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Rashtriya Janata Dal: इन 5 नेताओं ने बनाई पार्टी की पहचान

बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal {RJD}) लंबे समय से एक मजबूत और प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित है। इस पार्टी की नींव सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों और वंचित समुदायों की आवाज़ उठाने के उद्देश्य से रखी गई थी। पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Former Chief Minister Lalu Prasad Yadav)ने जिस राजनीतिक विचारधारा और रणनीति से इस दल को खड़ा किया, वह आज भी राज्य की सियासत में अहम भूमिका निभा रही है। RJD सुप्रीमों और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव  लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) का नाम बिहार की राजनीति में एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक साहसिक नेतृत्व का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने 1990 के दशक में बिहार की राजनीति को पूरी तरह बदलकर रख दिया। पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को सत्ता की मुख्यधारा में लाकर उन्होंने एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार किया। भले ही लालू प्रसाद यादव कानूनी मामलों के चलते सक्रिय राजनीति से कुछ दूर हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ और विचारधारा आज भी RJD की रीढ़ बनी हुई है। तेजस्वी यादव: युवा नेतृत्व की नई पहचान लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Former Deputy Chief Minister Tejaswi Yadav)ने अब पार्टी की कमान संभाल रखी है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election) में तेजस्वी ने आरजेडी (RJD) को सबसे बड़ी पार्टी बनाकर यह साबित कर दिया कि वे राज्य की जनता, खासकर युवाओं और वंचित वर्गों के बीच लोकप्रिय हैं। आगामी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) के लिए भी पार्टी ने तेजस्वी को अपना चेहरा घोषित कर दिया है। उनका फोकस रोजगार (Employment), शिक्षा (Education) और स्वास्थ्य (Health) जैसे मुद्दों पर है, जो युवाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। पांच प्रमुख नेता जो बना रहे हैं RJD की रणनीति मजबूत RJD की मजबूती सिर्फ लालू या तेजस्वी तक सीमित नहीं है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैं जो नीति निर्माण, संगठन संचालन और चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनमें से पांच प्रमुख नेता निम्नलिखित हैं: स्व. रघुवंश प्रसाद सिंह – भले ही वे अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी की नीतिगत संरचना में जो योगदान दिया, उसके लिए उन्होंने हमेशा याद किया जाएगा। उनके विचार आज भी पार्टी की रणनीति में झलकते हैं। अब्दुल बारी सिद्दीकी – RJD के वरिष्ठ मुस्लिम चेहरे के रूप में सिद्दीकी न केवल पार्टी के अंदरूनी निर्णयों में शामिल रहते हैं, बल्कि राज्य में मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote Bank) को भी पार्टी के पक्ष में संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिवानंद तिवारी – लंबे समय तक लालू यादव के करीबी रहे शिवानंद तिवारी ने पार्टी को वैचारिक मजबूती दी है। वे मीडिया और सार्वजनिक बहसों में पार्टी का मुखर पक्ष रखते हैं। जगदानंद सिंह – वर्तमान में RJD के प्रदेश अध्यक्ष, जगदानंद सिंह संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने का कार्य कर रहे हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव पार्टी के लिए एक बड़ी ताकत है। मनोज झा – राज्यसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में मनोज झा ने RJD की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर प्रखर और विचारशील पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी वक्तृत्व शैली और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर पकड़ उन्हें पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाती है। सामाजिक समीकरणों में RJD की पकड़ बिहार में जातीय और सामाजिक समीकरण राजनीति को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। RJD का परंपरागत समर्थन यादव, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के बीच रहा है। पार्टी ने समय के साथ महादलित और अति पिछड़ा वर्गों को भी अपने पाले में लाने की कोशिश की है। इसके अलावा महिलाओं और युवाओं को लेकर भी पार्टी नई रणनीतियाँ बना रही है, जिसमें डिजिटल माध्यम, युवाओं के लिए रोजगार योजनाएँ और शिक्षा पर ज़ोर शामिल हैं। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? 2025 विधानसभा चुनाव: तैयारी ज़ोरों पर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) को लेकर RJD ने पहले से ही अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी ने हाल ही में अपना कैंपेन सॉन्ग भी लॉन्च किया है, जिसमें तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को मुख्य चेहरा बताया गया है। यह सॉन्ग रोजगार, बदलाव और न्याय के मुद्दों को प्रमुखता देता है। पार्टी की जमीनी पकड़, मजबूत संगठन और नेतृत्व के अनुभव ने उसे एक बार फिर से सत्ता के करीब ला दिया है। गठबंधन की संभावनाओं को लेकर भी बातचीत चल रही है, जिसमें कांग्रेस और वाम दलों के साथ तालमेल की कोशिशें हो रही हैं। RJD न सिर्फ बिहार की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक और राजनीतिक चेतना को प्रभावित करने वाली विचारधारा भी है। लालू यादव से लेकर तेजस्वी यादव तक, और अब्दुल बारी सिद्दीकी से लेकर मनोज झा तक, पार्टी एक संतुलित मिश्रण है अनुभव और युवा ऊर्जा का। 2025 के चुनाव में RJD का प्रदर्शन यह तय करेगा कि बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की यह धारा कितनी प्रभावी बनी रहती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Tejaswi Yadav #RJD #RashtriyaJanataDal #BiharPolitics #IndianPolitics #RJDLoyalists

