North Korea रूस में और सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा? South Korea Defence Ministry का बड़ा दावा

सियोल: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उत्तर कोरिया और रूस की बढ़ती सैन्य साझेदारी को लेकर एक नया दावा सामने आया है। South Korea Defence Ministry ने कहा है कि North Korea रूस में अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी जारी रखे हुए है। हालांकि दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि नई troop deployment तुरंत होने वाली है। यह आकलन ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर कोरिया के नेता Kim Jong Un की बहन Kim Yo Jong ने कुछ दिन पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskiy के उस दावे को खारिज किया था जिसमें कहा गया था कि Pyongyang रूस की मदद के लिए हजारों अतिरिक्त सैनिक भेज सकता है। South Korea Defence Ministry ने क्या कहा? Reuters की 24 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक South Korea Defence Ministry ने सांसद Yu Yong-weon के कार्यालय को बताया कि North Korea रूस में और सैनिक भेजने की तैयारियां कर रहा है। हालांकि Defence Ministry ने यह भी साफ किया कि अभी तक ऐसी कोई movement या operational indication नहीं मिली है जिससे यह कहा जा सके कि नई deployment बहुत जल्द होने वाली है। यानी फिलहाल मामला तैयारी और संभावित deployment का है, किसी confirmed troop movement का नहीं। Zelenskiy ने किया था 50,000 सैनिकों का दावा इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskiy का हालिया दावा भी है। Zelenskiy ने कहा था कि North Korea रूस के समर्थन में 50,000 तक अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी कर सकता है। इस दावे को Pyongyang ने सिरे से खारिज कर दिया। Kim Yo Jong ने इसे “बेबुनियाद” बताते हुए कहा कि यूक्रेन इस तरह के आरोपों के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। इसलिए फिलहाल Seoul और Pyongyang के दावे एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। North Korea पहले भी भेज चुका है सैनिक South Korean, Ukrainian और Western assessments के मुताबिक North Korea पहले भी रूस में सैनिक भेज चुका है। Reuters के अनुसार Pyongyang ने 2024 से रूस में troops deploy करना शुरू किया था, जबकि artillery ammunition और missiles की supply 2023 से जारी बताई जाती है। North Korean सैनिकों की मौजूदगी खास तौर पर Russia के Kursk क्षेत्र से जुड़ी लड़ाइयों के संदर्भ में सामने आई थी। उत्तर कोरिया और रूस ने पहले हथियारों के transfers के आरोपों से इनकार किया था, लेकिन दोनों देशों की defence partnership पिछले दो वर्षों में काफी मजबूत हुई है। 15 Million से ज्यादा Artillery Rounds देने का दावा South Korea Defence Ministry ने सिर्फ troop deployment ही नहीं, बल्कि weapons supply को लेकर भी बड़ा दावा किया है। मंत्रालय के आकलन के मुताबिक North Korea रूस को 15 million से ज्यादा artillery ammunition rounds उपलब्ध करा चुका है। यह अनुमान 152-mm shells के equivalent में लगाया गया है। इसके अलावा Pyongyang की ओर से रूस को short-range ballistic missiles और अन्य military systems देने के भी आरोप लगाए गए हैं। अगर ये आंकड़े सही हैं तो North Korea रूस के लिए artillery ammunition के महत्वपूर्ण suppliers में शामिल हो चुका है। Ukraine War से North Korean Missiles बेहतर हुए? South Korea की Defense Intelligence Agency ने एक और महत्वपूर्ण assessment दिया है। उसके अनुसार Ukraine युद्ध में इस्तेमाल किए गए North Korean missiles ने battlefield data के जरिए अपनी accuracy में सुधार हासिल किया हो सकता है। Seoul का मानना है कि इसमें Russian technical advice और components support की भूमिका भी हो सकती है। अगर ऐसा है तो रूस और उत्तर कोरिया का सहयोग केवल ammunition supply तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि Pyongyang को वास्तविक युद्ध परिस्थितियों से weapons-development data भी मिल सकता है। South Korea के लिए क्यों है चिंता? North Korea की military technology में सुधार सीधे South Korea की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। Seoul के मुताबिक North Korea के कुछ ballistic missiles और multiple rocket launcher systems का development अब completion के करीब पहुंच रहा है। इन systems को Korean Peninsula पर संभावित conflict में इस्तेमाल किए जाने के लिए तैयार माना जा रहा है। इसका मतलब है कि Ukraine war में मिली operational learning भविष्य में Korean Peninsula की military balance को भी प्रभावित कर सकती है। Guam तक पहुंचने वाली Hwasong-12 Missile पर भी Update South Korean Defence Ministry ने North Korea की Hwasong-12 intermediate-range ballistic missile को लेकर भी नया assessment दिया है। मंत्रालय के मुताबिक Hwasong-12 को operational deployment के लिए तैयार किया जा रहा है। यह missile अमेरिकी territory Guam तक पहुंचने की क्षमता रखती है। Guam Pacific region में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण military hub है और वहां US Air Force तथा Navy की strategic presence मौजूद है। इस वजह से Hwasong-12 की operational readiness केवल South Korea या Japan ही नहीं, बल्कि United States के लिए भी महत्वपूर्ण security concern है। US Mainland तक पहुंचने की क्षमता, लेकिन एक बड़ी कमी South Korea का assessment है कि North Korea की intercontinental ballistic missiles यानी ICBMs के पास इतनी flight capability है कि वे अमेरिकी mainland तक पहुंच सकती हैं। हालांकि Seoul का कहना है कि warhead re-entry technology समेत कुछ महत्वपूर्ण technical capabilities अभी independently verify नहीं की गई हैं। North Korea ने अधिकतर ICBM tests lofted trajectory पर किए हैं, जिसमें missile को बहुत ऊंचाई तक ले जाकर अपेक्षाकृत कम horizontal distance पर गिराया जाता है। इसलिए full-range operational capability को लेकर अभी भी uncertainty बनी हुई है। Russia-North Korea Partnership लगातार मजबूत Russia और North Korea के संबंध Ukraine war के बाद तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देशों ने strategic partnership बढ़ाई है और Moscow तथा Pyongyang के बीच defence, weapons और military cooperation को लेकर लगातार नई रिपोर्टें सामने आ रही हैं। 18 अगस्त को Russian Foreign Minister Sergei Lavrov ने भी Russia-North Korea relations की तारीफ करते हुए दोनों देशों की partnership को नए global order से जोड़ा था। Western और South Korean officials को चिंता है कि रूस को ammunition और manpower देने के बदले Moscow North Korea को missile, satellite या अन्य military technology में सहायता दे सकता है। क्या North Korea तुरंत सैनिक भेजने वाला…

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Devdutt Padikkal ने Colombo Test में जड़ा लगातार दूसरा Test Century, Sri Lanka के खिलाफ India मजबूत स्थिति में

