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मोलस्कम कंटेजियोसम: सेकंड हैंड कपड़े पहनने से पहले जान लें इस व्यक्ति का दर्दनाक अनुभव

अपने भाई-बहनों के पुराने कपड़े (Clothes) पहनना हर भारतीय परिवार में एक रिवाज की तरह है। लेकिन, आजकल आप ऑफलाइन ही नहीं बल्कि ऑनलाइन भी सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) खरीद और बेच सकते हैं। ऐसी कई वेबसाइट्स हैं, जिनसे आप इस सुविधा का आनंद ले सकते हैं। पुराने कपड़े (Clothes) खरीदने के कई फायदे हैं जैसे यह सस्ते होते हैं, एनवायरनमेंट के लिए फायदेमंद हैं, कम कीमत में अच्छी क्वॉलिटी मिल जाती है। लेकिन, इसके कई नुकसान भी हो सकते हैं। सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) खरीदना महंगा पड़ा एक व्यक्ति को, जिसे इसके कारण एक बड़ी स्किन प्रॉब्लम का सामना करना पड़ा। आइए जानें इस बारे में विस्तार से। सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) के अन्य नुकसानों के बारे में भी जानें। सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) पहनना पड़ा भारी: पाएं जानकारी सोशल मीडिया आजकल एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन चुका है, जहां लोग हर एक चीज शेयर कर सकते हैं। हाल ही में एक व्यक्ति ने शेयर किया कि उसने सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) खरीद कर पहने और उसकी वजह से उसे वायरल स्किन इंफेक्शन हुआ। उस व्यक्ति के अनुसार इन कपड़ों की वजह से उसे  मोलस्कम कंटेजियोसम (Molluscum Contagiosum) जैसी समस्या का सामना करना पड़ा। मोलस्कम कॉन्टैगिओसम एक स्किन इंफेक्शन है। आइए जानें कि मोलस्कम कंटेजियोसम (Molluscum Contagiosum) क्या है और यह कितना खतरनाक हो सकता है? मोलस्कम कंटेजियोसम (Molluscum Contagiosum) मोलस्कम कंटेजियोसम (Molluscum Contagiosum) एक वायरल स्किन इंफेक्शन है ,जिसका कारण होता है मोलस्कम कंटेजियोसम वायरस। इसके कारण स्किन पर छोटे, गोल और ऊपर उठे हुए मस्से हो सकते हैं। यह मस्से दर्दभरे नहीं होते हैं लेकिन इनमे खुजली हो सकती है। यह समस्या आमतौर पर हानिरहित हैं लेकिन इसके कारण रोगी को परेशानी हो सकती है। इसके लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। यह तो थी पुराने कपड़े (Clothes) पहनने से होने वाली समस्या के बारे में जानकारी। अब जानिए कि सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes)पहनने से और क्या समस्याएं हो सकती हैं? इसे भी पढ़ें: महामारी की आशंका: अमेरिका में H5N1 के नए मामले, दुनिया भर में चिंता सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) पहनने से और क्या समस्याएं हो सकती हैं?  सेकंड हैंड कपड़े (Second hand clothes) पहनने से मोलस्कम कंटेजियोसम (Molluscum Contagiosum) ही नहीं बल्कि कई अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। यह समस्याएं इस प्रकार हैं: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Second hand clothes #clothes #Secondhandclothes #skinproblems #MolluscumContagiosum

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BSNL new plan

BSNL का सस्ता प्लान: 180 दिनों की वैलिडिटी के साथ फ्री कॉलिंग और डेटा की टेंशन खत्म

