UP Native Slams Raj Thackeray Over Maharashtra Sacrifice

‘यूपी का रहने वाला हूं, लेकिन महाराष्ट्र के लिए अपना खून बहाया…’, राज ठाकरे और मनसे पर पूर्व मार्कोस कमांडो का तगड़ा अटैक 

महाराष्ट्र में इन हिंदी और मराठी भाषा को लेकर जबरदस्त विवाद चल रहा है। राज ठाकरे (Raj Thackeray) की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के कार्यकर्ता हिन्दी बोलने वाले उत्तर भारतियों के साथ मारपीट कर रहे हैं, जिसकी वजह से राज्य में तनाव बना हुआ है। इस विवाद पर 26/11 मुंबई हमले (26/11 Mumbai Attacks) में कई लोगों को बचाने वाले पूर्व मरीन कमांडो फोर्स (MARCOS) प्रवीण कुमार तेवतिया (Praveen Teotia) ने भी अपना पक्ष रखते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मनसे प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) पर भाषा के नाम पर गंदी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कई सवाल पूछ हैं।  प्रवीण कुमार तेवतिया (Praveen Teotia) ने सोशल मीडिया पर राज ठाकरे (Raj Thackeray) से पूछा है कि मुंबई पर जब पाकिस्तानी आतंकियों ने हमला किया तब आपके ये योद्धा कहां थे, जो अब मराठी भाषा न बोलने वाले मासूम लोगों को पीटकर खुद को महाराष्ट्र का योद्धा बता रहे हैं। कमांडो प्रवीण तेवतिया ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक फोटो भी पोस्ट की है, जिसमें वो कमांडो की वर्दी पहने नजर आ रहे हैं, उनके बुलेटप्रूफ जैकेट पर UP लिखा हुआ है और गले में एके 47 गन लटक रही है।  I saved Mumbai on 26/11.I bleed for Maharashtra.I'm from UP. I saved the Taj Hotel.Where were Raj Thakre's so Called Warriors?Don't divide the Nation. Smiles don't require any Language. https://t.co/z8MBcdcTAW pic.twitter.com/uZAhM4e6Zq — Adv Praveen Kumar Teotia (@MarcosPraveen) July 5, 2025 मुंबई पर जब अटैक हुआ तब आप और आपके योद्धा कहां थे- तेवतिया प्रवीण तेवतिया (MARCOS) ने अपने पोस्ट में लिखा, “26/11 आतंकी हमले (26/11 Mumbai Attacks) के दौरान मैनें यहां के लोगों को बचाया था। मैं यूपी का रहने वाला हूं, लेकिन महाराष्ट्र के लिए अपना खून बहाने से पीछे नहीं हटा। मैंने और मेरे साथियों ने ताज होटल को बचाया। उस समय राज ठाकरे के ये तथाकथित योद्धा कहां थे? क्या उनको यह हमला नहीं दिख रहा था? राज ठाकरे आप खुद कहीं नहीं दिखे। उद्धव ठाकरे और उनके परिवार के कोई सदस्य भी नहीं दिखा। उस समय ठाकरे परिवार ने कुछ भी नहीं बोला, क्योंकि उस समय मुंबई में लोगों की जान बचाने वाले सेना के ज्यादातर जवान यूपी और बिहार जैसे दूसरे राज्यों के थे। इसलिए तुच्छ राजनीति के नाम पर हमारे देश को मत बांटो। मुस्कुान और खुशी के लिए किसी भाषा की जरूरत नहीं पड़ती।”  तेवतिया ने यह भी कहा कि, मैं भी यूपी से हूं और देश के पांचवें प्रधानमंत्री रहे चौधरी चरण सिंह के गांव से आता हूं। इसलिए, हमें राजनीति सिखाने की कोशिश मत करो। राजनीति और भाषा को अलग रखो। महाराष्ट्र के लोगों की तरह हमें भी मराठी भाषा पर गर्व है, लेकिन इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। अगर आप लोगों को राजनीति करनी है, तो युवाओं को नौकरी देने और विकास कार्यों पर करो। आप लोगों ने महाराष्ट्र के विकास के लिए अब तक क्या किया, यह जनता को बताओ। प्रवीण तेवतिया ने यह पोस्ट मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए किया। सीएम फडणवीस इस वीडियो में भाषा के नाम पर राज्य में गुंडागर्दी और हिंसा फैलाने वालों को चेतावनी देते नजर आ रहे हैं।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ कौन हैं शौर्य चक्र विजेता प्रवीण कुमार तेवतिया? बता दें कि प्रवीण तेवतिया यूपी के रहने वाले एक पूर्व मार्कोस कमांडो हैं। इन्होंने मुंबई आतंकवादी हमले के दौरान ताज होटल में चलाए गए आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान अपनी टीम का नेतृत्व किया था। ऑपरेशन के दौरान ये आतंकियों से सीधे भीड़ गए थे। दाेनों तरफ से हुई गोलीबारी में इन्हें चार गोलियां लगीं थी, लेकिन तब भी ये पीछे नहीं हटे और आतंकियों से लड़ते रहे। इनके और इनकी टीम के त्वरित कार्रवाई और अदम्य साहस के कारण ही ताज होटल में फंसे 150 से अधिक लोगों को बचाया गया था। प्रवीण तेवतिया को उनके इस बहादुरी भरे कार्य के लिए शौर्य चक्र पुरस्कार से नवाजा गया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Praveen Teotia MARCOS #RajThackeray #MNS #MaharashtraPolitics #MARCOSCommando #UPvsMaharashtra

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Eknath Shinde controversy

एकनाथ शिंदे के ‘जय गुजरात’ के नारे पर विपक्ष ने मचाया बवाल, मांगा इस्तीफा, बचाव में उतरे सीएम फडणवीस, शिंदे ने भी दी सफाई

