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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में महारैली, राहुल गांधी-प्रियंका गांधी समेत INDIA bloc के कई बड़े नेता शामिल

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में 12 अक्टूबर को दिल्ली में INDIA bloc के नेताओं, कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने बड़ा मार्च निकाला। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े आरोपों की न्यायिक समीक्षा की मांग उठाई। Supreme Court की ओर निकला बड़ा मार्च INDIA bloc के नेताओं और समर्थकों ने मध्य दिल्ली से Supreme Court की ओर मार्च शुरू किया। पुलिस ने कई रास्तों पर बैरिकेडिंग की और आवाजाही को नियंत्रित किया। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को अदालत तक पहुंचने से पहले रोक दिया गया। इसके बाद वकीलों की एक टीम ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर याचिका दाखिल करने की कार्रवाई की। राहुल गांधी ने संभाला मोर्चा कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रदर्शन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा। उन्होंने युवाओं से भी इन विषयों पर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। प्रियंका गांधी भी रहीं साथ प्रियंका गांधी वाड्रा भी मार्च में राहुल गांधी के साथ दिखाई दीं। इससे पहले भी वह मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों में शामिल रही हैं। हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की घटनाएं भी सामने आई थीं। अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल मार्च में INDIA bloc से जुड़े विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया की समीक्षा की मांग का समर्थन किया। प्रदर्शन में अलग-अलग दलों की भागीदारी ने इसे विपक्ष के साझा राजनीतिक अभियान के रूप में सामने रखा। नेहा बोरा और छात्र संगठनों की मौजूदगी प्रदर्शन में छात्र संगठनों और युवा कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा हाल के दिनों में CEC और SIR विरोधी आंदोलनों में सक्रिय रही हैं। दिल्ली में हुए विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान छात्र नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। मुख्य मांग—ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा विपक्ष और CJP से जुड़े समूहों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने इन आरोपों की जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित और डुप्लिकेट प्रविष्टियों सहित अपात्र नामों को हटाकर सूची को अधिक सटीक बनाना है। आयोग राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार करता रहा है। 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटने को लेकर विवाद Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का आंकड़ा सामने आया। इनमें मृत, दूसरी जगह स्थानांतरित और सत्यापन में नहीं मिल सके मतदाताओं से जुड़ी प्रविष्टियां शामिल बताई गईं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया का राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि पात्र मतदाताओं के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम दोबारा जुड़वाने का विकल्प उपलब्ध है। नाम हटाए जाने के आंकड़े और उनके प्रभाव को समझने के लिए संबंधित राज्य, समयावधि और आधिकारिक आंकड़ों का संदर्भ महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी ने सरकार पर लगाए आरोप राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान सरकार पर विरोध की आवाज दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार और बार-बार हिरासत में लिए जाने की घटनाओं पर भी सवाल उठाए। ये विपक्ष की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं; संबंधित पक्षों के जवाब और आधिकारिक विवरण को इनके साथ अलग से देखना जरूरी है। दिल्ली मेट्रो की सेवाओं पर पड़ा असर प्रदर्शन के मद्देनजर मध्य दिल्ली के कुछ मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास को लेकर प्रतिबंध लगाए जाने की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों में पटेल चौक, जनपथ, राजीव चौक, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय और बाराखंभा रोड सहित छह स्टेशनों का उल्लेख किया गया। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान भीड़ और आवाजाही को नियंत्रित करना बताया गया। Batman मास्क बने प्रदर्शन का प्रतीक मार्च के दौरान Batman मास्क भी चर्चा में रहे। रिपोर्टों के अनुसार, युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मास्क वितरित किए और राहुल गांधी ने भी Batman मास्क के साथ अपनी तस्वीर साझा की। प्रदर्शनकारियों ने इन मास्कों को अपने राजनीतिक संदेश और विरोध के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया। CJI से मुलाकात नहीं हो सकी विपक्षी नेता भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष संवैधानिक और कानूनी माध्यमों से अपनी लड़ाई जारी रखेगा। Supreme Court में याचिका दाखिल मार्च के दौरान चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर Supreme Court में याचिका दाखिल किए जाने की खबर सामने आई। विपक्ष न्यायिक हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहा है। हालांकि, याचिका दाखिल होना और अदालत द्वारा आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष देना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। कई शहरों में विरोध प्रदर्शनों से बढ़ी राजनीतिक हलचल दिल्ली के अलावा मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के विरोध में प्रदर्शनों की खबरें सामने आई हैं। