केंद्र की सत्ता में आने के बाद RSS को बैन किया जाएगा: प्रियांक खड़गे
कर्नाटक के कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) ने हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर जो टिप्पणी की है, उसने देश की सियासत में एक बार फिर तीखा मोड़ ला दिया है। प्रियांक ने RSS को राष्ट्रविरोधी मशीनरी बताते हुए कहा कि अगर उन्हें मौका मिला तो वे इस संगठन पर प्रतिबंध लगाएंगे और इसे खत्म करने के लिए हर तरीका अपनाएंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेजी से बढ़ रहा है और चुनावी माहौल में तमाम पार्टियां अपनी विचारधारा को मजबूती से जनता के सामने रखने की कोशिश कर रही हैं। प्रियांक खड़गे का बयान: राजनैतिक रणनीति या वैचारिक विरोध? प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) ने साफ तौर पर कहा कि RSS पर कभी कोई गंभीर जांच नहीं हुई है और अगर उन्हें सत्ता में आने का अवसर मिला, तो वे इसकी जांच कराएंगे और कार्रवाई भी करेंगे। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि यह संगठन भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के खिलाफ काम करता है और सांप्रदायिकता फैलाने का काम करता है। हालांकि कांग्रेस पार्टी की ओर से अभी तक इस बयान को लेकर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन प्रियांक का यह रुख कांग्रेस की लंबे समय से चली आ रही आरएसएस-विरोधी विचारधारा से मेल खाता है। विशेष रूप से इंदिरा गांधी के दौर में, जब RSS पर आपातकाल के दौरान प्रतिबंध लगाया गया था, तब कांग्रेस और संघ के रिश्ते और भी कटु हो गए थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 27 सितंबर 1925 को नागपुर में डॉ. केशव बलराम हेडगेवार ने की थी। दशहरे के दिन शुरू हुआ यह संगठन आज भारत के सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठनों में शामिल है। इसका प्रमुख उद्देश्य हिंदू समाज में एकता और अनुशासन लाना रहा है। वर्तमान में मोहन भागवत इसके सरसंघचालक हैं, जो 2009 से इस पद पर कार्यरत हैं। संघ की कार्यप्रणाली पूरी तरह से स्वयंसेवकों पर आधारित है। इसके स्वयंसेवक शिक्षा, सेवा, समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रहते हैं। हालांकि, आलोचकों का आरोप है कि आरएसएस एक सांप्रदायिक एजेंडा चलाता है और इसका अंतिम लक्ष्य “हिंदू राष्ट्र” की स्थापना है, जो भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान के खिलाफ माना जाता है। पहले भी संघ पर लग चुका है प्रतिबंध RSS पर भारत सरकार ने अब तक तीन बार प्रतिबंध लगाया है: हालांकि हर बार संघ पर लगे प्रतिबंध को बाद में हटा लिया गया और संघ ने अपने संगठनात्मक ढांचे को और अधिक मजबूत कर लिया। कौन हैं प्रियांक खड़गे? प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) का राजनीतिक करियर कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से शुरू हुआ। उन्होंने 1998 में राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे प्रदेश युवा कांग्रेस से होते हुए विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) तक पहुंचे। वे कर्नाटक के कलबुर्गी जिले की चित्तपुर सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में सिद्धारमैया सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उनके बयानों को न केवल एक युवा नेता की मुखरता के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि कांग्रेस (Congress) की उस पुरानी लाइन के तौर पर भी देखा जा रहा है जो संघ के विचारधारा से टकराव रखती है। इसे भी पढ़ें:- विजय दिवस के पहले नारायण राणे ने राज को याद दिलाया उद्धव का किया अपमान, कही यह बात राजनीतिक नतीजे प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) का बयान निश्चित रूप से कांग्रेस और भाजपा (Congress and BJP) समर्थकों के बीच एक नई बहस को जन्म देगा। जहां एक पक्ष इसे अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतंत्र की रक्षा के रूप में देखेगा, वहीं दूसरा पक्ष इसे ‘हिंदू विरोधी’ एजेंडा बताएगा। खासकर चुनावी मौसम में इस तरह के बयान मतदाताओं को प्रभावित कर सकते हैं। आरएसएस (RSS) का समर्थक वर्ग काफी बड़ा है और यह संगठन भाजपा (BJP) के लिए वैचारिक रीढ़ की हड्डी के समान है। ऐसे में किसी भी नेता द्वारा संघ को खत्म करने या उस पर प्रतिबंध लगाने की बात करना गंभीर राजनीतिक नतीजे ला सकता है। प्रियांक खड़गे (Priyank Kharge) का RSS को लेकर बयान सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि भारत की राजनीति में विचारधारा की उस जंग का हिस्सा है जो दशकों से चली आ रही है। एक ओर जहां RSS खुद को राष्ट्र सेवा में समर्पित मानता है, वहीं विरोधी उसे सांप्रदायिक और विभाजनकारी ताकत बताते हैं। इस बहस का अंत फिलहाल कहीं नजर नहीं आता, लेकिन इससे देश की लोकतांत्रिक चर्चा और विचार विमर्श और भी गंभीर रूप लेता जा रहा है। Latest News in Hindi Today Hindi news Priyank Kharge #PriyankKharge #RSSBan #CongressStatement #PoliticalNews #BreakingNews #IndianPolitics #BJPvsCongress

