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बाबा रामदेव का सरकार पर निशाना? सरकारी नौकरियों में ‘90-99% घोटाले’ का दावा, बोले—सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन करना पड़ेगा

हरिद्वार: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर योग गुरु बाबा रामदेव ने सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया, शिक्षा व्यवस्था और देश में कथित भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने सरकारी नौकरी के इंटरव्यू में बड़े स्तर पर गड़बड़ी का दावा करते हुए कहा कि अगर व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो देश में बड़े आंदोलन की स्थिति बन सकती है। सरकारी नौकरी के इंटरव्यू पर गंभीर आरोप रामदेव ने दावा किया कि सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला होता है। उनके मुताबिक, कई मामलों में पहले से तय कर लिया जाता है कि किस उम्मीदवार को नौकरी देनी है और बाद में चयन प्रक्रिया उसी के अनुसार आगे बढ़ती है। उन्होंने पैसे लेकर भर्ती और पक्षपात के भी आरोप लगाए। हालांकि, 90-99 प्रतिशत के इस आंकड़े के समर्थन में रामदेव ने कोई आधिकारिक आंकड़ा या दस्तावेज पेश नहीं किया है। इसलिए इसे उनके द्वारा लगाया गया आरोप/दावा ही माना जाना चाहिए। जाति और विचारधारा को लेकर भी सवाल रामदेव ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर भर्ती में योग्यता के बजाय संगठन, विचारधारा, जाति और वर्ग जैसे कारकों का प्रभाव पड़ता है। उन्होंने ऐसी व्यवस्था को युवाओं के साथ अन्याय बताते हुए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की जरूरत पर जोर दिया। ‘नहीं सुधरे तो आंदोलन करना पड़ेगा’ रामदेव ने व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए आंदोलन की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि वह अराजकता या हिंसक आंदोलन के समर्थक नहीं हैं, लेकिन अगर कथित गड़बड़ियों को दूर नहीं किया गया तो लोगों और युवाओं में असंतोष बढ़ सकता है और उन्हें दोबारा आंदोलन के लिए उतरना पड़ सकता है। शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल रामदेव ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों की व्यवस्थाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बुनियादी सुविधाओं जैसे शिक्षक, पानी, बिजली, शौचालय और किताबों की उपलब्धता को लेकर शिकायतों का जिक्र किया। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किए बिना युवाओं के भविष्य को बेहतर नहीं बनाया जा सकता। राजनीति में संवाद की अपील रामदेव ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से राजनीतिक मतभेदों को दुश्मनी में नहीं बदलने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की अपनी जिम्मेदारी है और देशहित में आपसी संवाद तथा सम्मान जरूरी है। क्या यह सीधे मोदी सरकार पर हमला था? रामदेव के बयान में सरकारी व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर तीखे सवाल जरूर उठाए गए, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनका मुख्य फोकस सरकारी नौकरी, इंटरव्यू, शिक्षा व्यवस्था और कथित भ्रष्टाचार पर था। इसलिए इसे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत हमला बताने के बजाय सरकारी व्यवस्था पर रामदेव की आलोचना के रूप में देखना ज्यादा सटीक होगा। निष्कर्ष स्वतंत्रता दिवस पर बाबा रामदेव के बयान ने सरकारी भर्ती और शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। 90-99% घोटाले के उनके दावे और आंदोलन की चेतावनी ने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को तेज कर दिया है। हालांकि, उनके लगाए गए प्रतिशत संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या आधिकारिक आंकड़ों से पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। Source: ABP News, NewsTak, Peoples Update जय राष्ट्र न्यूज़

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‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और BJP में फिर सियासी टकराव, स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का वीडियो बना विवाद का केंद्र

