Ram Darbar family muhurat

Ram Darbar family muhurat: बड़ा ही भव्य होगा अयोध्या का दरबार, परिवार के साथ इस मुहूर्त में विराजेंगे राजा राम

गंगा दशहरा के अवसर पर प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है।संयोग देखिये आज ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्म दिन भी है। और आज ही आज 11 बजकर 25 मिनट से 11बजकर 40मिनट तक की जाएगी। जानकारी के लिए बता दें कि यह प्राण प्रतिष्ठा आज अभिजीत मुहूर्त में की जाएगी। अभिजीत मुहूर्त दिन का सबसे शुभ और पवित्र समय माना जाता (Ram Darbar family muhurat) है। आज ही रामदरबार और गर्भगृह के चारों कोनों में बने परकोटे के अन्य मंदिरों में भी सात विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। अयोध्या और काशी से आए 101 वैदिक आचार्य इस प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन को पूरा कराएंगे। बड़ी बात यह कि आज सिद्ध योग भी बन रहा है। पूजन, भोग, आरती के बाद अनुष्ठान की समाप्ति होगी। प्राण प्रतिष्ठा के बाद सीता राम समेत चारों भाइयों और बजरंगबली आभूषण पहनाए जाएंगे।  अयोध्या जिला प्रशासन और राम मंदिर ट्रस्ट ने कर ली हैं सभी (Ram Darbar family muhurat) तैयारियां बता दें कि प्राण प्रतिष्ठा के इस आयोजन में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत तकरीबन पांच सौ से अधिक मेहमान शामिल (Ram Darbar family muhurat) होंगे। सीएम योगी मख्य अतिथि होंगे। इसके आलावा संघ, विहिप और बीजेपी से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी प्राण प्रतिष्ठा में आने का न्योता दिया गया है। इस बीच सीएम पहले हनुमानगढ़ी जाएंगे और 10 बजकर 40 मिनट से 10 बजकर 55 मिनट तक दर्शन-पूजन करेंगे। इसके बाद 11 बजे से 11.10 तक वो श्रीरामजन्मभूमि का दर्शन पूजन करेंगे। फिर 11.10 से 1 बजे तक सीएम श्रीरामजन्मभूमि परिसर में राम दरबार और नवनिर्मित 6 मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होंगे। जानकारी के लिए बता दें कि अयोध्या जिला प्रशासन और राम मंदिर ट्रस्ट ने सभी तैयारियां कर ली हैं। विशेषकर कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद है।   सीएम योगी के नेतृत्व में अयोध्या आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में (Ram Darbar family muhurat) उभरी है इस कार्यक्रम को लेकर संत समुदाय का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर के निर्माण और अयोध्या के विकास के माध्यम से रामनगरी का खोया हुआ गौरव लौटाया है। इतना ही नहीं, विगत आठ वर्षों में अयोध्या में 32 हजार करोड़ से अधिक विकास परियोजनाओं ने शहर को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दी है। सड़क, रेल, हवाई अड्डा, सौंदर्यीकरण और पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं ने अयोध्या को विश्व नक्शे पर चमकदार बनाया है। यही नहीं, रामकथा पार्क, सरयू तट का सौंदर्यीकरण और आधुनिक सुविधाओं से युक्त मंदिर परिसर इसकी (Ram Darbar family muhurat) बानगी हैं। इस दौरान संत-महंतों ने योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या आध्यात्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में उभरी है। सरयू त्रयोदशी जन्मोत्सव के अवसर पर नदी तट पर विशेष आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।  इसे भी पढ़ें:- इस तरह विदेशी श्रद्धालु अब अयोध्या के राम मंदिर में पा सकेंगे वीआईपी पास प्रशासन ने इस भव्य आयोजन के लिए सुरक्षा और व्यवस्था के (Ram Darbar family muhurat) किए हैं पुख्ता इंतजाम  कार्यक्रम की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इस भव्य आयोजन के लिए सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम (Ram Darbar family muhurat) किए हैं। देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने अयोध्या पहुंच रहे हैं। यह दिन न केवल आध्यात्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बनेगा। गौरतलब हो कि योगी आदित्यनाथ का अयोध्या से गहरा आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक संबंध है। उनका संबंध न सिर्फ बतौर मुख्यमंत्री बल्कि एक संत, राम भक्त और राम मंदिर आंदोलन के सक्रिय सहयोगी के रूप में है। गोरखनाथ मठ और योगी आदित्यनाथ की तीन पीढ़ियां राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी रही हैं।  Latest News in Hindi Today Ram Darbar family muhurat AyodhyaRamMandir #RamDarbar #LordRam #AyodhyaDiaries #RamMandir2025 #DivineIndia #HinduCulture

