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Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed: इस ऐप पर आपकी प्राइवेसी की कीमत सिर्फ 99 रूपये है, मोबाइल नंबर से डिटेल्स हो रही हैं लीक

आज के डिजिटल युग में कुछ भी सेफ नहीं है। यदि आपको लगता है कि आपकी प्राइवेसी को कोई भेद नहीं सकता, तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल है। कहने की जरूरत नहीं, आज के दौर में साइबर सुरक्षा सबसे बड़े संकट के रूप में देखी जा रही है। आपको जानकर हैरत होगी कि हालिया रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ किसी भी शख्स के मोबाइल नंबर के जरिये उसका नाम, पता, वैकल्पिक नंबर, और आधार कार्ड जैसी पहचान पत्र डिटेल्स महज कुछ सेकंड में ही प्राप्त की जा सकती है। वो भी महज 99 रुपए में। ये सच है, आपकी प्राइवेसी की कीमत सिर्फ 99 रुपए (Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed) है। यानी कि कोई भी चाहे तो सिर्फ 99 रुपये में आपकी निजी जानकारी हथिया सकता है। सोचनीय बात यह है कि आपको पता भी नहीं चलेगा कि कोई आपका डाटा सिर्फ 99 रूपये में खरीद ले रहा है। ऐसे में सबसे बड़ी चिंतावाली बात यह है कि आपके डेटा का इस्तेमाल यदि कोई अपराधी कर ले, तो वह फर्जी केवाईसी, बैंक लोन, फ्रॉड ट्रांजैक्शन कर सकता है। यही नहीं, वह आपकी पहचान का गलत इस्तेमाल भी कर सकता है। लोगों की प्राइवेसी को लेकर कई सवाल उठने लगे (Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed) हैं दरअसल, आपका यह डाटा टेलीग्राम बॉट बेच रहा है। जानकारी के मुताबिक टेलीग्राम बॉट लोगों की पर्सनल जानकारी को बेच रहा है। चौंका देने वाले हुए इस खुलासे से अब ऐप का इस्तेमाल करने वाले लोगों की प्राइवेसी को लेकर सवाल उठने लगे (Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed) हैं। बेशक रिपोर्ट ये सोचने पर मजबूर करती है कि क्या ऐप बनाने वाली कंपनी के पास डेटा वाकई सुरक्षित है भी या नहीं? वैसे तो ऐप्स यूजर्स की सेफ्टी और प्राइवेसी को लेकर बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन क्या वाकई में उनके दावों पर आँख मूंदकर यकीन किया जा सकता है? वो बात और है कि लोगों की सेफ्टी के लिए ऐप में टू स्टेप वेरिफिकेशन का फीचर दिया जाता है, लेकिन बड़ा सवाल वही कि क्या इस फीचर को ऑन करने के बाद भी आप डिजिटल दुनिया में सेफ हैं? हालिया रिपोर्ट्स की माने तो किसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर डालने पर उसकी निजी जानकारी टेलीग्राम बॉट द्वारा उजागर की जा रही है।  बॉट यूजर्स की संवेदनशील जानकारी को लीक कर (Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed) रहा है मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टेलीग्राम के पास एक ऐसा बॉट है, जो खरीदारों को भारतीय यूजर्स की संवेदनशील निजी डेटा को बेच रहा है। ये बॉट यूजर्स का नाम, पिता का नाम, पता, आधार नंबर, पैन कार्ड नंबर और वोटर आईडी नंबर जैसी जानकारी को लीक कर (Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed) रहा है। बॉट इन सभी जरूरी जानकारी को उपलब्ध कराने से पहले प्लान खरीदने के लिए कहता है। इसके प्लान की कीमत 99 रुपए से 4999 रुपए तक है। प्लान खरीदने के बाद ये बॉट खरीदार से 10 अंकों का मोबाइल नंबर भेजने के लिए कहता है। 10 अंकों का मोबाइल नंबर भेजते ही महज दो सेकंड के भीतर ये बॉट नंबर से जुड़ी व्यक्ति की पूरी प्रोफाइल डिटेल दे देता है। जिसमें नाम, ऑल्टरनेट फोन नंबर, पता और सारी डॉक्यूमेंट्स की डिटेल शामिल होती है।  गौर करनेवाली बात यह कि बॉट टेलीग्राम की एक प्रमुख विशेषता है। बॉट को कोई भी बना सकता है।  इसे भी पढ़ें:-  इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे शुभांशु शुक्‍ला, अब अंतरिक्ष में रहकर करेंगे रिसर्च  ऐसे में लाख टके का सवाल यह कि इससे (Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed) बचें कैसे?  Latest News in Hindi Today Hindi Privacy Leaked for ₹99 via App, Mobile Numbers Exposed #privacybreach #dataleak #mobileleak #cybersecurity #indiadata #techalert #privacyviolation #appsecurity