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RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise: इस बार आरजेडी 130 से 135 सीटों पर लड़ सकती है चुनाव, कांग्रेस को करना पड़ सकता है समझौता

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। समय नजदीक आता देख दोनों गठबंधन चुनाव की तैयारियों में में जुट गए हैं। जेडीयू की अगुवाई वाली एनडीए सरकार अपने कार्यों के प्रमोशन में व्यस्त है तो वहीं तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन में बैठकों का लम्बा सिलसिला जारी है। इस बीच खबर यह है कि 4 बैठकों के बाद सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तकरीबन फाइनल हो गया (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) है। खबर के मुताबिक तेजस्वी यादव ने सहनी और पशुपति पारस के लिए कांग्रेस और वामदलों के बीच लगभग सहमति बना ली है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक जो फॉर्मूले सेट हुआ है उसके मुताबिक 2020 की तुलना में कांग्रेस और आरजेडी इस बार कम सीटों पर चुनाव लड़ेंगी तो वहीं सीपीआई माले को पिछली बार की तुलना में इस बार अधिक सीटें मिलेंगी।  पिछले चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) लड़ी थी चुनाव  गौरतलब हो कि 12 जून को तेजस्वी यादव के घर इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर चौथी बैठक हुई (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) थी। जिसमें तेजस्वी ने सभी पार्टियों से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के नाम और सीटों का ब्योरा मांगा था। इस दौरान कांग्रेस ने अपनी सीटों की लिस्ट आरजेडी को दे दी है। कांग्रेस ने 2020 में जीती हुई 19 सीटों के अलावा 39 उन सीटों के नाम भी दिए हैं जिस पर वह पिछले साल दूसरे नंबर पर रही। इसके अलावा वामदलों की कुछ सीटों पर भी कांग्रेस ने चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की है। बता दें कि पिछले चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इस बार उसकी रणनीति इतनी ही सीटों पर चुनाव लड़ने की है। पिछली बार की हार की सफाई देते हुए कांग्रेस ने कहा कि वह इसलिए चुनाव हारे थे क्योंकि उन्हें अपनी परंपरागत सीटें सहयोगी दलों को देनी पड़ी थी। ऐसे में उम्मीद यह कि संभवतः इस बार वामदल कांग्रेस के लिए वे सीटें छोड़ दें। कांग्रेस को 55-60 सीटें दे सकते (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) हैं तेजस्वी यादव कांग्रेस के अलावा मुकेश सहनी 60 सीटों की मांग कर रहे हैं तो वहीं सीपीआई माले ने 40 सीटों की डिमांड रखी है। बड़ी बात यह कि सीपीआई और सीपीएम अभी लिस्ट नहीं सौंपी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पशुपति पारस, सीपीआई माले और सहनी को किसके हिस्से की सीटें दी जाएँगी? पार्टी के करीबी सूत्रों के मुताबिक तेजस्वी कांग्रेस को इस बार मनपसंद सीटें दे सकते हैं। सहनी और माले को अधिक सीटें दी जा सके इसलिए तेजस्वी 70 सींटे तो नहीं लेकिन कांग्रेस को 55-60 सीटें दे सकते (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) हैं। रही बात आरजेडी की तो आरजेडी 130 से 135 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। बता दें कि पिछली बार आरजेडी 144 सीटों पर चुनाव लड़ी थी।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र सरकार का तुगलकी फरमान, स्कूलों में हिन्दी की अनिवार्यता की खत्म, अब होगी तीसरी भाषा सीटों का बंटवारा जीत के आधार पर करने का फैसला किया (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) है तेजस्वी यादव ने  इसके अलावा महत्वपूर्ण बात यह कि तेजस्वी यादव ने इस बार सीटों का बंटवारा जीत के आधार पर करने का फैसला किया (RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise) है। सभी दल जीत की संभावना के आधार पर साथ बैठेंगे और फिर सीटों का बंटवारा करेंगे। तेजस्वी यादव की नई रणनीति के मुताबिक अधिक मार्जिन से हार वाली सीटों पर उम्मीदवार बदला जा सकता है। फ़िलहाल अभी सींटों के बंटवारे को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। उम्मीद है जल्द ही पार्टी सीटों के बंटवारे की घोषणा करेगी और सहयोगी दलों को सम्मानजनक सीटें देगी।  Latest News in Hindi Today Hindi RJD to Contest 130–135 Seats, Congress May Compromise #RJD #Congress #BiharElections2025 #SeatSharing #TejashwiYadav #Mahagathbandhan #PoliticsNews

