Yogini Ekadashi 2025

Yogini Ekadashi 2025: योगिनी एकादशी पर विशेष पूजा से दूर होगी सभी परेशानी

हिंदू धर्म में वर्षभर में 24 एकादशी तिथियां आती हैं, जिनमें से प्रत्येक का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व होता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से पापों से मुक्ति दिलाने वाला और पुण्य प्रदान करने वाला माना गया है। योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) का पालन करने से रोग, दोष और दरिद्रता का नाश होता है तथा मनुष्य मोक्ष की ओर अग्रसर होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा व नियमपूर्वक करने से व्रती को 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। योगिनी एकादशी 2025 तिथि और समय (Yogini Ekadashi 2025 Date & Time) हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहा जाता है। यह तिथि हर साल अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। वर्ष 2025 में योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) व्रत 21 जून (शनिवार) को रखा जाएगा, क्योंकि तीज-त्योहारों का निर्धारण उदया तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) के आधार पर होता है। तिथि और समय योगिनी एकादशी का महत्व (Significance of Yogini Ekadashi) योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यकारी और प्रभावशाली व्रतों में से एक माना गया है। यह व्रत आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2025 में यह व्रत 21 जून को मनाया जाएगा। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है, और योगिनी एकादशी विशेष रूप से आत्मशुद्धि और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाली मानी जाती है। पद्म पुराण और भविष्य पुराण जैसे ग्रंथों में योगिनी एकादशी का महत्व विस्तार से बताया गया है। पद्म पुराण के अनुसार, योगिनी एकादशी व्रत करने से मनुष्य को 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत व्यक्ति के जीवन के सभी दोषों और पापों को दूर करता है, और उसे अध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है। इस व्रत को लेकर ऐसी मान्यता भी है कि यह स्वर्ग प्राप्ति के साथ-साथ व्यक्ति को धरती पर भी सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करता है। इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय योगिनी एकादशी व्रत और पूजा विधि (Yogini Ekadashi Vrat Puja Vidhi) योगिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और श्री हरि के समक्ष व्रत का संकल्प लें। घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें और गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। एक पवित्र चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। उन्हें हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाएं और पीले फूल, फल, पंचामृत, पंजीरी, मिठाई तथा तुलसी दल अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं, धूप दिखाएं और पूरी श्रद्धा से पूजा करें। इस दिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें। योगिनी एकादशी व्रत की कथा का पाठ करें या उसे सुनें। अंत में भावपूर्ण आरती करें। रात्रि में भजन-कीर्तन करें। योगिनी एकादशी व्रत  (Yogini Ekadashi vrat) रखने वाले व्यक्ति को पूरे दिन संयम और श्रद्धा के साथ उपवास करना चाहिए। यदि स्वास्थ्य कारणों से निर्जल व्रत संभव न हो, तो फलाहार या दूध-फल का सेवन किया जा सकता है। व्रत के दौरान तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा और नकारात्मक व्यवहार जैसे क्रोध या विवाद से बचना चाहिए। इस दिन मन, वाणी और कर्म से शुद्धता बनाए रखना आवश्यक है। भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की पूजा, मंत्र जाप और कथा श्रवण करने से व्रत का पुण्य बढ़ता है। अगले दिन द्वादशी को प्रातः स्नान करके पूजा करें और भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का प्रसाद ग्रहण कर व्रत का विधिवत पारण करें। व्रत का पारण ब्राह्मण या जरूरतमंदों को दान देकर भी किया जा सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Lord Vishnu #YoginiEkadashi2025 #EkadashiVrat #HinduFestivals2025 #SpiritualRituals #EkadashiPuja

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Masik Karthigai

मासिक कार्तिगाई 2025: 26 मई को मनाएं यह पावन पर्व, जानें तिथि, महत्व और पूजा विधि

मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai) हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह में कृतिका नक्षत्र के दिन मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व विशेष रूप से दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में, भगवान शिव (Lord Shiva) और भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) की आराधना के लिए प्रसिद्ध है। इस दिन दीप जलाकर अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक मनाया जाता है। ज्येष्ठ माह में मासिक कार्तिगाई की तिथि वैदिक पंचांग के अनुसार 26 मई को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि दोपहर 12:11 बजे तक रहेगी, जिसके बाद अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। इसी दिन सुबह 8:23 बजे से कृतिका नक्षत्र का योग भी आरंभ हो जाएगा। चूंकि मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai) व्रत कृतिका नक्षत्र के शुभ संयोग में मनाया जाता है, इसलिए इस वर्ष यह पावन पर्व 26 मई को ही विधिपूर्वक मनाया जाएगा। शुभ योग इस बार मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai) पर विशेष और दुर्लभ शोभन योग का संयोग बन रहा है। यह शुभ योग सुबह 7 बजकर 2 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इसके अलावा, इसी दिन दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से शिववास योग भी प्रारंभ हो जाएगा। मान्यता है कि शिववास योग के दौरान भगवान शिव )Lord Shiva) कैलाश पर्वत पर माता गौरी (Mata Gauri) के साथ विराजमान रहते हैं। ऐसे में इस योग में शिव की पूजा और आराधना करने से भक्तों को इच्छित फल की प्राप्ति होती है। मासिक कार्तिगाई का धार्मिक महत्व मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai) पर्व का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन भगवान शिव (Lord Shiva) और भगवान मुरुगन (Lord Murugan)  की पूजा के लिए समर्पित होता है। कहा जाता है कि इस दिन दीप जलाने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और अज्ञानता का नाश होता है। यह पर्व आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मासिक कार्तिगाई कथा  पौराणिक मान्यता के अनुसार, मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai) का दिन भगवान मुरुगन (Lord Murugan)  के जन्म से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि भगवान शिव (Lord Shiva) की तीसरी आंख से इसी दिन भगवान मुरुगन का प्राकट्य हुआ था। वे छह विभिन्न रूपों में प्रकट हुए और छह अप्सराओं ने उनका पालन-पोषण किया। बाद में देवी पार्वती ने इन छह स्वरूपों को एकाकार कर एक बालक का रूप प्रदान किया। इसी कारण भगवान मुरुगन को ‘षण्मुख’ या ‘शनमुघम’ कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है—छह मुखों वाले देवता। इसे भी पढ़ें:- क्यों देवी यमुना कहलाती हैं ‘कालिंदी’? जानिए भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी इस दिव्य कथा पूजन विधि मासिक कार्तिगाई (Masik Karthigai)  के दिन भगवान शिव और भगवान मुरुगन (Lord Murugan)  की पूजा विधि इस प्रकार है: प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर पूजा स्थल पर उत्तर-पूर्व दिशा में भगवान शिव और भगवान मुरुगन की तस्वीर स्थापित करें। भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र और धूप-दीप अर्पित करें। भगवान मुरुगन को विशेष रूप से फूल, फल और पंचामृत चढ़ाएं। इसके पश्चात दोनों देवी-देवताओं के मंत्रों का जाप करें और श्रद्धा से उनकी आरती करें। आरती के बाद प्रसाद सभी में बांटें। इस दिन घर में धूप और कपूर जलाने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। साथ ही, दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Masik Karthigai #MasikKarthigai2025 #KarthigaiFestival #TamilFestival #HinduFestivals2025 #KarthigaiDeepam #SpiritualCelebration #TamilTradition #PoojaVidhi #KarthigaiSignificance #26May2025Festival

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