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Cyber Attacks Surge Amid Operation Sindoor: एक तरफ जारी था ऑपेरशन सिंदूर, दूसरी तरफ हुए 15 लाख से अधिक साइबर अटैक

जम्मू-कश्मीर में हुए कायराना आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारत ने ऑपेरशन सिंदूर चलाया था। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुँचाया था। भारत और पाकिस्तान के बीच मची तनातनी के बीच देश में एक दो नहीं बल्कि 15 लाख से अधिक साइबर अटैक (Cyber Attacks Surge Amid Operation Sindoor) का सामना करना पड़ा। दरअसल, महाराष्ट्र साइबर सेल अधिकारी के मुताबिक 10 लाख से भी ज्यादा साइबर हमले किए गए है। महाराष्ट्र साइबर ने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत भर में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की वेबसाइटों को निशाना बनाकर 15 लाख से अधिक साइबर हमले करने के लिए जिम्मेदार सात उन्नत स्थायी खतरा (एपीटी) समूहों की पहचान की है। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से हैकर केवल 150 हमलों में ही सफल रहे। इस पूरे मामले पर अधिकारियों ने कहा कि “भारत और पाकिस्तान के बीच एक-दूसरे के खिलाफ सीजफायर पर बनी सहमति के बाद भी भारत सरकार की वेबसाइट को पड़ोसी देश के साथ-साथ बांग्लादेश और पश्चिम एशियाई देशों से साइबर हमलों का सामना करना पड़ रहा है।” भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई समाप्त होने के बाद भारत की सरकारी वेबसाइट पर कम हुए साइबर (Cyber Attacks Surge Amid Operation Sindoor) हमले  इतना ही नहीं, महाराष्ट्र साइबर के वरिष्ठ अधिकारी ने पत्रकारों के साथ हुई बातचीत में उन दावों को सिरे से खारिज किया जिसमें हैकर ने मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आंकड़ों की चोरी की है, विमानन और नगर निगम प्रणालियों को हैक किया (Cyber Attacks Surge Amid Operation Sindoor) है और निर्वाचन आयोग की वेबसाइट को निशाना बनाया है के दावे किये गए थे।” अधिकारी ने कहा कि “जांच में पाया गया कि भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई समाप्त होने के बाद भारत की सरकारी वेबसाइट पर साइबर हमले कम हुए, लेकिन पूरी तरह से बंद नहीं हुए। ये हमले पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मोरक्को और पश्चिम एशियाई देशों से जारी हैं। आतंकवादियों के खिलाफ भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा इसी नाम से शुरू किए गए सैन्य अभियान के तहत तैयार की गई रोड ऑफ सिंदूर शीर्षक वाली रिपोर्ट में राज्य की नोडल साइबर एजेंसी ने पाकिस्तान-संबद्ध हैकिंग समूहों द्वारा शुरू किए गए साइबर युद्ध का विस्तृत विवरण दिया है।” इसे भी पढ़ें:- कर्रेगुट्टा हिल्स पर ‘ऑपरेशन संकल्प’ में सुरक्षा बलों ने 31 नक्सली किए ढेर, 20 शवों की हुई पहचान ये साइबर हमले बांग्लादेश, पाकिस्तान, पश्चिम एशियाई देशों और एक इंडोनेशियाई समूह द्वारा किए गए- अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यशस्वी यादव फ़िलहाल, यह रिपोर्ट पुलिस महानिदेशक और राज्य खुफिया विभाग सहित सभी प्रमुख कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दी गई (Cyber Attacks Surge Amid Operation Sindoor) है। महाराष्ट्र साइबर के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यशस्वी यादव ने बताया कि “रिपोर्ट के अनुसार, ये साइबर हमले बांग्लादेश, पाकिस्तान, पश्चिम एशियाई देशों और एक इंडोनेशियाई समूह द्वारा किए गए। इस्तेमाल किए गए तरीकों में मैलवेयर अभियान, डिस्ट्रिब्यूटेड डेनियल-ऑफ-सर्विस (डीडीओएस) हमले और जीपीएस के माध्यम से जासूसी शामिल थी। भारतीय वेबसाइटों को भी नुकसान पहुंचाने की खबरें आईं।” उन्होंने आगे कहा कि “ऐसे कई हमलों को विफल कर दिया गया और भारत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बचा लिया गया।” Latest News in HindiToday Hindi news Cyber Attacks Surge Amid Operation Sindoor #CyberAttacks #OperationSindoor #CyberSecurity #IndiaNews #CyberThreats #IndianArmy #HackAlert #CyberCrime #DigitalIndia #NationUnderAttack

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Cybercrime in India: क्यों नहीं थम रहे देश में साइबर अपराध के मामले, आखिर क्या है इसकी सबसे बड़ी वजह?

