Little Boy के दिए जख्म आज भी नहीं भरे: क्या दुनिया फिर उसी मोड़ पर है?
आज दुनिया में एक बार फिर युद्ध की आशंकाओं से घिरी है—ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव (Iran Israel Tension), मिसाइल हमले और परमाणु शक्तियों की सक्रियता तो ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि हम अतीत के उस खौफनाक दिन को याद करें जब विज्ञान ने मानवता को पीछे छोड़ दिया था। 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा पर गिराया गया परमाणु बम लिटिल बॉय (Atomic Bomb Little Boy) न सिर्फ लाखों जिंदगियों खत्म कर दी, बल्कि यह एक ऐसा जख्म भी था जो आज तक भरा नहीं है। 6 अगस्त 1945 को सुबह 8:15 बजे जब जापान का शहर हिरोशिमा (Hiroshima) अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यस्त था। बच्चे स्कूल जा रहे थे, दुकानदार खुल रही थीं और लोग अपने-अपने कामों में लगे थे। लेकिन कुछ ही पलों में ऐसा हुआ कि इंसानियत की रूह काँप उठी। आसमान में उड़ता अमेरिकी बॉम्बर विमान एनोला गे (American Bomber Aircraft Enola Gay) और उसके भीतर था लिटिल बॉय (Little Boy) एक यूरेनियम आधारित एटॉमिक बम (Atomic Bomb)। इस बम ने न सिर्फ़ शहर को तबाह किया, बल्कि आने वाले समय की चेतावनी भी छोड़ गया। लिटिल बॉय: नाम से ठीक विपरीत कारनामा लिटिल बॉय (Little Boy) नाम जितना मासूम था उसका असर उतना ही भयावह। यह मानव इतिहास का पहला परमाणु हमला था, जिसमें करीब 70,000 से अधिक लोग तुरंत मारे गए और बाद में रेडिएशन और बीमारियों से मरने वालों की संख्या लाखों में जा पहुंची। हिरोशिमा जल उठा, इंसान राख में बदल गए और कुछ की परछाइयाँ आज भी उन दीवारों पर दर्ज हैं जो आज भी खड़े हैं, इंसान की बर्बरता की गवाही देते हुए। यह हमला एक चेतावनी थी कि विज्ञान यदि मानवता के विरुद्ध खड़ा हो जाए, तो उसका अंजाम कितना विध्वंसकारी हो सकता है। आज की दुनिया और परमाणु डर आज जब हम ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव (Iran Israel Tension) और मिसाइल हमलों की खबरें सुनते हैं, तो मन में यह सवाल उठता है कि क्या वर्ल्ड वॉर 3 की आहट सुनाई दे रही है? आज की तकनीक, हथियारों की शक्ति और देशों के बीच की असुरक्षा को देखते हुए यह डर अनावश्यक नहीं है। कई देश आज भी परमाणु शक्ति (Atomic Power) से लैस हैं। अमेरिका, रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इज़राइल जैसे देश अपने परमाणु हथियारों को सुरक्षा का कवच बताते हैं, लेकिन जब कूटनीति असफल होती है और युद्धोन्माद हावी हो जाता है, तो यही कवच एक दिन तबाही बन सकता है। View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@manishhmishra) क्या सीखा दुनिया ने 1945 से? इतिहास गवाह है कि हिरोशिमा और नागासाकी की त्रासदी ने दुनिया को यह दिखा दिया था कि परमाणु युद्ध (Nuclear war) में कोई जीतता नहीं, हर कोई हारता है। इसके बावजूद आज भी दुनिया के कई हिस्सों में परमाणु ताकत को शक्ति प्रदर्शन का माध्यम समझा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र और एनपीटी (Non-Proliferation Treaty) जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते बने हैं ताकि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोका जा सके। लेकिन क्या ये समझौते वास्तव में प्रभावशाली हैं? जब शक्तिशाली देश खुद इन नियमों का पालन नहीं करते, तो बाकी दुनिया से उम्मीद करना बेमानी हो जाता है। इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत से निकले हल आज की दुनिया को युद्ध नहीं, बल्कि संवाद की जरूरत है। वैश्विक नेता यदि अपने राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर मानवता की भलाई के लिए सोचें, तो शायद लिटिल बॉय जैसी घटनाएं फिर कभी न दोहराई जाएं। लेकिन इसके लिए इच्छाशक्ति और समझ दोनों की जरूरत है। लिटिल बॉय (Little Boy) आज सिर्फ एक बम का नाम नहीं, बल्कि एक प्रतीक है कि मानव विनाश की चरम सीमा का प्रतीक। यह घटना हमें बार-बार याद दिलाती है कि यदि हमने इतिहास से नहीं सीखा, तो भविष्य हमारे लिए और भी भयानक हो सकता है। जब हम हिरोशिमा की राख में बसी परछाइयों को देखते हैं, तो ये सवाल फिर सिर उठाता है कि क्या हम एक बार फिर उसी राह पर बढ़ रहे हैं? लिटिल बॉय (Little Boy) ने जो जख्म दिए, वे आज भी दुनिया के ज़हन में ताज़ा हैं। हमें यह समझने की जरूरत है कि शांति कोई विकल्प नहीं, बल्कि एकमात्र रास्ता है। युद्ध चाहे किसी भी कारण से हो उसका नतीजा हमेशा विनाश ही होता है। Latest News in Hindi Today Hindi Hiroshima #littleboy #hiroshima #nuclearwar #worldwariii #globalcrisis #historyrepeats