नई दिल्ली: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विवाद कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण के गायन से जुड़ी एक वीडियो क्लिप के सामने आने के बाद शुरू हुआ। वीडियो में क्या दिखा? कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान पार्टी की संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच बातचीत और इशारों का एक वीडियो सामने आया। BJP ने इस वीडियो को आधार बनाकर आरोप लगाया कि सोनिया गांधी ने ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण के गायन पर आपत्ति जताई। वीडियो में राहुल गांधी भी नजर आते हैं। इसी दृश्य को लेकर BJP नेताओं ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस पर सवाल उठाए और राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान को लेकर राजनीतिक हमला बोला। कांग्रेस ने BJP के आरोप को किया खारिज कांग्रेस ने BJP के आरोपों को गलत बताया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सोनिया गांधी ‘वंदे मातरम्’ को रोकने या उसका विरोध करने के लिए नहीं कह रही थीं। कांग्रेस के मुताबिक, सोनिया गांधी केवल यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही थीं कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था हो, क्योंकि वह काफी देर से खड़े थे। इस तरह एक ही वीडियो को लेकर दोनों दलों की व्याख्या पूरी तरह अलग सामने आई है। BJP ने लगाया राष्ट्रीय गीत के अपमान का आरोप BJP ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत है और इसके गायन के दौरान किसी तरह की आपत्ति या व्यवधान स्वीकार नहीं किया जा सकता। BJP प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने भी वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए। क्यों महत्वपूर्ण है ‘वंदे मातरम्’? ‘वंदे मातरम्’ लंबे समय से भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा राष्ट्रीय गीत है। इस वर्ष इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसे लेकर देशभर में विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। 15 अगस्त 2026 को लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी ‘वंदे मातरम्’ को विशेष महत्व दिया गया और इसके पूर्ण संस्करण के गायन को लेकर पहले से चर्चा थी। पहले से चल रहा है राजनीतिक विवाद यह विवाद अचानक नहीं उठा है। पिछले कुछ दिनों से ही ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण, इसके गायन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके इस्तेमाल को लेकर BJP और कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाजी चल रही है। कांग्रेस नेता शशि थरूर की टिप्पणी को लेकर भी BJP ने हाल में निशाना साधा था, जिसके बाद दोनों दलों के बीच बहस और तेज हो गई थी। इसके अलावा, संसद में राष्ट्रीय गीत से जुड़े कानून में संशोधन को लेकर भी राजनीतिक बहस हुई है। राजस्थान BJP कार्यक्रम में भी विवाद इसी स्वतंत्रता दिवस पर राजस्थान BJP के कार्यक्रम में भी ‘वंदे मातरम्’ को लेकर अलग विवाद सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के कार्यक्रम में राष्ट्रीय गीत का गलत संगीत संस्करण बज गया, जिसके बाद राजस्थान BJP अध्यक्ष मदन राठौड़ ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। इससे स्वतंत्रता दिवस के दिन ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े विवाद और भी चर्चा में आ गए। सोशल मीडिया पर भी तेज हुई बहस वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर BJP और कांग्रेस समर्थकों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। एक पक्ष इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जोड़ रहा है, जबकि दूसरा पक्ष BJP पर वीडियो को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगा रहा है। हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाले इशारों की वास्तविक मंशा का स्वतंत्र रूप से निर्धारण करना संभव नहीं है। इसलिए दोनों पक्षों के दावों को आरोप और जवाब के रूप में ही देखा जाना चाहिए। निष्कर्ष स्वतंत्रता दिवस के कांग्रेस कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण के दौरान सामने आए वीडियो ने BJP और कांग्रेस के बीच नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। BJP ने सोनिया गांधी पर राष्ट्रीय गीत को लेकर आपत्ति जताने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस ने साफ किया कि वह केवल मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी की व्यवस्था को लेकर बात कर रही थीं। मामला अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच गया है और आने वाले दिनों में इस पर दोनों दलों के बीच और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। Source: PTI, The Federal, Times of India, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में देवदत्त पडिक्कल का धमाका, 131 रन की नाबाद पारी से भारत मजबूत

