Donald Trump’s Big Change in US Voting System Revealed

Donald Trump voting changes: अमेरिका में वोट देने के तरीके में यह बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप  

अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक चौंकाने वाले फैसले ले रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने मंगलवार (25 मार्च) को अमेरिका में होने वाले चुनावों में व्यापक बदलाव की मांग वाले आदेश पर हस्ताक्षर किए। दरअसल, ट्रंप ने वहां के फेडरल चुनावों (केंद्रीय) में वोटिंग के रजिस्ट्रेशन के लिए नागरिकता का डॉक्यूमेंट प्रूव देना अनिवार्य (Donald Trump voting changes) कर दिया है। यानी जिस तरह भारत में हम मतदान के समय आधार कार्ड या वोटर कार्ड जैसे आधिकारिक आईडी प्रूव देते हैं। ठीक उसी तरह अब अमेरिकी नागरिकों को भी अपनी आईडी प्रूफ दिखाना होगा। आईडी प्रूफ दिखाने के बाद ही वो वोट डालने हेतु रजिस्टर कर सकेगा। इस बीच भारत और कुछ अन्य देशों का हवाला देते हुए इस आदेश में कहा गया है कि “अमेरिका, स्वशासन वाले अग्रणी देश होने के बावजूद, आधुनिक, विकसित और विकासशील देशों द्वारा उपाय में लाए जाने वाले बुनियादी और आवश्यक चुनाव सुरक्षा को लागू करने में विफल रहा है। इस आदेश में यह भी कहा गया है कि “उदाहरण के लिए, भारत और ब्राजील मतदाता पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ रहे हैं, जबकि अमेरिका नागरिकता के लिए यह काफी हद तक स्व-सत्यापन पर ही निर्भर है।” अब अमेरिकी मतदाताओं को देना होगा नागरिकता का सबूत (Donald Trump voting changes) प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब मतदाताओं को नागरिकता का सबूत डॉक्यूमेंट फॉर्म में देना होगा। जैसे अमेरिकी पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र। इस आदेश में यह भी कहा गया है कि “राज्यों को अपनी मतदाता सूची और मतदाता सूची के रखरखाव के रिकॉर्ड को समीक्षा के लिए होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और सरकारी दक्षता विभाग (डीओजी) को सौंप देना चाहिए। इस बीच आदेश में चुनाव के दिन तक वोट डालने और उसे प्राप्त करने को आवश्यक बताया गया है। कहा गया है कि फेडरल फंडिंग उस समय सीमा के राज्य अनुपालन पर सशर्त होनी चाहिए। इसके अलावा आदेश में चुनाव सहायता आयोग को चुनावी अखंडता की रक्षा के उद्देश्य से वोटिंग सिस्टम के लिए अपने दिशानिर्देशों में संशोधन करने का निर्देश दिया गया। जानकारी के मुताबिक इसमें यह मार्गदर्शन शामिल होगा कि वोटिंग सिस्टम को उन मतपत्रों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए जो मतगणना प्रक्रिया में बारकोड या क्यूआर कोड का उपयोग करते हैं। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप के आदेश में विदेशी नागरिकों को अमेरिकी चुनाव में योगदान देने या चंदा देने पर भी रोक लगा दी गई है।  इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन कई अमेरिकी चुनावों में मेल द्वारा बड़े पैमाने पर मतदान करने की है सुविधा (Donald Trump voting changes) बता दें कि आदेश में डेनमार्क और स्वीडन का उल्लेख करते हुए कहा कि ये देश व्यक्तिगत रूप से मतदान करने में असमर्थ लोगों के लिए मेल-इन वोटिंग को समझदारी से सीमित करते हैं और पोस्टमार्क की तारीख की परवाह किए बिना देर से आने वाले वोटों की गिनती नहीं करते हैं, लेकिन कई अमेरिकी चुनावों में अब मेल द्वारा बड़े पैमाने पर मतदान की सुविधा है (Donald Trump voting changes)। कई अधिकारी बिना पोस्टमार्क वाले या चुनाव की तारीख के बाद प्राप्त मतपत्रों को स्वीकार करते हैं। जनवरी में डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस को पटखनी देकर सत्ता में लौटे राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि “धोखाधड़ी, त्रुटियों या संदेह से मुक्त स्वतंत्र, निष्पक्ष और ईमानदार चुनाव हमारे संवैधानिक गणतंत्र को बनाए रखने के लिए मौलिक हैं।” इस बीच ट्रंप ने कहा कि “अमेरिकी नागरिकों का अपने वोटों को अवैध रूप से कमजोर किए बिना उचित ढंग से गिनती और सारणीबद्ध करने का अधिकार, चुनाव के असली विजेता का निर्धारण करने के लिए महत्वपूर्ण है।”  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump voting changes #DonaldTrump #USVoting #Election2024 #TrumpPolicies #VotingChanges #TrumpCampaign #USElections #BallotReform #TrumpNews #VotingRights

