retirement planning in India

Private Sector Lacks Retirement Planning: इसलिए प्राइवेट सेक्टर के आधे से अधिक कर्मचारियों के पास नहीं है रिटायरमेंट की कोई प्लानिंग

भारत में निजी यानी प्राइवेट सेक्टर (Private Sector) में काम करने वालों की तादाद करोड़ों में है। ऐसे में एक बात तो तय है कि प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों को पेंशन की सुविधा तो नहीं ही मिलने वाली। प्राइवेट सेक्टर में तनख्वाह तो मोटी मिलती है लेकिन लोग अपने भविष्य हेतु बचत पर अधिक ध्यान नहीं देते, जो कि चिंता का सबब है। दरअसल, ग्रांट थॉर्नटन भारत की एक सर्वे में आई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लगभग आधे से अधिक वेतनभोगी कर्मचारी अपनी रिटायरमेंट के लिए बहुत ही कम बचत कर (Private Sector Lacks Retirement Planning) रहे हैं। बाकी बचे आधे सिर्फ अपनी तनख्वाह का 1% से 10% हिस्सा ही पेंशन फंड में निवेश कर रहे हैं। कहने की जरूरत नहीं, यह रुझान बताता है कि लोगों में बचत को लेकर सतर्कता तो है, लेकिन या तो उनकी आय सीमित है या फिर उनकी प्राथमिकताएं अलग हैं, जिससे रिटायरमेंट प्लानिंग को अधिक महत्व नहीं दिया जा रहा है। हालांकि अधिक आमदनी वाले लोग रिटायरमेंट से जुड़ी योजनाओं में थोड़ा अधिक योगदान करते हैं। लेकिन कुल मिलाकर ज़्यादातर लोगों की बचत अपेक्षाकृत बहुत ही कम है। यह दर्शाता है कि अधिकतर भारतीय अपने रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त धन नहीं जुटा पा रहे हैं।  सिर्फ 11 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्हें लगता है उनकी मौजूदा बचत इतनी पेंशन के लिए पर्याप्त है रिपोर्ट के मुताबिक, तकरीबन 55 प्रतिशत प्रतिभागी रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹1 लाख से ज्यादा पेंशन की उम्मीद रखते हैं। सिर्फ 11 प्रतिशत ऐसे हैं जिन्हें लगता है उनकी मौजूदा बचत इतनी पेंशन के लिए पर्याप्त है। यह अंतर इस बात की ओर साफ़ इशारा करता है कि भारत में रिटायरमेंट की योजना और उसकी तैयारी के बीच बहुत बड़ा गैप है और इसे जिसे बेहतर योजना के ज़रिए भरने की ज़रूरत (Private Sector Lacks Retirement Planning) है। गौरतलब हो कि मोटा-मोटी 83% कर्मचारी अपनी रिटायरमेंट जरूरतों के लिए ईपीएफ, ग्रैच्युटी और एनपीएस जैसे पारंपरिक स्कीम्स पर ही निर्भर हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है लोगों का झुकाव नए विकल्पों की ओर जरा भी नहीं है। इसका सबसे बड़ा कारण है आर्थिक जागरूकता की कमी हो सकती है।  इसे भी पढ़ें:- विदेश से सोना-चांदी लाना अब नहीं रहा आसान: क्या है सरकार के नए नियम? अधिकतर युवाओं को लगता है कि अभी वक़्त रिटायरमेंट की चिंता करने का (Private Sector Lacks Retirement Planning) नहीं है दरअसल, बहुत से ऐसे लोग हैं जो यह मानते हैं कि पीएफ (प्रोविडेंट फंड) या कंपनी की ओर से मिलने वाला ग्रैच्युटी फंड ही काफी (Private Sector Lacks Retirement Planning) होगा, जबकि वास्तविकता में स्वास्थ्य खर्च, बढ़ती महंगाई और लंबी उम्र के चलते ये रकम अक्सर काफी नहीं ही होती। कुछ लोग निवेश की प्रक्रिया को बड़ा जटिल मानते हैं। कुछ तो ऐसे भी हैं जिन्हें अपनी मौजूदा सैलरी से बचत निकालना ही पहाड़ लगता है। इस मामले में युवा जरा भी चिंतित नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिकतर युवाओं को लगता है कि अभी वक़्त रिटायरमेंट की चिंता करने का नहीं है। यह एक खतरनाक भ्रम है। फाइनेंसियल एक्सपर्टों का कहना है कि रिटायरमेंट की योजना जितनी जल्दी शुरू की जाए, उतना बेहतर होता है। 25-30 की उम्र में अगर सही दिशा में निवेश शुरू किया जाए तो 60 की उम्र तक अच्छा फंड तैयार किया जा सकता है। अच्छे फंड के लिए नेशनल पेंशन स्कीम, म्यूचुअल फंड एसआईपी और पब्लिक प्रोविडेंट फंड जैसे विकल्प प्रभावशाली हो सकते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news  Private Sector Lacks Retirement Planning #RetirementPlanning #PrivateSectorIndia #FinancialFreedom #EmployeeBenefits #FutureSecurity