हमारे देश में कई टेलीकॉम कंपनियां हैं, जो समय-समय पर अपने ग्राहकों के लिए नए-नए ऑफर्स लाती रहती हैं। रिलायंस जियो, एयरटेल और बीएसएनएल (BSNL) कुछ प्रसिद्ध टेलीकॉम कंपनियां हैं। बीएसएनएल कंपनी मोबाइल, लैंडलाइन, ब्रॉडबैंड और अन्य सेवाएं अपने ग्राहकों को प्रदान करती हैं। इसका नेटवर्क पूरे भारत में फैला हुआ है। आजकल रिचार्ज प्लान बहुत महंगे हो गए हैं। हर महीने वैलिडिटी (Validity) के लिए ग्राहकों को बहुत अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। बीएसएनएल (BSNL) एक ऐसा नया प्लान ले कर आया है जिससे कम कीमत में 180 दिन की वैलिडिटी (Validity) मिल रही है। यानी, कम कीमत में आपको अधिक लाभ हो सकता है। आइए जानें कि बीएसएनएल का नया प्लान (BSNL new plan) क्या है?   बीएसएनएल का नया प्लान (BSNL new plan): पाएं जानकारी बीएसएनएल (BSNL) कंपनी कई तरह के प्लान ले कर आती है जिससे यूजर्स की आवश्यकताएं पूरी हो सकती हैं। यूजर अपनी इच्छानुसार इनमे से अपने लिए बेहरीन प्लान्स को चुन सकते हैं। आइए जानें कि बीएसएनएल का नया प्लान (BSNL new plan) क्या है, जो कम कीमत में लम्बी वैलेडिटी प्रदान करता है?   यह है बीएसएनएल का नया प्लान (BSNL new plan)?  बीएसएनएल का नया प्लान (BSNL new plan) कम दामों में लम्बी वैलिडिटी प्रदान कर रहा है। यह प्लान केवल  897 रुपये  का है जिसमें ग्राहकों को 180 दिनों की लम्बी वैलिडिटी (Validity) मिल रही है। अगर किसी के पास बीएसएनएल (BSNL) का प्रीपेड सिम है तो यह रिचार्ज उनके लिए परफेक्ट है। इससे आपको किसी भी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कालिंग और रोजाना 100 मैसेजिज की सुविधा भी मिलेगी। 80 दिनों की वैलिडिटी (Validity) वाले इस प्लान में आपको डेटा भी मिल रहा है। इस प्लान में आपको टोटल 90GB डेटा मिल रहा है और इसमें कोई डेली लिमिट नहीं है। आप इस डेटा को एक ही दिन में भी खत्म कर सकते हैं या रोजाना थोड़ा थोड़ा इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से इस रिचार्ज को कर सकते हैं।  इसे भी पढ़ें:-  पाकिस्तान ने की पहलगाम आतंकी हमले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग, चीन ने मिलाया सुर में सुर बीएसएनएल के अन्य किफायती प्लान अगर आपको लम्बी वैलिडिटी (Validity) चाहिए, तो यह बीएसएनएल (BSNL) के प्लान भी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं:  Latest News in Hindi Today Hindi   #BSNLnewplan #BSNL #validity #telecomecompany #data

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H5N1

महामारी की आशंका: अमेरिका में H5N1 के नए मामले, दुनिया भर में चिंता

एच5एन1 (H5N1) यानी एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza) वो वायरल इन्फेक्शन है, जो पक्षियों, गायों और अन्य जानवरों में सबसे पहले फैलता है। मनुष्यों में इसके फैलने की संभावना भी होती है। इसके कारण रोगी हल्की से लेकर गंभीर सांस संबंधी समस्याओं का अनुभव कर सकते हैं। अमेरिका में हाल ही में डेयरी गायों और लोगों में एच5एन1 (H5N1) इंफेक्शन के कुछ मामले सामने आएं हैं। इन मामलों के कारण इस वायरस की महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही जंगली पक्षियों और अन्य पक्षियों में भी यह फैल रहा है। यानी, यह एक गंभीर स्थिति हो सकती है। आइए जानें एच5एन1 का नया खतरा (H5N1 new threat) क्या है? इससे बचने के तरीकों के बारे में भी जानें। एच5एन1 का नया खतरा (H5N1 new threat): पाएं जानकारी एच5एन1 (H5N1) या एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza) एक गंभीर समस्या है जिसके हाल ही में अमेरिका में बहुत से मामले सामने आएं हैं। यह मामले अभी डेयरी गायों और मनुष्यों में सामने आएं हैं। इसके कारण चिंताएं बहुत अधिक बढ़ गयी हैं। ग्लोबल वायरस नेटवर्क (GVN) जो एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य वायरस से होने वाली बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में सुधार करना है। ग्लोबल वायरस नेटवर्क ने पूरी दुनिया के देशों की सरकारों से यह निवेदन किया है कि जल्दी इस रोग को लेकर कोई बड़ा फैंसला लें ताकि इससे निपटा जा सके। इससे एच5एन1 का नया खतरा (H5N1 new threat) बचा जा सकता है। आइए जानें की इस रोग के सिम्पटम्स क्या हो सकते हैं? एच5एन1 (H5N1) के सिम्पटम्स इस रोग के बारे में इन्फोर्मशन होना बेहद आवश्यक है। कुछ लोगों में एच5एन1 (H5N1) या एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza) निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं: क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार रोगी में नजर आने वाले एच5एन1 या एवियन इन्फ्लुएंजा (Avian Influenza) के लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं। इसके लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसे भी पढ़ें: इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? H1N1 से कैसे बचें? एच5एन1 (H5N1) जैसे रोग से बचना जरूरी है। इसके बचाव के तरीके इस प्रकार हैं:  नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi H5N1 #Birdflu #H5N1newthreat #AvianInfluenza #H5N1

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Assistant Engineer Posts released by Bihar Public Service Commission

