नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: भारत सरकार ने बिजली संयंत्रों में घरेलू कोयले के साथ आयातित कोयले की अनिवार्य ब्लेंडिंग का प्रस्ताव फिलहाल टाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमजोरी के कारण आयात महंगा हो रहा है। ऐसे में सरकार ने घरेलू आपूर्ति मजबूत करने पर जोर दिया है। इसके तहत कोल इंडिया को उत्पादन बढ़ाने और रेलवे को बिजली संयंत्रों तक कोयले की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
क्यों टाला गया कोयला आयात का प्रस्ताव?
हाल के हफ्तों में सरकार ने बिजली संयंत्रों को घरेलू कोयले के साथ आयातित कोयला मिलाने का निर्देश देने पर विचार किया था। इसका उद्देश्य उन संयंत्रों में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना था, जहां कोयले का भंडार घट रहा था।
हालांकि, समुद्री मार्ग से आने वाले कोयले की कीमतें तीन साल के उच्च स्तर के करीब पहुंचने और रुपये में कमजोरी के कारण आयात की लागत बढ़ गई है। ऐसे में अनिवार्य आयात से बिजली उत्पादन की लागत पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।
घरेलू आपूर्ति बढ़ाने पर रहेगा जोर
सरकार ने अब घरेलू कोयले की उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। इसके लिए सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड से उत्पादन बढ़ाने को कहा गया है। साथ ही भारतीय रेलवे को खदानों से बिजली संयंत्रों तक कोयले की ढुलाई समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार की रणनीति का उद्देश्य घरेलू उत्पादन और परिवहन व्यवस्था में सुधार करके बिजली संयंत्रों के लिए पर्याप्त ईंधन उपलब्ध कराना है।
कई बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार कम
ऊर्जा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 17 अक्टूबर तक देश के लगभग आधे बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार गंभीर स्तर पर था। इन संयंत्रों के पास उनकी जरूरत के एक चौथाई से भी कम ईंधन उपलब्ध होने की जानकारी दी गई।
कमजोर मानसून, सामान्य से अधिक तापमान और जलविद्युत उत्पादन में कमी के कारण बिजली की मांग पूरी करने के लिए कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ा है।
बिजली की मांग बढ़ने की वजह
इस वर्ष मानसून की कमजोर स्थिति और ऊंचे तापमान के कारण एयर कंडीशनर, कूलर और सिंचाई के लिए बिजली की मांग बढ़ी। इससे बिजली संयंत्रों में कोयले की खपत पर भी असर पड़ा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में बिजली की कमी उस महीने के लिए लगभग एक दशक के सबसे खराब स्तर पर पहुंच गई थी। इससे ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की चुनौती और बढ़ गई।
ठंड बढ़ने से मांग में कमी की उम्मीद
अक्टूबर में बिजली की मांग ऊंची बनी हुई है, लेकिन कोयले के भंडार में रोजाना होने वाली गिरावट की रफ्तार पिछले महीने के मुकाबले धीमी होने की जानकारी सामने आई है।
सरकार को उम्मीद है कि मौसम ठंडा होने के साथ बिजली की मांग में कुछ कमी आएगी। इससे घरेलू कोयले के भंडार को दोबारा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति
भारत पिछले कुछ वर्षों से बिजली संयंत्रों में कोयला ब्लेंडिंग के लिए आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में काम कर रहा है। ET EnergyWorld की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 तक सरकार ने बताया था कि पिछले तीन वर्षों में ब्लेंडिंग के लिए कोयले का आयात 71.5 प्रतिशत घटा है।
फिलहाल, अनिवार्य आयात का प्रस्ताव टालने के बाद सरकार का जोर घरेलू उत्पादन बढ़ाने, रेलवे के जरिए तेज ढुलाई और बिजली संयंत्रों में पर्याप्त कोयला भंडार बनाए रखने पर है।
स्रोत: Reuters, Bloomberg और ET EnergyWorld
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