Holi Festival 2025

होली: कहां और कैसे मनाई जाती है रंगों की यह अनूठी पर्व

होली (Holi), रंगों का त्योहार भारत के सबसे लोकप्रिय और उत्साहपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में भारतीय समुदायों द्वारा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो आमतौर पर मार्च के महीने में पड़ता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम, भाईचारे और एकता का प्रतीक है। होली के इस पावन अवसर पर लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर, गले मिलकर और मिठाइयां खिलाकर खुशियां बांटते हैं। होली का त्योहार भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि भारत के अलग-अलग राज्यों और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में होली कैसे मनाई जाती है। ब्रज की होली: राधा-कृष्ण की लीलाओं का प्रतीक ब्रज भूमि, जो कि मथुरा और वृंदावन को मिलाकर बनती है, होली (Holi) के उत्सव का केंद्र मानी जाती है। यहां होली का त्योहार राधा और कृष्ण की दिव्य लीलाओं के साथ जुड़ा हुआ है। ब्रज में होली का उत्सव लगभग एक सप्ताह तक चलता है। यहां लट्ठमार होली विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसमें महिलाएं पुरुषों को लाठियों से मारती हैं और पुरुष खुद को ढाल से बचाते हैं। यह परंपरा श्रीकृष्ण और गोपियों की लीलाओं से जुड़ी हुई है। मथुरा-वृंदावन की होली: भक्ति और उल्लास का मेल मथुरा और वृंदावन में होली का त्योहार भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यहां के मंदिरों में विशेष होली समारोह आयोजित किए जाते हैं। बांके बिहारी मंदिर और इस्कॉन मंदिर में होली के दौरान भक्तों की भीड़ उमड़ती है। यहां होली के दिन फूलों की होली (Holi) खेली जाती है, जिसमें रंगों की जगह फूलों का उपयोग किया जाता है। बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यह परंपरा श्रीकृष्ण और राधा की लीलाओं से जुड़ी हुई है। इस दौरान महिलाएं पुरुषों को लाठियों से मारती हैं और पुरुष खुद को ढाल से बचाते हैं। यह अनूठी परंपरा देखने के लिए दुनिया भर से पर्यटक यहां आते हैं। बंगाल की होली: दोल यात्रा पश्चिम बंगाल में होली को दोल यात्रा या दोल पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार राधा और कृष्ण की पूजा के साथ जुड़ा हुआ है। इस दौरान मंदिरों में राधा और कृष्ण की मूर्तियों को सजाया जाता है और उन्हें झूले पर झुलाया जाता है। यहां होली के दिन रंगों के साथ-साथ भक्ति और संगीत का भी विशेष महत्व होता है। हरियाणा की होली: भाभी-देवर की मस्ती हरियाणा में होली (Holi) का त्योहार भाभी और देवर के रिश्ते की मस्ती और उल्लास से भरा होता है। यहां भाभी द्वारा देवर को सताए जाने की प्रथा है, जिसमें भाभी देवर को रंग लगाने के साथ-साथ उन्हें मजाक में डांटती और सताती हैं। यह परंपरा भाईचारे और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का एक अनूठा तरीका है। महाराष्ट्र की होली: रंग पंचमी और सूखे गुलाल की धूममहाराष्ट्र में होली को रंग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। यहां सूखे गुलाल से होली खेलने की परंपरा है। रंग पंचमी के दिन लोग एक-दूसरे पर गुलाल उड़ाते हैं और मिठाइयां बांटते हैं। यह त्योहार यहां पांच दिनों तक चलता है, जिसमें पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य का आयोजन भी किया जाता है। गोवा की होली: शिमगो और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूमगोवा में होली (Holi) को शिमगो के रूप में मनाया जाता है। यहां होली के दिन जलूस निकालने की परंपरा है, जिसमें स्थानीय लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होते हैं। जलूस के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें नृत्य, संगीत और नाटक शामिल होते हैं। यह त्योहार गोवा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। पंजाब की होली: होला मोहल्ला और शक्ति प्रदर्शनपंजाब में होली को होला मोहल्ला के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार आनंदपुर साहिब में विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दौरान सिख योद्धाओं द्वारा शक्ति प्रदर्शन किया जाता है, जिसमें मार्शल आर्ट्स, घुड़सवारी और अन्य शारीरिक कौशल का प्रदर्शन शामिल होता है। यह त्योहार सिख समुदाय की वीरता और शौर्य को याद करने का अवसर प्रदान करता है। दक्षिण गुजरात और मध्यप्रदेश की होली: आदिवासी संस्कृति का रंगदक्षिण गुजरात के आदिवासी समुदाय के लिए होली सबसे बड़ा त्योहार है। यहां आदिवासी लोग पारंपरिक नृत्य और संगीत के साथ होली मनाते हैं। इसी तरह, मध्यप्रदेश के मालवा अंचल के आदिवासी इलाकों में भी होली को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। यहां होली के दिन आदिवासी लोग पारंपरिक गीत गाते हैं और ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हैं। होली (Holi) का त्योहार भारत की विविध संस्कृतियों को एक सूत्र में बांधता है। यह त्योहार हमें प्रेम, भाईचारे और एकता का संदेश देता है। इसे भी पढ़ें:- तो इसलिए होती है शनिवार को शनिदेव की जगह क्यों हनुमान जी की पूजा नेपाल की होली: फागु पूर्णिमा नेपाल में होली को फागु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार नेपाल में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और नेपाली लोक संगीत और नृत्य का आनंद लेते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होली होली का त्योहार अब केवल भारत तक ही सीमित नहीं है। यह त्योहार दुनिया भर में भारतीय समुदायों द्वारा मनाया जाता है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में होली के उत्सव का आयोजन किया जाता है। इन देशों में होली के दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, नृत्य और संगीत का आनंद लेते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Holi #HoliFestival #FestivalOfColors #Holi2025 #ColorfulHoli #HappyHoli #HoliCelebration #HoliIndia #HoliTradition #HoliFun #HoliVibes