बिहार में बंपर भर्ती: बिहार में असिस्टेंट इंजीनियर के 1000+ पदों पर आवेदन शुरू

असिस्टेंट इंजीनियर (Assistant Engineer) एक ऐसी पोस्ट है, जिसमें टेक्निक और मैनेजमेंट स्किल की जरूरत होती है। अगर आप टेक्निकल प्रोब्लेम्स को सॉल्व करने और प्रोजेक्ट्स के विकास में रूचि रखते हैं तो असिस्टेंट इंजीनियर जॉब आपके लिए उपयुक्त रहेगी। बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (Bihar Public Service Commission) ने असिस्टेंट इंजीनियर (Assistant Engineer) के लिए पोस्ट्स निकाली हैं। यह भर्ती 1024 पोस्ट्स के लिए की जा रही है। इन पोस्ट्स के लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस 30 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और इच्छुक कैंडिडेट 28 मई तक रजिस्टर कर सकते हैं। अगर आप भी अप्लाई करना चाहते हैं, तो देर न करें। आइए जानें बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई असिस्टेंट इंजीनियर पोस्ट्स (Assistant Engineer Posts released by Bihar Public Service Commission) के बारे में।  बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई असिस्टेंट इंजीनियर पोस्ट्स (Assistant Engineer Posts released by Bihar Public Service Commission): पाएं जानकारी इस पोस्ट्स के लिए ऑनलाइन आसानी से अप्लाई कर सकते हैं। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए इसकी ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट करें। इसके लिए निम्नलिखित पोस्ट्स निकाली गई हैं: बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई असिस्टेंट इंजीनियर पोस्ट्स (Assistant Engineer Posts released by Bihar Public Service Commission): एलिजिबिलिटी इन पोस्ट्स के लिए अप्लाई करने के लिए इच्छुक कैंडिडेट के पास सिविल, मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में डिग्री होना जरूरी है। यह डिग्री किसी मान्यता प्राप्त भारतीय विश्वविद्यालय या एआईसीटीई द्वारा एप्रूव्ड इंस्टिट्यूट से ही की होनी चाहिए। इसके अलाई किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से नियमित रूप से की जाने वाले टेक्निकल कोर्स की डिग्री भी मान्य होगी। आयु सीमा बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई असिस्टेंट इंजीनियर पोस्ट्स (Assistant Engineer Posts released by Bihar Public Service Commission) के लिए न्यूनतम आयु सीमा 21 साल है जबकि अधिकतम आयु पुरुषों की 37 साल है और महिलाओं की 40 साल है। आरक्षित वर्गों को इसमें कुछ छूट दी गई है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट करें। इसे भी पढ़े: बिहार में स्टाफ नर्स की भर्ती: 11 हजार से अधिक पदों के लिए कर सकते हैं आवेदन कैसे करें अप्लाई? बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई असिस्टेंट इंजीनियर पोस्ट्स (Assistant Engineer Posts released by Bihar Public Service Commission) के लिए आप इस तरह से आसानी से अप्लाई कर सकते हैं:  अगर बात की जाए असिस्टेंट इंजीनियर पोस्ट्स (Assistant Engineer Posts) की फीस के बारे में, तो जनरल कैंडिडेट के लिए यह फीस 750 रुपए है जबकि एससी, एसटी, बिहार की फेमल कैंडिडेट्स आदि के लिए यह शुक्ल केवल 200 रुपए है। अन्य कैंडिडेट्स के लिए यह शुक्ल 750 रुपए है। इच्छुक कैंडिडेट 28 मई से पहले अप्लाई करना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Bihar Public Service Commission #AssistantEngineerPosts #BiharPublicServiceCommission  #AssistantEngineer  #AssistantEngineerPostsreleasedbyBiharPublicServiceCommission

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World Immunization Week

World Immunization Week: इस वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक जानें बच्चों के लिए कौन सी वैक्सीन्स हैं जरूरी?

