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वित्त मंत्रालय ने सितंबर तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की growth 7.3% रहने का अनुमान जताया

नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक GDP growth करीब 7.3% रहने का अनुमान जताया है। मंत्रालय के Monthly Economic Review में कहा गया कि पहली तिमाही की तुलना में growth थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। पहली तिमाही में रही थी 7.8% growth अप्रैल-जून 2026 की पहली तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8% की वास्तविक GDP growth दर्ज की थी। वित्त मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक दूसरी तिमाही में growth 7.3% रह सकती है, यानी गति कुछ कम होगी लेकिन expansion मजबूत स्तर पर बनी रहेगी। Nowcasting model से आया अनुमान वित्त मंत्रालय ने दूसरी तिमाही की growth का आकलन अपने nowcasting model के आधार पर किया है। इस मॉडल को इस साल के Economic Survey में पेश किया गया था और इसका इस्तेमाल उपलब्ध high-frequency indicators के आधार पर GDP growth का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है। सितंबर में manufacturing activity रही मजबूत सितंबर 2026 में भारत की factory activity सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंची। एक निजी सर्वे के अनुसार मजबूत घरेलू और विदेशी मांग की वजह से manufacturing sector में नई तेजी देखने को मिली और hiring तथा business confidence में भी सुधार हुआ। GST collection ₹2 लाख करोड़ के पार सितंबर में GST collection सालाना आधार पर 14.7% बढ़कर ₹2 लाख करोड़ से ऊपर पहुंच गया। Auto dispatch, UPI transactions और private equity तथा venture capital investments में भी मजबूती दर्ज की गई, जिससे घरेलू आर्थिक गतिविधियों में momentum का संकेत मिला। वैश्विक जोखिम अभी भी बने हुए वित्त मंत्रालय ने मजबूत growth outlook के साथ कई जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया है। भू-राजनीतिक तनाव, महंगा crude oil, वैश्विक financial conditions में tightening और imported inflation भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं। रुपये और महंगाई पर भी नजर ऊंची crude oil prices और मजबूत डॉलर के कारण रुपये तथा inflation पर दबाव बढ़ सकता है। मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया कि बाहरी झटकों के बावजूद services exports, remittances और विदेशी मुद्रा भंडार भारतीय अर्थव्यवस्था को कुछ सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं। दूसरी तिमाही के आधिकारिक GDP आंकड़े बाद में 7.3% का आंकड़ा फिलहाल वित्त मंत्रालय का अनुमान है, आधिकारिक GDP growth figure नहीं। सांख्यिकी मंत्रालय के release calendar के मुताबिक जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के आधिकारिक GDP estimates 30 नवंबर 2026 को जारी किए जाने हैं। मजबूत घरेलू मांग से मिल रहा सहारा सरकार का मानना है कि consumption, manufacturing और services में activity के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की underlying momentum मजबूत बनी हुई है। हालांकि आने वाले महीनों में crude prices, inflation, global interest rates और external demand growth की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। source – Ministry of Finance / Ministry of Statistics & Programme Implementation / Reuters / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत की 7.8% GDP Growth पर छिड़ी बड़ी बहस, दो पूर्व Chief Economic Advisers आमने-सामने

नई दिल्ली, 5 सितंबर 2026: भारत की पहली तिमाही की 7.8% वास्तविक GDP growth को लेकर आर्थिक बहस तेज हो गई है। पूर्व Chief Economic Adviser Arvind Subramanian ने सरकारी आंकड़ों की transparency और credibility पर सवाल उठाए हैं, जबकि एक अन्य पूर्व CEA K.V. Subramanian ने आंकड़ों का बचाव करते हुए वैकल्पिक 2.6% growth estimate को गलत बताया है। Q1 में 7.8% बढ़ी भारत की अर्थव्यवस्था Ministry of Statistics and Programme Implementation के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक FY 2026-27 की April-June quarter में real GDP बढ़कर ₹81.36 लाख करोड़ रही, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹75.46 लाख करोड़ से 7.8% अधिक है। Nominal GDP growth 10.3% दर्ज की गई। Arvind Subramanian ने उठाए transparency पर सवाल Arvind Subramanian ने माना कि भारतीय अर्थव्यवस्था में activity बेहतर हुई है, लेकिन उन्होंने कहा कि 7.8% growth की magnitude को लेकर सरकार को ज्यादा स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने GDP methodology और पुराने आंकड़ों में हुए revisions पर अधिक transparency की मांग की। ‘2.6% वाला calculation technically flawed’ हालांकि Arvind Subramanian ने पूर्व Finance Secretary Subhash Chandra Garg के उस calculation से भी असहमति जताई जिसमें growth को करीब 2.6% बताया गया था। उनके अनुसार इसमें old और new GDP series की तुलना की गई, जो technically सही comparison नहीं है। K.V. Subramanian ने 7.8% आंकड़े का किया बचाव पूर्व CEA K.V. Subramanian ने 2.6% growth वाले दावे को “absolutely bogus” बताते हुए कहा कि अलग-अलग GDP series के आंकड़ों की तुलना करना गलत है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध economic indicators broadly मजबूत growth को support करते हैं। Investment, credit और construction के आंकड़ों का दिया हवाला K.V. Subramanian ने capital expenditure, bank credit, capital goods production और construction activity में मजबूत growth का हवाला देते हुए कहा कि ये indicators 2.6% जैसी कमजोर GDP growth से मेल नहीं खाते। सरकार के official factsheet के मुताबिक Q1 में investment 11.9%, household consumption 7.1% और exports 12% बढ़े। GDP series बदलने से क्यों बढ़ी बहस? भारत ने GDP calculation के लिए नया 2022-23 base year अपनाया है। नई methodology के तहत पुराने GDP estimates में revisions हुए हैं। आलोचकों का कहना है कि इन revisions की वजह और methodology ज्यादा साफ तरीके से समझाई जानी चाहिए, जबकि सरकार का कहना है कि revised system economy की मौजूदा structure को बेहतर तरीके से capture करता है। एक बात पर दोनों economists सहमत तेज मतभेद के बावजूद Arvind Subramanian और K.V. Subramanian दोनों ने GDP calculation की methodology, underlying data और revisions को लेकर अधिक स्पष्टता और transparency की जरूरत पर सहमति जताई। source – India Today / Ministry of Statistics & Programme Implementationजय राष्ट्र न्यूज़

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