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Elon Musk Clashes with Minister

Elon Musk Clashes with Minister: कैबिनेट मीटिंग में ही भिड़े एलन मस्क और विदेश मंत्री, डोनाल्ड ट्रंप को देना पड़ा दखल

अमेरिकी राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में कई कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। हालांकि उनके फैसलों का अमेरिका में जमकर विरोध भी हो रहा है। ट्रंप प्रशासन का एक ऐसा ही फैसला है सरकारी स्टाफ में कटौती का। उनके इस फैसले की आलोचना न सिर्फ अमेरिकी राजकर्मियों के संगठन बल्कि अन्य लोग भी कर चुके हैं। इस बीच उनके अपने इस फैसले के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सरकारी दक्षता विभाग के प्रमुख एलन मस्क के बीच नोकझोंक होने की खबर सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को ट्रंप की मौजूदगी में कैबिनेट बैठक के दौरान दोनों के बीच झड़प (Elon Musk Clashes with Minister) हुई। खैर, बाद में ट्रंप ने मस्क और रुबियो के बीच झड़प की बातों का खंडन किया है। मजे की बात यह कि एक तरफ जहां ट्रंप ने मस्क और रुबियो के बीच झड़प की बातों का खंडन किया है तो वहीं दूसरी ओर न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एलन मस्क के बीच स्टाफ कटौती के मुद्दे पर बहस हुई थी। गौर करने वाली बात यह कि रॉयटर्स ने भी इस बहस को रिपोर्ट किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट की माने तो यह ड्रामा उस बैठक में हुआ, जिसमें ट्रंप ने अपने कैबिनेट प्रमुखों से कहा कि “उनकी एजेंसियों में स्टाफिंग और नीति पर अंतिम फैसला मस्क का नहीं, बल्कि उनका है।” ट्रंप प्रशासन को अपने ही मतदाताओं के गुस्से (Elon Musk Clashes with Minister) का करना पड़ा है सामना  प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह बैठक एजेंसी प्रमुखों से लेकर चीफ ऑफ स्टाफ, सूजी विल्स सहित व्हाइट हाउस के शीर्ष अधिकारियों तक मस्क ऑपरेशन के कठोर-बलपूर्ण दृष्टिकोण के बारे में की गई शिकायतों के बाद बुलाई गई थी। स्टाफ कटौती के इस फैसले के खिलाफ ट्रंप प्रशासन को अपने ही मतदाताओं के गुस्से (Elon Musk Clashes with Minister) का सामना करना पड़ा है। हालांकि शुक्रवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से रूबरू होते हुए ट्रंप से जब टाइम्स की रिपोर्ट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बात से इनकार करते हुए कहा कि कोई टकराव नहीं। मैं वहां स्वयं मौजूद था।” उन्होंने आगे कहा कि “एलन मस्क मार्को रुबियो के साथ बहुत अच्छे से पेश आते हैं और वे दोनों शानदार काम कर रहे हैं।” इसे भी पढ़ें:-  नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत बढ़ती बहस (Elon Musk Clashes with Minister) को देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप को स्वयं करना पड़ा हस्तक्षेप   बैठक के दौरान मजे लेते हुए मस्क ने कहा कि “आपने किसी को भी नहीं निकाला है। आपका विदेश विभाग अभी भी फूला हुआ है।” मस्क के तीखे सवाल को सुनते ही रुबियो भड़क उठे। उन्होंने जवाब दिया कि मस्क को 1,500 विदेश विभाग के अधिकारियों की याद दिला दी जिन्होंने बायआउट किया था। मगर  मस्क प्रभावित नहीं हुए। खैर, रुबियो ने व्यंग्यात्मक रूप से पूछा कि “क्या मस्क चाहते हैं कि वे उन सभी लोगों को फिर से काम पर रखें ताकि वे उन्हें फिर से नौकरी से निकालने का दिखावा कर सकें?” इस बीच दोनों के बीच जैसे ही बहस (Elon Musk Clashes with Minister) बढ़ी वैसे ही राष्ट्रपति ट्रंप, जो पहले हाथ पर हाथ धरे देख रहे थे, आखिरकार उन्हें स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा। ट्रंप ने कहा कि “कैबिनेट सचिव कार्यभार संभालेंगे, जबकि मस्क की टीम केवल सलाह देगी।” बेशक यह ट्रंप का पहला महत्वपूर्ण संकेत था कि मस्क के प्रभाव पर सीमाएं लगाने के लिए तैयार थे। कहने की जरूरत नहीं, इसे देखकर यह कहा जा सकता है कि ट्रंप की सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हैरत की बात यह कि एक तरफ पूरी दुनिया को ट्रंप अपनी ताकत दिखाने में लगे हुए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ उनके मंत्री ही आपस लड़ रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Elon Musk Clashes with Minister #ElonMusk #DonaldTrump #USPolitics #ForeignAffairs #TechVsPolitics #CabinetClash #MuskVsMinister #TrumpMediation #BreakingNews #PoliticalDrama