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Mahila Samridhi Yojana

Mahila Samridhi Yojana: महिलाओं के सशक्तिकरण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम

दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा किए गए प्रमुख वादों में से एक दिल्ली महिला समृद्धि योजना (Mahila Samridhi Yojana) को आखिरकार शनिवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupta) ने हरी झंडी दे दी। इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को प्रतिमाह 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। योजना के शुभारंभ के साथ ही 8 मार्च से आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उनके जीवन स्तर को सुधारना है। महिलाओं की जरूरतों को समझने की पहल मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupta) ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने महिलाओं को नजदीक से काम करते और संघर्ष करते देखा है। समाज में महिलाओं से कई अपेक्षाएं होती हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को समझने वाले बहुत कम लोग होते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि संगठन में कार्य करने के दौरान उन्हें यह समझ आया कि महिलाओं की जिम्मेदारियां बहुत बड़ी होती हैं और उनके समर्थन के लिए एक मजबूत व्यवस्था की जरूरत है। राजनीति में महिलाओं की स्थिति पर विचार रेखा गुप्ता ने अपने भाषण में कहा कि भाजपा एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसने महिलाओं को न केवल समर्थन दिया बल्कि उन्हें नेतृत्व की भूमिका में भी स्थापित किया। उन्होंने कांग्रेस शासन का उदाहरण देते हुए कहा कि जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं, तब उनकी कैबिनेट में कोई अन्य महिला नेता नहीं थी। इसके विपरीत, भाजपा ने महिलाओं को सशक्त बनाने का काम किया और उन्हें उच्च पदों तक पहुंचाया। उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी में महिलाओं का अपमान तक किया गया, जबकि भाजपा ने महिलाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दिल्ली का बजट महिला नेतृत्व के हाथ में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupta) ने इस अवसर पर कहा कि देश में पहली बार केंद्रीय बजट को महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रस्तुत किया और अब दिल्ली का बजट भी एक महिला नेतृत्व के हाथों में होगा। यह दर्शाता है कि भाजपा केवल वादे ही नहीं करती, बल्कि उन्हें पूरा भी करती है। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए योजनाएं केवल कागजों पर नहीं बनाई जातीं, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर लागू भी किया जाता है। महिला सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि रेखा गुप्ता ने कहा कि इस योजना के जरिए दिल्ली की बहनों को न केवल आर्थिक सहायता मिलेगी, बल्कि उनकी सुरक्षा और सम्मान की भी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को केवल चुनावी मुद्दा बनाने की जगह, उनके वास्तविक उत्थान पर ध्यान दिया जाना चाहिए। महिला दिवस के अवसर पर यह योजना उनके लिए एक विशेष उपहार के समान है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 33% महिला आरक्षण देकर यह दिखा दिया कि देश की तरक्की तभी संभव है जब महिलाएं भी समान रूप से आगे बढ़ें। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए, दिल्ली सरकार भी महिलाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा और समृद्धि के लिए ठोस कदम उठाने वाली है। इसे भी पढ़ें:-  दुबई में सस्ता क्यों हैं सोना? विदेश से सोना लाने के क्या हैं नियम? दिल्ली महिला समृद्धि योजना: क्या है और कैसे करेगा लाभ? यह योजना मध्य प्रदेश की लाड़ली बहना योजना और महाराष्ट्र की लड़की बहिन योजना की तर्ज पर बनाई गई है। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये दिए जाएंगे, जिससे वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी कर सकेंगी। इस योजना की घोषणा पहले ही भाजपा के चुनावी घोषणापत्र में की गई थी और अब इसे लागू कर दिया गया है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया 8 मार्च से शुरू कर दी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इस योजना का लाभ उठा सकें। दिल्ली महिला समृद्धि योजना (Mahila Samridhi Yojana) महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह केवल वित्तीय सहायता देने वाली योजना नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में उनकी स्थिति मजबूत करने की एक प्रभावी रणनीति है। भाजपा (BJP) सरकार ने इस योजना के जरिए यह साबित कर दिया है कि वह महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में इस योजना से दिल्ली की लाखों महिलाओं को फायदा होगा और वे अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकेंगी। Latest News in Hindi Today Hindi news Mahila Samridhi Yojana #MahilaSamridhiYojana #WomenEmpowerment #FinancialFreedom #MSYScheme #SelfReliance #GovtSchemes #WomenWelfare #EconomicGrowth #Entrepreneurship #India