कोलंबो: भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ अपनी शानदार फॉर्म जारी रखते हुए Colombo Test में लगातार दूसरी सेंचुरी जड़ दी। बाएं हाथ के बल्लेबाज ने दूसरे टेस्ट की पहली पारी में 117 रन बनाए और उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने पहले दिन का खेल समाप्त होने तक 5 विकेट पर 300 रन बना लिए। इससे पहले गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में भी पडिक्कल ने शानदार 167 रन बनाए थे। यानी श्रीलंका दौरे की लगातार दूसरी टेस्ट पारी में उन्होंने शतक जड़कर भारतीय टीम के नंबर-3 स्थान के लिए अपनी दावेदारी और मजबूत कर दी है। 193 गेंदों में बनाए 117 रन Sinhalese Sports Club में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में पडिक्कल ने धैर्य और आक्रामकता का शानदार मिश्रण दिखाया। उन्होंने 193 गेंदों में 117 रन की पारी खेली। उनकी पारी में 12 चौके शामिल रहे। मुश्किल परिस्थितियों में उन्होंने एक छोर संभाले रखा और श्रीलंकाई गेंदबाजों को लगातार दबाव में रखा। कोलंबो की pitch गॉल के मुकाबले तेज गेंदबाजों को ज्यादा मदद दे रही थी। गेंद में bounce और movement भी देखने को मिला, लेकिन पडिक्कल ने परिस्थितियों के मुताबिक अपनी बल्लेबाजी में बदलाव किया। शुरुआत में मिले दो जीवनदान हालांकि पडिक्कल की पारी की शुरुआत बेहद दिलचस्प रही। श्रीलंका ने उन्हें शुरुआत में ही दो बार आउट करने का मौका गंवा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक पडिक्कल को 0 और 1 रन के स्कोर पर जीवनदान मिले। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और श्रीलंकाई टीम को इन गलतियों की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। शुरुआती मुश्किल दौर पार करने के बाद पडिक्कल ने अपने shots पर बेहतर नियंत्रण दिखाया और धीरे-धीरे बड़ी पारी की नींव रखी। Galle के बाद Colombo में भी शतक यह इस सीरीज में पडिक्कल का लगातार दूसरा शतक है। गॉल में खेले गए पहले टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 167 रन बनाए थे। उस मैच में उनकी पारी भारत की जीत में बेहद महत्वपूर्ण रही और उन्हें Player of the Match भी चुना गया था। भारत ने पहला टेस्ट 165 रन से जीता था। अब Colombo में 117 रन बनाकर पडिक्कल ने साबित कर दिया है कि गॉल की पारी केवल एक शानदार प्रदर्शन नहीं थी बल्कि वह लगातार बड़ी पारियां खेलने की फॉर्म में हैं। Sri Lanka में एक Series में दो शतक लगाने वाले चुनिंदा भारतीयों में शामिल लगातार दो शतक लगाते ही पडिक्कल ने एक खास उपलब्धि भी हासिल की। वह श्रीलंका की धरती पर एक ही टेस्ट सीरीज में दो शतक लगाने वाले चुनिंदा भारतीय बल्लेबाजों में शामिल हो गए हैं। इस सूची में पहले सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और शिखर धवन जैसे बड़े भारतीय बल्लेबाजों के नाम शामिल रहे हैं। पडिक्कल के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इस सीरीज से पहले भारतीय टेस्ट टीम में उनकी जगह स्थायी नहीं मानी जा रही थी। India ने पहले दिन बनाए 300/5 पडिक्कल की सेंचुरी के दम पर भारत ने दूसरे और अंतिम टेस्ट के पहले दिन स्टंप्स तक 300 रन पर 5 विकेट बनाए। पडिक्कल के आउट होने के बावजूद टीम ने दिन का खेल मजबूत स्थिति में समाप्त किया। दूसरे दिन भारत की कोशिश पहली पारी के स्कोर को 400 रन या उससे आगे ले जाने की होगी। पहला टेस्ट जीत चुकी भारतीय टीम सीरीज में आगे है और Colombo Test में मजबूत पहली पारी बनाकर श्रीलंका पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। Rishabh Pant की चोट ने बढ़ाई चिंता पहले दिन भारतीय टीम के लिए एक चिंता की खबर भी सामने आई। विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को Lahiru Kumara की गेंद बाएं हाथ/कलाई के आसपास लगी, जिसके बाद उन्हें मैदान से retired hurt होना पड़ा। हालांकि भारतीय batting coach Sitanshu Kotak ने बाद में संकेत दिया कि चोट ज्यादा गंभीर नहीं लग रही है। Pant की availability को लेकर team management उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। Number 3 की जगह के लिए मजबूत दावेदारी पडिक्कल की लगातार दो बड़ी पारियों ने भारतीय टेस्ट टीम के नंबर-3 batting position को लेकर चर्चा तेज कर दी है। पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान ने भी पडिक्कल की बल्लेबाजी की तारीफ करते हुए उन्हें भारत के लिए नंबर-3 पर एक मजबूत विकल्प बताया है। पडिक्कल को इस दौरे पर चोटिल Sai Sudharsan की जगह मौका मिला था, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से selection competition को दिलचस्प बना दिया है। इस Series में Padikkal का जबरदस्त प्रदर्शन पडिक्कल ने पहले टेस्ट में 167 और 44 रन बनाए थे। दूसरे टेस्ट की पहली पारी में अब उनके नाम 117 रन जुड़ गए हैं। यानी श्रीलंका दौरे पर वह लगातार भारत के सबसे प्रभावशाली बल्लेबाजों में शामिल रहे हैं। खास बात यह है कि पडिक्कल ने spin-friendly Galle और comparatively lively Colombo pitch—दो अलग तरह की परिस्थितियों में शतक लगाए हैं। India की नजर Series जीत पर भारत पहला टेस्ट जीतकर सीरीज में बढ़त बनाए हुए है। अब Colombo Test में मजबूत शुरुआत के बाद टीम के पास सीरीज जीतने का अच्छा मौका है। देवदत्त पडिक्कल की लगातार दूसरी सेंचुरी ने भारत को पहले दिन मजबूत स्थिति में पहुंचाया है। अब दूसरे दिन भारतीय बल्लेबाज पहली पारी का बड़ा स्कोर बनाने की कोशिश करेंगे, जिसके बाद गेंदबाजों पर श्रीलंका को दबाव में लाने की जिम्मेदारी होगी। फिलहाल इस Sri Lanka tour की सबसे बड़ी batting stories में से एक Devdutt Padikkal का लगातार दो टेस्ट शतक लगाना बन चुका है। स्रोत – रॉयटर्स, पीटीआई, टाइम्स ऑफ इंडिया, एनडीटीवी स्पोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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केंद्रीय मंत्रियों के दिल्ली स्थित सरकारी घरों की मरम्मत पर 2025-26 में ₹92 करोड़ खर्च: RTI में खुलासा