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों और पुलिस की तैनाती को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। इस मुद्दे ने चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को बढ़ाया है। आरोपों पर अंतिम फैसला बाकी विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और SIR के प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता है और मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया पर जोर देता है। फिलहाल, किसी न्यायिक निष्कर्ष के अभाव में इन आरोपों को आरोपों के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। स्रोत: Reuters / The Indian Express / Loksatta / The Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी बने ‘ढाल’! प्रियंका गांधी और नेहा बोरा के साथ मार्च का वीडियो चर्चा में

नई दिल्ली: Chief Election Commissioner (CEC) ज्ञानेश कुमार और Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में 12 अक्टूबर को INDIA bloc के Supreme Court मार्च के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में राहुल गांधी को दोनों महिला नेताओं के आगे और आसपास चलते हुए ‘ढाल’ की तरह पेश किया गया। हालांकि, ‘ढाल’ इस दृश्य की मीडिया और सोशल मीडिया में की गई व्याख्या है, किसी आधिकारिक सुरक्षा आकलन का निष्कर्ष नहीं। Supreme Court की ओर निकला INDIA bloc का मार्च 12 अक्टूबर को INDIA bloc के कई नेताओं और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में Supreme Court की ओर मार्च किया। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के बीच आयोजित किया गया था। राहुल, प्रियंका और नेहा बोरा एक साथ नजर आए मार्च के दौरान सामने आए वीडियो में राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी दिखाई दीं। नेहा बोरा हालिया CEC और SIR विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं और विभिन्न विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। क्यों कहा जा रहा है राहुल गांधी को ‘ढाल’? वायरल वीडियो में राहुल गांधी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रियंका गांधी और नेहा बोरा के करीब चलते दिखाई देते हैं। इसी दृश्य को कुछ मीडिया रिपोर्टों ने इस अंदाज में पेश किया कि राहुल गांधी दोनों महिला नेताओं के लिए ‘शील्ड’ यानी ढाल की तरह आगे बढ़ रहे थे। हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि उस समय दोनों नेताओं को किसी विशेष शारीरिक खतरे का सामना करना पड़ रहा था। ‘ढाल’ शब्द इस दृश्य की प्रतीकात्मक व्याख्या के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो मार्च के दौरान सामने आए इस दृश्य को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया। राहुल गांधी के समर्थकों ने इसे एकजुटता और साथ खड़े रहने के संकेत के रूप में देखा, जबकि राजनीतिक विरोधियों ने प्रदर्शन को विपक्ष की राजनीतिक लामबंदी से जोड़कर पेश किया। Barricades पर रोका गया मार्च मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, INDIA bloc के मार्च को Supreme Court पहुंचने से पहले भगवान दास रोड के पास लगाए गए बैरिकेड्स पर रोक दिया गया। इसके बाद वकीलों की एक टीम Supreme Court पहुंची और चुनाव से संबंधित आरोपों को लेकर याचिका दाखिल किए जाने की खबर सामने आई। राहुल गांधी ने आंदोलन जारी रखने की बात कही प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने आंदोलन जारी रखने और पीछे नहीं हटने की बात कही। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक संस्थाओं और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने की अपील भी की। प्रियंका गांधी भी प्रदर्शनों में सक्रिय प्रियंका गांधी वाड्रा हाल के दिनों में CEC और SIR के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों में सक्रिय दिखाई दी हैं। 6 अक्टूबर को हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित विपक्षी सांसदों तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। नेहा बोरा आंदोलन का प्रमुख युवा चेहरा AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा हालिया विरोध प्रदर्शनों में लगातार सक्रिय रही हैं। 