देश में साइबर अपराध इस कदर अपना पैर पसार (Cybercrime in India) चुका है कि इसपर नकेल कसना सरकार के बाद की बात नहीं रह गई है। देश में साइबर अपराध के मामले न थमने का मुख्य कारण है साइबर अपराधी द्वारा लगातार नए तरीकों का इस्तेमाल करना। कारण यही जो उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, लोगों की साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता की कमी और साइबर अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त कानूनी ढांचे की अनुपलब्धता भी एक बड़ी वजह है। गौर करने वाली बात यह कि साइबर हमलों में ऑनलाइन धोखाधड़ी और सेक्टार्शन जैसी चीजें ही शामिल नहीं हैं बल्कि इनमें डाटा चोरी, रैनसमवेयर, अवैध सट्टेबाजी एप, ऑनलाइन हेट क्राइम, साइबर बुलिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर साइबर अटैक इत्यादि भी शामिल हैं। इससे भी बड़ी ध्यान देने वाली बात यह कि अपराधी इनका इस्तेमाल कर देश की अर्थव्यवस्था व आंतरिक सुरक्षा को खोखला बनाने का काम कर रहे हैं। साइबर अपराधों के खिलाफ देश में अलग से कानून नहीं है और आइटी एक्ट में संशोधन के तहत 2022 में लाये गये प्रावधानों के जरिये इन्हें रोकने की कोशिश हो रही है। इसीके चलते साइबर अपराधों के विरुद्ध केंद्र ने साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल का गठन किया है।  लाख कोशिशों के बावजूद साइबर अपराधों पर लगाम नहीं (Cybercrime in India) लगाई जा सकी है हालाँकि सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद साइबर अपराधों पर लगाम नहीं (Cybercrime in India) लगाई जा सकी है। इसके पीछे की कई वजहें हो सकती हैं। मसलन, साइबर अपराधी अपराध करने के नित्य नए तरीके खोजते रहते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है। खास बात यह कि हर बार नए शिकारी को नए तरीके से साइबर ठगी का शिकार बनाते हैं। साइबर ठगी का शिकार होने वाले लोग अमूमन साइबर सुरक्षा के प्रति अनजान होते हैं। जिससे वे आसानी से साइबर अपराधों का शिकार बन जाते हैं। इसके अलावा देश में देश में साइबर अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त कानूनी ढांचा नहीं है। र्याप्त कानूनी ढांचा न होने के कारण अपराधियों को आसानी से बच निकलने का मौका मिल जाता है। साइबर अपराधियों के न पकड़े जाने जाने के पीछे एक सबसे बड़ी वजह यह है कि वो देश की सरहदों को पर कर अपराध करते हैं। ऐसे में इंटरनेशनल कानूनों की आड़ लेकर साइबर अपराधी हाथ नहीं आते। ऐसे अपराधियों को पकड़ना या खोजना पुलिस के लिए बड़ा चुनौतीपूर्ण होता है। साइबर अपराधियों की बढ़ती संख्या पुलिस के सिरदर्द बनी हुई है। इसका अलाम यह है कि पुलिस के साइबर क्राइम के मॉडल को समझने का प्रयास कर रही होती है कि तब टक अपराधी एक नए तरीके से नए क्राइम को अंजाम दे देते हैं।  इसे भी पढ़ें:- मस्जिद के सामने महिला पर भीड़ ने ‘लाठी-डंडे और पत्थर से बोला हमला, कर्नाटक में ‘तालिबानी सजा’ का खौफनाक मंजर 45 प्रतिशत से अधिक मामलों को (Cybercrime in India) कंबोडिया, म्यांमार और लाओस से दिया गया था अंजाम  प्राप्त जानकारी के मुताबिक गृह मंत्रालय से जुड़ी एजेंसी सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफसीएफआरएमएस) की माने तो नवंबर तक साइबर धोखाधड़ी की 12 लाख शिकायतें मिली। आपको जानकार हैरानी होगी कि इनमें से 45 प्रतिशत से अधिक मामलों को (Cybercrime in India) कंबोडिया, म्यांमार और लाओस से अंजाम दिया गया था। बता दें कि बीते अगस्त में संसद सत्र के दौरान गृह मंत्रालय ने कहा था कि “अन्य अपराधों की तरह साइबर अपराध रोकना भी राज्य की जिम्मेदारी है। सच यह है कि साइबर अपराध रोकने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से संबंधित कानून बनाने के साथ केंद्रीय स्तर पर साइबर आर्मी और राज्यों में साइबर पुलिस का गठन करने की सख्त आवश्यकता है। ऐसा नहीं है कि सरकार सिर्फ हाथ पर हाथ धीरे बैठी है। साइबर ठगी से बचने के लिए सरकार हर संभव लोगों के बीच जागरूकता अभियान चला रही है। यह तो ठीक, लेकिन वर्तमान भारत में आज भी जागरूकता की कमी के कहते ही लोग ढगी का शिकार हो रहे हैं। Latest News in Hindi Today Hindi News Cybercrime in India #CybercrimeInIndia #OnlineFraud #CyberSecurity #DataBreach #InternetScam #DigitalSafety #CyberThreats #IndiaNews #TechAlert #CyberAwareness

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