गॉल: भारत और श्रीलंका के बीच गॉल में खेले जा रहे पहले टेस्ट के शुरुआती दिन देवदत्त पडिक्कल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 131 रन बना दिए। उनकी पारी की बदौलत भारत ने दिन का खेल खत्म होने तक 2 विकेट पर 288 रन बना लिए। बारिश और खराब रोशनी के कारण पहले दिन का खेल समय से पहले समाप्त करना पड़ा। पडिक्कल का पहला टेस्ट शतक देवदत्त पडिक्कल ने 178 गेंदों का सामना करते हुए 131 रन* बनाए, जिसमें 12 चौके और एक छक्का शामिल रहा। उन्होंने 134 गेंदों में अपना पहला टेस्ट शतक पूरा किया। यह उनके टेस्ट करियर का पहला शतक है। पडिक्कल को टीम में साई सुदर्शन के चोटिल होने के बाद मौका मिला था और उन्होंने इस अवसर को शानदार अंदाज में भुनाया। स्पिन के खिलाफ दिखाया शानदार फुटवर्क गॉल की परिस्थितियों में श्रीलंकाई स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ पडिक्कल ने बेहद संयमित बल्लेबाजी की। उन्होंने गेंद की लाइन के हिसाब से अपने पैरों का इस्तेमाल किया और बैकफुट पर कई शानदार शॉट लगाए। उनकी बल्लेबाजी में खास बात यह रही कि उन्होंने आक्रामक शॉट खेलने के बजाय गेंद को अच्छी तरह पढ़कर रन बनाए। उनकी तकनीक और फुटवर्क की क्रिकेट विशेषज्ञों ने भी तारीफ की। KL राहुल के साथ बड़ी साझेदारी पडिक्कल ने KL राहुल के साथ दूसरे विकेट के लिए 150 रन की साझेदारी की। राहुल ने भी शानदार बल्लेबाजी करते हुए 77 रन बनाए, लेकिन बाद में क्रैम्प्स के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होना पड़ा। इस साझेदारी ने भारत को शुरुआती झटके से उबरने और श्रीलंकाई गेंदबाजों पर दबाव बनाने में मदद की। भारत के 600वें टेस्ट में यादगार पारी यह मुकाबला भारतीय क्रिकेट के लिए भी खास है, क्योंकि यह भारत का 600वां टेस्ट मैच है। ऐसे ऐतिहासिक मुकाबले में पडिक्कल का शतक उनकी पारी को और खास बना देता है। इसके अलावा, 15 अगस्त को शतक लगाने के कारण पडिक्कल ने एक खास उपलब्धि भी हासिल की। वह स्वतंत्रता दिवस पर अंतरराष्ट्रीय शतक लगाने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज बने। उनसे पहले विराट कोहली ने 2012 में श्रीलंका के खिलाफ वनडे में 15 अगस्त को शतक लगाया था। दिन का खेल खत्म होने पर भारत मजबूत स्थिति में पहले दिन भारत ने 73 ओवर में 288/2 का स्कोर बनाया। स्टंप्स के समय: भारत अब दूसरे दिन अपनी पारी को और आगे बढ़ाकर बड़ा स्कोर खड़ा करने की कोशिश करेगा। निष्कर्ष देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट में नाबाद 131 रन की शानदार पारी खेलकर टेस्ट टीम में अपनी वापसी को यादगार बना दिया है। स्पिन के खिलाफ उनका आत्मविश्वास, बेहतरीन फुटवर्क और धैर्य गॉल की परिस्थितियों में खास तौर पर नजर आया। अब निगाहें दूसरे दिन पडिक्कल और ऋषभ पंत पर रहेंगी। Source: ESPNcricinfo, Reuters, NDTV, AP, DD India जय राष्ट्र न्यूज़

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FIH हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की धमाकेदार शुरुआत, वेल्स को 3-1 से हराया; हरमनप्रीत सिंह का शानदार प्रदर्शन