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के लुटियंस जोन में केंद्रीय मंत्रियों को आवंटित सरकारी बंगलों की मरम्मत, renovation और furnishing पर होने वाला खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। RTI के जरिए सामने आई जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में इन आधिकारिक आवासों पर ₹92.35 करोड़ खर्च किए गए। यह 2014-15 में दर्ज ₹27.47 करोड़ के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है। यह जानकारी समाचार एजेंसी PTI द्वारा दायर Right to Information यानी RTI आवेदन के जवाब से सामने आई है। इन सरकारी आवासों की देखरेख और मरम्मत का काम Central Public Works Department (CPWD) करता है। 12 साल में ₹547 करोड़ से ज्यादा खर्च RTI के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों की मरम्मत, renovation और maintenance पर कुल ₹547.68 करोड़ खर्च किए गए। इस अवधि में 2025-26 का ₹92.35 करोड़ का आंकड़ा सबसे ज्यादा बताया गया है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में इन सरकारी बंगलों के maintenance पर होने वाला सालाना खर्च काफी तेजी से बढ़ा है। 2014-15 में खर्च था ₹27.47 करोड़ RTI में उपलब्ध year-wise data के मुताबिक 2014-15 में केंद्रीय मंत्रियों के आवासों पर ₹27.47 करोड़ खर्च हुए थे। इसके बाद खर्च इस प्रकार रहा: इस तरह पिछले वित्त वर्ष में खर्च 2014-15 के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा हो गया। क्यों बढ़ रहा सरकारी बंगलों की मरम्मत का खर्च? अधिकारियों ने इस बढ़ते खर्च के पीछे कई कारण बताए हैं। लुटियंस दिल्ली के कई बंगले करीब 80 से 100 साल पुराने हैं। इनमें समय के साथ seepage, termites, पुरानी electrical wiring, plumbing और structural wear-and-tear जैसी समस्याएं सामने आती रहती हैं। एक अधिकारी के मुताबिक इनमें से कुछ बंगलों की स्थिति ऐसी भी रही है कि उन्हें बड़े स्तर पर upgrade करने की जरूरत पड़ी। इसके अलावा construction materials और labour की बढ़ती कीमत यानी inflation को भी खर्च बढ़ने की एक वजह बताया गया है। Fans, LED Lights और Plumbing पर भी होता है खर्च एक केंद्रीय मंत्री के staff member ने PTI को बताया कि सरकारी आवासों में बार-बार आने वाली maintenance requests में electrical और plumbing से जुड़े काम प्रमुख होते हैं। इनमें fans, LED lights, plumbing repairs और कुछ वर्षों के अंतराल पर floor tiles बदलने जैसे काम शामिल हो सकते हैं। यानी ₹92.35 करोड़ का पूरा खर्च केवल बड़े renovation projects पर नहीं, बल्कि नियमित repair और furnishing जैसे अलग-अलग कामों को मिलाकर है। 2019 के बाद तेजी से बढ़ा Average खर्च आंकड़ों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है। 2014 से 2019 के बीच केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों की repair और upgradation पर औसत सालाना खर्च करीब ₹26.78 करोड़ रहा। वहीं 2019 से 2024 के बीच यह औसत लगभग दोगुना होकर ₹50 करोड़ सालाना के करीब पहुंच गया। इसके बाद 2024-25 में ₹71.98 करोड़ और 2025-26 में रिकॉर्ड ₹92.35 करोड़ खर्च हुआ। करीब 70 से 72 Ministers के लिए Official Residences केंद्र की Council of Ministers में अलग-अलग समय पर करीब 70 से 72 Cabinet Ministers और Ministers of State शामिल रहे हैं। ₹92.35 करोड़ के कुल सालाना खर्च को केवल गणितीय औसत में देखें तो यह करीब ₹1.2 करोड़ प्रति मंत्री बैठता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर मंत्री के घर पर ₹1.2 करोड़ खर्च हुए। वास्तविक खर्च हर bungalow की उम्र, स्थिति और वहां कराए गए काम के आधार पर काफी अलग हो सकता है। RTI में किन खर्चों की जानकारी नहीं मिली? RTI में केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक residences पर हुए खर्च की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। लेकिन CPWD ने इस अवधि के दौरान ऐसे Lok Sabha और Rajya Sabha MPs जो मंत्री नहीं हैं, उनके सरकारी आवासों पर हुए खर्च का data उपलब्ध नहीं कराया। इसी तरह Union Ministers और Ministers of State के official offices पर हुए maintenance expenditure की जानकारी भी इस RTI response में शामिल नहीं है। इसलिए ₹547.68 करोड़ का आंकड़ा सभी सांसदों और सरकारी कार्यालयों के कुल maintenance खर्च को नहीं दर्शाता। Lutyens Delhi के बंगले ऐतिहासिक भी हैं दिल्ली का Lutyens Bungalow Zone ब्रिटिश काल में नई दिल्ली को राजधानी के रूप में विकसित किए जाने के दौरान बनाया गया था। इस क्षेत्र का अधिकांश विकास 1912 से 1930 के बीच हुआ। आजादी के बाद इन बंगलों का इस्तेमाल देश के वरिष्ठ मंत्रियों और अन्य सरकारी पदाधिकारियों के आधिकारिक निवास के रूप में होने लगा। कई इमारतें अब लगभग एक सदी पुरानी हो चुकी हैं, जिसके चलते उनका maintenance आधुनिक residential buildings की तुलना में अधिक जटिल हो सकता है। 2004 से 2009 में खर्च हुए थे ₹93.50 करोड़ RTI से जुड़े पुराने आंकड़े भी खर्च में आए बदलाव की तस्वीर दिखाते हैं। सितंबर 2009 के एक RTI response के मुताबिक 2004 से 2009 के पांच साल के दौरान MPs और Union Ministers के बंगलों की maintenance और renovation पर कुल ₹93.50 करोड़ खर्च हुए थे। इसके मुकाबले केवल 2025-26 में केंद्रीय मंत्रियों के आवासों पर खर्च ₹92.35 करोड़ तक पहुंच गया है। हालांकि दोनों आंकड़ों की category और coverage पूरी तरह समान नहीं है, इसलिए सीधे तुलना करते समय सावधानी जरूरी है। RTI के आंकड़ों ने बढ़ाई सरकारी खर्च पर चर्चा ₹92.35 करोड़ का आंकड़ा सामने आने के बाद सरकारी आवासों पर होने वाले सार्वजनिक खर्च को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। एक तरफ पुराने और ऐतिहासिक बंगलों के रखरखाव, electrical safety, plumbing और structural repair की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ इतनी बड़ी राशि खर्च होने के कारण transparency और cost efficiency को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल RTI से सामने आया मुख्य तथ्य यह है कि 2025-26 में केंद्रीय मंत्रियों के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवासों की repair, renovation और furnishing पर ₹92.35 करोड़ खर्च हुए, जो पिछले 12 वर्षों में सबसे ऊंचा सालाना आंकड़ा है। स्रोत – पीटीआई, एनडीटीवी, बिजनेस स्टैंडर्ड जय राष्ट्र न्यूज़

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अमृतसर के Military Bases पर Pakistan-based Gang की नजर? Intelligence Input के बाद Punjab में High Alert

चंडीगढ़/अमृतसर: पंजाब में सुरक्षा एजेंसियों को एक संवेदनशील intelligence input मिलने के बाद High Alert जारी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में मौजूद कथित gangster-terror handler Shahzad Bhatti के network से जुड़े लोगों की नजर अमृतसर क्षेत्र के कुछ संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों पर हो सकती है। इसके बाद Punjab Police और अन्य security agencies को सुरक्षा बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है। हालांकि अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि कोई हमला तत्काल होने वाला है। फिलहाल इसे preventive intelligence alert के तौर पर गंभीरता से लिया जा रहा है। Intelligence Input में क्या सामने आया? 24 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक intelligence agencies ने Punjab Police और अन्य संबंधित agencies के साथ एक संवेदनशील input साझा किया है। इसमें पाकिस्तान में मौजूद दो कथित operatives के नाम Rana Bhai और Malik बताए गए हैं। Intelligence input में संदेह जताया गया है कि अमृतसर क्षेत्र के कुछ संवेदनशील military installations को लेकर reconnaissance यानी रेकी किए जाने की कोशिश हुई हो सकती है। इस जानकारी के बाद संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को alert रहने और sensitive installations के आसपास सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। किन Military Installations का जिक्र? मीडिया रिपोर्ट में intelligence input के हवाले से Khasa Cantonment, Amritsar और Beas क्षेत्र के एक military establishment का जिक्र किया गया है। हालांकि सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील operational details सार्वजनिक नहीं की गई हैं और ऐसी जानकारी को लेकर agencies अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। स्थानीय स्तर पर surveillance और preventive security measures बढ़ाए जाने की संभावना है। Shahzad Bhatti Network पर क्यों है Agencies की नजर? Shahzad Bhatti का नाम पिछले कुछ समय में भारत की विभिन्न security investigations में सामने आया है। भारतीय एजेंसियों का आरोप है कि वह पाकिस्तान से अपने associates और स्थानीय recruits के जरिए भारत में terror और organised crime से जुड़ी गतिविधियों को संचालित करने की कोशिश करता रहा है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक Pakistan-backed network के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का जिक्र किया था। Agencies के मुताबिक इस network से जुड़े मामलों में कई राज्यों में लोगों को हिरासत या गिरफ्तार किया गया और संभावित हमलों की योजनाओं को विफल किया गया। Punjab में पहले भी पकड़े गए Cross-Border Modules Punjab Police ने अगस्त की शुरुआत में दो कथित ISI-backed cross-border modules का भंडाफोड़ करने का दावा किया था। पुलिस के मुताबिक नौ आरोपियों को पकड़ा गया था, जिनमें चार नाबालिग भी शामिल थे। इनके पास से हथियार और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद करने का दावा किया गया। Punjab Police ने कहा था कि preliminary investigation में foreign handlers द्वारा स्थानीय युवाओं को भर्ती करने और उनसे संवेदनशील स्थानों की रेकी कराने की कोशिश सामने आई थी। Khasa Cantonment के पास पहले भी हुआ था Blast ताजा intelligence alert इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि 5 मई 2026 को Khasa Cantonment की boundary के पास एक low-intensity blast हुआ था। Punjab Police ने बाद में कहा था कि घटना में एक IED का इस्तेमाल किया गया था। विस्फोट से perimeter के पास एक tin sheet को नुकसान पहुंचा था। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि मई में हुए blast और मौजूदा intelligence input के बीच अभी कोई स्थापित संबंध नहीं है। इसलिए दोनों घटनाओं को सीधे एक-दूसरे से जोड़ना फिलहाल सही नहीं होगा। Chandigarh में भी 3 संदिग्ध पकड़े गए इसी बीच 24 अगस्त को Chandigarh से भी एक अलग सुरक्षा कार्रवाई की खबर सामने आई है। Chandigarh Police ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास से suspected explosive-making material और एक firearm बरामद करने का दावा किया है। Preliminary investigation में आरोपियों के एक अन्य Pakistan-based handler से कथित संबंधों की जांच की जा रही है। यह मामला फिलहाल अलग जांच का हिस्सा है और इसे अमृतसर के ताजा intelligence alert से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Cross-Border Arms Network पर भी कार्रवाई Amritsar Counter Intelligence ने 23 अगस्त को एक अन्य कार्रवाई में दो लोगों को गिरफ्तार कर 10 sophisticated pistols, magazines और ammunition बरामद करने का दावा किया। Punjab Police के मुताबिक preliminary investigation में आरोपी एक foreign-based handler के संपर्क में थे और सीमा पार से हथियारों की consignments हासिल करने के आरोपों की जांच की जा रही है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के कारण पंजाब में cross-border arms और terror networks को लेकर security agencies की निगरानी बढ़ी हुई है। क्या Amritsar में हमला होने वाला है? फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक दावा नहीं है कि अमृतसर में हमला imminent यानी तुरंत होने वाला है। Intelligence input किसी संभावित threat की जानकारी देता है, जिसके आधार पर सुरक्षा एजेंसियां preventive measures अपनाती हैं। इसका अर्थ यह नहीं होता कि हमला निश्चित रूप से होगा। इसी वजह से agencies ने इस input को गंभीरता से लेते हुए संवेदनशील जगहों पर vigilance बढ़ाने को कहा है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं सुरक्षा एजेंसियों की ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य संभावित खतरे को पहले ही पहचानना और उसे रोकना होता है। Punjab और Chandigarh से हाल में सामने आए अलग-अलग terror और arms-smuggling investigations के बीच security agencies local recruits, foreign handlers, हथियारों की movement और suspicious reconnaissance जैसी गतिविधियों की जांच कर रही हैं। फिलहाल अमृतसर के military installations से जुड़ा मामला intelligence-based preventive alert है। आगे की जांच से ही साफ होगा कि alleged reconnaissance किसने किया, उसके पीछे क्या उद्देश्य था और Shahzad Bhatti network से उसका संबंध कितना मजबूत है। नोट: Intelligence alert किसी हमले की पुष्टि नहीं करता। Shahzad Bhatti, Rana Bhai और Malik से जुड़े विवरण मीडिया द्वारा intelligence inputs के हवाले से रिपोर्ट किए गए हैं और मामले की जांच जारी है। स्रोत – एनडीटीवी, टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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महाराष्ट्र के अमरावती सरकारी अस्पताल में Ventilator Blast के बाद आग, 3 नवजात बच्चों की मौत; वार्ड में थे 39 बच्चे

