TMC के 20 बागी सांसदों की सदस्यता पर Supreme Court में आज सुनवाई; Abhishek Banerjee ने Speaker की देरी को दी चुनौती

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति से शुरू हुआ तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक संकट अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। TMC के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी ने पार्टी के 20 बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने से जुड़ी याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की ओर से फैसला लेने में कथित देरी के खिलाफ Supreme Court का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई आज, 25 अगस्त 2026 को निर्धारित है। Supreme Court की सूची के मुताबिक मामले की सुनवाई Chief Justice of India Surya Kant, Justice Joymalya Bagchi और Justice V Mohana की पीठ के सामने होनी है। खबर लिखे जाने तक मामले में आज का अंतिम आदेश सामने नहीं आया था। Abhishek Banerjee Supreme Court क्यों पहुंचे? अभिषेक बनर्जी का मुख्य आरोप है कि उन्होंने 20 सांसदों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत disqualification petitions लोकसभा अध्यक्ष के सामने दाखिल की थीं, लेकिन इन पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने Supreme Court से मांग की है कि Speaker को इन याचिकाओं पर समयबद्ध और शीघ्र फैसला लेने का निर्देश दिया जाए। याचिका संविधान के Article 32 के तहत दाखिल की गई है और इसमें लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा के Secretary General तथा संबंधित 20 सांसदों को पक्षकार बनाया गया है। मामला आखिर शुरू कैसे हुआ? TMC के भीतर यह संकट जून 2026 में खुलकर सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी के 19 सांसदों ने 14 जून को लोकसभा अध्यक्ष को पत्र देकर अपने समूह के Nationalist Citizens Party of India यानी NCPI में merger को मान्यता देने की मांग की थी। इसके अगले दिन सांसद रचना बनर्जी ने भी इसी तरह का पत्र दिया, जिसके बाद संख्या 20 हो गई। इन सभी सांसदों ने 2024 का लोकसभा चुनाव TMC के चुनाव चिन्ह पर जीता था। TMC का तर्क क्या है? तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि ये सांसद पार्टी के टिकट पर निर्वाचित हुए थे और बाद में दूसरी राजनीतिक व्यवस्था के साथ जाने का उनका फैसला Tenth Schedule यानी anti-defection law के तहत अयोग्यता का मामला बनता है। TMC का कहना है कि केवल सांसदों के एक समूह का दूसरी पार्टी के साथ जाने का दावा अपने आप उन्हें दल-बदल कानून से संरक्षण नहीं देता और इस पर Speaker को संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार फैसला करना चाहिए। हालांकि यह TMC का कानूनी पक्ष है। सांसदों की सदस्यता वास्तव में समाप्त होगी या नहीं, इसका फैसला सक्षम संवैधानिक प्राधिकारी और आवश्यकता पड़ने पर अदालत की न्यायिक समीक्षा के बाद ही तय होगा। बागी सांसद क्या कह रहे हैं? दूसरी तरफ बागी सांसदों का दावा है कि उनका कदम सामान्य defection नहीं बल्कि वैध merger है। उन्होंने Speaker से अपने नए राजनीतिक समूह को मान्यता देने की मांग की है और तर्क दिया है कि उनका कदम संविधान की Tenth Schedule में उपलब्ध merger-related protection के दायरे में आता है। यही इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक विवाद है—क्या सांसदों का कदम दल-बदल है या ऐसा merger जिसे कानून का संरक्षण मिल सकता है। Speaker Om Birla से मिल चुके हैं Abhishek Supreme Court जाने से पहले अभिषेक बनर्जी ने संसदीय स्तर पर भी मामला उठाया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने 27 जुलाई को लिखित reminder भेजा और इसके बाद 12 अगस्त को Lok Sabha Speaker Om Birla से मुलाकात कर disqualification petitions पर जल्द फैसला करने की मांग दोहराई। इसके बावजूद अंतिम निर्णय नहीं आने के बाद उन्होंने Supreme Court का रुख किया। Monsoon Session में अलग Seating Arrangement इस राजनीतिक विवाद का असर संसद के भीतर भी दिखाई दिया। रिपोर्ट्स के अनुसार Monsoon Session के दौरान 20 बागी सांसदों के लिए अलग seating arrangement किया गया था। हालांकि अलग seating arrangement होना अपने आप में उनकी disqualification या merger की अंतिम कानूनी मान्यता नहीं है। Speaker के औपचारिक फैसले के बाद ही उनकी parliamentary status को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। कौन हैं ये 20 सांसद? Supreme Court में दाखिल मामले में जिन 20 सांसदों को respondent बनाया गया है, उनमें कई प्रमुख TMC चेहरे शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इनमें Kakoli Ghosh Dastidar, Sudip Bandyopadhyay, Satabdi Roy, Prasun Banerjee, Rachana Banerjee, Jagadish Chandra Barma Basunia, Partha Bhowmick, Arup Chakraborty, Deepak Adhikari (Dev), Sayani Ghosh, Bapi Haldar, Abu Taher Khan, Kalipada Saren, Asit Kumar Mal, June Maliah, Mitali Bag, Khalilur Rahaman, Mala Roy, Sharmila Sarkar और Yusuf Pathan शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में सांसदों के अलग होने के कारण यह मामला सिर्फ party discipline तक सीमित नहीं है बल्कि Lok Sabha में TMC की संख्या और राजनीतिक शक्ति पर भी सीधा असर डाल सकता है। Anti-Defection Law क्या कहता है? भारत में दल-बदल विरोधी कानून संविधान की Tenth Schedule में मौजूद है। सामान्य तौर पर कोई निर्वाचित सांसद यदि स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ता है या party whip के खिलाफ कुछ परिस्थितियों में मतदान करता है तो उसकी सदस्यता पर सवाल उठ सकता है। वहीं merger से जुड़े मामलों में अलग प्रावधान मौजूद हैं। किसी particular political split या merger पर ये provisions लागू होते हैं या नहीं, यह मामले के तथ्य और कानूनी व्याख्या पर निर्भर करता है। इसीलिए TMC और बागी सांसदों के दावों को अभी अंतिम कानूनी तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। Supreme Court से Abhishek की मांग क्या है? अभिषेक बनर्जी ने Supreme Court से यह नहीं कहा है कि अदालत सीधे सभी 20 सांसदों की सदस्यता तत्काल खत्म कर दे। उनकी मुख्य मांग है कि Lok Sabha Speaker pending disqualification petitions पर जल्द फैसला करें। यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि Tenth Schedule के तहत पहली instance में disqualification से जुड़े प्रश्नों का फैसला Speaker के पास जाता है, हालांकि उस फैसले पर judicial review संभव है। फैसले का Lok Sabha Numbers पर पड़ सकता है असर अगर Speaker भविष्य में TMC की disqualification petitions स्वीकार करते हैं और संबंधित सांसद अयोग्य घोषित होते हैं तो Lok Sabha की राजनीतिक संख्या पर इसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर अगर उनके merger claim को वैध माना जाता है तो बागी सांसद अपनी सदस्यता बनाए रख सकते हैं। यही वजह है कि यह मामला West Bengal…

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Delhi-NCR में आज सुबह फिर बारिश; IMD का Orange Alert, Waterlogging और Traffic Jams का खतरा, Gurugram में WFH-Online Classes