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) द्वारा जय महाराष्ट्र के साथ जय गुजरात का नारा देने से राज्य में एक नया राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने शिंदे के इस नारे को मराठी अस्मिता पर हमला बताते हुए माफी की है। विपक्ष के इस हमले के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) भी एकनाथ शिंदे के बचाव में उतर आए और सफाई देते हुए कहा कि मराठी अस्मिता इतनी कमजोर नहीं है कि वह ‘जय गुजरात’ बोलने मात्रा से कमजोर पड़ जाएगी।  बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने बीते शुक्रवार को पुणे में जयराज स्पोर्ट्स एंड कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन करने पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में सीएम देवेंद्र फडणवीस के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) और अजित पवार भी मौजूद थे। कार्यक्रम में भाषण के दौरान डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मंच से ही ‘जय हिंद, जय महाराष्ट्र, जय गुजरात’ का नारा लगाया। शिंदे के इसी नारे का विपक्षी दलों ने विरोध किया है।  हर्षवर्धन सपकाल ने एकनाथ शिंद से मांगा इस्तीफा  कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हर्षवर्धन सपकाल (Harshvardhan Sapkal) ने एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के इस बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि जय गुजरात’ का नारा सिर्फ चाटुकारिता नहीं है, बल्कि हर गौरवान्वित महाराष्ट्रवासी का अपमान है। मराठी मानुष के साथ इस ‘विश्वासघात’ के लिए शिंदे को इस्तीफा देना चाहिए। सपकाल ने यह भी कहा कि यह बहुत शर्म की बात है कि उपमुख्यमंत्री जैसे पद पर बैठा व्यक्ति ‘जय महाराष्ट्र’ की जगह ‘जय गुजरात’ का नारा लगा रहा है। यह चाटुकारिता और सियासी गुलामी का प्रतीक है।  मराठी अस्मिता इतनी कमजोर नहीं है कि ‘जय गुजरात’ बोलने से कमजोर पड़ जाए  विपक्ष के इस आलोचना के बाद एकनाथ शिंदे के समर्थन में उतरते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने कहा, ” विपक्ष शायद भूल गया कि चिकोड़ी में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण करते हुए शरद पवार ने भी ‘जय महाराष्ट्र, जय कर्नाटक’ का नारा लगाया था, तो क्या उन्हें कर्नाटक ज्यादा पसंद है?” फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने विपक्ष की सोच को संकुचित बताते हुए कहा कि हमारी मराठी अस्मिता इतनी कमजोर नहीं है कि वह ‘जय गुजरात’ बोलने मात्रा से कमजोर पड़ जाएगी। मराठी मानुष की सोच बहुत विशाल है, विपक्ष उसे सीमित नहीं कर सकता है। सबसे पहले हम सभी भारतीय हैं और हमें महाराष्ट्र पर गर्व है। इसका यह मतलब नहीं होना चाहिए कि हम दूसरे राज्यों का अपमान करें। ‘एक भारत’ का विचार ही हमारी एकता और संस्कृति की मजबूती है और इस विभाजित करने की हर कोशिश को नाकाम किया जाएगा। सीएम फडणवीस ने इस दौरान भाषा विवाद पर सख्त लहजे में कहा, “मराठी भाषा पर हर किसी को  गर्व करना चाहिए, लेकिन भाषा के नाम पर हिंसा करना स्वीकार्य नहीं है। मराठी न बोलने पर लोगों से मारपीट कर कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।  इसे भी पढ़ें:-  क्या बिहार चुनाव में ओवैसी को गठंबंधन का हिस्सा न बनाना लालू को पड़ सकता है भारी? गुजराती समुदाय के सम्मान में लगाया नारा- शिंदे एकनाथ शिंदे ने भी अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि, ”उन्होंने यह नारा कार्यक्रम में मौजूद गुजराती समुदाय के सम्मान में लगाया था। जिस भव्य खेल परिसर का उद्घाटना हुआ उसके  निर्माण में गुजराती लोगों का भी योगदार है। हमारे राज्य में मराठी और गुजराती लोग मिलकर एकजुटता के साथ रहते हैं। इसीलिए मैंने भाषण के दौरान ‘जय हिंद’, ‘जय महाराष्ट्र’ और ‘जय गुजरात’ का नारा लगाया। ‘जय हिंद’ जहां हमारे देश की शान है, तो वहीं ‘जय महाराष्ट्र’ हमारे राज्य का गर्व है।  ‘जय गुजरात’ का नारा इसलिए लगाया क्योंकि गुजराती समाज को उनके योगदान के लिए सम्मान देना चाहता था।  Latest News in Hindi Today Hindi news Devendra Fadnavis #EknathShinde #JaiGujarat #PoliticalControversy #MaharashtraPolitics #DevendraFadnavis #OppositionDemand #ShindeClarification

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Raj Thackeray news

राज ठाकरे की धमकी, ‘हिंदी को मराठी से बेहतर दिखाने की कोशिश कर रहे लोग ध्यान रखें चुनाव और गठबंधन होते रहते हैं, लेकिन…’