इम्यूनाइजेशन यानी प्रतिरक्षीकरण उस प्रोसेस को कहा जाता है, जिसमें वैक्सीन (Vaccine) के माध्यम से व्यक्ति किसी रोग के प्रति रेजिस्टेंस बन सकता है। यानी, इससे रोगों से बचाव में मदद मिलती है। वैक्सीन (Vaccine) से शरीर का इम्यून सिस्टम को स्टिमुलेट किया जा सकता है ताकि भविष्य में किसी भी तरह के इन्फेक्शन्स और रोगों से बचाव हो सके। हर साल 24 अप्रैल से 30 अप्रैल को वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) के रूप में मनाया जाता है ताकि लोगों को टीकाकरण के बारे में बताया जा सके। इससे लोगों को गंभीर बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी। आइए जानें वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) के बारे में और अधिक। यह भी जानें कि बच्चों को कौन सी वैक्सीन्स लगवानी चाहिए (Which vaccines should children get)?  वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) की थीम  इस साल वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) की थीम है  “सभी के लिए वैक्सीनेशन (Vaccination) मानवीय रूप से संभव है’। इस थीम के माध्यम से वैक्सीनेशन (Vaccination) के महत्व और प्रयासों को हाईलाइट किया गया है। वैक्सीनेशन (Vaccination) से बीमारियों से बचाव और जीवन को बचाने में मदद मिली है। इससे यह संदेश भी मिलता है कि हर व्यक्ति चाहे वो किसी भी उम्र का हो, वैक्सीनेशन (Vaccination) करा सकता है। बच्चों को कौन सी वैक्सीन्स लगवानी चाहिए (Which vaccines should children get)? डब्ल्यूएचओ (WHO) का कहना है की हर साल अप्रैल के अंतिम हफ्ते में इस दिन को मनाने का उद्देश्य है वैक्सीन (Vaccine) के इस्तेमाल को बढ़ाना देना ताकि हर उम्र के लोग बीमारियों से बच सकें। जानिए बच्चों को कौन सी वैक्सीन्स लगवानी चाहिए (Which vaccines should children get)? जन्म के बाद शिशु के जन्म लेते ही उसे बैसिलस कैलमेट-गुएरिन, ओरल पोलियो वैक्सीन और हेपेटाइटिस बी बर्थ डोज दी जाती है। 6 हफ्ते की उम्र के शिशु 6  हफ्ते की उम्र के शिशु को ओरल पोलियो वैक्सीन, पेंटावेलेंट, रोटावायरस वैक्सीन, न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन और इनएक्टिवेटेड पोलियो वैक्सीन दी जाती है। 10 हफ्ते के उम्र के शिशु इस उम्र के शिशु को पेंटावलेंट की दूसरी डोज, ओरल पोलियो वैक्सीन (Vaccine) की तीसरी डोज और रोटावायरस की दूसरी डोज दी जाती है। 14 हफ्ते के उम्र के शिशु 14 हफ्ते के शिशु को पेंटावलेंट की अंतिम डोज के साथ ही ओरल पोलियो वैक्सीन की अंतिम डोज और न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (Vaccine) की डोज दी जाती है। इसके साथ ही इनएक्टिव पोलियो वैक्सीन की अंतिम डोज भी इसी उम्र में दी जाती है। 9-12 महीने के शिशु इस उम्र के शिशु को मीसल्स और रूबेला के साथ न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन का बूस्टर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें जापानी इंसेफेलाइटिस की डोज भी दी जाती है। इसे भी पढ़ें: इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? 16-24 महीने के शिशु इस उम्र के शिशु को मीसल्स और रूबेला की दूसरी डोज, जापानी इंसेफेलाइटिस की अंतिम डोज, डीपीटी (DPT) यानी डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस (काली खांसी) का बूस्टर और ओरल पोलियो वैक्सीन का बूस्टर दिया जाता है। यह तो थी बच्चों में वैक्सीन (Vaccine) की लिस्ट और वर्ल्ड इम्यूनाइजेशन वीक (World Immunization week) के बारे में जानकारी। इसके साथ ही कुछ अन्य वैक्सीन्स भी हैं जो बच्चों को लगवानी चाहिए। इसके बारे में आप अपने डॉक्टर से बात करें और सलाह लें। नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi World Immunization week #Whichvaccinesshouldchildrenget #Vaccination #vaccine #WorldImmunizationweek

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Hill Station Dharchula

गर्मियों के लिए बेस्ट जगह: भारत-नेपाल के बीच बसा हिल स्टेशन “धारचूला”