नई दिल्ली: Delhi-NCR में मंगलवार, 25 अगस्त 2026 की सुबह एक बार फिर बादल और बारिश का दौर जारी रहा। भारतीय मौसम विभाग ने Delhi के लिए सुबह के घंटों में Orange Alert जारी किया है और कई इलाकों में moderate rain के साथ isolated heavy showers की संभावना जताई है। सोमवार की तेज बारिश के बाद NCR के कई हिस्सों में waterlogging और traffic congestion की समस्या पहले से बनी हुई है। Gurugram district administration ने आज corporate offices को Work From Home अपनाने की सलाह दी है, जबकि सरकारी और निजी schools तथा educational institutions को online classes चलाने को कहा गया है। यह फैसला 24 अगस्त को हुई भारी बारिश और उसके बाद सड़कों पर गंभीर जलभराव को देखते हुए लिया गया। Delhi-NCR में आज सुबह कैसा रहा मौसम? मंगलवार सुबह Delhi-NCR के कई हिस्सों में cloudy conditions के साथ बारिश और thunderstorms की संभावना बनी रही। IMD forecast के मुताबिक Delhi में सुबह से दोपहर के बीच कई जगह हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ isolated locations पर तेज बारिश और बिजली चमकने की संभावना है। Noida, Gurugram, Faridabad और Ghaziabad में भी बारिश और thunderstorms का अनुमान है। Delhi में आज सुबह के लिए जारी alert Orange category का है। सोमवार की बारिश ने बिगाड़ दिए थे हालात 24 अगस्त को Delhi-NCR में तेज बारिश ने बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित किया। Delhi और Gurugram की कई प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया, जिससे लंबा traffic jam लगा। सोमवार की बारिश के कारण Delhi-bound flights पर भी असर पड़ा और 15 flights divert करनी पड़ीं, जिनमें दो international flights भी शामिल थीं। सोमवार के असर को देखते हुए प्रशासन ने मंगलवार के लिए पहले से precautionary measures लागू कर दिए। Gurugram में आज Work From Home Advisory Gurugram District Disaster Management Authority ने 25 अगस्त के लिए corporate offices को Work From Home की सलाह दी है। District Magistrate Uttam Singh की ओर से जारी advisory का उद्देश्य roads पर traffic pressure कम करना और civic agencies को waterlogging तथा drainage clearance का काम करने में सुविधा देना है। यह advisory खास तौर पर उन इलाकों के लिए महत्वपूर्ण है जहां सोमवार को भारी जलभराव के कारण commute बेहद मुश्किल हो गया था। Schools में आज Online Classes Gurugram administration ने सरकारी और निजी schools तथा educational institutions से भी 25 अगस्त को physical classes के बजाय online mode अपनाने को कहा है। यह फैसला छात्रों की safety और school buses को waterlogged roads पर फंसने से बचाने के लिए किया गया है। सोमवार को Subhash Chowk समेत कुछ इलाकों में school buses जलभराव में फंस गई थीं और छात्रों को काफी देर तक परेशानी का सामना करना पड़ा था। Gurugram में कितनी हुई बारिश? Gurugram district ने सोमवार को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक करीब 75 mm rainfall दर्ज की। इस बारिश के कारण कई arterial roads पर पानी भर गया और traffic movement बुरी तरह प्रभावित हुआ। Rajiv Chowk, IFFCO Chowk, Railway Road, Sector 5, Old Delhi Road, Mehrauli Road और Basai Road जैसे इलाकों में waterlogging की खबरें सामने आईं। Delhi में Waterlogging और Traffic Jam का खतरा आज का rainfall Monday जितना intense हर जगह हो, यह जरूरी नहीं है, लेकिन पिछले 24 घंटे में जमीन और drainage systems पर पहले से दबाव होने के कारण moderate rain भी कुछ इलाकों में waterlogging बढ़ा सकती है। Authorities ने commuters को ऐसे routes से बचने की सलाह दी है जहां पिछले दिन भारी जलभराव हुआ था। Office-goers के लिए खास तौर पर Gurugram में WFH advisory इसी कारण जारी की गई है। Noida, Faridabad और Ghaziabad में भी बारिश के आसार Delhi के अलावा NCR के दूसरे शहर भी monsoon activity के प्रभाव में हैं। IMD-based forecast के मुताबिक: बिजली चमकने और अचानक तेज बारिश के छोटे spells के दौरान खुले इलाकों से बचने की सलाह दी जाती है। Flights पर भी पड़ा था असर सोमवार के खराब मौसम के कारण Indira Gandhi International Airport पर operations प्रभावित हुए थे। कुल 15 Delhi-bound flights को divert किया गया था। इनमें से 11 flights Jaipur भेजी गई थीं। Air India, IndiGo और SpiceJet समेत airlines ने passengers को flight status check करने की सलाह दी थी। आज भी खराब weather की स्थिति में यात्रियों को airport निकलने से पहले flight status verify करना बेहतर रहेगा। Red Alert या Orange Alert? इस खबर में alert level को लेकर confusion हो सकता है। 25 अगस्त की सुबह Delhi के लिए IMD ने Orange Alert बताया है। कुछ reports में Red Alert का संदर्भ 24 अगस्त की heavy rainfall situation या Gurugram के severe rain spell से जुड़ा था। इसलिए आज की headline में Orange Alert लिखना ज्यादा accurate रहेगा। आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना Delhi-NCR में monsoon activity अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। Forecast के मुताबिक अगले कुछ दिनों में भी rain और thunderstorms के spells जारी रह सकते हैं, हालांकि हर दिन intensity समान रहने की संभावना नहीं है। अगले कुछ दिनों में temperature बढ़ सकता है, लेकिन बीच-बीच में बारिश के कारण humidity भी बनी रह सकती है। Commuters के लिए जरूरी सलाह लोगों को waterlogged underpasses और flooded roads से बचना चाहिए। तेज बारिश के दौरान visibility कम हो सकती है, इसलिए vehicles को धीमी गति से चलाना बेहतर है। Gurugram में जिन employees को office जाना जरूरी नहीं है, उनके लिए administration ने आज WFH को prefer करने की सलाह दी है। Schools और educational institutions के लिए online classes की advisory पहले ही जारी की जा चुकी है। फिलहाल 25 अगस्त की मुख्य weather update यही है कि Delhi-NCR में बारिश का दौर जारी है, Delhi सुबह Orange Alert पर है और Gurugram में waterlogging तथा traffic disruption को देखते हुए WFH और online classes लागू की गई हैं। स्रोत – भारतीय मौसम विभाग (IMD), पीटीआई, इंडियन एक्सप्रेस, एनडीटीवी, टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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Ram Rahim फिर जेल से बाहर; 21 दिन की Furlough पर सुबह 6:05 बजे रिहा, 17वीं बार मिली Temporary Release