अमरावती: महाराष्ट्र के अमरावती में सोमवार, 24 अगस्त 2026 की तड़के एक सरकारी महिला अस्पताल में बड़ा हादसा हो गया। अस्पताल की Neonatal Intensive Care Unit (NICU) में आग लगने से तीन नवजात बच्चों की मौत हो गई। घटना के समय वार्ड में कुल 39 नवजात बच्चे भर्ती थे। छह बच्चों को इलाज और निगरानी के लिए दूसरे Super Speciality Hospital में शिफ्ट किया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित NICU में एक ventilator में कथित विस्फोट के बाद आग भड़की। हालांकि आग के वास्तविक तकनीकी कारण की आधिकारिक जांच अभी बाकी है। तड़के करीब 3:30 बजे लगी आग मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हादसा सोमवार सुबह करीब 3:30 बजे अमरावती के जिला महिला अस्पताल में हुआ। अस्पताल की तीसरी मंजिल पर नवजात बच्चों के लिए बनाए गए intensive care unit में अचानक आग और धुआं फैलने लगा। शुरुआती रिपोर्ट में एक ventilator में विस्फोट को आग की संभावित वजह बताया गया है। घटना होते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी तुरंत बच्चों को NICU से बाहर निकालने में जुट गए। NICU में भर्ती थे 39 नवजात हादसे के समय neonatal ward में कुल 39 नवजात बच्चों का इलाज चल रहा था। अस्पताल कर्मचारियों ने तेजी से evacuation शुरू किया और ज्यादातर बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बावजूद तीन नवजात बच्चों को नहीं बचाया जा सका। आग और धुएं से प्रभावित छह नवजात बच्चों को पास के Super Speciality Hospital में शिफ्ट किया गया है, जहां उनका इलाज और मेडिकल निगरानी की जा रही है। तीन बच्चों की मौत इस दर्दनाक हादसे में तीन नवजातों की जान चली गई। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में बच्चों की मौत के पीछे आग से गंभीर रूप से प्रभावित होने और धुएं के कारण दम घुटने जैसी स्थितियों का जिक्र किया गया है। पोस्टमार्टम या विस्तृत आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद मौत के सटीक कारण की स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। घटना ने अस्पताल में भर्ती नवजात बच्चों के परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। Doctors और Nurses ने तुरंत शुरू किया Rescue आग लगने के बाद ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल कर्मचारियों ने बच्चों को सुरक्षित निकालने का अभियान शुरू कर दिया। Medical equipment हटाकर नवजात बच्चों को तेजी से वार्ड से बाहर ले जाया गया। इसी वजह से वार्ड में मौजूद बाकी बच्चों को बड़े खतरे से बचाया जा सका। कुछ ही देर में दमकल विभाग को भी घटना की जानकारी दी गई और आग पर काबू पाने का काम शुरू हुआ। NICU के Beds और Medical Equipment को नुकसान आग के कारण NICU में मौजूद कई medical equipment और अन्य सामान को नुकसान पहुंचा है। सामने आई तस्वीरों और शुरुआती रिपोर्टों में वार्ड के अंदर आग से जले उपकरण और बिस्तर दिखाई देने की बात कही गई है। राहत की बात यह रही कि आग को अस्पताल के दूसरे हिस्सों तक फैलने से पहले नियंत्रित कर लिया गया। क्या Ventilator Blast ही आग की वजह था? शुरुआती जानकारी में ventilator में blast या explosion के बाद आग लगने की बात सामने आई है। लेकिन किसी बड़े हादसे के बाद वास्तविक कारण जानने के लिए electrical system, medical equipment, wiring, maintenance record और fire-safety arrangements की technical जांच जरूरी होती है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ventilator में विस्फोट ही आग का अंतिम रूप से प्रमाणित कारण था। घटना की जांच के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी। Hospital की Fire Safety पर उठे सवाल NICU जैसे संवेदनशील वार्ड में आग लगने के बाद hospital fire safety को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे wards में ऐसे नवजात बच्चे भर्ती होते हैं जिन्हें oxygen support, ventilators, warmers और लगातार medical monitoring की जरूरत होती है। किसी emergency की स्थिति में उन्हें तत्काल दूसरी जगह ले जाना सामान्य मरीजों की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल होता है। अब जांच में यह भी देखा जा सकता है कि अस्पताल में fire alarm, extinguishers, emergency exit और electrical safety की व्यवस्था निर्धारित standards के अनुसार थी या नहीं। छह बच्चे दूसरे अस्पताल में शिफ्ट हादसे में प्रभावित छह बच्चों को तत्काल नजदीकी Super Speciality Hospital भेजा गया है। डॉक्टर उनकी स्थिति पर नजर रख रहे हैं। फिलहाल सुबह तक सामने आई प्रमुख रिपोर्टों में तीन नवजातों की मौत की पुष्टि की गई है। इस breaking घटना में बच्चों की स्थिति और प्रशासनिक जांच को लेकर आगे और अपडेट आने की संभावना है। Chhindwara में भी हाल में हुआ था NICU हादसा अमरावती का हादसा इसलिए भी गंभीर चिंता पैदा करता है क्योंकि हाल में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के NICU में भी medical warmer में आग लगने की घटना हुई थी। उस हादसे में तीन बच्चे झुलसे थे और बाद में एक नवजात की मौत हुई थी। लगातार सामने आ रही इस तरह की घटनाएं सरकारी अस्पतालों में neonatal units की equipment maintenance और fire safety व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को रेखांकित करती हैं। जांच के बाद साफ होगा हादसे का कारण फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि NICU में आग आखिर कैसे लगी और क्या इसे पहले रोका जा सकता था। शुरुआती जानकारी ventilator में विस्फोट की ओर इशारा कर रही है, लेकिन जांच में electrical fault, equipment malfunction और maintenance जैसे पहलुओं को भी देखे जाने की संभावना है। अमरावती जिला महिला अस्पताल की इस घटना में तीन परिवारों ने अपने नवजात बच्चों को खो दिया है। वहीं समय पर किए गए rescue operation के कारण वार्ड में मौजूद बड़ी संख्या में दूसरे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। नोट: यह एक developing story है। आग लगने की वजह के तौर पर ventilator blast की जानकारी शुरुआती रिपोर्टों पर आधारित है। जांच पूरी होने के बाद हादसे का वास्तविक कारण स्पष्ट होगा। स्रोत – एनडीटीवी, आईएएनएस, अमर उजाला, लाइव हिन्दुस्तान जय राष्ट्र न्यूज़

