Maharashtra civic polls spark new alliances.

महाराष्‍ट्र निकाय चुनाव को लेकर बदल रहा सियासी समीकरण, भाजपा, NCP, शिवसेना और MNS क्‍या बना रहे प्‍लान? 

महाराष्‍ट्र स्थानीय निकाय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) इस साल के अंत तक होने के संभावना है, लेकिन इससे पहले ही राज्य की राजनीतिक हलचल अपने चरम पर पहुंच चुकी है। राजनीतिक पार्टियां निकाय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) में जीत हासिल करने के लिए सियासी जोड़तोड़ में जुटी हैं। राज्य की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) के बदले तेवर देख इंडिया ब्लॉक में पहले से ही हलचल मची हुई है। वहीं महाराष्‍ट्र मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और राज ठाकरे की हुई ह‍ालिया मुलाकात से महागठबंधन को बेचैन कर दिया है।  तीनों पार्टियों स्‍थानीय चुनाव को लेकर जोर-शोर से कर रही हैं अपनी तैयारियां बता दें कि महाविकास अघाड़ी गठबंधन में शामिल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) गुट शामिल हैं। ये तीनों दल पिछला लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव एकजुट होकर लड़ी थी, लेकिन स्‍थानीय निकाय चुनाव एक साथ लड़ने को लेकर उत्‍सुक नजर नहीं आ रही हैं। तीनों पार्टियों स्‍थानीय चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां जोर-शोर से कर रही हैं, लेकिन अभी तक तीनों के बीच इस चुनाव को लेकर कोई संयुक्‍त बैठक नहीं हुई है। जिससे साफ पता चलता है कि स्थानीय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) को लेकर महागठबंधन में दरार पड़ चुका है।   शरद पवार की NCP के लिए करो या मरो की लड़ाई! राजनीतिक जानकारों का कहना है कि शरद पवार (Sharad Pawar) की एनसीपी के लिए यह चुनाव लड़ो या मरो वाला है। इसलिए शरद पवार (Sharad Pawar) अपने लिए बेहतर से बेहतर विकल्‍प की तलाश कर रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में तो यहां तक दावा किया जा रहा है कि शरद पवार आगामी स्थानीय चुनाव से पहले भाजपा (BJP) को छोड़कर अन्‍य किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन कर सकते हैं। पवार की सबसे ज्यादा कोशिश अपने भतीजे अजित पवार के साथ गठबंधन करने की है। इसके लिए दोनों गुट के बीच बातचीत भी चल रही है।  पिछले कुछ दिनों से चाचा और भतीजे के बीच दूरियां कम होती भी नजर आ रही है। दोनों अब सार्वजनिक मंचों पर एक साथ नजर आ रहे हैं। हालही में हुई अजित पवार के बेटे की शादी में पूरा पवार परिवार वर्षों बाद एक साथ नजर आया था। जिसके बाद से ही कायस लगाया जा रहा है कि जल्द ही चाचा-भतीजे फिर से एकसाथ आने की घोषणा कर सकते हैं।  इसे भी पढ़ें:- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट हुई क्रैश, पूर्व मुख्यमंत्री समेत 242 यात्री थे सवार राज का उद्धव से दूरी बना भाजपा के साथ आने की अटकलें!  वहीं दूसरी तरफ शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और चचेरे भाई राज ठाकरे (Raj Thackeray) के बीच भी भरत मिलाप की अटकलें लगाई जा रही थी। दोनों भाईयों के साथ में आने को लेकर मुंबई में कई जगहों पर पोस्टर भी लग गए थे। उद्धव ठाकरे ने भी संकेत दिया था कि “मामूली मुद्दों” को नजरअंदाज कर वे निकाय चुनाव से पहले साथ आ सकते हैं। लेकिन बीते सप्‍ताह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बीच हुई मुलाकात के बाद कहा जा रहा है कि राज ठाकरे शायद अब भाजपा के साथ आ सकते हैं।  महायुति गठबंधन में पहले से ही भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित गुट) शामिल हैं। ऐसे में राज ठाकरे के आ जाने से यह गुट और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगी, लेकिन इससे सीट बंटवारे को लेकर टकराव बढ़ने का भी अंदेशा है।  Latest News in Hindi Today Hindi Devendra Fadnavis #maharashtrapolitics #civicpolls2025 #bjp #ncp #shivsenanews #mnsupdates #politicalstrategy #electionnews #breakingnews

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Pawar uncle nephew meeting

क्या फिर साथ आएंगे अजित पवार और शरद पवार? बंद कमरे में हुई चाचा-भतीजे की बैठक से गरमाई सियासत