रोहतक/सिरसा: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह मंगलवार, 25 अगस्त 2026 की सुबह एक बार फिर रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आ गया। उसे 21 दिन की furlough दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह सुबह करीब 6:05 बजे जेल से निकला और सुरक्षा व्यवस्था के बीच काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ। ताजा अस्थायी रिहाई के साथ, 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद राम रहीम की यह 17वीं parole या furlough release है। वह दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के मामलों में 20 साल की सजा काट रहा है। सुबह 6:05 बजे Sunaria Jail से निकला आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार सुबह करीब 6 बजकर 5 मिनट पर राम रहीम रोहतक की high-security Sunaria Jail से बाहर निकला। इसके बाद वह वाहनों के काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ। जेल से निकलने के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार इस बार उसे furlough की अवधि के दौरान Sirsa headquarters में रहने की अनुमति दी गई है। हाल की उसकी temporary releases में भी उसे सिरसा जाने की अनुमति दी गई थी। 17वीं बार जेल से बाहर राम रहीम को अक्टूबर 2020 से अगस्त 2026 तक parole और furlough मिलाकर 17 बार अस्थायी रूप से जेल से बाहर आने की अनुमति मिल चुकी है। इन releases की अवधि अलग-अलग मौकों पर एक दिन से लेकर 50 दिन तक रही है। इस वजह से उसकी बार-बार होने वाली temporary release लगातार सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का विषय बनती रही है। हालांकि parole या furlough का अर्थ सजा खत्म होना या दोषसिद्धि रद्द होना नहीं होता। तय अवधि पूरी होने के बाद कैदी को जेल लौटना होता है और प्रत्येक release सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी तथा निर्धारित शर्तों के अधीन होती है। 2026 में तीसरी बार Temporary Release राम रहीम को इस साल 2026 में ही तीसरी बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है। जनवरी 2026 में उसे 40 दिन की parole मिली थी। इसके बाद मई में वह 30 दिन की parole पर बाहर आया। वह 26 जून को वापस Sunaria Jail लौटा था। अब करीब दो महीने बाद उसे 21 दिन की furlough मिली है। यानी 2026 में अब तक: मिल चुकी है। Parole और Furlough में क्या अंतर? राम रहीम की रिहाई को लेकर अलग-अलग शुरुआती मीडिया रिपोर्टों में कहीं parole और कहीं furlough शब्द इस्तेमाल किया गया है। नवीनतम रिपोर्ट्स इसे 21 दिन की furlough बता रही हैं। Parole आमतौर पर किसी विशेष परिस्थिति या जरूरत के आधार पर दी जाने वाली temporary release होती है, जबकि furlough लंबे समय से सजा काट रहे पात्र कैदी को नियमों के तहत निश्चित अवधि की छुट्टी के रूप में मिल सकती है। Haryana prison rules के तहत पात्र कैदियों के लिए parole और furlough की अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं और दोनों के लिए सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होती है। किस मामले में जेल में है Ram Rahim? गुरमीत राम रहीम को 2017 में Panchkula की विशेष CBI अदालत ने दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के दो मामलों में दोषी ठहराया था। अदालत ने उसे प्रत्येक मामले में 10-10 साल की सजा सुनाई थी। दोनों सजाएं लगातार चलने के कारण कुल अवधि 20 वर्ष है। वह अगस्त 2017 से जेल में सजा काट रहा है। उसकी दोषसिद्धि के बाद पंचकूला और हरियाणा के कुछ अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर हिंसा भी हुई थी। Murder Cases में क्या स्थिति है? राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और पूर्व डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह से जुड़े हत्या मामलों में भी निचली अदालत से दोषी ठहराया गया था। हालांकि बाद में Punjab and Haryana High Court ने उसे इन दोनों मामलों में अलग-अलग फैसलों में बरी कर दिया। मौजूदा समय में वह मुख्य रूप से दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के मामलों में मिली 20 साल की सजा काट रहा है। इसलिए खबर में उसे murder cases में वर्तमान दोषी बताना सही नहीं होगा। बार-बार Parole-Furlough पर उठते रहे सवाल राम रहीम को लगातार मिलती अस्थायी रिहाई पहले भी राजनीतिक विवाद पैदा करती रही है। विशेष रूप से कुछ releases के चुनावों या डेरा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के आसपास होने को लेकर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। हालांकि Haryana government और prison authorities का रुख रहा है कि उसे मिलने वाली राहत जेल नियमों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत दी जाती है। किसी कैदी को parole या furlough मिलना अपने आप में असाधारण रूप से स्थायी कानूनी राहत नहीं है और उसे तय शर्तों का पालन करना होता है। इस बार Sirsa Dera में रहेगा Ram Rahim ताजा furlough की खास बात यह है कि राम रहीम को सिरसा स्थित Dera Sacha Sauda headquarters जाने की अनुमति दी गई है। पहले उसकी कई temporary releases के दौरान उसे उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित Barnawa Ashram में रहने की अनुमति दी जाती थी। लेकिन हाल की releases में वह सिरसा headquarters भी जा चुका है। सिरसा डेरा उसके संगठन का मुख्य केंद्र है और बड़ी संख्या में अनुयायी इससे जुड़े हैं। Furlough खत्म होने पर लौटना होगा जेल 21 दिन की furlough पूरी होने के बाद राम रहीम को दोबारा Sunaria Jail लौटना होगा, जब तक कि किसी अन्य वैधानिक आदेश से स्थिति में बदलाव न हो। Furlough उसकी मूल सजा को खत्म नहीं करती और न ही बलात्कार के मामलों में उसकी conviction पर कोई असर डालती है। फिलहाल 25 अगस्त 2026 की सबसे बड़ी ताजा अपडेट यही है कि गुरमीत राम रहीम सुबह 6:05 बजे के आसपास जेल से बाहर आया है और यह उसकी अब तक की 17वीं temporary release है। स्रोत – आजतक, एनडीटीवी, टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव हिन्दुस्तान जय राष्ट्र न्यूज़

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जलगांव में कांवड़ यात्रा के दौरान दर्दनाक हादसा; ट्रक की चपेट में आए बच्चे की मौत, गुस्साई भीड़ ने वाहन फूंका

जलगांव: महाराष्ट्र के जलगांव में कांवड़ यात्रा के दौरान एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक मासूम बच्चे की मौत हो गई। घटना 24 अगस्त 2026 की शाम ममुराबाद रोड इलाके में हुई। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक बच्चा मंदिर से दर्शन कर लौट रहा था, तभी तेज रफ्तार ट्रक ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया और गुस्साई भीड़ ने ट्रक में आग लगा दी। घटना के बाद पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। भीड़ ने सड़क पर प्रदर्शन किया, जिससे ममुराबाद रोड पर यातायात भी प्रभावित हुआ। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया। मंदिर से लौट रहा था बच्चा मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बच्चा कांवड़ यात्रा के दौरान ममुराबाद रोड स्थित एक मंदिर में पूजा-अर्चना करने गया था। मंदिर से बाहर निकलने के बाद वह सड़क की ओर आया, तभी कथित तौर पर तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक ने उसे टक्कर मार दी। टक्कर इतनी गंभीर थी कि बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद आसपास मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। बच्चे की उम्र को लेकर अलग-अलग जानकारी हादसे की शुरुआती रिपोर्टों में बच्चे की उम्र को लेकर अंतर सामने आया है। NDTV और कुछ अन्य रिपोर्ट्स में बच्चे की उम्र 8 वर्ष बताई गई है, जबकि एक स्थानीय रिपोर्ट में उसे 10 वर्षीय प्रबल राजू गवली बताया गया है। इसलिए आधिकारिक पुलिस पुष्टि आने तक बच्चे की उम्र को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। गुस्साई भीड़ ने ट्रक में लगाई आग बच्चे की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। गुस्साई भीड़ ने दुर्घटना में शामिल ट्रक को रोक लिया और बाद में उसमें आग लगा दी। कुछ रिपोर्ट्स में चालक के साथ मारपीट किए जाने की बात भी सामने आई है। ट्रक देखते ही देखते आग की लपटों में घिर गया। दमकल विभाग को बुलाया गया, लेकिन तनावपूर्ण माहौल के कारण राहत और नियंत्रण की कार्रवाई में भी मुश्किलें आईं। सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन हादसे से नाराज लोगों ने बच्चे का शव सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शन की वजह से जलगांव-ममुराबाद रोड पर करीब दो घंटे तक यातायात बाधित रहा। दोनों तरफ वाहनों की कतारें लग गईं। प्रदर्शनकारी चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे। Driver भी हुआ घायल घटना के बाद ट्रक चालक भी घायल हुआ। NDTV की रिपोर्ट में चालक को मामूली चोट लगने और इलाज के लिए अस्पताल ले जाए जाने की बात कही गई है। वहीं कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स में भीड़ की पिटाई से उसके गंभीर रूप से घायल होने का दावा किया गया है। चालक की स्थिति को लेकर रिपोर्ट्स में अंतर है, इसलिए उसकी medical condition पर पुलिस या अस्पताल की आधिकारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस ने संभाला मोर्चा हादसे और उसके बाद हुई आगजनी की खबर मिलते ही पुलिस की बड़ी टीम मौके पर पहुंची। भीड़ को शांत करने और यातायात सामान्य करने की कोशिश शुरू की गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया। TV9 की 25 अगस्त की सुबह की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए और मामले की जांच शुरू कर दी गई। पुलिस के सामने दो अलग घटनाओं की जांच इस मामले में अब पुलिस के सामने केवल सड़क दुर्घटना ही नहीं, बल्कि दुर्घटना के बाद हुई हिंसा और आगजनी की जांच भी अहम होगी। एक ओर यह पता लगाया जाएगा कि ट्रक की रफ्तार कितनी थी, चालक की लापरवाही थी या नहीं और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ। दूसरी ओर ट्रक में आग लगाने और चालक से कथित मारपीट में शामिल लोगों की पहचान भी जांच का हिस्सा बन सकती है। किस व्यक्ति के खिलाफ कौन-सी कानूनी धाराएं लगाई गई हैं, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी शुरुआती रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है। कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा पर सवाल हादसे ने धार्मिक यात्राओं के दौरान traffic management को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। कांवड़ यात्रा जैसे आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल या समूहों में सड़कों से गुजरते हैं। ऐसे में भारी वाहनों की movement, speed control, barricading और police deployment बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। जलगांव की घटना में भी यह जांच का विषय हो सकता है कि जिस route पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे, वहां भारी वाहन किस व्यवस्था के तहत चल रहे थे। 24 अगस्त की घटना, 25 अगस्त को भी चर्चा में यह हादसा सोमवार, 24 अगस्त 2026 की शाम हुआ था। 25 अगस्त की सुबह भी घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया तथा समाचार माध्यमों में चर्चा में हैं। फिलहाल सबसे बड़ा तथ्य यह है कि कांवड़ यात्रा के दौरान एक मासूम बच्चे की जान चली गई। इसके बाद भड़के आक्रोश ने हिंसक रूप ले लिया और दुर्घटना में शामिल ट्रक को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस अब दुर्घटना और उसके बाद हुई घटनाओं की जांच कर रही है। नोट: बच्चे की उम्र और ट्रक चालक की चोट की गंभीरता को लेकर शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग जानकारी है। आधिकारिक पुलिस विवरण आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। स्रोत – एनडीटीवी, टीवी9 भारतवर्ष, दैनिक भास्कर हिंदी जय राष्ट्र न्यूज़