एम्स्टेलवीन: भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने FIH हॉकी वर्ल्ड कप 2026 में जीत के साथ अपने अभियान का आगाज किया है। शनिवार को खेले गए Pool D के मुकाबले में भारत ने वेल्स को 3-1 से शिकस्त दी। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने दो गोल दागकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई। पहले क्वार्टर में भारत ने बनाई बढ़त भारत ने मुकाबले की शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। संजय ने 8वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके कुछ ही मिनट बाद कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने 11वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर से गोल करते हुए भारत की बढ़त को 2-0 कर दिया। हरमनप्रीत ने फिर दिखाया दम तीसरे क्वार्टर में भी भारत का दबदबा जारी रहा। 43वें मिनट में हरमनप्रीत सिंह ने एक और पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील किया, जिससे भारत 3-0 से आगे हो गया। भारत के तीनों गोल पेनल्टी कॉर्नर के जरिए आए। आखिरी क्वार्टर में वेल्स ने किया पलटवार वेल्स ने मैच के अंतिम चरण में वापसी की कोशिश की। 56वें मिनट में Sam Welsh ने गोल कर स्कोर 3-1 कर दिया। इसके बाद भारतीय डिफेंस ने संयम बनाए रखा और वेल्स को दूसरा गोल करने का मौका नहीं दिया। भारत ने 3-1 से मुकाबला अपने नाम कर टूर्नामेंट में पूरे तीन अंक हासिल किए। हरमनप्रीत ने जीत के बाद क्या कहा? मैच के बाद कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने जीत पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि शुरुआती मुकाबला जीतना और पूरे तीन अंक हासिल करना टीम के लिए महत्वपूर्ण था। हालांकि, वेल्स के आखिरी मिनटों में गोल करने को लेकर उन्होंने कहा कि टीम को अपनी गलतियों से सीखना होगा और आगामी मुकाबलों में उन्हें दोहराने से बचना होगा। भारत का अगला मुकाबला इंग्लैंड से वेल्स के खिलाफ जीत के बाद भारत अब अपने अगले Pool D मुकाबले में 17 अगस्त को इंग्लैंड का सामना करेगा। यह मुकाबला भी नीदरलैंड्स के एम्स्टेलवीन में होगा। भारतीय टीम की नजर इस बार लंबे समय से चले आ रहे विश्व कप खिताब के इंतजार को खत्म करने पर है। भारत ने आखिरी बार 1975 में पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप जीता था। भारत की जीत के बड़े पॉइंट्स निष्कर्ष भारत ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हॉकी वर्ल्ड कप में शानदार जीत के साथ शुरुआत की है। हरमनप्रीत सिंह की दो गोल की बदौलत भारत ने वेल्स को 3-1 से हराया। अब टीम की नजर इंग्लैंड के खिलाफ अगले मुकाबले पर है, जहां जीत के साथ अपनी स्थिति और मजबूत करने की कोशिश होगी। Source: Hockey India, Olympics.com, All India Radio, PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत के स्वतंत्रता दिवस पर PoK में विरोध प्रदर्शन, प्रदर्शनकारियों ने 15 अगस्त को ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाया

मुजफ्फराबाद: भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर (PoK/AJK) के अलग-अलग हिस्सों में भारत विरोधी प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की गईं। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने 15 अगस्त को ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाते हुए भारत की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। मुजफ्फराबाद समेत कई इलाकों में प्रदर्शन स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, मुजफ्फराबाद और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के अन्य इलाकों में कश्मीरी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों ने भारत पर कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को कथित रूप से नकारने का आरोप लगाया। पाकिस्तान के सरकारी रेडियो ने भी बताया कि AJK और पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में भारत के स्वतंत्रता दिवस के खिलाफ रैलियां और प्रदर्शन आयोजित किए गए। क्षेत्र में पहले से जारी है राजनीतिक असंतोष यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक असंतोष का सामना कर रहा है। हाल के महीनों में चुनाव, प्रतिनिधित्व और आर्थिक मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। कुछ प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भी हुई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तनाव बढ़ा। हालांकि, 15 अगस्त के भारत-विरोधी प्रदर्शनों को क्षेत्र में चल रहे इन घरेलू आंदोलनों से अलग घटनाक्रम के रूप में देखना जरूरी है। भारत के स्वतंत्रता दिवस पर विरोध का ऐलान भारत के स्वतंत्रता दिवस को लेकर पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में लंबे समय से अलग राजनीतिक नजरिया रहा है। इस वर्ष भी कुछ कश्मीरी संगठनों और कार्यकर्ताओं ने 15 अगस्त को भारत के खिलाफ विरोध दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया। भारत में भी PoK को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज इसी दिन जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में PoK को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि अगर 2019 में अनुच्छेद 370 में बदलाव नहीं हुआ होता, तो PoK में लोग जम्मू-कश्मीर के साथ फिर से जुड़ने को लेकर प्रदर्शन कर रहे होते। उनके बयान पर BJP ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। PoK में सुरक्षा और राजनीतिक तनाव PoK में हाल के चुनावों और विरोध प्रदर्शनों के कारण पहले से सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं। कुछ क्षेत्रों में चुनावी प्रक्रिया भी सुरक्षा कारणों से प्रभावित हुई थी। ऐसे माहौल में 15 अगस्त को हुए भारत-विरोधी प्रदर्शनों ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान और कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। निष्कर्ष भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के कई हिस्सों में भारत विरोधी प्रदर्शन किए गए और कुछ संगठनों ने 15 अगस्त को ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब PoK पहले से ही राजनीतिक अस्थिरता और विरोध प्रदर्शनों से गुजर रहा है। Source: Dawn, Radio Pakistan, Reuters/AP संबंधित रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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तमिलनाडु में विदेशी निवेशकों का बड़ा दांव, 16 परियोजनाओं के लिए ₹15,050 करोड़ के समझौते