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Lord Rama

राम की अंतिम लीला: क्यों लिया भगवान श्रीराम ने सरयू में जल समाधि?

भगवान श्रीराम (Lord Rama) का जीवन भारतीय संस्कृति और धर्मग्रंथों में आदर्श पुरुष के रूप में वर्णित है। रामायण की गाथा केवल उनके जीवन के वीरता और धर्मपालन के किस्सों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन के अंतिम चरणों में जल समाधि लेने की घटना भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस पौराणिक कथा के पीछे गहरे धार्मिक और आध्यात्मिक रहस्य छिपे हैं। आइए जानते हैं भगवान राम द्वारा जल समाधि लेने के पीछे की कथा और उसका महत्व। भगवान राम (Lord Rama) का राजतिलक और कालदूत का संदेश लंका विजय और अयोध्या वापसी के बाद भगवान राम का राजतिलक हुआ और अयोध्या में ‘रामराज्य’ की स्थापना हुई। यह कालखंड धर्म, न्याय और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लेकिन समय का चक्र निरंतर चलता रहता है। जब भगवान राम का धरती पर मानव रूप में कार्यकाल पूरा होने का समय आया, तो स्वयं ब्रह्मा के आदेश पर कालदूत उनके पास आया। कालदूत ने भगवान राम को सूचित किया कि अब उनका पृथ्वी पर कार्य समाप्त हो गया है और उन्हें अपने वास्तविक स्वरूप – विष्णु लोक में लौटना होगा। राम ने काल से एकांत में मिलने की बात कही थी। लेकिन उसी समय उनका प्रिय भाई लक्ष्मण कुछ विशेष परिस्थिति में उस गोपनीय सभा में प्रवेश कर गया। भगवान राम ने पहले ही शपथ ली थी कि यदि कोई इस वार्ता के दौरान आएगा, तो उसे त्यागना पड़ेगा। शपथ के पालन हेतु भगवान राम को अत्यंत दुख के साथ लक्ष्मण का त्याग करना पड़ा। लक्ष्मण का त्याग और भगवान राम का निर्णय एक विशेष घटना के दौरान लक्ष्मण जी (Lord Rama) उस कक्ष में प्रवेश कर गए जहाँ भगवान राम और कालदेव (यमराज) के बीच गुप्त वार्ता चल रही थी। इस अनजाने में हुए व्यवधान से उनकी बातचीत में विघ्न उत्पन्न हो गया। भगवान राम ने पहले ही प्रतिज्ञा की थी कि वार्ता में किसी के हस्तक्षेप पर उसे त्यागना होगा। अपनी इसी प्रतिज्ञा का पालन करते हुए, भगवान राम ने भारी हृदय से लक्ष्मण का त्याग कर दिया।लक्ष्मण जी (Laxman Ji) ने अपने बड़े भाई की मर्यादा, प्रतिज्ञा और अयोध्या की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए इस निर्णय को सहर्ष स्वीकार किया। इसके बाद उन्होंने भगवान राम से विदा ली और सरयू नदी के तट पर जाकर जल समाधि लेकर अपने सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया। इसे भी पढ़ें:-  शिवधाम की ओर आध्यात्मिक सफर फिर से शुरू, जानिए तारीखें और पंजीकरण प्रक्रिया भगवान राम ने भी ली जल समाधि लक्ष्मण जी (Laxman Ji) के जल समाधि लेने के बाद भगवान राम गहरे शोक में डूब गए। साथ ही उन्हें यह भी भली-भांति ज्ञात हो गया था कि पृथ्वी पर उनके अवतार का उद्देश्य अब पूर्ण हो चुका है। इस बीच ब्रह्मा जी और अन्य देवताओं ने भी उन्हें अपने दिव्य धाम, बैकुंठ, लौटने का आग्रह किया।अंततः भगवान राम (Lord Rama) ने सरयू नदी के तट पर पहुंचकर उसमें प्रवेश किया और जल समाधि के माध्यम से अपनी पृथ्वी पर लीला का समापन किया। इस प्रकार वे अपने मूल धाम, बैकुंठ, में लौट गए। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Lord Rama #LordRam #JalSamadhi #Ramayana #Ayodhya #HinduMythology #RamFinalLeela #ShriRam #SaryuRiver #RamSamadhi #RamStory