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PM मोदी मंदिर विवाद में नया मोड़; राजन सिंह के खिलाफ FIR दर्ज, ‘फर्जी किन्नर’ होने का आरोप

पटना/लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मंदिर बनाने की मुहिम और दिल्ली के Press Club of India में ‘मोदी चालीसा’ के आयोजन को लेकर चर्चा में आए राजन सिंह अब नए विवाद में घिर गए हैं। लखनऊ के हजरतगंज थाने में एक transgender activist की शिकायत पर उनके खिलाफ मामला दर्ज होने की खबर सामने आई है। शिकायतकर्ता ने राजन सिंह की transgender identity पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। राजन सिंह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने पास वैध transgender certificate होने का दावा किया है। कौन हैं Rajan Singh और क्यों हैं चर्चा में? राजन सिंह बिहार के Transgender Welfare Board से जुड़े रहे हैं और पिछले कुछ हफ्तों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित मंदिर बनाने की अपनी मुहिम को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने दावा किया था कि पटना में प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर एक भव्य मंदिर बनाया जाना चाहिए। प्रस्तावित मंदिर के लिए करीब 5 एकड़ जमीन और ₹112 करोड़ की लागत का दावा भी सामने आया था। राजन सिंह ने कहा था कि वह यह मंदिर transgender community को केंद्र सरकार द्वारा दिए गए अधिकारों और पहचान के प्रति आभार के रूप में बनवाना चाहते हैं। हालांकि इस प्रस्ताव की आधिकारिक स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। जुलाई में PTI आधारित रिपोर्टों में Bihar State Transgender Welfare Board द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी देने की बात कही गई थी, जबकि बाद की एक रिपोर्ट में बोर्ड की एक अन्य सदस्य ने ऐसे किसी आधिकारिक निर्णय से इनकार किया। इसलिए फिलहाल मंदिर निर्माण को अंतिम सरकारी मंजूरी मिल चुकी परियोजना मानना सही नहीं होगा। ‘Modi Chalisa’ से बढ़ा विवाद 20 अगस्त को दिल्ली के Press Club of India में हुए एक कार्यक्रम ने विवाद को और बढ़ा दिया। वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक cutout के सामने आरती और ‘Modi Chalisa’ का पाठ करते हुए कुछ लोग दिखाई दिए। तस्वीरों में प्रधानमंत्री को भगवान राम जैसी वेशभूषा में दिखाने वाला cutout भी नजर आया। Press Club of India ने बाद में स्पष्ट किया कि उसने इस कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया था। Club के मुताबिक hall को press conference के लिए बुक किया गया था, लेकिन निर्धारित शर्तों का उल्लंघन होने के बाद कार्यक्रम रोक दिया गया। Lucknow में किसने दर्ज कराई शिकायत? नवभारत टाइम्स और अन्य स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक लखनऊ की transgender activist प्रियंका सिंह रघुवंशी ने हजरतगंज थाने में राजन सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राजन सिंह transgender community का सदस्य होने का गलत दावा कर रहे हैं और उनकी गतिविधियों से समुदाय की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये शिकायतकर्ता के आरोप हैं। किसी व्यक्ति की gender identity के बारे में आरोप को केवल FIR या शिकायत के आधार पर सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। Rajan Singh ने आरोपों पर क्या कहा? राजन सिंह ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि उनके पास वैध transgender certificate मौजूद है। उन्होंने FIR को राजनीतिक साजिश बताते हुए शिकायतकर्ता पर भी राजनीतिक संबंधों के आरोप लगाए हैं। राजन सिंह का कहना है कि उनके documents की जांच की जा सकती है और इससे उनकी identity की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। फिलहाल इस मामले में शिकायतकर्ता और राजन सिंह के दावे एक-दूसरे के विपरीत हैं। पुलिस जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। क्या FIR ‘Modi Mandir’ बनाने के कारण हुई? उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर FIR सीधे PM Modi का मंदिर बनाने के प्रस्ताव के कारण दर्ज नहीं की गई है। मंदिर का प्रस्ताव और Modi Chalisa का आयोजन राजन सिंह को चर्चा में लाने वाले प्रमुख घटनाक्रम हैं, लेकिन Lucknow में दर्ज शिकायत का मुख्य आधार उनकी transgender identity और समुदाय की छवि को लेकर लगाए गए आरोप बताए जा रहे हैं। इसलिए खबर को “PM मोदी का मंदिर बनाने पर FIR” कहना तथ्यात्मक रूप से अधूरा या भ्रामक हो सकता है। मंदिर के लिए ₹112 करोड़ और Gold Statue का दावा Press Club के कार्यक्रम के दौरान राजन सिंह ने प्रस्तावित मंदिर को लेकर कई बड़े दावे किए थे। उन्होंने कहा था कि मंदिर करीब ₹112 करोड़ में बनाया जाएगा, इसके लिए पांच एकड़ जमीन चाहिए और उसमें प्रधानमंत्री मोदी की ऊंचाई के बराबर सोने की प्रतिमा स्थापित करने की योजना है। हालांकि India Today की रिपोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्य सरकार द्वारा जमीन या धन उपलब्ध कराने के उनके दावे के समर्थन में उन्होंने कोई प्रमाण पेश नहीं किया था। इसलिए इन आंकड़ों को Rajan Singh का प्रस्ताव या दावा ही माना जाना चाहिए, न कि Bihar सरकार की स्वीकृत योजना। Bihar Transgender Welfare Board में भी मतभेद? मंदिर प्रस्ताव को लेकर Board के भीतर भी अलग-अलग राय सामने आने की खबर है। एक ओर जुलाई की रिपोर्टों में राजन सिंह और PTI ने दावा किया था कि प्रस्ताव को Board के सदस्यों का समर्थन मिला। दूसरी ओर बाद में Board से जुड़ी सदस्य अनुप्रिया के हवाले से कहा गया कि मंदिर निर्माण का कोई औपचारिक निर्णय नहीं हुआ और यह राजन सिंह की व्यक्तिगत पहल है। इस विरोधाभास के कारण Bihar सरकार या Social Welfare Department की औपचारिक मंजूरी सामने आने तक मंदिर परियोजना की सरकारी स्थिति को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। अब आगे क्या? Lucknow में दर्ज मामले के बाद पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध documents की जांच कर सकती है। दूसरी ओर राजन सिंह ने अपनी Modi Mandir मुहिम वापस लेने का कोई संकेत नहीं दिया है। उन्होंने पहले कहा था कि अगर सरकार मंदिर के लिए जमीन और धन उपलब्ध नहीं कराती तो वह अपने पद को लेकर भी फैसला कर सकते हैं। पूरे मामले में तीन अलग-अलग मुद्दे जुड़े हुए हैं—प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर मंदिर बनाने का प्रस्ताव, Press Club में Modi Chalisa कार्यक्रम और अब राजन सिंह के खिलाफ transgender identity को लेकर दर्ज शिकायत। इनमें से किसी भी आरोप पर अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही निकाला जाना चाहिए। नोट: राजन सिंह की transgender identity को…

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जयपुर के सरकारी स्कूल की बदहाल तस्वीर; ‘भैंसों के बाड़े’ में लग रही कक्षाएं? CJP टीम पर कथित हमले के बाद Cross FIR