चेन्नई: तमिलनाडु में विदेशी निवेश को लेकर बड़ा कदम सामने आया है। राज्य सरकार ने विदेशी निवेशकों के साथ 16 नई परियोजनाओं के लिए करीब ₹15,050 करोड़ के निवेश समझौते किए हैं। इन परियोजनाओं में फ्रांस की Saint-Gobain, अमेरिका की Super Micro Computer और जर्मनी की Daimler India Commercial Vehicles जैसी कंपनियां शामिल हैं। विदेशी कंपनियों से हुए 16 समझौते राज्य सरकार के अनुसार, विदेशी निवेशकों के साथ हुए 16 समझौतों की कुल अनुमानित राशि ₹150.5 अरब यानी करीब ₹15,050 करोड़ है। ये निवेश तमिलनाडु में औद्योगिक उत्पादन और मौजूदा इकाइयों के विस्तार को बढ़ावा देने के लिए किए जाएंगे। यह घोषणा राज्य में आयोजित बड़े निवेश सम्मेलन के दौरान हुई, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों ने निवेश की प्रतिबद्धता जताई। Saint-Gobain और Daimler का बड़ा निवेश फ्रांस की निर्माण क्षेत्र की कंपनी Saint-Gobain करीब ₹2,000 करोड़ का निवेश करेगी। इसमें नई फैक्ट्री स्थापित करने के साथ कांचीपुरम स्थित मौजूदा सुविधा के विस्तार की योजना शामिल है। वहीं जर्मनी की Daimler India Commercial Vehicles चेन्नई स्थित अपने कारखाने के विस्तार पर करीब ₹4,000 करोड़ खर्च करेगी। Super Micro Computer भी करेगी निवेश अमेरिका की सर्वर निर्माण कंपनी Super Micro Computer भी तमिलनाडु में निवेश करने वाली प्रमुख विदेशी कंपनियों में शामिल है। इससे राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलने की उम्मीद है। कुल 97 समझौते, ₹67,452 करोड़ से ज्यादा के निवेश विदेशी निवेश के अलावा सम्मेलन में भारतीय कंपनियों के साथ भी समझौते किए गए। राज्य सरकार ने कुल 97 निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनकी अनुमानित कुल राशि ₹67,452 करोड़ से ज्यादा बताई गई है। इन परियोजनाओं से एक लाख से ज्यादा रोजगार पैदा होने का अनुमान है। इनमें Titan, MAS Holdings, Hinduja Group, Agnikul Cosmos और Ultraviolette जैसी कंपनियों के निवेश भी शामिल हैं। स्पेस, EV और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर भी फोकस तमिलनाडु का निवेश अभियान केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। राज्य में स्पेस टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, क्वांटम कंप्यूटिंग, लाइफ साइंसेज, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में भी निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया जा रहा है। चेन्नई बना बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब चेन्नई को लंबे समय से भारत के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में गिना जाता है। यहां Hyundai, Renault, TVS Motor और Apple के सप्लायर्स Foxconn तथा Tata Electronics जैसी कंपनियों की गतिविधियां हैं। नए निवेश से तमिलनाडु की औद्योगिक स्थिति और मजबूत होने की उम्मीद है। निष्कर्ष तमिलनाडु में विदेशी कंपनियों के ₹15,050 करोड़ के 16 निवेश समझौते राज्य के औद्योगिक क्षेत्र के लिए बड़ा घटनाक्रम हैं। Saint-Gobain, Daimler और Super Micro Computer जैसी कंपनियों की भागीदारी से मैन्युफैक्चरिंग और हाई-टेक सेक्टर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, ध्यान रहे कि ये निवेश समझौते/प्रतिबद्धताएं हैं; वास्तविक निवेश का क्रियान्वयन परियोजनाओं के आगे बढ़ने पर निर्भर करेगा। Source: Reuters, Tamil Nadu Government-related reports जय राष्ट्र न्यूज़