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें विजय चौक के पास हिरासत में लिए जाने की खबर आई थी। इससे पहले RK आश्रम इलाके में उनसे मिलती-जुलती दिखने वाली एक अन्य महिला को पुलिस द्वारा गलती से नेहा बोरा समझे जाने का मामला भी रिपोर्ट किया गया था। मल्लिकार्जुन खरगे भी मार्च में शामिल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी 12 अक्टूबर के मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान उनका Batman मास्क पहने दिखाई देने वाला दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा और विरोध प्रदर्शन के प्रतीकात्मक दृश्यों में शामिल हो गया। SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद विपक्ष और कुछ संबंधित समूहों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और इसका राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को अद्यतन करने का उद्देश्य मृत, डुप्लिकेट और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है। पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटने की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें दोबारा शामिल कराने का रास्ता उपलब्ध है। BJP ने आरोपों को बताया राजनीतिक भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बताया है। BJP का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनता के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रहा है। ‘ढाल’ वाला दृश्य बना चर्चा का विषय राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और नेहा बोरा का साथ चलते हुए वीडियो INDIA bloc के प्रदर्शन से जुड़ी प्रमुख चर्चाओं में शामिल हो गया है। हालांकि, इस दृश्य को ‘राहुल गांधी बने ढाल’ कहना मीडिया और सोशल मीडिया की व्याख्या है। वीडियो से अपने आप किसी विशिष्ट खतरे या सुरक्षा घटना की पुष्टि नहीं होती। स्रोत: Reuters / The Economic Times / The Times of India / Navbharat Times / The Indian Express / Loksatta जय राष्ट्र न्यूज़

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“मोदी-शाह, अपनी पुलिस को झंडे और डंडे का फर्क समझाओ!” EC मार्च के दौरान कांग्रेस का तीखा हमला

नई दिल्ली: Election Commission के खिलाफ INDIA bloc के मार्च के दौरान तिरंगे को लेकर पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इसी घटनाक्रम के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हमला बोलते हुए कहा—“मोदी-शाह, अपनी पुलिस को झंडे और डंडे का फर्क समझाओ!” पार्टी ने साथ ही कहा कि विपक्ष को “बल या छल” से नहीं रोका जा सकता। Election Commission की ओर जा रहा था मार्च INDIA bloc के सांसद संसद परिसर से Election Commission headquarters की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शनकारी SIR, voter list revision और Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज करा रहे थे। पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका Opposition MPs को Nirvachan Sadan पहुंचने से पहले barricades लगाकर रोक दिया गया। इसके बाद कई नेताओं और पुलिसकर्मियों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। तिरंगे को लेकर हुई नोकझोंक प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी barricade के पास तिरंगा लेकर नजर आए। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने डंडे से चोट लगने की आशंका जताते हुए उसे हटाने की बात कही। विपक्षी नेताओं ने जवाब दिया कि यह “डंडा नहीं, झंडा” है। कांग्रेस ने मोदी-शाह पर साधा निशाना इसके बाद कांग्रेस के official social media account से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। पार्टी ने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को अपनी पुलिस को “झंडे और डंडे का फर्क” समझाना चाहिए। “बल या छल से नहीं रोक पाएंगे” Congress ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि विपक्ष को “बल या छल” से नहीं रोका जा सकता। यह बयान Election Commission के खिलाफ चल रहे विरोध और पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में दिया गया। राहुल गांधी ने भी पुलिस से की बहस वायरल वीडियो में राहुल गांधी पुलिस अधिकारी से पूछते दिखे कि अगर उन्हें वहां बैठने की अनुमति नहीं है तो आखिर वे विरोध कहां करें। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस संविधान के प्रति जवाबदेह है और प्रदर्शन का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। प्रियंका गांधी भी हुईं मुखर प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौके पर पुलिस से बहस करती नजर आईं। Reports में यह लाइन उनके विरोध और कांग्रेस के social media messaging दोनों से जोड़कर सामने आई है। Akashvani Bhavan में हुआ धरना मार्च रोके जाने के बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी Akashvani Bhavan परिसर में चले गए। वहीं विपक्षी नेताओं ने कई घंटे तक धरना जारी रखा और Election Commission से मिलने की मांग दोहराई। कई विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए लंबे विरोध के बाद Delhi Police ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद देर शाम प्रदर्शन खत्म कराया गया। SIR विवाद बना मुख्य मुद्दा विपक्ष का आरोप है कि Special Intensive Revision के जरिए eligible voters के नाम electoral rolls से हटाए जा सकते हैं। Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और प्रक्रिया को voter lists की accuracy सुधारने से जोड़ता है। राजनीतिक बयानबाजी और तेज “झंडे और डंडे” वाली टिप्पणी के बाद कांग्रेस और BJP के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक विरोध पर रोक लगाने का मामला बता रहा है, जबकि BJP ने Congress पर constitutional institutions को बदनाम करने का आरोप लगाया है। source – Times Now Navbharat / Aaj Tak / Prabhat Khabar / The Daily Jagran जय राष्ट्र न्यूज़

