Priyank Kharge Vows RSS Ban if Govt

केंद्र की सत्ता में आने के बाद RSS को बैन किया जाएगा: प्रियांक खड़गे

कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) ने हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर जो टिप्पणी की है, उसने देश की सियासत में एक बार फिर तीखा मोड़ ला दिया है। प्रियांक ने RSS को राष्ट्रविरोधी मशीनरी बताते हुए कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे इस संगठन पर प्रतिबंध लगाएंगे और इसे खत्म करने के लिए हर तरीका अपनाएंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेजी से बढ़ रहा है और चुनावी माहौल में तमाम पार्टियां अपनी विचारधारा को मजबूती से जनता के सामने रखने की कोशिश कर रही हैं। प्रियांक खड़गे का बयान: राजनैतिक रणनीति या वैचारिक विरोध? प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) ने साफ तौर पर कहा कि RSS पर कभी कोई गंभीर जांच नहीं हुई है और अगर उन्हें सत्ता में आने का अवसर मिला, तो वे इसकी जांच कराएंगे और कार्रवाई भी करेंगे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि यह संगठन भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ काम करता है और सांप्रदायिकता फैलाने का काम करता है। हालांकि कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी तक इस बयान को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन प्रियांक का यह रुख कांग्रेस की लंबे समय से चली आ रही आरएसएस-विरोधी विचारधारा से मेल खाता है। विशेष रूप से इंदिरा गांधी के दौर में, जब RSS पर आपातकाल के दौरान प्रतिबंध लगाया गया था, तब कांग्रेस और संघ के रिश्ते और भी कटु हो गए थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलराम हेडगेवार ने की थी। दशहरे के दिन शुरू हुआ यह संगठन आज भारत के सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठनों में शामिल है। इसका प्रमुख उद्देश्य हिंदू समाज में एकता और अनुशासन लाना रहा है। वर्तमान में मोहन भागवत इसके सरसंघचालक हैं, जो 2009 से इस पद पर कार्यरत हैं। संघ की कार्यप्रणाली पूरी तरह से स्वयंसेवकों पर आधारित है। इसके स्वयंसेवक शिक्षा, सेवा, समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रहते हैं। हालांकि, आलोचकों का आरोप है कि आरएसएस एक सांप्रदायिक एजेंडा चलाता है और इसका अंतिम लक्ष्य “हिंदू राष्ट्र” की स्थापना है, जो भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान के खिलाफ माना जाता है। पहले भी संघ पर लग चुका है प्रतिबंध RSS पर भारत सरकार ने अब तक तीन बार प्रतिबंध लगाया है: हालांकि हर बार संघ पर लगे प्रतिबंध को बाद में हटा लिया गया और संघ ने अपने संगठनात्मक ढांचे को और अधिक मजबूत कर लिया। कौन हैं प्रियांक खड़गे? प्रियांक खड़गे  (Priyank Kharge) का राजनीतिक करियर कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से शुरू हुआ। उन्होंने 1998 में राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे प्रदेश युवा कांग्रेस से होते हुए विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) तक पहुंचे। वे कर्नाटक के कलबुर्गी जिले की चित्तपुर सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में सिद्धारमैया सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके बयानों को न केवल एक युवा नेता की मुखरता के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि कांग्रेस (Congress) की उस पुरानी लाइन के तौर पर भी देखा जा रहा है जो संघ के विचारधारा से टकराव रखती है। इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात  राजनीतिक नतीजे  प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) का बयान निश्चित रूप से कांग्रेस और भाजपा (Congress and BJP) समर्थकों के बीच एक नई बहस को जन्म देगा। जहां एक पक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र की रक्षा के रूप में देखेगा, वहीं दूसरा पक्ष इसे ‘हिंदू विरोधी’ एजेंडा बताएगा। खासकर चुनावी मौसम में इस तरह के बयान मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं। आरएसएस (RSS) का समर्थक वर्ग काफी बड़ा है और यह संगठन भाजपा (BJP) के लिए वैचारिक रीढ़ की हड्डी के समान है। ऐसे में किसी भी नेता द्वारा संघ को खत्म करने या उस पर प्रतिबंध लगाने की बात करना गंभीर राजनीतिक नतीजे ला सकता है। प्रियांक खड़गे  (Priyank Kharge) का RSS को लेकर बयान सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि भारत की राजनीति में विचारधारा की उस जंग का हिस्सा है जो दशकों से चली आ रही है। एक ओर जहां RSS खुद को राष्ट्र सेवा में समर्पित मानता है, वहीं विरोधी उसे सांप्रदायिक और विभाजनकारी ताकत बताते हैं। इस बहस का अंत फिलहाल कहीं नजर नहीं आता, लेकिन इससे देश की लोकतांत्रिक चर्चा और विचार विमर्श और भी गंभीर रूप लेता जा रहा है। Latest News in Hindi Today Hindi news  Priyank Kharge #PriyankKharge #RSSBan #CongressStatement #PoliticalNews #BreakingNews #IndianPolitics #BJPvsCongress