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स्कूल की छत गिरने के बाद छात्रों का आंदोलन, आशुतोष रांका और पुलिस के बीच तीखी बहस का वीडियो वायरल

अलवर: राजस्थान के थानागाजी क्षेत्र के जोधावास स्थित सरकारी स्कूल की जर्जर इमारत की छत का एक हिस्सा गिरने के बाद छात्रों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई। स्कूल की खराब हालत और सड़क की समस्या को लेकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया, जिसमें CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका भी शामिल हुए। छत गिरने के बाद शुरू हुआ आंदोलन रिपोर्टों के मुताबिक, स्कूल की इमारत पिछले कई वर्षों से जर्जर हालत में थी। छत का हिस्सा गिरने के बाद छात्रों ने स्कूल की सुरक्षा और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर विरोध शुरू किया। आशुतोष रांका भी छात्रों के समर्थन में स्कूल परिसर पहुंचे और धरने पर बैठ गए। उन्होंने प्रशासन से जर्जर कमरों की मरम्मत के साथ-साथ स्कूल तक सड़क की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की। पुलिस से हुई तीखी बहस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और आशुतोष रांका के बीच तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में रांका पुलिस अधिकारी से सवाल-जवाब करते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रांका ने पुलिसकर्मी से कहा कि उनके साथ राजनीतिक तरीके से पेश न आया जाए और पहले स्कूल परिसर में मौजूद लोगों को हटाया जाए। रांका ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय लोग प्रदर्शन के दौरान माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने पुलिस से छात्रों और प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक विस्तृत जवाब उपलब्ध नहीं है। पांच घंटे चला धरना रिपोर्टों के मुताबिक, करीब पांच घंटे तक चले धरने के बाद प्रशासन की ओर से छात्रों की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। रांका ने दावा किया कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगें स्वीकार कर ली हैं। बताया गया कि मौजूदा जर्जर क्लासरूम को एक सप्ताह के भीतर दुरुस्त करने, नए कमरों का निर्माण कराने और स्कूल तक आने-जाने के रास्ते को सुधारने का आश्वासन दिया गया है। सड़क और नए कमरों की भी मांग स्कूल की इमारत के अलावा छात्रों की एक बड़ी समस्या स्कूल तक पहुंचने का रास्ता भी है। रिपोर्टों के अनुसार, बारिश के दौरान बच्चों को रास्ते की खराब स्थिति के कारण काफी परेशानी होती है। आंदोलन के दौरान स्कूल में सात नए कमरों के निर्माण और छात्रों के लिए खेल मैदान उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल पुलिस और आशुतोष रांका के बीच हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। वीडियो के बाद स्कूल की जर्जर स्थिति, छात्रों की सुरक्षा और सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। निष्कर्ष जोधावास के सरकारी स्कूल की छत का हिस्सा गिरने के बाद शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है। आशुतोष रांका और पुलिस के बीच तीखी बहस का वीडियो वायरल होने के साथ स्कूल की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। प्रशासन की ओर से मरम्मत और निर्माण कार्य को लेकर दिए गए आश्वासन पर अब नजर रहेगी। Source: नवभारत टाइम्स, पत्रिका, लाइव हिंदुस्तान जय राष्ट्र न्यूज़

