विधानमंडल में जो लोग बैठे, वो नपुंसक, मराठी भाषा विवाद में MNS नेता का बेतुका बयान, शिवसेना लाएगी विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव
महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर जारी विवाद (Marathi Language Controversy) में मनसे मुंबई अध्यक्ष संदीप देशपांडे (Sandeep Deshpande) ने विवादास्पद बयान दे दिया है। महाराष्ट्र विधानभवन में इस समय संसद और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानमंडल की प्राक्कलन समितियों का राष्ट्रीय सम्मेलन चल रहा है। इस कार्यक्रम में मराठी का बैनर न होने को लेकर संदीप देशपांडे (Sandeep Deshpande) ने कहा, जो लोग विधानमंडल में बैठे हुए हैं, वे ‘नपुंसक’ बन चुके हैं और यह महाराष्ट्र के लिए दुर्भाग्य है। देशपांडे के इस बयान पर अब सियासी घमासान शुरू हो गया। मराठी हमारी मातृभाषा है, इसे कोई मिटा नहीं सकता है देशपांडे की इस विवावदास्पद टिप्पणियों पर शिवसेना मंत्री गुलाबराव पाटिल (Gulabrao Patil) ने नाराजगी जाहिर करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पाटिल ने कहा, ”विधानमंडल का अपमान करने के लिए वे जल्द ही देशपांडे के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाएंगे। किसी भी चीज की आलोचना करना सही है, लेकिन हर आलोचना की एक गरिमा होती है, उस सीमा को पार नहीं करना चाहिए। विधानमंडल सम्मानित जगह है, जिसे अपमानित करने वालों को सजा जरूर मिलना चाहिए।” वहीं विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोर्हे (Neelam Gorhe) ने देशपांडे के बयान का जवाब देते हुए कहा, मराठी हमारी मातृभाषा है, इसे कोई मिटा नहीं सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने मराठी भाषा को शास्त्रीय दर्जा दिलाया है। राजनीति के लिए छोटी-छोटी बातों पर आलोचना करना अनावश्यक है। इस तरह के अपमानित बयान को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। अपने बयान पर कायम, मराठी भाषा के लिए जेल जाने को भी तैयार- देशपांडे संदीप देशपांडे (Sandeep Deshpande) ने अपने बयान का विरोध होता देख सफाई भी दी है। देशपांडे ने कहा, मैं अपने पहले के बयान पर अभी भी कायम हूं, क्योंकि मैंने केवल मराठी भाषा विरोधी मानसिकता के बारे में बात की थी, किसी व्यक्ति के बारे में मैनें कुछ नहीं कहा था। मैं किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार हूं। इसके साथ देशपांडे ने यह भी कहा कि, अगर मेरी बात से कोई परेशान या नाराज है, तो उसे खुद पर विचार करना चाहिए। हम मराठी भाषी ही अगर अपनी भाषा को जीवित नहीं रखेंगे, तो कौन रखेगा, क्या बिहार और यूपी के बाहरी लोग? देशपांड ने आगे कहा, लोकसभा ने 22 प्रमुख भाषाओं को मान्यता दे रखी है, इसलिए जिस राज्य में कार्यक्रम हो रहा है, वहां की भाषा होनी चाहिए। मैं मराठी भाषा और मराठी मानुष के लिए जेल तक जाने को तैयार हूं। मराठी भाषा पर बढ़ते विवाद पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने बयान दिया है। पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में शिंदे ने कहा, इस सम्मेलन का आयोजन लोकसभा सचिवालय द्वारा किया गया था। इसलिए कार्यक्रम का बैनर हिंदी और अंग्रेजी में था। अगर इसका आयोजन महाराष्ट्र सरकार द्वारा किया जाता तो कार्यक्रम का बैनर मराठी भाषा में होता। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? भारत करेगा अंतर-संसदीय मैत्री समूह- ओम बिरला बता दें कि संसद और राज्य विधायी निकायों की प्राक्कलन समितियों का दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन सोमवार को शुरू हुआ। इस सम्मेलन में प्रशासन की दक्षता और बजट आकलन की प्रभावी निगरानी की भूमिका पर चर्चा किया जाएगा। इस सम्मेलन को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने भी संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान घोषणा कि की भारत की नीति को विदेशों में आगे बढ़ाने के लिए जल्द ही विभिन्न देशों की संसदों के साथ एक मैत्री समूह की स्थापना की जाएगी। इस अंतर-संसदीय मैत्री समूह को स्थापित करने का सुझाव बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल ने विभिन्न देशों का दौरा कर वापस लौटने के बाद दिया। इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। आमे बिरला ने इस संसदीय मैत्री समूह को स्थापित करने के लिए कई देशों ने अनुरोध किया है। इसके बनने के बाद दूसरे देशों के साथ त्वरित संपर्क करने और मुद्दों को सुलझाने में आसानी होगी। Latest News in Hindi Today Hindi news Om Birla #mnscontroversy #marathilanguage #shivsenanews #maharashtrapolitics #privilegemotion #assemblydebate #politicalnews