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EC मार्च में हाई ड्रामा, आकाशवाणी भवन में धरने पर राहुल-प्रियंका; घंटों चला विपक्ष-पुलिस का टकराव

नई दिल्ली: Election Commission के खिलाफ INDIA bloc के मार्च के दौरान मंगलवार को राजधानी दिल्ली में हाई ड्रामा देखने को मिला। पुलिस ने विपक्षी सांसदों को Nirvachan Sadan की ओर बढ़ने से रोका तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अचानक पास स्थित Akashvani Bhavan परिसर में पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए। कई घंटे चले इस विरोध के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। Election Commission तक जाना था मार्च INDIA bloc ने Parliament से Election Commission headquarters तक मार्च का आह्वान किया था। विपक्षी दल Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और Special Intensive Revision यानी SIR को वापस लेने की मांग कर रहे थे। पुलिस ने रास्ते में रोका Central Delhi में भारी barricading और security deployment किया गया था। जब सांसद Election Commission की ओर बढ़े, तो पुलिस ने उन्हें Akashvani Bhavan के पास आगे जाने से रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लेना शुरू किया। राहुल-प्रियंका ने अचानक बदला रास्ता इसी दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने अचानक अपना रास्ता बदल दिया। रिपोर्टों के अनुसार दोनों Akashvani Bhavan के खुले gate से परिसर में प्रवेश कर गए, जिससे पुलिस और वहां मौजूद विपक्षी नेताओं में भी कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। पेड़ के नीचे शुरू हुआ धरना Akashvani Bhavan परिसर में पहुंचने के बाद राहुल और प्रियंका वहीं बैठ गए। बाद में KC Venugopal, Pawan Khera और अन्य Congress नेता भी उनके साथ धरने में शामिल हो गए। प्रदर्शन कई घंटे तक जारी रहा। आठ से नौ घंटे तक चला विरोध अलग-अलग reports में धरने की अवधि करीब आठ से नौ घंटे बताई गई है। इस दौरान Congress workers बाहर जमा होकर नारेबाजी करते रहे और अंदर मौजूद नेताओं ने Election Commission से मिलने की मांग दोहराई। राहुल गांधी ने लोकतंत्र बचाने की कही बात धरने के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि वह Election Commission और voter-list revision से जुड़े मुद्दों पर पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने BJP और Election Commission पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए और प्रदर्शन को लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ी लड़ाई बताया। EC बोला- formal meeting request नहीं मिली Election Commission ने कहा कि किसी राजनीतिक दल की ओर से formal appointment request नहीं मिली थी। EC officials ने यह भी कहा कि इतने बड़े delegation के अचानक मिलने की मांग को स्वीकार करना सामान्य प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। शाम को पुलिस ने खत्म कराया धरना लंबे समय तक चले sit-in के बाद दिल्ली पुलिस ने Akashvani Bhavan परिसर से विपक्षी नेताओं को हटाना शुरू किया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, KC Venugopal और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया। बाद में हिरासत में लिए गए नेताओं को छोड़ दिया गया। Barricade पर चढ़े राहुल गांधी मार्च के दौरान राहुल गांधी के police barricade पर चढ़ने का दृश्य भी चर्चा में रहा। उन्होंने वहां तिरंगा लहराया, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें नीचे उतारा। इस दौरान विपक्ष और पुलिस के बीच कई जगह धक्का-मुक्की और नारेबाजी हुई। SIR विवाद बना मुख्य मुद्दा विपक्ष का आरोप है कि Special Intensive Revision के जरिए eligible voters के नाम electoral rolls से हटाए जा सकते हैं। Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और कहता है कि revision प्रक्रिया voter lists को अधिक accurate बनाने के लिए की जा रही है। INDIA bloc और सरकार के बीच बढ़ा टकराव इस घटना के बाद Election Commission और विपक्ष के बीच चल रहा विवाद और गहरा गया है। जहां INDIA bloc CEC के इस्तीफे और SIR वापस लेने की मांग पर कायम है, वहीं BJP ने विपक्ष पर constitutional institutions को बदनाम करने का आरोप लगाया है। source – Reuters / The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प का दावा; DCP ऑफिस में जबरन घुसने का VIDEO वायरल?

