hindi marathi controversy

हिंदी-मराठी विवाद से गरमाई देश की सियासत, ठाकरे बंधुओं पर उत्तर भारतीय नेताओं का हमला, कांग्रेस ने बनाई विवाद से दूरी 

महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी भाषा (Marathi Language Controversy) को लेकर एक बार फिर से राजनीतिक पारा चढ़ गया है। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) की मराठी भाषा पर हालिया सक्रियता और बयानों ने जहां इस विवाद को राज्य में राजनीतिक हवा दी, वहीं हिंदी भाषी राज्यों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाओं ने इस मराठी भाषा विवाद (Marathi Language Controversy) को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचा दिया। जिसकी वजह से राजनीतिक दलों में टकराव बढ़ता जा रहा है, जबकि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना की सहयोगी कांग्रेस ने इस मुद्दे से दूरी बना रखी है।  बता दें कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा (Marathi Language Controversy) न बोलने वाले हिंदीभाषियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और उनके खिलाफ बोले जा रहे बयानों पर हिंदी पट्टी के कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey), बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव और यूपी के आजमगढ़ से भाजपा के पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने ठाकरे बंधुओं को खुली चुनौती दी है। ‘अगर उनमें हिम्मत है तो वे उर्दू, तमिल और तेलुगु भाषियों पर भी वही रवैया अपनाकर दिखाएं, जैसा वे हिंदीभाषियों के साथ कर रहे हैं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने तो राज (Raj Thackeray) और उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) पर सीधा हमला करते हुए यहां तक कह दिया कि, ”अगर उनमें हिम्मत है तो वे उर्दू, तमिल और तेलुगु भाषियों पर भी वही रवैया अपनाकर दिखाएं, जैसा वे हिंदीभाषियों के साथ कर रहे हैं। अपने घर में शेर बनना उनके लिए आसान है। आओ बिहार और उत्तर प्रदेश, हम भी देखेंगे तुम्हारी हेकड़ी। यह गुंडागर्दी अब नहीं चलेगी।” इस दौरान दुबे ने मराठी भाषा और महाराष्ट्र के स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करते हुए कहा कि हम मराठी संस्कृति का आदर करते हैं, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए जो भाषा को हथियार बनाया जा रहा है, वह निंदनीय है। पप्पू यादव और निरहुआ ने राज ठाकरे को ललकार  सांसद पप्पू यादव ने भी राज ठाकरे (Raj Thackeray) पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे हिंदीभाषियों के खिलाफ खुलेआम हिंसा करवा रहे हैं। पप्पू यादव ने चेतावनी दी, “अगर उन्होंने यह गुंडई बंद नहीं की, तो मैं खुद मुंबई आकर उनको उनकी ही भाषा में जवाब दूंगा।“ पप्पू यादव का आरोप है कि राज ठाकरे भाजपा के इशारे पर यह सब कर रहे हैं ताकि इसी साल महाराष्ट्र में होने वाली BMC चुनाव में ध्रुवीकरण किया जा सके। भाजपा के पूर्व सांसद और भोजपुरी अभिनेता दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने भी ठाकरे बंधुओं को ललकारते हुए कहा, “मैं खुद मुंबई में रहता हूं। अगर हिम्मत है तो मुझे निकालकर दिखाओ।” उनका यह बयान उत्तर भारतीयों की ओर से एक मजबूत प्रतिरोध के रूप में देखा जा रहा है। उद्धव ठाकरे ने भी किया पलटवार हिन्दी भाषी राज्य के इन नेताओं के बयानों पर जब पत्रकारों ने उद्धव ठाकरे से प्रतिक्रिया मांगी, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा, “दुबे, बिबे जैसे लोग केवल विवाद खड़ा करना जानते हैं। महाराष्ट्र की जनता सब जानती है। इनकी बातों को ज्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।” उद्धव ने इस दौरान यह भी कहा कि, उनका विरोध हिंदी भाषा से नहीं है, बल्कि हिंदी की जबरन थोपे जाने वाली अनिवार्यता से है। उन्होंने कहा, “हम खुद हिंदी में बात कर रहे हैं, हमारे सांसद भी हिंदी बोलते हैं। यह विवाद जबरन खड़ा किया गया है।” इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कांग्रेस की चुप्पी और संतुलित रुख इस पूरे विवाद पर जहां महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक में हलचल मची हुई और पक्ष-विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर हैं। वहीं, कांग्रेस ने खुद को इस मुद्दे से अलग रखने का निर्णय लिया है। मुंबई में कांग्रेस के उत्तर भारतीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अवनीश सिंह (Nishikant Dubey) ने कहा कि मुंबई में वर्षों से उत्तर भारतीय समाज शांतिपूर्वक रह रहा है और यहां की संस्कृति में घुल-मिल चुका है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि राजनीतिक फायदे के लिए सामाजिक ढांचे को नुकसान न पहुंचाएं। उन्होंने यह भी कहा कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह पर भाजपा की सरकार है, तो भाषा के नाम पर हो रही उकसाने वाली राजनीति पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी उन्हीं की बनती है। सरकार को चाहिए कि वह उन नेताओं पर कार्रवाई करे जो समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Nishikant Dubey #hindi #marathi #controversy #thackeray #uddhavthackeray #rajthackeray #northindianleaders #congress #politics #india