गर्मियां आते ही हीट से बचाव के लिए लोग पहाड़ों की तरफ रुख करते हैं। पहाड़ों में अधिकतर लोग मसूरी, नैनीताल, मनाली, शिमला आदि जाना पसंद करते हैं। लेकिन, आजकल यह हिल स्टेशंस भीड़-भाड़ वाले हो गए हैं। ऐसे में ऐसे हिल स्टेशंस को एक्सप्लोर करना चाहिए, जो न केवल आपको खूबसूरत अनगिनत यादें दें बल्कि भीड़ व जाम से भी आप बचें रहें। ऐसा ही एक हिल स्टेशन (Hill station) है धारचूला (Dharchula)। धारचूला उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य का एक सुन्दर हिल स्टेशन (Hill station) है, जो भारत और नेपाल के बीच में स्थित है। अगर आप गर्मियों में हिल स्टेशन (Hill station) विजिट करना चाहते हैं, तो आप धारचूला (Dharchula) को अपनी लिस्ट में शामिल कर सकते हैं। जानिए इस स्थान के बारे में विस्तार से। धारचूला (Dharchula): पर्यटकों के लिए एक नयी डेस्टिनेशन धारचूला (Dharchula) उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य के पिथौराखंड डिस्ट्रिक में मौजूद एक कस्बा है। यह हिल स्टेशन (Hill station) इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्थित है और मानसरोवर यात्रा रूट का एक जरूरी स्टॉप है। यह स्थान प्रसिद्ध है अपने खूबसूरत दृश्यों, ट्रेडिशनल कल्चर और कई ट्रैकिंग व धार्मिक स्थानों की वजह से। अगर आप इस स्थान पर विजिट करना चाहते हैं, तो मार्च से जून और सितम्बर से अक्टूबर तक यहां जानें का सबसे अच्छा समय है। इस समय आसमान सुहाना रहता है और ट्रैकिंग के लिए भी यह समय बेहतरीन है। जुलाई से अगस्त तक यहां बारिशों की वजह से लैंडस्लाइड का खतरा रहता है। इसलिए, इस समय धारचूला (Dharchula) और अन्य पहाड़ी स्थानों को विजिट करने की सलाह नहीं दी जाती है। धारचूला के मुख्य आकर्षण धारचूला (Dharchula) के आसपास कई आकर्षक स्थान हैं जैसे ओम पर्वत, नारायण आश्रम, छिरकिला डैम और अस्कोट वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी आदि। यही नहीं, यहां से कैलाश मानसरोवर और आदि कैलाश के लिए भी जाया जा सकता है। यहां आप लोकल कल्चर और ट्रेडिशन को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं।  इसके अलावा आप यहां से पिथौरागढ़, मुंसियारी, मानसरोवर लेक, पटल भुवनेस्वर आदि भी जा सकते हैं। नेपाल भी यहां से नजदीक है, आप वहां की यात्रा भी कर सकते हैं।\ इसे भी पढ़े: बिहार में स्टाफ नर्स की भर्ती: 11 हजार से अधिक पदों के लिए कर सकते हैं आवेदन कैसे पहुंचा जा सकता है धारचूला (Dharchula)? धारचूला (Dharchula) में कोई भी रेलवे स्टेशन नहीं है। इससे सबसे नजदीक रेलवे जंक्शन है टनकपुर जो यहां से 240 किलोमीटर दूर है। यहां से आपको आसानी से अन्य बड़ी सिटीज के लिए ट्रेन मिल जायेगी। लेकिन धारचूला (Dharchula) एनएच9 के माध्यम से बड़ी सिटीज से जुड़ा हुआ है जैसे अल्मोड़ा, टनकपुर, हल्द्वानी, देहरादून नयी दिल्ली, नॉएडा आदि। उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य के इस हिल स्टेशन (Hill station) से आपको इन सिटीज के लिए बस भी आसानी से मिल जायेगी या आप कैब भी हायर कर सकते हैं। अगर बात की जाए फ्लाइट की, तो धारचूला (Dharchula) से सबसे नजदीक एयरपोर्ट है पंतनगर जो यहां से 336 किलोमीटर दूर है। आप बाय रोड और ट्रेन इस हिल स्टेशन (Hill station) तक आसानी से पहुंच सकते हैं। तो इन गर्मियों में आप भीड़भाड़ वाले हिल स्टेशंस को छोड़ कर धारचूला (Dharchula) विजिट करना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news Hill Station Dharchula #Dharchula #hillstation #hillstations #Uttarakhand #HillStations #Almora #Tanakpur #Haldwani

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Power packed flour

Power packed flour: न्यूट्रिएंट्स और कई फायदों से भरपूर हैं यह 5 आटे, जो हर मौसम के लिए है बेस्ट

