Surya Dev remedies

रविवार के 5 अचूक उपाय: सूर्य देव को प्रसन्न कर पाएं धन, सुख और सफलता

सप्ताह का पहला दिन सूर्य भगवान को समर्पित होता है। हिंदू धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन को किसी विशेष देवता को समर्पित किया गया है। रविवार का दिन भगवान सूर्य नारायण के पूजन के लिए विशेष माना जाता है। उन्हें जीवन, प्रकाश, ऊर्जा और अच्छे स्वास्थ्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि यदि सूर्य देव प्रसन्न हो जाएं तो व्यक्ति के जीवन में धन, समृद्धि, प्रतिष्ठा और आत्मबल का संचार होता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, पिता, उच्च पद और सम्मान का कारक बताया गया है। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उन्हें आत्मविश्वास की कमी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, सरकारी क्षेत्र में बाधाएं और धन की कमी का सामना करना पड़ता है। अगर आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं या तरक्की की राह तलाश रहे हैं, तो रविवार को करें ये 5 आसान उपाय और पाएं सूर्य देव की विशेष कृपा। अगर आप चाहते हैं कि आपके जीवन में सूर्य देव की कृपा बरसे और आप आर्थिक रूप से संपन्न बनें, तो रविवार के दिन ये 5 आसान और प्रभावी उपाय जरूर करें। 1. तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करें रविवार को सूर्य नमस्कार करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य नमस्कार से सूर्य देव (Lord Surya) प्रसन्न होते हैं और साधक को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही, यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बढ़ाता है और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करता है। 2. जलाएं दीपक: रविवार के दिन घर के मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है। यह उपाय न केवल सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने में सहायक होता है, बल्कि इससे मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। इस उपाय से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। 3. रविवार को करें दान, दूर होगी दरिद्रता हिंदू धर्म में दान का विशेष महत्व है और रविवार का दिन भी दान-पुण्य के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन गुड़, चावल, तांबे के बर्तन या लाल रंग के वस्त्र का दान करने से सूर्य देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ये उपाय न केवल आर्थिक संकट को दूर करते हैं, बल्कि सौभाग्य और समृद्धि भी बढ़ाते हैं। 4. सूर्य मंत्र का जाप और आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करें रविवार के दिन सूर्य देव (Lord Surya) के मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। खासकर “ॐ आदित्याय नमः” और “ॐ सूर्याय नमः” मंत्रों का 108 बार जाप करें। इसके अलावा, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से शत्रु बाधा दूर होती है और आय के स्रोत खुलते हैं। यह स्तोत्र रामायण का अंश है, जिसे भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त करने से पहले पढ़ा था। इसे भी पढ़ें:- पति की लंबी आयु के लिए रखें ये शुभ व्रत और करें ये उपाय 5. पहनें शुभ रंग के वस्त्र: रविवार को सूर्य देव (Lord Surya) की कृपा पाने के लिए लाल रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि लाल रंग सूर्य देव का प्रिय रंग होता है, इसलिए इस दिन यह रंग पहनने से उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। सुबह स्नान करके लाल वस्त्र धारण करें और इसी रंग का वस्त्र किसी जरूरतमंद को दान करें। इससे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। क्यों जरूरी है सूर्य की कृपा? सूर्य ग्रह अगर आपकी कुंडली में मजबूत स्थिति में होता है तो आप अपने जीवन में समाज में मान-सम्मान, सरकारी नौकरी, प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता और आर्थिक रूप से उन्नति पा सकते हैं। वहीं अगर यह ग्रह अशुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति को बार-बार धन हानि, अपमान और स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Lord Surya #suryaDev #sundayRemedies #hinduRituals #spiritualTips #wealthAttraction #successRituals #vedicUpay #sunWorship

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Dos and Don’ts of Shaligram Puja

शालिग्राम पूजा के नियम: भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए जानें क्या करें और क्या न करें