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Abu Azmi apologizes to Hindus

Abu Azmi Apologizes to Hindus After Controversial Remark: इस वजह से विधायक अबू आजमी को हिंदुओं से मांगनी पड़ी माफ़ी

अक्सर अपने बेतुके बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले महाराष्ट्र के समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और विधायक अबू आजमी (Abu Azmi) एक बार फिर फंसते नजर आ रहे हैं। खुद को फंसता देख उन्होंने वारकरी संप्रदाय की भावनाएं आहत होने पर माफी मांगी है। दरअसल, उन्होंने महाराष्ट्र की प्रसिद्ध वारी यात्रा को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया था। पंढरपुर में संत ज्ञानेश्वर और संत तुकाराम की पालखी यात्रा के दौरान उन्होंने कहा, इस यात्रा के चलते सड़कों पर जाम लग जाता है, जिससे आम लोगों को परेशानी होती (Abu Azmi Apologizes to Hindus After Controversial Remark) है। वो यहीं नहीं रुके, सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि हिंदुओं के त्योहारों पर मुसलमान कोई आपत्ति नहीं जताते, लेकिन जब मुसलमान नमाज अदा करते हैं, तब शिकायतें की जाती हैं। मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा, मस्जिद के बाहर नमाज नहीं पढ़ी जा सकती, इसका विरोध किया जाता है। लेकिन, हम हमेशा हिंदू भाइयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं। उन्होंने आगे कहा, आज तक किसी भी मुसलमान ने यह शिकायत नहीं की कि हिंदू त्योहारों की वजह से रास्ता बंद होता है, लेकिन जब मस्जिद में नमाज पढ़ी जाती है, तो यूपी के मुख्यमंत्री कहते हैं कि अगर बाहर नमाज पढ़ी गई तो पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे।  वारी की वजह से ट्रैफिक जाम होता है, लेकिन हमने कभी इसका विरोध नहीं (Abu Azmi Apologizes to Hindus After Controversial Remark) किया हालाँकि अपने बयान में अबू आजमी (Abu Azmi) ने यह भी आरोप लगाया कि मुसलमानों को सार्वजनिक जमीन या आयोजन के लिए आसानी से जगह नहीं मिलती। आज जब मैं सोलापुर आ रहा था, तब मुझे बताया गया कि पालखी आने वाली है, जल्दी निकलो वरना रास्ता जाम हो जाएगा। वारी की वजह से ट्रैफिक जाम होता है, लेकिन हमने कभी इसका विरोध नहीं किया। मुसलमानों के लिए जानबूझकर जमीन नहीं दी जाती।  फिर क्या था, उनके बयान के वायरल होते ही महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल मच गया। बीजेपी समेत अन्य दलों के नेताओं ने अबू आजमी के बयान की (Abu Azmi Apologizes to Hindus After Controversial Remark) कड़ी आलोचना करते हुए इसे सांप्रदायिक मुद्दा बना दिया। खुद को चौतरफा घिरता देख उन्होंने मांफी मांगी। और सफाई देते हुए लिखा, सोलापुर में मेरे द्वारा की गई एक टिप्पणी को लेकर जो गलतफहमियां फैली हैं। मैं उन्हें स्पष्ट करना चाहता हूं। मेरे वक्तव्य को तोड़-मरोड़ कर और दुर्भावनापूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। अगर इससे वारकरी सम्प्रदाय की धार्मिक भावना आहत हुई हो, तो मैं अपने शब्द पूरी तरह से वापस लेता हूं और क्षमा चाहता हूं। मेरी मंशा कभी भी किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी।  इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? यह किसी प्रकार की तुलना नहीं थी और मेरी नीयत और मेरी मांग किसी भी रूप में अनुचित नहीं थी- अबू आजमी  अबू आजमी (Abu Azmi) ने सफाई देते हुए कहा, मैं एक समर्पित समाजवादी हूं और हमेशा से हर धर्म, संस्कृति, सूफी संतों तथा उनकी परंपराओं का आदर करता आया हूं। मैं वारी परंपरा का पालन कर रहे सभी वारकरी भाइयों को हार्दिक शुभकामनाएं (Abu Azmi Apologizes to Hindus After Controversial Remark) देता हूं और उनके प्रति अपनी सम्मानभावना प्रकट करता हूं। यह परंपरा महाराष्ट्र की सर्वधर्मीय, समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का गौरवपूर्ण हिस्सा है, जिसका मैं व्यक्तिगत रूप से सम्मान करता हूं। सपा विधायक ने कहा, मेरे द्वारा वारी पालखी का उल्लेख केवल मुस्लिम समाज के साथ हो रहे भेदभाव और उनके अधिकारों के संदर्भ में किया गया था। यह किसी प्रकार की तुलना नहीं थी और मेरी नीयत और मेरी मांग किसी भी रूप में अनुचित नहीं थी। उन्होंने कहा, मेरी केवल इतनी मंशा थी कि सरकार का ध्यान इस बात की ओर आकृष्ट कर सकूं कि उसके दोहरे मापदंड अल्पसंख्यक समुदाय के मन में यह भावना न उत्पन्न करें कि उनके लिए इस देश में अलग कानून हैं, जबकि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कहते हैं सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास। आखिर में अपनी बात रखते हुए अबू आजमी ने कहा, हम उपेक्षित समाज के हक़, सम्मान और बराबरी की लड़ाई मजबूती से जारी रखेंगे, लेकिन कभी भी देश की एकता पर आंच नहीं आने देंगे।  Latest News in Hindi Today Hindi news Abu Azmi Apologizes to Hindus After Controversial Remark #abuazmi #hindusapology #politicalnews #controversialremark #indianpolitics #breakingnews #latestupdate