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मराठी भाषा नियम के विरोध में मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों की 3 दिन की हड़ताल, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और app-based cab drivers के लिए कामचलाऊ मराठी का ज्ञान अनिवार्य किए जाने के विरोध में मुंबई के कुछ हिस्सों में ऑटो-टैक्सी चालकों ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल 24 अगस्त 2026 से शुरू हुई और 25 अगस्त को भी इसका असर कई इलाकों में देखने को मिला। यात्रियों को ऑटो और टैक्सी मिलने में दिक्कत हुई और कई जगह 40 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। प्रदर्शनकारी चालकों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने से आपत्ति नहीं है, बल्कि उनकी नाराजगी language test के तरीके, कम समय और कथित रूप से training से बाहर पूछे जा रहे सवालों को लेकर है। दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि drivers को मराठी का expert नहीं बनना है, बल्कि काम के दौरान यात्रियों से बातचीत करने लायक basic Marathi आनी चाहिए। कांदिवली में सड़क पर उतरे चालक हड़ताल का सबसे ज्यादा असर मुंबई के Kandivali क्षेत्र में देखने को मिला। सोमवार सुबह Laljipada के पास Kandivali Link Road पर दर्जनों drivers ने रास्ता-रोको प्रदर्शन किया। कुछ समय के लिए traffic भी प्रभावित हुआ और मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा। Kandivali के अलावा Malad West, Santacruz, Dahisar और Andheri समेत कुछ अन्य इलाकों में भी demonstrations की खबरें सामने आईं। कई चालकों ने काम बंद करके दूसरे drivers से भी protest में शामिल होने की अपील की। क्यों हो रहा है विरोध? महाराष्ट्र Transport Department ने passenger vehicles चलाने वाले drivers के लिए working knowledge of Marathi की शर्त को सख्ती से लागू करना शुरू किया है। RTO अधिकारी drivers से बातचीत कर यह जांच रहे हैं कि वे दैनिक कामकाज के लिए जरूरी मराठी समझ और बोल सकते हैं या नहीं। Assessment process को video-record भी किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह शर्त नई नहीं है। Transport Minister Pratap Sarnaik के मुताबिक practical Marathi knowledge से जुड़ी requirement महाराष्ट्र में 1989 से मौजूद है, लेकिन अब इसे ज्यादा सख्ती से लागू किया जा रहा है। Drivers बोले- Marathi सीखने से आपत्ति नहीं प्रदर्शनकारी drivers का कहना है कि उनका विरोध मराठी भाषा से नहीं है। उनका आरोप है कि RTO assessment में ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं जो उन्हें दी गई training का हिस्सा नहीं थे। कई drivers ने यह भी कहा कि वे मराठी समझते हैं और टूटी-फूटी भाषा में बातचीत कर सकते हैं, लेकिन fluency हासिल करने के लिए उन्हें ज्यादा समय चाहिए। कुछ drivers ने यह भी कहा कि वे रोज की कमाई पर निर्भर हैं और language classes के लिए काम छोड़ना उनके लिए आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। पहले Notice, फिर हो सकती है कार्रवाई सरकार के नियम के मुताबिक किसी driver में पर्याप्त working knowledge नहीं मिलने पर तत्काल licence cancel नहीं किया जाएगा। पहले उसे एक महीने का notice दिया जाएगा ताकि वह मराठी सीख सके। अगर एक महीने के बाद भी वह requirement पूरी नहीं करता, तो उसका badge तीन महीने के लिए suspend किया जा सकता है। इसके बाद भी जानबूझकर भाषा नहीं सीखने की स्थिति में badge और permit cancellation जैसी कार्रवाई हो सकती है। यानी किसी driver के language test में कमजोर पाए जाने भर से तुरंत permanent licence cancellation का नियम नहीं है। ₹5,000 से ₹25,000 Fine की खबरों पर सरकार की सफाई प्रदर्शन के दौरान drivers में यह डर भी फैला कि मराठी नहीं आने पर ₹5,000 से ₹20,000 या उससे ज्यादा का fine लगाया जा रहा है। Borivali RTO के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ऐसी भारी penalty को लेकर misinformation फैलने की बात सामने आई है। Transport Minister Pratap Sarnaik ने कहा कि एक महीने की notice period पूरी होने से पहले अगर कोई RTO अधिकारी गलत तरीके से fine लगाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य drivers को परेशान करना नहीं है, बल्कि उन्हें practical Marathi सीखने का मौका देना है। Fadnavis बोले- Marathi Expert बनाना मकसद नहीं मामला बढ़ने के बाद Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis ने भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरकार किसी हिंदीभाषी या गैर-मराठी driver को Marathi language expert नहीं बनाना चाहती। उनके मुताबिक driver को केवल इतनी मराठी आनी चाहिए कि वह अपने काम से जुड़े सामान्य सवाल और यात्रियों से basic बातचीत कर सके। फडणवीस ने यह भी कहा कि drivers को भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है और अभी तक किसी licence को केवल इस आधार पर cancel नहीं किया गया है। पहले दिन 8,217 Drivers की हुई जांच Transport Department के आंकड़ों के मुताबिक शुरुआती verification drive में पूरे महाराष्ट्र में 8,217 auto-rickshaw और taxi drivers की जांच की गई। इनमें 1,268 drivers को notice जारी किया गया। Mumbai Metropolitan Region में 3,995 drivers की जांच की गई, जिनमें 604 drivers working Marathi requirement पूरी नहीं कर पाए। बाकी जिलों में 4,222 drivers की जांच हुई और 664 को notice मिला। महाराष्ट्र में कुल करीब 9.65 लाख auto-rickshaw और taxi permits/badges बताए गए हैं। 1.65 लाख से ज्यादा Drivers ने ली Marathi Training सरकार के मुताबिक करीब 1.65 लाख non-Marathi auto और taxi drivers अब तक Marathi language classes में शामिल हो चुके हैं और कई को certificates भी दिए गए हैं। सरकार का तर्क है कि training programme drivers को basic conversation सीखने के लिए पर्याप्त अवसर देता है। वहीं विरोध कर रहे चालकों का कहना है कि इतनी बड़ी workforce के लिए training और assessment process को ज्यादा practical और flexible बनाने की जरूरत है। Bombay High Court पहुंचा मामला इस विवाद में 25 अगस्त को एक नया कानूनी मोड़ भी सामने आया। चार app-based cab drivers की ओर से Bombay High Court में PIL दायर किए जाने की प्रक्रिया सामने आई है, जिसमें Maharashtra government के 12 August notification को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि Marathi language requirement Articles 14, 19 और 21 के तहत उनके fundamental rights को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने यह भी तर्क दिया है कि Motor Vehicles Act, 1988 में driving licence रखने के लिए किसी खास भाषा की…

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नेताओं की भक्ति या राजनीति का नया रूप? भगवान के स्वरूप में नेताओं की तस्वीरों से फिर छिड़ी बहस