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मंत्री कार्यालय परिसर में BJP का झंडा? वीडियो सामने आने के बाद उठे सवाल

नई दिल्ली: एक वीडियो सामने आने के बाद मंत्री कार्यालय के परिसर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का झंडा दिखाई देने को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं। वीडियो को लेकर यह चर्चा तेज है कि क्या किसी सरकारी मंत्री कार्यालय के परिसर में राजनीतिक दल का झंडा लगाया जाना उचित है। हालांकि, मुझे उपलब्ध विश्वसनीय ताजा रिपोर्टों में इस खास वीडियो, उसके स्थान और संबंधित मंत्री की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इसे फिलहाल एक वायरल दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है? सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि एक मंत्री कार्यालय के परिसर में BJP का झंडा लगा हुआ दिखाई दे रहा है। इसी दृश्य को लेकर लोगों ने सरकारी कार्यालय और राजनीतिक पार्टी के प्रतीक के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि के बिना यह कहना मुश्किल है कि फुटेज किस कार्यालय, किस तारीख और किस परिस्थिति का है। सरकारी कार्यालय में राजनीतिक झंडे को लेकर क्यों उठे सवाल? सरकारी कार्यालय संवैधानिक और प्रशासनिक कामकाज के लिए होते हैं। ऐसे स्थानों पर किसी राजनीतिक दल का प्रतीक या झंडा दिखाई देने पर स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठ सकता है कि क्या सरकारी परिसर और राजनीतिक गतिविधियों के बीच उचित दूरी बनाए रखी गई है। हालांकि, किसी वीडियो के आधार पर नियमों के उल्लंघन का निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित विभाग या प्रशासन का पक्ष जानना जरूरी है। सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस तेज वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे सरकारी कार्यालय के राजनीतिकरण का मुद्दा बता रहे हैं, जबकि अन्य लोग वीडियो के संदर्भ और वास्तविक स्थान की पुष्टि की मांग कर रहे हैं। इस तरह के मामलों में वीडियो की तारीख, स्थान और मूल स्रोत की पुष्टि बेहद महत्वपूर्ण होती है। आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार फिलहाल इस मामले में संबंधित मंत्री कार्यालय या प्रशासन की ओर से ऐसा कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है, जिससे यह पुष्टि हो सके कि वीडियो वास्तव में किस कार्यालय का है और वहां BJP का झंडा किस कारण मौजूद था। इसलिए इस खबर को प्रकाशित करते समय “वीडियो में दावा” और “स्वतंत्र रूप से पुष्टि” के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। निष्कर्ष मंत्री कार्यालय के परिसर में BJP का झंडा दिखाई देने वाले कथित वीडियो ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। हालांकि, वीडियो की जगह, समय और संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है। आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी। Source: सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो; स्वतंत्र पुष्टि/आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रधानमंत्री मोदी के तिरंगा बैज को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा, रंगों के क्रम पर उठे सवाल