आटा (Flour) वो मुख्य इंग्रेडिएंट है जिसका इस्तेमाल कई व्यंजनों को बनाने के लिए किया जाता है। हम भारतीयों  का कोई भी आहार रोटी के बिना पूरा नहीं होता। अगर बात की जाए आटे के फायदे की, तो यह ऊर्जा और न्यूट्रिएंट्स का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। आटा (Flour) पाचन में मदद करता है, वजन को सही रखने में मददगार है और यही नहीं हार्ट के लिए भी इसे फायदेमंद माना गया है। आटा (Flour) कई तरह का होता है और कुछ तरह के आटे के प्रकार अन्य से हेल्दी होते हैं क्योंकि इनमें अधिक फाइबर और अन्य न्यूट्रिएंट्स होते हैं। आपको यह जानकार हैरानी हो सकती है कि कुछ आटे अनाज से नहीं बनते हैं बल्कि उन्हें नट्स और सीड्स से बनाया जाता है। आइए जानें इन शक्ति से भरपूर आटा (Power packed flour) के बारे में। शक्ति से भरपूर आटा (Power packed flour): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार ट्रेडिशनल आटा (Flour) को गेहूं से बनाया जाता है लेकिन अन्य तरह के आटे को नट्स और नेचुरली ग्लूटेन फ्री अनाज से बनाया जाता है जैसे कोकोनट, बादाम, बकविट आदि। शक्ति से भरपूर आटा (Power packed flour) इस प्रकार है:  1. गेहूं का आटा (Wheat flour) गेहूं के आटे को सबसे अधिक खाया जाता है। इससे रोटी, पूरी और परांठा आदि बनाया जाता है। मैदे की तुलना में यह अधिक हेल्दी होता है। इसे चोकर और पूरे गेहूं के दाने को पीस के बनाया जाता है। प्रोटीन, फाइबर के अलावा इसमें कई अन्य जरुरी मिनरल्स होते हैं जैसे सेलेनियम, मैंगनीज, फोलेट, कॉपर आदि। अधिक फाइबर युक्त होने के कारण डायजेस्टिव सिस्टम के लिए यह फायदेमंद है। इसके अलावा भी इस आटे के कई हेल्थ बेनेफिट्स हैं।  2. चावल का आटा (Rice flour) चावल का आटा (Rice flour) एक ग्लूटेन फ्री विकल्प है, जिसे ग्लूटोन इनटॉलेरेंस और सेलिएक डिजीज से पीड़ित लोग भी आसानी से खा सकते हैं। यह आसानी से पच जाता है और फाइबर, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, मैग्नीशियम, कॉपर का अच्छा स्त्रोत हैं। इसे खाने के बाद जल्दी भूख नहीं लगती जिससे वजन को सही रखने में मदद मिलती है। यही नहीं चावल का आटा (Rice flour) में फैट और कोलेस्टेरोल कम होता है, यानी यह हार्ट फ्रेंडली है।  3. रागी आटा (Ragi flour) रागी आटा (Ragi flour) को न्यूट्रिशनल पावरहाउस कहा जाता है, क्योंकि इसके कई हेल्थ बेनेफिट्स हैं। इसमें कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम और जिंक होता है। इसके कारण हड्डियों के स्वास्थ्य, मसल्स के फंक्शन आदि के लिए इसे बेहतरीन माना जाता है। इस आटे का ग्लिसेमिक इंडेक्स कम होता है जिससे ब्लड ग्लूकोज लेवल (Blood Glucose Level) सही रहता है। यानी, यह डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए बेहतरीन माना गया है। रागी आटा (Ragi flour) को रोटी, इडली और कूकीज आदि को बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।    4. मल्टीग्रैन आटा (Multigrain flour) मल्टीग्रैन आटा भी कई न्यूट्रिएंट्स प्रदान करता है। यह गेहू, ओट्स, मिलेट, जौ आदि का मिश्रण है। कई आटे का यह कॉम्बिनेशन फाइबर, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर है। यही नहीं, यह सामान्य आटे से अधिक हेल्दी माना जाता है। इससे बने आहार को बनाने से एनर्जी मिलती है और इसके साथ ही अधिक समय तक भूख नहीं लगती। इसमें फाइबर भी अधिक होता है जिससे गट सही रखने में मदद मिलती है। इसे भी पढ़ें: इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? 5. ज्वार का आटा (Sorghum flour) ज्वार का आटा (Sorghum flour) भी एक ग्लूटेन फ्री विकल्प है, जो फाइबर, विटामिन और मिनरल्स, जिंक और आयरन से भरपूर होता है। इसमें मौजूद हाई फाइबर कंटेंट से ब्लड फ्लो रेगुलेट रहता है और डाइजेशन को सही रखने में मदद मिलती है। ज्वार का आटा (Sorghum flour) रोटी, चपाती, इडली, परांठा आदि बनाने में इस्तेमाल होता है। न्यूट्रिशंस से भरपूर होने के कारण इन्हें आप आसानी से अपनी डायट में शामिल कर सकते हैं। नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Fortified flour #Fortifiedflour #Riceflour #Sorghumflour #Ragiflour #flour

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Staff Nurse Posts released by Bihar Technical Service Commission