महाराष्ट्र में तीसरी भाषा पर छिड़ा विवाद (Maharashtra Three Language Policy) अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी को लागू करने का आदेश वापस ले लिया है, लेकिन विपक्ष अभी भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटा है। मनसे (MNS) प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने एक बार फिर राज्य सरकार पर प्रहार करते हुए कहा, ‘मराठी भाषा (Marathi Language) के मुद्दे को राजनीति का नाम न दें। राज्य में राजनीतिक गठबंधन और चुनाव होते आए हैं और होते रहेंगे, लेकिन अगर एक बार मराठी भाषा (Marathi Language) खत्म हो गई तो समझ लीजिए सब कुछ खत्म हो जाएगा। इस मुद्दे को सभी राजनीतिक पार्टियों को एक चुनौती के रूप में देखना चाहिए।”  मनसे (MNS) अध्यक्ष राज ठाकरे (Raj Thackeray) मुंबई में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने इसी दौरान कहा कि, “मराठी भाषा को खत्म करने या इससे समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति का मैं खुलकर विरोध करूंगा। भले ही वह व्यक्ति किसी भी पार्टी का ही क्यों न हो, मैं उसके खिलाफ खड़ा होऊंगा और पूरी ताकत से लड़ंगा।” राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने मराठी भाषा पर अपनी बात रखते हुए यह भी कहा, ”हिंदी भाषा देश में व्यापक रूप से बोली जाती है, लेकिन इसे अन्य राज्यों पर जबरन नहीं थोपा जाना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्रीय भाषा नहीं है। इस भाषा को प्राचीन मराठी भाषा से ऊपर रखने का कोई भी प्रयास कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।  मराठी भाषा का इतिहास 3,000 साल पुराना  राजा ठाकरे ने कहा कि हम किसी भाषा का विरोध नहीं कर रहे हैं, हम सिर्फ मराठी भाषा की रक्षा कर रहे हैं। हिन्दी भाषा का इतिहास 150 से लेकर 200 साल पुराना है, लेकिन इसे उस भाषा से बेहतर दिखाने की कोशिश की जा रही है, जिसका इतिहास 3000 साल पुराना है। कुछ लोग अपने राजनीतिक स्वार्थ को पूरा करने के लिए साजिश रच रहे हैं और हिन्दी भाषा को सर्वश्रेण दिखा रहे हैं। यह अस्वीकार्य है और महराष्ट्र की जनता यह नहीं होने देगी। सरकार अगर फिर से हिन्दी थोपने का प्रयास करेगी तो उसे इससे भी ज्यादा कड़ा जवाब मिलेगा।  हिंदी भाषा का विरोध बढ़ता देख सरकारी आदेश रद्द बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में पहली कक्षा से पांचवी कक्षा तक तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी (Maharashtra Three Language Policy) को शामिल किया था। सरकार के इस फैसले का राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की पार्टी ने जमकर विरोध किया। मनसे कार्यकर्ताओं ने कई जगह पर हिन्दी भाषी लोगों के साथ मारपीट भी की। हिन्दी के खिलाफ विरोध बढ़ता देख देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुती सरकार ने ‘त्रि-भाषा’ नीति पर रोक लगाने के साथ एक समिति का गठन कर दिया, जो हिन्दी भाषा को लागू करना है या नहीं, इस बात का फैसला करेगी। राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने इस समिति को लेकर भी राज्य सरकार को धमकी दी है। उन्होंने कहा, ‘मैं फडणवीस सरकार को साफ शब्दों में कहना चाहता हूं, उनकी समिति की रिपोर्ट पक्ष में आए या विपक्ष में, लेकिन हिन्दी को दोबारा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बात सरकार को हमेशा अपने दिमाग में रखनी चाहिए।”  इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  राज ठाकरे के कार्यकर्ताओं ने मराठी न बोलने पर बुजुर्ग दुकानदार को पीटा  महाराष्ट्र में हिंदी को लेकर जारी विवाद में राज ठाकरे के कार्यकर्ता अब सरेआम गुंडागर्दी करते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें मनसे कार्यकर्ता मराठी न बोलने पर एक बुजुर्ग दुकानदार को पीटते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिस दुकानदार को पीटा गया, वह मुंबई के मीरा रोड पर स्थित जोधपुर स्वीट्स का मालिक है। दुकानदार की सरेआम पिटाई के बाद पूरे इलाके में तनाव और दहशत पैदा हो गया है। पुलिस ने मामले की गंभीर को देखते मनसे कार्यकर्ताओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Raj Thackeray #RajThackeray #MarathiPride #MNS #MaharashtraPolitics #HindiVsMarathi #PoliticalWarning #LatestNews

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A Shiv Sena MP's driver received a ₹150 crore gift deed

Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe: शिवसेना सांसद के ड्राइवर को मिली 150 करोड़ रुपये की गिफ्ट डीड, EOW हुई एक्टिव

उपहार देने में कोई बुराई नहीं है। अक्सर लोग अपने परिचितों को उपहार भेंट स्वरूप देते हैं। लेकिन क्या हो यदि कोई अनजान शख्स किसी को करोड़ों की जमीन गिफ्ट में दे दे? आप कहेंगे आज के इस दौर में कौन दानवीर है जो करोड़ों की जमीन गैर परिचित शख्स को दान कर रहा है? जाहिर सी बात है जब देने और लेनेवाले में किसी भी तरह का कोई संबंध ही न हो, तो ऐसे में शक होना स्वाभाविक है। दरअसल, पूर्ववर्ती हैदराबाद के निजाम से नजदीकी संबंध रखने वाले परिवार के वंशज ने शिवसेना सांसद के ड्राइवर को तकरीबन 150 करोड़ रुपये मूल्‍य की तीन एकड़ जमीन गिफ्ट कर दी है। इसकी शिकायत मिलते ही आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) की टीम जांच में जुट (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) गई है। टीम यह पता लगाने में जुटी है कि गिफ्ट देने और लेने वाले में दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है।  फिर भी ड्राइवर को प्राइम लोकेशन पर तीन एकड़ जमीन उपहार के तौर पर क्‍यों दी गई? शिकायत के बाद संबंधित ड्राइवर और सांसद के विधायक बेटे से पूछताछ की गई है।  सालार जंग परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले मीर मजहर अली खान और उनके 6 अन्‍य संबंधियों ने किए (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) हैं हस्‍ताक्षर  बता दें कि 150 करोड़ रुपये की जमीन गिफ्ट देने का यह मामला हैदराबद के मशहूर सालार जंग फैमिली और शिवसेना सांसद संदीपनराव भुमरे के ड्राइवर जावेद रसूल शेख से जुड़ा है। रसूल शेख सांसद के साथ ही उनके विधायक बेटे विलास भुमरे से पिछले 13 साल से जुड़े हैं। गौरतलब हो कि सालार जंग पूर्ववर्ती हैदराबाद के निजाम के काल में दीवान थे। सालार जंग परिवार की बड़ी प्रतिष्‍ठा है। जानकारी के मुताबिक इस गिफ्ट डीड पर सालार जंग परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले मीर मजहर अली खान और उनके 6 अन्‍य संबंधियों ने हस्‍ताक्षर किए (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) हैं। हालांकि, इन लोगों ने ईओडब्लू की ओर से जारी नोटिस का अभी तक जवाब नहीं दिया है। उनसे अपना बयान दर्ज करवाने को कहा गया है। बता दें कि मुजाह‍िद खान के एक वकील ने इस बाबत शिकायत की थी, जिसके बाद जांच शुरू की गई है। कहने की जरूरत नहीं, हैदराबाद के प्रतिष्ठित सालार जंग परिवार द्वारा महाराष्ट्र में स्थित तकरीबन 150 करोड़ रुपये मूल्य की तीन एकड़ ज़मीन शिवसेना सांसद संदीपनराव भुमरे के ड्राइवर के नाम गिफ्ट किए जाने के मामले ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है। यह मामला तब सुर्खियों में आया जब छत्रपति संभाजीनगर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को एक वकील की शिकायत मिली कि सांसद के ड्राइवर जावेद रसूल शेख के नाम गिफ्ट डीड के जरिए कीमती ज़मीन ट्रांसफर कर दी गई है।  सालार जंग परिवार के सदस्य क्यों उसके नाम इतनी बड़ी संपत्ति गिफ्ट करना (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) चाहेंगे? जांच अधिकारियों की माने तो यह ज़मीन संभाजीनगर के दौलतपुरा इलाके में जलना रोड पर स्थित है। इसे प्राइम लोकेशन माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईओडब्लू के इंस्पेक्टर संभाजी पवार ने इस पूरे मामले पर कहा कि “हम जावेद के इनकम टैक्स रिटर्न और आय के अन्य स्रोतों की जांच करेंगे। उसे यह स्पष्ट करना होगा कि सालार जंग परिवार के सदस्य क्यों उसके नाम इतनी बड़ी संपत्ति गिफ्ट करना (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe) चाहेंगे। इंस्पेक्टर ने बताया कि जावेद जांच में पूरा सहयोग कर रहा है। जावेद का कहना है कि वह सालार जंग परिवार के वंशजों से अच्छे संबंध रखता है। इसलिए उन्होंने उसे यह ज़मीन तोहफे में दी। दस्तावेजों के मुताबिक, गिफ्ट डीड उसी समय बनाई गई जब मजहर अली और अन्य ने एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 12 में से 3 एकड़ ज़मीन पर अपना दावा साबित किया था। फ़िलहाल पुलिस ने गिफ्ट डीड पर हस्ताक्षर करने वाले सालार जंग परिवार के सदस्य मीर मजहर अली खान और उनके छह रिश्तेदारों को बयान दर्ज करने के लिए नोटिस भेजा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? दोनों में न तो कोई संबंध है और न ही ये इस्लाम के एक ही सेक्‍ट से ताल्लुक रखते (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe हैं टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शिकायतकर्ता वकील मुजाहिद खान ने सवाल उठाया कि बिना किसी पारिवारिक या रिश्तेदारी के इतनी कीमती ज़मीन किसी ड्राइवर को क्यों दी जाएगी। उन्होंने कहा कि गिफ्ट डीड सिर्फ रक्त संबंधियों के बीच मान्य होती है। यहां दोनों में न तो कोई संबंध है और ये इस्लाम के अलग-अलग सेक्‍ट से ताल्लुक रखते (Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe हैं। फिलहाल यह पहेली बनी हुई है कि ड्राइवर जावेद का सालार जंग परिवार से क्या वास्तविक संबंध है और यह ज़मीन उसे गिफ्ट क्यों की गई? हालांकि इस मामले में सांसद संदीपनराव भुमरे और उनके बेटे विलास भुमरे ने सफाई देते हुए कहा कि “ड्राइवर हमारे यहां काम करता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम उसके हर फैसले के लिए जिम्मेदार हैं। इस बीच उन्होंने यह भी बताया कि “पुलिस ने उनसे और उनके पिता से भी पूछताछ की है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Shiv Sena Driver Gets ₹150 Cr Gift, EOW Launches Probe #shivsenanews #150crgift #eowprobe #maharashtrapolitics #driverscandal #politicalnews #mumbainews #indianpolitics

