Garuda Purana Warning

गरुड़ पुराण की चेतावनी: मृतक की इन वस्तुओं का न करें उपयोग, वरना जीवन भर भुगतना पड़ सकता है पितृ दोष

हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद की प्रक्रिया को अत्यंत पवित्र और संवेदनशील माना गया है। अंतिम संस्कार से लेकर श्राद्धकर्म तक की सभी विधियाँ न केवल धार्मिक, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इसी विषय पर विस्तार से जानकारी मिलती है गरुड़ पुराण (Garud Puran) में, जो कि हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। यह पुराण न केवल मृत्यु के बाद की यात्रा, नरक-स्वर्ग के वर्णन और कर्मफल की व्याख्या करता है, बल्कि यह भी बताता है कि मृत व्यक्ति की किन वस्तुओं का उपयोग नहीं करना चाहिए। गरुड़ पुराण (Garud Puran) में स्पष्ट कहा गया है कि यदि किसी मृत व्यक्ति की कुछ विशेष वस्तुओं को जीवित लोग उपयोग में लाते हैं, तो उन्हें पितृ दोष का सामना करना पड़ सकता है। हिंदू धर्मग्रंथ गरुड़ पुराण में बताया गया है कि मृत्यु के बाद किन वस्तुओं का उपयोग वर्जित है। इन नियमों का पालन न करने पर घर में अशांति, आर्थिक तंगी और रोगों का डेरा बन सकता है। आइए विस्तार से जानें कि वो कौन-सी वस्तुएं हैं जिन्हें भूलकर भी मृत व्यक्ति के बाद इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 1. मृतक के वस्त्र (कपड़े) धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत व्यक्ति के कपड़ों में उसकी ऊर्जा शेष रहती है, इसलिए इन्हें पहनना अशुभ माना जाता है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट रूप से ऐसे वस्त्रों के प्रयोग से बचने की सलाह दी गई है। ऐसे में सबसे उचित यह होता है कि इन कपड़ों को किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को दान कर दिया जाए, जिससे न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है बल्कि मृतात्मा को भी शांति मिलती है। 2. मृतक की चप्पल और जूते गरुड़ पुराण (Garud Puran) के अनुसार, मृत व्यक्ति के जूतों का इस्तेमाल करने से जीवन में पितृ दोष उत्पन्न हो सकता है। यह माना जाता है कि ऐसी वस्तुएं मृतात्मा से जुड़ी ऊर्जा को संजोए रखती हैं, और उनका उपयोग करने से व्यक्ति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए मृतक के जूते या चप्पलों को पहनने से पूरी तरह बचना चाहिए। 3. बिछावन और तकिए मृत व्यक्ति का सोने का स्थान, जैसे उसका बिस्तर या तकिया, उसकी अंतिम ऊर्जा और इच्छाओं को अपने भीतर समेट लेता है। ऐसे स्थान पर सोना मानसिक अस्थिरता, भय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए इन वस्तुओं का त्याग करना ही उचित और सुरक्षित माना जाता है। 4. मृत व्यक्ति की तस्वीरों का अत्यधिक प्रदर्शन कई लोग अपने घरों में मृतक की तस्वीर को बड़े फ्रेम में लगाकर पूजा स्थल या बेडरूम में रखते हैं। गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत व्यक्ति की तस्वीर को पूजा घर में रखना उचित नहीं होता क्योंकि इससे पितरों की आत्मा मोह में फंस सकती है और मुक्ति में बाधा आती है। उनकी तस्वीर को एक शांत स्थान पर सम्मानपूर्वक रखें, लेकिन उसकी पूजा न करें। 5. मृतक की अंगूठी या आभूषण यदि किसी मृत व्यक्ति ने अपने जीवन में कोई अंगूठी, हार या अन्य आभूषण धारण किए थे, तो उनका उपयोग बिना शुद्धिकरण के नहीं किया जाना चाहिए। चश्मा, घड़ी, अंगूठी जैसी धातु की वस्तुएं ऊर्जा को संचित करने की क्षमता रखती हैं। यदि ये वस्तुएं मृतक द्वारा पहनी गई हों, तो उनमें उसकी अधूरी इच्छाओं और जीवन ऊर्जा का प्रभाव बना रह सकता है। इन्हें पहनने से व्यक्ति के जीवन में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं, साथ ही मानसिक भय और प्रगति में रुकावट का अनुभव हो सकता है। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? पितृ दोष के लक्षण Latest News in Hindi Today Hindi news Garud Puran #garudapurana #pitrudosha #hinduism #afterdeathrituals #spiritualwarnings #hindureligion #ancestralcurse #ritualsinindia #dharma #hindubeliefs