बिहार में स्टाफ नर्स की भर्ती: 11 हजार से अधिक पदों के लिए कर सकते हैं आवेदन

सरकारी नौकरी करने के इच्छुक लोगों के लिए एक और सुनहरा मौका है। बिहार टेक्निकल सर्विस कमीशन (Bihar Technical Service Commission) ने 11 हजार से अधिक स्टाफ नर्स के लिए पोस्ट्स निकाली हैं। इसके लिए आप अभी आसानी से ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। इन पोस्ट्स के लिए आवेदन करने के लिए केवल कुछ ही दिन ही निर्धारित किए गए हैं। निर्धारित डेट्स के बाद, आप इसके लिए अप्लाई नहीं कर सकते। अगर आपको इन पोस्ट्स के बारे में अधिक जानकारी चाहिए, तो आप इसकी ऑफिशियल पर विजिट कर सकते हैं। आइए जानें बिहार टेक्निकल सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई स्टाफ नर्स पोस्ट्स (Staff Nurse Posts released by Bihar Technical Service Commission) के बारे में विस्तार से। इसके लिए कैसे अप्लाई करना चाहिए, यह भी जानें। बिहार टेक्निकल सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई स्टाफ नर्स पोस्ट्स (Staff Nurse Posts released by Bihar Technical Service Commission) बिहार टेक्निकल सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई स्टाफ नर्स पोस्ट्स (Staff Nurse Posts released by Bihar Technical Service Commission) के लिए 11,389 वेकेंसीज निकाली गई हैं। इसके लिए आप 25 अप्रैल से 23 मई 2025 तक ऑनलाइन आवेदन भर सकते हैं। बिहार टेक्निकल सर्विस कमीशन  (Bihar Technical Service Commission) द्वारा निकाली गई स्टाफ नर्स पोस्ट्स (Staff Nurse Posts) के बारे में अन्य जानकारी इस प्रकार है: स्टाफ नर्स पोस्ट्स के लिए योग्यता स्टाफ नर्स पोस्ट्स (Staff Nurse Posts) के लिए अप्लाई (Apply) करने वाले कैंडिडेट्स के पास जनरल नर्सिंग और मिडवाइफरी (GNM) पाठ्यक्रम या बीएससी (नर्सिंग) की डिग्री होनी चाहिए। यह नर्सिंग कोर्स भारतीय नर्सिंग परिषद (INC) द्वारा मान्यता प्राप्त किसी इंस्टीट्यूट से ही किया जाना चाहिए। अगर कैंडिडेट ने बिहार के बाहर के इंस्टीयूट्स से नर्सिंग की है, तो उनके पास इंडियन नर्सिंग काउंसिल द्वारा सुटेबिलिटी सर्टिफिकेट होना चाहिए। यही नहीं, कैंडिडेट्स द्वारा बिहार नर्सेज रजिस्ट्रेशन काउंसिल पटना में रजिस्टर कराना भी अनिवार्य है। एज लिमिट बिहार टेक्निकल सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई स्टाफ नर्स पोस्ट्स (Staff Nurse Posts released by Bihar Technical Service Commission) के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो ध्यान रखें कि पुरुष उम्मीदवारों के लिए एज लिमिट 21 से 37 साल निर्धारित की गई है। महिलाओं के लिए यह उम्र 21 से 40 साल है। लेकिन , कुछ रिजर्व्ड कैंडिडेट्स को इसमें छूट दी गई है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं। स्टाफ नर्स पोस्ट्स के लिए कैसे करें अप्लाई इसे भी पढ़े: आखिरी तारीख करीब, बिहार पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2025 के लिए अभी करें अप्लाई बिहार टेक्निकल सर्विस कमीशन द्वारा निकाली गई स्टाफ नर्स पोस्ट्स (Staff Nurse Posts released by Bihar Technical Service Commission) की फीस इस स्टाफ नर्स पोस्ट्स (Staff Nurse Posts) के लिए जनरल, ओबीसी, ईबीसी, ईडब्ल्यूएस आदि के लिए आवेदन शुक्ल 600 रुपए रखा गया है। इसके साथ ही एससी और एसटी महिला (Women) उम्मीदवारों के लिए यह शुक्ल ₹150 रुपए है। इस पोस्ट के लिए कैंडिडेट्स का सिलेक्शन मेरिट लिस्ट और एक्सपीरियंस के अनुसार किया जाएगा। अगर आप इन पोस्ट्स के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इस मौके को हाथ से न जानें दें और तुरंत अप्लाई करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  Bihar Technical Service Commission #StaffNurse #StaffNursePosts #BiharTechnicalServiceCommission #StaffNursePostsreleasedbyBiharTechnicalServiceCommission

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Travel insurance

सुरक्षित यात्रा के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस: यह है आपके सफर का साथी

घूमना-फिरना लगभग हर व्यक्ति को पसंद होता है, क्योंकि इससे न केवल हम नई जगहों को एक्सप्लोर करते हैं बल्कि विभिन्न संस्कृतियों और लोगों को जानने का मौका भी हमें मिलता है। लेकिन, कहीं भी घूमने के लिए जाने के लिए अपना बजट बनाना और सही खर्च करना बेहद जरूरी है। नहीं तो यात्रा का मजा किरकिरा हो सकता है। सही से खर्चों का प्रबंधन करने के लिए कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए। इस प्रबंधन लिए ट्रेवल इंश्योरेंस (Travel insurance) एक अच्छा विकल्प है। अगर बात की जाए ट्रेवल इंश्योरेंस (Travel insurance) की, तो यह एक तरह का इंश्योरेंस (Insurance) हैं, जो ट्रेवलिंग से जुड़े फाइनेंशियल लॉसेस को कवर करता है। आइए जानें इस इंश्योरेंस (Insurance) के बारे में विस्तार से। क्या है ट्रेवल इंश्योरेंस (Travel insurance)? जैसा की पहले ही बताया गया है कि ट्रेवल इंश्योरेंस (Travel insurance) वो इंश्योरेंस (Insurance) यानी बीमा है जो ट्रेवलिंग के दौरान होने वाले फाइनेंशियल रिस्क्स और घाटों से हमें बचाता है। यह डोमेस्टिक या इंटरनेशनल दोनों तरह के ट्रेवल में सुरक्षा प्रदान करने में फायदेमंद है। जैसे अगर आपने किसी वजह से अपनी फ्लाइट को मिस कर दिया है, तो बेहतर ट्रेवल इंश्योरेंस कम्पनीज आपको इसके खर्च को वापस करने में मदद करती हैं। जानिए ट्रेवल इंश्योरेंस के फायदे (Benefits of travel insurance) क्या हो सकते हैं? इसे भी पढ़ें:- क्या आतंकी हमलों में पीड़ित परिवार को मिलता है इंशोरेंस? ट्रेवल इंश्योरेंस के फायदे  (Benefits of travel insurance) ट्रेवल इंश्योरेंस (Travel insurance) कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके लाभ इस प्रकार हैं: यह तो थी जानकारी ट्रेवल इंश्योरेंस (Travel insurance) के बारे में। आप ट्रेवल इंश्योरेंस को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, बीमा कंपनी और किसी ट्रेवल एजेंट से खरीद सकते हैं। यह एक जरूरी इंश्योरेंस (Insurance)है जिससे आप कई जोखिमों से बच सकते हैं। इससे आपको यात्रा के दौरान अच्छा और सुरक्षित अनुभव मिलेगा।  Latest News in Hindi Today Hindi news Travel insurance #Travelinsurance #benefitsoftravelinsurance #insurance #TravelInsuranceCompany