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Celebrate Holi 2025 in Mathura

होली का अद्भुत रंगारंग उत्सव: मथुरा की इन खास जगहों पर मनाएं रंगों का त्योहार

मथुरा, भारत के सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक होली का आगाज हो चुका है। यह शहर भगवान कृष्ण की जन्मस्थली होने के कारण होली के उत्सव के लिए विश्वभर में मशहूर है। मथुरा की गलियों में होली का जश्न देखने के लिए देश-विदेश से लाखों पर्यटक यहां आते हैं। आइए जानते हैं मथुरा की उन खास जगहों के बारे में, जहां होली का उत्सव अद्भुत और अविस्मरणीय होता है।  बांके बिहारी मंदिर: होली की रंगत का केंद्र मथुरा (Mathura) में होली का जश्न बांके बिहारी मंदिर (Banke Bihari Temple) से शुरू होता है। यह मंदिर भगवान कृष्ण के प्रमुख मंदिरों में से एक है और होली के मौके पर यहां का नजारा देखने लायक होता है। मंदिर में होली का उत्सव लगभग एक सप्ताह तक चलता है, जिसमें फूलों की होली, गुलाल की होली और लट्ठमार होली जैसे आयोजन होते हैं। मंदिर के पुजारी भगवान कृष्ण को रंगों से सजाते हैं और भक्तों के साथ मिलकर होली का जश्न मनाते हैं। यहां की होली की खास बात यह है कि इसमें केवल प्राकृतिक रंगों और गुलाल का ही इस्तेमाल किया जाता है, जो पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित होते हैं। गोकुल की रंगीली होली पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बालकृष्ण बचपन में अत्यंत चंचल और नटखट थे। गोकुल की गोपियां उनकी शरारतों से खूब आनंदित होती थीं। इसी कारण मथुरा में विशेष रूप से लठमार होली मनाई जाती है, जिसकी परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस अनूठे आयोजन में महिलाएं लाठियां लेकर पुरुषों को हल्के-फुल्के अंदाज में हंसी-मजाक के रूप में मारती हैं। बरसाना की लठमार होली विश्व प्रसिद्ध है, जहां नंदगांव (Nandgaon) के ग्वालों और बरसाना की गोपियों के बीच यह पारंपरिक उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। नंदगांव में ‘फाग आमंत्रण उत्सव’ आयोजित किया जाता है, जिसमें सखियों को होली खेलने का निमंत्रण दिया जाता है। इसी दिन बरसाना के श्रीराधारानी मंदिर में ‘लड्डू मार होली’ का आयोजन भी होता हैं। इसे भी पढ़ें:- होलिका दहन की रात काले तिल और सरसों से करें ये चमत्कारिक टोटके! नंदगांव और बरसाना: लट्ठमार होली की धूम मथुरा (Mathura) से कुछ किलोमीटर दूर स्थित नंदगांव (Nandgaon) और बरसाना की लट्ठमार होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहां की होली का अपना एक अलग ही इतिहास और परंपरा है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण नंदगांव से बरसाना आकर राधा और उनकी सखियों के साथ होली खेलते थे। इस दौरान महिलाएं पुरुषों को लाठियों से मारती थीं और पुरुष खुद को बचाने की कोशिश करते थे। आज भी यह परंपरा जीवित है और लट्ठमार होली के दिन नंदगांव (Nandgaon) के पुरुष बरसाना जाते हैं, जहां महिलाएं उन्हें लाठियों से मारती हैं। यह नजारा बेहद ही मनोरंजक और अनोखा होता है। इसके अलावा, यहां की होली में रंग-गुलाल और पारंपरिक गीत-संगीत का भी विशेष महत्व होता है। मथुरा की गलियों में होली का मजा मथुरा (Mathura) की गलियों में होली का जश्न देखने के लिए हजारों लोग यहां आते हैं। यहां की गलियों में रंग-गुलाल और पानी के रंगों से होली खेली जाती है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर और गले मिलकर होली का जश्न मनाते हैं। मथुरा की गलियों में होली के दिन पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य का भी आयोजन किया जाता है। यहां के लोग होली के दिन घरों में पकवान बनाते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर खाते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Banke Bihari Temple #Holi2025 #MathuraHoli #HoliFestival #BrajHoli #HoliInVrindavan #HoliCelebration #ColorsOfHoli #HoliTourism #FestivalOfColors #RadhaKrishnaHoli

