Strongest village in India: कैसे एक आदमी ने बदली किस्मत, हर घर में रहते हैं पहलवान और बाउंसर्स, यहां है भारत का सबसे मज़बूत गांव
बाउंसरों को देखते ही हमारे मन में एक ही ख्याल आता है कि काश! हमारी बॉडी ऐसी होती। बाउंसर का काम होता है वीआईपी अथवा रईस लोगों को सुरक्षा प्रदान करना। दखने और सुनने में यह काम जितना आसान लगता है, दरअसल उतना है नहीं। क्योंकि आज के इस प्रदूषित वातावरण में खुद को फिट एंड फाइन रखना आसान नहीं होता। खैर, क्या आप जानते हैं कि दिल्ली के नाईट क्लबों में सबसे अधिक बाउंसर कहाँ से आते हैं? शायद आप जानते हो? यदि आप नहीं जानते हैं, तो आपको बता दें कि दिल्ली की भागम-भाग भरी जिंदगी से कुछ दूरी पर स्थित असोला और फतेहपुर बेरी नामक एक जुड़वां गांव हैं, जहां के लोग आज भी अपनी पुश्तैनी परंपरा को बनाये रखें हैं। इस गाँव में एक शख्स ऐसा भी है जिसने पूरे गाँव के युवाओं को कमाई का एक ऐसा जरिया बता दिया है जिसके चलते सभी लोग अपने आपको फिट (Strongest village in India) रखने में जुट गए हैं। शारीरिक शक्ति को आजीविका में बदलकर की जा सकती (Strongest village in India) है अच्छी कमाई दरअसल, गाँव के एक स्थनीय पहलवान ने पूरे गाँव की किस्मत संवार दी। बता दें कि विजय तंवर भारत की ओलंपिक कुश्ती टीम में जगह बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने जी तोड़ मेहनत भी लेकिन वो सफल नहीं हो पाए। कद काठी बेजोड़ थी ही, सो इस असफलता से निराश होने के बजाय उन्होंने बतौर बाउंसर काम करना शुरू कर दिया। उनकी देखा देखी गाँव अन्य लोग भी उनसे प्रेरित होकर अपने शरीर को संवारने में जुट गए। उनका मकसद एकदम क्लियर था। शारीरिक शक्ति को आजीविका में बदलकर अच्छी कमाई की जा सकती (Strongest village in India) है। इस हेतु गांवों के युवा स्थानीय अखाड़ों में कठोर ट्रेनिंग सेशन्स में शामिल होने लगे। जूनून ऐसा कि वे हर दिन सैकड़ों सिट-अप, पुश-अप और कुश्ती अभ्यास करने लगे। देखते-ही-देखते लोग अनुशासित जीवन जीने लगे। यही उनकी अनुशासित जीवन शैली एक अनोखे पेशे में बदल गई। आलम यह है कि गाँव के अधिकतर युवा बाउंसर बन अपना जीवनयापन करने लगे हैं। इसके साथ ही वो युवाओं को भी इस हेतु प्रेरित करने लगे हैं। बता दें कि इस गाँव के कुछ लोग विदेश में सुरक्षा सेवाओं में करियर बनाना चाहते हैं तो कुछ अपने पारंपरिक पेशे कुश्ती में ही अपना करियर बनाना चाहते हैं। इस गाँव को भारत का सबसे मज़बूत गांव (Strongest village in India) के रूप में भी जाना जाता है कहने की जरूरत नहीं, प्रदूषण भरे इस माहौल में शारीरिक रूप से फिट रहना या फिर अपने आप को मेंटेन करना आसान नहीं है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि इस गाँव के लोग इतने फिट कैसे रह लेते हैं? उनकी फिटनेस का राज जानने पर पता चला कि गाँव का हर युवा शराब और तंबाकू से कोसो दूर रहता है। इसके अलावा प्रोटीन युक्त आहार लेता है और जमकर वर्जिश करता है। अपने शरीर को हृष्ट-पुष्ट बनाए रखने के लिए नियमित रूप से अनुशासन का पालन करता है। गांव का पहला जिम खोलने वाले अंकुर तंवर ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए साक्षात्कार में कहा कि “तंवर परिवार में योद्धा का एक तत्व है। हमने मुस्लिम आक्रमणकारियों से लड़ाई लड़ी। हमने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। पिछले 20 सालों में बहुत कुछ बदल गया है।” खैर, बढ़ते नाइटलाइफ़ दृश्य में बाउंसरों की मांग बढ़ती जा रही है। आपको जानकर हैरत होगी कि दिल्ली अधिकतर बाउंसर असोला-फतेहपुर गाँव के ही होते हैं। इस गाँव को बाउंसरों का गढ़ कहा जाता है। इसके अलावा इस गाँव को भारत का सबसे मज़बूत गांव (Strongest village in India) के रूप में भी जाना जाता है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हम बार में काम करेंगे बता दें कि सीएनएन से हुई बातचीत में विजय तंवर ने बताया कि “मैं इस गांव का पहला बाउंसर (Strongest village in India) था। फिर सभी ने मेरी राह पर चलना शुरू कर दिया। अब 300 से ज़्यादा पहलवान नई दिल्ली के क्लबों और बार में बाउंसर के तौर पर काम करते हैं।” गौरवान्वित होते हुए उन्होंने आगे कहा कि “जैसा कि वे कहते हैं, स्वास्थ्य ही धन है। हम स्वस्थ हैं, लेकिन हम अच्छा पैसा भी कमा रहे हैं। बच्चों को अच्छे स्कूलों में भेज पा रहे हैं, अच्छा खा पा रहे हैं। जीवन में और क्या ही चाहिए?” अपनी बातचीत में उन्होंने आगे कहा कि “हमने कभी नहीं सोचा था कि हम बार में काम करेंगे।” Latest News in Hindi Today Hindi Strongest village in India #StrongestVillage #IndianWrestlers #BouncerVillage #RuralPower #HaryanaHeroes #IndianStrength #VillageOfChampions #DesiPower #BodybuildingIndia #WrestlingCulture