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AIMIM's Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections

AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections: RJD-कांग्रेस को बिहार चुनाव से पहले AIMIM की धमकी, महागठबंधन में शामिल करें वरना…! 

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने इस साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस (Congress) के महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। एआईएमआईएम (AIMIM) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने इसकी जानकारी (AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections)देते हुए कहा कि, ‘उनकी पार्टी बिहार चुनाव में वोटों का बिखराव रोकना चाहती है। इसीलिए उनकी पार्टी ने  आरजेडी (RJD) के दूसरी पंक्ति के नेताओं के माध्यम से नेता तेजस्वी यादव को गठबंधन का प्रस्ताव भेजा है। अब फैसला तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी को करना है।’ अख्तरुल ईमान ने मीडिया से इस बातचीत में चेतावनी देते हुए कहा, अगर महागठबंधन उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करता, तो उनकी पार्टी थर्ड फ्रंट बनाने के लिए जल्द ही अन्य छोटे दलों से बातचीत करेगी। इस दौरान अख्तरुल ईमान ने आरजेडी (RJD) पर ‘पीठ में खंजर घोंपने’ का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि साल 2020 के विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम (AIMIM) राज्य की सीमांचल क्षेत्र में मौजूद अमौर, जोकीहाट, कोचाधामन, बैसी और बहादुरगंज सीट को जीता था। लेकिन चुनाव के दो साल बाद आरजेडी ने उनके 5 में से 4 विधायकों को तोड़ कर अपने पार्टी में मिला लिया। इस धोखबाजी को पार्टी भूली नहीं है।  2020 विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने किया था शानदार प्रदर्शन बता दें कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने (AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections) शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 सीटें जीत ली थी। एआईएमआईएम को यह सफलता सीमांचल के मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में मिली थी। इसके बाद से ही एआईएमआईएम को बिहार की सियासत में एक उभरती ताकत के तौर पर देखा गया। एआईएमआईएम ने सीधे तौर पर आरजेडी के परंपरागत मुस्लिम-यादव वोट बैंक में सेंध लगाई थी। इसलिए आरजेडी को सबसे ज्यादा परेशानी हुई और उसने एआईएमआईएम विधायकों को तोड़ने की मुहीम शुरू कर दी। आरजेडी ने दो साल बाद ही जून 2022 में एआईएमआईएम के 5 में से 4 विधायकों को तोड़कर अपने पार्टी में शामिल कर लिया।  इसे भी पढ़ें:- PMCH में दलित लड़की की मौत पर राहुल गांधी ने बिहार की डबल इंजन सरकार पर साधा निशाना, कही यह बात एआईएमआईएम के उभरने से आरजेडी और कांग्रेस को दीर्घकालिक तौर पर नुकसान होगा इस बार विधानसभा चुनाव में अगर एआईएमआईएम और आरजेडी अलग-अलग लड़ती हैं, तो इसका सीधा फायदा भाजपा को (AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections) होगा। इसलिए एआईएमआईएम ने चुनाव से पहले ही महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव भेज दिया। हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव पर आरजेडी और कांग्रेस (Congress) की तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। बताया जा रहा है कि विपक्षी महागठबंधन के अंदर सीट बंटवारे को लेकर पहले सही तनाव है, ऐसे में अगर एआईएमआईएम को भी गठबंधन में शामिल कर लिया गया, तो सीट बंटवारे का मुद्दा और भी जटिल हो जाएगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एआईएमआईएम को महागठबंधन में शामिल किया जाता है तो इससे फौरी तौर पर मुस्लिम वोटों को एकजुट करने में फायदा मिल सकता है, लेकिन एआईएमआईएम के उभरने से आरजेडी और कांग्रेस को दीर्घकालिक तौर पर नुकसान होगा। दरअसल, आरजेडी और कांग्रेस (Congress) के कोर वोट बैंक मुस्लिम मतदाता है और एआईएमआईएम का वोट बैंक भी यही है। ऐसे में एआईएमआईएम राज्य में जितनी मजबूत होगी, उतनी ही आरजेडी और कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाएगी। ऐसे में महागठबंधन बिहार के अंदर अभी एआईएमआईएम से दूरी बनाकर ही रखना चाहता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news AIMIM’s Warning to RJD-Congress Before Bihar Elections BiharElections2025 #AIMIM #RJD #Congress #Mahagathbandhan #Owaisi #PoliticalNews #IndiaPolitics