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में नेताओं की प्रशंसा नई बात नहीं है, लेकिन जब किसी राजनीतिक नेता को भगवान, अवतार या धार्मिक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जाने लगे तो सवाल सिर्फ समर्थकों की भावना तक सीमित नहीं रहता। यह राजनीतिक व्यक्तिपूजा, धर्म और चुनावी संदेश—तीनों के मेल पर बहस छेड़ देता है। हाल के महीनों में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं। वाराणसी में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में, हाथ में संविधान लिए दिखाया। वहीं दिल्ली के Press Club of India में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देवता-सदृश तस्वीर के सामने आरती और ‘मोदी चालीसा’ के वीडियो वायरल हुए। इससे पहले लखनऊ में एक पोस्टर में मोदी को श्रीकृष्ण और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अर्जुन के रूप में पेश किया गया था। इन घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—क्या यह सिर्फ समर्थकों की भक्ति है, या नेताओं की छवि को धार्मिक प्रतीकों के जरिए मजबूत करने की नई राजनीतिक रणनीति? अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण, हाथ में संविधान 1 जुलाई 2026 को अखिलेश यादव के जन्मदिन पर वाराणसी में समाजवादी युवजन सभा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने हवन का आयोजन किया। इसी दौरान जारी किए गए पोस्टर में अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में दिखाया गया और उनके हाथों में संविधान की प्रतियां दिखाई गईं। कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय और संविधान की रक्षा का प्रतीक बताया। लेकिन BJP ने पोस्टर का विरोध करते हुए इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देखा और समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं से माफी की मांग की। यहां दिलचस्प बात यह थी कि धार्मिक प्रतीक और राजनीतिक संदेश को एक ही तस्वीर में जोड़ा गया—श्रीकृष्ण का स्वरूप और संविधान। PM Modi की आरती और ‘Modi Chalisa’ अगस्त में दिल्ली से एक और विवाद सामने आया। Press Club of India में आयोजित एक कार्यक्रम के वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देवता-सदृश स्वरूप में दिखाने वाले cutout के सामने आरती की गई और ‘Modi Chalisa’ का पाठ किया गया। Press Club of India ने बाद में स्पष्ट किया कि उसने इस आयोजन को आयोजित नहीं किया था। उसके मुताबिक hall को press conference के लिए किराए पर लिया गया था और जब वहां अलग तरह की गतिविधि सामने आई तो कार्यक्रम को रोक दिया गया। इसी कार्यक्रम से जुड़े Rajan Singh ने बिहार में प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर मंदिर बनाने की योजना की भी बात कही। उन्होंने लगभग ₹112 करोड़ की लागत और पांच एकड़ जमीन पर मंदिर का दावा किया, हालांकि सरकारी जमीन या funding के उनके दावे का स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया था। मोदी ‘कृष्ण’, योगी ‘अर्जुन’ मई 2026 में लखनऊ में लगे एक अन्य राजनीतिक पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान श्रीकृष्ण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अर्जुन के रूप में दिखाया गया था। पोस्टर में राजनीति को महाभारत के ‘कुरुक्षेत्र’ के प्रतीक से जोड़कर पेश किया गया। इस तरह के पोस्टर बताते हैं कि धार्मिक कथाओं और पात्रों का इस्तेमाल अब केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है; उन्हें राजनीतिक messaging में भी बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसा सिर्फ एक Party में नहीं इन उदाहरणों की सबसे अहम बात यह है कि यह प्रवृत्ति किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। अखिलेश यादव के समर्थक उन्हें श्रीकृष्ण के रूप में दिखाते हैं, वहीं दूसरी ओर नरेंद्र मोदी के समर्थक उन्हें राम या कृष्ण जैसे धार्मिक प्रतीकों से जोड़ते दिखाई देते हैं। इसलिए इसे केवल BJP, SP या किसी एक पार्टी की रणनीति कहना सही नहीं होगा। कई बार ऐसे पोस्टर और कार्यक्रम स्थानीय समर्थकों या कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित किए जाते हैं, और जरूरी नहीं कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उन्हें आधिकारिक रूप से मंजूरी देता हो। यही अंतर समाचार रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण है। नेता से ‘प्रतीक’ बनने तक राजनीति में लोकप्रिय नेता अक्सर अपनी पार्टी से आगे बढ़कर एक प्रतीक बन जाते हैं। समर्थक उन्हें किसी खास विचार से जोड़ते हैं—जैसे विकास, सामाजिक न्याय, राष्ट्रवाद, संविधान, धर्म या किसी समुदाय के अधिकार। लेकिन जब यह प्रतीकात्मकता धार्मिक स्वरूप लेने लगती है तो नेता और देवता के बीच की सीमा धुंधली होने लगती है। राजनीतिक संचार के नजरिए से देखा जाए तो भगवान या धार्मिक पात्र से तुलना नेता को साधारण राजनीतिक व्यक्ति से ऊपर उठाकर नैतिक या भावनात्मक authority देने का प्रयास भी हो सकती है। सोशल Media ने बदल दिया Poster Politics का असर एक समय राजनीतिक पोस्टर किसी शहर या विधानसभा क्षेत्र तक सीमित रहते थे। अब एक छोटा पोस्टर भी कुछ घंटों में पूरे देश में वायरल हो सकता है। Instagram, X, Facebook और WhatsApp के कारण राजनीतिक कार्यकर्ता जानते हैं कि विवादित या असामान्य visual को सामान्य पोस्टर की तुलना में कहीं ज्यादा reach मिलेगी। यही कारण है कि नेता को देवता के रूप में दिखाने वाली तस्वीरें अक्सर तुरंत national debate बन जाती हैं। धार्मिक प्रतीकों वाली तस्वीरें लोगों की भावनाओं से जुड़ती हैं, इसलिए उनका engagement भी ज्यादा होता है। भक्ति और राजनीतिक Branding के बीच महीन अंतर किसी समर्थक के लिए अपने पसंदीदा नेता की पूजा करना व्यक्तिगत श्रद्धा हो सकती है। लेकिन जब उसी गतिविधि में party slogans, राजनीतिक संदेश, चुनावी narrative या organised publicity जुड़ जाती है, तो इसे केवल व्यक्तिगत आस्था कहना मुश्किल हो जाता है। उदाहरण के तौर पर अखिलेश यादव के पोस्टर में संविधान जोड़ना स्पष्ट राजनीतिक संदेश था। उसी तरह ‘Modi Chalisa’ आयोजन में प्रधानमंत्री की राजनीतिक उपलब्धियों को उनकी पूजा के औचित्य से जोड़ा गया। इसलिए कई मामलों में भक्ति और political branding एक-दूसरे में मिलती नजर आती हैं। क्या इससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं? विरोध करने वालों का तर्क है कि जीवित राजनीतिक नेताओं की तुलना भगवान से करना धार्मिक परंपराओं का राजनीतिक इस्तेमाल है। अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण के रूप में दिखाए जाने पर BJP की प्रतिक्रिया इसी आधार पर थी। दूसरी ओर Modi Chalisa कार्यक्रम को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई लोगों ने धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल की आलोचना की। लेकिन समर्थक इसे अपनी आस्था और अभिव्यक्ति का अधिकार बताते हैं। यहीं से विवाद शुरू होता है—एक व्यक्ति के लिए सम्मान, दूसरे के लिए धार्मिक अतिशयोक्ति हो सकता…

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बाबा रामदेव बोले- ‘आजकल लोगों ने हमें खूब पेल रखा है, ज्यादा बात नहीं करेंगे’; बयान चर्चा में