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Benefits of Asafoetida in Ayurveda

हींग के आयुर्वेदिक फायदे: पाचन से लेकर श्वसन तक फायदेमंद है यह मसाला

हींग (Asafoetida) को असाफोटीडा के नाम से भी जाना जाता है। यह भारतीय रसोईघर में मिलने वाले सबसे महंगे मसलों में से एक है। इसे फेरूला असाफोटीडा नाम के पौधे की जड़ से प्राप्त किया जाता है। यह एक चिपचिपा पदार्थ होता है, जिसमें सल्फर कंपाउंड होते हैं। हींग (Asafoetida) को अपनी तेज खुशबु के लिए जाना जाता है।इसका अनोखा स्वाद खाने को और स्वादिष्ट बनाता है। आयुर्वेद (Ayurveda) में भी हींग का इस्तेमाल हेल्थ के लिए बेनेफिशियल माना गया है। इस मसाले का इस्तेमाल खाना पकाने, मेडिसिन्स को बनाने और आयुर्वेद (Ayurveda) में किया जाता है। इसके कई हेल्थ बेनेफिट्स हैं। आइए जानें कि आयुर्वेद में हींग के बेनेफिट्स (Benefits of Asafoetida in Ayurveda) क्या हैं? आयुर्वेद में हींग के बेनेफिट्स (Benefits of Asafoetida in Ayurveda): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार आयुर्वेद (Ayurveda) मेडिसिन में हींग (Asafoetida) को गैस और अच्छे पाचन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा ब्रोंकाइटिस और किडनी स्टोन्स के उपचार में इसे फायदेमंद माना गया है। पाएं जानकारी आयुर्वेद में हींग के बेनेफिट्स (Benefits of Asafoetida in Ayurveda) के बारे में। डायजेस्टिव हेल्थ के लिए फायदेमंद आयुर्वेद (Ayurveda) में हींग (Asafoetida) को एक महत्वपूर्ण औषधि माना जाता है, जिनसे कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का इलाज संभव है। ऐसा माना गया है कि इसके सेवन से पाचन तंत्र सही रहता है और कई पेट सम्बन्धी समस्याओं से आराम मिलता है जैसे गैस, एसिडिटी और अपच आदि। सांस समस्याओं से राहत  हींग (Asafoetida) को सांस से जुडी समस्याओं से राहत पाने में भी फायदेमंद पाया गया है जैसे अस्थमा। इसके साथ ही इसे इस्तेमाल से सर्दी-जुकाम में होने वाली परेशानियों से राहत पाने में मदद मिलती है। दर्द से मिली आराम: हींग (Asafoetida) में दर्द को दूर करने कि प्रॉपर्टीज होती हैं। ऐसा माना गया है कि इसके इस्तेमाल से जॉइंट्स और मसल्स को कम करने में सहायता मिलती है। इम्युनिटी हो मजबूत हींग में अन्य गुणों के साथ ही एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज होती हैं, जिससे इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। यही नहीं, हींग (Asafoetida) को कफ और वात दोषों को बैलेंस करने में फायदेमंद माना गया है। इसे भी पढ़ें: इस National Infertility Awareness week जानिए क्यों जरूरी है यंग महिलाओं में फर्टिलिटी टेस्टिंग? आयुर्वेद में हींग के बेनेफिट्स (Benefits of Asafoetida in Ayurveda) के बारे में आप जान गए होंगे। हींग से बना चूर्ण डायजेस्टिव सिस्टम को सही बनाए रखने और सांस सम्बन्धी समस्याओं को दूर करने में फायदेमंद है। हींग (Asafoetida) की जेली को दर्द दूर करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इसके तेल के प्रयोग से जॉइंट्स और बॉडी पेन आदि से आराम पाने में मदद मिलती है। ऐसा भी माना गया है कि हींग (Asafoetida) एंटीऑक्सीडेंट्स (Antioxidant) का अच्छा स्त्रोत हैं, लेकिन इसके बारे में अभी लिमिटेड रिसर्च की गयी हैं और अधिक रिसर्च की जानी जरूरी है। आप दाल, सब्जी, सूप आदि में ड़ाल कर हींग (Asafoetida) का इस्तेमाल कर के इसके फायदों को पा सकते हैं। नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Asafoetida Benefits #Asafoetida #Ayurveda #BenefitsofAsafoetidainAyurveda #BenefitsofAsafoetida

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