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Trump limits Musk’s authority: एलन मस्क पर सख़्त हुए ट्रंप, कहा- आपको सरकारी कर्मचारियों को निकालने का कोई हक नहीं

जब से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली है तब से ट्रंप और एलन मस्क दोनों ताबड़तोड़ एक के बाद एक चौंकाने वाले निर्णय ले रहे हैं। चाहे वो कनाडा और मैक्सिको समेत अन्य देशों पर टैरिफ लगाना हो या फिर अपने ही देश के सरकारी कर्मचारियों की छटनी करनी हो। बेख़ौफ़ होकर निर्णय ले रहे थे। लेकिन इस बीच स्थिति बदलते देर नहीं लगी। इस दरम्यान अनावश्यक हुई सरकारी कर्मचारियों की छंटनी के बाद बगावती सुर बुलंद होने लगे और असंतोष की भावना पनपने लगी। बगावती सुर बुलंद होता देख ट्रंप ने कहा कि “टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क केवल विभागों को सलाह देने तक (Trump limits Musk’s authority) सीमित हैं। और वे कर्मियों या नीतियों पर स्वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले सकते।” बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी कैबिनेट को स्पष्ट किया कि “बिलियनेयर सलाहकार एलन मस्क को संघीय विभागों के अध्यक्ष की तरह अधिकार नहीं दिए गए हैं। और न ही उन्हें सरकारी कर्मचारियों को निकालने का कोई अधिकार है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क केवल विभागों को सलाह देने तक सीमित हैं।”   इबोला रोकथाम के लिए फंडिंग को गलती से रद्द करना एक बड़ी चूक (Trump limits Musk’s authority) थी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एलन मस्क ने स्वीकार किया कि “पिछले सप्ताह ट्रंप की पहली कैबिनेट बैठक में इबोला रोकथाम के लिए फंडिंग को गलती से रद्द करना एक बड़ी चूक (Trump limits Musk’s authority) थी।” दरअसल, एलन मस्क और उनकी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशियेंसी (डीओजेई) फेडरल कर्मचारियों की छंटनी सहित खर्चों में कटौती के उपायों पर काम कर रही है। गौर करने वाली बात यह कि मस्क के पास स्वयं सरकारी कर्मचारियों को निकालने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशियेंसी की पहल के चलते भारी संख्या में छंटनी और इस्तीफे हुए हैं। इस बीच जानकारी के लिए बता दें कि 20,000 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। और तकरीबन 75,000 कर्मचारियों ने स्वेच्छा से इस्तीफा देने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इन छंटनियों का सबसे अधिक असर उन कर्मचारियों पर पड़ा है, जो प्रोबेशन की अवधि में थे। इसके पीछे की बड़ी वजह यह कि उनके पास नागरिक सेवा से जुड़े संरक्षण के अधिकार सीमित होते हैं। इस कारण उन्हें हटाना बेहद आसान होता है। इसे भी पढ़ें:-  नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत एलन मस्क के अधिकारों को सीमित (Trump limits Musk’s authority) करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि इन नौकरियों में कटौती का प्रभाव कई एजेंसियों पर पड़ा है। जिनमें आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस), ऊर्जा विभाग, दिग्गज मामलों का विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ़ वेटरन्स अफेयर्स) और अन्य शामिल हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति के नए निर्देश एलन मस्क के अधिकारों को सीमित (Trump limits Musk’s authority) करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ट्रंप के आदेश के अनुसार डीओजेई और उसकी टीम सलाहकार की भूमिका में रहेंगे। लेकिन अंतिम फैसले लेने का अधिकार कैबिनेट सचिवों के पास ही होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Trump limits Musk’s authority #TrumpVsMusk #ElonMusk #DonaldTrump #SpaceX #USPolitics #TechRegulation #MuskVsGovernment #TrumpNews #Tesla #XCorp

