं। इसके अलावा देश में देश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त कानूनी ढांचा नहीं है। र्याप्त कानूनी ढांचा न होने के कारण अपराधियों को आसानी से बच निकलने का मौका मिल जाता है। साइबर अपराधियों के न पकड़े जाने जाने के पीछे एक सबसे बड़ी वजह यह है कि वो देश की सरहदों को पर कर अपराध करते हैं। ऐसे में इंटरनेशनल कानूनों की आड़ लेकर साइबर अपराधी हाथ नहीं आते। ऐसे अपराधियों को पकड़ना या खोजना पुलिस के लिए बड़ा चुनौतीपूर्ण होता है। साइबर अपराधियों की बढ़ती संख्या पुलिस के सिरदर्द बनी हुई है। इसका अलाम यह है कि पुलिस के साइबर क्राइम के मॉडल को समझने का प्रयास कर रही होती है कि तब टक अपराधी एक नए तरीके से नए क्राइम को अंजाम दे देते हैं। इसे भी पढ़ें:- मस्जिद के सामने महिला पर भीड़ ने ‘लाठी-डंडे और पत्थर से बोला हमला, कर्नाटक में ‘तालिबानी सजा’ का खौफनाक मंजर 45 प्रतिशत से अधिक मामलों को (Cybercrime in India) कंबोडिया, म्यांमार और लाओस से दिया गया था अंजाम प्राप्त जानकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय से जुड़ी एजेंसी सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफसीएफआरएमएस) की माने तो नवंबर तक साइबर धोखाधड़ी की 12 लाख शिकायतें मिली। आपको जानकार हैरानी होगी कि इनमें से 45 प्रतिशत से अधिक मामलों को (Cybercrime in India) कंबोडिया, म्यांमार और लाओस से अंजाम दिया गया था। बता दें कि बीते अगस्त में संसद सत्र के दौरान गृह मंत्रालय ने कहा था कि “अन्य अपराधों की तरह साइबर अपराध रोकना भी राज्य की जिम्मेदारी है। सच यह है कि साइबर अपराध रोकने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से संबंधित कानून बनाने के साथ केंद्रीय स्तर पर साइबर आर्मी और राज्यों में साइबर पुलिस का गठन करने की सख्त आवश्यकता है। ऐसा नहीं है कि सरकार सिर्फ हाथ पर हाथ धीरे बैठी है। साइबर ठगी से बचने के लिए सरकार हर संभव लोगों के बीच जागरूकता अभियान चला रही है। यह तो ठीक, लेकिन वर्तमान भारत में आज भी जागरूकता की कमी के कहते ही लोग ढगी का शिकार हो रहे हैं। Latest News in Hindi Today Hindi News Cybercrime in India #CybercrimeInIndia #OnlineFraud #CyberSecurity #DataBreach #InternetScam #DigitalSafety #CyberThreats #IndiaNews #TechAlert #CyberAwareness