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Lord Ram’s Untold Stories & Life Lessons

राम नवमी 2020: भगवान राम के जीवन की अनसुनी कहानियां और प्रेरणादायक संदेश

राम नवमी (Ram Navami) हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान राम (Lord Ram) के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में जाना जाता है, और उनकी पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। राम नवमी के दिन भगवान राम की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस लेख में हम आपको भगवान राम के बारे में कुछ सुनी-अनसुनी कथाएं बता रहे हैं, जो उनके जीवन और उनके संदेशों को और भी गहराई से समझने में मदद करेंगी। भगवान राम का जन्म भगवान राम का जन्म अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के यहां हुआ था। उनका जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था, जिसे राम नवमी के रूप में मनाया जाता है। भगवान राम के जन्म के समय अयोध्या में खुशियों का माहौल था, और सभी लोग उनके जन्म का जश्न मना रहे थे। भगवान राम और हनुमान जी की मित्रता भगवान राम और हनुमान जी की मित्रता एक अनोखी मित्रता थी। हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त थे, और उन्होंने भगवान राम की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। हनुमान जी ने भगवान राम की खोज में लंका तक का सफर तय किया और माता सीता को रावण के चंगुल से मुक्त कराने में मदद की। भगवान राम और लक्ष्मण की भाईचारे की मिसाल भगवान राम और लक्ष्मण की भाईचारे की मिसाल आज भी दी जाती है। लक्ष्मण भगवान राम के छोटे भाई थे, और उन्होंने भगवान राम की सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। लक्ष्मण ने भगवान राम के साथ वनवास के दौरान कई कठिनाइयों का सामना किया और उनकी रक्षा की। भगवान राम और सीता माता का प्रेम भगवान राम (Lord Ram) और सीता माता का प्रेम एक आदर्श प्रेम की मिसाल है। सीता माता ने भगवान राम के साथ वनवास के दौरान कई कठिनाइयों का सामना किया और उनके साथ हर परिस्थिति में खड़ी रहीं। सीता माता ने भगवान राम के प्रति अपनी निष्ठा और प्रेम को कभी नहीं छोड़ा। भगवान राम और रावण का युद्ध भगवान राम और रावण का युद्ध एक महाकाव्य युद्ध था, जिसमें भगवान राम ने रावण का वध किया और धर्म की स्थापना की। रावण एक बहुत ही शक्तिशाली राक्षस था, जिसने माता सीता का अपहरण कर लिया था। भगवान राम ने रावण का वध करके माता सीता को मुक्त कराया और धर्म की स्थापना की। इसे भी पढ़ें:-  भगवान राम के जन्मोत्सव पर होगा भव्य आयोजन भगवान राम का राज्याभिषेक भगवान राम (Lord Ram) का राज्याभिषेक एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसमें भगवान राम को अयोध्या का राजा बनाया गया। भगवान राम ने अपने राज्याभिषेक के बाद अयोध्या में धर्म और न्याय की स्थापना की और अपने प्रजा का पालन-पोषण किया। भगवान राम के संदेश भगवान राम के संदेश आज भी हमारे जीवन के लिए प्रेरणादायक हैं। भगवान राम ने धर्म, न्याय, और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने हमें यह सिखाया कि हमें हर परिस्थिति में धर्म और न्याय का साथ देना चाहिए। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Ram Navami #RamNavami2024 #LordRam #Ramayana #RamNavami #HinduFestival #BhagwanRam #RamKatha #RamBhakti #RamMandir #Spirituality

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