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Elon Musk Regrets Posts on Donald Trump

Elon Musk Regrets His Past Posts on Donald Trump: इस वजह से एलन मस्क को अब ट्रंप पर किए अपने पोस्ट पर हो रहा पछतावा?

कई दिनों की जारी कलह के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अरबपति व्यवसायी एलन मस्क के बीच तल्ख हुए रिश्ते अब एक बार पुनः पटरी पर लौटते हुए नजर आ रहे हैं। एलन मस्क ने खुद सामने से संबंधों को सुधारने की पहल की है। मजे की बात यह कि ट्रंप से बहस के बाद अब मस्क को बड़ा पछतावा हो रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने कहे गए शब्दों पर खेद जताते हुए कहा, ट्रंप पर लिखते समय उन्होंने सीमाएं लांघ दीं, जिसका उन्हें दुख (Elon Musk Regrets His Past Posts on Donald Trump) है। एलन मस्क ने एक ट्वीट करके कहा, उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति और अपने पार्टनर डोनाल्ड ट्रंप पर पिछले हफ्ते किए अपने कुछ पोस्ट पर पछतावा हो रहा है। खेद जताते हुए उन्होंने कहा कि ट्रंप पर उनके कुछ पोस्ट हद से ज्यादा आगे बढ़ गए। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि मुझे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर पिछले हफ्ते किए गए कुछ पोस्ट के लिए खेद है। वे हद से आगे चले गए। दरअसल, बुधवार को एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मुझे पिछले सप्ताह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में की गई अपनी कुछ पोस्ट पर खेद है। मैंने सीमा लांघ दी।” मस्क द्वारा ट्रंप प्रशासन के प्रस्तावित खर्च बिल की निंदा करने से शुरू हुआ (Elon Musk Regrets His Past Posts on Donald Trump) था बता दें कि, हाल के दिनों में एलन मस्क और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच रिश्ते बेहद खराब हो गए थे। यह मस्क द्वारा ट्रंप प्रशासन के प्रस्तावित खर्च बिल की निंदा करने से शुरू हुआ Elon Musk Regrets His Past Posts on Donald Trump) था। यह बिल ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान उनके घरेलू एजेंडे के केंद्र बिंदू के रूप में देखा जाने वाला एक विशाल कानून है। मस्क ने इस बिल को बेकार करार दिया और इसका समर्थन करने वाले रिपब्लिकन सांसदों के खिलाफ राजनीतिक बदला लेने का आग्रह तक किया था। इतना कुछ होने पर भला ट्रंप इसपर चुप कैसे रहते। इस कड़ी में शनिवार को एनबीसी न्यूज से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप मस्क को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वो मौजूदा रिपब्लिकन सांसदों के खिलाफ प्राथमिक चुनौती देने वालों को फंडिंग देते हैं तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।  इसे भी पढ़ें:- अमेरिका के लॉस एंजिलिस में हिंसा और लूटपाट के बीच लगा कर्फ्यू , मेयर ने की ट्रंप से ये अपील पोस्ट डिलीट करने के कदम को ट्रंप के साथ ही सुलह के संकेत के रूप में देखा जा रहा (Elon Musk Regrets His Past Posts on Donald Trump) था खैर, इससे पहले एलन मस्क ने दावा किया कि ट्रंप का नाम एपस्टीन फाइल्स में है। यहाँ तक मस्क ने यह भी कहा था कि ट्रंप का नाम होने के कारण ही प्रशासन एपस्टीन फाइल्स को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। वो बात और है कि इस ट्वीट को बाद में उन्होंने डिलीट कर दिया था। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने सीधी धमकी दी थी कि वह मस्क को दी गई सब्सिडी और सरकारी कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर देंगे। हालाँकि मस्क की ओर से पोस्ट डिलीट करने के कदम को ट्रंप के साथ संभावित सुलह के संकेत के रूप में देखा जा रहा (Elon Musk Regrets His Past Posts on Donald Trump) था। इससे पहले मस्क ने सरकारी दक्षता विभाग से इस्तीफा दे दिया था। गौरतलब हो कि जुलाई 2024 में पेंसिल्वेनिया में ट्रंप की हत्या का प्रयास किये जाने बाद दोनों की दोस्ती परवान चढ़ी थी। इस कांड के बाद मस्क ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को अपना पूर्ण समर्थन देने का ऐलान कर दिया था। ध्यान देने वाली बात यह कि इस घटना के कुछ ही मिनट बाद मस्क ने एक्स पर लिखा था, मैं ट्रंप का पूरा समर्थन करता हूं और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। इसके बाद मस्क और ट्रंप एक साथ चुनाव प्रचार अभियानों में नजर आए थे। Latest News in Hindi Today Hindi news Elon Musk Regrets His Past Posts on Donald Trump #elonmusk #donaldtrump #regret #politicalnews #socialmediacontroversy #breakingnews #muskstatement #usnews