नई दिल्ली: 15 अगस्त 2026 को लाल किले से स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिधान पर लगे तिरंगे रंग के पॉकेट स्क्वायर/बैज को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसके रंगों के क्रम को लेकर सवाल उठाए और इसे भारतीय तिरंगे से अलग बताया। क्या है पूरा मामला? स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पारंपरिक पोशाक के साथ एक रंगीन पॉकेट स्क्वायर पहना था। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने दावा किया कि इसमें हरा, सफेद और केसरिया रंग जिस क्रम में दिखाई दे रहे थे, वह भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के सामान्य क्रम से अलग था। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे आयरलैंड के झंडे से जोड़ते हुए टिप्पणियां कीं। कांग्रेस की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री पर तंज कसा गया। सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस प्रधानमंत्री की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोगों के बीच इस पॉकेट स्क्वायर को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने इसे महज फैशन और डिजाइन का हिस्सा बताया, जबकि कुछ ने राष्ट्रीय ध्वज के रंगों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए। यह चर्चा ऐसे समय हुई है जब देशभर में 80वें स्वतंत्रता दिवस को लेकर देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम और सोशल मीडिया अभियान जोर पकड़ रहे हैं। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान भी चर्चा में स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को उत्सव के रूप में मनाने की अपील की थी। उन्होंने देशवासियों से अपने घरों पर तिरंगा फहराने और स्वतंत्रता दिवस को गर्व के साथ मनाने का आह्वान किया था। ऐसे में प्रधानमंत्री के अपने परिधान पर दिखाई दिए तिरंगे रंगों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा ने राजनीतिक बहस का रूप ले लिया। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं कांग्रेस ने पॉकेट स्क्वायर के रंगों के क्रम को लेकर प्रधानमंत्री पर कटाक्ष किया और इसे आयरलैंड के झंडे से जोड़ते हुए सवाल उठाया। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस विवाद को अनावश्यक बताते हुए इसे केवल कपड़ों के डिजाइन से जुड़ा मामला बताया। निष्कर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर पहने गए तिरंगे रंग के पॉकेट स्क्वायर/बैज को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। जहां कुछ लोगों ने इसके रंगों के क्रम पर सवाल उठाए, वहीं अन्य लोगों ने इसे राजनीतिक विवाद बनाने के बजाय सामान्य परिधान का हिस्सा बताया। Source: Times of India, सोशल मीडिया पोस्ट जय राष्ट्र न्यूज़

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ध्वजारोहण के लिए जाते समय पुलिस ने रोका? देवेंद्रनाथ महतो ने लगाया धक्कामुक्की का आरोप

रांची: झारखंड में छात्र नेता और JLKM नेता देवेंद्रनाथ महतो को लेकर पुलिस कार्रवाई का मामला एक बार फिर चर्चा में है। महतो ने आरोप लगाया है कि उन्हें ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जाते समय पुलिस ने रोक दिया और इस दौरान उनके साथ धक्कामुक्की की गई। हालांकि, इस दावे की 14 अगस्त 2026 की स्वतंत्र और विश्वसनीय रिपोर्ट से पुष्टि नहीं हो सकी है। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में देवेंद्रनाथ महतो का नाम झारखंड के छात्र आंदोलन और JPSC/JSSC से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में सामने आया है। छात्र आंदोलनों से जुड़े रहे हैं देवेंद्रनाथ महतो देवेंद्रनाथ महतो झारखंड में छात्र और युवा आंदोलनों से जुड़े प्रमुख चेहरों में रहे हैं। हाल के दिनों में उन्होंने JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील करते हुए कहा था कि छात्रों के आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से चलने दिया जाए और ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिससे छात्रों का नुकसान हो। पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले भी विवाद देवेंद्रनाथ महतो का पुलिस के साथ टकराव का मामला नया नहीं है। दिसंबर 2024 में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बल प्रयोग किया था और महतो समेत कई लोगों को हिरासत में लिया गया था। उस घटना में महतो के घायल होने के आरोप भी सामने आए थे। बाद में छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सौंपने का दावा किया था। ताजा दावे की पुष्टि जरूरी ध्वजारोहण के लिए जाते समय पुलिस द्वारा रोके जाने और धक्कामुक्की किए जाने का दावा सोशल मीडिया पर चर्चा में हो सकता है, लेकिन इसे तथ्य के रूप में प्रकाशित करने से पहले पुलिस या प्रशासन का आधिकारिक पक्ष लेना जरूरी होगा। यदि घटना का वीडियो सामने आता है, तो उसमें स्थान, समय और घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि भी महत्वपूर्ण होगी। निष्कर्ष देवेंद्रनाथ महतो झारखंड के छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं और उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं। लेकिन ध्वजारोहण कार्यक्रम के लिए जाते समय रोके जाने और धक्कामुक्की की ताजा घटना की अभी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस दावे को फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। Source: उपलब्ध ताजा मीडिया रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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