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास एक सरकारी स्कूल की हालत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब शिक्षा व्यवस्था से लेकर कानून-व्यवस्था तक बड़े सवाल खड़े कर रहा है। बगरू क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय की मूल इमारत जर्जर घोषित होने के बाद बच्चों की कक्षाएं एक वैकल्पिक टीन शेड जैसी जगह पर लगाई जा रही हैं। मीडिया रिपोर्टों और CJP का दावा है कि यह जगह भैंसों के बाड़े या तबेले के रूप में इस्तेमाल होती रही है, जहां चारा और गोबर भी दिखाई दिया। स्कूल की स्थिति देखने पहुंची CJP की टीम और स्थानीय ग्रामीणों के बीच 21 अगस्त को विवाद और धक्का-मुक्की हुई थी। अब इस मामले में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। 24 अगस्त की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और 50-60 कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी SC/ST Act समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। क्यों बाड़े जैसी जगह पर लग रही हैं कक्षाएं? राजस्थान सरकार के अधिकारियों के मुताबिक रामपुरा-कंवरपुरा के सरकारी प्राथमिक स्कूल की इमारत को सितंबर 2025 में किए गए सर्वे के बाद जर्जर और असुरक्षित घोषित किया गया था। स्कूल में फिलहाल करीब 18 विद्यार्थी और दो शिक्षक बताए गए हैं। पुरानी इमारत असुरक्षित होने के कारण बच्चों की पढ़ाई वैकल्पिक स्थान पर स्थानांतरित की गई। मीडिया रिपोर्टों में इस वैकल्पिक जगह को गौशाला, तबेला या buffalo shed जैसी जगह बताया गया है। तस्वीरों और रिपोर्टों में दावा किया गया कि जिस क्षेत्र में बच्चों की कक्षाएं लग रही थीं, वहां आसपास पशुओं का चारा और गोबर भी मौजूद था। यही तस्वीर सामने आने के बाद स्कूल की स्थिति सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गई। School Thik Karo अभियान के तहत पहुंची थी CJP CJP की टीम अपने ‘School Thik Karo’ अभियान के तहत 21 अगस्त को इस सरकारी स्कूल की स्थिति देखने रामपुरा-कंवरपुरा पहुंची थी। CJP का कहना है कि उसे सूचना मिली थी कि बच्चों की पढ़ाई उचित स्कूल भवन के बजाय पशुओं के बाड़े जैसी जगह पर हो रही है। इसी स्थिति की जांच और वीडियो रिकॉर्डिंग करने के लिए टीम गांव पहुंची थी। टीम में CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका समेत कई कार्यकर्ता मौजूद थे। गांव पहुंचते ही बढ़ा विवाद स्कूल तक पहुंचने की कोशिश के दौरान CJP टीम और कुछ स्थानीय ग्रामीणों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। CJP का आरोप है कि टीम को स्कूल तक पहुंचने से रोका गया और फिर उस पर हमला किया गया। संगठन ने दावा किया कि उसके सदस्यों के साथ मारपीट हुई, पत्थर फेंके गए और वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। दूसरी तरफ ग्रामीणों ने CJP कार्यकर्ताओं पर ही अभद्रता और मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। इसी वजह से मामला अब केवल एक कथित हमले की शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों की Cross FIR दर्ज हो चुकी है। Ashutosh Ranka समेत CJP कार्यकर्ताओं पर SC/ST Act में केस 24 अगस्त को सामने आई Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय निवासी भगवान सहाय धनका की शिकायत पर आशुतोष रांका और करीब 50-60 CJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि CJP कार्यकर्ताओं ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों से अभद्रता की, मारपीट की और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर BNS की मारपीट, गलत तरीके से रोकने, unlawful assembly और शांति भंग करने की मंशा से अपमान से जुड़ी धाराओं के साथ SC/ST Act की तीन धाराएं भी लगाई हैं। ये फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं और पुलिस जांच के बाद ही उनकी सत्यता स्पष्ट होगी। CJP की तरफ से भी FIR दूसरी FIR CJP कार्यकर्ता रेखा शर्मा की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। उनका आरोप है कि CJP की टीम स्कूल की स्थिति देखने जा रही थी, तभी उन्हें रास्ते में घेरकर अलग-अलग दिशाओं से हमला किया गया। CJP की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि हमलावरों में कुछ लोग BJP से जुड़े थे। हालांकि BJP से जुड़े स्थानीय नेताओं और ग्रामीण पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया है। इसलिए कथित हमले के पीछे किसी राजनीतिक साजिश की बात अभी आरोप के स्तर पर है। स्कूल के नए भवन के लिए ₹18 लाख मंजूर विवाद के बीच बच्चों और अभिभावकों के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। राजस्थान सरकार ने स्कूल के नए भवन के लिए कुल ₹18 लाख उपलब्ध होने की जानकारी दी है। इसमें ₹12 लाख District Mineral Foundation Trust (DMFT) और ₹6 लाख MLA Fund से दिए जाने हैं। सरकार के मुताबिक नए भवन का निर्माण 1 सितंबर 2026 से शुरू किया जाना है। CJP ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि बच्चों को सुरक्षित और उचित स्कूल भवन उपलब्ध कराना ही उसके अभियान की मुख्य मांग थी। CJP ने CM Bhajan Lal Sharma को कहा धन्यवाद नए भवन के निर्माण की घोषणा सामने आने के बाद आशुतोष रांका ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को धन्यवाद दिया। रांका ने कहा कि उनकी मांग यही थी कि बच्चों को उचित जगह पर पढ़ने की सुविधा मिले। हालांकि उन्होंने कथित हमले के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग भी दोहराई और कहा कि दोषी चाहे किसी भी पक्ष के हों, उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। Rajasthan में 611 सरकारी स्कूलों के पास अपनी इमारत नहीं रामपुरा-कंवरपुरा का मामला सामने आने के बाद राजस्थान के सरकारी स्कूलों के infrastructure पर भी चर्चा तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में दिए गए UDISE आधारित आंकड़ों के मुताबिक राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनके पास अपनी इमारत नहीं है। इसके अलावा अपनी building वाले सरकारी स्कूलों में भी: होने की जानकारी सामने आई है। ये आंकड़े राज्य में school infrastructure की चुनौती को बड़े स्तर पर दिखाते हैं। Rajasthan सरकार ने बनाया बड़ा Infrastructure Plan राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों की इमारतों की मरम्मत और नए निर्माण के लिए बड़े स्तर पर राशि उपलब्ध कराने की बात कही है। सरकार के मुताबिक जर्जर प्राथमिक और उच्च माध्यमिक स्कूल भवनों के निर्माण, मरम्मत और maintenance के…