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के धरने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तनाव से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी DCP ऑफिस में जबरन घुसने की कोशिश कर रहे थे, हालांकि उपलब्ध विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों से इस दावे की स्पष्ट पुष्टि नहीं होती। इतना जरूर सामने आया है कि बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस कार्यालय के बाहर जमा हुए, नारेबाजी हुई और DCP ऑफिस की एक दीवार के हिस्से को नुकसान पहुंचाए जाने की खबर है। यह पूरा घटनाक्रम छात्र साहिल लोचब को कथित pellet injuries के मामले में FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर हुए राहुल गांधी के धरने से जुड़ा है। राहुल गांधी क्यों पहुंचे थे DCP ऑफिस? लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 21 अगस्त 2026 को साहिल लोचब के साथ दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से मिलने पहुंचे थे। साहिल का आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए एक छात्र प्रदर्शन के दौरान उन्हें pellets लगे थे। राहुल गांधी ने मामले में अलग FIR दर्ज करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। राहुल गांधी पहले संबंधित पुलिस स्टेशन पहुंचे और बाद में Parliament Street Police Station परिसर में स्थित DCP ऑफिस में वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात की। बातचीत से समाधान नहीं निकलने के बाद उन्होंने वहीं धरना शुरू कर दिया। Priyanka Gandhi समेत कई कांग्रेस नेता पहुंचे राहुल गांधी के धरने की जानकारी सामने आने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता भी मौके पर पहुंचे। जयराम रमेश, कुमारी शैलजा और अन्य पार्टी नेताओं की मौजूदगी के बीच पुलिस कार्यालय के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ने लगी। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल और Rapid Action Force (RAF) के जवान भी तैनात किए गए थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तनाव धरने के दौरान पुलिस कार्यालय के बाहर मौजूद पार्टी कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की। NDTV की 22 अगस्त की वीडियो रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने DCP ऑफिस की दीवार के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाया। घटनास्थल पर कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनाव की स्थिति भी दिखाई दी। वहीं India Today की ग्राउंड रिपोर्ट में पूरे इलाके में बैरिकेडिंग, भारी पुलिस मौजूदगी और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के जमा होने का जिक्र किया गया है। क्या प्रदर्शनकारी जबरन DCP ऑफिस में घुसे? सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस को धक्का देते हुए DCP ऑफिस में जबरन प्रवेश किया। हालांकि अभी तक उपलब्ध प्रमुख मीडिया रिपोर्टों में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं द्वारा DCP ऑफिस के अंदर जबरन घुस जाने की स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई है। रिपोर्टों से यह जरूर पुष्ट होता है कि पुलिस कार्यालय के बाहर भीड़ जमा थी, नारेबाजी हुई, तनाव की स्थिति बनी और कार्यालय की दीवार के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाया गया। इसलिए वायरल वीडियो के साथ किए जा रहे “जबरन घुसने” के दावे को आधिकारिक पुष्टि मिलने तक सावधानी से देखा जाना चाहिए। क्या है Sahil Lochab Pellet Case? साहिल लोचब ने आरोप लगाया है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान उन्हें कई metal pellets लगे थे और उनकी आंख भी गंभीर रूप से प्रभावित हुई। उनकी शिकायत में इलाज से जुड़े दस्तावेज और शरीर से निकाले गए pellets की जांच कराने की भी मांग की गई। यह मामला राजनीतिक रूप से तब और बड़ा हो गया जब राहुल गांधी ने इसे पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों से जोड़ते हुए FIR दर्ज करने की मांग की। दिल्ली पुलिस की ओर से पहले pellet