हरिद्वार: योग गुरु बाबा रामदेव एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। हरिद्वार में मीडिया से बातचीत के दौरान रामदेव ने कहा, “आजकल लोगों ने हमें खूब पेल रखा है तो हम ज्यादा बात नहीं करेंगे।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया गया और इसे हाल के दिनों में उनके खिलाफ हुई बयानबाजी और विवादों से जोड़कर देखा जा रहा है। रामदेव ने इसी बातचीत में देश में चल रहे आंदोलनों, सामाजिक सम्मान, आरक्षण, ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ और वंदे मातरम समेत कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। किस मौके पर दिया बाबा रामदेव ने बयान? यह बयान 23 अगस्त 2026 को हरिद्वार में सामने आया था। यहां ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर आयोजित संत सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, बाबा रामदेव और कई प्रमुख संत शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में रामदेव से अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक विवादों को लेकर सवाल किए गए। इसी दौरान उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि आजकल लोग उन्हें काफी निशाने पर ले रहे हैं, इसलिए वह ज्यादा बात नहीं करेंगे। हाल में Kangana Ranaut से हुआ था विवाद रामदेव का यह बयान ऐसे समय आया जब BJP सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ उनकी जुबानी जंग चर्चा में रही। विवाद की शुरुआत कंगना रनौत द्वारा Gen-Z को लेकर की गई टिप्पणी से हुई थी। बाबा रामदेव ने कंगना के बयान की आलोचना करते हुए उनके qualification, अतीत और निजी जीवन से जुड़ी टिप्पणियां की थीं। इसके जवाब में कंगना ने भी रामदेव पर तीखा हमला किया और कहा कि उन्हें उनके निजी जीवन और चरित्र पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। कंगना ने पतंजलि से जुड़े पुराने कानूनी विवादों का भी जिक्र किया। इसके बाद मामला लगातार सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चा में बना रहा। बाद में बोले- ‘ओछी सोच वालों पर कुछ नहीं कहना’ हरिद्वार में जब बाबा रामदेव से कंगना रनौत और अन्य आलोचनाओं को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने ज्यादा प्रतिक्रिया देने से बचने का रुख अपनाया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रामदेव ने कहा कि वह ‘ओछी और घटिया सोच’ वाले लोगों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। इसके बाद उनका “लोगों ने हमें खूब पेल रखा है” वाला बयान सामने आया, जिसे सोशल मीडिया पर उनके पहले के आक्रामक बयानों की तुलना में बदले हुए अंदाज के रूप में देखा गया। हालांकि इसे किसी औपचारिक माफी या अपने पुराने बयानों से पीछे हटने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आंदोलनों को लेकर भी दिया बड़ा बयान बाबा रामदेव ने देश में चल रहे अलग-अलग आंदोलनों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन सड़क और संसद में लगातार हंगामा कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। रामदेव ने कहा कि कुछ लोग आंदोलन और हंगामे के जरिए देश की सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसा संभव नहीं है। बच्चों को आंदोलन में उतारने का किया विरोध रामदेव ने आंदोलनों में नाबालिग बच्चों की भागीदारी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर किसी वयस्क को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना है तो वह लोकतांत्रिक तरीके से खुद अपनी लड़ाई लड़े, लेकिन बच्चों को आंदोलनों में आगे नहीं करना चाहिए। उनका यह बयान हाल में दिल्ली में छात्र आंदोलनों और आरक्षण से जुड़े विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में सामने आया। SC-ST के साथ Brahmin सम्मान पर भी बोले बाबा रामदेव ने सामाजिक सम्मान और संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि यदि SC-ST समुदाय के किसी व्यक्ति का अपमान संविधान के खिलाफ माना जाता है तो ब्राह्मण समुदाय के किसी व्यक्ति का अपमान भी उसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान सम्मान और अधिकार देता है और किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। रामदेव का यह बयान आरक्षण और जातिगत मुद्दों को लेकर चल रही बहस के बीच आया था। One Nation One Election का किया समर्थन हरिद्वार के कार्यक्रम में बाबा रामदेव ने केंद्र सरकार की ‘One Nation, One Election’ पहल का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश में सालभर किसी न किसी राज्य में चुनाव चलते रहते हैं, जिससे सरकारी मशीनरी और प्रशासन पर दबाव बढ़ता है। रामदेव ने तर्क दिया कि चुनावों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की duty लगाई जाती है, जिससे पढ़ाई भी प्रभावित होती है। अगर देशभर में एक साथ चुनाव हों तो प्रशासनिक संसाधनों और समय का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने ‘One Nation, One Education’ की जरूरत पर भी जोर दिया और शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की वकालत की। Vande Mataram पर भी रखी अपनी बात बाबा रामदेव ने वंदे मातरम और भारत माता के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भारत माता को आस्था, शक्ति, ज्ञान और कर्तव्य का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और संस्कृति से जुड़े विषयों को राजनीतिक विवाद के बजाय व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। क्यों वायरल हुआ ‘पेल रखा है’ वाला बयान? रामदेव अक्सर सार्वजनिक मंचों पर तीखे और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में उनका यह कहना कि “आजकल लोगों ने हमें खूब पेल रखा है, तो हम ज्यादा बात नहीं करेंगे” सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींच गया। हाल के दिनों में कंगना रनौत के साथ विवाद और दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर आलोचना के कारण भी इस टिप्पणी को ज्यादा चर्चा मिली। हालांकि रामदेव ने यह नहीं कहा कि वह अपने किसी पुराने बयान को वापस ले रहे हैं। इसलिए इसे केवल उनकी बातचीत के दौरान की गई टिप्पणी के रूप में देखना अधिक उचित होगा। नोट: यह बयान 23 अगस्त 2026 का है। इसे 25 अगस्त की ताजा घटना के रूप में प्रकाशित न करें। स्रोत – इंडिया डेली, आजतक, नवभारत टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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6 सितंबर को दिल्ली में सजेगा Luxe Aura Couture Week 2026, Fashion Grace की Dipanwita Das Dutta संभालेंगी आयोजन की कमान

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली सितंबर में फैशन, ग्लैमर और उभरती प्रतिभाओं के एक बड़े आयोजन की गवाह बनने जा रही है। Luxe Aura Couture Week 2026 का आयोजन 6 सितंबर 2026 को पश्चिम विहार, नई दिल्ली में किया जाएगा। इस फैशन इवेंट को Fashion Grace द्वारा प्रस्तुत और आयोजित किया जा रहा है, जबकि आयोजन की मुख्य जिम्मेदारी Fashion Grace की Founder Dipanwita Das Dutta संभाल रही हैं। आयोजकों ने Luxe Aura Couture Week को दिल्ली के बड़े fashion runway events में से एक के रूप में प्रस्तुत किया है। कार्यक्रम की मूल भावना “Empowering Confidence, Celebrating Elegance, Creating Opportunities” रखी गई है, यानी फैशन और एलिगेंस के साथ-साथ नए टैलेंट के लिए अवसर तैयार करना भी आयोजन का अहम उद्देश्य है। Dipanwita Das Dutta के नेतृत्व में होगा Luxe Aura Couture Week Luxe Aura Couture Week 2026 के केंद्र में Dipanwita Das Dutta हैं, जिन्हें आधिकारिक event presentation में Founder of Fashion Grace और Founder & Organizer के तौर पर पेश किया गया है। उनकी संलग्न professional portfolio भी fashion और modelling space से उनके जुड़ाव की झलक देती है। Portfolio में contemporary western styling से लेकर traditional Indian attire और runway-oriented fashion looks तक कई अलग-अलग presentations दिखाई गई हैं। यही अनुभव Luxe Aura Couture Week के उस उद्देश्य से भी जुड़ता है, जिसके तहत established names के साथ emerging models और fashion talent को भी मंच देने की तैयारी की गई है। कार्यक्रम में Kirti Saxena को Co-Organizer के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा Maneesh Mall, Director of BigGMNM Event, और Saim Ali, Founder of Unscripted Models Agency, supporting partners के रूप में कार्यक्रम से जुड़े हैं। क्या है Fashion Grace? Fashion Grace खुद को fashion, beauty और lifestyle से जुड़ी ऐसी organisation के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य aspiring models, influencers, entrepreneurs और beauty queens को पहचान दिलाना और उनके लिए नए अवसर तैयार करना है। Organisation की vision talent, confidence, leadership और personal excellence के लिए एक मजबूत मंच तैयार करना है। वहीं इसकी mission fashion, grooming, media exposure और national-level recognition के जरिए प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना है। Fashion Grace से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट fashiongrace.in भी उपलब्ध है। Shahbaz Khan होंगे Celebrity Guest कार्यक्रम में मनोरंजन जगत की मौजूदगी भी खास रहने वाली है। अभिनेता Shahbaz Khan को Luxe Aura Couture Week 2026 का Celebrity Guest घोषित किया गया है। Shahbaz Khan भारतीय टेलीविजन और फिल्मों का जाना-पहचाना नाम हैं। Event presentation में उनके प्रमुख कामों में Chandrakanta और The Great Maratha जैसे television shows के साथ Ziddi, Arjun Pandit और Agent Vinod जैसी फिल्मों का उल्लेख किया गया है। 500+ मॉडल्स, 20+ डिजाइनर्स और 75+ मेकअप आर्टिस्ट Luxe Aura Couture Week 2026 को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी है। Organisers द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, event ecosystem में 20 से ज्यादा designers, 75 से ज्यादा makeup artists और 500 से ज्यादा models की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा fashion-conscious consumers, influencers, content creators, business professionals, emerging talent, media networks और industry experts को भी इस platform से जोड़ने की योजना है। इतनी बड़ी संख्या में fashion और beauty professionals की मौजूदगी इसे केवल एक runway presentation नहीं, बल्कि networking, exposure और talent discovery platform के रूप में भी स्थापित करने की कोशिश को दर्शाती है। Talent और Gifting Partners भी जुड़े Luxe Aura Couture Week ने अलग-अलग क्षेत्रों के partners को भी अपने साथ जोड़ा है। Evoke Casting by Jack को event का Official Talent Partner बनाया गया है, जबकि Pinnacle Horizon को Official Gifting Partner के रूप में शामिल किया गया है। Event presentation में Fashion Grace के साथ अन्य partner organisations को भी कार्यक्रम के pillars के रूप में दिखाया गया है। सिर्फ रनवे नहीं, ब्रांड्स और नए टैलेंट के लिए भी प्लेटफॉर्म Luxe Aura Couture Week का दायरा केवल models और designers की runway presentation तक सीमित नहीं रखा गया है। Organisers इसे brands, creators और industry professionals के लिए भी networking और visibility platform के रूप में विकसित कर रहे हैं। Event में national exposure, social media reach, celebrity association, premium brand visibility, on-ground branding और content creation opportunities जैसे elements भी शामिल किए गए हैं। अलग-अलग sponsorship categories के तहत award category ownership, stage mentions, gifting opportunities, official partner designation और social media recognition जैसी branding possibilities भी उपलब्ध कराई गई हैं। 6 सितंबर को पश्चिम विहार में फैशन का बड़ा मंच Fashion Grace और मुख्य आयोजक Dipanwita Das Dutta के नेतृत्व में होने वाला Luxe Aura Couture Week 2026 fashion, beauty, entertainment और emerging talent को एक मंच पर लाने की तैयारी में है। 6 सितंबर 2026 को पश्चिम विहार, नई दिल्ली में होने वाला यह आयोजन designers और models के लिए runway opportunity देने के साथ makeup artists, creators, industry professionals और brands के बीच नए connections तैयार करने का भी प्रयास करेगा। Fashion Grace की आधिकारिक वेबसाइट: fashiongrace.in Sponsorship Enquiries: Dipanwita Das DuttaPhone: +91 89107 47245Email: fashiongrace111@gmail.comInstagram: @fashiongrace111