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AIMIM's Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections

AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections: RJD-कांग्रेस को बिहार चुनाव से पहले AIMIM की धमकी, महागठबंधन में शामिल करें वरना…! 

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस (Congress) के महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। एआईएमआईएम (AIMIM) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने इसकी जानकारी (AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections)देते हुए कहा कि, ‘उनकी पार्टी बिहार चुनाव में वोटों का बिखराव रोकना चाहती है। इसीलिए उनकी पार्टी ने  आरजेडी (RJD) के दूसरी पंक्ति के नेताओं के माध्यम से नेता तेजस्वी यादव को गठबंधन का प्रस्ताव भेजा है। अब फैसला तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी को करना है।’ अख्तरुल ईमान ने मीडिया से इस बातचीत में चेतावनी देते हुए कहा, अगर महागठबंधन उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता, तो उनकी पार्टी थर्ड फ्रंट बनाने के लिए जल्द ही अन्य छोटे दलों से बातचीत करेगी। इस दौरान अख्तरुल ईमान ने आरजेडी (RJD) पर ‘पीठ में खंजर घोंपने’ का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि साल 2020 के विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम (AIMIM) राज्य की सीमांचल क्षेत्र में मौजूद अमौर, जोकीहाट, कोचाधामन, बैसी और बहादुरगंज सीट को जीता था। लेकिन चुनाव के दो साल बाद आरजेडी ने उनके 5 में से 4 विधायकों को तोड़ कर अपने पार्टी में मिला लिया। इस धोखबाजी को पार्टी भूली नहीं है।  2020 विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने किया था शानदार प्रदर्शन बता दें कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने (AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections) शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 सीटें जीत ली थी। एआईएमआईएम को यह सफलता सीमांचल के मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में मिली थी। इसके बाद से ही एआईएमआईएम को बिहार की सियासत में एक उभरती ताकत के तौर पर देखा गया। एआईएमआईएम ने सीधे तौर पर आरजेडी के परंपरागत मुस्लिम-यादव वोट बैंक में सेंध लगाई थी। इसलिए आरजेडी को सबसे ज्यादा परेशानी हुई और उसने एआईएमआईएम विधायकों को तोड़ने की मुहीम शुरू कर दी। आरजेडी ने दो साल बाद ही जून 2022 में एआईएमआईएम के 5 में से 4 विधायकों को तोड़कर अपने पार्टी में शामिल कर लिया।  इसे भी पढ़ें:- PMCH में दलित लड़की की मौत पर राहुल गांधी ने बिहार की डबल इंजन सरकार पर साधा निशाना, कही यह बात एआईएमआईएम के उभरने से आरजेडी और कांग्रेस को दीर्घकालिक तौर पर नुकसान होगा इस बार विधानसभा चुनाव में अगर एआईएमआईएम और आरजेडी अलग-अलग लड़ती हैं, तो इसका सीधा फायदा भाजपा को (AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections) होगा। इसलिए एआईएमआईएम ने चुनाव से पहले ही महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव भेज दिया। हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव पर आरजेडी और कांग्रेस (Congress) की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। बताया जा रहा है कि विपक्षी महागठबंधन के अंदर सीट बंटवारे को लेकर पहले सही तनाव है, ऐसे में अगर एआईएमआईएम को भी गठबंधन में शामिल कर लिया गया, तो सीट बंटवारे का मुद्दा और भी जटिल हो जाएगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एआईएमआईएम को महागठबंधन में शामिल किया जाता है तो इससे फौरी तौर पर मुस्लिम वोटों को एकजुट करने में फायदा मिल सकता है, लेकिन एआईएमआईएम के उभरने से आरजेडी और कांग्रेस को दीर्घकालिक तौर पर नुकसान होगा। दरअसल, आरजेडी और कांग्रेस (Congress) के कोर वोट बैंक मुस्लिम मतदाता है और एआईएमआईएम का वोट बैंक भी यही है। ऐसे में एआईएमआईएम राज्य में जितनी मजबूत होगी, उतनी ही आरजेडी और कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाएगी। ऐसे में महागठबंधन बिहार के अंदर अभी एआईएमआईएम से दूरी बनाकर ही रखना चाहता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections BiharElections2025 #AIMIM #RJD #Congress #Mahagathbandhan #Owaisi #PoliticalNews #IndiaPolitics

