मेष संक्रांति 2025: समाप्त होगा खरमास, शुभ कार्यों की फिर होगी शुरुआत
हिंदू पंचांग के अनुसार, सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो उस समय को संक्रांति कहा जाता है। वर्ष में कुल 12 संक्रांतियां होती हैं, जिनमें से मेष संक्रांति का विशेष महत्व है। यह संक्रांति तब होती है जब सूर्य मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करता है। इस वर्ष, मेष संक्रांति 14 अप्रैल 2025, सोमवार को मनाई जाएगी, और इसी दिन खरमास का समापन होगा, जिससे विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत फिर से हो सकेगी। खरमास का समापन और शुभ कार्यों की बहाली खरमास, जिसे मलमास भी कहा जाता है, वह अवधि है जब सूर्य देव गुरु की राशियों—धनु या मीन—में गोचर करते हैं। इस दौरान, विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। वर्ष 2025 में, खरमास 14 मार्च से प्रारंभ होकर 13 अप्रैल तक रहेगा। 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा, और शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत हो सकेगी । मेष संक्रांति का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व मेष संक्रांति को हिंदू नववर्ष की शुरुआत माना जाता है। इस दिन को विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे पंजाब में बैसाखी, ओडिशा में पना संक्रांति, केरल में विषु, और तमिलनाडु में पुथांडु। इस दिन सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है, और गंगा स्नान, दान-पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है । सूर्य गोचर 2025आत्मा के प्रतीक माने जाने वाले सूर्य देव 13 अप्रैल तक मीन राशि में स्थित रहेंगे। इसके बाद, 14 अप्रैल को तड़के 3 बजकर 21 मिनट पर वे मीन राशि को छोड़कर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य देव का यह गोचर 14 मई तक मेष राशि में रहेगा। जैसे ही सूर्य मेष राशि में प्रवेश करेंगे, खरमास की समाप्ति हो जाएगी और इसके साथ ही सभी शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो सकेगी। मेष संक्रांति 2025: शुभ मुहूर्त और योग मेष संक्रांति के दिन पुण्यकाल प्रातः 05:57 से लेकर दोपहर 12:22 तक रहेगा। इसी दिन महापुण्य काल का समय सुबह 05:57 से 08:05 तक निर्धारित है। इस विशेष अवधि में सूर्य देव की आराधना और उपासना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे भी पढ़ें:- माता के इस चमत्कारी मंदिर में 100 साल से लगातार जल रही है अखंड ज्योति: डाट काली मंदिर का अद्भुत चमत्कार मेष संक्रांति का महत्व हिंदू धर्म में मेष संक्रांति को अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण तिथि माना गया है। इस दिन उपवास करना, सूर्य देव की विधिपूर्वक पूजा करना और दान-पुण्य करना अत्यधिक शुभ और फलदायक माना जाता है। भारत के कई क्षेत्रीय पंचांग जैसे तमिल, बंगाली, ओड़िया, पंजाबी और मलयालम कैलेंडर में यह दिन नववर्ष की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि मेष संक्रांति के साथ सूर्य की उत्तरायण यात्रा पूर्ण होती है। मीन संक्रांति से शुरू होने वाला खरमास (मलमास) मेष संक्रांति पर समाप्त होता है। इसी कारण, इस दिन के बाद सभी शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जा सकती है। खरमास के दौरान निषेध और समाप्ति के बाद शुभ कार्य खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे शुभ कार्य वर्जित होते हैं। यह अवधि सूर्य के मीन राशि में गोचर करने से प्रारंभ होती है और मेष राशि में प्रवेश करने पर समाप्त होती है। 14 अप्रैल 2025 को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ ही शुभ कार्यों की पुनः शुरुआत हो सकेगी । Latest News in Hindi Today Hindi News मलमास #MeshSankranti2025 #KharmaasEnds #AuspiciousStart #HinduFestivals #Sankranti2025 #HinduNewYear #ReligiousEvents #SankrantiCelebration #EndOfKharmaas #SpiritualAwakening