gun के इस्तेमाल के आरोपों को लेकर सवाल उठाए गए थे, जबकि पूरा घटनाक्रम पहले से जांच के दायरे में था। धरने के बाद Delhi Police ने दर्ज की FIR करीब छह घंटे चले धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने साहिल लोचब की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की। पुलिस के अनुसार केस Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 118 और 25 के तहत दर्ज किया गया है। ये प्रावधान खतरनाक साधनों से चोट पहुंचाने और जीवन अथवा व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित हैं। FIR दर्ज होने के बाद राहुल गांधी का धरना समाप्त हुआ। BJP और Congress आमने-सामने पूरे मामले ने राजनीतिक विवाद का रूप भी ले लिया है। कांग्रेस का आरोप है कि घायल छात्र को न्याय दिलाने के लिए लंबे समय तक FIR की मांग करनी पड़ी। वहीं BJP नेताओं ने राहुल गांधी पर मामले का राजनीतिकरण करने और कानून-व्यवस्था पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। NDTV के मुताबिक BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मामले को राजनीतिक तमाशा बनाने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस का कहना है कि पार्टी छात्र को न्याय दिलाने की मांग कर रही थी। फिलहाल छात्र को pellets कैसे लगे और इसके लिए कौन जिम्मेदार था, यह जांच का विषय है। इसी तरह सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के साथ किए जा रहे DCP ऑफिस में जबरन घुसने के दावे की भी स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में वायरल वीडियो को पूरे संदर्भ और जांच के अंतिम नतीजों के बिना निर्णायक सबूत मानना उचित नहीं होगा। स्रोत – एनडीटीवी, इंडिया टुडे, पीटीआई, द वीक जय राष्ट्र न्यूज़

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NEET मुद्दे पर कांग्रेस का ‘चलो PM हाउस’ प्रदर्शन, राहुल-प्रियंका समेत कई नेता हिरासत में; राजनीतिक विवाद तेज

नई दिल्ली: NEET परीक्षा से जुड़े विवाद और छात्रों की मांगों को लेकर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास की ओर ‘चलो PM हाउस’ मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रीय राजनीति में तीखी बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही है और संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा से बच रही है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने कहा है कि वह NEET से जुड़े सभी मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है और आवश्यक सुधारों पर काम किया जा रहा है। क्या है पूरा मामला? कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकालते हुए NEET परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितताओं और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। सुरक्षा कारणों से पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। कांग्रेस की मांगें कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि— सरकार का जवाब केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया। सरकार का कहना है कि NEET से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए वह तैयार है और परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए सुधार किए जा रहे हैं। राजनीतिक प्रतिक्रिया इस घटनाक्रम के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की, जबकि भाजपा ने प्रदर्शन को राजनीतिक कदम बताया। आगे क्या? NEET मुद्दे पर संसद में बहस होने की संभावना बनी हुई है। छात्रों के आंदोलन, विपक्ष के विरोध और सरकार के रुख को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है। निष्कर्ष NEET विवाद को लेकर कांग्रेस के ‘चलो PM हाउस’ प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। एक ओर विपक्ष छात्रों के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि वह संसद में चर्चा और आवश्यक सुधारों के लिए तैयार है। Source: NDTV, Reuters, Times of India एवं आधिकारिक राजनीतिक बयान। जय राष्ट्र न्यूज़

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