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BJP slams Congress

BJP slams Congress over delegation: झूठ बोल रही है कांग्रेस, नहीं माँगा था कोई नाम, इसलिए युसूफ पठान कर गए प्रतिनिधिमंडल से किनारा

आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलेरेंस की नीति, पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत के पक्ष को दुनिया के अन्य देशों के समक्ष रखने हेतु केंद्र सरकार द्वारा सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का एलान किया गया है। सरकार सात प्रतिनिधिमंडलों को अलग-अलग देशों के दौरे पर भेजेगी, जिसके हर प्रतिनिधिमंडल में छह से सात सांसद होंगे। बता दें कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को दुनिया के समक्ष बेनकाब करने के लिए अलग-अलग देशों में जा रहे सांसदों के सात प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस (Congress) के कुल चार सांसद शामिल (BJP slams Congress over delegation) हैं। महत्वपूर्ण बात यह कि सांसद शशि थरूर इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। इस बीच कांग्रेस इस बात को लेकर उखड़ी हुई है कि सरकार ने उनकी पार्टी के सदस्यों का चुनाव कैसे किया? दरअसल, केंद्र सरकार को घेरते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सरकार ने पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर बात करने हेतु विदेश जाने वाले सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडलों के लिए उनसे चार सांसदों के नाम मांगे थे, लेकिन बाद में सरकार ने उनमें से तीन नाम को रिजेक्ट कर दिया।  कांग्रेस के आरोपों को ख़ारिज करते हुए बीजेपी ने बताया निराधार (BJP slams Congress over delegation) हालाँकि केंद्र की बीजेपी (BJP) सरकार ने कांग्रेस के आरोपों को ख़ारिज करते हुए निराधार करार (BJP slams Congress over delegation) दिया। इस पूरे मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि “लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को प्रतिनिधिमंडलों के बारे में सिर्फ जानकारी दी गई थी। यह सिर्फ एक शिष्टाचार था।” उन्होंने आगे कहा कि “कांग्रेस से सिर्फ जानकारी के लिए नाम मांगे थे। थरूर को उनकी काबिलियत के आधार पर चुना गया।” दरअसल, द टाइम्स ऑफ़ इंडिया से हुई बातचीत में रिजिजू ने कहा कि “पार्टियों से उनके उम्मीदवार का नाम पूछना पहले कभी नहीं हुआ।” उन्होंने कहा कि “हमने उन्हें सिर्फ शिष्टाचार के तौर पर बताया। हमने कांग्रेस की अंदरूनी बातों पर ध्यान नहीं दिया।” कांग्रेस के आरोपों पर रिजिजू ने कहा कि “सरकार ने यह देखा कि प्रतिनिधिमंडल के काम के लिए कौन सबसे सही रहेगा।” उन्होंने आगे कहा कि “हमें हैरानी है कि शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे सदस्यों के नाम पर कांग्रेस विरोध कर रही है। ये दोनों विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर हमेशा अपनी बात रखते हैं। अभी एक साल भी नहीं हुआ है जब कांग्रेस ने थरूर को विदेश मामलों की स्थायी समिति का अध्यक्ष बनाने की सिफारिश की थी।”  