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Lalu Yadav expels son

Lalu Expels Son from Party: इस वजह से लालू ने अपने बड़े बेटे को निकाला पार्टी से, तेजस्वी यादव ने कही यह बात

अक्सर अपने बड़बोलेपन की वजह से अक्सर विवादों में रहने वाले राष्ट्रिय जनता दल के मुखिया लालू प्रसाद यादव के बड़े लाल इन दिनों सुर्ख़ियों में बने हुए हैं।  राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी और परिवार दोनों से दूर करने की घोषणा की (Lalu Expels Son from Party) है। दरअसल, एक दिन पहले शनिवार को तेज प्रताप यादव के सोशल मीडिया अकाउंट का कथित पोस्ट वायरल हुआ था। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस पोस्ट में दावा किया गया था कि यह पोस्ट तेज प्रताप यादव ने किया हैं। उक्त पोस्ट में उन्हें एक युवती के साथ देखा गया था। इसमें लिखा गया था, “मैं तेज प्रताप यादव और मेरे साथ इस तस्वीर में जो दिख रही हैं, उनका नाम अनुष्का यादव है। हम दोनों पिछले 12 सालों से एक-दूसरे को जानते हैं और प्यार भी करते हैं। हम लोग पिछले 12 साल से एक रिलेशनशिप में रह रहे हैं।” हालांकि, इस पोस्ट से जुड़े स्क्रीनशॉट के वायरल होने के कुछ घंटे बाद तेज प्रताप यादव की तरफ से सफाई भी आई। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि “मेरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को हैक एवं मेरे तस्वीरों को गलत तरीके से एडिट कर मुझे और मेरे परिवार वालों को परेशान और बदनाम किया जा रहा है, मैं अपने शुभचिंतकों और फॉलोअर्स से अपील करता हूं कि वे सतर्क रहें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।” हम ऐसी चीजों को पसंद नहीं करते हैं और न बर्दाश्त हम कर सकते (Lalu Expels Son from Party) हैं- तेजस्वी यादव खैर, इस बीच तेज प्रताप यादव के पार्टी से निष्कासित करने को लेकर जब तेजस्वी यादव से पूछा गया (Lalu Expels Son from Party) तो जवाब में उन्होंने कहा कि “ऐसी चीजें को वो अनदेखा नहीं कर सकते हैं। बर्दास्त भी नहीं कर सकते हैं।” तेजस्वी यादव ने अपनी बात रखते हुए कहा कि “एक बात स्पष्ट है, जहां तक मेरी बात है, हमें ये सब चीजें न तो अच्छा लगती हैं, न बर्दाश्त करते हैं। दूसरी बात हम अपना काम कर रहे हैं, बिहार के प्रति समर्पित हैं और जनता के दुख-सुख में भाग ले रहे हैं। जनता के मुद्दे को उठा रहे हैं। हम नेता विरोधी दल हैं। जहां तक मेरे बड़े भाई की बात है। राजनीतिक जीवन में, निजी जीवन भी अलग होता है, तो निजी जीवन के फैसले और निर्णय, क्योंकि वो बालिग हैं, बड़े हैं, उनको अधिकार है। वो अपना निर्णय, क्या उनका सही होगा, क्या नुकसान होगा, ये