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CM Fadnavis and BJP State President

‘राहुल गांधी महाराष्ट्र के बारे में कुछ नहीं जानते, बचकाना हरकतें कर फजीहत कराते हैं’, बोले सीएम फडणवीस और प्रदेश अध्यक्ष 

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) एक बार फिर से चुनाव आयोग (Election Commission) पर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया। जिसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्य के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (Chandrashekhar Bawankule) ने राहुल गांधी को घेरते हुए करारा हमला बोला। बावनकुले ने कहा, ‘कांग्रेस के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने शायद महाराष्ट्र के बारे में कुछ भी पढ़ा नहीं है। जिसकी वजह से वो ऐसी बचकाना हरकतें कर रहे हैं। राज्य में कई ऐसी विधानसभा हैं, जहां पर 8 से लेकर 10% तक वोट बढ़े हैं। ऐसी विधानसभा सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार भी चुने गए हैं और विपक्षी गठबंधन में शामिल कांग्रेस व एनसीपी के भी।’ बावनकुले ने कहा, ‘राहुल गांधी (Rahul Gandhi) दरअसल चुनाव आयोग (Election Commission) पर झूठे आरोप लगाकर आगामी बिहार विधानसभा और महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में अपने नेताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। जिससे वे चुनाव लड़ें। क्योंकि हार से निराश कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता चुनाव लड़ने तक को तैयार नहीं।’ बावनकुले ने यह भी कहा कि ‘मैं राहुल गांधी को महाराष्ट्र के 50 ऐसे विधानसभा क्षेत्र बता सकता हूं, जहां पर वोट संख्या बढ़ने के बाद शरद पवार, शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस के उम्मीदवार जीते हैं। राहुल गांधी इस तरह के बयान देकर सिर्फ और सिर्फ अपनी डैमेज लीडरशिप को फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।’ राहुल ने चुनाव आयोग और सीएम फडणवीस पर लगाया आरोप  बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी चुनाव आयोग (Election Commission) को घेरते नजर आ रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर से सोशल मीडिया पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए है। राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में लिखा, ‘लोकसभा और विधानसभा चुनाव  के बीच नागपुर साउथ वेस्ट सीट पर 8 परसेंट मतदाता बढ़ गए। इस सीट के कुछ बूथों पर तो वोटर्स की संख्या में 20 से 50 परसेंट तक का भारी इजाफा हुआ है। इनमें हजारों वोटर्स ऐसे थे, जिनके एड्रेस तक वेरिफाई नहीं हो पाए। ये सरेआम वोट की चोरी है और चुनाव आयोग खामोश बैठा है।   बता दें कि नागपुर साउथ वेस्ट सीट से देवेंद्र फडणवीस चुनाव लड़ते हैं और वो यहां से चौथी बार चुनाव जीते हैं। राहुल गांधी ने अपने इस पोस्ट में चुनाव आयोग के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) को भी घेरने की कोशिश की।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? फडणवीस ने राहुल के आरोपों पर दिया करारा जवाब राहुल गांधी के इन आरोपों पर सीएम देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने भी पटवार करने में देरी नहीं की। सीएम फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि, राज्य में 25 से ज्यादा ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां पर लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच 8 फीसदी से ज्यादा वोट संख्या बढ़ा है। इनमें से कई सीटों पर विपक्षी पार्टियों के उम्मीदवार जीते हैं। सीएम फडणवीस ने नागपुर नॉर्थ और वेस्ट सीट का उदाहरण देते हुए कहा कि इन सीटों पर 7 फीसदी मतदाता बढ़े और इन दोनों सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीते हैं। फडणवीस ने पुणे की वड़गांव शेरी और मुंब्रा विधानसभा सीट के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि वड़गांव शेरी सीट पर मतदाताओं की संख्या में 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई और यहां पर शरद पवार की पार्टी के उम्मीदवार बापू साहेब पठारे जीते। इसी तरह मुंब्रा सीट पर 9 फीसदी मतदाता बढ़े और यहां पर जितेंद्र आव्हाड को जीत मिली। इसलिए मैं राहुल गांधी को एक सलाह देता हूं कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले और कोई भी आरोप लगाने से पहले कम से कम महाराष्ट्र में मौजूद अपनी पार्टी के नेताओं से एक बार जरूर बात कर लें। इससे वो फजीहत होने से बच जाएंगे। फडणवीस ने यह भी कहा कि राहुल गांधी को झूठ बोलने और दूसरों पर आरोप लगाने की आदत है। उनके लए मैं कहना चाहूंगा कि, ‘झूठ बोले कौवा काटे, काले कौवे से डरियो’  Latest News in Hindi Today Hindi news Devendra Fadnavis #RahulGandhi #DevendraFadnavis #MaharashtraPolitics #BJPvsCongress #PoliticalNews