हिंदू धर्म में शालिग्राम शिला को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया है। शालिग्राम की पूजा से घर में सुख-शांति, धन-समृद्धि और सौभाग्य बना रहता है। यह शिला मुख्यतः नेपाल के गंडकी नदी से प्राप्त होती है और इसे अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। खासतौर पर वैष्णव संप्रदाय में शालिग्राम की उपासना अत्यधिक महत्व रखती है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि जिस घर में शालिग्राम की विधिवत पूजा की जाती है, वहां दुर्भाग्य, रोग और कलह प्रवेश नहीं करते। हालांकि, शालिग्राम जी की पूजा करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है, अन्यथा पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। पुराणों के अनुसार, शालिग्राम भगवान (Lord Shaligram) के कुल 33 स्वरूपों का वर्णन मिलता है, जिनमें से 24 शालिग्राम श्रीहरि विष्णु के 24 अवतारों के प्रतीक माने जाते हैं। उदाहरण स्वरूप, गोलाकार शालिग्राम को गोपाल स्वरूप का प्रतीक माना जाता है, वहीं मछली की आकृति वाला लंबा शालिग्राम मत्स्य अवतार का संकेत देता है। इसी तरह, कछुए जैसे आकार वाला शालिग्राम भगवान विष्णु के कूर्म या कच्छप अवतार का प्रतीक होता है। ऐसा कहा जाता है कि जहां शालिग्राम जी (Shaligram Ji)की पूजा होती है, वहां स्वयं भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है। विष्णु पुराण में उल्लेख है कि जिस घर में शालिग्राम का वास होता है, वह स्थान तीर्थ के समान पुण्यदायी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, शालिग्राम को अर्पित पंचामृत को प्रसाद स्वरूप ग्रहण करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है और वह मोक्ष की ओर अग्रसर होता है। शालिग्राम जी की पहचान शालिग्राम (Shaligram) एक काले रंग का गोल या अंडाकार पत्थर होता है, जिसमें प्राकृतिक रूप से चक्र और रेखाएं बनी होती हैं। इसे विशेष रूप से भगवान विष्णु का प्रतीक माना गया है। हर शालिग्राम में अलग-अलग लक्षण होते हैं, जैसे शंखचक्रधारी शालिग्राम, नृसिंह शालिग्राम, लक्ष्मी नारायण शालिग्राम आदि। शालिग्राम पूजन विधि: ध्यान देने योग्य बातें शालिग्राम जी (Shaligram Ji) की पूजा करते समय घर की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जिस स्थान पर शालिग्राम विराजमान हों, उसे एक मंदिर की तरह पवित्र और सजावटी बनाना चाहिए। साथ ही अपने व्यवहार और विचारों को भी सात्विक बनाए रखें। शालिग्राम पूजन में नियमितता बहुत महत्वपूर्ण है। पूजन की प्रक्रिया किसी भी दिन नहीं टूटनी चाहिए — प्रतिदिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करना आवश्यक है। शास्त्रों में शालिग्राम पर कच्चे अक्षत (चावल) चढ़ाने की मनाही है। यदि चावल अर्पित करना चाहें, तो उन्हें पहले हल्दी से पीला रंग देकर ही चढ़ाएं। यह भी माना जाता है कि भगवान शालिग्राम की पूजा तुलसी दल के बिना अधूरी मानी जाती है। तुलसी अर्पित करते ही भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पूजा के दौरान शालिग्राम को जल से स्नान कराएं, फिर उन पर चंदन लगाएं और तुलसी के पत्ते अर्पित करें। अंत में भोग लगाएं और आरती करें। इसे भी पढ़ें:- महाभारत के युद्ध में गूंजे थे दिव्य अस्त्रों के नाम, जानिए उनकी अद्भुत शक्तियां इन गलतियों से बचेंशालिग्राम शिला को उपहार स्वरूप लेना वर्जित माना गया है। इसे किसी से भेंट स्वरूप प्राप्त करना अशुभ परिणाम दे सकता है। इसी प्रकार, पूजा के समय शालिग्राम पर कभी भी सफेद अक्षत यानी बिना रंगे चावल अर्पित नहीं करने चाहिए। इन नियमों का पालन करके आप नकारात्मक प्रभावों से बच सकते हैं और पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार, शालिग्राम जी (Shaligram Ji) को गंगाजल अर्पित नहीं करना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि मां गंगा का उद्गम शालिग्राम शिला से हुआ है। इसलिए शालिग्राम पर गंगाजल चढ़ाना वर्जित माना गया है। पूजा करते समय शालिग्राम को पंचामृत से स्नान कराएं, फिर उन पर चंदन का लेप करें और तुलसी दल अर्पित करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Shaligram #ShaligramPuja #VishnuWorship #HinduRituals #Spirituality #VishnuBlessings #PujaRules #HinduTraditions #ShaligramDosAndDonts