महाराष्ट्र स्थानीय निकाय चुनाव (Maharashtra Local Body Elections) से पहले राज्य की राजनीति में नई खिचड़ी पक रही है। डिप्टी सीएम और एनसीपी चीफ अजित पवार (Ajit Pawar) ने अपने चाचा NCP (SP) प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) से फिर मुलाकात की है। जिसके बाद कायस लगाया जा रहा है कि दोनों पार्टियों का विलय हो सकता है। पुणे में चाचा-भतीजे के बीच हुई इस मुलाकात की सबसे खास बात यह रही कि दोनों ने एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल के आवास पर बंद कमरे में मुलाकात की। इस बैठक के बाद मीडिया ने जब अजित पवार (Ajit Pawar) से दोनों पार्टियों के विलय को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने इस संबंध में कुछ भी जानकारी देने से इनकार कर दिया। वहीं एनसीपी प्रवक्ता संजय तटकरे से जब दोनों गुटों के संभावित विलय के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि इस बारे में दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व ही कोई जानकारी देगा। अगर ऐसा होता है तो पार्टी की तरफ से विस्तार से जानकारी दी जाएगी। वहीं विलय के बारे शरद पवार (Sharad Pawar) से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनकी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले (Supriya Sule) पार्टी के विधायकों और सांसदों से चर्चा के बाद इस संबंध में निर्णय लेंगी। सुप्रिया सुले पहले ही खारिज कर चुकी विलय की बातें बता दें कि हालही में सुप्रिया सुले (Supriya Sule) से भी दोनों पार्टियों के विलय को लेकर मीडिया ने सवाल किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि, “अगर ऐसा कुछ होगा, तो वह अजीत पवार (Ajit Pawar) और मेरे बीच बातचीत के बाद होगा, लेकिन अजीत पवार पहले ही इस विलय से इंकार करते हुए कहा चुके हैं कि उनके पास इस बारे में कोई प्रस्ताव नहीं है। इसलिए, मैं मीडिया से यही कहना चाहती हूं। सब कुछ मात्र अफवाह है।” इस दौरान सुप्रिया सुले ने यह भी कहा था, “उनके पिता (शरद पवार) के बयान को मीडिया तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है। उन्होंने जो कुछ भी कहा वह एक स्पष्ट जवाब था।” अजित पवार चाहते हैं विलय के बाद पार्टी का नेतृत्व  अजित पवार गुट वाली एनसीपी विलय की इस चर्चा को मात्र अफवाह बता रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हम अभी सत्ता में हैं और शरद पवार गुट से कई नेता पहले ही हमारी पार्टी में शामिल हो गए हैं और कई अभी भी संपर्क में हैं। दोनों पार्टियों के विलय की यह अफवाह सिर्फ पार्टी बदलने वाले नेताओं को रोकने के लिए है। मुझे नहीं लगता कि जब तक पार्टी के नेतृत्व का मुद्दा हल जाता, तब तक यह विलय संभव है। अगर शरद पवार पार्टी की बागडोर अजित पवार को सौंप दें तो यह विलय संभव है। इससे कम कुछ भी नहीं।  इसे भी पढ़ें:- बीजेपी नेता के बेटे के वायरल हुए 130 से अधिक अश्लील वीडियो, मचा हड़कंप, अखिलेश यादव ने कही यह बात  अजित पवार और सुप्रिया सुले में उत्तराधिकार की लड़ाई बता दें की अजित पवार की बगावत के कारण साल 2023 में NCP दो टुकड़ों में बंट गई थी। एनसीपी में राज्य स्तर पर अजित पवार का दबदबा चलता था और केंद्र की राजनीति में सुप्रिया सुले की चलती थी। अजित पवार खुद को एनसीपी के उत्तराधिकारी के तौर पर देखते थे, लेकिन शरद पवार अपनी पार्टी की बागडोर सुप्रिया सुले (Supriya Sule) को सौंपना चाहते थे। इससे नाराज अजित पवार अपने समर्थक विधायकों के साथ पार्टी छोड़ राज्य की तत्कालीन शिंदे सरकार में शामिल हो गए थे। बाद में पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह भी कब्जा लिया। Latest News in Hindi Today Hindi news Supriya Sule #AjitPawar #SharadPawar #MaharashtraPolitics #NCP #PoliticalNews #PawarMeeting #NCPReunion #BreakingNews #IndianPolitics #PawarVsPawar