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IIT Bombay ने PhD पूरी करने के लिए तय की Maximum 8 साल की सीमा, नए Registrations पर सख्त होगा Rule

मुंबई: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे यानी IIT Bombay ने PhD programmes को लंबे समय तक लंबित रहने से रोकने के लिए समय-सीमा को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। संस्थान के मौजूदा नियमों के मुताबिक सामान्य PhD registration की अवधि छह साल होती है, जिसे आवश्यक मंजूरी के बाद अधिकतम 8 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद सामान्य श्रेणी के शोधार्थी का registration स्वतः समाप्त हो सकता है। यह कदम उस internal review के बाद चर्चा में आया है जिसमें IIT Bombay ने पाया कि कुछ PhD scholars एक दशक से भी ज्यादा समय से अपना doctoral programme पूरा नहीं कर पाए थे। संस्थान का उद्देश्य research की quality से समझौता किए बिना अनावश्यक देरी को कम करना और students तथा supervisors दोनों के लिए स्पष्ट timeline तय करना है। IIT Bombay के Official Rules क्या कहते हैं? IIT Bombay के 2026-27 PhD Rules के मुताबिक सामान्य PhD programme की registration validity joining date से छह साल है। Masters + PhD programmes के लिए यह अवधि सामान्य तौर पर सात साल निर्धारित की गई है। अगर student इस निर्धारित अवधि में thesis submit नहीं कर पाता, तो उसे Annual Progress Seminar यानी APS के समय registration extension के लिए आवेदन करना होता है। Extension मिलने के बाद भी सामान्य PhD और Masters+PhD students का registration अधिकतम आठ साल तक ही जारी रह सकता है। आठ साल पूरे होने के बाद registration स्वतः cancel किए जाने का प्रावधान है। सभी PhD Students के लिए 8 साल की Limit नहीं इस नियम में एक महत्वपूर्ण exception भी है। External और College Teacher category में registered PhD students के लिए registration अधिकतम 10 साल तक extend किया जा सकता है। इसलिए “हर PhD student को आठ साल में programme पूरा करना होगा” कहना पूरी तरह सही नहीं होगा। Eight-year ceiling मुख्य रूप से regular और अधिकांश अन्य PhD categories पर लागू होती है। 12 से 16 साल से चल रही थीं कुछ PhDs IIT Bombay ने लंबे समय से pending PhD cases की समीक्षा भी की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक institute को ऐसे scholars मिले जो 12, 14 और यहां तक कि 16 वर्षों से doctoral programme में registered थे। एक institutional review में करीब 100 से 125 ऐसे cases सामने आए थे जिनकी PhD आठ साल से ज्यादा समय से लंबित थी। Institute ने इन students से delays की वजह पूछी और अलग-अलग मामलों को resolve करने की प्रक्रिया शुरू की। Guide की समस्या हुई तो Supervisor भी बदला समीक्षा के दौरान PhD पूरा होने में देरी के अलग-अलग कारण सामने आए। कुछ मामलों में research supervisor से जुड़ी समस्याएं थीं, जबकि कुछ scholars दूसरी नौकरी या professional commitments में चले गए थे। Covid-19 के दौरान laboratory access, field work और faculty interaction प्रभावित होने से भी research timelines पर असर पड़ा। जहां delay का कारण research guide से जुड़ा पाया गया, वहां institute ने कुछ मामलों में guide बदलने की सुविधा भी दी। Careers360 की रिपोर्ट के मुताबिक आठ साल से ज्यादा समय से pending 100-125 cases को review करने के बाद अब ऐसा कोई backlog नहीं बचा है। Registration Terminate करने की भी चेतावनी लंबे समय से PhD कर रहे scholars को institute ने साफ संदेश दिया कि programme को अनिश्चित समय तक जारी नहीं रखा जा सकता। रिपोर्ट के मुताबिक 12 साल से doctoral programme में मौजूद कुछ scholars को registration terminate किए जाने की चेतावनी दी गई थी। IIT Bombay का उद्देश्य छात्रों को programme से बाहर करना मात्र नहीं था, बल्कि delay के वास्तविक कारणों की पहचान कर PhD completion को तेज करना था। Record 620 PhD Degrees Award PhD backlog कम करने की इस exercise के बीच IIT Bombay ने एक नया record भी बनाया है। Academic year 2025-26 में IIT Bombay ने 620 PhD degrees award कीं, जो institute के इतिहास में सबसे अधिक हैं। IIT Bombay के मुताबिक किसी IIT द्वारा एक साल में 600 से ज्यादा PhD degrees दिए जाने का यह पहला मौका है। Institute की 64वीं Convocation और Departmental Degree Award Functions के दौरान पूरे academic year में कुल 3,763 degrees प्रदान की गईं। इनमें: शामिल थीं। Director Shireesh Kedare ने क्या कहा? IIT Bombay के Director Prof. Shireesh Kedare ने कहा कि institute PhD completion time कम करने पर काम कर रहा है। उनके मुताबिक pending PhDs की समीक्षा इसलिए की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि students किन वजहों से programme पूरा नहीं कर पा रहे हैं और उन bottlenecks को कैसे हटाया जा सकता है। Institute research output बढ़ाने के साथ faculty-student interaction बेहतर करने पर भी ध्यान दे रहा है। PhD की सामान्य Funding कितने समय मिलती है? IIT Bombay के official admission information के मुताबिक Teaching Assistantship और Research Assistantship जैसी कई categories में institute-supported financial assistance सामान्य तौर पर अधिकतम पांच साल या thesis submission तक, जो भी पहले हो, उपलब्ध होती है। Teaching Assistantship category में पहले दो वर्षों के लिए ₹37,000 प्रति माह और उसके बाद निर्धारित अवधि के लिए ₹42,000 प्रति माह assistantship दी जाती है। Research Assistantship category में शुरुआती दो वर्षों के लिए ₹42,000 और बाद के वर्षों में ₹47,000 प्रति माह का प्रावधान है। इस तरह funding period और maximum registration period अलग-अलग हैं। आठ साल तक registration संभव होने का मतलब यह नहीं है कि institute assistantship भी पूरे आठ साल तक देगा। Annual Progress Seminar से होगी Research की निगरानी IIT Bombay में PhD scholars के लिए Annual Progress Seminar यानी APS research monitoring का महत्वपूर्ण हिस्सा है। Research Progress Committee student के काम की नियमित समीक्षा करती है। Poor performance की स्थिति में repeat APS कराया जा सकता है। Official rules के मुताबिक लगातार दो खराब performance reports या बिना अनुमति APS प्रस्तुत न करने जैसी स्थितियों में PhD registration cancel भी किया जा सकता है। इसका उद्देश्य केवल अंतिम deadline लागू करना नहीं, बल्कि programme के दौरान ही research progress पर लगातार नजर रखना है। PhD में ज्यादा समय क्यों बनता है समस्या? Doctoral research की अवधि subject और research problem के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।…

