Celebrate Gayatri Jayanti 2025 on June 6

गायत्री जयंती 2025: 6 जून को है देवी गायत्री का प्राकट्य दिवस, जानें तिथि, महत्व और पूजन विधि

गायत्री जयंती, वेदों की जननी देवी गायत्री के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दिन ऋषि विश्वामित्र ने सर्वप्रथम गायत्री मंत्र का उद्घोष किया था। यह मंत्र आध्यात्मिक जागृति और ज्ञान का प्रतीक है। गायत्री जयंती 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 6 जून को देर रात 2 बजकर 15 मिनट पर आरंभ होगी और 7 जून की सुबह 4 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि सनातन धर्म में उदया तिथि को प्राथमिकता दी जाती है, इसलिए गायत्री जयंती (Gayatri Jayanti) का पर्व 6 जून को ही मनाया जाएगा। शुभ योग गायत्री जयंती 2025 (Gayatri Jayanti) के अवसर पर वरीयान योग, रवि योग और भद्रावास का शुभ संयोग बन रहा है। भद्रावास का योग दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, इस दौरान भद्रा पाताल लोक में स्थित रहेगी, जिससे शुभ कार्यों में कोई विघ्न नहीं होगा। गायत्री जयंती का धार्मिक महत्व गायत्री माता को वेदों की जननी, ज्ञान, बुद्धि और आध्यात्मिक प्रकाश की देवी माना जाता है। गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra) का जप करने से मानसिक शुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन देवी गायत्री की पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का प्रवाह होता है। जानिए कैसे हुआ इस दिव्य मंत्र का प्राकट्य और क्या है इसके पीछे की मान्यता गायत्री मंत्र (Gayatri Jayanti) की उत्पत्ति से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहले इसका बोध स्वयं परमपिता ब्रह्मा को हुआ था। माता गायत्री की कृपा से ब्रह्माजी ने अपने चारों मुखों से इस मंत्र की व्याख्या की। ऐसा माना जाता है कि हिंदू धर्म के चारों वेद, जो इसकी मूल आधारशिला माने जाते हैं, इसी मंत्र की विस्तृत व्याख्या हैं। प्रारंभ में गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra) केवल देवताओं तक ही सीमित था, लेकिन जैसे भागीरथ ने गंगा को धरती पर लाकर मानवता को पवित्र किया, वैसे ही महान ऋषि विश्वामित्र ने इस दिव्य मंत्र को आम जनमानस तक पहुंचाकर आत्मा की शुद्धि का मार्ग प्रशस्त किया। यह भी माना जाता है कि मां गायत्री सूर्य मंडल में निवास करती हैं और जिन लोगों की कुंडली में सूर्य से जुड़ी कोई बाधा होती है, वे इस मंत्र का जाप करके लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसे भी पढ़ें:- क्यों देवी यमुना कहलाती हैं ‘कालिंदी’? जानिए भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी इस दिव्य कथा पूजन विधि और मंत्र गायत्री जयंती (Gayatri Jayanti) के दिन पूजा आरंभ करने के लिए सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठें। फिर स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर गंगाजल मिला हुआ जल प्रयोग करें। इसके पश्चात आचमन करके पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करें। फिर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें और उसी समय गायत्री मंत्र का जप करें: ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥ इसके बाद पंचोपचार विधि से मां गायत्री की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। पूजा के दौरान मां को फल, फूल और मिष्ठान अर्पित करें। अंत में गायत्री माता की आरती करके पूजन पूर्ण करें। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Gayatri Jayanti #GayatriJayanti2025 #GoddessGayatri #GayatriMantra #HinduFestivals #VedicTradition #SpiritualIndia #GayatriPuja #June6Festival #DivineMother #PujaVidhi

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