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MNS controversy

विधानमंडल में जो लोग बैठे, वो नपुंसक, मराठी भाषा विवाद में MNS नेता का बेतुका बयान, शिवसेना लाएगी विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव 

महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर जारी विवाद (Marathi Language Controversy) में मनसे मुंबई अध्यक्ष संदीप देशपांडे (Sandeep Deshpande) ने विवादास्पद बयान दे दिया है। महाराष्ट्र विधानभवन में इस समय संसद और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानमंडल की प्राक्कलन समितियों का राष्ट्रीय सम्मेलन चल रहा है। इस कार्यक्रम में मराठी का बैनर न होने को लेकर संदीप देशपांडे (Sandeep Deshpande) ने कहा, जो लोग विधानमंडल में बैठे हुए हैं, वे ‘नपुंसक’ बन चुके हैं और यह महाराष्ट्र के लिए दुर्भाग्य है। देशपांडे के इस बयान पर अब सियासी घमासान शुरू हो गया। मराठी हमारी मातृभाषा है, इसे कोई मिटा नहीं सकता है देशपांडे की इस विवावदास्पद टिप्पणियों पर शिवसेना मंत्री गुलाबराव पाटिल (Gulabrao Patil) ने नाराजगी जाहिर करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पाटिल ने कहा, ”विधानमंडल का अपमान करने के लिए वे जल्द ही देशपांडे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएंगे। किसी भी चीज की आलोचना करना सही है, लेकिन हर आलोचना की एक गरिमा होती है, उस सीमा को पार नहीं करना चाहिए। विधानमंडल सम्मानित जगह है, जिसे अपमानित करने वालों को सजा जरूर मिलना चाहिए।” वहीं विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोर्हे (Neelam Gorhe) ने देशपांडे के बयान का जवाब देते हुए कहा, मराठी हमारी मातृभाषा है, इसे कोई मिटा नहीं सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने मराठी भाषा को शास्त्रीय दर्जा दिलाया है। राजनीति के लिए छोटी-छोटी बातों पर आलोचना करना अनावश्यक है। इस तरह के अपमानित बयान को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।    अपने बयान पर कायम, मराठी भाषा के लिए जेल जाने को भी तैयार- देशपांडे  संदीप देशपांडे (Sandeep Deshpande) ने अपने बयान का विरोध होता देख सफाई भी दी है। देशपांडे ने कहा, मैं अपने पहले के बयान पर अभी भी कायम हूं, क्योंकि मैंने केवल मराठी भाषा विरोधी मानसिकता के बारे में बात की थी, किसी व्यक्ति के बारे में मैनें कुछ नहीं कहा था। मैं किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार हूं। इसके साथ देशपांडे ने यह भी कहा कि, अगर मेरी बात से कोई परेशान या नाराज है, तो उसे खुद पर विचार करना चाहिए। हम मराठी भाषी ही अगर अपनी भाषा को जीवित नहीं रखेंगे, तो कौन रखेगा, क्या बिहार और यूपी के बाहरी लोग? देशपांड ने आगे कहा, लोकसभा ने 22 प्रमुख भाषाओं को मान्यता दे रखी है, इसलिए जिस राज्य में कार्यक्रम हो रहा है, वहां की भाषा होनी चाहिए। मैं मराठी भाषा और मराठी मानुष के लिए जेल तक जाने को तैयार हूं। मराठी भाषा पर बढ़ते विवाद पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने बयान दिया है। पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में शिंदे ने कहा, इस सम्मेलन का आयोजन लोकसभा सचिवालय द्वारा किया गया था। इसलिए कार्यक्रम का बैनर हिंदी और अंग्रेजी में था। अगर इसका आयोजन महाराष्ट्र सरकार द्वारा किया जाता तो कार्यक्रम का बैनर मराठी भाषा में होता।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भारत करेगा अंतर-संसदीय मैत्री समूह- ओम बिरला बता दें कि संसद और राज्य विधायी निकायों की प्राक्कलन समितियों का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सोमवार को शुरू हुआ। इस सम्‍मेलन में प्रशासन की दक्षता और बजट आकलन की प्रभावी निगरानी की भूमिका पर चर्चा किया जाएगा। इस सम्मेलन को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने भी संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान घोषणा कि की भारत की नीति को विदेशों में आगे बढ़ाने के लिए जल्द ही विभिन्न देशों की संसदों के साथ एक मैत्री समूह की स्थापना की जाएगी। इस अंतर-संसदीय मैत्री समूह को स्थापित करने का सुझाव बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न देशों का दौरा कर वापस लौटने के बाद दिया। इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। आमे बिरला ने इस संसदीय मैत्री समूह को स्थापित करने के लिए कई देशों ने अनुरोध किया है। इसके बनने के बाद दूसरे देशों के साथ त्वरित संपर्क करने और मुद्दों को सुलझाने में आसानी होगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Om Birla #mnscontroversy #marathilanguage #shivsenanews #maharashtrapolitics #privilegemotion #assemblydebate #politicalnews