इसे भी पढ़ें:- कांग्रेस विधायक ने ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाते हुए कही यह बात थरूर और मनीष तिवारी को इसलिए चुना गया ताकि पार्टी नेतृत्व को नीचा दिखाया (BJP slams Congress over delegation) जा सके तो वहीं इस पर कांग्रेस का कहना है कि “थरूर और मनीष तिवारी को इसलिए चुना गया ताकि पार्टी नेतृत्व को नीचा दिखाया जा सके।” इस पर रिजिजू ने कहा, “यह गलत आरोप है। हमने किसी पार्टी की अंदरूनी बातों और उससे होने वाली जलन और असुरक्षा को ध्यान में नहीं (BJP slams Congress over delegation) रखा। हमने सलमान खुर्शीद और पंजाब से उनके सांसद अमर सिंह को भी चुना है। इस बारे में आपका क्या कहना है?” गौरतलब हो कि कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने सरकार की घोर आलोचना करते हुए कहा था कि “सरकार ने राहुल गांधी की सिफारिशों को दरकिनार कर थरूर और मनीष तिवारी के नामों को चुना।” सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि “यह मोदी सरकार की पूरी तरह से बेईमानी दिखाता है। यह दिखाता है कि वह राष्ट्रीय मुद्दों पर हमेशा घटिया राजनीति करते हैं।” दरअसल, कांग्रेस का मानना है कि थरूर को इसलिए नहीं चुना गया क्योंकि पहले संयुक्त राष्ट्र में थे और विदेश राज्य मंत्री भी रह चुके हैं, बल्कि उन्हें इसलिए चुना गया क्योंकि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर पार्टी से अलग राय रखी थी। दरअसल, पिछले सप्ताह उन्होंने कहा था कि “उन्हें ऑपरेशन पर गर्व है।” गौर करने वाली बात यह कि उन्होंने यह बात तब कही थी जब कांग्रेस ने यह आरोप लगाने के फ़िराक में थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ युद्धविराम कराया था।  पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान प्रतिनिधिमंडल में नहीं होंगे शामिल  कांग्रेस पार्टी से अलग-थलग राय रखने के सवाल पर थरूर ने कहा कि “वह एक गर्वित भारतीय के तौर पर बोल रहे हैं।” बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने आनंद शर्मा, राजा वारिंग, गौरव गोगोई और सैयद नसीर हुसैन के नामों की लिस्ट से थरूर का नाम हटा दिया (BJP slams Congress over delegation) था। सरकार ने सिर्फ शर्मा को चुना, जो पहले वाणिज्य मंत्री थे। खैर, इस बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने केंद्र सरकार के आतंकवाद विरोधी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने से इनकार करते हुए कहा है कि “पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान प्रतिनिधिमंडल में नहीं शामिल होंगे।” जानकारी के मुताबिक सांसद यूसुफ पठान का नाम सूची में शामिल था। इस मामले पर टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि “टीएमसी पहले और अभी भी केंद्र सरकार के साथ खड़ी हैं। जहाँ देश की बात होती हैं वहां राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसे ऐसे नहीं देखना चाहिए कि हमने डेलीगेशन में जाने से मना किया हैं। लेकिन यह साफ कर देना चाहते हैं कि हमारे पार्टी से कौन जाएगा, ये हम तय करेंगे, न कि बीजेपी सरकार।” बता दें कि सरकार ने टीएमसी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय को सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने का निमंत्रण दिया था, लेकिन टीएमसी सांसद ने इसमें शामिल होने से साफ़ इनकार कर दिया था। Latest News in Hindi Today Hindi news BJP slams Congress over delegation #BJPCongressClash #YusufPathan #PoliticalNews #IndianPolitics #CongressControversy #BJPNews #DelegationDispute #BreakingNews #BJPvsCongress #PathanExit

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