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राष्ट्रगान के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का VIDEO वायरल; बोले- भ्रामक तरीके से पेश किया जा रहा मामला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया गया कि उन्नाव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वह राष्ट्रगान पूरा होने से पहले ही वहां से चले गए। वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों ने उन पर निशाना साधा। हालांकि सतीश महाना ने पूरे विवाद पर सफाई देते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर घटनाक्रम को भ्रामक तरीके से पेश किया जा रहा है और जिस समय राष्ट्रगान चल रहा था, वह उस प्रेक्षागृह में मौजूद ही नहीं थे। उन्नाव के कार्यक्रम से जुड़ा है Viral Video मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव का है। सतीश महाना यहां एक शैक्षिक संगोष्ठी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान उन्हें Guard of Honour दिया गया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक तरफ राष्ट्रगान की आवाज सुनाई देती है और दूसरी तरफ सतीश महाना सलामी मंच से नीचे उतरते और वहां से आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। इसी वीडियो के आधार पर सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि विधानसभा अध्यक्ष राष्ट्रगान पूरा होने से पहले ही कार्यक्रम स्थल से निकल गए। VIDEO Viral होते ही शुरू हुआ विवाद वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई। कई यूजर्स ने वीडियो शेयर करते हुए सवाल उठाया कि जब राष्ट्रगान चल रहा था तो विधानसभा अध्यक्ष ने वहां रुककर उसे पूरा क्यों नहीं किया। मामले ने जल्द ही राजनीतिक रूप भी ले लिया और कांग्रेस तथा समाजवादी पार्टी के नेताओं ने BJP और सतीश महाना पर निशाना साधना शुरू कर दिया। हालांकि केवल वायरल वीडियो के आधार पर घटना का पूरा संदर्भ स्पष्ट नहीं था। Satish Mahana ने क्या सफाई दी? विवाद बढ़ने के बाद सतीश महाना ने रविवार शाम सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी वीडियो के बारे में सही तथ्य जानना जरूरी है और लोगों के बीच भ्रम न फैले, इसलिए वह घटनाक्रम स्पष्ट कर रहे हैं। महाना के अनुसार शनिवार को उन्नाव में उन्हें जिस समय Guard of Honour दिया जा रहा था, उसी समय संयोग से प्रेक्षागृह के अंदर राष्ट्रगान शुरू हुआ था। उन्होंने दावा किया कि दोनों कार्यक्रम अलग-अलग थे और जिस प्रेक्षागृह के भीतर राष्ट्रगान चल रहा था, उस समय वह वहां मौजूद नहीं थे। ‘दोनों कार्यक्रम पूरी तरह अलग थे’ सतीश महाना ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि Guard of Honour और auditorium के भीतर चल रहा कार्यक्रम दो अलग-अलग कार्यक्रम थे। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर दोनों घटनाओं की तस्वीरों और आवाज को इस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है जिससे ऐसा प्रतीत हो कि वह राष्ट्रगान के दौरान रुके नहीं और वहां से चले गए। विधानसभा अध्यक्ष ने इस interpretation को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा नहीं हुआ। ‘राष्ट्रगान का हमेशा सम्मान किया’ महाना ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा से लेकर अपने विधानसभा क्षेत्र तक हर अवसर पर उन्होंने और उनके सहयोगियों ने संविधान तथा राष्ट्रगान का सर्वोच्च सम्मान किया है। उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया यूजर्स से भी अपील की कि किसी वीडियो या घटना पर टिप्पणी करने से पहले उसके तथ्यों की जांच जरूर की जाए। Congress ने BJP को घेरा वायरल वीडियो को कांग्रेस नेताओं और पार्टी से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स ने भी शेयर किया। कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए गए कि राष्ट्रगान के दौरान विधानसभा अध्यक्ष के कथित तौर पर चले जाने की घटना पर BJP नेतृत्व क्या कार्रवाई करेगा। कुछ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी जवाब मांगा। विपक्ष ने इसे राष्ट्रगान के सम्मान से जोड़ते हुए महाना से जवाब और माफी की मांग की। Akhilesh Yadav ने भी उठाया सवाल समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मामले को लेकर BJP सरकार पर हमला बोला। उन्होंने वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूछा कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जाएगी। इससे वीडियो को लेकर शुरू हुआ सोशल मीडिया विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस में भी बदल गया। आयोजक पक्ष ने क्या कहा? कुछ मीडिया रिपोर्टों में कार्यक्रम से जुड़े आयोजकों का पक्ष भी सामने आया है। उनका कहना है कि जिस स्थान पर सतीश महाना को Guard of Honour दिया जा रहा था, वहां अलग से राष्ट्रगान नहीं बजाया जा रहा था। प्रेक्षागृह के भीतर चल रहे राष्ट्रगान की आवाज बाहर तक सुनाई दे रही थी। यह स्पष्टीकरण सतीश महाना के उस दावे से मेल खाता है जिसमें उन्होंने Guard of Honour और auditorium में चल रहे कार्यक्रम को अलग-अलग बताया है। Viral VIDEO में क्या दिखता है? वीडियो में सतीश महाना सलामी की मुद्रा में खड़े दिखाई देते हैं और कुछ समय बाद मंच से नीचे उतरते नजर आते हैं। Background में राष्ट्रगान की आवाज सुनाई देने के कारण वीडियो को लेकर सवाल उठे। लेकिन वीडियो का छोटा हिस्सा अपने आप यह साबित नहीं करता कि राष्ट्रगान उसी Guard of Honour ceremony का हिस्सा था या किसी दूसरी जगह से उसकी आवाज आ रही थी। इसी बिंदु पर सतीश महाना और उनके आलोचकों के दावे अलग हैं। घटना कब हुई? यह घटनाक्रम 22 अगस्त 2026 को उन्नाव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुआ था। इसके बाद 23 अगस्त को वीडियो सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में बड़े स्तर पर वायरल हुआ। रविवार शाम तक सतीश महाना ने अपना विस्तृत स्पष्टीकरण भी जारी कर दिया। इसलिए 24 अगस्त तक उपलब्ध latest update यह है कि विधानसभा अध्यक्ष ने राष्ट्रगान का अपमान करने के आरोप को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। Viral Claim को तथ्य मानने से पहले जरूरी है पूरा Context सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राष्ट्रगान की आवाज के बीच सतीश महाना को आगे बढ़ते हुए देखा जा सकता है। इसी आधार पर उनके खिलाफ राष्ट्रगान छोड़कर जाने का आरोप लगाया गया। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष का कहना है कि राष्ट्रगान auditorium के भीतर दूसरे कार्यक्रम में चल रहा था और वह उस समय वहां मौजूद नहीं थे। ऐसे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे सीधे…

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Food Safety पर बड़ा Action: FSSAI ने Nestle, PepsiCo, Coca-Cola समेत कंपनियों से जुड़े मामलों में 150 से ज्यादा Notices जारी किए

नई दिल्ली: देश के खाद्य सुरक्षा नियामक Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने misleading advertisements, गलत दावों और labeling नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर बड़ी कार्रवाई की जानकारी दी है। FSSAI के मुताबिक हाल के महीनों में 150 से ज्यादा notices जारी किए गए हैं और कार्रवाई के दायरे में Nestle India, PepsiCo और Coca-Cola India समेत कई बड़ी food और beverage कंपनियों के नाम शामिल हैं। FSSAI ने सोशल मीडिया के जरिए हालिया enforcement action का ब्यौरा साझा करते हुए कहा कि ये notices misleading advertisements, false claims और labelling non-compliances से जुड़े मामलों में जारी किए गए हैं। किन बड़ी कंपनियों के नाम आए सामने? Food regulator ने जिन प्रमुख कंपनियों के खिलाफ हाल के महीनों में कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी है, उनमें कई बड़े national और international brands शामिल हैं। FSSAI द्वारा साझा सूची में: जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं। हालांकि किसी कंपनी को notice जारी होना अपने आप में अंतिम रूप से दोष सिद्ध होना नहीं होता। यह regulatory process का हिस्सा है, जिसमें संबंधित company से जवाब और compliance की मांग की जा सकती है। किस वजह से जारी किए गए Notices? FSSAI के मुताबिक कार्रवाई मुख्य रूप से तीन प्रकार की कथित गड़बड़ियों से जुड़ी है। पहला मामला misleading advertisements यानी ऐसे विज्ञापनों से जुड़ा है जिनसे उपभोक्ता किसी product के benefits या nature को लेकर भ्रमित हो सकता है। दूसरा मुद्दा false या potentially misleading claims का है। Food products के पैकेट या advertisements पर health, nutrition, ingredients या product benefits से जुड़ा कोई दावा तय नियमों और scientific evidence के अनुरूप होना जरूरी है। तीसरा मामला labelling regulations का है। Packaged food पर ingredients, nutritional information और अन्य जरूरी declarations नियमों के अनुसार देना आवश्यक होता है। Energy Drinks और Alcoholic Beverages पर भी सख्ती FSSAI ने हाल के महीनों में energy drink और alcoholic beverage segments पर भी निगरानी बढ़ाई है। कुछ मामलों में regulator ने नियमों के उल्लंघन के चलते products जब्त करने की कार्रवाई भी की है। Energy drinks के marketing और labelling को लेकर FSSAI इससे पहले भी कंपनियों को निर्देश जारी कर चुका है। Food regulator का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि किसी product की packaging या advertisement ऐसी जानकारी न दे जिससे ग्राहक उसकी वास्तविक प्रकृति या health effects को लेकर भ्रमित हो। Amazon और Flipkart को भी 12 Notices FSSAI की कार्रवाई केवल packaged food manufacturers तक सीमित नहीं रही। Regulator के मुताबिक Amazon और Flipkart जैसे e-commerce platforms से जुड़े मामलों में कुल 12 notices जारी किए गए हैं। इसके अलावा नियमों के उल्लंघन से जुड़े एक मामले में Amazon के एक warehouse का food licence भी cancel किया गया है। Online food retail तेजी से बढ़ने के कारण e-commerce platforms पर बिकने वाले products की licensing, expiry, storage और labeling भी regulators की निगरानी में हैं। KFC, McDonald’s, Domino’s समेत Food Chains को भी Notices Restaurant और food-service sector में भी FSSAI ने कार्रवाई की जानकारी दी है। Regulator के मुताबिक 30 से ज्यादा notices KFC, McDonald’s, Pizza Hut, Domino’s और Costa Coffee जैसे food service establishments से जुड़े मामलों में जारी किए गए हैं। FSSAI ने यह भी बताया कि Domino’s के पांच licences suspend किए गए हैं। यह कार्रवाई अलग-अलग outlets या licence holders से जुड़ी हो सकती है, इसलिए इसे पूरी chain के nationwide operations पर प्रतिबंध के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। कई कंपनियों ने शुरू किया Corrective Action FSSAI के मुताबिक notices मिलने के बाद कई food companies ने corrective actions शुरू किए हैं। इसका मतलब कंपनियां अपने advertisements, labels, claims या operating procedures में जरूरी बदलाव कर रही हैं ताकि उन्हें food safety regulations के अनुरूप लाया जा सके। Regulatory notice मिलने के बाद company को आम तौर पर जवाब देने और कमियों को दूर करने का मौका दिया जाता है। गंभीर violations पाए जाने पर regulator product seizure, licence suspension या cancellation जैसी कार्रवाई भी कर सकता है। Consumers के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह Action? Food products खरीदते समय आम ग्राहक काफी हद तक product label और advertising claims पर निर्भर रहता है। अगर किसी food item को ज्यादा healthy, nutritious या किसी बीमारी से संबंधित benefit देने वाला बताया जाता है, तो ग्राहक के purchasing decision पर सीधा असर पड़ सकता है। इसी वजह से FSSAI के नियम कंपनियों को health और nutrition claims को लेकर तय standards का पालन करने के लिए बाध्य करते हैं। Misleading claims के खिलाफ कार्रवाई का उद्देश्य ग्राहकों को सही जानकारी उपलब्ध कराना और food industry में transparency बढ़ाना है। Label पढ़ते समय किन बातों पर दें ध्यान? Packaged food खरीदते समय consumers को केवल बड़े advertisement claims पर भरोसा करने के बजाय product की पूरी labeling देखनी चाहिए। Ingredients list, nutritional information, manufacturing और expiry dates, allergen information तथा FSSAI licence details की जांच करना उपयोगी हो सकता है। अगर किसी product पर किए गए health claim को लेकर संदेह हो, तो ग्राहक company और regulator की official information देख सकता है। FSSAI ने बढ़ाई Enforcement हाल के महीनों में food safety regulator ने packaged food, restaurants, e-commerce platforms और beverage companies के खिलाफ enforcement activity तेज की है। 150 से ज्यादा notices की जानकारी इसी व्यापक अभियान का हिस्सा है। हालांकि notices में शामिल किसी brand या company के मामले में वास्तविक violation और अंतिम regulatory outcome अलग-अलग हो सकता है। इसलिए notice जारी होने और किसी company के दोषी साबित होने में अंतर समझना जरूरी है। FSSAI की इस कार्रवाई से यह संकेत जरूर मिलता है कि food advertising, labeling और consumer claims को लेकर regulator आने वाले समय में और कड़ी निगरानी जारी रख सकता है। स्रोत – एफएसएसएआई (FSSAI), पीटीआई, एनडीटीवी, इकोनॉमिक टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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National Space Day पर PM Modi ने Space Startups के CEOs से संवाद किया साझा, मजबूत ecosystem बनाने पर जोर