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Maharashtra 2025 elections

महाराष्ट्र की राजनीति में क्या साथ आएंगे उद्धव और राज ठाकरे? दबाव बनाने के आरोप पर संजय राउत ने कह दी बड़ी बात 

शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के बीच संभावित गठबंधन की चर्चा अभी खत्म नहीं हुई है। शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) ने इस गठबंधन को लेकर विराम लगती चर्चा को एक बार फिर से हवा दे दी है। संजय राउत (Sanjay Raut) ने कहा है कि दोनों दलों के बीच अभी बातचीत चल रही है। किसी भी अन्य की तरफ से इस मुद्दे पर कोई भी टिप्पणी करना अनुचित है। आखिरी निर्णय उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे खुद करेंगे।  संजय राउत (Sanjay Raut) का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ठाकरे बंधुओं के बीच फिर से गठबंधन होने की चर्चा पर विराम लगता नजर आ रहा था। उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) के नेता एक तरफ तो राज ठाकरे को गठबंधन के लिए संकेत भेज रहे थे, लेकिन मनसे अध्यक्ष इससे दूरी बनाते नजर आ रहे थे। उन्होंने हाल ही में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) से एक होटल में मुलाकात कर यह संदेश दिया था कि वो भाजपा के साथ रहना पसंद करेंगे। लेकिन संजय राउत ने अब एक बार फिर से बयान देकर इस चर्चा को हवा दे दी है कि दोनों भाईयों के बीच अभी भी गठबंधन पर चर्चा चल रही है।   राजनीति में देर से आए लोग गठबंधन के खिलाफ- राउत संजय राउत ने मुंबई में मीडिया से बातचीत में कहा कि दावा किया, “मनसे के कुछ लोग इस गठबंधन के खिलाफ बयान दे रहे हैं, ऐसे लोग राजनीति में देर से आए हैं और इनकी जानकारी बेहद सीमित है। दूसरे लोग क्या कहते हैं और क्या करते हैं उसका कोई महत्व नहीं है। मैंने दोनों भाईयों (ठाकरे बंधुओं) को कई सालों तक करीब से देखा है और साथ में काम किया है। मैं जानता हूं कि आगे क्या होने जा रहा है और क्या नहीं होगा। शायद मुझसे बेहतर कोई दूसरा नहीं जानता। इस गठबंधन पर अंतिम फैसला लेने वाले केवल उद्धव और राज ही हैं।” संजय राउत यह बयान मनसे नेता संदीप देशपांडे के दबाव बनाने के आरोप के जवाब में दे रहे थे। राउत ने इस दौरान देशपांडे को कम जानकारी रखने वाला नेता तक कह दिया।  इसे भी पढ़ें:- विधानसभा चुनाव से पहले बिहार को पीएम मोदी ने दिया तोहफा गठबंधन के लिए दबाव बना रही है उद्धव की सेना- देशपांडे बता दें कि, मनसे नेता संदीप देशपांडे ने बीते दिनों कहा था कि उद्धव गुट गठबंधन के लिए मनसे पर दबाव बनाने की कोशिश न करे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा था कि, ”आगामी स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर शिवसेना (Uddhav Thackeray) गठबंधन करने पर आतुर नजर आ रही है। आखिर उद्धव की सेना  मनसे से गठबंधन को लेकर इतना उत्साह क्यों दिखा रही है? मैं अच्छे से समझ सकता हूं कि उनके दिन बेहद खराब चल रहे हैं, इसलिए उनके शीर्ष नेता इस समय मनसे के साथ गठबंधन की कोशिश में जुटे हैं।” संदीप देशपांडे ने इस दौरान यह भी कहा कि,  गठबंधन के लिए प्रयास करना गलत बात नहीं है, लेकिन इसके लिए उद्धव की पार्टी मनसे पर दबाव नहीं बना सकती है। हमारे नेता राज ठाकरे समय आने पर गठबंधन के बारे में उचित निर्णय लेंगे। देशपांडे ने यह भी कहा कि उद्धव की शिवसेना गठबंधन करने के लिए उत्साह तो दिखा रही है, लेकिन उनकी क्षमता क्या है। इस पार्टी को बीते विधानसभा चुनाव में मात्र 20 सीटें ही मिली हैं। उनके पास अभी अगर 60 विधायक होते तो क्या वो गठबंधन के लिए इतना ही उत्साह दिखाते? देशपांडे ने यह भी बताया कि मनसे ने साल 2014 और साल 2017 के चुनाव में उद्धव को गठबंधन का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उस समय उन लोगों ने इंकार कर दिया और अब गठबंधन के लिए दबाव बना रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi  Uddhav Thackeray #uddhavthackeray #rajthackeray #sanjayraut #maharashtrapolitics #shivsenamns #indianpolitics #uddhavrajalliance

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Sharad Pawar Slams Ajit

सुलह की अटकलों पर विराम लगाते हुए शरद पवार ने अजित पवार को घेरा, बोले- ‘बीजेपी से हाथ मिलाने वालों को प्रोत्साहन नहीं’