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Holi 2025: होली के दिन अवश्य करें इस स्तोत्र का पाठ, भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर दूर करेंगे सब दुख

होली, रंगों का त्योहार भारत के सबसे प्रसिद्ध और उत्साहपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार न केवल रंगों और उल्लास से भरा होता है, बल्कि इसमें आध्यात्मिक महत्व भी छिपा होता है। होली के दिन भगवान कृष्ण (Lord Krishna) की पूजा और उनके स्तोत्र का पाठ करने से जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं और भक्तों को आनंद और शांति की प्राप्ति होती है। होली 2025 में भी इस परंपरा को निभाने का विशेष महत्व होगा। आइए जानते हैं कि होली (Holi) के दिन किस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए और इसका क्या महत्व है। होली 2025 की तारीख होली (Holi)  का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। साल 2025 में होली 14 मार्च 2025, शुक्रवार को मनाई जाएगी। होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाएगा, जो 13 मार्च 2025, गुरुवार को होगा। होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है। श्री राधा कृष्ण अष्टकम  चथुर मुखाधि संस्थुथं, समास्थ स्थ्वथोनुथं।हलौधधि सयुथं, नमामि रधिकधिपं॥भकाधि दैथ्य कालकं, सगोपगोपिपलकं।मनोहरसि थालकं, नमामि रधिकधिपं॥सुरेन्द्र गर्व बन्जनं, विरिञ्चि मोह बन्जनं।वृजङ्ग ननु रञ्जनं, नमामि रधिकधिपं॥मयूर पिञ्च मण्डनं, गजेन्द्र दण्ड गन्दनं।नृशंस कंस दण्डनं, नमामि रधिकधिपं॥प्रदथ विप्रदरकं, सुधमधम कारकं।सुरद्रुमपःअरकं, नमामि रधिकधिपं॥दानन्जय जयपाहं, महा चमूक्षयवाहं।इथमहव्यधपहम्, नमामि रधिकधिपं॥मुनीन्द्र सप करणं, यदुप्रजप हरिणं।धरभरवत्हरणं, नमामि रधिकधिपं॥सुवृक्ष मूल सयिनं, मृगारि मोक्षधयिनं।श्र्वकीयधमययिनम्, नमामि रधिकधिपं॥ वन्दे नवघनश्यामं पीतकौशेयवाससम्।सानन्दं सुन्दरं शुद्धं श्रीकृष्णं प्रकृतेः परम्॥राधेशं राधिकाप्राणवल्लभं वल्लवीसुतम्।राधासेवितपादाब्जं राधावक्षस्थलस्थितम्॥राधानुगं राधिकेष्टं राधापहृतमानसम्।राधाधारं भवाधारं सर्वाधारं नमामि तम्॥राधाहृत्पद्ममध्ये च वसन्तं सन्ततं शुभम्।राधासहचरं शश्वत् राधाज्ञापरिपालकम्॥ध्यायन्ते योगिनो योगान् सिद्धाः सिद्धेश्वराश्च यम्।तं ध्यायेत् सततं शुद्धं भगवन्तं सनातनम्॥निर्लिप्तं च निरीहं च परमात्मानमीश्वरम्।नित्यं सत्यं च परमं भगवन्तं सनातनम्॥यः सृष्टेरादिभूतं च सर्वबीजं परात्परम्।योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम्॥बीजं नानावताराणां सर्वकारणकारणम्।वेदवेद्यं वेदबीजं वेदकारणकारणम्॥योगिनस्तं प्रपद्यन्ते भगवन्तं सनातनम्।गन्धर्वेण कृतं स्तोत्रं यः पठेत् प्रयतः शुचिः।इहैव जीवन्मुक्तश्च परं याति परां गतिम्॥हरिभक्तिं हरेर्दास्यं गोलोकं च निरामयम्।पार्षदप्रवरत्वं च लभते नात्र संशयः॥ इसे भी पढ़ें:- होलिका दहन की रात काले तिल और सरसों से करें ये चमत्कारिक टोटके! होली के दिन स्तोत्र पाठ का महत्व होली (Holi) के दिन भगवान कृष्ण (Lord Krishna) की पूजा और उनके स्तोत्र का पाठ करने का विशेष महत्व है। भगवान कृष्ण को होली का त्योहार अत्यंत प्रिय है, क्योंकि वे स्वयं रासलीला और रंगों के प्रेमी थे। होली के दिन भगवान कृष्ण (Lord Krishna) के स्तोत्र का पाठ करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। स्तोत्र पाठ करने से न केवल भक्तों को आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि उनके मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है। होली के दिन स्तोत्र पाठ करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं और भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Holi #Holi2025 #KrishnaBhakti #HoliPuja #HoliFestival #SpiritualHoli #BhagwanKrishna #HoliMantra #HoliStotra #KrishnaBlessings #HoliCelebration

