Muslim majority and secularism: यदि मुस्लिम बहुसंख्यक होते, तो भारत कभी नहीं होता सेक्युलर- डॉ. के.के. मुहम्मद
भारत सिर्फ इसलिए धर्मनिरपेक्ष है क्योंकि यह हिंदू बहुल देश है, यदि मुस्लिम बहुसंख्यक होते, तो भारत कभी सेक्युलर नहीं (Muslim majority and secularism) होता। ये बोल हैं, इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च के सदस्य और पद्मश्री डॉ. के.के. मुहम्मद के। बता दें कि 70 वर्षीय आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. के.के. मुहम्मद ने राम जन्मभूमि मंदिर की जांच के बाद अहम निभाई थी। इन दिनों सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में वह कहते दिख रहे हैं कि “भारत धर्मनिरपेक्ष इसलिए है, क्योंकि यह हिंदू बहुल देश है।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “अगर राम और कृष्ण आपके इतिहास पुरुष, आपके राष्ट्रीय नायक नहीं हैं, तो आप एक आदर्श मुसलमान नहीं हैं।” दरअसल, लेखक आनंद रंगनाथन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डॉ. के.के. मुहम्मद का एक वीडियो शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा कि “भारत सिर्फ़ इसलिए धर्मनिरपेक्ष है क्योंकि यह हिंदू बहुल देश है। यही हिंदू धर्म की महानता है। अगर राम और कृष्ण आपके इतिहास पुरुष, आपके राष्ट्रीय नायक नहीं हैं, तो आप एक आदर्श मुसलमान नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा कि “डॉ. के.के. मुहम्मद, जिन्हें यह पता लगाने के लिए निलंबित कर दिया गया था कि बाबरी के नीचे कभी एक मंदिर था। साल 1976-77 में पुरातत्वविद प्रो बी बी लाल के नेतृत्व में अयोध्या राम जन्मभूमि स्थान की खाेदाई हुई थी (Muslim majority and secularism) India is secular only because it is a Hindu majority country. This is the greatness of Hinduism. If Rama and Krishna are not your Itihasa purusha, your national heroes, you are not a perfect Muslim. – Dr KK Muhammed, suspended for discovering that a temple once stood under Babri. pic.twitter.com/Bh0RKC3XbC — Anand Ranganathan (@ARanganathan72) March 30, 2025 केरल के कोझिकोड में जन्में करिंगमन्नू कुझियिल मुहम्मद (के.के. मुहम्मद) ने अपनी जीवन यात्रा को मलयाली में एक किताब की शक्ल दी है। जिसका हिंदी अनुवाद है, मैं भारतीय हूं। बता दें, इस किताब में उन्होंने राम जन्मभूमि मंदिर की खोज यात्रा को बहुत विस्तार से लिखा है। वो लिखते हैं कि “जब अयोध्या में राम जन्मभूमि के मालिकाना हक को लेकर 1990 में पहली बार पूरे देश में बहस जोर पकड़ रही थी, तब मुझे 1976-77 वाले कॉलेज के दिन याद आ रहे थे। तब पढ़ाई की खातिर मुझे अयोध्या भेजा गया (Muslim majority and secularism) था। साल 1976-77 में पुरातत्वविद प्रो बी बी लाल के नेतृत्व में अयोध्या राम जन्मभूमि स्थान की खाेदाई हुई थी, उस खोदाई में मैं भी शामिल था। उस खोदाई में वहां राम मंदिर के प्रमाण मिले थे। मगर जब यह बात मेंने वर्ष 1990 में सार्वजनिक रूप से कही, तो मेरी नौकरी जाते जाते बची थी। दरअसल, साल 1990 में एक अखबार के लेख के माध्यम से उन्होंने स्वीकार किया था कि “उन्होंने मस्जिद के नीचे राम मंदिर के अवशेष देखे थे। बता दें कि केंद्र सरकार की ओर से उन्हें वर्ष 2019 में पद्म श्री से सम्मानित किया जा चुका है। इसे भी पढ़ें:- औरंगजेब विवाद में कूदे राज ठाकरे, बोले- मराठों को नष्ट करने की कोशिश करने वाला यहीं हुआ दफन मुसलमानों को खुद ही मथुरा और ज्ञानवापी मस्जिद के स्थान को हिंदुओं को उपहार की तरह सौंप देना (Muslim majority and secularism) चाहिए यही नहीं, पद्मश्री डॉ. के.के. मुहम्मद ने इससे पहले भारतीय मुसलमानों से कहा था कि “मथुरा और ज्ञानवापी मस्जिद के स्थान को खुद ही हिंदुओं को उपहार की तरह सौंप देना (Muslim majority and secularism) चाहिए। उनकी जो पवित्र इमारत है, उसे कहीं अन्य उपयुक्त स्थल पर स्थानांतरित करने के लिए मुसलमानों को स्वयं आगे आना चाहिए। इससे सरकार एवं सर्व समाज से भी सहयोग मिल सकेगा। उनके इस बयान की भी खूब चर्चा हुई थी। खैर, वह लगातार अपनी बातें खुलकर रखने के लिए जाने जाते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi News Muslim majority and secularism #IndiaSecularism #DrKKMuhammad #SecularIndia #MuslimMajority #IndianHistory #ReligiousDebate