महाराष्ट्र की राजनीति में चाचा-भतीजे के पुनर्मिलन की अटकलों के बीच अब शरद पवार (Sharad Pawar) ने एक ऐसा बयान दिया है, जो साफ इशारा करता है कि वे एनसीपी के बागी गुट के साथ सुलह के पक्ष में नहीं हैं। पिंपरी चिंचवाड़ में आयोजित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की एक कार्यकर्ता सभा को संबोधित करते हुए शरद पवार (Sharad Pawar) ने अजित पवार (Ajit Pawar) का नाम बिना लिए उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग भाजपा के साथ हाथ मिलाकर अवसरवादी राजनीति करते हैं, उन्हें कभी भी प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। शरद पवार (Sharad Pawar) का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उनके और अजित पवार (Ajit Pawar) के बीच हालिया मुलाकातों ने दोनों गुटों के विलय की अटकलें तेज कर दी थी। कहा जा रहा था कि महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव (Maharashtra local body elections) से पहले दोनों गुट फिर से एक हो सकते हैं। लेकिन शरद पवार के इस बयान के बाद ऐसा लग रहा है कि दोनों गुटों के बीच चल रही समझौते की बातचीत पटरी से उतर गई है।  गांधी, नेहरू, फुले, आंबेडकर की विचारधारा वालों को ही लेंगे साथ- शरद पवार  शरद पवार ने अपने संबोधन में कहा, ” पार्टी के कुछ लोगों का कहना है कि सबको साथ लेकर चलना चाहिए, लेकिन मैं इससे असहमत नहीं हूं। मेरे लिए यह देखना जरूरी है कि ये ‘सब’ कौन हैं? मैं सिर्फ उन लोगों को साथ ले सकता हूं जो महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, महात्मा फुले और डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा में विश्वास रखते हैं।” उन्होंने अजित पवार (Ajit Pawar) का बिना नाम लिए कहा कि यदि कोई सत्ता की लालसा में भाजपा के साथ जुड़ता है, तो वह न तो एनसीपी की मूल विचारधारा से मेल खाता है और न ही ऐसी राजनीति को बढ़ावा दिया जा सकता है। ऐसे लोगों के लिए मेरी पार्टी में कोई जगह नहीं है। शरद पवार ने आगे कहा कि एनसीपी की बुनियाद सेक्युलर सोच पर रखी गई है और यह कांग्रेस की विचारधारा के समानांतर है। अगर कोई नेता भाजपा के साथ गठबंधन करता है, तो यह हमारी आत्मा के खिलाफ है। कोई भी किसी के साथ जुड़ सकता है, परंतु एनसीपी जैसी पार्टी के लिए भाजपा के साथ जाना संभव नहीं। शरद पवार का यह बयान सीधे तौर पर अजित पवार गुट पर निशाना माना जा रहा है, जिन्होंने जुलाई 2023 में एनसीपी से अलग होकर भाजपा और शिंदे गुट के साथ मिलकर सरकार बनाई। पवार ने अपने संबोधन से स्पष्ट संकेत दिया है कि राजनीतिक सिद्धांतों के साथ समझौता कर केवल सत्ता पाने की कोशिश करने वालों को वह अपनी पार्टी में वापस नहीं लेंगे। ‘पार्टी छोड़ चुके नेताओं की चिंता न करें’ शरद पवार (Sharad Pawar) ने कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि उन्हें उन नेताओं की चिंता नहीं करनी चाहिए जो पार्टी छोड़कर चले गए हैं। बल्कि, अब जरूरत इस बात की है कि पार्टी पूरी ताकत के साथ आगामी स्थानीय निकाय चुनावों (Maharashtra local body elections) की तैयारी में जुट जाए। कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी की असली ताकत कार्यकर्ता हैं और जब तक जमीनी स्तर पर संगठन मजबूत रहेगा, तब तक कोई भी राजनीतिक चुनौती बड़ी नहीं होगी। इसलिए पूरे जोर-शोर से निकाय चुनाव की तैयारी करो।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा चाचा-भतीजे की मुलाकातों से उठी थी सियासी सरगर्मी बता दें कि, हाल ही में शरद पवार और अजित पवार के बीच कुछ अनौपचारिक मुलाकातें हुई थीं, जिनके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई थी कि शायद एनसीपी के दोनों धड़े एक बार फिर एकजुट हो सकते हैं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि यह मिलन आगामी निकाय चुनाव (Maharashtra local body elections) में एनसीपी के वोटों को एकजुट करने की रणनीति हो सकती है। लेकिन शरद पवार का ताजा बयान इन तमाम अटकलों पर फिलहाल पानी फेरता नजर आ रहा है। उन्होंने साफ तौर पर अवसरवादिता और विचारधारा से समझौते को नकारते हुए अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। इससे यह भी साफ हो गया कि उन्होंने अपने भतीजे अजित पवार और उनके साथियों की वापसी के दरवाजे लगभग बंद कर दिए हैं, कम से कम तब तक के लिए जब तक वे भाजपा के साथ हैं। अब देखना यह होगा कि शरद पवार के इस बयान का अजित पवार किस तरह से जवाब देते हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Sharad Pawar #SharadPawar #AjitPawar #BJPAlliance #MaharashtraPolitics #NCP #IndianPolitics

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Maharashtra civic polls spark new alliances.

महाराष्‍ट्र निकाय चुनाव को लेकर बदल रहा सियासी समीकरण, भाजपा, NCP, शिवसेना और MNS क्‍या बना रहे प्‍लान? 

महाराष्‍ट्र स्थानीय निकाय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) इस साल के अंत तक होने के संभावना है, लेकिन इससे पहले ही राज्य की राजनीतिक हलचल अपने चरम पर पहुंच चुकी है। राजनीतिक पार्टियां निकाय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) में जीत हासिल करने के लिए सियासी जोड़तोड़ में जुटी हैं। राज्य की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) के बदले तेवर देख इंडिया ब्लॉक में पहले से ही हलचल मची हुई है। वहीं महाराष्‍ट्र मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और राज ठाकरे की हुई ह‍ालिया मुलाकात से महागठबंधन को बेचैन कर दिया है।  तीनों पार्टियों स्‍थानीय चुनाव को लेकर जोर-शोर से कर रही हैं अपनी तैयारियां बता दें कि महाविकास अघाड़ी गठबंधन में शामिल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) गुट शामिल हैं। ये तीनों दल पिछला लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव एकजुट होकर लड़ी थी, लेकिन स्‍थानीय निकाय चुनाव एक साथ लड़ने को लेकर उत्‍सुक नजर नहीं आ रही हैं। तीनों पार्टियों स्‍थानीय चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां जोर-शोर से कर रही हैं, लेकिन अभी तक तीनों के बीच इस चुनाव को लेकर कोई संयुक्‍त बैठक नहीं हुई है। जिससे साफ पता चलता है कि स्थानीय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) को लेकर महागठबंधन में दरार पड़ चुका है।   शरद पवार की NCP के लिए करो या मरो की लड़ाई! राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शरद पवार (Sharad Pawar) की एनसीपी के लिए यह चुनाव लड़ो या मरो वाला है। इसलिए शरद पवार (Sharad Pawar) अपने लिए बेहतर से बेहतर विकल्‍प की तलाश कर रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में तो यहां तक दावा किया जा रहा है कि शरद पवार आगामी स्थानीय चुनाव से पहले भाजपा (BJP) को छोड़कर अन्‍य किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन कर सकते हैं। पवार की सबसे ज्यादा कोशिश अपने भतीजे अजित पवार के साथ गठबंधन करने की है। इसके लिए दोनों गुट के बीच बातचीत भी चल रही है।  पिछले कुछ दिनों से चाचा और भतीजे के बीच दूरियां कम होती भी नजर आ रही है। दोनों अब सार्वजनिक मंचों पर एक साथ नजर आ रहे हैं। हालही में हुई अजित पवार के बेटे की शादी में पूरा पवार परिवार वर्षों बाद एक साथ नजर आया था। जिसके बाद से ही कायस लगाया जा रहा है कि जल्द ही चाचा-भतीजे फिर से एकसाथ आने की घोषणा कर सकते हैं।  इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार राज का उद्धव से दूरी बना भाजपा के साथ आने की अटकलें!  वहीं दूसरी तरफ शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और चचेरे भाई राज ठाकरे (Raj Thackeray) के बीच भी भरत मिलाप की अटकलें लगाई जा रही थी। दोनों भाईयों के साथ में आने को लेकर मुंबई में कई जगहों पर पोस्टर भी लग गए थे। उद्धव ठाकरे ने भी संकेत दिया था कि “मामूली मुद्दों” को नजरअंदाज कर वे निकाय चुनाव से पहले साथ आ सकते हैं। लेकिन बीते सप्‍ताह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बीच हुई मुलाकात के बाद कहा जा रहा है कि राज ठाकरे शायद अब भाजपा के साथ आ सकते हैं।  महायुति गठबंधन में पहले से ही भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित गुट) शामिल हैं। ऐसे में राज ठाकरे के आ जाने से यह गुट और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगी, लेकिन इससे सीट बंटवारे को लेकर टकराव बढ़ने का भी अंदेशा है।  Latest News in Hindi Today Hindi Devendra Fadnavis #maharashtrapolitics #civicpolls2025 #bjp #ncp #shivsenanews #mnsupdates #politicalstrategy #electionnews #breakingnews