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Chaiti Chhath Puja

चैती छठ पूजा: इन आवश्यक सामग्रियों के बिना अधूरी है व्रत की पूर्णता

भारत में हर एक त्यौहार का महत्व होता है और उसे बड़ी श्रद्धा और विधिपूर्वक मनाया जाता है। इसी तरह चैती छठ पूजा (Chaiti Chhath Puja), जो विशेष रूप से उत्तर भारत, खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और मध्य प्रदेश में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है, बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह पर्व खासकर सूर्य देवता (Lord Sun) की पूजा के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें व्रति 36 घंटे का उपवास रखते हुए सूर्यास्त और सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस पूजा के दौरान कुछ विशेष पूजा सामग्री का होना जरूरी है, बिना इन चीजों के छठ पूजा का व्रत अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं वह कौन सी सामग्री है, जो इस पूजा के लिए आवश्यक होती है और बिना जिनके यह व्रत पूरा नहीं होता। चैती छठ पूजा की विशेष पूजा सामग्री चैती छठ पूजा (Chaiti Chhath Puja) में व्रति विशेष रूप से सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य देवता (Lord Sun) को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इसके लिए कुछ खास पूजा सामग्री का होना अनिवार्य है। इन चीजों को एक विशेष टोकरी (ठीया) में सजाया जाता है, जिसमें व्रति सूरज देवता को अर्पित करते हैं। चैती छठ पूजा (Chaiti Chhath Puja) को विधिपूर्वक संपन्न करने के लिए कुछ विशेष पूजा सामग्री की आवश्यकता होती है, जिसे पूजा स्थल पर सुसज्जित किया जाता है। सबसे पहले, पूजा सामग्री रखने के लिए एक साफ थाली का होना जरूरी है। पूजा स्थल पर दीपक जलाने के लिए मिट्टी के दीए लगाए जाते हैं, जो पूजा की पवित्रता को बढ़ाते हैं। साथ ही, खाजा, गुड़, और अदरक का पौधा भी पूजा में शामिल किया जाता है। चावल, आटा, और जल पूजा के दौरान अर्पित किए जाते हैं। इसके अलावा, शहद, गंगाजल, और चंदन का भी विशेष महत्व होता है। सिंदूर, धूपबत्ती, कुमकुम, और कपूर का उपयोग वातावरण को शुद्ध और पूजा को विशेष बनाता है। बांस या पीतल का सूप और दूध तथा जल के लिए गिलास पूजा में जरूरी होते हैं। ऋतुफल, कलावा, सुपारी, फूल, और माला भी पूजा में अर्पित किए जाते हैं। अंत में, तांबे का कलश और बड़ी टोकरी का उपयोग प्रसाद रखने के लिए किया जाता है। इन सभी सामग्रियों का उपयोग पूजा की विधि के अनुसार सूर्य देवता (Lord Sun) की पूजा में किया जाता है। प्रसाद की सामग्री चैती छठ पूजा (Chaiti Chhath Puja) के दौरान विशेष प्रसाद तैयार किया जाता है, जो सूर्य देवता को अर्पित किया जाता है। इस प्रसाद में कुछ खास चीजें शामिल होती हैं, जो पूजा की पवित्रता और नियमों के अनुरूप होती हैं। प्रसाद में आमतौर पर लड्डू, हल्दी, नाशपाती, और पत्ते लगे हुए ईख शामिल होते हैं। इसके अलावा, दूध, तेल, बाती, नारियल, शरीफा, और दूध से बनी मिठाइयाँ भी प्रमुख रूप से रखी जाती हैं। इसके साथ ही, बड़ा नींबू, सिंघाड़ा, सुथनी, शकरकंदी, मूली, बैंगन, केले, और गेहूं को भी प्रसाद के रूप में उपयोग किया जाता है। इन सभी चीजों का विशेष महत्व होता है और ये सूर्य देवता के आशीर्वाद को प्राप्त करने में मदद करती हैं। इसे भी पढ़ें:- चैती छठ महापर्व 2025: सूर्य देव की पूजा और उपवास का पवित्र अवसर चैती छठ पूजा के दौरान इन नियमों का पालन करें चैती छठ पूजा के दौरान सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए और व्रत के सभी नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए, ताकि पूजा सही तरीके से संपन्न हो सके। पूजा के समय घर के सभी सदस्य सात्विक आहार ग्रहण करें। नहाय-खाय के दिन से लेकर सूर्योदय के अर्घ्य तक लहसुन और प्याज का सेवन पूरी तरह से मना है। व्रति को प्रसाद खुद बनाना चाहिए, यदि वह इसे बनाने में सक्षम नहीं हैं, तो किसी न किसी रूप में मदद अवश्य करें। प्रसाद तैयार करते समय स्वच्छता और शुद्धता का खास ध्यान रखें। यह सुनिश्चित करें कि छठ पूजा से जुड़े सभी प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही तैयार किए जाएं। पूजा के दौरान सुई का उपयोग कपड़ों में नहीं करना चाहिए और पूजा में बांस से बनी सूप और टोकरी का ही प्रयोग करें। इसके अलावा, व्रति पूजा के समय जमीन पर चटाई बिछाकर ही सोएं। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Chaiti Chhath Puja #ChaitiChhath #ChhathPuja2024 #ChhathVrat #SunGodWorship #ChhathFestivals #HinduRituals #ChhathSamagri #ChhathPujaItems #ChhathMahima #FestiveRituals