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KVS-NVS Tier-II Result 2026 जारी, PGT Physics, Vice Principal और Stenographer Grade-II का Result घोषित

नई दिल्ली: Kendriya Vidyalaya Sangathan (KVS) और Navodaya Vidyalaya Samiti (NVS) भर्ती 2025 में शामिल उम्मीदवारों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। Central Board of Secondary Education (CBSE) ने Tier-II Recruitment Examination 2026 के एक और चरण के नतीजे जारी कर दिए हैं। 23 अगस्त 2026 को जारी नवीनतम phase में PGT Physics, Vice Principal और Stenographer Grade-II पदों का Tier-II result/shortlisting status घोषित किया गया है। उम्मीदवार recruitment application portal पर login कर अपना result देख सकते हैं। किन Posts का Result हुआ जारी? CBSE की latest result declaration में तीन प्रमुख categories शामिल हैं: इनमें PGT Physics teaching category में आता है, जबकि Vice Principal और Stenographer Grade-II अन्य recruitment categories में शामिल हैं। यह भर्ती Advertisement No. RECTT. NOTIFICATION/01/2025 के तहत KVS और NVS में teaching और non-teaching posts के लिए आयोजित की जा रही है। Candidate Login से देख सकेंगे Result उम्मीदवारों को अपना result या shortlisting status देखने के लिए KVS-NVS recruitment candidate portal पर login करना होगा। इसके लिए उम्मीदवारों को सामान्य तौर पर: Result उपलब्ध होने पर उसकी copy download करके सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। PGT Physics Candidates के लिए आगे क्या? PGT Physics के लिए Tier-II result जारी होने का मतलब recruitment process पूरी होना नहीं है। PGT जैसे पदों में Interview भी selection process का हिस्सा है। Tier-II में निर्धारित criteria पूरा करने वाले candidates को अगले चरण यानी interview के लिए shortlist किया जाएगा। Interview का schedule और call letter बाद में candidates के respective application login के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा। इसलिए shortlisted candidates को अपना portal नियमित रूप से check करते रहना चाहिए। Vice Principal के लिए भी होगा Interview Vice Principal post की selection process में भी interview शामिल है। Recruitment scheme के अनुसार KVS Vice Principal के लिए Tier-I और Tier-II examination के बाद shortlisted candidates को interview stage से गुजरना होगा। इस वजह से अभी जारी Tier-II result को final selection list नहीं समझना चाहिए। Interview और अन्य आवश्यक formalities पूरी होने के बाद ही final merit/selection की स्थिति स्पष्ट होगी। Stenographer Grade-II Candidates को देना होगा Skill Test Stenographer Grade-II candidates के लिए आगे की प्रक्रिया अलग है। Official recruitment scheme के मुताबिक Stenographer Grade-I और Grade-II के लिए Tier-II के बाद Skill Test आयोजित किया जाता है। Skill Test qualifying nature का होगा और final merit Tier-II में प्राप्त marks के आधार पर तैयार की जाएगी, बशर्ते candidate skill test qualify करे। इसलिए Stenographer Grade-II में shortlisted candidates को अब skill test schedule का इंतजार करना होगा। क्या सभी Candidates के Marks जारी हो गए? यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। जिन posts में Interview selection process का हिस्सा है, वहां अभी मुख्य रूप से shortlisting status जारी किया जा रहा है। ऐसे candidates की marksheet final recruitment process के बाद उपलब्ध कराई जा सकती है। Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक interview वाले posts के marks final result प्रकाशित होने के बाद निर्धारित समय में उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं जिन posts में interview नहीं है, उनके Tier-II marks result declaration के साथ candidate login में उपलब्ध कराए जा सकते हैं। 27 से 31 March को हुई थी Tier-II परीक्षा KVS-NVS Recruitment 2025 की Tier-II written examinations 27 March से 31 March 2026 के बीच आयोजित की गई थीं। इसके बाद CBSE ने answer keys और results को phase-wise जारी करना शुरू किया। इस पूरी recruitment exercise में 15,000 से ज्यादा teaching और non-teaching vacancies शामिल हैं। 17 August से शुरू हुआ Result का Phase-wise Release CBSE ने Tier-II results को एक साथ जारी करने के बजाय अलग-अलग phases में घोषित किया है। पहला result phase 17 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। इसमें PGT Computer Science, TGT Computer Science, Finance Officer और Stenographer Grade-I जैसे posts शामिल थे। इसके बाद अलग-अलग दिनों में अन्य teaching और non-teaching posts के results जारी किए गए। अब तक किन Subjects के Results आ चुके हैं? 17 से 23 अगस्त के बीच कई PGT और TGT subjects के results जारी किए जा चुके हैं। इनमें PGT के तहत Assamese, Urdu, Bangla, Garo, Biotechnology, Manipuri, Tamil और Telugu जैसे subjects शामिल रहे। TGT category में Marathi, Telugu, Assamese, Manipuri, Urdu, Bangla, Nepali, Gujarati, Odia, Kannada, Punjabi, Malayalam और Tamil जैसे subjects के results भी जारी किए गए हैं। 20 August को इन Posts का Result आया 20 अगस्त 2026 को CBSE ने: के Tier-II results जारी किए। 21 August को भी जारी हुए Results इसके बाद 21 अगस्त को: से जुड़े results जारी किए गए। और अब 23 अगस्त की latest phase में PGT Physics, Vice Principal और Stenographer Grade-II शामिल किए गए हैं। बाकी Posts के Results कब आएंगे? CBSE अभी results को phase-wise जारी कर रहा है। जिन posts के Tier-II results अभी घोषित नहीं हुए हैं, उनके नतीजे आने वाले phases में जारी किए जाने की उम्मीद है। Candidates को किसी unofficial WhatsApp message या social media post पर निर्भर रहने के बजाय CBSE, KVS और NVS की official websites तथा अपने application login को check करते रहना चाहिए। Result के बाद कौन-कौन से चरण हो सकते हैं? Post के अनुसार selection process अलग-अलग हो सकती है। अगले चरण में इनमें से एक या अधिक process हो सकती हैं: Candidates को केवल अपने respective post के लिए जारी official instructions follow करनी चाहिए। Candidates के लिए जरूरी सलाह Result देखने के बाद candidates को अपना application number, result copy और recruitment documents सुरक्षित रखने चाहिए। अगर candidate interview या skill test के लिए shortlisted है तो application portal और registered email/mobile पर आने वाले updates को ध्यान से check करना जरूरी होगा। विशेष रूप से PGT Physics और Vice Principal candidates के लिए interview schedule तथा Stenographer Grade-II candidates के लिए skill test schedule अगली महत्वपूर्ण updates होंगी। फिलहाल 23 अगस्त 2026 को PGT Physics, Vice Principal और Stenographer Grade-II के Tier-II results जारी होने के साथ KVS-NVS Recruitment 2025 की selection process एक और महत्वपूर्ण चरण आगे बढ़ गई है। स्रोत – केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS), एनडीटीवी एजुकेशन, टाइम्स ऑफ…

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