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Choti Holi 13 मार्च 2025

Choti Holi 2025: कब मनाई जाएगी छोटी होली, जानिए इस दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

होली का त्योहार भारत के सबसे प्रसिद्ध और उत्साहपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार न केवल रंगों और उल्लास से भरा होता है, बल्कि इसमें आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी छिपा होता है। होली का त्योहार दो दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें पहले दिन छोटी होली और दूसरे दिन बड़ी होली मनाई जाती है। छोटी होली, जिसे होलिका दहन (Holika Dahan) के नाम से भी जाना जाता है, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। आइए जानते हैं कि छोटी होली 2025 में कब मनाई जाएगी और इस दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। छोटी होली 2025 की तारीख छोटी होली फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। साल 2025 में छोटी होली (Choti Holi) 13 मार्च 2025, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन होलिका दहन किया जाएगा, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। छोटी होली के अगले दिन बड़ी होली मनाई जाएगी, जो 14 मार्च 2025, शुक्रवार को होगी। छोटी होली का महत्व छोटी होली  (Choti Holi) का त्योहार हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। छोटी होली के दिन होलिका दहन किया जाता है, जो प्रह्लाद और होलिका की कथा से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार, प्रह्लाद भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के परम भक्त थे, जबकि उनके पिता हिरण्यकश्यपु भगवान विष्णु के विरोधी थे। हिरण्यकश्यपु ने प्रह्लाद को मारने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद हर बार बच गए। अंत में, हिरण्यकश्यपु ने अपनी बहन होलिका से प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठने को कहा। होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका जल गई और प्रह्लाद बच गए। इस घटना को याद करते हुए छोटी होली के दिन होलिका दहन किया जाता है। छोटी होली के दिन क्या करें? छोटी होली के दिन निम्नलिखित कार्य करने चाहिए: इसे भी पढ़ें:- इस साल होली के दिन लगेगा चंद्र ग्रहण, जानें इसका आपके जीवन पर क्या होगा प्रभाव छोटी होली के दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? छोटी होली के दिन निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए: छोटी होली के दिन क्या न करें? छोटी होली के दिन निम्नलिखित बातों से बचना चाहिए: नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Choti Holi #ChotiHoli2025 #HolikaDahan #HoliFestival #HoliCelebration #FestivalOfColors #HoliRituals #IndianFestivals #Holi2025 #HinduFestival #SpiritualTraditions

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Holi Hindu Festival

होली 2025: इस साल होली के दिन लगेगा चंद्र ग्रहण, जानें इसका आपके जीवन पर क्या होगा प्रभाव