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street namaz controversy

street namaz controversy: हिंदुओं से सीखें धार्मिक अनुशासन, सड़क पर नमाज न पढ़ने को लेकर योगी आदित्यनाथ ने कही यह बड़ी बात

इन दिनों देश में हिन्दू-मुस्लिम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। आए दिन नेतागण किसी न किसी बहाने हिंदू-मुस्लिम के मुद्दों को भुनाने का एक भी मौका नहीं गंवाना चाहते। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क पर होने वाली नमाज (street namaz controversy) को लेकर साफ़ तौर पर कहा है कि ये नहीं हो सकती है। दरअसल, समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “सड़कें चलने के लिए होती हैं और जो लोग ऐसा कह रहे हैं उन्हें हिंदुओं से अनुशासन सीखना चाहिए। प्रयागराज में 66 करोड़ लोग आए। कहीं कोई लूटपाट नहीं हुई, कहीं कोई आगजनी नहीं हुई, कहीं कोई छेड़छाड़ नहीं हुई, कहीं कोई तोड़फोड़ नहीं हुई, कहीं कोई अपहरण नहीं हुआ, यही अनुशासन है, यही धार्मिक अनुशासन है। वे श्रद्धा के साथ आए, महास्नान में भाग लिया और फिर अपने गंतव्य की ओर बढ़ गए। त्योहार और उत्सव या ऐसे कोई भी आयोजन उदंडता का माध्यम नहीं बनने चाहिए। अगर आप सुविधा चाहते हैं, तो उस अनुशासन का पालन करना भी सीखें।”   नमाज पढ़ने के नाम पर क्या घंटों सड़क जाम (street namaz controversy) करेंगे? इस पर उन्होंने आगे कहा कि “ईद में कौन सा प्रदर्शन करेंगे? नमाज पढ़ने के नाम पर क्या घंटों सड़क जाम (street namaz controversy) करेंगे? नमाज पढ़ने के लिए ईदगाह और मस्जिद हैं, न कि सड़क। इसके लिए ठीक तो बोला जा रहा है। और वैसे भी मैं किसी एक वर्ग विशेष के लिए सभी को असुविधा में नहीं डाल सकता। मुझे पूरे प्रदेश के लोगों को हर जरूरी सुविधा उपलब्ध करानी है।” इस बीच सड़क पर नमाज की तुलना कांवड़ यात्रा से करने पर सीएम ने कहा कि “कांवड़ यात्रा से तुलना की जा रही है, कावंड़ यात्रा हरिद्वार से लेकर गाजियाबाद और एनसीआर के क्षेत्रों तक जाती है। वो सड़क पर ही चलेगी। क्या हमने कभी परंपरागत मुस्लिम जुलूस को रोक, कभी भी नहीं रोक। मुहर्रम के जुलूस निकलते हैं। हां, ये जरूर कहा है कि ताजिया का साइज थोड़ा छोटा रखें क्योंकि तुम्हारी सुरक्षा के लिए है। रास्ते में हाईटेंशन तार होंगे, जोकि आपके लिए बदले नहीं जाएंगे। हाईटेंशन की चपेट में आने से मर जाओगे। यही होता है, कांवड़ यात्रा में भी यही बोला जाता है कि डीजे का साइज छोटा करो, जो ऐसा नहीं करता है तो सख्ती की जाती है। कानून सभी के लिए बराबर लागू होता है। फिर कैसे तुलना की जा रही है।”  इसे भी पढ़ें:- वक्फ संशोधन बिल 2 अप्रैल को लोकसभा में हो सकता है पेश, राज्यसभा में मिलेगी चुनौती  सुधार समय की मांग (street namaz controversy) है वक्फ (संशोधन) विधेयक पर पूछे गए सवाल का प्रश्न का उत्तर देते हुए सीएम योगी ने कहा कि “सुधार समय की मांग (street namaz controversy) है। हर अच्छे काम का विरोध होता है।इसी तरह वक्फ संशोधन विधेयक पर भी हंगामा हो रहा है, जो लोग इस मुद्दे पर हंगामा कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूँ, क्या वक्फ बोर्ड ने कोई कल्याण किया है? सब कुछ छोड़िए, क्या वक्फ ने मुसलमानों का भी कोई कल्याण किया है? वक्फ निजी स्वार्थ का केंद्र बन गया है। यह किसी भी सरकारी संपत्ति पर जबरन कब्जा करने का माध्यम बन गया है और सुधार समय की मांग है और हर सुधार का विरोध किया जाता है।” Latest News in Hindi Today Hindi news street namaz controversy YogiAdityanath #ReligiousDiscipline #Namaz #Hinduism #UttarPradesh #IndianPolitics #ReligiousFreedom

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