Himanta Biswa Sarma arms policy

Assam arms policy: इस वजह से असम सरकार आम जनता के हाथ में देने जा रही है हथियार

असम की सरकार अपने राज्य के बासिंदों को हथियार रखने की अनुमति देने जा (Assam arms policy) रही है। दरअसल, सरकार ने जनता के हाथ में हथियार देने की स्कीम को मंजूरी दे दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक असम कैबिनेट बांग्लादेश के पास दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले मूल निवासियों और स्थानीय नागरिकों को हथियार देगी। इस पर सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) का कहना है कि “इससे लोगों को साहस मिलेगा।” यही नहीं उन्होंने आगे कहा कि “इस स्कीम के तहत धुबरी, मोरीगांव, बारपेटा, नागांव और दक्षिण सलमारा-मनकचर, रूपाही, ढिंग और जानिया जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इन इलाकों में हमारे लोग माइनॉरिटी में हैं। इन जिलों में असम के लोगों को असुरक्षा का सामना करना पड़ता है, खासकर बांग्लादेश में हाल के घटनाक्रमों से, उन पर या तो सीमा पार से या अपने ही गांवों से हमलों का खतरा है। इस दौरान उन्होंने दावा करते हुए कहा कि ऐसे क्षेत्रों में असम के लोग 1979-85 में हुए असम आंदोलन के बाद से सुरक्षा के लिए लाइसेंस वाले हथियार की मांग कर रहे हैं।” बंगाली-मुस्लिम मूल के संदिग्ध अवैध विदेशियों के असम में अतिक्रमण की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि “पिछली सरकारों ने यदि उन्हें हथियारों के लाइसेंस दिए होते, तो कई लोगों को अपनी जमीनें बेचकर जगह नहीं छोड़नी पड़ती। हम बहुत सारी जमीनों पर कब्जा होने से बचा सकते थे।” सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग लंबे समय से हथियार की मांग कर (Assam arms policy) रहे हैं मांग- हिमंत बिस्वा सरमा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने कहा कि “इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग लंबे समय से हथियार की मांग कर (Assam arms policy) रहे हैं, उनकी इस मांग को रिव्यू करने के बाद राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया है।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “यह योजना पूरे राज्य में लागू होगी। इसलिए, अगर लोग इसके लिए आवेदन करते हैं तो हम गुवाहाटी शहर के हतीगांव इलाके में रहने वाले अपने लोगों को हथियार देने पर विचार कर सकते हैं।” सीएम सरमा ने स्पष्ट करते हुए कहा कि “बांग्लादेश में हालिया घटनाक्रम और संदिग्ध विदेशियों के खिलाफ राज्य सरकार के हालिया अभियान के चलते, ऐसे क्षेत्रों में स्वदेशी लोगों को लगता है कि उन पर या तो सीमा पार से या अपने ही गांवों से हमला हो सकता है। उन्होंने आगे कहा कि “सरकार इस स्कीम के लिए एलिजिबल लोगों को लाइसेंस देने में नरमी अपनाएगी। जो लोग असम के मूल निवासी हैं और राज्य के कमजोर और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले स्वदेशी समुदाय हैं, उन्हें इस स्कीम से साहस मिलेगा।”  इसे भी पढ़ें:- राहुल गांधी ने क्यों ट्वीट किया ‘Not Found Suitable’ और BJP पर क्या लगाया आरोप?  भारतीय आर्म्स एक्ट हथियार (Assam arms policy) को दो प्रकारों में बांटता है खैर, बात करें 1959 के भारतीय आर्म्स एक्ट की तो आर्म्स एक्ट हथियार (Assam arms policy) को दो प्रकारों में बांटता है। निषिद्ध बोर (प्रोहिबिटेड बोर) और गैर-निषिद्ध बोर (नॉन-प्रोहिबिटेड बोर ) पीबी हथियारों को आमतौर पर सेना, राज्य पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों जैसी सरकारी एजेंसियां इस्तेमाल करती हैं। एनपीबी व्यक्ति के लिए होता है। नॉन-प्रोहिबिटेड बोर उन लोगों को दिया जाता जिन्हें अपनी जानमाल का खतरा होता है। प्रोहिबिटेड बोर आर्म्स के लिए लाइसेंस गृह मंत्रालय जारी करता है तो वहीं नॉन-प्रोहिबिटेड बोर आर्म्स के लिए लाइसेंस डीएम और राज्य सरकार जारी करती हैं। यही नहीं, इन हथियारों को रखने के लिए कुछ शर्तें भी हैं। शर्त यह कि इसके लिए व्यक्ति की उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए। हिंसा से जुड़े किसी भी अपराध का दोषी न ठहराया गया हो। इसके अलावा शांति बनाए रखने हेतु बॉन्ड भरने का आदेश न दिया गया हो और शारीरिक और मानसिक रूप से फिट हो। इन बेसिक शर्तों के आधार पर ही लइसेंस आवंटित किया जाता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news #AssamArmsPolicy #AssamNews #SelfDefenseIndia #WeaponsLicense #HimantaBiswaSarma #IndiaNews #CitizensWithGuns #ArmsPolicyChange

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