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Trump softens stance

Trump softens stance: नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत

इस साल 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति पद का पदभार संभालने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप बड़े एक्शन में दिख रहे थे। बता दें कि बीते 45 दिनों में ऐसा कोई दिन नहीं रहा, जब ट्रंप और उनके प्रशासन के लोगों ने टैरिफ शब्द का नाम न लिया हो। इसके चलते उन्होंने टैरिफ वार की धमकी अपने पड़ोसी मुल्कों कनाडा और मैक्सिको भी दी। लेकिन अब धीरे-धीरे उनके तेवर नरम (Trump softens stance) पड़ते जा रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने पहले मैक्सिको और फिर कनाडा को टैरिफ से छूट देने की घोषणा कर दी। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे टैरिफ वार के दौरान, कनाडा ने अमेरिका द्वारा दी गई छूट के बावजूद अपने जवाबी टैरिफ को हटाने से इंकार कर दिया है। गुरुवार को कनाडा के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को एक महीने के लिए टाल दिया है, लेकिन इसके बावजूद कनाडा द्वारा अमेरिका पर लगाए गए जवाबी टैरिफ अभी भी प्रभावी रहेंगे। इस दौरान कनाडा ने आरोप लगाया कि “राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ पहले लागू करके और फिर उन्हें हटाकर सोची समझी रणनीति के तहत अनिश्चितता और अव्यवस्था पैदा की। उनकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कनाडा और मैक्सिको से आयातित उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ को महीने भर के लिए टाल (Trump softens stance) दिया था।  दरअसल, ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आयातित अधिकांश उत्पादों पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को एक महीने के लिए टाल (Trump softens stance) दिया था। हालांकि, कनाडा के एक अधिकारी ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका के खिलाफ लगाए गए उनके जवाबी टैरिफ अब भी लागू रहेंगे। ये टैरिफ लगभग $30 बिलियन (यूएस$21 बिलियन) मूल्य के हैं और इनमें अमेरिकी संतरे का रस, मूंगफली का मक्खन, कॉफी, जूते, सौंदर्य प्रसाधन, मोटरसाइकिल और कुछ प्रकार के कागज उत्पाद शामिल हैं। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेशों पर हस्ताक्षर करने से पहले घोषणा की कि “अधिकांश टैरिफ 2 अप्रैल से प्रभावी होंगे। फिलहाल कुछ अस्थायी और छोटे टैरिफ लागू हैं।” हालांकि इस बीच ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि “वह ऑटोमोबाइल पर 25 प्रतिशत टैरिफ में छूट को एक और महीने तक बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहे हैं।” ट्रंप के आदेशों के अनुसार, 2020 में हुए (यूएसएमसीए) व्यापार समझौते के तहत मेक्सिको से होने वाले आयात को एक महीने के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ से मुक्त रखा जाएगा। जानकारी के मुताबिक कनाडा से ऑटो से संबंधित आयात, जो व्यापार समझौते के नियमों का पालन करते हैं। उन्हें एक महीने के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ से छूट मिलेगी। तो वहीं कनाडा से अमेरिकी किसानों द्वारा आयात किए जाने वाले पोटाश पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। बता दें कि यह वही दर है जिस पर ट्रंप कनाडाई ऊर्जा उत्पादों पर शुल्क लगाना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें:-भारत समेत इन देशों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का सख्ती की घोषणा,  2 अप्रैल से होगा एक्शन कनाडा से लगभग 62 प्रतिशत आयातों पर अब भी नए टैरिफ (Trump softens stance) लागू हो सकते हैं व्हाइट हाउस के अधिकारी के मुताबिक, कनाडा से लगभग 62 प्रतिशत आयातों पर अब भी नए टैरिफ (Trump softens stance) लागू हो सकते हैं। इसके पीछे की वजह यह कि  वे यूएसएमसीए समझौते के मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसी तरह, मेक्सिको से आयात होने वाले ऐसे उत्पादों पर भी कर लगाया जाएगा जो यूएसएमसीए के अनुरूप नहीं हैं, जैसा कि ट्रंप के आदेशों में कहा गया है। बता दें कि मंगलवार को ट्रंप ने अमेरिका के तीन प्रमुख व्यापारिक साझेदारों, क्रमश: कनाडा, मेक्सिको और चीन पर टैरिफ लगाकर एक नया व्यापारिक संघर्ष शुरू किया, जिसके जवाब में इन देशों ने भी प्रतिक्रिया दी। फिर क्या था इसके बाद इससे वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मच गई। खैर, इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने गुरुवार को कहा कि “राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ लागू करने और फिर उन्हें हटाने से हमारी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे अनिश्चितता और अराजकता बढ़ रही है।” इस दौरान उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “कनाडा इस स्थिति से नाखुश है और यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिकी जनता को इसका एहसास हो।” हालाँकि इस बीच ट्रूडो ने यह भी उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध जारी रहेगा।” खैर, इसका असर यह कि गुरुवार को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में बाजार गिरावट के साथ खुले। अमेरिकी निवेशक ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से घबराए हुए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump softens stance #DonaldTrump #TrumpNews #USPolitics #MexicoCanada #TradeRelations #TrumpUpdates #GlobalTrade #USA #PolicyChange #BreakingNews