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Pawar uncle nephew meeting

क्या फिर साथ आएंगे अजित पवार और शरद पवार? बंद कमरे में हुई चाचा-भतीजे की बैठक से गरमाई सियासत

महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) से पहले राज्य की राजनीति में नई खिचड़ी पक रही है। डिप्टी सीएम और एनसीपी चीफ अजित पवार (Ajit Pawar) ने अपने चाचा NCP (SP) प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) से फिर मुलाकात की है। जिसके बाद कायस लगाया जा रहा है कि दोनों पार्टियों का विलय हो सकता है। पुणे में चाचा-भतीजे के बीच हुई इस मुलाकात की सबसे खास बात यह रही कि दोनों ने एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल के आवास पर बंद कमरे में मुलाकात की। इस बैठक के बाद मीडिया ने जब अजित पवार (Ajit Pawar) से दोनों पार्टियों के विलय को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने इस संबंध में कुछ भी जानकारी देने से इनकार कर दिया। वहीं एनसीपी प्रवक्ता संजय तटकरे से जब दोनों गुटों के संभावित विलय के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि इस बारे में दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व ही कोई जानकारी देगा। अगर ऐसा होता है तो पार्टी की तरफ से विस्तार से जानकारी दी जाएगी। वहीं विलय के बारे शरद पवार (Sharad Pawar) से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) पार्टी के विधायकों और सांसदों से चर्चा के बाद इस संबंध में निर्णय लेंगी। सुप्रिया सुले पहले ही खारिज कर चुकी विलय की बातें बता दें कि हालही में सुप्रिया सुले (Supriya Sule) से भी दोनों पार्टियों के विलय को लेकर मीडिया ने सवाल किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि, “अगर ऐसा कुछ होगा, तो वह अजीत पवार (Ajit Pawar) और मेरे बीच बातचीत के बाद होगा, लेकिन अजीत पवार पहले ही इस विलय से इंकार करते हुए कहा चुके हैं कि उनके पास इस बारे में कोई प्रस्ताव नहीं है। इसलिए, मैं मीडिया से यही कहना चाहती हूं। सब कुछ मात्र अफवाह है।” इस दौरान सुप्रिया सुले ने यह भी कहा था, “उनके पिता (शरद पवार) के बयान को मीडिया तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है। उन्होंने जो कुछ भी कहा वह एक स्पष्ट जवाब था।” अजित पवार चाहते हैं विलय के बाद पार्टी का नेतृत्व  अजित पवार गुट वाली एनसीपी विलय की इस चर्चा को मात्र अफवाह बता रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हम अभी सत्ता में हैं और शरद पवार गुट से कई नेता पहले ही हमारी पार्टी में शामिल हो गए हैं और कई अभी भी संपर्क में हैं। दोनों पार्टियों के विलय की यह अफवाह सिर्फ पार्टी बदलने वाले नेताओं को रोकने के लिए है। मुझे नहीं लगता कि जब तक पार्टी के नेतृत्व का मुद्दा हल जाता, तब तक यह विलय संभव है। अगर शरद पवार पार्टी की बागडोर अजित पवार को सौंप दें तो यह विलय संभव है। इससे कम कुछ भी नहीं।  इसे भी पढ़ें:- बीजेपी नेता के बेटे के वायरल हुए 130 से अधिक अश्लील वीडियो, मचा हड़कंप, अखिलेश यादव ने कही यह बात  अजित पवार और सुप्रिया सुले में उत्तराधिकार की लड़ाई बता दें की अजित पवार की बगावत के कारण साल 2023 में NCP दो टुकड़ों में बंट गई थी। एनसीपी में राज्य स्तर पर अजित पवार का दबदबा चलता था और केंद्र की राजनीति में सुप्रिया सुले की चलती थी। अजित पवार खुद को एनसीपी के उत्तराधिकारी के तौर पर देखते थे, लेकिन शरद पवार अपनी पार्टी की बागडोर सुप्रिया सुले (Supriya Sule) को सौंपना चाहते थे। इससे नाराज अजित पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ पार्टी छोड़ राज्य की तत्कालीन शिंदे सरकार में शामिल हो गए थे। बाद में पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह भी कब्जा लिया। Latest News in Hindi Today Hindi news Supriya Sule #AjitPawar #SharadPawar #MaharashtraPolitics #NCP #PoliticalNews #PawarMeeting #NCPReunion #BreakingNews #IndianPolitics #PawarVsPawar

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