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 23 अगस्त 2026 को National Space Day के मौके पर देशवासियों और वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं देते हुए भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र को भविष्य की अर्थव्यवस्था और विकसित भारत के लिए महत्वपूर्ण बताया। प्रधानमंत्री ने Space Startups के CEOs और founders के साथ अपने हालिया संवाद को भी साझा किया और देश में ऐसा मजबूत space ecosystem तैयार करने पर जोर दिया, जो दुनिया भर की प्रतिभा, कंपनियों और निवेश को भारत की ओर आकर्षित कर सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास कम लागत में काम करने की क्षमता, गुणवत्तापूर्ण talent और जोखिम लेने की मजबूत क्षमता का ऐसा संयोजन है जो देश को वैश्विक space sector में तेजी से अग्रणी स्थान दिला सकता है। 21 अगस्त को 20 Space Startups के साथ हुई थी बैठक प्रधानमंत्री मोदी ने Space Startup CEOs और founders के साथ यह बैठक 21 अगस्त 2026 को Seva Teerth में की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक बैठक में देश के 20 space startups के CEOs और founders शामिल हुए थे। ये कंपनियां rockets, reusable launch vehicles, satellites, advanced propulsion systems, space intelligence, space debris removal, weather और climate intelligence जैसी अलग-अलग technologies पर काम कर रही हैं। National Space Day पर इस interaction को फिर सामने लाते हुए प्रधानमंत्री ने भारत की private space industry की ambition और innovation की तारीफ की। PM Modi बोले—दुनिया Space के लिए भारत की ओर देखे Space Startup leaders के साथ बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश को ऐसा ecosystem बनाना चाहिए कि जब दुनिया अंतरिक्ष क्षेत्र के बारे में सोचे तो उसकी नजर भारत की ओर जाए। उन्होंने startups से अपने प्रयासों में consistency बनाए रखने की अपील की और कहा कि सरकार की policies में निरंतरता होने से entrepreneurs को जोखिम लेने का भरोसा मिलता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ऐसा environment तैयार कर सकता है जहां दुनिया भर के talented professionals अपने career और भविष्य के लिए Indian space sector को पसंद करें। Global Talent और Investment को आकर्षित करने पर जोर PM Modi ने कहा कि भारत के space sector में global talent, companies और investment को आकर्षित करने की क्षमता है। उनके मुताबिक भारत cost के मामले में highly competitive है और यहां quality talent के साथ risk-taking क्षमता भी मौजूद है। यही combination भारत को international space market में तेजी से मजबूत स्थिति दिला सकता है। Private companies के लिए space sector खोलने के बाद पिछले कुछ वर्षों में भारतीय startups की संख्या और गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। कई कंपनियां satellite manufacturing से लेकर launch systems और earth observation तक अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। Agriculture से Environment तक Space Technology का इस्तेमाल प्रधानमंत्री ने startups से space technology को केवल rockets और satellites तक सीमित न रखने की बात कही। उन्होंने कंपनियों से विचार करने को कहा कि उनकी technology का इस्तेमाल: में कैसे किया जा सकता है। PM Modi ने उदाहरण दिया कि agriculture से जुड़ी space technology कंपनियां agricultural universities और departments के साथ मिलकर किसानों को बेहतर data और decision-making tools उपलब्ध करा सकती हैं। Atal Tinkering Labs से जुड़ने की सलाह प्रधानमंत्री ने Space Startups को Atal Tinkering Labs के साथ अधिक सहयोग करने की सलाह भी दी। उनका कहना है कि इससे school level पर ही बच्चों में space science, technology और innovation को लेकर curiosity पैदा की जा सकती है। प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी को भारत के भविष्य के space missions और technologies से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। इससे आने वाले वर्षों में scientists, engineers, designers और entrepreneurs की नई पीढ़ी तैयार करने में मदद मिल सकती है। National Space Day पर PM Modi का संदेश 23 अगस्त को National Space Day के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए देशवासियों और वैज्ञानिक समुदाय को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत नई global व्यवस्था में लगातार अपने space sector का विस्तार कर रहा है और नई पीढ़ी के engineers, designers, coders और scientists नई technologies विकसित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है और इस लक्ष्य को हासिल करने में space sector की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने देश से अंतरिक्ष क्षेत्र में और बड़े सपने देखने, अधिक innovation करने और नई सीमाओं को पार करने का आह्वान किया। 23 अगस्त को ही क्यों मनाया जाता है National Space Day? भारत में हर साल 23 अगस्त को National Space Day मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 2023 में Chandrayaan-3 के Vikram Lander ने चंद्रमा की सतह पर सफल soft landing की थी। इसके बाद Pragyan Rover को चंद्रमा पर deploy किया गया था। भारत इस उपलब्धि के साथ चंद्रमा पर सफल soft landing करने वाला चौथा देश बना और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास उतरने वाला पहला देश बना। Chandrayaan-3 की सफलता के बाद 23 अगस्त को National Space Day के रूप में मनाने की घोषणा की गई थी। Private Space Sector में तेजी से बढ़ रहा भारत भारत सरकार ने वर्ष 2020 के बाद space sector को private participation के लिए बड़े स्तर पर खोलना शुरू किया। इसके बाद Skyroot Aerospace, Agnikul Cosmos, Pixxel, Dhruva Space, Bellatrix Aerospace, Digantara और कई अन्य startups ने launch vehicles, satellites और space technologies में तेजी से काम शुरू किया। 21 अगस्त की बैठक में इन कंपनियों समेत कुल 20 startups के representatives शामिल हुए थे। Startups ने प्रधानमंत्री को बताया कि Indian technologies को अपनाने में international companies की दिलचस्पी भी बढ़ रही है। Space में Pharmaceuticals Manufacturing तक की तैयारी प्रधानमंत्री के साथ interaction के दौरान कुछ startups ने अपनी futuristic technologies की जानकारी भी साझा की। एक startup representative ने ऐसी satellites विकसित करने की योजना का जिक्र किया जो space में जाकर pharmaceutical products manufacture कर सकें और उन्हें वापस पृथ्वी पर लाया जा सके। एक अन्य startup ने बताया कि उसे हालिया launch के बाद केवल एक महीने में आठ launch contracts मिले, जिनमें ज्यादातर international contracts हैं। ये developments दिखाती हैं कि Indian private space companies traditional satellite…

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