क्या शिवलिंग पर चढ़ा प्रसाद खा सकते हैं? जानें शास्त्रों की मान्यताएं और नियम
हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। विशेषकर सावन माह, प्रदोष व्रत, सोमवार व महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल आदि अर्पित करते हैं। लेकिन एक सवाल अक्सर भक्तों के मन में आता है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद (विशेषकर दूध, जल, फल आदि) क्या खाया जा सकता है या नहीं? क्या यह शुभ होता है या फिर इससे बचना चाहिए? आइए जानें भगवान शिव को अर्पित की गई पूजा सामग्री का क्या होता है महत्व? जानिए अभिषेक में चढ़े दूध, जल, भांग और बेलपत्र को खाने से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और उनके पीछे का तात्त्विक कारण। शिवलिंग की पूजा और उसकी विशेषता शिवलिंग, भगवान शिव का निराकार रूप है और इसे सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और संहार का प्रतीक माना जाता है। शिवलिंग (Shivling) पर जलाभिषेक या दुग्धाभिषेक करना अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। इस प्रक्रिया को ‘अभिषेक’ कहा जाता है, जो कि भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का मुख्य साधन है। परंतु, प्रसाद के रूप में जो वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं, उनके उपयोग के कुछ विशिष्ट नियम भी शास्त्रों में दिए गए हैं। पौराणिक संदर्भ शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव के मुख से चण्डेश्वर नामक गण उत्पन्न हुए थे, जिन्हें भूत-प्रेतों का अधिपति माना जाता है। मान्यता है कि शिवलिंग पर अर्पित किया गया भोग या प्रसाद चण्डेश्वर को समर्पित होता है। इसी कारण यह विश्वास प्रचलित है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद भोजन के रूप में ग्रहण करना ऐसा है, जैसे भूत-प्रेतों का भोजन करना। इसलिए धार्मिक दृष्टिकोण से शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद को खाने की मनाही होती है। मूर्ति पर अर्पित प्रसाद को किया जा सकता है ग्रहण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चांदी, पीतल और तांबे जैसे धातुओं से बने शिवलिंग (Shivling) पर चढ़ाए गए प्रसाद को ग्रहण करना दोषरहित होता है। ऐसे प्रसाद को खाने से किसी प्रकार की बाधा नहीं होती। इसके अलावा, भगवान शिव (Lord Shiva) की प्रतिमा पर चढ़ाया गया प्रसाद भी शुभ और ग्रहणीय माना गया है। मान्यता है कि शिव मूर्ति पर अर्पित प्रसाद को श्रद्धापूर्वक सेवन करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रसाद से जुड़ी महत्वपूर्ण सावधानियां शिवलिंग (Shivling) पर कुछ विशेष सामग्री चढ़ाना निषेध माना गया है, जिनमें तुलसी के पत्ते और हल्दी प्रमुख हैं। ऐसे पदार्थों को भगवान शिव को अर्पित नहीं करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, शिवलिंग पर अर्पित किए जाने वाले भोग को पीतल या चांदी जैसे पवित्र धातुओं से बने पात्र में रखना चाहिए। ध्यान रखें कि भोग को कभी भी सीधे भूमि पर न रखें। जब पूजा विधिवत पूर्ण हो जाए, तब उस प्रसाद को श्रद्धापूर्वक शिवलिंग के निकट से हटाना चाहिए। इससे धार्मिक मर्यादा बनी रहती है और पूजा सफल मानी जाती है। इसे भी पढ़ें:- मुखाग्नि से पहले क्यों किया जाता है सुहागिन स्त्री का सोलह श्रृंगार? प्रसाद से जुड़े आवश्यक नियम शिवलिंग (Shivling) पर कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करना वर्जित माना गया है, जिनमें तुलसी के पत्ते और हल्दी प्रमुख हैं। शिवलिंग को प्रसाद अर्पित करते समय इसे पीतल या चांदी जैसे पवित्र धातु के पात्र में रखकर ही चढ़ाना चाहिए। कभी भी प्रसाद को सीधे भूमि पर नहीं रखना चाहिए। पूजा संपन्न होने के बाद प्रसाद को शिवलिंग के समीप से उठाकर विधिपूर्वक अलग स्थान पर रखना चाहिए। इससे पूजा में शुद्धता बनी रहती है और धार्मिक नियमों का पालन भी होता है। बेलपत्र और धतूरा क्यों नहीं खाते? बेलपत्र भगवान शिव (Lord Shiva) को अत्यंत प्रिय है, लेकिन यह औषधीय गुणों से युक्त होते हुए भी आमतौर पर सेवन के योग्य नहीं माना गया है। वहीं धतूरा विषैला होता है और स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक है। इसलिए ये पूजन सामग्री केवल पूजा तक ही सीमित रखी जाती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Shivling #shivling #prasad #hindubeliefs #shivpuja #spiritualrules #scripturalbeliefs #shivalinga #prasadrituals