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Dhananjay Munde resigns

Dhananjay Munde resigns : महाराष्ट्र सरकार के मंत्री धनंजय मुंडे ने दिया इस्तीफा

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) ने आज यानी मंगलवार को अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (CM Devendra Fadnavis) ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। जल्द ही विधानसभा में इसकी औपचारिक घोषणा भी की जाएगी। धनंजय मुंडे का इस्तीफा एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम है, जो महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। संतोष देशमुख हत्याकांड से जुड़ा इस्तीफा धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) का इस्तीफा बीड जिले के मसाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख की हत्या से जुड़े घटनाक्रमों के बाद सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें हत्या की चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। इस हत्या के आरोप में मुंडे के करीबी सहयोगी वाल्मिक कराड समेत कई अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया था। हत्या की जांच के दौरान यह साफ हुआ कि मुख्य आरोपी वाल्मिक कराड धनंजय मुंडे के बेहद करीबी सहयोगी थे। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे विपक्ष का दबाव भी बढ़ता गया। इस पूरे मामले के कारण महाराष्ट्र सरकार को धनंजय मुंडे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ा। विपक्ष ने दिया सरकार को अल्टीमेटम विपक्ष ने इस मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला था। विपक्षी दलों ने ऐलान किया था कि यदि धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) इस्तीफा नहीं देते, तो वे सदन की कार्यवाही नहीं चलने देंगे। विपक्ष का आरोप था कि सरकार अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है और हत्या के मुख्य आरोपी के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की जा रही है। सदन में हंगामे की आशंका के बीच एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं ने सोमवार रात उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) के आवास पर एक बैठक की। बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मामले की गंभीरता पर चर्चा की और धनंजय मुंडे को इस्तीफा देने की सलाह दी। धनंजय मुंडे पर इस्तीफे का दबाव क्यों बढ़ा? हत्या के मुख्य आरोपी वाल्मिक कराड और धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) के करीबी संबंध जगजाहिर हैं। खुद धनंजय मुंडे भी कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि कराड उनके विश्वासपात्र हैं। जब संतोष देशमुख हत्या (Santosh Deshmukh Murder) के चौंकाने वाले सबूत सामने आए, तो धनंजय मुंडे की मुश्किलें बढ़ गईं। क्या है संतोष देशमुख हत्याकांड? संतोष देशमुख हत्या (Santosh Deshmukh Murder) बीते साल दिसंबर का है, जब मसाजोग गांव के सरपंच संतोष देशमुख को अगवा कर लिया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह अपहरण एक ऊर्जा कंपनी से जबरन वसूली की कोशिश को विफल करने के कारण हुआ था। आरोप है कि संतोष देशमुख ने कंपनी से अवैध वसूली को रोकने की कोशिश की थी, जिसके बाद उन्हें किडनैप कर लिया गया और उनकी हत्या कर दी गई। हत्या के आरोपियों के धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) से करीबी संबंधों की बात सामने आने के बाद इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया। जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे धनंजय मुंडे की भूमिका पर सवाल उठने लगे। सरकार की सख्ती और आगे की कार्रवाई महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पहले ही संकेत दे दिए थे कि यदि धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) की संलिप्तता साबित होती है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एनसीपी के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद थे, लेकिन पार्टी की छवि बचाने के लिए वरिष्ठ नेताओं ने धनंजय मुंडे को इस्तीफा देने की सलाह दी। अब जब मुंडे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, तो सवाल उठता है कि आगे क्या होगा? इसे भी पढ़ें:- कांग्रेसी प्रवक्ता के इस बयान पर मचा सियासी घमासान, रोहित शर्मा को कहा मोटा तो बीजेपी ने की राहुल से तुलना राजनीतिक असर और विपक्ष की रणनीति धनंजय मुंडे (Dhananjay Munde) का इस्तीफा महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। यह घटनाक्रम न केवल एनसीपी के लिए एक झटका है, बल्कि भाजपा और शिवसेना के लिए भी एक अवसर हो सकता है। विपक्षी दल अब इस मुद्दे को और उछालने की कोशिश कर सकते हैं ताकि सत्तारूढ़ दल की छवि को नुकसान पहुंचे। इस बीच, एनसीपी (NCP) को अपनी छवि सुधारने और संगठन को मजबूत करने के लिए नए रणनीतिक कदम उठाने होंगे। पार्टी नेतृत्व अब यह तय करेगा कि धनंजय मुंडे को आगे क्या भूमिका दी जाए या उनसे पूरी तरह दूरी बना ली जाए। धनंजय मुंडे का इस्तीफा (Dhananjay Munde Resignation) महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। संतोष देशमुख हत्याकांड से जुड़ी जांच और विपक्ष के भारी दबाव के चलते मुंडे को पद छोड़ना पड़ा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और विपक्ष इस मुद्दे को किस तरह भुनाने की कोशिश करता है। इस घटनाक्रम से साफ है कि अब महाराष्ट्र में राजनीति (Maharashtra Politics) और भी तीव्र होने वाली है। आने वाले दिनों में इस मामले पर और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे राज्य की राजनीति और अधिक गर्मा सकती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Dhananjay Munde #SantoshDeshmukhMurder #NCP #MaharashtraPolitics #Dhananjay Munde #Maharashtra #BJP

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