होली (Holi) का त्योहार रंगों, उत्साह और खुशियों का प्रतीक माना जाता है। यह त्योहार हर साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। लेकिन इस साल होली (Holi) का त्योहार एक दुर्लभ खगोलीय घटना के साथ मनाया जाएगा। 14 मार्च 2025 को होली के दिन चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) लगेगा, जो इस त्योहार को और भी खास बना देगा। चंद्र ग्रहण का यह संयोग कई लोगों के मन में सवाल उठा रहा है कि इसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आइए जानते हैं कि होली पर चंद्र ग्रहण का क्या महत्व है और इसका हमारे जीवन पर क्या असर हो सकता है। चंद्र ग्रहण क्या है और क्यों लगता है? चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) एक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा (Moon) के बीच आ जाती है। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा का प्रकाश कुछ समय के लिए मंद पड़ जाता है। चंद्रग्रहण का ज्योतिषीय, धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका कारण राहु-केतु को माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, यह ग्रहण केतु के प्रभाव से लगेगा। राहु और केतु को सांप के समान माना जाता है, जिनके डसने से ग्रहण होता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, जब राहु और केतु चंद्रमा को ग्रसने का प्रयास करते हैं, तब चंद्रग्रहण घटित होता है। चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) तीन प्रकार के होते हैं: पूर्ण चंद्र ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और उपच्छाया चंद्र ग्रहण। 14 मार्च 2025 को लगने वाला चंद्र ग्रहण एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा (Moon) पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में छिप जाएगा। होली और चंद्र ग्रहण का संयोग भारत में इस वर्ष होलिका दहन 13 मार्च को और होली का उत्सव 14 मार्च को मनाया जाएगा। इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) भी लगेगा। हालांकि, चूंकि यह ग्रहण भारत में दिन के समय पड़ेगा, इसलिए यह यहां दिखाई नहीं देगा। ग्रहण नजर न आने के कारण इसका कोई धार्मिक प्रभाव नहीं होगा, और होली (Holi) के त्योहार पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। इसे भी पढ़ें:- कब से शुरू हो रहे हैं नवरात्र, जानें मां दुर्गा के आगमन का संकेत क्या भारत में सूतक रहेगा इस वर्ष होली के दिन, 14 मार्च को आंशिक चंद्र ग्रहण लगेगा। भारतीय समयानुसार, उपछाया ग्रहण सुबह 9:27 बजे शुरू होगा, जबकि आंशिक ग्रहण 10:39 बजे प्रारंभ होकर 11:56 बजे समाप्त हो जाएगा। चूंकि ग्रहण दिन के समय पड़ेगा, इसलिए यह भारत में दिखाई नहीं देगा और इसका कोई प्रभाव भी नहीं पड़ेगा। हालांकि, इसका असर मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, यूरोप के कई क्षेत्रों, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, तथा अफ्रीका के बड़े हिस्सों में देखा जाएगा। राशि पर क्या होगा असर वैज्ञानिक दृष्टि से चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो तब घटित होती है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आते हैं। इस स्थिति में पृथ्वी सूर्य के प्रकाश को चंद्रमा तक पहुंचने से रोक देती है, जिससे चंद्रग्रहण होता है। 14 मार्च को लगने वाला यह चंद्रग्रहण कन्या राशि में होगा, इसलिए इस राशि के जातकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि यह ग्रहण उनके लिए अशुभ प्रभाव ला सकता है। ग्रहण के समय चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि सूर्य और शनि चंद्रमा के सातवें भाव में रहकर उस पर पूर्ण सप्तम दृष्टि डालेंगे, जिससे इसका प्रभाव और अधिक तीव्र होगा। केतु चंद्रमा (Moon) के द्वितीय भाव में रहेगा, जिससे मानसिक तनाव की स्थिति बन सकती है। वहीं, राहु, बुध और शुक्र चंद्रमा के आठवें भाव में स्थित होंगे, जिससे कुछ राशियों पर मिश्रित प्रभाव पड़ेगा। दूसरी ओर, गुरु ग्रह (बृहस्पति) चंद्रमा के दशम भाव में रहेगा, जिससे धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवृत्तियों में वृद्धि होगी। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Lunar Eclipse #Holi2025 #LunarEclipse2025 #HoliFestival #ChandraGrahan #HoliImpact #HoliCelebration #Astrology2025 #HinduFestival #SpiritualEffects #FestivalVibes

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