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Women money saving tips

Women money saving tips: इस कारण पैसों की बचत करने में पुरुषों की अपेक्षा महिलाएं अधिक होती हैं माहिर

पैसे बचाने के मामले में महिलाओं का कोई सानी (Women money saving tips) नहीं है। विशेषकर भारतीय महिलाओं के मामले में। उनके पास एमरजेंसी फंड होता ही है। किसी भी तरह की एमेर्जेंसी क्यों न हो। उनके पास मिल ही जाएंगे। पुरुषों के मामले में मामला उल्टा है। उनकी तनख्वाह महीने की पहली तारिख को होती है और 10 तारीख आते-आते उनका हाथ खाली हो जाता है। कहने का अर्थ यह कि सैलेरी मिलने के 15 दिन बाद उनका हाथ तंग हो जाता है। यह सच भी है। ऐसा नहीं है कि यह कोई हवा-हवाई बात है। कई रिसर्च और सर्वे में इस बात की पुष्टि भी की गई है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में बचत करने में ज्यादा आगे रहती हैं। खैर, हर घर और हर इंसान की यही शिकायत है कि कुछ दिन बात पैसे नहीं बचते। ऐसे में इस समस्या का एक ही समाधान है। और वह समाधान आपके अपने घर में ही है। विशेषकर विवाहित पुरुषों के मामले में। और वो समाधान है आपकी अपनी पत्नी। आपको करना कुछ नहीं है। बस आपको अपनी तनख्वाह अपनी पत्नी के हाथ में लेकर सौंपना है बस। एक बार अपनी सैलरी अपनी पत्नी को देकर देखिये, फिर कभी आपको पैसों की तंगी का सामना नहीं करना पड़ेगा। दरअसल, ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पैसों की बचत के मामले में महिलाएं, पुरुषों से हमेशा से ही आगे रहती हैं। कई रिसर्च और सर्वे में इस बात की पुष्टि भी की जा चुकी है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में बचत करने में सदैव आगे रहती हैं। यहां हम आपको उन कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी वजह से महिलाओं को पुरुषों की तुलना में पैसे बचाने में आगे रहती हैं।  दूर की सोचती हैं महिलाएं (Women money saving tips) महिलाएं एक कदम आगे बढ़कर दूर का सोचती हैं। इसके अलावा वो फाइनेंशियल प्लानिंग और बजट (Women money saving tips) बनाना पसंद करती हैं। एक बड़ी वजह यह भी जिस कारण उनमें बचत करने की आदत विकसित होती है। इसलिए जब वे कुछ दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करती हैं, तो पैसों की बचत करना आसान हो जाता है। एक रिसर्च के अनुसार, महिलाएं आर्थिक मामलों में मदद लेने से भी नहीं कतराती। इस कारण उन्हें बचत और निवेश के बारे में जानकारी मिलती रहती है।  पुरुषों की तुलना में अधिक अनुशासित होती हैं महिलाएँ  कहने की जरूरत नहीं कि पैसों की बचत (Women money saving tips) के लिए नियम और लिमिट तय करनी होती हैं। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि महिलाएँ पुरुषों की तुलना में अधिक अनुशासित होती हैं। इसलिए नियमों का पालन करना और ज़्यादा पैसे बचाना उनके लिए बड़ा आसान होता है। महलाओं का आर्थिक अनुशासन ही उन्हें पैसों की बचत करने में निपुण बनाता है।   इसे भी पढ़ें:- International Women’s Day :इतिहास, महत्व और 2025 की थीम अधिक जोखिम लेना नहीं करतीं पसंद  पुरुषों की तुलना में महिलाएं आमतौर पर आर्थिक बचत (Women money saving tips) से जुड़े मामलों में अधिक जोखिम लेना नहीं पसंद करतीं। कारण यही जो अकारण वे शेयर मार्केट, लॉटरी या अन्य जोखिम भरी स्कीमों के बजाय बचत खाता जैसे सुरक्षित निवेश के विकल्पों को चुनती हैं। जाहिर सी बात है जोखिम कम होने से नुकसान की गुंजाईश भी कम होती है।  पैसों का सदुपयोग करने में होती हैं निपुण  समय के साथ महिलाएं घर में हर किसी और हर चीज का बेहतर ख्याल रखकर बड़ी ज़िम्मेदार बन जाती हैं। जिस वजह से उनमें बचत करने की आदत पड़ जाती है। कारण यही जो हर घर में महिलाएं अपने परिवार के पैसों को मैनेज करने की जिम्मेदारी को बखूबी उठाती हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi Women money saving tips #moneytips #womensavings #financialfreedom #smartwomen #moneymatters #savemoney #financialindependence #wealthymindset #budgetingtips #moneygoals #financialwisdom #womenempowerment #investmenttips #financialgrowth #staytuned

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