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Mystery Behind Saurabh’s Sacrifice Truth or Myth

Mystery behind Saurabh’s alleged sacrifice: क्या सच में दी गई थी सौरभ की बलि, जानिए क्या कहते हैं देश के ज्योतिषी?

उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए सौरभ राजपूत के निर्मम हत्याकांड ने समूचे देश को झकझोर कर रख दिया है। जैसे-जैसे दिन बीतते जा रहा है वैसे-वैसे रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। दरअसल 3 मार्च को सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर बेदर्दी से हत्या कर दी थी। और हत्या करने के बाद शव के तीन टुकड़े करने के बाद एक नीले रंग के ड्रम में भरकर ऊपर से सीमेंट का घोल मिला दिया था। ताकि शव को ठिकाने लगाया जा सके। गौरतलब हो कि मेरठ के सौरभ सिंह राजपूत ने मुस्कान के साथ प्रेम विवाह किया था और वो वह लंदन की एक बेकरी में नौकरी किया करता था। अधिकतर बाहर रहने की वजह से मुस्कान अपने बचपन के मित्र साहिल के करीब आ गई थी और दोनों के बीच संबंध स्थापित हो गए थे। सौरभ की गैरमौजूदगी में अक्सर वो साहिल के साथ अपने घर में पार्टियां करती और शराब पीती थी। इस दौरान मकान मालिक ने जब सौरभ को मुस्कान की करतूतों के बारे में अवगत कराया तो सौरभ ने अपना रिश्ता बचाने के लिए पहले टी मुस्कान को समझाने की कोशिश की। लेकिन बात नहीं बनने पर उसने तलाक देने की भी सोची लेकिन फिर चार साल की बेटी का चेहरा देख उसने तलाक देने का विचार मन से त्याग दिया। और फिर 2 साल के लिए लंदन चला गया। सौरभ के लंदन जाते ही मुस्कान के पर निकल आये। और वो बड़े आराम से अपने प्रेमी के मजे करने लगी। खैर, इस बीच लंदन से वो अपनी बेटी पीहू का बर्थडे मनाने मेरठ आया था। इस दौरान मौका पाकर तीन मार्च को मुस्कान और साहिल ने सौरभ की बेरहमी से हत्या (mystery behind Saurabh’s alleged sacrifice) कर दी और गुलछर्रे उड़ाने प्रेमी संग मनाली चल दी।  पेंटिंग कोई साधारण कलाकृति नहीं, बल्कि तंत्र क्रिया (mystery behind Saurabh’s alleged sacrifice) का हिस्सा है खैर, इस बीच हत्या का मामला प्रकाश में आने के बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस की जांच में आरोपी साहिल के कमरे में एक रहस्यमयी पेंटिंग मिली। हैरत यह कि पेंटिंग को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब इस पेंटिंग को लेकर प्रसिद्ध ज्योतिषी अंकित चौधरी ने बड़ा दावा किया है। ज्योतिषी अंकित चौधरी के मुताबिक यह पेंटिंग कोई साधारण कलाकृति नहीं, बल्कि तंत्र क्रिया (mystery