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US-Canada tension

US-Canada tensions : अमेरिका की धमकी से डरे जस्टिन ट्रूडो मदद के लिए पहुंचे किंग चार्ल्स के पास,करेंगे ट्रंप की शिकायत

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) यूरोपीय संघ (ईयू) की बैठक में हिस्सा लेने के लिए इस समय ब्रिटेन यात्रा पर हैं। इस दौरान ट्रूडो सोमवार को ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) से भी मुलाकात करेंगे। कहा जा रहा है कि इस मुलाकात में जस्टिन ट्रूडो कनाडा और अमेरिका के बीच बढ़ते विवाद की जानकारी देते हुए किंग चार्ल्स से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की शिकायत भी कर सकते हैं। ब्रिटिश मीडिया दावा कर रही है कि इस बैठक में जस्टिन ट्रूडो, ट्रंप के उस धमकी का मुद्दा उठाएंगे, जिसमें ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका में मिलाने को कहा था। ब्रिटिश मीडिया के मुताबिक, प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) और किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) की मुलाकात सोमवार को होने वाली है। इस दौरान वह किंग से डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की शिकायत करते हुए उनकी उस धमकी पर चर्चा करेंगे, जिसमें ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने को कहा था। हालांकि, किंग चार्ल्स अभी तक ट्रंप की धमकियों पर चुप्प ही नजर आए हैं, ऐसे में कम ही उम्मीद है कि वो जस्टिन ट्रूडो का समर्थन करेंगे।  बैठक से पहले जस्टिन ट्रूडो ने भी दी जानकारी  किंग चार्ल्स तृतीय के साथ बैठक से पहले प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वह किंग के सामने कनाडाई लोगों से जुड़े महत्वपूर्ण मद्दों को उठाने वाले हैं। कनाडा के लोगों के लिए राष्ट्र की संप्रभुता और स्वतंत्रता से अधिक महत्वपूर्ण इस समय कुछ नहीं है। आज हमारे राष्ट्र को तोड़ने की कोशिश हो रही है, हमें धमकी दी जा रही। इसलिए हम कनाडा के राष्ट्र प्रमुख से इस संबंध में चर्चा करेंगे। हम अपने लिए सुरक्षा चाहते हैं।    इसे भी पढ़ें :– भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बनी बात, साल के अंत तक होगा अमल कनाडा के भी राष्ट्र प्रमुख हैं किंग चार्ल्स बता दें कि ब्रिटने के किंग चार्ल्स तृतीय (King Charles III) कनाडा के भी राष्ट्र प्रमुख हैं। क्योंकि कनाडा भी कई दूसरे देशों की तरह पूर्व उपनिवेशों के ब्रिटिश राष्ट्रमंडल का सदस्य है। कनाडा अभी इस राजशाही को स्वीकार्य करता है। वहां पर कभी भी इसका विरोध नहीं हुआ है। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा कनाडा को अमेरिकी में मिला लेने की लगातार धमकी देने के बाद भी किंग चार्ल्स ने चुप्पी साध रखी है। जिसका कुछ लोग विरोध भी कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या जस्टिन ट्रूडो से मुलाकात के बाद किंग चार्ल्स अमेरिका के विरोध में कोई बयान देते हैं या फिर वो पहले की तरह ही मौन धारण किए रहते हैं।    Latest News in Hindi Today Hindi news Justin Trudeau King Charles III #JustinTrudeau #KingCharlesIII #DonaldTrump #USCanadaTensions #TrudeauVsTrump #RoyalIntervention #Geopolitics #CanadaUK #PoliticalDrama #GlobalRelations

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