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Amit Shah

हमारी भाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान का प्रतीक है: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर कहा है कि अब समय आ गया है जब भारत को अपनी भाषाई विरासत पर गर्व करते हुए, देसी भाषाओं के बल पर वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ना चाहिए। गुरुवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए अमित शाह ने साफ किया कि “हमारी भाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान का प्रतीक है।” अंग्रेज़ी का मोह छोड़, देसी भाषाओं का अभिमान ज़रूरी अमित शाह (Amit Shah) ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “अब वह समय दूर नहीं जब अंग्रेज़ी बोलने वालों को शर्म महसूस होगी। हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं जहां देसी भाषाओं को सम्मान और गर्व का प्रतीक माना जाएगा।” उन्होंने कहा कि केवल दृढ़ संकल्प वाले लोग ही सामाजिक बदलाव ला सकते हैं और भारतीय भाषाओं को अपनाकर हम एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में अग्रसर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “भाषाएं हमारी संस्कृति का रत्न हैं और इन रत्नों के बिना हम सच्चे भारतीय नहीं बन सकते।” विदेशी भाषाएं भारत की आत्मा को नहीं समझ सकतीं गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने अपने भाषण में इस बात पर बल दिया कि किसी भी विदेशी भाषा के जरिए भारत को पूरी तरह से समझा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “देश, संस्कृति, इतिहास और धर्म को जानने और समझने के लिए भारतीय भाषाएं (Mother tongue) ही पर्याप्त हैं। हम अधूरी विदेशी भाषाओं के सहारे संपूर्ण भारत की कल्पना नहीं कर सकते।” उन्होंने स्वीकार किया कि यह बदलाव आसान नहीं होगा, क्योंकि दशकों से देश में अंग्रेज़ी को श्रेष्ठता का प्रतीक माना जाता रहा है, लेकिन उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि भारतीय समाज इस बदलाव में सफल होगा। पंच प्रण से जुड़े भाषाई गर्व का संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा प्रस्तुत पांच प्रतिज्ञा का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह अब 130 करोड़ भारतीयों का संकल्प बन चुका है। ये पंच प्रण हैं: उन्होंने कहा कि इन प्रतिज्ञाओं को पूरा करने की दिशा में भाषाओं की भूमिका अहम होगी। “2047 तक जब भारत आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब तक हम शिखर पर होंगे – और इस यात्रा की बुनियाद भारतीय भाषाएं ही होंगी।” प्रशासनिक प्रशिक्षण में भारतीय भाषाओं का समावेश ज़रूरी गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने यह भी ज़ोर दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण में अब बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “हमें अपनी सिविल सेवाओं को भारतीय भाषाओं में कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करना होगा। इससे न केवल प्रशासन लोगों के और करीब आएगा, बल्कि नीति निर्माण और क्रियान्वयन में भी स्थानीय सांस्कृतिक और भाषाई जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।” इसे भी पढ़ें:- Rahul Gandhi’s Entry Into Politics: जन्मदिन विशेष: इस तरह हुई थी राहुल गाँधी की सियासत में इंट्री नई शिक्षा नीति से मिला भाषाओं को समर्थन गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) का यह वक्तव्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की उस भावना के अनुरूप है, जिसमें मातृभाषा में शिक्षा देने पर बल दिया गया है। नीति में कहा गया है कि कक्षा 5 तक और यदि संभव हो तो कक्षा 8 तक बच्चों को मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा दी जाए। इससे न केवल बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ती है, बल्कि वे अपनी जड़ों से भी जुड़े रहते हैं। भारत जैसे बहुभाषी देश के लिए भाषाई गौरव केवल संस्कृति की बात नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय एकता की नींव भी है। गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) का यह आह्वान कि भारतीय भाषाएं ही हमारी असली शक्ति हैं, एक महत्वपूर्ण संदेश है — खासकर उस समय जब वैश्वीकरण के दबाव में देश अपनी भाषाई विविधता और गहराई को खोता जा रहा है। अब यह आवश्यक हो गया है कि नीतियों, प्रशासन और शिक्षा में भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जाए ताकि भारत न केवल आर्थिक और तकनीकी रूप से, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी आत्मनिर्भर बन सके। Latest News in Hindi Today Hindi  #mothertongue #AmitShah #PMModi #Hindi #HindiLanguage

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