अपना निर्णय वो खुद लें और राष्ट्रीय अध्यक्ष जी दल के नेता हैं, उन्होंने अपने ट्वीट के माध्यम से स्पष्ट कर दिया है, जो उनकी भावनाएं थीं। हम ऐसी चीजों को पसंद नहीं करते हैं और न बर्दाश्त हम कर सकते हैं।” तेजप्रताप यादव को गैरजिम्मेदाराना (Lalu Expels Son from Party) व्यवहार के कारण छह साल के लिए पार्टी से किया निष्कासित  तो वहीं लालू प्रसाद ने रविवार को अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को गैरजिम्मेदाराना (Lalu Expels Son from Party) व्यवहार के कारण छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। यही नहीं, उनके साथ सभी पारिवारिक संबंध भी तोड़ दिए हैं। अपने फैसले पर लालू प्रसाद ने कहा कि “ज्येष्ठ पुत्र की गतिविधि, लोक आचरण तथा गैर जिम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के अनुरूप नहीं है। उपरोक्त परिस्थितियों के चलते उसे पार्टी और परिवार से दूर करता हूं। अब से पार्टी और परिवार में उसकी किसी भी प्रकार की कोई भूमिका नहीं रहेगी। उसे पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया जाता है। अपने निजी जीवन का भला-बुरा और गुण-दोष देखने में तेजप्रताप स्वयं सक्षम हैं। उससे जो भी लोग संबंध रखेंगे वो स्वविवेक से निर्णय लें। लोकजीवन में लोकलाज का सदैव हिमायती रहा हूं। परिवार के आज्ञाकारी सदस्यों ने सावर्जनिक जीवन में इसी विचार को अंगीकार कर अनुसरण किया है।” इसे भी पढ़ें:-लालू की पार्टी आरजेडी के नेता शंभू गुप्ता 2 करोड़ रुपये की अफीम के साथ गिरफ्तार तेज प्रताप यादव और अनुष्का यादव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर (Lalu Expels Son from Party) हो रही हैं वायरल  बता दें कि तेज प्रताप यादव, लालू यादव के बड़े बेटे हैं। हाल के दिनों में वो अपनी दूसरी (Lalu Expels Son from Party) शादी और प्रेम संबंधों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। अभी एक दिन पहले ही तेज प्रताप यादव के फेसबुक पेज से नए रिश्ते के बारे में जानकारी दी गई थी। हालांकि तेज प्रताप ने इससे साफ़ इनकार कर दिया है। यह तो ठीक, लेकिन जिस तरह से तेज प्रताप यादव और अनुष्का यादव की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, उससे तो ऐसा लगता है कि लालू परिवार सकते में आ गया है। कारण यही जो, लालू यादव ने पार्टी और परिवार दोनों से अपने बड़े बेटे को दूर कर दिया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Lalu Expels Son from Party #LaluYadav #TejashwiYadav #TejPratapYadav #RJD #BiharPolitics #LaluExpelsSon #PoliticalDrama

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