behind Saurabh’s alleged sacrifice) का हिस्सा है। यह तांत्रिक प्रक्रिया विशेष रूप से नाम, शोहरत और पैसा कमाने के लिए की जाती है। कहते हैं इस तरह की तांत्रिक क्रिया नेपाल या बंगाल में की जाती है। इस तंत्र क्रिया में पांच मुंड यानी सिरों की बलि दी जाती है। इसे पंचमुंड तंत्र साधना भी कहा जाता है। अंकित चौधरी के मुताबिक पंचमुंड तंत्र साधना अधिकतर उन लोगों की ओर से की जाती है, जो तेजी से नाम और धन पाने की इच्छा रखते हैं। न सिर्फ धन कमाने बल्कि शॉर्ट कट के जरिए कामयाबी हासिल करना चाहते हैं। बड़ी बात यह कि इस तरह की साधना में विशेष मंत्रों का जाप करते हुए बलि दी जाती है  और उससे भी बड़ी बात यह कि यह पूरा अनुष्ठान गहरे नशे की अवस्था में ही किया जाता है। इस तंत्र क्रिया के दौरान साधक को शराब या किसी नशीले पदार्थ का सेवन कराया जाता है, ताकि उसका मन नियंत्रित किया जा सके और उसे भय का अनुभव न हो। गौर करने वाली बात यह कि सौरभ की हत्या भी ठीक इसी तरह हुई। हत्या से पहले सौरभ को शराब पिलाई गई थी।  इसे भी पढ़ें:- Wife Slept with Lover After Beheading Husband: पति सौरभ का कटा सिर बैग में रखकर प्रेमी संग सोई पत्नी मुस्कान  पुलिस तंत्र-मंत्र के एंगल से भी कर रही है जांच  बता दें कि हत्या के बाद जब पुलिस साहिल के कमरे में पहुंची तब उसे वहां एक पेंटिंग भी मिली, जिसमें सिर और आंखें प्रतीकात्मक रूप से दर्शाए गई थी। ज्योतिषी अंकित चौधरी की माने तो, पांच मुंडों की उपस्थिति इस साधना में बेहद आवश्यक मानी जाती है। इन मुंडों को विशेष रूप से मंत्रों से अभिमंत्रित किया जाता है और फिर पेंटिंग, चित्र या विशेष प्रतीकों के रूप में कमरे या पूजा स्थलों में स्थापित किया जाता है। हालांकि ज्योतिषी अंकित चौधरी के इस दावे से ऐसे भी कयास लगाए जा रहे है कि क्या सौरभ की बलि (mystery behind Saurabh’s alleged sacrifice) दी गई? हालांकि पुलिस भी इस एंगल पर जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सच में साहिल के कमरे में तांत्रिक क्रियाओं को अंजाम दिया गया था भी या नहीं? क्या सच में सौरभ का मर्डर किसी तंत्र क्रिया का हिस्सा था? या किसी साधना को सिद्ध करने हेतु सौरभ की बलि दी गई? Latest News in Hindi Today Hindi news mystery behind Saurabh’s alleged sacrifice #SaurabhSacrifice #MysteryUnveiled #AstrologersSpeak #TruthOrMyth #HinduRituals #AstrologyInsights #ShockingRevelation #IndianMyths #SacrificialRitual #SpiritualDebate

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